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प्रसवोत्तर अवसाद


प्रसवोत्तर अवसाद : लक्षण, कारण और उपाय 
(Delivery ke baad tanav : lakshan, karan aur upay)

गर्भावस्था के समय तो महिलाएं कई समस्याओं से जूझती ही हैं, लेकिन प्रेगनेंसी के बाद भी उन्हें कई परेशानियोंं का सामना करना पड़ता है। प्रेगनेंसी के बाद ढेर सारी समस्याएं होती हैं, जिनमें से एक है प्रसवोत्तर अवसाद।

प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) यानि डिलीवरी के बाद डिप्रेशन की समस्या को पोस्टपार्टम डिप्रेशन भी कहते हैं। हम इस ब्लॉग के जरिए प्रसवोत्तर अवसाद से जुड़ी तमाम जानकारियां देने जा रहे हैं, जिनकी मदद से महिलाएं प्रसव के बाद बेफिक्र रह सकेंगी।

प्रसवोत्तर अवसाद क्या है? 
(Postpartum depression kya hai)
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प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) एक ऐसी समस्या है, जोकि बच्चे के जन्म के बाद होती है। बच्चे के जन्म के कुछ हफ्ते या महीने बाद इस समस्या से लगभग 20 प्रतिशत भारतीय महिलाएं जूझती हैं। प्रसवोत्तर तनाव की समस्या यूं तो सामान्य है, लेकिन कई मामलों में यह काफी गंभीर रूप भी ले लेती है।

आमतौर पर कई महिलाएं इस समस्या को नजरअंदाज करके घुटन भरी जिंदगी जीने के लिए लाचार होती है, लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। बताते चलें कि तनाव गर्भपात या फिर शिशु की मौत की वजह से भी होता है।

प्रसव के बाद डिप्रेशन के लक्षण क्या है? 
(Delivery ke baad depression ke lakshan kya hai)
प्रसव के बाद डिप्रेशन के कई लक्षण होते हैं। कुछ महत्वपूर्ण लक्षण नीचे लिखे गये हैंं, जिनकी मदद से महिलाएं प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) को पहचान सकती हैं।
असहाय या लाचार महसूस होना।
बच्चे की देखभाल को लेकर परेशान होना।
लगातार उदासी और चिंता का शिकार होना।
खुद को किसी लायक नहीं समझना।
भूख कम या ज्यादा लगना।
हमेशा दिमाग खराब होना।
निर्णय लेने में हिचकिचाना।
आत्मसम्मान में कमी होना।
खुद को बोझ समझना।
समाज से दूरी बनाना।
बार बार चीज़े भूलना।
डिलीवरी के बाद डिप्रेशन का निदान क्या है? 
(Delivery ke baad tanav ka nidan kya hai)

प्रसव के बाद तनाव का पता लगाने के लिए डॉक्टर इन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं


अवसाद-स्क्रीनिंग प्रश्नावली (या सवाल जवाब) - यह तरीका डॉक्टर महिला के मानसिक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए अपनाते हैं।


थायराइड की जांच - डॉक्टर यह तरीका अवसाद के कारणों का पता लगाने के लिए अपनाते हैं।

प्रसवोत्तर अवसाद के कारण क्या है? 
(Postpartum depression ke karan kya hai)

डॉक्टर डिलीवरी के बाद तनाव की समस्या का कारण हार्मोनल बदलाव ही मानते हैं, लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च की माने तो प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) सिर्फ हार्मोनल बदलाव की वजह से ही नहीं होता है, बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि प्रसवोत्तर अवसाद के कारण क्या क्या हो सकते हैं?
नींद की कमी होना।
पर्याप्त मात्रा में भोजन न करना।
थायराइड होना।
पारिवारिक समर्थन न होना।
परिवार में आर्थिक समस्या होना।
शिशु का किसी गंभीर बिमारी से पीड़ित होना।
पति से अनबन होना।

डिलीवरी के बाद अवसाद की संभावना किन महिलाओं मेंं ज्यादा होती है? 
(Delivery ke baad udasi ki sambhavana kin mahilao me jada hoti hai)

