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ये 1 गि‍लास जूस बनाएगा लीवर को हेल्दी


ये 1 गि‍लास जूस बनाएगा लीवर को हेल्दी, लीवर कभी नहीं होगा खराब!


Boost Your Liver Health: लीवर हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चल सकने में मददगार कई काम करता है. जैसे लीवर ही ग्लूकोज से बनने वाले ग्लाइकोजन को संग्रहित करता है. आप जो भी खाते हैं उससे शरीर को लाभ पहुंचाने का असली काम लीवर (Liver infection) से ही शुरू होता है. असल में लीवर पचे हुए भोजन से वसाओं और प्रोटीनों यानी सभी पोषक तत्वों को नसों तक पहुंचाता है. डीटॉक्सीफिकेशन भी लीवर का एक अहम काम है, जो आपको रोगों से बचाए रखने के ल‍िए बेहद ही जरूरी है. कंसल्टेंट न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. रूपाली दत्ता के अनुसार, एकमात्र अंग जो खुद को साफ करता है, वह लीवर है. हम जो भी खाते हैं, वह यकृत यानी लीवर द्वारा डिटॉक्स‍िफाई (Detoxify) किया जाता है. इसलिए, स्वस्थ भोजन खाना जरूरी है क्योंकि इससे लीवर पर बुरा असर नहीं होता. 

ये जूस करेगा लीवर को हेल्दी बने रहने में मदद -
 Boost Your Liver Health With This 4-Ingredient Healthy Juice
Liver Disease: अगर आप अपने खानपान का ध्यान नहीं रख रहे हैं तो यह लीवर को कई तरह की परेशानि‍या दे सकता है. जैसे लीवर खराब होना (Liver damage, liver failure or fatty liver), लीवर इंफेक्शन (Liver infection). ऐसे में आपको पता होना जरूरी है क‍ि लीवर डेमेज होने के लक्षण (Liver damage symptoms) कैसे होते हैं, ताक‍ि आप उसे सही समय पर पहचान कर सावधान‍ि बरत सकें. डीके पब्लिशिंग की किताब 'हीलिंग फूड्स' के अनुसार, "लीवर को इसके लिए जितनी भी मदद मिल सकती है करना जरूरी है. लीवर हमारे द्वारा खाए गए हर आहार और एनवायरमेंटल टॉक्सि‍न को तोड़ने का काम करता है." यह आपकी पूरी सेहत के लि‍ए एक अहम काम है, जो सि‍र्फ लीवर, जिसे जिगर भी कहा जाता है, करता है. तो अब आप समझ चुके होंगे क‍ि लीवर का सही रहना आपके लि‍ए क‍ितना जरूरी है. एक हेल्दी लीवर आपको हेल्दी लाइफ दे सकता है. तो अगर आप अपने लीवर के स्वास्थ्य को बढ़ावा (boost your liver health) देना चाहते हैं, तो आपको करने होंगे कुछ हेल्दी जतन. और इस जतन में हम कर सकते हैं आपकी मदद. जी हां, हम आपको बताते हैं एक ऐसे जूस् के बारे में जो आपके लीवर को बनाएगा हेल्दी और मजबूत... आपको करना बस यह है क‍ि एक 4 सामग्री वाले जूस को अपने आहार में शाम‍िल करता है. हम बात कर रहे हैं इस 4-घटक यानी चीजों से बने जूस की. इसे गाजर, सेब, अंगूर और टकसाल का उपयोग करके बनाया जाता है. यह हेल्दी जूस लीवर के लिए एक शुद्ध पेय के रूप में कार्य करता है और यकृत में प्राकृतिक विषहरण प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है.

