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लाइफ में जोश


धीरे-धीरे कपड़े उतार कर कैसे करें अपने पार्टनर को उत्तेजित?

क्या आपके पति ने कभी इस बात की शिकायत की है कि अब उन्‍हें बेडरूम में बोरियत होती है? अगर हां, तो स्ट्रिप टीज़ का नुस्खा अपनायें। अगर आपको लगता है कि इससे भी वो बोर हो चुके हैं, तो आपको इसमें भी कुछ मसाला डालने की जरूरत है और थोड़ा रंग भरने की जरूरत है।
धीरे-धीरे कपड़े उतार कर कैसे अपने पुरुष पार्टनर को कैसे उत्तेजित करें यह हम आपको यहां बताने जा रहे हैं। और हां यह बात दिमाग से निकाल दीजिये कि ऐसा करने के लिये आपको सुपरमॉडल जैसा फिगर चाहिये। आप भी बेडरूम के अंदर सुपरमॉडल बन सकती हैं। और हां यह कोई पोल डांस नहीं है कि आप कपड़े उतार कर अपने पति के सामने नाचने लगेंगी तो वो उत्तेजित हो उठेंगे।




डिम लाइट में रोमांस

बोर हो चुके पति को उत्तेजित करने के लिये सबसे पहले कुछ तैयारियां करनी होंगी। सबसे पहले आप बेडरूम को अच्‍छी तरह सजा दें। लाइट को थोड़ा डिम रखें और म्‍यूजिक प्‍ले कर दें। क्‍योंकि हलकी रौशनी में आपका सौंदर्य निखर कर आयेगा।
बेडरूम में जाते ही
अब जैसे ही आपके पति कमरे में आयें, आप सबसे पहले उनकी बाहों में लिपट जायें। और फिर उन्‍हें बेड पर बिठा दें। यहां पर आपको डांसर बनने की जरूरत नहीं। अब धीरे-धीरे पति के सीने पर हाथ फेरें और उनके हाथों को अपने अंगों पर स्‍पर्श करें।
टॉप कैसे उतारें
स्‍पर्श के बाद आप थोड़ी दूरी बनायें और सबसे पहले अपना टॉप/कुर्ता/ब्लाउज़ उतारें। टॉप में अगर बटन हों, तो अपने पति से नहीं खुलवायें। ध्‍यान रहे, टॉप कभी एकदम से मत उतारें। धीरे से पहले नीचे का पोर्शन दिखायें और फिर थोड़ा ऊपर और फिर पूरी तरह उतार दें।


ब्रा का हुक

ऐसे मौकों पर ऐसी ब्रा पहनें, जिसमें पीछे हुक हो और टॉप उतारने के बाद कभी हुक को स्‍वयं मत खोलें। यह काम अपने पति से करने को कहें। क्‍योंकि जब डिम रौशनी में आपकी पीठ पर आपके पार्टनर की नजर पड़ेगी तब वो उत्तेजित हो उठेंगे। हुक खुलते ही पति की बाहों में सिमटने के बजाये फिर से थोड़ी दूरी बनायें। क्‍योंकि थोड़ी-थोड़ी पीने में ही असली मजा है।
ब लोअर की बारी

अब बारी है लोअर/पैजामा/साड़ी, उतारने की। इसमें आप अपने पति का सहयोग मत लें। इन कपड़ों को उतारते वक्‍त पति को यह अहसास दिलायें कि आप अपना सौंदर्य उन्‍हें दिखाना चाहती हैं। ध्‍यान रहे, अब पैंटी आप खुद मत उतारियेगा।
फिर से जायें करीब
अब पैंटी की बारी आने पर फिर से अपने पार्टनर के करीब जायें। यहां पर न तो अपनी पैंटी खुद उतारें और न ही पार्टनर से उतारने को कहें। निश्चित रूप से आपके पति अबतक इतने उत्तेजित हो चुके होंगे कि आपको कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
महिलाओं के बूब्स को लेकर ये 5 बातें सोचते हैं पुरुष
पुरुष महिलाओं के बूब्स के पीछे पागल होते हैं और उन्हें लेकर उनकी कुछ फैंटेसी भी होती है। हर पुरुष महिलों के बूब्स देखना चाहता है और उन्हें छूना चाहता है।