कई महिलाओं का मानना होता है कि प्रसव के बाद अवसाद की समस्या सिर्फ पहले बच्चे के जन्म के बाद होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल, प्रसव के बाद अवसाद की समस्या किसी भी महिला को हो सकती है और किसी भी शिशु के जन्म के बाद हो सकती है। लेकिन कुछ स्थितियों में इसका जोखिम अधिक होता है, जिनमें से कुछ निम्नलिखित है।
परिवार के किसी अन्य सदस्य का अवसाद से पीड़ित होना।
पति के साथ अच्छे संबंध न होना
आर्थिक समस्याओं से ग्रसित होना।
पिछली प्रेगनेंसी के बाद तनाव होना।
गर्भावस्था के दौरान किसी भी बात का सदमा लगना।
स्तनपान कराने में परेशानी होना।
किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होना।

अगर महिला में ऐसे लक्षण है, तो डॉक्टर से जांच और इलाज कराएं।

क्या अवसाद ग्रसित महिलाएं स्तनपान कराने के दौरान दवाईयां ले सकती हैैं? 
(Kya tanav me stanpan karane ke dauran mahilaye dva le skti hai)

गर्भावस्था के बाद लगभग सभी महिलाएं स्तनपान कराती हैं, जिनमें से कुछ महिलाएं अवसाद से ग्रसित होती हैं। जो महिलाएं प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) से ग्रसित होती हैं, उन्हें स्तनपान के दौरान टेंशन की दवाईयों का सेवन नहीं करना चाहिए।

दरअसल, स्तनपान कराने वाली महिलाएं अगर इस दौरान तनाव की दवाईयों का सेवन करती हैं, तो दूध बनने में कमी होती है और बच्चे के विकास पर भी असर पड़ता है।

गौरतलब है कि प्रसवोत्तर अवसाद की समस्या से जूझ रही महिलाओं को स्तनपान कराने से पहले डॉक्टर से संपर्क जरूर कर लेना चाहिए। इस दौरान खुद किसी भी दवाई का सेवन न करें, क्योंकि ऐसा करने से शिशु पर असर होगा।

प्रसवोत्तर अवसाद का इलाज क्या है? 
(Postpartum depression ka ilaj kya hai)

प्रसवोत्तर अवसाद से ग्रसित महिलाओं के लिए इलाज के कई विकल्प मौजूद है, ऐसे में अगर महिलाएं पहले इलाज से खुश नहीं है, तो वह अपना इलाज किसी और विकल्प से कराने के लिए पूरी तरह से आज़ाद है। तो चलिए जानते हैं कि प्रसवोत्तर अवसाद का इलाज किन किन तरीकों से हो सकता है।

बातचीत द्वारा थैरेपी -बातचीत थैरेपी अवसाद को दूर करने में सहायक है। महिला अपने पति या परिजनों से बातचीत करके भी इस समस्या से उबर सकती हैं, लेकिन वो स्थिति को अच्छे से समझ नहीं पाएंगे, ऐसे मेंं डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर महिला को किसी सलाहकार (काउंसलर) के पास जाने की सलाह दे सकती हैं। सलाहकार संज्ञानात्मक व्यवहारवादी (Cognitive behavioral therapy, CBT in hindi) या अंतर्वैयक्तिक थैरेपी (Interpersonal therapy, IPT in hindi) के द्वारा इलाज कर सकती है।
सलाहकार सीबीटी द्वारा महिला को अवसाद से निपटने की रणनीतियों को सिखाती है, तो वहीं आईपीटी से यह पता लगाती है कि कहीं तनाव रिश्ते में अनबन को लेकर तो नहीं है, जिसके बाद सलाहकार महिला का उचित इलाज करती है।

अवसादरोधी दवाईयों द्वारा -अवसादरोधी दवाईयां उन महिलाओं को दी जाती है, जिनकी हालत बहुत ज्यादा गंभीर होती है। अवसादरोधी दवाईयां लेने से महिला की हालत में कुछ हफ्ते के बाद ही सुधार दिखने लगता है, जिसके बाद वह धीरे धीरे वो ठीक हो जाएगी।

