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अबॉर्शन या गर्भपात के बाद महिलाओं को होती है ये खतरनाक समस्‍याएं


अबॉर्शन या गर्भपात के बाद महिलाओं को होती है ये खतरनाक समस्‍याएं
एक महिला के लिए माँ बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत पल होता है। लेकिन कभी कभी किसी कारण महिला को अपने पेट में पल रहे बच्चे को गिराना पड़ता है। जब भी किसी लेडी का गर्भपात होता है तो कुछ सामान्य समस्यांए जैसे उल्टी आना, बुखार रहना, ख़ून बहना, पेट में दर्द आदि होती हैं। लेकिन कई बार कुछ लेडी को गर्भपात के बाद होने वाली समस्‍याएं से कही अधिक गम्भीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। अगर किसी लेडी को गर्भपात के बाद नीचे बतायी गयी परेशानियां महसूस हो रही है तो जितना जल्दी हो सके किसी डॉक्टर से सम्पर्क करें। गर्भपात के बाद होने वाली समस्‍याएं –
# सभी महिलाओं के साथ यह समस्या नहीं होती, लेकिन कुछ मात्रा गर्भपात के बाद खून बहना सामान्य है। कई बार गर्भपात के केस में तीन-चार हफ्तों बाद तक ब्लीडिंग होती रहती है। लेकिन यह जानना बेहद जरूरी है कि कब आपको मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होगी। यदि आपको सिर हल्का लग रहा है, चक्कर आ रहे हैं और बड़े थक्के बन रहे हैं आदि स्थितियां किसी आंतरिक चोट का का संकेत हो सकती है, जिसकी वजह गर्भपात के दौरान किसी प्रकार की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है। लेकिन अगर किसी को लगता है कि ख़ून आवश्यकता से अधिक ख़ून बह रहा है तो उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
# गर्भपात के बाद का समय किसी महिला के लिए बहुत पीड़ादायक होता है। बच्चा खो देने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहती है गर्भपात से पहले गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है और धीरे-धीरे यह अपने सामान्य आकार में आ जाता है। कभी-कभी इस दौरान माहवारी के दर्द से भी खतरनाक दर्द होता है।

# गर्भपात यानि एबॉर्शन के बाद महिलाओं की योनि (मूत्र मार्ग में संक्रमण) और बच्‍चेदानी में संक्रमण बहुत जल्‍दी फैल जाता है. संक्रमण का मतलब किसी भी रोग का जल्दी से आपको प्रभावित करना. गर्भपात के बाद के संक्रमण घातक होते है। इससे बचने के लिये रूई का फाहों का इस्तेमाल करने, स्विमिंग पूल, बाथ टब का इस्तेमाल और संभोग (सेक्सुअल इंटरकोर्स) से बचना चाहिये संक्रमण होने पर बिलकुल भी लापरवाही न करें और सामान्य से अधिक दर्द हो तो गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर व्यवस्थित चैकअप कराना चाहिये

# गर्भपात ठीक प्रकार से होने के कारण बच्चेदानी में कुछ टिश्यू रह जतने के कारण डी एंड सी करने की जरुरत पढ़ती हैं। अगर ये टिश्यू बच्चेदानी में रह जाएँ तो दुबारा गर्भपात होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस स्थिति में डाइलेशन और क्यूरेटेज आवश्यक होता है। ऐसे में बच्चेदानी में संक्रमण 10 में से 7 महिलाओं को होता है।
# गर्भपात के बाद का समय सबसे कठिन होता है। इस बात से उभरकर बाहर आना काफी मुश्किल होता है कि आप अपना बच्‍चा खो चुकी हैं। इस दौरान महिलाएं, भावनात्‍मक रूप से टूट जाती है, उन्‍हे अपने हर काम और आदत पर भी गुस्‍सा आने लगता है। गर्भपात होने पर महिला को शरीरिक और मानसिक रूप से कई तरह की समस्या हो सकती है। अत्यधिक टेंसन के कारण महिला डिप्रेशन या अवसाद का शिकार हो सकती है। उसे हर तरह से सपोर्ट करें।
# एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण अबॉर्शन के चांस बढ़ जाते हैं। इस प्रेग्नेंसी में अंडे बच्चेदानी में न पनपकर फ़ैलोपियन टूब या आसपास पनपने लगते हैं। ऐसे गर्भधारण का कोई तात्पर्य नहीं होता है लेकिन शरीर को एबॉर्शन जैसी प्रॉब्लम का सामना करना पड़ सकता है।

