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डिलीवरी के बाद टाँके और उनकी देखभाल संबंधी ज़रूरी बातें


डिलीवरी के बाद टाँके और उनकी देखभाल संबंधी ज़रूरी बातें 
(Delivery ke baad tako ki dekhbhal sambandhi zaruri bate)

डिलीवरी के ज़रिए गर्भावस्था के सफ़र का अंत होता है, लेकिन इस दौरान गर्भवती को बहुत ज्यादा दर्द झेलना पड़ता है। वैसे तो बच्चे के जन्म के लिए माँ की योनि व गुदा के आसपास की त्वचा व मांसपेशियां काफी लचीली हो जाती हैं, लेकिन डिलीवरी के दौरान ज्यादा खिंचाव होने से माँ की योनि में या उसके आसपास टाँके लगाने पड़ सकते हैं। इस ब्लॉग में हम आपको प्रसव के समय लगने वाले टाँके व उनकी उचित देखभाल की जानकारी दे रहे हैं।

नॉर्मल डिलीवरी के बाद टाँके क्यों लगते हैं? 
(Normal delivery ke baad taake kyun lagaye jate hai)

नॉर्मल डिलीवरी के समय शिशु योनिमार्ग से बाहर निकलता है और कुछ विशेष स्थितियों में पेरिनियम (योनि व गुदा के बीच की जगह) की त्वचा व मांसपेशियां बहुत ज्यादा खिंच जाती हैं। ऐसा होने पर पेरिनियम की त्वचा व पेशियां फट सकती हैं और वहां टाँके लगाने की ज़रूरत पड़ सकती है। इसके अलावा डिलीवरी के समय निम्न स्थितियों में टाँके लगाए जाते हैं -
आपके शिशु के जन्म के लिए योनि में उपकरण डालने पड़े हों।
डॉक्टर ने डिलीवरी के समय आपके पेरिनियम क्षेत्र में चीरा (episiotomy in hindi) लगाया हो।

नॉर्मल डिलीवरी के दौरान डॉक्टर योनि में चीरा क्यों लगाते हैं? 
(Normal delivery ke time doctor yoni me chira kyun lagate hai)
बच्चे के जन्म के दौरान योनि व गुदा की मांसपेशियां (perineum in hindi) फटना बेहद आम है और यह लगभग 90 प्रतिशत महिलाओं में होता है। अगर आपकी डिलीवरी के दौरान डॉक्टर्स को यह महसूस हो, कि आपके पेरिनियम में गंभीर चोट लग सकती है, तो वे आपकी योनि में चीरा लगाने का फैसला करते हैं। प्रसव के दौरान निम्न स्थितियों में डॉक्टर आपकी योनि में चीरा लगा सकते हैं -
शिशु का शरीर योनिमार्ग में फंसने पर।
प्रसव के दौरान शिशु की तबियत बिगड़ने लगे और उसे तुरंत बाहर निकलने की ज़रूरत होने पर।
आपकी प्रसव पीड़ा (labour pain in hindi) ज्यादा लंबी चलने पर।
प्रसव के दौरान गर्भवती के थकने व पुश ना कर पाने पर।
गर्भवती को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी जैसे दिल की बीमारी आदि होने पर।

पेरिनियम में घाव होने पर टाँके लगाने की ज़रूरत कब पड़ती है? 
(Perineum me ghav hone par taake kab lagte hai)
आमतौर पर डिलीवरी के दौरान योनि की त्वचा या मांसपेशियां फटने की समस्या पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं में ज्यादा होती है। पेरिनियम के घाव को चार भागों में बांटा गया है और घाव के प्रकार अनुसार ही डिलीवरी के बाद टाँके लगाए जाते हैं।


फर्स्ट डिग्री घाव - इस तरह की खरोंचें व घाव बहुत सामान्य होते हैं, और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। यह घाव केवल पेरिनियम की त्वचा व योनि के मुख तक ही सीमित होता है, और इसमें टाँके लगाने की ज़रूरत नहीं होती।


सैकेंड डिग्री घाव - कई बार बच्चे का दबाव पड़ने से पेरिनियम की त्वचा अंदर उत्तक तक फट जाती है। इस तरह के घाव में त्वचा में टाँके लगाए जाते हैं और ये करीब दो से तीन हफ़्तों में ठीक हो जाते हैं।


थर्ड डिग्री घाव - प्रसव के समय बच्चे का आकार ज्यादा बड़ा हो तो पेरिनियम में गंभीर घाव हो जाता है। यह घाव पेरिनियम उत्तक और गुदा के पास की पेशियों तक गहरा हो सकता है। इस घाव में टाँके लगाना बहुत ज़रूरी होता है और इसे पूरी तरह ठीक होने में करीब एक माह का समय लग सकता है। अगर टाँके ना लगाए जाएं, तो इस घाव से गुदा अनियंत्रण (अचानक गुदा से मल बाहर निकल जाना) की समस्या हो सकती है।


