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महिलाओ को कब आता है पहला पीरियड



डिलीवरी के बाद महिलाओ को कब आता है पहला पीरियड, जानिए ! 

अक्सर माँ बनने के बाद महिला के आंतरिक और बाह्य अंगो में काफी बदलाव देखने को मिलता है। इनमे से एक है मासिक धर्म। आपके मासिक धर्म की वापसी अक्सर निर्भर करती है कि आप स्तनपान कराती हैं या नहीं। और बच्चे के होने के बाद आपकी ज़िंदगी किस तरह की है, गर्भावस्था के बाद आपके पीरियड्स में कुछ बदलाव हो सकते है। आज इस लेख में आप जानेगी गर्भावस्था के बाद पहला पीरियड कब आता है और उससे जुड़ी जरुरी बातों को।


यदि आप स्तनपान नहीं करा रही हैं, तो आपका पीरियड आमतौर पर आपके बच्चे को जन्म देने के छह से आठ सप्ताह बाद लौट आएगा। यदि आप स्तनपान कराती हैं, तो मासिक धर्म के वापसी का समय बदल सकता है। कुछ महिलाएं जो विशेष रूप से स्तनपान कराती हैं, तब उनको तक तक पीरियड नहीं आता जब तक की वे स्तनपान कराती हैं। “विशेष स्तनपान” का अर्थ है कि आपका बच्चा केवल आपके स्तन के दूध को प्राप्त कर रहा है लेकिन दूसरों के लिए जो ऐसा नहीं करती है, यह दो महीने बाद वापस आ सकता है, चाहे वे स्तनपान करा रहीं हों या नहीं।


अगर आपका पीरियड जन्म देने के तुरंत बाद वापस लौटता है और आपकी पास नार्मल डिलीवरी हुई है , तो आपका डॉक्टर सुझाव दे सकता है कि आप शिशु के जन्म के बाद अपने पहले मासिक धर्म के दौरान टैम्पोन का इस्तेमाल न करें।ऐसा इसलिए है क्योंकि आपका शरीर अभी भी खुद को ठीक कर रहा होता है, और टैंपोन संभवत: आघात पैदा कर सकता है।

आमतौर पर, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को शरीर में बनने वाले हार्मोन की वजह से जल्दी पीरियड नहीं आता है। प्रोलैक्टिन , होर्मोन जो की स्तनपान के लिए दूध का उत्पादन करने के लिए आवश्यक होता है, प्रजनन हार्मोन को कम कर देता है हैं। नतीजतन, आप निषेचन के लिए अंडे को उत्पन्न नहीं करती हैं। इस प्रक्रिया के बिना, सबसे अधिक संभावना होती है की आपका मासिक धर्म नहीं आएगा।



महिलाये अपनी वैजाइना के साथ भूलकर भी न करे ये 7 चीजें
वेजाइना महिला के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक है।क्या आप वेजाइना की सफाई के लिए vaginal प्रोडक्ट्स का उपयोग करते हैं या फिर कुछ डेली यूज़ की चीजो से अपने गुप्त अंग को साफ रखते हैं? आगे पढ़ें और जाने कि क्यों अपनी वेजाइना के साथ कभी नहीं करना चाहिए ये 7 चीजें और वेजाइना की सफाई करते समय आपको पहले से सावधान क्यों रहना चाहिए!

# हानिकारक बैक्टीरिया और अच्छे बैक्टीरिया दोनों महिला की वेजाइना में एक साथ रहते हैं और जरुरी पीएच संतुलन को बनायें रखते हैं जो वेजाइना को संक्रमण से बचाते है। सिरका के साथ वेजाइना को साफ करने से योनि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, यह एसटीआई (STIs) से बचने का सही तरीका नहीं है, और न ही यह एक सही गर्भनिरोधक पद्धति है, क्योंकि यह केवल संक्रमित होने की संभावना को बढ़ाता है और बच्चे के जन्म में जटिलताओं का कारण बनता है।