लेकिन हर व्यक्ति के लिए यह संभव नहीं है, यही कारण है कि अधिकतर पुरुष ब्रेस्ट के बारे में सोचते हैं। चलिए जानते हैं पुरुष महिलाओं के ब्रेस्ट के बारे में क्या-क्या सोचते हैं।

1) बाउंसिंग बूब्स 
पुरुषों को बाउंसिंग बूब्स देखना पसंद है। पुरुष जॉगिंग करती महिला के बारे में सोचते हैं क्योंकि उन्हें जॉगिंग के दौरान उनके उछलते बूब्स को देखना पसंद होता है।


2) बारिश 
भारी बारिश, गीले कपड़े, सफेद टॉप, खूबसूरत महिलाएं; यह एक और पुरुष कल्पना है। पुरुष अपने सपनों की महिलाओं को गीले कपड़ों में सोचते हैं क्योंकि उन्हें गीले कपड़े में ब्रेस्ट की शेप से देखने का मौका मिलेगा।


3) स्पोर्ट्स देखना 
स्कर्ट्स और टॉप पहनकर टेनिस खेलने वाली महिला पुरुषों को पसंद होती है। इतना ही नहीं खेल के दौरान उनके उछलते बूब्स को देखना पुरुषों की पहली पसंद है।


4) दबाना 
कई पुरुष अपनी पसंद की लड़की के बूब्स को दबाना की चाहत रखते हैं। जब पुरुष आम तौर पर दिन का सपना देखते हैं, तो वे स्तन को देखने और छूने का पहला सपना देखते हैं।


5) क्लाइमेक्स 
पुरुष सेक्स के दौरान अपनी पसंद की लड़की से बूब्स के बीच अपना पेनिस रखना चाहते हैं और यहीं पर क्लाइमेक्स तक पहुंचना चाहते हैं।

पुरुषों को ही क्यों अच्छा लगता है सुबह के वक्त सेक्स करना?
अगर आपने कभी ध्‍यान दें तो पायेंगे कि रात के वक्त महिलाएं यौन संबंधों के लिये उत्तेजित रहती हैं, जबकि पुरुष सुबह उठते ही सेक्स करने के लिये लालायित रहते हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि पुरुषों के मन में हर दम सेक्स घूमता रहता है, तो आप गलत हैं। असल में इसके पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण है। तो चलिये बात करते हैं सुबह के वक्‍त स्थापित किये जाने वाले यौन संबंधों की।


रात के समय पुरुषों का यौन क्रियाओं की ओर जल्‍दी आकर्षित नहीं होने का मुख्‍य कारण दिन भर की थकान होती है। कई बार तो महिला पार्टनर के पूरी तरह रोमांटिक होने के बावजूद पुरुष पार्टनर का मूड नहीं बन पाता है और बिस्तर पर गिरते ही वो सो जाता है। लेकिन सुबह का नजारा इसके एकदम उलट होता है। अकसर पुरुष सुबह उठते ही अपनी महिला पार्टनर के साथ लिपट जाते हैं। कई बार बिस्तर पर लेटे-लेटे ही वह उत्तेजित हो उठते हैं। लेकिन कई बार ऐसे क्षणों में उनकी महिला पार्टनर उनका साथ नहीं निभा पाती हैं।

एक अध्‍ययन के अनुसार पुरुषों में टेस्‍टोस्‍टीरोन हार्मोन का स्तर सुबह के समय बहुत अधिक होता है। यह वो हार्मोन होता है जो व्‍यक्ति को सेक्स के प्रति उत्तेजित करता है। यही कारण है कि पुरुष सुबह के वक्त  उत्तेजित हो उठते हैं।