फोर्थ डिग्री घाव - यह एक बेहद गंभीर घाव होता है, जो मलाशय तक गहरा हो सकता है। इसमें टाँके लगाने के लिए गर्भवती का एक छोटा ऑपरेशन करना पड़ सकता है, इसे पूरी तरह से ठीक होने में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लग सकता है। अगर इसमें टाँके ना लगाए जाएं, तो गर्भवती महिला को गंभीर - जानलेवा संक्रमण हो सकता है।

डिलीवरी के दौरान लगे टांकों में कौनसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए? 
(Delivery ke baad lage tako me kaunse lakshan dikhne par doctor ki salah leni chahiye)

अगर डिलीवरी के बाद आपको शरीर में टांकों वाली जगह पर नीचे बताए गए लक्षण नज़र आते हैं, तो यह आपके टांकों में संक्रमण का संकेत हो सकते हैं -
टाँके की जगह पर सूजन व त्वचा लाल होना।
टांकों में से मवाद (पस) निकलना।
घाव में लगातार कई दिनों तक दर्द होना।
टांकों की जगह से या योनि से अजीब बदबू आना।
तेज बुखार होना।
पेशाब करते समय बहुत तेज़ जलन होना।
घाव में संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और इस बारे में सलाह लें, ताकि समय रहते आपकी परेशानी का इलाज किया जा सके। इसके अलावा अच्छी देखभाल के बावजूद भी कभी कभी टांकों में कुछ समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए डिलीवरी के बाद शरीर में निम्न लक्षण नजर आने पर आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी जाती है -
गुदा व मूत्रमार्ग की पेशियों पर नियंत्रण कम होना।
टाँकों से खून निकलना।
योनि से थक्के युक्त खून आना।
पेट के निचले हिस्से में बहुत तेज़ दर्द होना।
आपको किसी अन्य तरह की चिंता सता रही हो।
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डिलीवरी के बाद टांकों को संक्रमण से कैसे बचाएं? 
(Delivery ke baad tako ko infection se kaise safe rakhe)
घाव को साफ रखें और डॉक्टर की सलाह लेकर दिन में कम से कम एक बार एंटीसेप्टिक साबुन से जरूर नहाएं।
डिलीवरी के बाद होने वाले रक्तस्राव (postpartum bleeding in hindi) के लिए उपयोग किये जाने वाले पैड समय समय पर (हर तीन चार घण्टे में) बदलती रहें, क्योंकि इनसे घाव में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
जब भी मलत्याग करें तो टांकों वाली जगह को आगे से पीछे की ओर हाथ ले जाते हुए गुनगुने पानी से अच्छी तरह साफ करें। इससे संक्रमण होने की आशंका कम हो जाती है।
टांकों वाली जगह पसीना इकट्ठा ना होने दें, क्योंकि पसीने में मौजूद बैक्टीरिया व अन्य कीटाणुओं से टांकों में संक्रमण हो सकता है। अगर आपको टाँगों के बीच में पसीना आ रहा है, तो वहां एक साफ नरम सूती कपड़ा रखें, इससे पसीना टांकों के पास जमा नहीं होगा।

डिलीवरी के बाद टाँके जल्दी भरने के लिए क्या करें? 
(Delivery ke baad take tanke jaldi bharne ke liye kya kare)

शरीर की उचित साफ सफाई करने से घाव में संक्रमण होने का खतरा कम हो जाता है और साथ ही यह घाव भरने में भी सहायक है। इसके अलावा और भी कई चीजें घाव जल्दी भरने में सहायक होती हैं, हम नीचे आपको डिलीवरी के बाद घाव भरने में सहायक कुछ टिप्स बता रहे हैं -

दिन में कम से कम दो बार घाव को हवा लगाएं। सभी कपड़े उतार कर बैड या सोफे पर 10 मिनट के लिए पैर हल्के खोलकर लेटें। बिस्तर को खराब होने से बचाने के लिए अपने कूल्हों के नीचे साफ तौलिया रख सकती हैं।


टांकों पर दबाव पड़ने से उन्हें ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए टांकों को जल्दी ठीक करने के लिए डिलीवरी के बाद दो हफ़्तों तक ज्यादा देर तक लगातार बैठी ना रहें, जब भी समय मिले लेट जाएं।


आपके शिशु से ज्यादा भारी कुछ भी चीज उठाने से आपके टांकों पर दबाव पड़ सकता है और उन्हें ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए डिलीवरी के बाद कम से कम छह हफ़्तों तक भारी वज़न ना उठाएं।


घाव को पसीने से बचाने के लिए ढीलेढाले कपड़े पहनें, इससे घाव को हवा लगेगी और वह जल्दी ठीक होगा।


डिलीवरी के बाद कब्ज होने पर आपके टाँके ठीक होने में बहुत ज्यादा परेशानी हो सकती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में (8-10 गिलास) पानी पीएं और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज आदि खाएं। इससे आपको कब्ज की समस्या नहीं होगी और शौच करते समय टांकों पर ज्यादा जोर नहीं पड़ेगा।


