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प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए


प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए और अच्छी तरह सोने के टिप्स 
(Pregnancy me kaise sona chahiye; achhi tarah sone ke tips)
प्रेगनेंसी में नींद न आना (pregnancy me nind na aana) लगभग हर गर्भवती महिला की शिकायत होती है। लेकिन गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में नींद की समस्याएं अलग अलग हो सकती है। गर्भावस्था में आरामदायक ढंग से न सो पाने से गर्भवती महिलाओं में तनाव और चिड़चिड़ापन आ जाता है। इस ब्लॉग में प्रेगनेंसी में नींद न आने (pregnancy me nind na aana) के कारण, जुड़ी समस्याएं एवं उपायों का जिक्र किया जा रहा है।
1. गर्भावस्था में नींद न आने के क्या कारण होते है? 
(pregnancy me nind na aane ke karan kya hote hai)विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में गर्भावस्था में नींद (sleep during pregnancy in hindi) की समस्या होने के कई कारण हो सकते है। नींद पूरी न होने की समस्या महिलाओं की दिनचर्या पर भी निर्भर करती है। गर्भावस्था में नींद (sleep during pregnancy in hindi) न आने के कारण निम्न है -
तनाव बढ़ने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना (tanav badhne ki wajah se pregnancy me nind na aana): तनाव की वजह से प्रेगनेंसी में अक्सर नींद नहीं आती है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान महिलाओँ को जितना हो सके तनाव से दूर रहना चाहिए।
गर्भाशय का आकार बढ़ने से प्रेगनेंसी में नींद न आना (garbhashay ka aakar badhne se pregnancy me nind na aana): गर्भावस्था के विभिन्न चरणों में गर्भाशय (uterus in hindi) का आकार बढ़ता है जिससे प्रेगनेंट महिलाओं को लेटने में दिक्कत होती है और उन्हें नींद नहीं आती।
बार बार पेशाब आने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना (baar baar peshab aane ki wajah se pregnancy me nind na aana): गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय का आकार निरंतर बढ़ता रहता है जिससे पित्त की थैली पर इसका प्रभाव पड़ता है और बार बार पेशाब आने की अनुभूति होती है। यह अपर्याप्त नींद का एक कारण है।
पीठ और श्रोणि में दर्द होने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना (pith aur shroni me dard hone ki wajah se pregnancy me nind na aana): प्रेगनेंसी में नींद पूरी न होना, पीठ और श्रोणि (pelvic in hindi) में दर्द के कारण हो सकता है।
हाथों और पैरों में सूजन होने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना (hatho aur pairo me sujan hone ki wajah se pregnancy me nind na aana): प्रेगनेंसी में इडिमा (edema during pregnancy in hindi) यानी हाथों और पैरों में सूजन बहुत आम है। भारत में करीब 80 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था में इडिमा से प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से उन्हें नींद की समस्या होती है।
पेट में गैस बनने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना (pet me gas banne ki wajah se pregnancy me nind na aana): गर्भावस्था में ज्यादातर प्रेगनेंट महिलाओं के पेट में गैस बनने के कारण भी उन्हें अनिद्रा की शिकायत होती है।
दिल की धड़कन तेज होने की वजह से प्रेगनेंसी में नींद न आना (dil ki dhadkan tez hone pregnancy me nind na aana):गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान कुछ प्रेगनेंट महिलाओं के शरीर में रक्त का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता और अचानक उनकी दिल की धड़कने अनियमित हो जाती है, जिससे उनकी अच्छी नींद की जरूरत पूरी नहीं हो पाती।
