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स्तनपान कराने से बच्चे के साथ-साथ माँ का भी होता है फायदा


बच्चे को स्तनपान कराने से बच्चे के साथ-साथ माँ का भी होता है फायदा

मां का दूध शिशु को पोषण देने के साथ उसे कई रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। इतना ही नहीं मां का दूध शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होता है। शायद यही वजह है कि शिशु के लिए मां के दूध को अमृत कहा जाता है। खास बात यह है कि आसानी से पचने के साथ मां का दूध शिशु के पेट में हर तरह की गड़बड़ी की आशंका को भी कम कर देता है। साथ ही साथ जितना फायदा मां का दूध बच्चों के लिए होता है। उतना ही फायदा मां के लिए स्तनपान से भी है।

आइए जानते हैं कि शिशु और मां दोनो के लिए स्तनपान के फायदें:

1.कैलोरी घटाता है: (Calorie Incinerator) .

माँ बच्चे को अपने दूध पिलाने से कई कैलोरी स्वचालित रूप से घटा सकती है | प्रति दिन 500 कैलोरी तक कम कर सकते हैं । इसका मतलब है कि आपको गर्भावस्था के वज़न कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा स्तनपान कराना चाहिए, जिससे आपका वज़न भी घटेगा और बच्चा भी सेहतमंद रहेगा |
2. स्तन का दूध सर्वश्रेष्ठ दवा है: (Breast-milk is the Best Medicine)

स्तन का दूध न केवल पौष्टिक होता है बल्कि चमत्कारी औषधि के रूप में भी काम करता है | उदाहरण के लिए, आपके आँखों में कभी संक्रमण (infection) हो तो स्तनपान के लेपन करने की कोशिश करें तो कुछ मिनटों में सूजन कम हो जाता है । माँ का दूध शक्तिशाली है !!
3. कैंसर का खतरा कम करता है : (Reduced Risk of Cancer)
स्तनपान से लिम्फ नोड्स (lymph nodes) स्तन के अन्य घटकों के साथ सक्रिय हो जाते हैं। ये स्तन कैंसर का खतरा कम करते हैं | जो माँ अपने बच्चे को स्तनपान नहीं कराती है उन्हें स्तनपान करने वाली महिला की तुलना में स्तन कैंसर होने की अधिक संभावना होती है। पूर्व रजोनिवृत्ति ( pre menopausal) में गर्भाशय के कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है |
4. बेमिसाल ऊर्जा का लाभ मिलता है : (Gain of Unmatched Energy)

हर मां जब आप अपने बच्चे को स्तनपान कराती हैं ,उन्हें एक अद्वितीय शक्ति महसूस होती है। यह आपको सक्रिय रखता है और बच्चे के विकास के लिए भी ये बहुत महत्वपूर्ण है।

5. मासिक धर्म की छुट्टी: (Menstrual Vacation)

जब तक माँ अपने बच्चे को अच्छी तरह स्तनपान कराती है, तब तक आपकी मासिक स्त्रीबीजजनन(ovulation) की अवधि बढ़ती है | अर्थात प्रसव के बाद मासिक धर्म चक्र की शुरुआत देरी से होती है। जैसे-जैसे स्तनपान कम हो जाती है, वापस मासिक चक्र शुरू होता है स्तनपान कराने से ओवुलेशन में देरी होती है | ये प्रक्रिया या वक़्त हर माँ के लिए अलग भी हो सकता है |


6.माँ और बच्चे के बीच अनोखा बंधन : (Bonding with the New Born)