टाँके लगने के एक से दो हफ्ते बाद पैल्विक एक्सरसाइज करना शुरू कर दें। इससे आपके घाव भरने में मदद मिलेगी और बिना मर्जी के अचानक मल या मूत्र बाहर निकलने की समस्या से राहत मिलती है।


समय समय पर घाव को देखती रहें, इसके लिये आईने की मदद ले सकती हैं। जैसी ही घाव में संक्रमण का कोई लक्षण नजर आए तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

डिलीवरी के बाद टांकों में दर्द कम करने के लिए क्या करें? 
(Delivery ke baad tako me dard kam karne ke liye kya kare)

पेरिनियम क्षेत्र में लगे टाँके माँ के लिए बेहद तकलीफदेह होते हैं और इनमें होने वाले दर्द से माँ को बैचेनी, उल्टी व नींद ना आना जैसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। डिलीवरी के बाद पेरिनियम में लगे टांकों का दर्द कम करने के लिए आप निम्न तरीके आज़मा सकती हैं -

डिलीवरी के बाद टांकों में दर्द कम करने के लिए घाव को ठंडक पहुंचाएं

एक ठंडे जैल पैड या सूती मुलायम कपड़े में लिपटी बर्फ़ को टांकों वाली जगह पर लगाने से सूजन और दर्द से राहत मिलती है। दायीं या बायीं करवट से लेटें और जैल पैड या कपड़े में लिपटी बर्फ़ को 10 से 20 मिनट के लिए टाँगों के बीच रखें। मगर ऐसा 20 मिनट से ज्यादा ना करें और दिन में चार बार से ज्यादा ना करें। इसके अलावा ठंडे पानी से भरे टब में 5 - 10 मिनट बैठने से भी दर्द में आराम मिलता है, लेकिन इसके बाद एक नर्म तौलिया से टांकों की जगह को थपथपा कर अच्छी तरह सुखा लें।

डिलीवरी के बाद टांकों में दर्द कम करने के लिए पेशाब करते समय गर्म पानी का उपयोग करें

जब भी पेशाब करें, तो अपने पेरिनियम व योनि को गुनगुने पानी से धोएं। पानी से पेशाब पूरी तरह हट जाता है और टांकों में जलन नहीं होती, साथ ही इससे उनमें संक्रमण होने का खतरा कम रहता है। योनि व पेरिनियम को धोने के बाद नर्म तौलिये से हल्के हाथों से थपथपा कर पौंछें।

डिलीवरी के बाद टांकों में दर्द कम करने के लिएआरामदयक अवस्था में बैठें

अगर आपको बैठने में तकलीफ़ हो रही है, तो बैठने के लिए चूड़ी की तरह खोखले तकिये का उपयोग करें। इसके लिए आप स्कूटी की नई ट्यूब में हवा भरवा कर और कपड़े की परत चढ़ाकर बैठने के लिए उसका उपयोग कर सकती हैं।
डिलीवरी के बाद टांकों में दर्द कम करने के लिए मलत्याग के समय टांकों पर हल्का दबाव बनाएं

शौच करते समय टांकों पर दबाव पड़ने से उनमें बहुत ज्यादा दर्द होता है। ऐसे में दर्द से बचने के लिए शौचालय जाते समय अपने साथ एक साफ सुथरा पैड ले जाएं और मलत्याग करते समय इसे पेरिनियम के टांकों पर लगाकर हल्का दबाव बनाएं। इससे पेरिनियम के टांकों में होने वाला दर्द कम हो जाएगा।

डिलीवरी के बाद टांकों में दर्द कम करने के लिए दर्द निवारक दवाएँ लें

पेरिनियम में लगे टांकों में होने वाला दर्द रोकने का सबसे प्रभावी तरीका दर्द निवारक दवाएँ लेना है। जब भी आपको टांकों में दर्द महसूस हो तो डॉक्टर द्वारा दी गई दर्द निवारक दवा खाएं। मगर ज्यादा दर्द निवारक दवाएँ खाने से आपकी व आपके बच्चे की सेहत पर विपरीत असर पड़ सकता है, इसलिए ज्यादा मात्रा में दर्द निवारक दवाएँ ना खाएं। साथ ही डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दर्द निवारक दवा ना लें।
डिलीवरी के दौरान माँ बहुत ज्यादा थक जाती है, और इस दौरान लगने वाले टाँके प्रसव के बाद भी उसे परेशान कर सकते हैं। मगर ब्लॉग में बताई गई डिलीवरी के टांकों की देखभाल संबंधी बातों का ध्यान रखकर आप दर्द से राहत पा सकती हैं, और आपके टाँके जल्दी ठीक हो सकते हैं। साथ ही साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें और खुद को स्वस्थ रखें। किसी भी तरह की परेशानी नज़र आने पर डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें, क्योंकि अपने नन्हें शिशु को सेहतमंद रखने के लिए आपका सेहतमंद होना ज़रूरी है।

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