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सफल जीवन का रहस्य


सफल जीवन का रहस्य
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सुबह सवेरे उठकर प्रतिदिन सैर करें यदि हो सके तो कुछ व्यायाम करें। भोजन हल्का, सन्तुलित व जल्दी ही हज़्ाम होने वाला करें। रात्रि को भोजन सोने से 2-3 घंटें पहले ही कर लें। कब्ज़्ा न रहने दे।
हस्तमैथुन न करे, गन्दे उपन्यास तथा अश्लील साहित्य न पढ़े मन के विचार शुु(अच्छा साहित्य पढ़े जब भी मन में बुरे विचार आयें तो अपने प्रभु को याद करें।
सोने से पहले मूत्र त्याग अवश्य कर लें तथा रात में जब भी नींद खुले तो पेशाब कर लें, सुबह शौच समय पर जायें। अपनी गुप्तेन्द्री की सफाई हर रोज नहाते समय करें। अन्यथा मैल जम कर खुजली उत्पन्न करेगी।
वेश्याओं के संपर्क से हमेशा दूर रहें उनका सम्पर्क ही अनेक रोगों का मूल कारण है। एड्स जैसी प्राण घातक बीमारी भी हो सकती है तथा तन,मन धन तीनों का ही नाश होता है।
मासिक समय में स्त्री से संम्भोग कदापि न करें इससे कई तरह की बीमारियाँ हो जाती है। अधिक सम्भोग न करे। दिन प्रतिदिन के सम्भोग से न तो स्त्री को संतुष्टि होती है तथा न ही पुरूष में शक्ति रहती है। याद रखें, स्त्रिया अधिक संम्भोग से प्रसन्न नही रहती जब भी सम्भोग करें जी भर के करे ताकि स्त्री को परम संतुष्टि प्राप्त हो।
कभी-कभी शरीर में तेल की मालिश करें। मालिश करने से शरीर सुगठित होगा कमजोेरी सुस्ती दूर होगी तथा चेहरे पर चमक आयेगी रात्रि को अधिक कपड़े पहन कर नहीं सोना चाहिए।
विवाह से पहले शारीरिक निरीक्षण किसी अनुभवी व योग्य चिकित्सक से अवश्य करा लेना चाहिए क्यांेकि थोड़ी सी कमी आपके पूरे विवाहित जीवन में दरार डाल सकती है।
किसी रोग का संक्रमण होते ही तुरन्त अपना इलाज कराना चाहिए क्योंकि समय पर इलाज न होने पर रोग के अधिक बढ़ जाने का डर रहता है फिर रोग को पूरी तरह दूर करने के लिए अधिक कठिनाई उठानी पड़ सकती है।
बाद एक पश्चात् एक ठीक निश्चित अन्तराल पर भोग विलास करना गृहस्थ जीवन का ब्रह्मचार्य है। सम्भोग का उत्तम समय रात्रि 12 बजे से 4 बजे तक है। सम्भोग से पहले किसी प्रकार का नशा न करें।
प्रत्येक व्यक्ति में एक अमृतकुण्ड है जो इन्द्री द्वारा टपक-टपक कर बह जाता है। इन्द्री के ऊपर नियन्त्रण रखकर इस अमृतकुण्ड की रक्षा की जा सकती है
हैंडप्रैक्टिस (हस्तमैथुन)
अपने हाथ से लिंग को तेजी के साथ गति देकर वीर्य को निकाल देना ही हस्तमैथुन कहलाता है। हस्तमैथुन को दूसरी भाषा में आत्ममैथुन भी कहते हैं। किशोर अवस्था में अधिकांश युवक हस्तमैथुन की क्रिया को अंजाम देना शुरू कर देते हैं। कई पुरुष अपने मित्रों को हस्तमैथुन करते देखकर खुद भी यह कार्य करने लगते हैं। हस्तमैथुन को बढ़ावा देने वाली वह किताबें भी होती है जो सेक्स क्रिया को जगाती है। हस्तमैथुन वे किशोर व जवान व्यक्ति करते हैं जो आवारा किस्म के, अपनी जिंदगी के बारे में न सोचने वाले तथा अपनी पढ़ाई के बारे में बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं।

हीनभावना का पैदा होनाः-

हस्तमैथुन करने से मन के अंदर हीन भावना पैदा हो जाती है। इस क्रिया को करने के बाद हस्तमैथुन करने वाला यह सोचता है कि वह इस प्रकार की गलती दुबारा कभी नहीं करेगा परन्तु वह पुरुष अपने मन को काबू न रख पाने की वजह से पुनः हस्तमैथुन की क्रिया करने को मजबूर हो जाता है और इस तरह से हीनभावना के शिंकजे में फंस जाता है। इस रोग को एंजाएटी न्यूरोसिस के नाम से भी जाना जाता है।

