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गर्भधारण कैसे होता है ?


गर्भधारण कैसे होता है ?
 (Pregnancy kaise hoti hai)

आपने अब तक अपनी ज़िंदगी में कई गर्भवती महिलाओं को देखा होगा और उनसे उनके अनुभवों के बारे में भी जाना होगा। मगर, क्या कभी आपने ये जानने की कोशिश की है कि महिलाएं गर्भवती कैसे होती हैं? जी हाँ, आपने सही पहचाना कि वो सेक्स करने से गर्भवती होती हैं, लेकिन केवल इतना जानने से आप गर्भधारण (conception in hindi) की प्रक्रिया को सही तरह से नहीं समझ पाएंगी।

गर्भधारण (conception in hindi) की असली प्रक्रिया तो सेक्स के बाद ही शुरू होती है। हम जानते हैं आपके मन में इससे जुड़े कई सवाल उठ रहे होंगे, इसलिए इस ब्लॉग में हम आपको बता रहे हैं कि गर्भधारण कैसे होता है और साथ ही इससे जुड़ी कुछ अहम जानकारियां भी दे रहे हैं।

गर्भधारण करने के लिए शरीर कैसे तैयार होता है? 
(Pregnancy ke liye sharir kaise taiyar hota hai)

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गर्भधारण करने के लिए महिला व पुरुष का शरीर निम्न तरह से तैयार होता है -


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पुरुष के शरीर में गर्भधारण की तैयारी (Purush ke sharir me garbhdharan ki taiyari) -
पुरुषों के शरीर में लगातार शुक्राणुओं का निर्माण होता रहता है।
एक शोध के अनुसार, उनके अंडकोषों में हर सैकंड लगभग 1500 शुक्राणु बनते हैं।
इनके निर्माण के लिए टेस्टोस्टेरॉन नामक हार्मोन जिम्मेदार होता है।
एक शुक्राणु को पूरी तरह से बनने में करीब दस हफ्ते का समय लगता है।
पुरुष के लिंग से एक बार में निकलने वाले वीर्य में औसत रूप से करीब साढ़े तीन करोड़ शुक्राणु होते हैं और सभी का केवल एक ही मक़सद होता है - अंडे को निषेचित करना।


महिला के शरीर में गर्भधारण की तैयारी (Mahila ke sharir me garbhdharan ki taiyari)-
हर महीने एक निश्चित समय पर उनके दिमाग की पीयूष ग्रन्थि फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (एफएसएच) का स्राव करती है, जो अंडाशयों में अंडों को विकसित होने के लिए प्रेरित करता है और ओवुलेशन की प्रक्रिया शुरू होती है।
इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगता है।
अतिरिक्त एस्ट्रोजन हॉर्मोन की वजह से ल्युटीनाइजिंग हॉर्मोन (एलएच) का स्तर बढ़ जाता है।
इससे परिपक्व अंडे वाला छेद खुल जाता है और अंडा अंडाशय से बाहर फैलोपियन ट्यूब में आ जाता है।
जब अंडा अपनी जगह से बाहर निकल जाता है, तो वो जगह कोर्पस ल्युटियम में बदल जाती है।
कोर्पस ल्युटियम एक विशेष हॉर्मोन का स्राव करती है, जिससे गर्भाशय में खून व पोषण से भरपूर एक परत बनती है और महिला गर्भधारण (conception in hindi) करने के लिए तैयार हो जाती है।

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सेक्स के बाद वीर्य का क्या होता है? 
(Sex ke baad virya ka kya hota hai)


जब शारीरिक संबंध बनाने के बाद आप थक कर लेट जाती हैं और आराम करती हैं, तब आपकी योनि में मौजूद शुक्राणुओं का असली काम शुरू होता है। नीचे हम क्रमबद्ध ढंग से यह बता रहे हैं कि आपकी योनि से लेकर अंडे तक का सफर शुक्राणु कैसे पूरा करते हैं -