इस जूस में इस्तेमाल की गई हर चीज लीवर के स्वास्थ्य को बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाती है. यह चार पोषक तत्वों का भंडार है. इसमें एंजाइम होते हैं, जो जिगर को विषाक्त पदार्थों को ज्यादा अच्छी तरह से तोड़ने में मदद करते हैं. गाजर की कैरोटीनॉयड सामग्री शरीर के अंदर ऑक्सीडेटिव क्षति को रोकने में मदद करती है. पुदीना में डिकॉन्गेस्टेंट गुण होते हैं और सेब की त्वचा में मौजूद ट्राइटरपीनोइड्स में लीवर कोशिकाओं के लिए शक्तिशाली सुरक्षात्मक गतिविधि (potent protective activity) होती है.
इस जूस में न केवल स्वास्थ्य लाभकारी गुण होते हैं, बल्कि यह काफी स्वादिष्ट भी होता है. आप इसे नाश्ते में ले सकते हैं और अपने दिन को एक स्वस्थ शुरुआत दे सकते हैं.


लीवर को रखना है स्वस्थ तो रोजाना पीएं ये जूस
शरीर अगर स्वस्थ रहता है तो हमारे काम आसानी से हो जाते हैं, लेकिन अगर शरीर ही साथ ना दे तो जरूरी काम कभी भी अटक सकते हैं. हालांकि शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही लीवर भी शरीर का एक ऐसा अंग है जिसे स्वस्थ रखा जाना चाहिए. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग शरीर के बाकी अंगों की बजाय लीवर पर कम ध्यान देते हैं. ऐसे में उन्हें कई गंभीर बीमारियों से जूझना भी पड़ता है.

आजकल की लाइफस्टाइल में बाहर की चीजें खाना आम बात हो गई है. ऐसे में बाहर की तली भुनी चीजों से लीवर को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है. बाहर की चीजों को खाना आसानी से छोड़ा भी नहीं जा सकता है. ऐसे में कुछ सब्जियों का सेवन करके या जूस से लीवर को स्वस्थ रखा जा सकता है.

लीवर को स्वस्थ रखने के लिए पत्तागोभी और अदरक से बना जूस काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. जूस के अलावा इन्हें केवल सब्जियों के रूप में अपनी डाइट में शामिल करके भी लीवर को काफी स्वस्थ किया जा सकता है. पत्तागोभी और अदरक से बने जूस का इस्तेमाल रोजाना सुबह करने से काफी फायदा मिलता है.

0COMMENTSपत्तागोभी में बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है. जिसके कारण इस जूस से वजन को कम करने में भी काफी मदद मिलेगी. पत्तागोभी में विटामिन C, पोटेशियम और सल्फर की प्रचुर मात्रा होती है. इससे लीवर को साफ किया जा सकता है. वहीं पत्तागोभी एंटी- इन्फ्लामेट्री एजेंट होता है. जो लिवर डीटोक्सीफिकेसन करता है. जिसकी वजह से यह वजन को कम करने में सहायक होता है


सप्लीमेंट को नहीं कैल्शियम को करें अपनी डाइट में शामिल

भारत के ग्रामीण व शहरी दोनों ही क्षेत्रों की महिलाओं में कैल्शियम की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है. यह खानपान की बदलती आदतों के कारण हो रहा है. विशेष रूप से शहरी महिलाओं में पिछले कुछ दशकों में भोजन संबंधी आदतों में बड़ा बदलाव आया है. एक ताजा अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मुताबिक, लोग प्रसंस्कृत और पैक किए हुए खाद्य पदार्थो पर तेजी से निर्भर होते जा रहे हैं, जिस कारण शरीर को संपूर्ण आहार नहीं मिल पा रहा है. सलाह दी गई है कि कैल्शियम की मात्रा आहार से लेनी चाहिए न कि सप्लीमेंट से.

आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 17 साल आयु वर्ग की लगभग 20 प्रतिशत किशोरियों में कैल्शियम की कमी पाई गई है. हमारी हड्डियों का 70 प्रतिशत हिस्सा कैल्शियम फॉस्फेट से बना होता है. यही कारण है कि कैल्शियम हमारी हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होता है. महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है क्योंकि वे उम्र के साथ हड्डियों की समस्याओं से अधिक जूझती हैं.