लक्षण-

इस रोग के अंदर पढ़ने में मन न लगना, खाने-पीने का मन न करना, कोई भी कार्य करने का दिल न करना तथा सदा ऐसा मन करना कि किसी भी काम को करने पर असफलता ही हाथ लगेगी, इस तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

हस्तमैथुन से संबंधित भ्रम-

हस्तमैथुन करने से क्या पुरुष संभोग करने के काबिल नहीं रहता है ?
अधिक हस्तमैथुन करने से क्या पुरुष का वीर्य ज्यादा पतला हो जाता है ?
क्या काफी समय से हस्तमैथुन का आदि पुरुष अपनी स्त्री को आनंद नहीं दे पाता है ?
हस्तमैथुन करने से क्या पुरुष मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोरी महसूस करने लगता है ?
जानकारी-
कई मनोचिकित्सकों का मानना है कि अगर ज्यादा समय तक हस्तमैथुन न किया जाए तो वह हानिकारक नहीं होता है। अधिक मात्रा में हस्तमैथुन करने से शरीर के अंदर कई प्रकार के रोग पैदा हो जाते हैं जैसे- चेहरे की चमक समाप्त हो जाना, आंखों के नीचे काले गड्डे पड़ जाना, शरीर के विकास का रुक जाना, कमर के अंदर हमेशा दर्द बने रहना, शरीर की कमजोरी, कुछ भी खाने-पीने का मन न करना तथा किसी भी कार्य को करने में जी न लगना आदि लक्षण महसूस होने लगते हैं। कभी-कभी तो हस्तमैथुन करने के कारण बेचैनी, गुस्सा, मानसिक उत्तेजना तथा मन में हीन भावना बढ़ने लगती है।

बेकार का भ्रमः-

कई लोगों के मन में यह भ्रम पैदा हो जाता है कि अधिक मात्रा में हस्तमैथुन करने से लिंग का आकार टेढा हो जाता है। लेकिन सेक्स के ज्ञाताओं का कहना है कि हस्तमैथुन करने से लिंग के आकार में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं आता है क्योंकि लिंग ऊतकों से बना हुआ होता है। लिंग के अंदर किसी प्रकार की कोई हड्डी नहीं होती है। इसकी बनावट स्पंज के जैसी ही होती है। इसलिए लिंग सामान्य अवस्था में लटका हुआ तथा मुलायम होता है। लिंग के अंदर जब तनाव पैदा होता है तो वह बहुत अधिक सख्त हो जाता है और इसकी वजह से वह एक तरफ झुक जाता है। लिंग की इस अवस्था को देखकर अधिकतर लोग अपने मन में लिंग के टेढ़ा होने का भ्रम पैदा कर लेते हैं। लिंग के अंदर तनाव पैदा हो जाने के समय में लिंग की नसों में खून भर जाने से लिंग का एक तरफ झुक जाना यह एक आम बात है। तनाव की अवस्था में भी किसी पुरुष का लिंग ठीक स्थिति में खड़ा नहीं हो सकता है।

वीर्य को रोकना नामुमकिनः-
कई पुरुष हस्तमैथुन करते समय अंतिम समय पर पहुचने पर अपने लिंग को हाथ से दबाकर लिंग के आगे के मुख को बंद कर लेते हैं ताकि उनका वीर्य बाहर न निकल पाए। इस तरह से करने से वे लोग ये सोचते हैं कि वे हस्तमैथुन करने से आनंद भी उठा लें और उनके शरीर के अंदर वीर्य भी नष्ट न हो लेकिन इस तरह से करना किसी भी तरह से ठीक नहीं है, क्योंकि इससे शरीर को नुकसान होता है। हस्तमैथुन करने के बाद वीर्य का बाहर निकलना एक स्वाभाविक क्रिया है क्योंकि जब वीर्य अपनी जगह से निकलेगा तो वह पुनः अपनी जगह पर नहीं आएगा। अगर हस्तमैथुन करने के बाद वीर्य को बाहर निकलने से रोका जाए तो वीर्य मूत्र थैली के अंदर चला जाता है और बाद में मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है। इसलिए लिंग पर किसी भी तरह का कोई दबाव देकर वीर्य का रोकना सही नहीं है। अधिक दबाव डालने के कारण लिंग को नुकसान पहुंच सकता है और वीर्य के कारण कई बार मूत्र नली भी बंद हो जाती है।

गलत तरीकों से बचें-
कुछ पुरुष अधिक उत्तेजना में भर जाने से लिंग को पलंग पर तथा तकिये पर रगड़ने लगते हैं। कई बार तो पुरुष किसी वस्तु को लेकर छेद बना लेते हैं या किसी खाली बोतल के अंदर लिंग को डालकर जोर-जोर से घर्षण करने लगते हैं। कुछ पुरुष तो जमीन के अंदर मिट्टी में गड्डा बनाकर घर्षण करने लगते हैं। इस तरह की क्रिया को कदापि नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से लिंग को हानि हो सकती है। कई बार सख्त चीज की रगड़ लगने से लिंग पर चोट भी लग जाती है या फिर सूजन भी आ जाती है या लिंग के आगे के भाग की त्वचा पीछे की तरफ खिंचकर फट भी सकती है। इसलिए हस्तमैथुन करने के ऐसे गलत तरीकों से बचना चाहिए।