आपके जीवनसाथी के लिंग से आपकी योनि में आने के साथ ही शुक्राणुओं की रेस (प्रतिस्पर्धा) शुरू हो जाती है। सभी को अंडे तक पहुंचने की चाहत होती है, लेकिन जो सबसे ताक़तवर होगा और सही रास्ता चुनेगा वही अंडे तक पहुंच पायेगा।


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आपकी योनि का वातावरण शुक्राणुओं के लिए जानलेवा होता है। ऐसे में आपके पति का वीर्य एक जैल में बदलकर उन्हें इससे सुरक्षा देने की कोशिश करता है। इसके बावजूद लाखों शुक्राणु योनि में पहुंचने के पांच मिनट से आधे घण्टे बाद ही मर जाते हैं।


घबराइए मत अभी भी आपकी योनि में करोड़ों शुक्राणु मौजूद हैं! बाकी बचे हुए शुक्राणु आगे गर्भाशय के मुंह यानी सर्विक्स की तरफ बढ़ जाते हैं और वीर्य का बचा हुआ जैलनुमा भाग पीछे रह जाता है।


आम दिनों में सर्विक्स पर म्यूकस की एक गाढ़ी परत मौजूद होती है, जिसे पार कर पाना शुक्राणुओं के लिए लगभग असंभव होता है। मगर, आपके ओवुलेशन के समय यह म्यूकस काफी पतला व लिसलिसा हो जाता है और शुक्राणुओं को आगे जाने देता है। साथ ही इस म्यूकस में नहाने की वजह से स्पर्म यानी शुक्राणु की जीवित रहने की क्षमता भी बढ़ जाती है।


सर्विक्स को पार करने के बाद शुक्राणु गर्भाशय में प्रवेश करते हैं और तेजी से आगे बढ़ते हैं। अंडे तक पहुंचने के लिए उन्हें लगभग 18 सेंटीमीटर की दूरी तय करनी होगी। एक औसत शुक्राणु 15 मिनट में करीब 2.5 सेंटीमीटर की दूरी तय करता है। सबसे तेज शुक्राणु लगभग 45 मिनट में अंडे तक पहुंच सकते हैं, जबकि बाकियों को इसमें 12 घण्टे तक का समय लग सकता है।


गर्भाशय में स्थित म्यूकस व बारीक बाल जैसी संरचनाओं और गलत दिशा में जाने की वजह से करोड़ों शुक्राणु यहीं फंसे रह जाते हैं।


बाकी बचे शुक्राणुओं के सामने आगे जाकर दो फैलोपियन ट्यूब आती हैं और उनमें से किसी एक में अंडा मौजूद या आने वाला होता है। लगभग आधे शुक्राणु गलत फैलोपियन ट्यूब चुन लेते हैं और खो जाते हैं।


फैलोपियन ट्यूब में छोटे छोटे बाल होते हैं और ज्यादातर शुक्राणु उन्हीं में उलझ कर रह जाते हैं या थक कर मर जाते हैं।

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केवल कुछ दर्जन शुक्राणु ही अंडे तक पहुंच पाते हैं, ये सबसे ज्यादा ताक़तवर होते हैं। यहां पहुंचने के बाद भी उनका सफर खत्म नहीं होता है। अब उनके सफर का अंतिम और सबसे मुश्किल पड़ाव शुरू होता है। सभी को अंडे के अंदर जाने की जल्दी होती है, इसलिए वो अंडे की बाहरी परत में छेद करके उसमें घुसने की कोशिश करते हैं।


जैसे ही एक शुक्राणु अंडे के सुरक्षा कवच को तोड़कर उसके अंदर घुस जाता है, वैसे ही अंडे की बाहरी परत कठोर हो जाती है और बाकी शुक्राणुओं के लिए उसमें घुसना असंभव हो जाता है।


अंदर जाने के बाद शुक्राणु के भीतर मौजूद अनुवांशिक जानकारी युक्त पदार्थ (गुणसूत्र या क्रोमोसोम) अंडे के केंद्रीय भाग से जुड़कर एक नई कोशिका का निर्माण करता है और अंडा सफलतापूर्वक निषेचित हो जाता है।