कब बढ़ता है टेस्‍टोस्‍टीरोन का लेवल
पुरुषों में इस हार्मोन का स्‍तर सोते समय ही काफी बढ़ जाता है। और सुबह होते होते यह चरम पर होता है। महिलाओं के शरीर में भी टेस्‍टोस्‍टीरोन का स्राव होता है, लेकिन बेहद कम मात्रा में। और हां यह अपने उच्चतम स्‍तर पर केवल रात के समय होता है। टेस्‍टोस्‍टीरोन का स्‍तर निर्भर करता है पुरुषों के सोने की अवधि पर। पुरुष जितनी अधिक देर तक सोयेंगे उनके अंदर इस हार्मोन का प्रभाव उतना अधिक होगा।

स्‍ट्रेस हार्मोन का प्रभाव

अधिकांश महिलाओं को शिकायत रहती है कि उनके पति रात को बिस्तर पर आते ही सो जाते हैं। इस वजह से कई बार उनकी रात खराब हो जाती है। झगड़े भी होते हैं और रात को जल्‍दी सो जाने की वजह से मानसिक तनाव और टकराव भी होता है। सच पूछिए तो पुरुष जान बूझ कर कभी तुरंत नहीं सो जाते हैं। असल में उन पर हावी होता है स्‍ट्रेस हार्मोन। इस हार्मोन का नाम है कोर्टिसोल हार्मोन। जैसे-जैसे दिन ढलता है यह हार्मोन पुरुषों और महिलाओं दोनों के टेस्‍टोस्‍टीरोन हार्मोन पर हावी होने लगता है।
रात को अकसर तनाव
जो महिलाएं घर पर रहती हैं, उनमें उसका स्तर इतना अधिक नहीं होता, लेकिन जो पुरुष एवं महिलाएं काम पर जाते हैं, उनमें स्‍ट्रेस हार्मोन का स्‍तर शाम होते-होते काफी ऊपर चला जाता है। और इसका प्रभाव रात को बिस्‍तर पर तनाव के रूप में दिखायी देता है।
दोपहर को भी सक्रिय होता है सेक्स हार्मोन
शायद आपको मालूम नहीं होगा कि पुरुषों में दोपहर के समय भी सेक्‍स हार्मोन यानी टेस्‍टोस्‍टीरोन सक्रिय रहता है। बीच-बीच में इसका लेवल ऊपर नीचे होता रहता है। इसका लेवल बढ़ते ही पुरुषों के लिंग में रक्त संचार बढ़ जाता है, जिसकी वजह से उसमें अचानक कड़ापन आ जाता है।
क्‍या करें महिलाएं
यदि आप चाहती हैं कि रात को आपके पति आपके साथ अच्‍छे से सौन संबंध स्‍थापित करें, तो उनके घर वापस आते ही उन्‍हें आराम दें। अगर हो सकें तो आधा-एक घंटे की नींद लेने को कहें, ताकि नींद में उनका टेस्‍टोस्‍टीरोन का लेवल वापस बढ़ जाये और स्‍ट्रेस हार्मोन का असर कम हो जाये। उसके बाद जब आप बेड पर जायें, तब उन्‍हें जगाकर मीठी-मीठी बातें करें। इस तरह से निश्चित रूप से आपके यौन जीवन में कई सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देंगे, अन्यथा आप रात को जल्‍दी सो जाने के लिये अपने पति को दोष देती रहेंगी, जबकि असली कारण तो हार्मोन है, जिसका नियंत्रण आपके पति के हाथ में नहीं।



सिक्ल सेल एनीमिया से बढ़ती है नपुंसकता
नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) के मुताबिक, पूरे विश्व की जनसंख्या का पांच प्रतिशत हिस्सा हेमोग्लोबिन अनियमितता संबंधी रोगों, जैसे-सिक्ल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की चपेट में है। सिक्ल सेल एनीमिया एक अनुवांशिक बीमारी है।








इस बीमारी की वजह से शरीर में स्वस्थ लाल रक्तकणों की बेहद कमी हो जाती है। यह लाल रक्तकण ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा शरीर के बाकी हिस्सों में ले जाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

सिक्ल सेल एनीमिया के कारण शरीर के भीतरी अंगों में ऑक्सीजन की कमी से मरीज को गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन, नारकोसिस और क्रॉनिक पेन सिंड्रोम हो सकता है। इस रोग से न सिर्फ रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है, बल्कि यह जनन क्षमता पर भी प्रभाव डालता है।