हस्तमैथुन करने की आदत अधिकतर कुंवारे युवकों में ही देखी जाती है। उन युवकों को हस्तमैथुन करने की जरुरत नहीं होती है जो शादी हो जाने के बाद अपनी स्त्री के साथ संभोग क्रिया करते हैं। लेकिन कई बार कुछ युवक या पुरुष अपनी पत्नी के मायके चले जाने के बाद अपने आप हस्तमैथुन कर के अपनी कामेच्छा को पूर्ण रूप दे देते हैं। तथा कई बार पुरुष अपनी पत्नी के साथ संभोग करने से पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हो पाते हैं इसलिए वह हस्तमैथुन करके अपने आपको संतुष्ट कर लेते हैं।

कारण-

संगति का असरः-

किसी भी व्यक्ति पर अच्छी बातों का असर बहुत ही देरी से होता है लेकिन बुरी आदतों का असर शीघ्र ही हो जाता है। किशोरावस्था के अंदर युवक का मन और भावनाएं बहुत ही नाजुक होती है। स्कूल जाते समय तथा सड़को पर चलने-फिरने वाली सुंदर और दिल को भाने वाली लड़कियों को देखकर उनके अंदर सेक्स करने की शक्ति जागने लगती है तथा उनके शरीर के अंदर धीरे-धीरे उत्तेजना आने लगती है। स्कूल-कालेजों के अंदर अपने से ज्यादा अनुभवी युवाओं की संगति में रहकर वह ज्यादा उत्तेजित पुस्तके, सेक्स और उस के बारे में बाते करना लगते हैं। इसके बाद सेक्स से जुड़ी हुई गलत आदतों का शिकार होकर हस्तमैथुन करने लग जाते हैं। बार-बार हस्तमैथुन करने से उसे कुछ देर के लिए आनंद मिल जाता है। हस्तमैथुन करने से एक स्वस्थ पुरुष भी अपने-आपको रोगी महसूस करने लगता है। जो पुरुष बुरे दोस्तों के साथ रहने के कारण हस्तमैथुन के रोगी बन जाते हैं उन्हें उन दोस्तों का साथ खुद ही छोड़ देना चाहिए।

पारिवारिक माहौल का असरः-

अगर घर का माहौल सही होता है तो बच्चे के अंदर भी अच्छी आदतें पैदा होती है। इसके अलावा अगर घर के सदस्य गंदी बातें करेंगे तो बच्चे भी गंदी आदतों का शिकार हो जाएंगे।

जब कोई लड़का किशोरवस्था में पहुंचता है तो उस के मन में सेक्स के बारे में जानने की इच्छा जागृत होती है। वह अपने भाई-भाभी के सेक्स करने के तथा मां-बाप के चुम्बन करने पर बहुत ही बारिकी से ध्यान रखता है, अगर घर के लोग एंकात और शर्म के बारे में सोचे तो जवान होते बालक पर इस बात का कोई असर नहीं होता, इस तरह से उसके अंदर सेक्स करने की भावना जागृत नहीं होती। लेकिन घर के अंदर इस तरह के कार्य को करते हुए देखकर उसके मन में इस तरह की इच्छा पैदा हो जाती है और वह इस तनाव से मुक्ति पाने के लिए अपने हाथ को लिंग पर रख देता है। लिंग पर हाथ रखने के बाद उसको सहलाने से उसको बहुत अधिक मजा आने लगता है, जिसके वाद वह वीर्य को बाहर निकाल देता है।

घर के अंदर इस तरह के वातावरण से जवान होते लड़कों पर बहुत ही गलत असर पड़ता है। कई बार तो लड़के रात के समय छुप-छुपकर अपने भाई-भाभी तथा मां-बाप को सेक्स क्रिया करते हुए देख लेते हैं। इस तरह से देखने के बाद उन के मन में भी इस तरह के कार्य करने का मन करता है, लेकिन कोई साधन न होने की वजह से वे हस्तमैथुन करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इस तरह से एक बार आनंद आने के बाद वे बार-बार हस्तमैथुन करके अपने आपको तसल्ली दे देते हैं