कब्ज की समस्या से प्रेगनेंसी में नींद न आना (kabj ki samasya se pregnancy me nind na aana): प्रेगनेंंसी में महिलाओँ को कब्ज की समस्या के कारण नींद नहीं आती।
स्तनों में सूजन और दर्द होने से प्रेगनेंसी में नींद न आना (stano me sujan aur dard hone ki wajah se pregnancy me nind na aana): गर्भावस्था में महिलाओं के स्तनों में सूजन और दर्द होने के कारण उनकी नींद पूरी नहीं होती
2. प्रेगनेंसी के तीन चरण में नींद की समस्या -
 (pregnancy me nind ki samasya)यहां प्रेगनेंसी में नींद (sleep during pregnancy in hindi) न आने की समस्याओं को तीन चरणों में बांटा गया है, क्योंकि विभिन्न चरणों में समस्याएं भी अलग अलग हो सकती हैं -
पहली तिमाही के दौरान प्रेगनेंसी में नींद की समस्या (sleep during first trimester in pregnancy in hindi) : प्रेगनेंसी में महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल (hormone in hindi) बदलाव होते है। हालांकि पहली तिमाही में प्रेग्नेंट महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन की मात्रा बढ़ने के कारण उन्हें दिन के समय नींद आती है लेकिन गर्भावस्था की कुछ आम परेशानियों की वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती। इनमें जी घबराना, जी मिचलाना और उल्टियां (vomiting in hindi) प्रमुख हैं।
दूसरी तिमाही के दौरान प्रेगनेंसी में नींद की समस्या (sleep during second trimester in pregnancy in hindi) : गर्भावस्था की दूसरी तिमाही शुरू होते ही महिलाओं की नींद की समस्या और बढ़ जाती है। इसका एक बड़ा कारण शारीरिक बदलाव होता है। दूसरी तिमाही में महिलाओं को नींद तो आती है लेकिन एक ही अवस्था में लेटने की समस्या की वजह से महिलाएं नींद पूरी नहीं कर पाती। इसके अलावा कभी-कभी दिन के समय ज्यादा सोने से भी रात को नींद की समस्या होती है।
तीसरी तिमाही के दौरान प्रेगनेंसी में नींद की समस्या (sleep during third trimester in pregnancy in hindi) : गर्भावस्था की तीसरी तिमाही आते आते प्रेगनेंट महिला के पेट का आकार बड़ा और शरीर का वजन काफी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से कई देर तक उन्हें एक ही ओर करवट लेकर लेटने में परेशानी होती है और इससे बार बार उनकी नींद टूट जाती है।
3. प्रेगनेंसी में अच्छी नींद क्यों जरूरी है? (pregnancy me achi nind kyun jaruri hai)

प्रेगनेंसी में अच्छी और आरामदायक नींद से न केवल आपके भ्रूण का पूर्ण विकास होता है बल्कि आप भी स्वस्थ रह सकती हैं। गर्भावस्था में अपर्याप्त नींद के कारण भ्रूण की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity in hindi) पर भी इसका असर पड़ता है।
डॉक्टर कहते हैं, प्रेगनेंसी में गहरी नींद लेेने से महिलाओं की मनोदशा स्वस्थ होती है और उन्हें डरावने सपने नहीं आते।
प्रेगनेंसी में अच्छी नींद से अवसाद (depression in hindi) और तनाव (stress in pregnancy in hindi) दूर होता है।