# बार-बार गर्भपात बांझपन का बड़ा कारण हो सकता है। गर्भपात से महिला की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, जिससे उसे अगली बार गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। गर्भपात का असर न केवल महिला बल्कि उसके साथी और परिवारजनों के लिए समस्यात्मक होता है। इस कठिन समय में अच्छे मनोचिकित्सक की सलाह काफी काम आ सकती है। ऐसे समय में धैर्य, हिम्मत और आपसी सहयोग दवा अच्छा काम करते हैं।

# पहले तीन महीने के दौरान गर्भपात होने पर है तो 4 से 12 हप्तो के बाद पीरियड्स शुरू हो जाता है। आपको यह जानना बहुत जरुरी है की गर्भपात (miscarriage) के बाद कुछ महिलाओ को मासिक धर्म में लम्बे समय जो 1 से 2 वर्ष का हो सकता है उन महिलाओ में मासिक धर्म की डेट कई महीनों के लिए बदल सकती है।

# गर्भपात के बाद कम से कम 3 महीने रुकना चाहिए . इससे शरीर को ताकत मिलने में, गर्भपात के बाद होने वाली समस्‍याएं को दूर करने और दुबारा गर्भवती होने के लिए तैयार होने का पर्याप्त समय मिल जाता है




अगर आप भी है प्राइवेट पार्ट में होने वाली खुजली से परेशान तो आज ही आजमाए ये उपाय
गुप्‍तांगों में खुजली एक आम समस्या बन गई है इसलिए गुप्‍तांगों में खुजली दूर करने के घरेलू उपाय जानना जरूरी हो जाता है। क्‍योंकि चाहे महिला हो या पुरुष लगभग सभी इस समस्‍या से परेशान हैं। इसका एक और कारण यह है कि यह समस्‍या शर्मनाक महसूस होती है। प्राइवेट पार्ट में खुजली की समस्‍या समय के साथ गंभीर हो सकती है। इसलिए जल्‍दी से जल्‍दी जननांग की खुजली का उपचार किया जाना चाहिए।

गुप्त अंग मे खुजली संक्रमण के कारण होती है। लेकिन हमारी दैनिक क्रिया भी इसमें अपना विशेष योगदान देती हैं जिनमें हमारी गलत जीवनशैली भी शामिल है। जांघों के बीच की खुजली को दूर करने के लिए आप चिकित्‍सकीय उपचार कर सकते हैं। लेकिन गुप्‍तांगों की खुजली दूर करने के कुछ आसान से घरेलू उपाय भी होते हैं जिन्‍हें आप अपने घर पर ही कर सकते हैं। विशेष बात यह है कि ये घरेलू उपाय सस्ते और प्रभावकरी होते हैं। आइए इन्‍हें जानें।

गुप्‍तांगों की खुजली एक प्रकार की संक्रामक बीमारी है जिसका उपचार आयुर्वेद के पास मौजूद है। आप जननांगों की खुजली को दूर करने के लिए रोजमेरी का उपयोग कर सकते हैं। यह एक जड़ी-बूटी है जिसके बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं। इसके लिए आप रोजमेरी की कुछ पत्तियां ले और इसे गर्म पानी में 20 मिनिट के लिए छोड़ दें। पानी के ठंडा होने पर आप इस पानी से अपने प्राईवेट पार्ट को धोएं। यह औषधीय पानी आपको खुजली से तुरंत ही राहत दे सकता है।

केले की जड़ के इस्तेमाल से दूर रहती है ये खतरनाक बीमारिया, जानिए

केले की जड़ का उपयोग करके कई बीमारियों से बचा जा सकता है। केले की जड़ अपने भरपूर पोषक तत्‍वों की उपस्थिति के कारण यह हमें विभिन्‍न प्रकार की समस्‍याओं से छुटकारा दिलाता है। हालांकि केले की जड़ों पर कोई गहन अध्‍ययन नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि केले की जड़ें कई बीमारियों के इलाज के लिए दवा के रूप में उपयोग किया जा सकता है। जिनमें हेमेटुरिया, मूत्र के साथ खून आना, मूत्राशय के संक्रमण आदि समस्‍याएं शामिल होती हैं। इसके अलावा भी केले की जड़ के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं जो इस प्रकार हैं।