स्तनपान कराने के दौरान माँ और बच्चे के बीच के संबंध में सुधार होता है | शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से माँ और बच्चे का रिश्ता और गहरा होता है।
7. शीघ्र घाव भरता है : (Improved Healing)
जन्म देने की प्रक्रिया के दौरान माँ के शरीर को बहुत अधिक घाव और पीड़ा से गुज़रना पड़ता है।स्तनपान की प्रक्रिया इन घावो को तेजी से भरती है और नई माँ को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में वापस लाने में मदद करता है।
8.वजन कम होता है : (Less Weight Gain)
जैसा कि पहले कहा है, स्तनपान से कैलोरी घटती है | इसलिए वजन बढने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है | स्तनपान कराने से अतिरिक्त वज़न कम कर सकते है।
9.हार्मोन का संतुलन बनाए रखता है : (Hormonal Balance)
स्तनपान हार्मोन का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जब माँ बच्चे को दूध पिलाती है, तब तक आपको अपने चेहरे के मुहासे के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपके हार्मोन को ये बरकरार रखता हैं और इससे माँ अपने दैनिक कार्य को ख़ुशी और बिन बाधा कर सकते हैं |
10.प्राकृतिक गर्भनिरोधक है : (Natural Contraceptive)
स्तनपान अगले बच्चे के जन्म को नियंत्रित करने का एक स्वाभाविक तरीका है। यानी जब आप स्तनपान कर रहे हैं, तो गर्भवती होने की संभावना बहुत कम है। 98 - 99 प्रतिशत स्तनपान इसे नियंत्रण करता है । तो आप बिना कंडोम प्राकृतिक रूप से गर्भ निरोधक का काम करता है। ये प्रक्रिया या हर माँ के लिए अलग भी हो सकती है।

शिशु को फायदे
मां का दूध बच्चे को रोगों से लड़ने में मदद करता है। मां के स्तन से पहली बार निकलने वाले दूध के साथ गाढ़ा पीले रंग का एक द्रव भी आता है, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं। इसे शिशु को जरूर पिलाना चाहिए । कहा जाता है कि शिशु को संक्रमण से बचने और उसकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में वह काफी मदद करता है।
मां का दूध बच्चे के दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रखता है। इसे पिलाने से बच्चों की बौद्धिक क्षमता भी बढ़ोतरी होती है।
मां का दूध शिशु को उसी तापमान में मिलता है जितना तापमान खुद उसके शरीर का होता है। जिसकी वजह से शिशु को सर्दी लगने का खतरा कम रहता है।
एक महिने से एक साल की उम्र में शिशु में SIDS (अचानक शिशु मृत्यु संलक्षण) का खतरा बना रहता है।जबकि मां का दूध शिशु को इस खतरे से बचाए रखता है।
माँ की सेहत के लिए फायदेमंद होता है बच्चे को दूध पिलाना

एक लड़की के लिए मां बनना बहुत ही सुखद एहसास होता है. मां बनने के बाद बच्चे को दूध पिलाने में मां को सबसे ज्यादा खुशी मिलती है. यह बात तो सभी जानते हैं कि एक बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए मां का दूध कितना जरूरी होता है. नवजात शिशु को स्तनपान करवाने से उसे सभी प्रकार के पोषक तत्वों की प्राप्ति होती है. पर क्या आपको पता है कि बच्चे को दूध पिलाने से सिर्फ बच्चे को ही नहीं बल्कि मां को भी बहुत सारे फायदे मिलते हैं. आज हम आपको स्तनपान के कुछ फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं.


1- एक रिसर्च के अनुसार बच्चे को दूध पिलाने से उसे स्टमक इंफेक्शन, सांस संबंधी समस्याएं और किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन नहीं होता है. कई बार नवजात शिशुओं में डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं देखने को मिलती है. ऐसे में मां का दूध बच्चे को इन सभी बीमारियों से बचा कर रखता है. 

2- मां का दूध बच्चे के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह होता है. जिससे बच्चा किसी भी तरह की एलर्जी से बचा रहता है. जो बच्चे मां की दूध की जगह गाय या बकरी का दूध पीते हैं वह वह जल्दी एलर्जी और इन्फेक्शन का शिकार हो जाते हैं. 
3- स्तनपान से बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर बनती है और साथ ही उनका बौद्धिक विकास भी अच्छे से होता है. जो बच्चे बचपन में मां का दूध पीते हैं उन्हें युवावस्था में मोटापे की समस्या नहीं होती है. 4- स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं बल्कि मां के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. बच्चे को दूध पिलाने से मां का तनाव कम होता है. ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान महिलाओं के शरीर से ऑक्सीटोसिन हार्मोन बाहर निकल जाते हैं जिससे उसका शारीरिक और मानसिक तनाव दूर हो जाता है.