नई दिल्ली के पटेलनगर स्थित एडवांस फर्टीलिटी एंड गायनिकॉलोजिकल सेंटर की क्लिनिकल डायरेक्टर और आईवीएफ एंड इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. कावेरी बनर्जी ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में लाल रक्तकण लचकीले और गोल होते हैं तथा यह लहू धमनियों में बहुत आसानी से चलते हैं।

उन्होंने बताया कि सिक्ल सेल एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में यह कण सख्त, चिपचिपे और हंसिया, दरांती या नवचंद्र के आकार के होते हैं। यह अनियमित आकार के रक्तकण लहू की धमनियों में फंस सकते हैं, जिससे लहू और ऑक्सीजन का बहाव कम हो सकता है या रुक सकता है। इससे कई तरीकों से जनन क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
इस रोग से संबंधित शोध में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया है। वैसे, यह समस्या दोनों में ही बराबर पाई जाती है। सिक्ल सेल ऐनीमिया से पौरुष शक्ति का विकास देर से होता है। यौन परिवक्वता औसतन डेढ़ से दो साल की देरी से आती है, जबकि आम युवा प्रकृतिक रूप से विकसित होते हैं।

डॉ. कावेरी के अनुसार, सिक्ल सेल ऐनीमिया से पीड़ित पुरुषों में टेस्टोस्टरॉन के स्तर को बढ़ाने के लिए जिंक स्पलीमेनटेशन मददगार साबित होता है। टेस्टोस्टरॉन एनडैकनोएट इंजेक्शन और क्लोमीफीन पुरुषों में यौन इच्छा बढ़ाने और मर्दाना कमजोरी का इलाज करने में कारगर पाया गया है।

उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों के इलाज में हायड्रोजीयोरिया थेरेपी को प्राथमिकता दी जाने लगी है। इस बीमारी में यह बात खास ध्यान देने वाली है कि महिलाओं में फर्टीलिटी प्रिसजर्वेशन बहुत अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि उन्हें गर्भधारण से जुड़ी हुई मुश्किलें भी आ सकती हैं और अनियमित जनन का खतरा भी हो सकता है।

डॉक्टर ने बताया किप्रिइम्पलांटेशन जेनेटिक डॉयग्नोसिस जेनेटिक्ल स्तर पर ठीक तरीके से बच्चा पैदा करने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

उन्होंने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित 24 प्रतिशत पुरुषों के अंडकोश काफी छोटे आकार के होते हैं और उनमें टेस्टॉस्टरॉन की सघनता काफी कम होती है। सिक्ल सेल ऐनीमिया से पीड़ित पुरुषों की वीर्य जांच में 90 प्रतिशत मरीजों में यह अनियमितता पाई गई है। इसमें शुक्राणु की सघनता या संख्या में कमी, सक्रियता में कमी और असमान्य आकार जैसी समस्याएं शामिल होती हैं।

डॉ.  ने बताया कि इस रोग के कारण महिलाओं में कौमार्य और यौन परिपक्वता में देरी से गर्भधारण में देरी हो सकती है। युवतियों में पहली महावारी देरी से आती है और जब यह ब्लीडिंग के रूप में होने लगती है तो यह आम तरीके से होने लगती है। इसमें चिंता की एक ही बात होती है कि महावारी में सिक्लिंग का दर्द भी शामिल हो जाता है। डीपो मेडरॉक्सीप्रोगैस्टरॉन एसिटेट डीएमपीए इंजेक्शन या प्रॉगेस्टरॉन-ओनली गोली से इस पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है।

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों में अनचाहे गर्भधारण से बचने का तनाव बना रहता है। इसलिए अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए बैरियर या डीपो प्रोगैस्टरॉन गोली की सलाह दी जाती है। यह मेडिकल पेशेवरों का फर्ज है कि वह सिक्ल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों से विचार-विमर्श करें, ताकि स्वस्थ संतान पैदा हो सके।
नहीं रखा इन बातों का ध्यान तो कंडोम लगाने के बावजूद हो सकती है प्रेग्नेंसी
 सेक्स के दौरान कंडोम के इस्तेमाल की दो अहम वजहें होती हैं। इसमें एक होती है अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकना और दूसरा होता है बीमारियों से बचना लेकिन हर बार कंडोम पहनने के बावजूद इस मकसद को पूरा करे ये जरूरी नहीं।