लिंग की खुजलीः-

लिंग की सफाई न करने की वजह से इसके आगे वाले भाग के नीचे काफी मात्रा में गंदा मैल जमा हो जाता है जिसकी वजह से उस स्थान पर बहुत खुजली होने लगती है। लिंग पर खुजली होने की वजह से लिंग के अंदर तनाव पैदा हो जाता है, जिसके कारण लिंग को सहलाने और खुजलाने की वजह से एक अजीब सा आनंद महसूस होता है। लिंग पर बार-बार हाथ लगने की वजह से लिंग सख्त हो जाता है और इसके अंदर तनाव आ जाता है। तब युवक थोड़े समय के आनंद के लिए अपने वीर्य को हस्तमैथुन करके बाहर निकाल देता है। थोड़े समय के आनंद के लिए वह बार-बार इस क्रिया को करता रहता है। इस तरह से करते रहने से उसकी यह आदत हस्तमैथुन का रूप धारण कर लेती है। इसलिए मां-बाप को बचपन से ही चाहिए कि बच्चे के लिंग के आगे के भाग की त्वचा को अच्छी तरह से खोलकर उसकी सफाई करने की आदत बच्चों में डाल दें। अगर इस तरह का कार्य बचपन से ही मां कर दें तो बच्चे को किसी भी तरह का कोई भी डर नहीं रहता है।

किसी अन्य तरह की हलचल होने के कारणः-

कई बार लिंग में किसी अन्य रोग के हो जाने की वजह से एक हलचल सी होने लगती है, जिसके कारण किशोर अपने लिंग को हाथ के द्वारा रगड़ने लग जाता है। इस तरह की क्रिया करने से लिंग के अंदर सख्तपन और अधिक तनाव आ जाता है। इस प्रकार करते रहने से हस्तमैथुन की आदत पड़ जाती है।

गंदी किताबें और फिल्मों के देखने की वजह सेः-

किशोरावस्था के अंदर गंदी किताबों और अश्लील पिक्चरों को देखने से भी युवक को हस्तमैथुन की आदत पड़ जाती है। इस तरह की किताबों और फिल्मों को देखकर जब युवक के शरीर के अंदर सेक्स करने की इच्छा जगने लगती है तो उसे समान रूप से संभोग के द्वारा इसको समाप्त कर देना इतना आसान नहीं होता है। इसके विपरीत शरीर के अंदर तेज होती वासना को समाप्त करने के लिए हस्तमैथुन का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार यह कार्य करने से यह एक आदत सी बन जाती है और युवक इस कार्य को बार-बार करने के लिए मजबूर हो जाता है।

मूत्र को रोकने के कारणः-
कई बार पुरुष जब मूत्र (पेशाब) को रोकता है तो वह हाथ को दबाकर तेजी से लिंग पर रख देता है, जिसके दबाव देने के कारण शरीर के अंदर एक अजीब सी उत्तेजना पैदा होती है। जिसका सीधा सम्पर्क मस्तिष्क से होता है। कई बार युवक का हाथ अनजाने में ही लिंग पर चला जाता है जिसके उसके अंदर उत्तेजना जागृत हो जाती है, उसे यह बहुत ही अच्छा लगता है। इस तरह से करने के बाद वह अपने लिंग को हाथ में लेकर आराम-आराम से सहलाने लगता है और वीर्य के निकलने तक वह इस क्रिया को करने के लिए अति उत्सुक रहता है।

हस्तमैथुन से पीछा छुड़ाने के लिए कुछ सरल उपचारः-

हस्तमैथुन से पीछा छुडा़ने के लिए और इसका इलाज करने के लिए 2 तरीके हैं-

पुरुष के अपने प्रयत्न के द्वारा भी इसका इलाज किया जा सकता है।
इसका इलाज दवाईयों के द्वारा भी किया जा सकता है।
व्यक्ति के अपने प्रयत्न के द्वाराः–

व्यक्ति को अपने रोजाना की दिनचर्या इस तरह से बनानी होगी कि उसे किसी भी वक्त खाली बैठे रहने का समय ही न मिले। उसे हमेशा अपने आपको अपने मित्रों के तथा अपने परिवार के साथ हंसते-खेलते हुए और काम-काज में लगाए रखना चाहिए। हमेशा ज्ञान की किताबें तथा धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते रहने से मन गंदे विषयों की तरफ नहीं भटकेगा और मन के अंदर भी शांति भी बनी रहेगी।
व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर ताजी हवा में घूमना चाहिए। अगर घर के अंदर घास उगा हुआ खुला बाग हो या घर के आस-पास कोई पार्क हो तो वहां पर जाकर सुबह के समय में नंगे पांव ही घूमने की कोशिश करें। इस तरह से करने से आपका शरीर स्वस्थ रहेगा और मन के अंदर भी शांति बनी रहेगी तथा शरीर में ताकत भी आ जाएगी।
व्यक्ति को कभी भी तेज मिर्च-मसालों वाला भोजन नहीं करना चाहिए, नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा तली हुई चीजें कम ही खायें या हो सके तो कम ही कर दें।
व्यक्ति को सदा सादा भोजन ग्रहण करना चाहिए, अगर हो सके तो हफ्तें के अंदर एक दिन का भोजन न करें। भोजन करने के साथ-साथ कुछ दिनों के लिए फल का इस्तेमाल करें और हो सके तो फलों के रस का सेवन करें।
व्यक्ति को बुरे मित्रों का साथ तुरंत ही छोड़ देना चाहिए। कभी भी अश्लील किताबें न पढ़े और गंदी तथा काम उत्तेजना को बढाना देने वाली फिल्मों को कदापि न देखें। अपने आप को अच्छे कार्य में लगाए रखें। इससे आपका मन नहीं भटकेगा।
मल त्याग करने के बाद, शौच आदि से निपटने के बाद अण्डकोष, लिंग तथा हाथ-पांव को अच्छी तरह से ठंडे पानी से धोकर साफ करना चाहिए।
पेट के अंदर कभी भी कब्ज न बनने दें, पेट को हमेशा साफ रखें। पेट के साफ न रहने से कई प्रकार की बीमारी हो जाती है। अगर पेट में किसी प्रकार की कोई शिकायत हो तो शीघ्र ही किसी अच्छे डाक्टर से मिलकर इस समस्या का समाधान करें।
घरेलू औषधियों के द्वारा हस्तमैथुन का इलाजः-
कुछ घरेलू दवाईयों के द्वारा भी हस्तमैथुन जैसे रोग से छुटकारा पाया जा सकता हैः-