# लंबे समय तक एक सैनिटरी पैड का उपयोग न करें तभी तक इसका उपयोग करें जब तक कि इसमें बदबू नहीं हो। आपकी वेजाइना के अंदर एक टैंपन छोड़कर भूल जाने से संक्रमण हो सकता है, और कभी-कभी टैंपन योनि के अंदर गहरा बैठ जाता है और आपको इसे हटाने के लिए बहुत मुश्किल होती है। इसके अलावा, टाम्पन्स (tampons) कपास और सिंथेटिक फाइबर से बने होते हैं जो इन टैम्पोनों के अवशोषण शक्ति को बढ़ाते हैं।ये फाइबर विषाक्त साबित होते हैं और आपकी वेजाइना के अंदर विषाक्त पदार्थों को छोड़ सकते हैं। अपने आप इसे गलती से बचाने के लिए सुनिश्चित करें कि आप इसे निकलने के समय को याद रखने के लिए स्टिकी नोट्स, अलार्म, का उपयोग नही कर सकती है। यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने टैम्पोन को समय-समय पर बदलते हैं, कम से कम हर 4 घंटे लेकिन 8 घंटे से ज्यादा इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

# दुनिया भर में कई महिलाओं को अपने पैरों के बीच में इत्र का उपयोग करने की आदत होती हैं। कभी-कभी, वेजाइना गंध आपको सचेत और असहज महसूस हो सकता है, लेकिन इत्र का योनि में उपयोग एक कहर की तरह होता है। इसके अलावा, सुगंधित वेजाइना वाश, साबुन और बालों को हटाने वाली क्रीम का उपयोग करने से हर कीमत पर बचना चाहिए। क्योकि वेजाइना की दीवार (vaginal wall) सुपर शोषक होती है वेजाइना के माध्यम से दवाओं को शरीर में पहुचाने के बारे में अनुसंधान चल रहा है क्योंकि वे तेजी से रक्त में अवशोषित हो जाते हैं और इसलिए वे तेजी से काम करते हैं ।
# यद्यपि यह सुनने में पागलपन लग सकता है, की वेजाइना की इस अवशोषित प्रकृति का कुछ महिलाएं अलग तरीके से इस्तेमाल करती है वे वोदका ( pour vodkas) को पीने के बजाय अपने वेजाइना में डालती हैं क्योंकि इसकी किक अधिक तीव्र होती है और वे तेजी से अवशोषित हो जाती हैं में उन महिलाओ से पूछना चाहती ही की आप अपने शरीर के लिए ऐसा कुछ क्यों करना चाहते हैं? उन पदार्थों में हानिकारक पराबैंगनी और phthalates हैं जो महिलाओं के उत्पादों को सुगंध प्रदान करते हैं जो जल्दी से खून में अवशोषित हो जाते हैं। इसलिए आपको इन खुशबू प्रदान करने वाली चीजो का उपयोग अपनी वेजाइना में नहीं करना चाहिए|

# जैसे कि डचिंग पर्याप्त नही होता है वैसे ही हॉट स्टीम का इस्तेमाल वेजाइना को साफ करने के लिए लीग में शामिल हो गया है। इसके अलावा, जो जाननेवाला है वह यह है कि गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए सबसे पहले, भाप गर्म होती है, और आप अपने आप को वहाँ नीचे जलने के जोखिम पर रखते हैं। यह पहले से ही भयानक है दूसरे, भाप को गर्भाशय तक पहुंचने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, और ऐसा लगता है कि इसकी संभावना न के बराबर ही है तीसरा, आप फिर से जीवाणु संतुलन को परेशान कर रहे हैं जो वेजाइना के वातावरण को अम्लीय और इष्टतम रखने के लिए आवश्यक है।

इसलिए आपको वेजाइना क्षेत्र को साफ रखने के लिए आपको कुछ भी नहीं करना पड़ता है। वेजाइना खुद से अपनी देखरेख कर सकती है और डॉक्टर इस पर पर्याप्त दवाव नहीं डाल सकते हैं और महिलाओं से आग्रह कर रहे हैं कि वी-स्टीम जैसी चीजों के साथ अपने आप को यातना देना बंद करें।