अंडा निषेचित होने के बाद क्या होता है? 
(Egg fertilise hone ke baad kya hota hai)


जब अंडा व शुक्राणु मिलकर एक हो जाते हैं, तो इस प्रक्रिया को अंडे का निषेचित होना कहते हैं। इसके बाद निषेचित अंडा गर्भाशय तक का सफर निम्न चरणों में पूरा करता है :
फैलोपियन ट्यूब से गर्भाशय तक का सफर - निषेचित होने के साथ ही अंडे की कोशिका विभाजित होने लगती है और इसके साथ ही फैलोपियन ट्यूब में स्थित बालों जैसी संरचना की मदद से वह गर्भाशय की तरफ बढ़ने लगता है। धीरे धीरे अंडा गर्भाशय की तरफ बढ़ता है और उसकी कोशिकाएं लगातार विभाजित होकर बढ़ती रहती हैं।

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फैलोपियन ट्यूब के मुंह तक पहुंचने में अंडे को लगभग तीन से सात दिनों का समय लगता है। तब तक अंडा लगभग सौ कोशिकाओं के एक गुच्छे (ब्लास्टोसाइट) में बदल चुका होता है और गर्भाशय की दीवार उसके स्वागत के लिए तैयार हो जाती है।
अंडे का गर्भाशय की दीवार से जुड़ना (इंप्लांटेशन) - कुछ दिन फैलोपियन ट्यूब में रहने के बाद अंडा वहां से बाहर निकल कर गर्भाशय में आ जाता है। यहाँ वह गर्भाशय से जुड़ने के लिए सबसे अच्छी जगह ढूंढकर जुड़ने की तैयारी करने लगता है। सही जगह मिलने के बाद अंडे की ऊपरी परत हट जाती है और वह गर्भाशय से जुड़ जाता है। अब यह लगातार तेजी से बढ़ता रहेगा और जल्दी ही एक खूबसूरत बच्चे का रूप ले लेगा।

इम्प्लांटेशन के दौरान कुछ महिलाओं की योनि से हल्का खून निकलता है, इसे स्पॉटिंग कहते हैं। कुछ महिलाएं इस गलती से पीरियड यानी मासिक धर्म समझ लेती हैं और गर्भावस्था के लक्षण दिखने से पहले उन्हें पता ही नहीं चलता कि वो गर्भवती हैं।

सेक्स करने के कितने दिन बाद गर्भधारण होता है? 
(Sex karne ke kitne din baad garbhdharan hota hai)


निषेचित अंडे के गर्भाशय की अंदरूनी परत से जुड़ने की प्रक्रिया को इम्प्लांटेशन कहते हैं। जब तक निषेचित अंडा आपके गर्भाशय से नहीं जुड़ता है, तब तक आपको गर्भवती नहीं माना जा सकता है। इम्प्लांटेशन, सेक्स के तुरंत बाद होने वाली प्रक्रिया नहीं है, इसमें थोड़ा समय लगता है।

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इम्प्लांटेशन के लिए अंडे का निषेचित होना ज़रूरी है, इसमें लगभग एक से पांच दिन का समय लग सकता है। इसके बाद निषेचित अंडे को फैलोपियन ट्यूब से गर्भाशय में आना होता है, इसमें उसे करीब सात दिन लगते हैं। गर्भाशय में आने के बाद उससे जुड़ने की सही जगह ढूंढने में भी अंडे को लगभग दो से तीन दिन का वक़्त लग सकता है।

कुल मिलाकर सेक्स करने के पांच से पंद्रह दिनों के अंदर अंडे का इम्प्लांटेशन होता है, इसलिए हम कह सकते हैं कि सही समय पर (ओवुलेशन से एक या दो दिन पहले) सेक्स के बाद गर्भवती होने में आपको पांच से पंद्रह दिनों का वक़्त लग सकता है।

सेक्स करने के कितने दिन बाद गर्भावस्था के लक्षण दिखते हैं? 
(Sex karne ke kitne din baad pregnancy ke lakshan dikhai dete hai)