बुखार - यदि आप सोच रहे हैं कि केले की जड़ बुखार (Fever) को कैसे ठीक कर सकती है तो यह इसलिए है क्‍योंकि केले की जड़ में एंटीप्रेट्रिक गुण होते हैं जो शरीर पर शीतलन प्रभाव दे सकता है। केले की जड़ के शीतलन प्रभाव शरीर के उच्‍च तापमान को कम करने और इससे छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। एंटीप्रेट्रिक शब्‍द खुद ही एक चिकित्‍सकीय शब्‍द होता है जो रक्‍त के प्रवाह को तेज करके बुखार से राहत दिलाने में मदद करता है और शरीर की गर्मी को त्‍वचा छिद्रों (pores) से पसीने के माध्‍यम से बाहर निकाल देता है। इस प्रकार से आप बुखार से राहत पाने के लिए केले की जड़ का उपयोग कर सकते हैं।
सूजन कम करे - आयुर्वेद उपचार में केले की जड़ का उपयोग पुरानी से पुरानी सूजन को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह बहुत ही विश्‍वशनीय और पारंपरिक दवा के रूप में जानी जाती है। यदि आपके गले में सूजन है तो आप इसके उपचार के लिए केले की जड़ को अच्‍छी तरह से साफ करके इसे पीस लें और बने हुए पेस्‍ट को निचोड़कर (squeezing) इसका रस निकाल लें। आप केले की जड़ से बने इस जूस में थोड़ा सा पानी मिलाएं और इस मिश्रण से गरारे करें। ऐसा आप दिन में 3-4 बार करें जब तक की आपकी सूजन कम न हो जाए।

अल्‍सर के लिए – आपने ऊपर बताए गए केले की जड़ों के फायदे में देखा होगा कि केले की जड़ों में शीतलन प्रभाव होता है। शीतलन प्रभाव का एक और काम है पेट को आरामदायक बनाता है। केले की जड़ पर डोपामाइन की सामग्री गैस्ट्रिक एसिड को बनने से रोक सकती है जिससे कि अल्‍सर रोग की शुरुआत को रोकने में मदद मिलती है। इसलिए केले की जड़ का उपयोग आयुर्वेद में पेट की समस्‍याओं को दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है।





जब कॉन्डोम रह जाए प्राइवेट पार्ट के अंदर, तो करें ये उपाय!
अक्सर शारारिक बनाने के दौरान आपका इस्तेमाल किया जाने वाला कॉन्डोम अगर महिला की योनि में फंस जाता है। ऐसे में कई मुसीबतों का समन करना पड़ता है। कुछ लोगों का कॉन्डोम इन्‍सर्ट करने के ठीक बाद ही फट जाता है या कॉन्डोम अंदर ही फंस जाता है तो यह असुरक्षित $क्स की श्रेणी में आ जाता है।

# अगर ऐसी स्थिति उत्‍पन्‍न होती है तो डॉक्‍टर से सम्‍पर्क अवश्‍यक करना चाहिए, अगर आप गर्भ धारण करने की इच्‍छुक नहीं हैं। कॉन्डोम का अंदर फंस जाना उस स्थिति में होता है, जब पुरूष पूरी तरीके से स्‍खलित हो चुका होता है और उसका लिंग छोटा पड़ जाता है जिसकी वजह से कॉन्डोम सरक कर अंदर ही फंसा रह जाता है।

# इस स्थिति से बचने का आसान तरीका है कि स्‍खलन के तुंरत बाद ही आप अपने पार्टनर से अलग हो जाएं या उससे पहले ही लिंग को योनि से बाहर निकाल लिया जाएं। महिला की योनि बहुत ही नाजुक हिस्‍सा होती है ऐसे में अगर कॉन्डोम अंदर ही रह जाता है तो उसे ऊपरी हिस्‍से से हल्‍के हाथों से धीरे-धीरे निकाल लेना चाहिए, ताकि उसे चोट न पहुँचें। अगर कॉन्डोम योनि से नहीं निकल पाता है तो तुंरत ही गायनोकोलॉजिस्‍ट के पास उसे ले जाएं।
# अगर कॉन्डोम फट जाता है तो वीर्य योनि में चला जाता है और गर्भवती होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। ऐसे में इमरजेंसी गर्भनिरोधक का इस्‍तेमाल करना चाहिए।

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