प्रेगनेंसी में अाराम की नींद से शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव नियंत्रण में रहते हैं।4. प्रेगनेंसी में कैसे सोना चाहिए? (pregnancy me kaise sona chahiye)प्रेगनेंसी के दौरान लगभग हर महिला को अनिंद्रा की समस्या का सामना करना पड़ता है। इसीलिए हम आपको प्रेग्नेंसी के तीन चरणों में अच्छी नींद लेने की जानकारी नीचे दे रहे हैं -प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कैसे सोना चाहिए (pregnancy me kaise sona chahiye) :प्रेग्नेंसी में पहली तिमाही के दौरान पर्याप्त नींद लेने के लिए बिस्तर पर सही करवट से लेटना बेहद जरूरी है। च्यूंकि पहली तिमाही में आपको पेट के बल लेटना नहीं होता है इसीलिए एक आरामदायक अवस्था का चयन करें। इसके बावजूद अगर सोने में असहजता महसूस हो तो आप समय-समय पर करवट बदलती रहें। हालांकि डॉक्टरोंं का कहना है कि बायीं ओर करवट लेकर सोना गर्भ में पल रहे शिशु और मां दोनों के लिए लाभदायक होता है। इससे जरूरी पोषक तत्व और खून आपके गर्भाशय में प्लेसेंटा (placenta in hindi) के माध्यम से भ्रूण तक पहुंचते है।
प्रेगनेंसी दूसरी तिमाही में अच्छी नींद के टिप्स (pregnancy me kaise sona chahiye) :अगर आपने प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही पूरी कर ली है तो थोड़ा निश्चिंत हो जाएं, क्योंकि दूसरी तिमाही में पहली तिमाही की तुलना में तनाव कम होगा और आप पर्याप्त नींद ले सकती हैं। दूसरी तिमाही 16वें से लेकर 24वें हफ्ते में पीठ के बल सोने में आपको तकलीफ हो सकती है। इसीलिए किसी एक दिशा में करवट लेकर सोना चाहिए। गहरी नींद के लिए बायीं ओर करवट लेकर सोएं।
तीसरी तिमाही में अच्छी नींद के टिप्स (pregnancy me kaise sona chahiye) :तीसरी तिमाही के दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं के पेट का आकार पहले से बढ़ जाता है, इसीलिए विशेषज्ञ उन्हें ज्यादातर समय बायीं ओर करवट लेकर लेटने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना हैं कि प्रेग्नेंट महिलाओं को अपने दोनों पैरों के बीच तकिया लगाकर सोना चाहिए। इससे नींद बेहतर आती है।

5. प्रेगनेंसी में अच्छी तरह सोने के उपाय (pregnancy me achhi tarah sone ke upay)प्रेगनेंसी में नींद आने के घरेलू उपाय हैं जिससे आपकी नींद न आने की समस्या कम हो सकती है। गर्भावस्था में नींद आने के घरेलू उपाय नीचे बताए गए -


प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय :गर्भावस्था में नींद के लिए तनावमुक्त रहना बेहद जरूरी है। आप जितना तनाव (stress in hindi) लेंगी, आपको सोने में उतनी ही परेशानी होगी।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय :रोजाना रात को सोने से पहले हल्का भोजन करें। हल्के भोजन से आपको पाचन की समस्या नहीं होगी और आपकी नींद पूरी होगी। जैसे रोटि-सब्जी, दाल, सलाद आदि।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय :अपने आहार को संतुलित रखें और गैस बनाने वाली सब्जियों से परहेज करें, जैसे गोभी, पनीर और मसालेदार खाना न खाएं।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय :प्रेगनेंंसी में अच्छी नींद के लिए रात के समय सोने से पहले खूब सारा पानी न पीएं। इससे आपको बार बार पेशाब आ सकता है और आपकी नींद टूट सकती है।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय :चाय और कॉफी में कैफिन और अन्य हानिकारक तत्व होते हैं जो आपकी नींद में खलल डाल सकते है, इसीलिए सोने से पहले चाय या कॉफी का सेवन न करें।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय : बेहतर नींद के लिए किताबें पड़ना जरूरी माना जाता है। गर्भावस्था में नींद के लिए आप प्रेगनेंसी से संबंधित किताबें पढ़ सकती हैं। इससे प्रेगनेंसी संबंधी जानकारियां हासिल होगी और जल्द ही नींद आएगी।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय :प्रेगनेंसी में डॉक्टर रोजाना एक ही समय पर सोने की सलाह देते हैं। ताकि आपकी सोने की आदत बने और रोज उसी समय आपको नींद भी आए।