# नीचे की ओर हेयर रिमूवल क्रीम लगाने से उस एरिया पर घाव आदि हो सकता है और साथ ही संक्रमण का खतरा भी हो सकता है। आप चाहें तो वैजाइना को शेव या वैक्‍स कर सकती हैं।

# तेल आधारित लुब्रिकेशन को ठीक प्रकार से धोना थोड़ा मुश्‍किल होता है, इसलिये उपयोग करने के बाद अगर वो ठीक से साफ ना किया गया, तो वह बैक्‍टीरिया का कारण बन सकता है| आपको बता दें की योनि में खुद तरल चिपचिपा पदार्थ निकलता है जी उसके लिए लुब्रिकेशन का काम करता है

# जिस तरह आप अपने चेहरे को गोरा करने के लिये ब्‍लीच करती हैं और फिर कुछ ही दिनों में पुराना रंग वापस आ जाता है। वैसे ही वैजाइना के आस पास की रंगत को निखारने में लगाई गई महनत भी खराब हो सकती है। उस जगह पर कैमिकल लगाना कोई अच्‍छी बात नहीं। 


महिलाये अपने प्राइवेट पार्ट के कालेपन को दूर करने के लिए अपनाये ये घरेलू नुस्खे
अक्सर लोग टाइट कपड़े पहनते हैं जिससे पसीना ज्यादा आता है और त्वचा का रंग काला पड़ जाता है। साथ ही पुराने रेजर से बाल साफ करने पर, पसीना आने पर, शेव करने पर और हार्मोन्स के बैलेंस बिगड़ने पर बिकनी एरिया का रंग काला पड़ जाता है।
आज हम आपको कई घरेलू उपायों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जो कि बिकनी एरिया को साफ करने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे बहुत कम समय में कुछ घरेलू उपायों के मदद बिकनी एरिया और प्यूबिक एरिया (जननांगों) का रंग साफ कर सकते हैं।

हल्दी - हल्दी में एंटी-सेप्टीक गुण होते हैं साथ ही त्वचा के कालेपन को कम करने के लिए जरुरी गुण भी होते हैं। इसलिए हल्दी का इस्तेमाल बिकनी एरिया का रंग निखारने के लिए उपयोगी और सुरक्षित होता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए एक कटोरी में एक चम्मच हल्दी, 2 चम्मच नींबू का रस, एक चम्मच योगर्ट लेकर मिला लें और आपस में मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को 15-20 मिनट तक त्वचा पर लगा कर रखें और फिर ठंडे पानी से त्वचा को साफ कर लें। इसका इस्तेमाल सप्ताह में 3-4 बार कर सकते हैं।

खीरे का जूस - खीरे का जूस एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर होता है जो कि त्वचा का रंग निखारने के लिए लाभकारी होता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए खीरे के जूस में थोड़ा सा पानी मिलाकर उसे बिकनी एरिया पर लगाकर रखें और 10 मिनट बाद ठंडे पानी से त्वचा को साफ कर लें।

बादाम का तेल - बादाम में विटामिन ई होता है जो कि त्वचा के रंग को निखारने में मदद करता है और बिकनी एरिया के रंग को साफ करता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए बादाम तेल की मालिश आप जननांगों और उसके आसपास की त्वचा पर कर सकते हैं। सप्ताह में 2-3 बार इसका इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।

अबॉर्शन या गर्भपात के बाद महिलाओं को होती है ये खतरनाक समस्‍याएं
एक महिला के लिए माँ बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत पल होता है। लेकिन कभी कभी किसी कारण महिला को अपने पेट में पल रहे बच्चे को गिराना पड़ता है। जब भी किसी लेडी का गर्भपात होता है तो कुछ सामान्य समस्यांए जैसे उल्टी आना, बुखार रहना, ख़ून बहना, पेट में दर्द आदि होती हैं। लेकिन कई बार कुछ लेडी को गर्भपात के बाद होने वाली समस्‍याएं से कही अधिक गम्भीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। अगर किसी लेडी को गर्भपात के बाद नीचे बतायी गयी परेशानियां महसूस हो रही है तो जितना जल्दी हो सके किसी डॉक्टर से सम्पर्क करें। गर्भपात के बाद होने वाली समस्‍याएं –

