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ड्रिप्रेशन से बचने के लिए इन 5 आहारों से रहें दूर

डिप्रेशन
ड्रिप्रेशन से बचने के लिए इन 5 आहारों से रहें दूर


डिप्रेशन एक मानसिक विकार है जिसका कोई भी शिकार हो सकता है। इससे प्रभावित होने वाला व्यक्ति लगभग सभी चीजों में अपना रुचि खो देता है। इसलिए डिप्रेशन से बचने के लिए आपको कुछ तरीकों को अपनाना चाहिए, जिसमें आप खुद को कुछ आहरों से दूरी बना सकते हैं।
शराब


यदि आप डिप्रेशन से दूर रहना चाहते हैं, तो आपको शराब से दूरी बनानी होगी। हाल ही में वैज्ञानिकों ने कहा कि अवसाद से दुनिया में 14 करोड़ लोग प्रभावित होते हैं और वे शराब के इस्तेमाल से पैदा हुए रोगों से जूझ रहे हैं।

यह लिवर के साथ आपकी हेल्थ को तो खराब करता ही है, साथ ही इसका ज्यादा सेवन आपको अवसाद में भी डाल सकता है। आपको बता दें कि शराब सीधे आपके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और इसकी गति को धीमा कर देता है।
मीट का सेवन

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डिप्रेशन से यदि आपको मुक्ति पानी है तो आप मीट का कम से कम सेवन कीजिए या हो सके तो आप इससे दूरी बनाकर रखें। विशेष रूप से रेड मीट या डिब्बाबंद मीट आपके स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से हानिकारक है।

आपको बता दें कि इसमें सेचुरेटेड फैट या संतृप्त वसा की उच्च मात्रा होती है, जो इंसुलिन के स्तर को बदलती है। इसके परिणामस्वरूप, न केवल व्यक्ति को उदासी आती है बल्कि कई गंभीर बीमारियों की संभावना भी बढ़ जाती है।
कॉफी


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ऐसा देखा गया है कि कॉफी का उपयोग लोग तनाव को दूर करने या फिर थकान को दूर करने के लिए करते हैं। यह थकान को दूर करके ऊर्जा देने का काम करती है, लेकिन आपको बता दें कि इसका ज्यादा सेवन आपको अवसाद या डिप्रेशन में डाल सकता है।

इसमें मौजूद कैफीन आपकी नींद और खुशी को दूर कर सकती है, जिसके कारण अंत में आपको मानसिक थकान और उदासी का सामना करना पड़ सकता है।


इसके अलावा सिओल नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने चूहे पर प्रयोग करके पाया कि चूहे को देर तक जागती हालत में रखने के बाद जब उसे कॉफी सुंघाई गई तो दिमाग में उन प्रोटीन पर असर पड़ा जो तनाव के लिए जिम्मेदार होते हैं।
चावल का सेवन

कई लोग चावल खाने के बहुत ही आदी होते हैं। ऐसे लोगों को सुबह-शाम चावल खाना बहुत ही पसंद है। लेकिन आपको बता दें कि चावल का अत्याधिक सेवन आपके अंदर उदासी को उत्पन कर सकता है।

इसमें, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो शरीर की ग्लाइसेमिक इंडेक्स को प्रभावित करता है और साथ ही यह हार्मोनल परिवर्तन में भी योगदान देता है और जिसकी वजह से आप दुखी महसूस करते हैं। – चावल मांड के फायदे
सफेद ब्रेड

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कई घरों में सुबह का नाश्ता ब्राउन ब्रेड की जगह सफेद ब्रेड से होता है, लेकिन क्या आपको पता है सफेद ब्रेड आपके लिए कितने हानिकरक है। यह कई रोगों का जन्मदाता है, इसके अलावा यह अवसाद को भी जन्म देता है।

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एक शोध में यह पाया गया है कि सफेद ब्रेड या व्हाइट ब्रेड में मौजूद कार्बोहाइड्रेट की अत्यधिक मात्रा महिलाओं के बीच अवसाद पैदा कर सकता है। यह थकान भी पैदा कर सकता है।
डिप्रेशन के लक्षण


1. यदि आपको लगता है कि आपकी जिंदगी में खुशी नहीं है और आप लगातार उदास हैं तो आप डिप्रेशन के शिकार हैं।
2. छोटी-छोटी चीजें अगर आप चिड़चिड़ा बना देती हैं। किसी भी बात पर आपका मूड ऑफ रहता है जो दिनभर बना रहता है, किसी का साथ भी आपको नहीं भाती है तो ये डिप्रेशन के संकेत हैं।
3. आप ज्यादातर अकेले रहते हैं और किसी सोशल मीट का हिस्सा भी नहीं बनते तो सतर्क हो जाइए, क्योंकि ये डिप्रेशन की निशानी है।
4. भावनाएं ही बताती है कि आप खुश हो या दुखी। भावनाएं ऐसी चीज हैं जो हमें सही मायने में इंसान बनाती हैं। लेकिन डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति में भावनाओं में कमी आने लगती है। ऐसे व्यक्ति पूरे समय एक ही मूड में रहता है।

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डिप्रेशन
अवसाद या डिप्रेशन के 12 कारण