500 ग्राम प्याज के रस को 250 ग्राम शुद्ध शहद में मिला लें। इसके बाद इसे धीमी आग पर गर्म करने के लिए रख दें। इसे तब तक पकाते रहे जब तक प्याज का रस जल जाए और केवल शहद बच जाए। शुद्ध शहद के बच जाने पर इसके अंदर 250 ग्राम मूसली का चूर्ण मिलाकर इसको अच्छी तरह से घोंटकर एक साफ की हुई कांच की शीशी में भर लें। इसके बाद इस चूर्ण को सुबह और शाम के समय में हस्तमैथुन के रोगी को खिलाने से हस्तमैथुन जैसे सभी रोग समाप्त हो जाएगें और उसके अंदर एक नयी प्रकार की स्फूर्ति और शरीर के अंदर सेक्स करने की ताकत में बढोतरी होगी।
बेल और पान की जड़ का चूर्ण बनाकर उसमें शहद को मिला लें। फिर इसकी बेर की गुठली के बराबर की गोलियां बनाकर रख लें। इस गोली को 2-2 की मात्रा में गाय के दूध के साथ सुबह और शाम के समय में रोजाना सेवन करने से हस्तमैथुन की वजह से पैदा हुए शीघ्रपतन का रोग समाप्त हो जाता है और संभोग करने की ताकत बहुत अधिक बढ़ जाती है।
जानकारी-

अगर इस गोली को सेक्स क्रिया शुरू करने से 1 से 2 घंटे पहले दूध के साथ सेवन लिया जाए तो इससे संभोग करने की ताकत दुगनी हो जाती है।

कनेर की जड़ का रस 20 ग्राम, गाय का शुद्ध घी 20 ग्राम और शराब 20 ग्राम को एकसाथ मिलाकर एक कांच की साफ शीशी में भरकर रख दें। इस मिश्रण को लिंग के मुंड को बचाकर बाकी के बचे हुए भाग पर लेप कर दें। इसके बाद ऊपर से पान का पत्ता लेकर लिंग पर लपेटने से हस्तमैथुन से होने वाले लिंग की सारी खराबियां दूर हो जाती हैं। इस लेप को करने से लिंग का टेढ़ापन, मोटाई तथा पतलापन, लिंग की नसों के ऊपर उभर आया नीला निशान तथा लिंग से शीघ्र वीर्य का निकल जाना जैसी सभी प्रकार के रोग समाप्त हो जाते हैं।
250 ग्राम गाय के ताजे शुद्ध घी के अंदर 18 ग्राम सफेद संखिया को मिलाकर एक हफ्तें तक रोजाना कूट-पीस लें। इसके बाद इस तेल को धूप के अंदर सुखाकर एक साफ कांच की शीशी में भरकर रख दें। रात को सोते समय रोजाना इस तेल की मालिश लिंग के आगे के भाग को छोड़कर करें। इसके बाद बंगला पान को साफ करके लिंग के ऊपर बांध दें। इस तरह से कुछ दिनों तक करने के बाद पुरुष के लिंग के सभी प्रकार के रोग समाप्त हो जाते हैं।
क्या स्त्रियां भी हस्तमैथुन करती है ?
कई पुरुषों का यह सोचना है कि क्या स्त्रियां भी हस्तमैथुन करने में रुचि लेती है, तो इसका जवाब यह है कि आज के युग में स्त्रियां भी हस्तमैथुन करती है। यह बात बिल्कुल ठीक है। जब बालिका की उम्र 12 से 13 साल के आस-पास हो जाती है तो उनके शरीर के अंगों का तेजी से विकास होने लगता है उस समय वह अपनी योनि के अग्र भाग को मसलकर इस तरह के कार्य को करने लग जाती है। स्त्रियों के शरीर के अंदर उनको उत्तेजित करने वाला सबसे नाजुक भाग योनि का ही होता है। जिस तरह से लड़को को हस्तमैथुन करने से सुख की प्राप्ति होती है उसी प्रकार लड़कियों को भी अपनी योनि के अग्र भाग को रगड़ने से सेक्स क्रिया करने का आनंद प्राप्त होता है। अधिकतर वे स्त्रियां जो किसी वजह से पुरुष के साथ सेक्स क्रिया नहीं कर पाती है वे इस तरह का कार्य करके अपनी सेक्स वासना को संतुष्ट कर लेती है। अधिकतर यह देखा गया है कि कभी-कभी लड़किया कोई एकांत सी जगह देखकर मोमबत्ती, खीरा, गाजर व बैंगन जैसी अन्य चीजों को लेकर अपनी कामवासना को मिटा लेती है।