# सभी महिलाओं के साथ यह समस्या नहीं होती, लेकिन कुछ मात्रा गर्भपात के बाद खून बहना सामान्य है। कई बार गर्भपात के केस में तीन-चार हफ्तों बाद तक ब्लीडिंग होती रहती है। लेकिन यह जानना बेहद जरूरी है कि कब आपको मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होगी। यदि आपको सिर हल्का लग रहा है, चक्कर आ रहे हैं और बड़े थक्के बन रहे हैं आदि स्थितियां किसी आंतरिक चोट का का संकेत हो सकती है, जिसकी वजह गर्भपात के दौरान किसी प्रकार की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है। लेकिन अगर किसी को लगता है कि ख़ून आवश्यकता से अधिक ख़ून बह रहा है तो उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

# गर्भपात के बाद का समय किसी महिला के लिए बहुत पीड़ादायक होता है। बच्चा खो देने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहती है गर्भपात से पहले गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है और धीरे-धीरे यह अपने सामान्य आकार में आ जाता है। कभी-कभी इस दौरान माहवारी के दर्द से भी खतरनाक दर्द होता है।

# गर्भपात यानि एबॉर्शन के बाद महिलाओं की योनि (मूत्र मार्ग में संक्रमण) और बच्‍चेदानी में संक्रमण बहुत जल्‍दी फैल जाता है. संक्रमण का मतलब किसी भी रोग का जल्दी से आपको प्रभावित करना. गर्भपात के बाद के संक्रमण घातक होते है। इससे बचने के लिये रूई का फाहों का इस्तेमाल करने, स्विमिंग पूल, बाथ टब का इस्तेमाल और संभोग (सेक्सुअल इंटरकोर्स) से बचना चाहिये संक्रमण होने पर बिलकुल भी लापरवाही न करें और सामान्य से अधिक दर्द हो तो गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर व्यवस्थित चैकअप कराना चाहिये
# गर्भपात ठीक प्रकार से होने के कारण बच्चेदानी में कुछ टिश्यू रह जतने के कारण डी एंड सी करने की जरुरत पढ़ती हैं। अगर ये टिश्यू बच्चेदानी में रह जाएँ तो दुबारा गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस स्थिति में डाइलेशन और क्यूरेटेज आवश्यक होता है। ऐसे में बच्चेदानी में संक्रमण 10 में से 7 महिलाओं को होता है।

# गर्भपात के बाद का समय सबसे कठिन होता है। इस बात से उभरकर बाहर आना काफी मुश्किल होता है कि आप अपना बच्‍चा खो चुकी हैं। इस दौरान महिलाएं, भावनात्‍मक रूप से टूट जाती है, उन्‍हे अपने हर काम और आदत पर भी गुस्‍सा आने लगता है। गर्भपात होने पर महिला को शरीरिक और मानसिक रूप से कई तरह की समस्या हो सकती है। अत्यधिक टेंसन के कारण महिला डिप्रेशन या अवसाद का शिकार हो सकती है। उसे हर तरह से सपोर्ट करें।

# एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण अबॉर्शन के चांस बढ़ जाते हैं। इस प्रेग्नेंसी में अंडे बच्चेदानी में न पनपकर फ़ैलोपियन टूब या आसपास पनपने लगते हैं। ऐसे गर्भधारण का कोई तात्पर्य नहीं होता है लेकिन शरीर को एबॉर्शन जैसी प्रॉब्लम का सामना करना पड़ सकता है।

# बार-बार गर्भपात बांझपन का बड़ा कारण हो सकता है। गर्भपात से महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, जिससे उसे अगली बार गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। गर्भपात का असर न केवल महिला बल्कि उसके साथी और परिवारजनों के लिए समस्यात्मक होता है। इस कठिन समय में अच्छे मनोचिकित्सक की सलाह काफी काम आ सकती है। ऐसे समय में धैर्य, हिम्मत और आपसी सहयोग दवा अच्छा काम करते हैं।