कंडोम 90 फीसदी सुरक्षित तो 10 फीसदी असुरक्षित
कंडोम यौन रोगों को रोकने और अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने में 90 फीसदी तक कामयाब माने जाते हैं लेकिन 10 फीसदी चान्स इनके फेल होने के होते हैं। इसके साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखना खासकर महिला पार्टनर को जरूरी होता है।
फोरप्ले के दौरान भी होते हैं स्पर्म ट्रांसफर

फोरप्ले के दौरान महिला जब कंडोम पहनने से पहले पेनिस को छूती है तो उस दौरान भी स्पर्म हाथ को लग जाते हैं। महिला उन्ही हाथों से साथी को कंडो पहनाती है तो कंडोम के बाहर की तरफ वो स्पर्म लग जाते हैं। अब जब पेनिस वजाइना में जाता है तो ये स्पर्म भी भीतर चले जाते हैं।

कंडोम का फट जाना
कई बार जब सेक्स के बाद पेनिस वजाइना से निकलता है तो देखा जाता है कि कंडोम फट गया है। इस तरह के मामलों में इंफेक्शन के चांस रहते हैं। इसके साथ-साथ कुछ महिलाओं को कंडोम से एलर्जी होती है, खासतौर से तब जब डॉटेड कंडोम का यूज किया जाए। दरअसल ये औरत के संवेदनशील हिस्से को नुकसान करते हैं, तो वो आनंद की जगह परेशानी का सामना करती हैं। इस तरह से कंडोम के इस्तेमाल में ये ध्यान रखना जरूरी है।



हस्तमैथुन करें पर हद से ज्यादा नहीं...
अक्सर हम सुनते आए हैं कि हस्तमैथुन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे आपकी शारीरिकि, मानसिक अवस्था पर नकारात्मक असर पड़ता है। दरअसल यह अपनी कामुकता पर काबू पाने का एक कॉमन तरीका है। आंकड़े बताते हैं 95 पर्सेंट पुरुष और 89 पर्सेंट महिलाएं डेली बेसिस पर मैस्टरबेशन करती हैं। आइए जानें कि इससे आख‍िर क्या होता है और क्या नहीं-




सेक्सुअल एक्सप्रेशन

हेल्थ रिपोर्ट की स्डटी करें तो पता चलता है कि मैस्टरबेशन सेक्सुअली टेंशन को कम करने का सबसे अच्छा और हेल्दी तरीका है। हेल्थ प्रफेशनल्स के मुताबिक अपने प्राइवेट पार्ट को टच करना बेहद नैचरल है।

आनंद
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का चरम आनंद ज्यादा कॉम्पलेक्स होता है। पुरुषों को सामान्यतः स्पर्म निकलते वक्त आनंद आता है। अधूरी उत्तेजना और गलत सेक्स टेक्नीक महिलाओं के ऑर्गेजम को कम करता है।

मैस्टरबेशन बहुत ज्यादा
औसत देखा जाए तो हफ्ते में तीन बार ठीक है।

नैचरल है
मैस्टरबेशन पूरी तरह से नैचरल प्रक्रिया है। इससे प्रजनन क्षमता पर किसी भी तरह का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है। यहां तक कि जानवरों में बिल्ली, कुत्ते और बंदर भी मैस्टरबेशन करते हैं।

टेंशन खत्म
मैस्टरबेशन के दौरान धड़कन बढ़ जाती है। ब्लड का फ्लो भी बढ़ता है और मसल में सख्ती आती है। इन सारी शारीरिक प्रक्रियाओं के कारण तनाव से मुक्ति मिलती है। जैसे कि आप सेक्स के बाद राहत और तनाव से मुक्त महसूस करते हैं।

मैस्टरबेशन पूरी तरह से सेफ
अपनी कामुकता को काबू में रखने के लिए मैस्टरबेशन पूरी तरह से सेफ प्रक्रिया है।