किन-किन अवस्था में हस्तमैथुन किया जाता हैः-

जिन युवकों की शादी उम्र बीत जाने के बाद भी काफी समय के बाद भी नहीं होती है।
जिन पुरुषों को बाहर नौकरी करने के लिए एक लम्बे समय तक अपनी पत्नी से दूर रहना पड़ता है।
वे पुरुष जिनकी पत्नी मर जाती है और उनकी दूसरी शादी काफी लंबे समय तक नहीं हो पाती है।
वे पुरुष जिनकी पत्नियां गर्भवती होती है या उनकी पत्नियां काफी लम्बे समय से बीमारी से ग्रस्त होती है।
वृद्धावस्था के अंदर जब प्रोस्टेट ग्रन्थियां बढ़ जाती है तो आप्रेशन आदि के द्वारा भी इसका इलाज न हो पाने की वजह से भी हस्तमैथुन करना पड़ जाता है।
सावधानी-

इस तरह के कोई रोग हो तो उनको समाप्त करने के लिए सप्ताह के अंदर एक या दो बार सेक्स क्रिया जरुरी होता है। अगर सेक्स क्रिया करने का कोई साधन ना हो तो शरीर तथा मन के अंदर उठी हुई कामवासना को समाप्त करने के लिए सप्ताह में एक या दो बार हस्तमैथुन कर सकते हैं।
पेट की एसिडिटी को नियंत्रित और शांत करने के लिए घरेलू उपचार 0

एसिडिटी क्या है? इस युग में एसिडिटी हर उम्र की व्यक्ति के लिए एक बहुत ही आम स्वास्थ्य की तकलीफ बन गयी है।इसका सही समय पर इलाज करना जरुरी है क्योंकि ये आगे जाकर बहुत ज्यादा परेशानी दी सकती है। गैस के लक्षण, पेट की गैस्ट्रिक ग्रंथियां जब अतिरिक्त एसिड छोड़ती हैं तब एसिडिटी की तकलीफ महसूस होती है। ज्यादा मसालेदार खाने से यह ज्यादा होती है और छाती में जलन होने लगती है।

बदहज़मी सीने में जलन का एक प्रकार है, जो तब होता है जब मांसपेशियों का चक्र भोजन को पेट में आने देता है। यह एक सामान्य समस्या है। पेट में अतिरिक्त अम्ल (acid) जमा होने की वजह से भी बदहज़मी हो जाती है। नीचे बदहज़मी दूर करने के कुछ घरेलू नुस्खे बताये गए हैं।

बदहज़मी के मुख्य कारण (Common causes of heartburn)

भोजन पहले आपके इसोफेगस (esophagus) में जाता है और फिर आपके पेट में लोअर इसोफेगल स्फिंकटर (lower esophageal sphincter) की मदद से जाता है। इससे भोजन या अम्ल ऊपर नहीं आ पाते। जब लोअर इसोफेगल स्फिंकटर ढीला पड़ जाता है तो अम्ल पेट में चला जाता है और बदहज़मी हो जाती है। जीवनशैली में कुछ परिवर्तन होने से पेट में बदहज़मी हो जाती है। बदहज़मी के मुख्य कारण मोटापा, कैफीन (caffeine), धूम्रपान, तनाव, गर्भावस्था, वसायुक्त भोजन या अधिक खाना, शराब पीना आदि मुख्य है।

पेट के अम्ल के लक्षण (Some of the symptoms of stomach acid)

पेट की सूजन
मतली होना
उलटी और रक्त युक्त मल आना
अचानक वज़न का घट जाना
बदहज़मी की वजह से छाती में दर्द होना
बार बार हिचकियाँ और डकारें आना।
बदहज़मी को दूर करने के घरेलू उपाय (Top best natural home remedies to soothe stomach acidity)

छाछ से बदहज़मी का इलाज (Buttermilk as a natural home remedy to reduce heartburn)

छाछ बदहज़मी का काफी कारगर इलाज साबित होता है। यह छाती की जलन से आराम दिलाता है जिससे पेट के अम्ल भी कम हो जाते हैं। दही की मदद से छाछ बनाएं और गाँठ पड़ने से बचाने के लिए इसे अच्छे से हिलाएं। स्वादानुसार नमक डालें। तुरंत राहत के लिए आधा कप छाछ का सेवन करें। आप छाछ की जगह सामान्य दूध का भी प्रयोग कर सकते हैं, पर इससे आपको राहत देर से मिलेगी। अपने खानपान में सोया उत्पाद और खमीरयुक्त दूध को शामिल करें। इससे बदहज़मी दूर होती है।

अदरक से बदहज़मी का इलाज (How to get rid of acid reflux naturally at home with ginger?)