# पहले तीन महीने के दौरान गर्भपात होने पर है तो 4 से 12 हप्तो के बाद पीरियड्स शुरू हो जाता है। आपको यह जानना बहुत जरुरी है की गर्भपात (miscarriage) के बाद कुछ महिलाओ को मासिक धर्म में लम्बे समय जो 1 से 2 वर्ष का हो सकता है उन महिलाओ में मासिक धर्म की डेट कई महीनों के लिए बदल सकती है।

# गर्भपात के बाद कम से कम 3 महीने रुकना चाहिए . इससे शरीर को ताकत मिलने में, गर्भपात के बाद होने वाली समस्‍याएं को दूर करने और दुबारा गर्भवती होने के लिए तैयार होने का पर्याप्त समय मिल जाता है



महिलाये अपनी वेजाइना के रंग को प्राक्रतिक तरीके से गोरा बनाने के लिए अपनाये ये घरेलू नुस्खे
हर इंसान की बॉडी का रंग अलग अलग होता है लेकिन आपको बता दे की महिलाओ की वेजाइना की स्‍किन का रंग थोड़ा डार्क होता है। लेकिन कोई जरुरी नहीं है कि आपकी बॉडी जिस भी कलर की है आपकी वेजाइना भी वैसी ही हो। अगर आप भी उनमें से हैं जो अपनी वेजाइना के रंग को प्राक्रतिक तरीके से गोरा बनाना चाहती हैं तो, हम आपके लिये लाए हैं कुछ ऐसे प्राकृतिक उपाय जिनका इस्‍तमाल कर के आप साफ वेजाइना पा सकती हैं। इनका इस्तेमाल कीजिये और खुद ब खुद रिजल्‍ट देखिये।

नींबू - नींबू में सिट्रस एसिड और विटामिन सी होता है तो कि रंग को साफ करने में सहायक होता है। 2 चम्‍मच नींबू के रस में कुछ बूंद शहद की मिलाएं और इस घोल में रूई भिगो कर प्रभावित जगह पर लगाएं। 5 मिनट के बाद पानी से धो लें। ऐसा दिन में 3 बार करें। इसके साथ ही आप अकेले नीबू को भी अपनी वेजाइना पर मसाज कर सकती है

एलोवेरा - इसका प्रयोग करके आप वेजाइना का रंग साफ कर सकती है एलो वेरा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं जो मिलेनिन का प्रोडक्‍शन करते हैं और स्‍किन के कलर को हल्‍का बनाते हैं। एक चुटकी हल्‍दी में 1 चम्‍मच एलो वेरा मिलाएं और इससे अपने एरिया को साफ करें। फिर इसे तौलिये से पोछ लें और 30 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। फिर इसे धो कर इस विधि को 3 बार दिन में करें। इसके आलावा आप एलोवेरा का गुदा निकलकर अपनी वेजाइना पर मसाज करे, और सूखने के बाद धो ले।
नारियल तेल - नारियल का तेल एंटीसेप्‍टिक, एंटी बैक्‍टीरियल और एंटी फंगल गुणों से भरा होता है। इससे पिगमेंटेशन और कई तरह के स्‍किन इंफेक्‍शन दूर होते हैं। इस पेस्‍ट को बनाने के लिये अपने पाइवेट पार्ट को साफ कर लें और फिर वहां पर इस तेल को लगाएं। इसके साथ ही अंडरवेयर पहनने से बचें। तेल को अच्‍छी तरह से स्‍किन में समा जाने दीजिये। अच्‍छा रिजल्‍ट पाने के लिये नारियल के तेल का प्रयोग रोजाना कीजिये। आप नारियल के तेल से हलके हाथो से वेजाइना पर मसाज भी कर सकती है इससे आपको जरुर लाभ प्राप्त होगा।

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