अवसाद एक साधारण बीमारी नहीं है। अवसाद आपको नकारात्मक महसूस करवाता है। यह मस्तिष्क रसायन में होने वाले परिवर्तन की गंभीर बीमारी है। इसके कई कारण हैं जैसे, जेनेटिक्स, हार्मोन परिवर्तन, कुछ दवाइयां या तनावपूर्ण जीवन शैलियां। आज हम आपको अवसाद के कुछ कारकों के बारे में बताएंगे।
अवसाद या डिप्रेशन के कारण
1. गर्मियां

आमतौर पर सर्दियों के मौसम के साथ अधिक मौसमी उत्तेजित बीमारियां जुडी हुई होती हैं। परन्तु गर्म मौसम के आते ही शरीर को गर्मी में अनुसार ढालते समय शरीर में मुश्किलों का अनुभव होता है,जो अवसाद पैदा करता है।
2. बहुत सारे विकल्प

अपने दिन-प्रतिदिन में बहुत अधिक विविधता वास्तव में कुछ लोगों के लिए हानिकारक होती है। कुछ खरीददार आवश्यकताओं के अनुसार चीजों की पहचान कर लेते हैं, जबकि अन्य विकल्प ढूंढते हुए ज्यादा चिंतित होते हैं।
3. धूम्रपान

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निकोटीन मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर गतिविधि को प्रभावित करता है जिसके परिणामस्वरूप डोपामिन और सेरोटोनिन के उच्च स्तर होते हैं। निकोटीन नशे की लत है, इसको छोड़ने के लक्षण अवसाद के साथ जुड़े होते हैं। सिगरेट और अन्य धूम्रपान से बचने से आपके मस्तिष्क के रसायनों को संतुलित करने में मदद मिलती है।
4. खराब नींद की आदतें

नींद की कमी भी अवसाद को बढ़ा सकती है। यदि आप न सोते हैं, तो आपके मस्तिष्क की कोशिकाओं को ठीक से काम करने का समय नहीं मिलता है और मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है।

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5. आहार में ओमेगा -3 फैटी एसिड की कमी

ओमेगा -3 फैटी एसिड जैसे सैल्मन मछली और वनस्पति तेलों का कम सेवन अवसाद के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। ये फैटी एसिड न्यूरोट्रांसमीटर पैदा करते हैं, जो मस्तिष्क के कार्यों को ठीक रखते है।
6. आवासीय क्षेत्र

अनुसंधान ने पाया है कि गावों में रहने वाले लोगों की तुलना में शहर में रहने वाले लोगों के अवसाद विकारों का अधिक खतरा होता है। शहर में रहने वाले लोगों के मस्तिष्क में अधिक गतिविधि, तनाव के उच्च स्तर के कारण मनोवैज्ञानिक बीमारियां पैदा करती है।
7. ख़राब घरेलु रिश्ते

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अध्ययन से पता चलता है कि 20 साल की उम्र से पहले भाई बहनों के साथ अच्छे संबंध न होना, जीवन में बाद में अवसाद पैदा करता है। उचित रिश्ते, बच्चों को समाजीकरण कौशल विकसित करते हैं और भाई-बहन के रिश्तों की कमी अवसाद पैदा करते हैं।
8. सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग

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किशोरावस्था में सोशल नेटवर्किंग साइटों पर बहुत अधिक समय बर्बाद करना, अवसाद से जुड़ा होता है। कुछ विशेषज्ञों ने इस तरह के अवसाद को फेसबुक अवसाद भी बताया है।
9. एक टीवी शो या मूवी की समाप्ति

किसी पसंदीदा टीवी शो, मूवी या बड़े घर का नवीनीकरण जैसी कुछ महत्वपूर्ण चीज़ों का अंत, कुछ लोगों में अवसाद पैदा करता है। डॉक्टर बताते है कि लोग टेलीविजन धारावाहिकों में इतने शामिल हैं, कि वे अपने वास्तविक जीवन और समस्याओं के बारे में भूल जाते हैं, और यह अवसाद का कारण बनता है।
10. थायराइड की बीमारी

जब थायराइड ग्रथि पर्याप्त हार्मोन उत्पन्न नहीं करती, तब अवसाद उत्पन्न हो सकता है जिसे हाइपोथायरायडिज्म के रूप में जाना जाता है, जिसमें उचित दवा की जरूरत होती है।
11. गर्भनिरोधक गोलियां

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गर्भनिरोधक गोलियों में प्रोजेस्टेरोन के सिंथेटिक संस्करण की उपस्थिति के कारण यह महिलाओं में उदासी पैदा करती है। हालांकि, हर महिला को गर्भनिरोधक लेने से ऐसा नहीं होता है, जो अन्य स्थतियों पर भी निर्भर करता है।
12. दवाएं


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कभी-कभी दवाएं जैसे, चिंता, अनिद्रा की दवाएं और गंभीर मुंहासे की समस्या के लिए निर्धारित दवाएं अवसाद या आत्मघाती विचार भी पैदा कर सकती हैं। इसलिए, जब आप नई दवा लेते हैं और इसके बारे में अपने डॉक्टर से पूछ लें, और इसके दुष्प्रभावों को अच्छी तरह से पढ़ें।

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