अदरक एक बेहतरीन जड़ीबूटी होती है जो छाती में जलन से मुक्ति दिलाती है। अदरक का रस आपको तुरंत राहत प्रदान करने के लिए काफी लाभदायक होता है। एक ताज़ी अदरक लें, इसके टुकड़ों को पीस लें और इनका रस निकालें। अब इसमें नीम्बू का रस मिश्रित करें। इसका सेवन करके बदहज़मी से मुक्ति पाएं। अदरक आपकी धड़कनों को सामान्य करता है और जलन दूर करता है।

एक कप उबलते पानी में एक चम्मच अदरक के टुकड़े डालकर अदरक वाली चाय बनाएं। इसे कुछ देर तक उबलने दें और फिर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। दिन में कई बार इस चाय का सेवन करें और आराम पाएं।

वैकल्पिक तौर पर ताज़ी अदरक लें और इनको पीसकर इनका रस निकालें। इसमें थोड़ा सा गुड़ भी मिश्रित करें। इस रस का सेवन करें जिससे ये आसानी से आपके पेट तक पहुँच सके। इससे बदहज़मी की समस्या भी कम होगी और आपको दिल की जलन से भी छुटकारा मिलेगा।

एलोवेरा के रस से बदहज़मी का इलाज (Aloe vera juice top best amazing tip to soothe stomach acids)

एलोवेरा का रस जलती त्वचा को आराम देता है और इसोफेगस के भाग को भी राहत देता है। यह बदहज़मी होने से रोकता है और बदहज़मी से हुए नुकसान को भी ठीक करता है। ताज़ा एलोवेरा लें और इसका रस निकालें। इसका सेवन हर पहर के भोजन के पहले करें। आप बाज़ार से भी एलो वेरा का रस खरीद सकते हैं, पर इसे खरीदने से पहले इसके लैक्सेटिव (laxative) तत्वों की जांच कर लें। आप 2 औंस एलो वेरा का रस लेकर इसे एक गिलास पानी में भी मिश्रित कर सकते हैं। इसे सुबह सुबह पिएं।

कच्चे लहसुन से बदहजमी का इलाज (Simple, easy ways to relieve from heartburn with raw garlic)

कच्चे लहसुन में एंटीबायोटिक (antibiotic) के गुण होते हैं जो जीवाणुओं के खात्मे में आपकी सहायता करते हैं। कच्चे लहसुन का प्रयोग कई बार बदहज़मी और गैस होने की स्थिति में किया जाता है। कच्चे लहसुन के फाहों का रोज़ाना खाली पेट में सेवन करने से पेट के एसिड्स ख़त्म हो जाते हैं। कच्चे लहसुन का एक फाहा चबाएं, या फिर लहसुन के फाहों को सेब के सिरके में डुबो लें। इसका सेवन करने से भी आपको सीने में जलन से छुटकारा मिल जाएगा।

मुट्ठीभर बादाम से बदहज़मी का इलाज (Have a handful of almonds as a snack to reduce acid reflux)

मुट्ठीभर कच्चे बादाम का सेवन करने से भी बदहज़मी दूर होती है। बादाम एल्कलाइन (alkaline) से भरपूर होता है और शरीर के ph स्तर को नियंत्रित रखता है। बादाम उस एसिड के प्रभाव को निष्क्रिय कर देता है, जो इसोफेगस में जलन पैदा करता है। बादाम में कैल्शियम (calcium) की भी अच्छी खासी मात्रा होती है और इन्हें रोज़ाना नाश्ते में खाया जा सकता है। हर बार भोजन के बाद 2 से 3 बादाम का सेवन करें। हमेशा अपने साथ बादाम रखें और बदहज़मी होने पर इनका सेवन करें।

नारियल पानी से बदहज़मी का इलाज (Coconut water best natural tips soothe stomach acidity)

नारियल पानी से पेट के एसिड्स का निकास प्राकृतिक और नियंत्रित ढंग से होता है। जैसे ही आपको बदहज़मी हो तो नारियल पानी का सेवन करें। इससे आपको तुरंत राहत मिलती है और आप आराम का अनुभव करते हैं। नारियल पानी पीने से शरीर के अनावश्यक एसिड्स निकल जाते हैं और तापमान में भी गिरावट आती है। गर्मियों में नारियल पानी का सेवन करना वैसे भी काफी लाभदायक होता है, क्योंकि इससे हमेशा शरीर को नमी प्राप्त होती है।