प्रसवोत्तर अवसाद का इलाज सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरीके से कारगर है। इसके अलावा इसका इलाज समूह, घर पर आदि तरीकों से भी किया जाता है। यह पूरी तरह से आपकी स्थिति पर निर्भर करता है कि आपका इलाज किस तरीके से होगा।

प्रसवोत्तर अवसाद की जटिलताएं क्या है? 
(Postpartum depression ki jatiltayen kya hai)

प्रसवोत्तर अवसाद का अगर सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह गंभीर रूप ले सकता है। डिलीवरी के बाद महिलाएं काफी असहज महसूस करती हैं, जिसकी वजह से वह अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाती हैं। तो चलिए जानते हैं कि प्रसवोत्तर अवसाद (stress after pregnancy in hindi) की जटिलताएं क्या क्या है।

डिलीवरी के बाद टेंशन का मां पर असर -प्रसवोत्तर अवसाद में अगर महिला का इलाज सही से नहीं किया गया तो यह लंबे समय तक बना रह सकता है। इसके अलावा भविष्य में जब भी इसका इलाज होगा, तो यह पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाएगा, क्योंकि यह कभी भी हो सकता है।

प्रसव के बाद टेंशन का पिता पर असर -प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) का असर सिर्फ मां पर ही नहीं होता है, बल्कि पिता पर भी होता है। दरअसल, इसका असर उन सभी लोगोंं पर होता है, जोकि नवजात शिशु से जुड़े होते हैं। गौरतलब है कि मां के ठीक न होने का असर पूरे परिवार पर पड़ता है, जिसकी वजह से पूरा परिवार टेंशन में रहता है।

प्रेगनेंसी के बाद तनाव का शिशु पर असर -अगर प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) का उचित इलाज नहीं किया गया तो इसका असर बच्चे पर भी पड़ता है। दरअसल, मां का सही इलाज न होने की वजह से बच्चे को भूख और मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है, ऐसे में अवसाद ग्रसित महिला को अपना इलाज अच्छे से कराना चाहिए।

प्रसवोत्तर अवसाद से कैसे बचा जा सकता है? 
(Postpartum stress se kaise bacha ja sakta hai)

प्रसवोत्तर अवसाद से निपटने के लिए महिलाएं कुछ तरीकोंं को अपना सकती हैं। साथ ही अगर महिलाएं गर्भावस्था के दौरान से ही अपना खास ख्याल रखेंगी, तो उन्हें प्रसव के बाद इस समस्या से निपटने में आसानी होगी। तो चलिए अब जानते हैं कि आखिर प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) से निपटने के लिए महिलाएं क्या क्या कर सकती हैं।
अपनी देखभाल अच्छे से करें।
नींद पर्याप्त मात्रा में लें।
खुश रहने की पूरी कोशिश करें।
खाली समय में टेलीविजन वगैरह देखें।
शॉपिंग करने के लिए जाएं।
पति के साथ रोमांटिक डेट पर जाएं।
कामकाजी महिलाओं को अपने मातृत्व अवकाश को बढ़ा देना चाहिए, जब उन्हें अच्छा महसूस हो तभी दफ्तर जाना शुरू करें।
अपने शिशु के साथ खूब खेलें।
अपनी भावनाओं को अपने पति के साथ सांझा करने में बिल्कुल न हिचकिचाएं।
नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें।
जितना हो सके उतना आराम करने की कोशिश करें।
दूसरोंं से मदद लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं।
इस तरह से महिलाएं गर्भावस्था के बाद होने वाले तनाव से मुक्त हो सकती हैं। इसके साथ ही महिलाओं को इस दौरान अपने लिए समय निकालना चाहिए, क्योंंकि अगर उनके पास खुद के लिए समय है, तो वह प्रसवोत्तर अवसाद (postpartum depression in hindi) को हरा सकती हैं।

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