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आईएमए के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल कहा, "कैल्शियम के अच्छे से अवशोषण के लिए हमारे शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता होती है. विटामिन डी की कमी वाले लोगों में, कैल्शियम की कमी की संभावना अधिक होती है, भले ही वे कैल्शियम का भरपूर सेवन कर रहे हों. इसका कारण यह है कि शरीर आपके भोजन से कैल्शियम को अवशोषित करने में असमर्थ है."


उन्होंने कहा कि विटामिन-डी रक्त में कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है. विटामिन-डी का पर्याप्त सेवन कैल्शियम अवशोषण को बेहतर बनाने के साथ-साथ, हड्डियों की क्षति कम करता है. फ्रैक्चर का खतरा कम करता है और ऑस्टियोपोरोसिस रोग होने से रोकता है. कैल्शियम की कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे रक्त के थक्के बनना, रक्तचाप और हृदय की धड़कन बढ़ना, बच्चों में धीमा विकास, और कमजोरी व थकान.

वृद्ध महिलाओं की तुलना में युवतियों को कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होती है. कैल्शियम की बात करें तो, 9 से 18 साल आयु वर्ग की लड़कियों को 1300 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है, जबकि 19 से 50 साल की महिलाओं को 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है. पचास वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को 1200 मिलीग्राम की जरूरत होती है.
डॉ. अग्रवाल ने बताया, "कई लोग डॉक्टर से सलाह के बिना कभी भी कैल्शियम की खुराक लेने लगते हैं. अगर बताई गई मात्रा में ली जाए तो यह अतिरिक्त कैल्शियम हृदय की सेहत के लिए ठीक है. हालांकि, आहार से मिलने वाले कैल्शियम पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए."

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कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने के टिप्स:

* हर दिन कैल्शियम से समृद्ध आहार लेना चाहिए.
* अपने शरीर का भार बढ़ाये बिना कैल्शियम की मात्रा सही रखने के लिए वसा-रहित दूध पीना चाहिए.
* अन्य डेयरी उत्पादों में भी कैल्शियम होता है, जैसे कि दही और पनीर, लेकिन कम वसा वाली चीजों का ही चयन करें.
* पत्तेदार साग-सब्जियों का अधिक सेवन करें.

बीमारी को बुलावा दे सकते हैं स्टेनलेस स्टील बर्तन, जानें कैसे



स्टेनलेस स्टील के बर्तन दे सकते हैं बीमारी को न्योता दे सकते हैं. स्टेनलेस स्टील के खाना बनानेवाले बर्तनों पर ऑलिव, कॉर्न या कैनोला तेल (इनका तेल पतला होता है) की कोटिंग से इनकी दरारें भर जाती है, साथ ही यह बैक्टीरिया की वृद्धि दर को भी रोकता है. एक नए शोध से यह जानकारी दी गई है. स्टेनलेस स्टील के बर्तनों को बार-बार उपयोग करने और मांजने से उनकी सतह पर बहुत ही सूक्ष्म दरारें आ जाती है, जिसमें बैक्टीरिया घर बना लेती है. ये बैक्टीरिया और बॉयोफिल्म्स के छुपने की आदर्श जगह होती है. 

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हालांकि इन बर्तनों की सतह के दरारों और खरोंचों को नंगी आंखों से देखना मुश्किल है, लेकिन उनमें लाखों बैक्टीरिया भरे हो सकते हैं, जिनका आकार महम कुछ माइक्रोमीटर का होता है. इन दरारों में फंसे भोजन और सालमोनेला, लिस्टिरिया और ई.कोली सूक्ष्म जीवाणुओं से कई तरह के संक्रमण का खतरा होता है. 


लेकिन इन बर्तनों पर खाद्य तेल की पतली परत की कोटिंग करने से इन खतरों से प्रभावी ढंग से बचाव होता है. 



कनाडा के ओंटारियो स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के प्रोफेसर बेन हैटन ने बताया, "स्टेनलेस स्टील की सतह पर रोजाना खाद्य तेल की कोटिंग करने से बैक्टीरिया को पनपने से रोकने में मदद मिलती है."

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