बेकिंग सोडा से बदहज़मी का इलाज (Quick tips to get rid of heartburn with baking soda)

बेकिंग सोडा आपकी रसोई में पाया जाने वाला काफी सामान्य उत्पाद है। इसे बाईकार्बोनेट (bicarbonate) भी कहते हैं। यह बदहज़मी को दूर करने का काफी कारगर तरीका है। इसमें प्राकृतिक एंटासिड (antacid) होता है, जो सीने में जलन से मुक्ति दिलाता है। एक चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास पानी में मिश्रित करें। इसे पीकर तुरंत आराम प्राप्त करें। अगर आप चाहें तो इसमें नीम्बू के रस की कुछ बूँदें भी मिला सकते हैं।

सौंफ की चाय (Fennel tea to prevent or reduce bloating and esophageal in your stomach)

गैस या सूजन होने की स्थिति में सौंफ की चाय काफी अच्छा असर करती है। यह इसोफेगस की समस्याओं से आपको राहत देता है और घर बैठे पेट की समस्याओं से निजात दिलाता है। दिन में कई बार सौंफ चबाने से साँसों में ताज़गी आती है और पेट के अम्ल का उत्पादन नियंत्रित होता है। सौंफ के साथ आयुर्वेदिक चाय पिएं। 2 चम्मच सौंफ को उबलते पानी में डालें। इसे 10 मिनट तक ठंडा होने के लिए छोड़ दें और फिर छान लें। इसका सेवन दिन में कई बार करें।

एसिडिटी या अम्लता दूर करने के लिए सुझाव (Pet ki gas kaise dur kare)

ऑक्सीजन या कैफीन युक्त पेय न लें। इसके बजाय हर्बल चाय लें जो प्राकृतिक प्रोटीन को अवशोषित करती है।

गैस्ट्रिक का इलाज (gas ka ilaj), हर रोज 1 गिलास गुनगुना पानी पियें।
तरबूज का रस दैनिक आहार में लें। केले, तरबूज और ककड़ी अच्छी मात्रा में खाएं।
एसिडिटी की दवा, नारियल का पानी एसिडिटी (acidity ka upchar) की तकलीफ कम करता है और पाचन तंत्र सुधारता है।
हर दिन 1 गिलास दूध लें।
थोड़े थोड़े समय पर खाएं।
आपको अच्छे लगते हो फिर भी अपने भोजन से अचार, चटनियाँ दूर रखें।
एसिडिटी की दवाई, पुदीने के पत्ते 1 गिलास पानी में उबालकर भोजन के बाद पियें।
एसिडिटी के लिए घरेलू उपचार (Ghrelu upchar acidity ke liye)

गैस का उपचार – लौंग (Cloves)

दो या तीन लौंग इस तरह से चबाएं की उनसे रस बाहर निकले। जठरशोथ की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए एक अच्छा इलाज है।

गैस का दर्द – गुड़ (Jaggery)

सीने में जलन और एसिडिटी की समस्याओं के लिए गुड़ अच्छा इलाज है। एक छोटा सा टुकड़ा लें और मुंह में इसे घुलने दें। इस सुझाव का प्रयोग मधुमेह वाले लोग ना करें।

गैस के घरेलू उपाय – रायता (Curd)

दही में ककड़ी और धनिया मिलाकर बना रायता आपके पाचन को मदद कर एसिडिटी दूर करेगा।
एसिडिटी के उपाय – तुलसी (gas ka ilaj – Tulsi)

तुलसी के पत्ते औषधि होते हैं और कुछ पत्ते चबाकर खाने से एसिडिटी से राहत मिलती है। इन पत्तों को पीसकर पानी मिलाकर यह पानी पी सकते हैं।

एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार – छाछ (Buttermilk)

छाछ में 1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च का पाउडर मिलाएं और उसे पी डालें।

पेट में गैस का इलाज – पुदीना (Mint)

अपचन और एसिडिटी को दूर रखने के लिए अपने भोजन में पुदीना इस्तेमाल करें। भोजन के बाद पुदीने का रस पियें या पत्ते चबाकर खाएं।

गैस का आयुर्वेदिक इलाज – दूध (Milk – acidity ka upchar)

कैल्शियम होने से दूध पेट की अम्लता को कम करता है। भोजन के बाद दूध पिने की आदत डाल लें जो पेट को शांत कर देगा।

एसिडिटी का घरेलू उपचार – वनिला आइसक्रीम (Vanilla icecream)

एसिडिटी कम करने के लिए 1 कप वनिला आइसक्रीम खाएं। इसका स्वाद भी मजेदार होता है और यह एसिडिटी भी कम करता है।

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