बच्चा राइट हैंडेड होगा या लेफ्ट, स्तनपान से जुड़ा है इसका नाता

आपका बच्चा बड़ा होकर लेफ्टी बनेगा या फिर राइटी होगा मतलब वो दायें हाथ का इस्तेमाल करेगा या फिर बायां, यह बात आपके स्‍तनपान पर भी निर्भर करता है। कितने समय तक शिशु को स्‍तनपान करवाया है। जी हां, एक शोध में पता चला है कि बच्चे को स्तनपान यानी ब्रेस्टफीडिंग का समयावधि शिशु के हाथ का उपयोग करने पर असर डाल सकता है।

इस शोध के अनुसार नौ माह से ज्यादा समय तक स्तनपान करने वाले शिशु दाएं हाथ से काम करते हैं। दूसरी तरफ पाया गया कि जिन शिशुओं ने 9 माह से कम दूध पिया है या बोतल से दूध पिया, उनमें बाएं हाथ से काम करने वाले अधिक मिले।

इसका कारण यह हो सकता है कि हाथ पर नियंत्रण करने वाला दिमाग का हिस्सा दिमाग के एक हिस्से में स्थिर कर जाता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि संभव है कि स्तनपान से यह प्रक्रिया गति पकड़ लेती है जिससे शिशु के दाएं या बाएं हाथ से काम करने का निर्धारण होता है।

हमारे हाथ और बांहों की हरकत हमारे दिमाग की वजह से होती है जो बदले में रीढ़ की हड्डी को हरकत करने के लिए सिग्‍नल भेजता है। लेकिन दिमाग का जो हिस्सा हमारी हरकत के लिए ज़िम्मेदार है वो शुरुआत से ही रीढ़ की हड्डी से नहीं जुड़ा होता है| बच्चे का किस हाथ का अधिक इस्तेमाल करना उसी वक़्त समझ आ जाता है जब बच्चा गर्भ में अपने 13 हफ़्तों में अंगूठा चूसना शुरू करता है|

जीन्स पर भी निर्भर
विशेषज्ञों की मानें तो बच्चा राइटी होगा या लेफ्टी, यह बात बहुत हद तक बच्चे के जीन्स पर भी निर्भर करती है।
के दूध का कोई विकल्प नहीं, जानें स्तनपान कराने के फायदे –


स्तनपान न करवाने से बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ता है। मां के दूध की तुलना दुनिया के किसी भी और आहार से नहीं की जा सकती है। मां का दूध किस-किस तरह से बच्चे को फायदा पहुंचाता है। स्तनपान करवाना न सिर्फ बच्चे के लिए, बल्कि मां के लिए भी फायदेमंद होता है। क्यों करवाएं बच्चे को स्तनपान, बता रही हैं डॉ. दर्शनी प्रिय


मां बनने का सुख अतुलनीय है। पर, यह सुख अपने साथ ढेरों जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। मां की इन्हीं जिम्मेदारियों में से एक है, शिशु के लिए पोषण उपलब्ध कराना। जन्म के बाद मां का दूध बच्चे का पहला आहार होता है। यह शिशु के जन्म लेने से उसके बड़े होने तक में उसके चहुंमुखी विकास में मददगार होता है। ऐसा माना जाता है कि जिन बच्चों ने लंबे समय तक स्तनपान किया होता है, उनका मानसिक विकास स्तनपान न करने या कम समय तक करने वाले बच्चों की तुलना में ज्यादा होता है। पोषक तत्वों से भरपूर मां के दूध में वो सारी खूबियां हैं जो बच्चे को तमाम बीमारियों से दूर रखती हैं। मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि स्तनपान से शिशु और मां के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है, जिससे बच्चा मां की गंध को जल्दी पहचानने लगता है।