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय : गर्भावस्था में नींद न आए तो आप सोने से पहले मन को प्रसन्न करने वाले गाने सुन सकती हैं। गाने सुनने से आपको अच्छी यादें याद आएंगी और जल्दी नींद आ जाएगी।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय : गर्भावस्था में नींद के लिए रोज थोड़ी देर योग (yoga in hindi) और प्राणायाम करें। इससे आपका दिमाग शांत होगा और आप निश्चिंत होकर सो सकेंगी।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय : रोज थोड़ी देर पैदल चलने से प्रेगनेंसी से संबंधित कई समस्याओं का समाधान मिलता है जिनमें से नींद भी एक है। इसीलिए रोजाना अपने हर बार के भोजन के बाद थोड़ी देर पैदल चलें।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय : हल्के हाथों से सिर की मालिश करवाएं। जरूरत हो तो हाथों और पैरों की भी मालिश करवा सकती हैं। इससे आपको अच्छी नींद आएगी।
प्रेगनेंसी में नींद आने के उपाय : सोने से पहले, गर्मी के मौसम में ठंडे पानी से और सर्दी के मौसम में गुनगुने पानी से नहाएं।
6. गर्भावस्था में कितना सोना चाहिए (pregnancy me kitna sona chahiye)विशेषज्ञों को कहना है कि गर्भावस्था में महिलाओँ को कम से कम नौ से दस घंटों की नींद जरूर लेनी चाहिए। जिस तरह गर्भावस्था में गर्भवती महिलाओँ को कैलोरी (calories in hindi) की आवश्यकता बहुत बढ़ जाती है, ठीक उसी प्रकार उनकी नींद की आवश्यकता भी काफी बढ़ जाती है। प्रेगनेंसी में महिलाओं को तिमाही के अनुसार नींद लेनी चाहिए। पहली तिमाही में महिलाओं को नींद की कमी महसूस नहीं होती। लेकिन दूसरी और तीसरी तिमाही में अक्सर नींद न आने की और चैन से न सो पाने की समस्या होती है। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि प्रेगनेंसी में महिलाओं को उतनी ही नींद लेनी चाहिए जितनी उनके शरीर को जरूरत हो। इससे आप दिनभर स्वस्थ और तरोताजा महसूस करेंगी। गर्भावस्था में जरूरत से ज्यादा नींद प्रेगनेंसी में हानिकारक भी साबित हो सकती है।
7. प्रेगनेंसी में एसओएस पोजिशन में सोना क्या है? (pregnancy me sos position me sona kya hai)एसओएस सोने की एक एेसी अवस्था है जिसमें आपके भ्रूण को भी गर्भ में ज्यादा से ज्यादा जगह मिल पाती है। गर्भावस्था में महिलाओं के लिए एससोएस पोजिशन (sleep on side during pregnancy in hindi) में सोना अच्छा माना जाता है। सही पोजिशन में सोने से न केवल आपको अच्छी नींद आएगी बल्कि आपकी अन्य कई समस्याएं, जैसे सीने में जलन (heartburn in hindi), पीठ दर्द (back pain in hindi), कमर दर्द और सांस लेने में तकलीफ (breathlessness in hindi) से राहत मिलेगी।प्रेगनेंसी में एसओएस पोजिशन में कैसे सोएं (pregnancy me SOS position me kaise soye) -इसके लिए आपको करीब छह से आठ तकियों की जरूरत होगी। पहले दो तकिये को अपनी कमर के पीछे और दो तकिये को अपने सिर के नीचे लगा लें। फिर बाकि दो तकिये अपने घुटनों के नीचे रखें। उसके बाद अपनी दोनों बाजुओं के नीचे एक-एक तकिया लगाएं।
नोट : तकियों को ऐसे लगाएं ताकि आपकी एड़ियां बिस्तर से बाहर न निकलें।प्रेगनेंसी में नींद न आना (pregnancy me nind na aana) एक बड़ी समस्या है। नींद न आने से प्रेग्नेंट महिला को शारीरिक और मानसिक समस्याएं होती है। प्रेगनेंसी की हर तिमाही में गर्भवती महिलाओं के पेट का आकार अलग होता है, जिससे उन्हें किसी आरामदायक अवस्था में लेटने में दिक्कत होती है। इसी वजह से प्रेगनेंट महिलाओं को नींद नहीं आती। ऊपर ब्लॉग में बताए गए कुछ सामान्य घरेलू उपायों को आजमा कर आप अच्छी, आरादायक और गहरी नींद ले सकती हैं।

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