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अवसाद (डिप्रेशन)

छोटी उम्र में ही बच्चों में बढ़ रही है ये परेशानी
अवसाद (डिप्रेशन)
आज के समय में टीनएजर्स किस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं, इसे जानने के लिए प्यू रिसर्च सेंटर ने एक सर्वे किया है। इस सर्वे में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। सर्वे के मुताबिक आजकल टीनएजर्स के बीच डिप्रेशन-एंजायटी और बुलिंग सबसे बड़ी समस्या है। प्यू रिसर्च सेंटर ने 13-17 साल के 920 लड़के और लड़कियों का साक्षात्कार करके वार्षिक सर्वे जारी किया है। सर्वे में और कई तरह की परेशानियों को बताया गया है। आइए जानते हैं....



70 फीसदी टीनएजर्स के लिए डिप्रेशन-एंग्जायटी और 55 फीसदी के लिए बुलिंग दूसरा बड़ा मुद्दा है। सिर्फ बुलिंग से ही करीब 90 फीसदी टीनएजर्स परेशान रहते हैं।




सर्वे के मुताबिक 61 फीसदी बच्चों पर एग्जाम में अच्छे ग्रेड लाने का दबाव है। वहीं 29 फीसदी के लिए अच्छा दिखना और 21 फीसदी के लिए खेलों में बेहतर प्रदर्शन करना मजबूरी है।



सर्वे में जारी आकड़ों के अनुसार लड़कों के मुकाबले लड़कियां ज्यादा नर्वस महसूस करती हैं। वहीं कम आय वाले परिवारों की टीनएजर्स लड़कियां कम उम्र में प्रेग्नेंसी जैसे मामलों से भी जूझ रही हैं।



सर्वे के मुताबकि 51 फीसदी टीनएजर ड्रग और 45 फीसदी अल्कोहल को बड़ी समस्या मानते हैं। वहीं दबाव में आकर 6 फीसदी ड्रग और 4 फीसदी टीनएजर अल्कोहल पीते हैं। स्टडी का एक लक्ष्य यह भी जानना था कि कैसे पेरेंट्स की बच्चों से उम्मीदें उनके लिए दबाव को बढ़ा रही हैं।
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सर्वे रिपोर्ट के लेखक सिमोन शैरी और मार्टिन एम स्मिथ के मुताबिक, बच्चों के लिए पेरेंट्स और समाज के दबाव को कम करने की जरूरत है। उनको परफेक्ट बनाने की कोशिश दबाव को बढ़ा रही है।


विश्व में 30 करोड़ लोग अवसाद से ग्रस्त: विश्व स्वास्थ्य संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ताजा अनुमानों के मुताबिक, दुनियाभर में 30 करोड़ से अधिक लोग अवसाद से ग्रस्त हैं. संयुक्त राष्ट्र ने विश्व स्वास्थ्य दिवस से पहले गुरुवार को इन अनुमानों को जारी करते हुए कहा कि ये आंकड़ें सभी देशों के लिए एक चेतावनी है कि वे मानसिक स्वास्थ्य के बारे में दोबारा सोचें और तुरंत इसका समाधान निकालें.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अवसाद से ग्रस्त लोगों की संख्या 2005 से 2015 के दौरान 18 फीसदी से अधिक बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, अवसाद आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने का एक महत्वपूर्ण कारक है जिससे हर साल हजारों की संख्या में लोगों की मौत होती है.

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