करे शिशु का दिमाग तेज
मां के दूध में प्राकृतिक तौर पर डीएचएचए नाम का तत्व पाया जाता है जो दिमाग को चुस्त और तेज बनाता है। इससे शिशु को भावनात्मक सुरक्षा का एहसास होता है, जिससे मस्तिष्क के उचित विकास में सहायता मिलती है। स्तनपान न करने की तुलना में स्तनपान करने वाले बच्चे समूह और स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करते हंै।
रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास
मां का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर के भीतर मौजूद हानिकारक सूक्ष्म जीवों को नष्ट करके शरीर के भीतर ऐसे सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाते हैं जो बच्चे की सर्दी ,जुकाम और अन्य संक्रमित बीमारियों से रक्षा करते हंै। मां का दूध बच्चे के लिए एक तरह से सुरक्षा कवच का काम करता है जो भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारयों से लड़ने में उसकी मदद करता है। मां के स्तन से पहली बार निकलने वाला गाढ़ा पीले रंग का द्रव्य संक्रमण से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद करता है।
दांत और जबड़े को दे मजबूती 
शिशु का मुंह स्तन से दूध पीने के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल होता है। इस प्रक्रिया से बच्चे का मुंह ठीक तरह से विकसित होता है। इससे दांत निकलने में सहायता मिलती है। स्तनपान करने से बच्चों के जबड़े न केवल मजबूत होते हैं, बल्कि आगे चलकर दांत निकलने में भी उन्हें कोई परेशानी नहीं होती।

बचाए मोटापे से
शिशु जब मां का दूध पीता है तो पेट भरते ही उसे असीम तृप्ति का एहसास होता है, जिससे वह आवश्यकता से ज्यादा दूध नहीं पी पाता और उसके शरीर पर अनावश्यक चर्बी नहीं चढ़ती। बोतल से दूध पीने वाले बच्चे जरूरत से ज्यादा दूध पीते हैं और मोटापे का शिकार हो जाते हैं। मां का दूध सुपाच्य होता है जो आगे चलकर बच्चे में रक्त कैंसर, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का खतरा भी कम करता है।
दूर करे एलर्जी
अन्य प्रकार के दूध या आहार से शिशु को तरह-तरह की एलर्जी होने का खतरा बना रहता है। लेकिन मां के दूध के साथ ऐसा खतरा नहीं होता। मां के दूध में एक नैसर्गिक गुण है जो बच्चे को एलर्जी से बचाता है। मां के खानपान में बदलाव से भले ही दूध के गंध या रंग में बदलाव हो जाए,लेकिन इससे शिशु को कभी एलर्जी नहीं होती ।


इन स्थितियों में न कराएं स्तनपान 


’ यदि आप टीबी या एड्स जैसी गंभीर बीमारी से
पीड़ित हैं।
’ यदि किसी विशेष प्रकार की दवा का सेवन कर रही हैं।
’ यदि आप फैक्ट्री आदि में काम कर रही हैं क्योंकि फैक्ट्री का जहरीला धुआं दूध के माध्यम से शिशु के शरीर तक पहुंच सकता है।
’ यदि आप किसी भी तरह का नशा करती हैं।
मां को भी होता है लाभ
’ स्तनपान कराने से मां की कैलोरी अधिक बर्न होती है और प्राकृतिक रूप से वजन घटता है और मोटापा कम होता है।
’ स्तनपान एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक माना जाता है।
’ यह शिशु के साथ भावनात्मक लगाव पैदा करता है।
’ पोस्ट नेटल अवसाद को दूर करता है।
’ गर्भाशय को पुराने आकार में वापस लाने में मदद करता है।
’ स्तनपान से महिलाओ में स्तन या गर्भाशय के कैंसर का खतरा कम हो जाता है।
’ इससे तनाव कम होता है और प्रसव के बाद होने वाला रक्तस्राव भी कम होता है।

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