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हार्मोनल असंतुलन के लक्षण


हार्मोनल असंतुलन के लक्षण और इसे संतुलित करने के तरीके

हार्मोनल असंतुलन सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। कई महिलाओं इस बात की जानकारी तब तक नहीं होती, जब तक मुंहासे या अचानक वजन बढ़ाने जैसे लक्षण दिखाई न दें। अगर इसका समय पर इसका इलाज नहीं होता तो उन लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है जिनसे निपटना मुश्किल होता है। यदि आप किसी भी हार्मोनल असंतुलन से पीड़ित हैं और कुछ तरीकों से अपने हार्मोन के स्तर को ट्रैक पर वापस ला सकती हैं।
क्या है हार्मोनल असंतुलन ?

हार्मोन शरीर एक केमिकल मेसेंजर हैं जो मेटाबॉलिक और प्रजनन जैसी कई प्रमुख प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार हैं। ये एंडोक्राइन ग्रंथियों द्वारा उत्पादित होते हैं। तीन प्रमुख श्रेणियां थायराइड, एड्रेनल और सेक्स हार्मोन हैं, और ये सभी एक साथ काम करते हैं। जब इन ग्रंथियों में से एक बहुत अधिक या बहुत कम हार्मोन पैदा होता है, तो शरीर में एक हार्मोनल असंतुलन की ओर जाता है क्योंकि अन्य ग्रंथियों को पिच करना पड़ता है, जो उन पर तनाव डालता है और इससे अधिक असंतुलन हो सकता है। – पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ाने के तरीके
हार्मोनल असंतुलन के लक्षण

अगर हम हार्मोनल असंतुलन को लक्षणों की बात करे तों थकान, कब्ज या दस्त, अचानक वजन घटाना, कमजोर मांसपेशियों, प्यास लगना और लगातार पेशाब, जोड़ों में दर्द, पतले और भंगुर बाल, डिप्रेशन, चिंता, पसीना आना और धुंधली दृष्टि शामिल है।
हार्मोनल असंतुलन के कारण

पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर में खनिज, विटामिन सी और बी विटामिन की कमी, मधुमेह, हाइपोथायरायडिज्म, हाइपरथाइरॉयडिज़्म, हायपोगोनडिस्म, हार्मोन थेरेपी, कुछ दवाएं, तनाव, चोट या आघात, कैंसर उपचार, गर्भावस्था, स्तनपान, गर्भनिरोधक गोलियां और रजोनिवृत्ति शामिल है।
हार्मोन को संतुलित करने के तरीके
हार्मोनल असंतुलन को दूर करने के लिए एलोपैथी के अलावा हर्बल और प्राकृतिक उपचार भी उपलब्ध हैं। कई महिलाएं आयुर्वेद, एक्यूपंचर और अरोमा थेरेपी का हेल्प भी लेती हैं। यानी लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव हार्मोन्स के संतुलित में काफी मददगार हो सकता है। – मानव विकास हार्मोन (एचजीएच) क्या है
हार्मोन को संतुलित के लिए इन चीजों पर दीजिए ध्यान

1. ओमेगा-3 और ओमेगा-6 युक्त फैटी एसिड हार्मोन संतुलन में सहायक हैं। यह तत्व सूरजमुखी के बीजों, अंडों, सूखे मेवों और चिकन में पाया जाता है।

2. संतुलित, कम वसायुक्त और अधिक रेशेदार भोजन का सेवन करें। वसायुक्त भोजन से अतिरिक्त कैलोरी मिलती है जिससे वजन भी बढ़ता है और वजन का बढ़ना कई बीमारियों से जुड़ा हुआ है। वजन बढ़ने के अलावा इससे श्वास की समस्या और अस्थमा जैसे रोग भी होते हैं।

3. हार्मोन को संतुलित करना है तो शरीर में पानी की कमी न होने दें। सिरदर्द और माइग्रेन अक्सर निर्जलीकरण या डिहाइड्रेशन के कारण होता हैं, इससे राहत पाने के लिए, बहुत सारा पानी पीजिए।
4. तनाव से बचें, सक्रिय रहें तथा 7-8 घंटे की नींद लें।

5. चाय, काफी, शराब के सेवन से बचें और मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ियों को गंभीरता से लें।

6. मेडिटेशन और डीप रिलेक्सेशन द्वारा अपने मन और शरीर को शांत रखने की कोशिश करें।

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