भले ही अंडे का निषेचन पांच मिनट में हो जाए या पांच दिनों में, लेकिन आपको इसके तुरंत बाद गर्भावस्था के लक्षण दिखाई नहीं देंगे।

कुछ महिलाएं ये दावा करती हैं कि उन्हें सेक्स करने के कुछ घण्टों बाद ही पता चल गया था कि उन्होंने गर्भधारण (conception in hindi) कर लिया है। मगर, सच्चाई ये है कि वैज्ञानिक आधार पर ऐसा होना असंभव है, क्योंकि गर्भावस्था का कोई भी लक्षण, निषेचित अंडे के गर्भाशय से जुड़ने (यानी इम्प्लांटेशन) से पहले दिखाई नहीं दे सकता है।

सेक्स के बाद निषेचित अंडे का इम्प्लांटेशन होने में लगभग पांच से पंद्रह दिन लगते हैं यानी आपको सेक्स के कम से कम पांच से पंद्रह दिनों बाद गर्भवती होने के लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है कि आपको इम्प्लांटेशन के तुरंत बाद गर्भावस्था के लक्षण महसूस होने लगें।

इम्प्लांटेशन के समय अंडा अपने कवच से बाहर निकल कर विकसित होने लगता है और कोशिकाओं को पोषण देने के लिए सबसे जरूरी अंग प्लेसेंटा का निर्माण करता है। आमतौर पर इस अंग से निकलने वाले हॉर्मोन व एस्ट्रोजेन-प्रोजेस्ट्रॉन हॉर्मोन के बढ़े हुए स्तर की वजह से आपको गर्भावस्था के लक्षण महसूस होते हैं।

अधिकतर महिलाओं को सही समय पर (ओवुलेशन से एक या दो दिन पहले) किये गए सेक्स के लगभग एक महीने बाद गर्भधारण के लक्षण (symptoms of conception in hindi) दिखाई देते हैं। कुछ महिलाओं को ये लक्षण महसूस नहीं होते और उन्हें लंबे समय तक पता ही नहीं चलता है कि वो गर्भवती हो चुकी हैं।

प्रेगनेंसी टेस्ट कब करना चाहिए? 
(Pregnancy test kab kare)


आप शायद यह जानने के लिए काफी उत्सुक होंगी कि आप प्रेगनेंट हो चुकी हैं या नहीं और इसलिए आप एक या दो हफ्ते बाद ही प्रेगनेंसी टेस्ट करके इसका पता लगाना चाहेंगी। मगर, प्रेगनेंसी टेस्ट का परिणाम भ्रूण के प्लेसेंटा या अपरा द्वारा स्रावित किये जाने एचसीजी हॉर्मोन की मात्रा पर निर्भर करता है।

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आपको अपना अगला मासिक धर्म ना आने के बाद या सेक्स के दो हफ्ते बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करके देखना चाहिए। अगर आप गर्भवती हैं, तो इस समय तक आपके शरीर मे एचसीजी हॉर्मोन का स्तर काफी बढ़ चुका होगा, जिसका पता प्रेगनेंसी टेस्ट किट के ज़रिए आसानी से लग सकता है।

अगर आपका मासिक चक्र अनियमित रहता है, तो आपको सेक्स के कम से कम तीन हफ्ते बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए। इससे आपको सटीक परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। मगर, इसके साथ ही आपको इस बारे में डॉक्टर की सलाह भी लेनी चाहिए। वो आपके खून की जांच करके आपकी गर्भावस्था की पुष्टि कर सकते हैं।

गर्भधारण (conception in hindi) दुनिया की सबसे रहस्यमयी प्रक्रिया है। आप अक्सर ये सोचकर हैरान होती होंगी कि कैसे एक नन्हा सा शुक्राणु आपके अंडे से मिलकर एक बच्चे के रूप में विकसित हो जाता है। हमें उम्मीद है - ब्लॉग में दी गयी जानकारी की मदद से आप गर्भधारण (conception in hindi) को बेहतर ढंग से समझ गयी होंगी और जान गयी होंगी कि गर्भधारण कैसे होता है।

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