सेक्सुअली डिसफंक्शन पर काबू
यदि पुरुष या महिला सेक्सुअली डिसफंक्शन से पीड़ित हैं तो मैस्टरबेशन से कई चीजें समझ सकते हैं। यदि पुरुषों में सेक्स के दौरान वक्त से पहल स्पर्म गिरने की समस्या है तो मैस्टरबेशन को लर्निंट टूल की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। आप इसमें सीख सकते हैं कि खुद पर कंट्रोल कैसे किया जाता है।

मैस्टरबेशन से रात में अच्छी नींद
जब ऑक्सिटॉक्सिन और एंडोर्फिन हॉर्मोन्स रिलीज हो जाते हैं, तब आप फील गुड जोन में होते हैं। मैस्टरबेशन के दौरान इन हॉर्मोन्स के निकल जाने के बाद आप बेफिक्र होकर बिना किसी बेचैनी के सोते हैं। अच्छी नींद अच्छी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। बहुत ही थकाऊ दिन के बाद रात में अच्छी नींद के लिए हस्तमैथुन बेहद सुखदायी तरकीब है।


अलग-अलग सेक्‍स पोजिशन अपनाने से होते हैं ये 7 फायदे

सेक्‍स दो लोगों के बीच, शारीरिक सम्‍बंध होते हैं जो हर दैनिक कार्य की तरह ही होता है और उसकी जरूरत भी उतनी ही होती है। लेकिन अगर इसमें कुछ-कुछ समय पर नयापन न आएं तो जिंदगी में सेक्‍स लाइफ बोझिल हो जाती है और कोई टेस्‍ट नहीं रह जाता है।

इसके लिए सबसे अच्‍छा तरीका, पार्टनर के साथ कई तरीके की सेक्‍स पोजिशन को इस्‍तेमाल करना होता है। अगर आप लम्‍बे समय तक एक ही स्थिति में सेक्‍स करते रहेंगे तो न आपको संतुष्टि होगी और न ही आपके पार्टनर को मज़ा आएगा। इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप अपने पार्टनर के साथ इस बारे में बात करें।

ऐसा करने से आप जब उस पोजि़शन को ट्राई करेंगे तो आपके पार्टनर भी आपके साथ कॉपरेट करेगी/करेगा। आप चाहें तो उस पोजिशन का तस्‍वीर या वीडियो भी उन्‍हें दिखा सकते हैं ताकि उन्‍हें उस बारे में अंदाजा हो जाएं और उनके मन से डर निकल जाएं।
आपको बता दें कि कई दम्‍पत्ति सिर्फ और सिर्फ मानसिक डर की वजह से सेक्‍स की पोजिशन चेंज नहीं करते हैं और एक ही तरह की सेक्‍स लाइफ को हमेशा जीते रहते हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि कई सारी सेक्‍स पोजिशन को अपनाने के क्‍या 7 फायदे होते हैं:

1. विज़ुअल परसेप्‍सन का बदलना-

जब आप सेक्‍स को हटकर करते हैं तो पोजिशन बदलते ही आपका तरीका और पार्टनर को देखने का ढंग भी बदल जाता है। आपको किसी और एंगल से पार्टनर की बॉडी दिखती है और उसका आपको कॉपरेट करने का तरीका भी दिखाई देता है। कई बार आप जब एक कम्‍फर्ट ज़ोन को ब्रेक करते हैं तो दिक्‍कत होती है लेकिन सेक्‍स के मामले में ये बात बिल्‍कुल उलट है। बल्कि इसमें आप अपने कम्‍फर्ट ज़ोन केा ब्रेक करने के बाद और ज्‍यादा खुशी महसूस करते हैं और ज्‍यादा ऊर्जावान भी।

2. अलग भावना:

सेक्‍स के हर एंगल में पेनिस, वेजिना में एक अलग तरह से एंटर होता है और उसके अंदर जाने का एहसास भी अलग होता है जिससे पार्टनर को अच्‍छा महसूस होता है। वैसे तो हर महिला को रिश्‍ते बनाते हुए अलग एहसास होता है लेकिन हर पुरूष को एक को एक ही तरह का एहसास होता है इसलिए एंगल बदलने से महिलाओं से ज्‍यादा पुरूषों को नयापन मिलता है। साथ ही सेक्‍स की डिफरेंट पोजिशन से लव इंटेन्‍शिटी भी बढ़ती है और वेजिना भी फ्लेसिबल हो जाता है।
3. यौन असंगति को दूर करने में:

कई मामलों में ऐसा देखने को मिलता है कि पुरूष का लिंग छोटा होता है और महिला संतुष्‍ट नहीं हो पाती है, या फिर लिंग बहुत बड़ा होता है जिससे महिला को असहनीय दर्द या असहजता महसूस होती है। ऐसी स्थितियों में सेक्‍स को अलग-अलग तरीकों और एंगल से करें, जिससे सम्‍बंध बनाने में हमेशा ताजगी का एहसास होगा और दोनों को संतुष्टि मिलेगी, साथ ही किसी के मन में ग्‍लानि भी नहीं रहेगी।
4. सेंसटिव ज़ोन्‍स की उत्‍तेजना:

सेक्‍स के दौरान सेंसटिव ज़ोन को टच करना ही सबसे बड़ा प्‍लेगेम होता है। अगर आप अपने पार्टनर के सही सेंसटिव ज़ोन को जान जाएं तो आपकी मुठ्ठी में उनका प्‍यार पाना होगा। अलग-अलग पोजि़शन में सेक्‍स करने से सेंसटिव ज़ोन के बारे में पता चलता है और आपको मालूम चल जाता है कि आपके पार्टनर को सबसे अच्‍छा कहां लगता है, कहां स्‍ट्रोक दें कि उसे ऑर्गेज्‍़म हो जाएं।
5. औरत को मिलेगा हर पल कुछ ख़ास:

अलग एंगल से सेक्‍स करने से महिलाएं कभी भी सेक्‍स से बोर नहीं होंगी, उन्‍हें हर बार ऑर्गेज्‍़म होगा और वो अपने मेल पार्टनर से पूरी तरह संतुष्‍ट हो जाएंगी। आपको बता दें कि महिलाएं हर बार सेक्‍स करने के दौरान संभोग का सुख प्राप्‍त नहीं करती हैं, एेसा तभी होता है जब पेनिस उनके वेजिना में इस तरह टच करता है कि वो चरम आनंद प्राप्‍त करने लगें। लगातार एक ही स्थिति में सेक्‍स करने से वेजिना, पेनिस के हिसाब से ही सेट हो जाता है और बस वो सिर्फ एक प्रक्रिया मात्र रह जाती है जिसमें कोई सुख या आनंद नहीं रह जाता है। ऐसे में बेहतर होगा कि डिफरेंट मेथड से सेक्‍स करें, ताकि रिश्‍तों में हमेशा नयापन बना रहें।
6. इमोशन का अलग होना:

आपको जानकर आश्‍चर्य होगा लेकिन अगर आप सेक्‍स की पोजिशन बदलते हैं तो आपके इमोशन भी उसकी हिसाब से बदल जाते हैं। वाइल्‍ड सेक्‍स के शौकीन लोगों को डॉग पोजिशन ट्राई करना चाहिए, वहीं अगर आप हमेशा हिटिंग और हैवी स्‍ट्रोकिंग करते हैं तो एक बार थोड़ा फोरप्‍ले करते हुए सेक्‍स करें।



7. सम्‍पूर्ण संभोग सुख को पाना:

कई पोजिशन में सेक्‍स करके महिला और पुरूष, दोनों ही सम्‍पूर्ण संभोग सुख को प्राप्‍त कर सकते हैं। ऐसा होने की वजह, पूरे शरीर का इस प्रक्रिया में शामिल होना होता है, क्‍योंकि अब आपके लिए यह कोई पुरानी और रोजमर्रा काम नहीं बल्कि कुछ नया करना होता है। ऐसे में पेनिस और वेजिना के साथ-साथ दिमाग को भी टास्‍क मिल जाता है। इसलिए, सेक्‍स करने के बाद बहुत ही अच्‍छी भावनाएं आती हैं जो सारा दिन बेहतर बना देती हैं।

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