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खाली पेट गुड़ खाना होता है फायदेमंद,


खाली पेट गुड़ खाना होता है फायदेमंद, जाने इसको खाने से होने वाले फायदे
आजकल सर्दियों का मौसम चल रहा है और इस मौसम में अचानक हुए बदलाव के कारण लोगो को काफी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। सर्दियों में गुड़ को औषधी कहा गया है। आयुर्वेद में भी कहा गया है कि गुड़ का सेवन शरीर के लिए अमृत समान होता है। इससे न सिर्फ पाचन क्रिया दुरुस्त होती है बल्कि कई रोगों से भी छुटकारा मिलता है। गुड़ को पचाने में बहुत कम मात्रा में ऊर्जा खर्च होती है। यदि गुड़ को पचाने मे 100 कैलोरी ऊर्जा लगती है तो चीनी को पचाने में 500 कैलोरी खर्च होती है।

जिन लोगों को सीने में जलन, कब्ज या पेट में गैस बनने जैसी दिक्कतें हैं उनके लिए खाली पेट गुड़ का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। सिर्फ यही नहीं गुड़ से फ्लू, गले की खराश और जलन में भी राहत मिलती है। सिर्फ पेट ही नहीं गुड़ के सेवन से त्वचा को भी कई तरह के लाभ होते हैं। गुड़ खून से हानिकारक टॉक्सिरन्स को भी बाहर निकालता है। आइए जानते हैं क्या है गुड़ के लाभ।

गुड़ गन्ने से तैयार एक शुद्ध, अपरिष्कृत पूरी चीनी है। यह खनिज और विटामिन है जो मूल रूप से गन्ने के रस में ही मौजूद हैं। गुड़ को चीनी का शुद्धतम रूप माना जाता है। गुड़ आयरन का एक प्रमुख स्रोत है और रक्ताल्पता (एनीमिया) के शिकार व्यक्ति को चीनी के स्थान पर इसके सेवन की सलाह दी जाती है।

# गुड़ का सेवन अधिकांश लोग ठंड में ही करते हैं वह भी थोड़ी मात्रा में इस सोच के साथ की ज्यादा गुड़ खाने से नुकसान होता है। इसकी प्रवृति गर्म होती है, लेकिन ये एक गलतफहमी है गुड़ हर मौसम में खाया जा सकता है और पुराना गुड़ हमेशा औषधि के रूप में काम करता है। आयुर्वेद संहिता के अनुसार यह शीघ्र पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है। इसके अतिरिक्त गुड़ से बनी चीजों के खाने से बीमारियों में राहत मिलती है।

# जिन महिलाओं या लड़कियों को पीरियड्स के दौरान दर्द होता है, उनके लिए गुड़ का सेवन काफी फायदेमंद होता है। गुड़ आपके पाचन को सही रखता है। इसलिए पीरियड्स के दौरान गुड़ खाएं। इससे आपको दर्द कम होगा।

# अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो गुड़ आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। गुड़ में मौजूद कैल्शियम के साथ फास्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा नियमित रूप से गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का सेवन करने से सर्दियों में जोड़ों के दर्द की समस्‍या नहीं होती।

# गुड़ आपकी त्‍वचा के लिए भी बहुत अच्‍छा होता है। यह आपकी त्‍वचा को स्‍वस्‍थ और आकर्षक बनाने में मदद करता है। गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन को दूर करने में मदद करता है। जिससे आपकी त्वचा दमकने लगती है और मुहांसे की समस्या भी नहीं होती है।
# गुड़ की तासीर गर्म होने के कारण इसके सेवन से जुकाम और कफ में आराम मिलता है। लेकिन इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि जुकाम के दौर कच्‍चा गुड़ नहीं खाना चाहिए इसे आप चाय में या इसके लड्डू बनाकर इस्‍तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा गले में खराश के कारण आवाज बैठ जाने की समस्‍या होने पर दो काली मिर्च, 50 ग्राम गुड़ के साथ खाने से यह दूर हो जाती है।

# अस्‍थमा से ग्रस्‍त लोगों को भी गुड़ खाने की सलाह दी जाती है। गुड़ शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है और इसमें एंटी एलर्जिक गुणों के कारण इसका सेवन अस्‍थमा के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद रहता है।



आलू है बड़े काम की चीज, जानिए इसके आर्युवेदिक फायदों के बारे में
आलू बाजार में उपलब्ध होने वाली सबसे सस्ती सब्जी है। जो पुरे साल मिलती है। आलू में त्‍वचा देखभाल और सौंदर्य-शैली से सं‍बंधित सभी गुण मौजूद हैं। इसे आप आहार के रूप में लेने के साथ ही विभिन्‍न प्रकार से उपयोग कर सकते हैं। आप इसका उपयोग त्‍वचा संबंधित सभी प्रकार की समस्‍याओं जैसे तेलीय त्‍वचा, शुष्‍क त्‍वचा, मुंहासे, त्‍वचा को गोरा बनाना, डार्क सर्कल्‍स और अन्‍य समस्‍याओं का उपचार कर सकते हैं।

# इन दिनों लगभग सभी लोग समय से पहले झुर्रीयों की परेशानी से जूझ रहे हैं। जीवन शैली और अन्‍य कारको के कारण झुर्रीयों का उपचार कर पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन कुछ प्राकृतिक उपचार हैं जिनका नियमित उपयोग करने पर ये झुर्रीयों को रोक सकते हैं। आलू भी इसमें हमारी मदद करता है। झुर्रीयों को दूर करने के लिए आप आलू की लुग्‍दी बनाये और इससे आलू का रस निकालें। इस रस को आप अपने चेहरे या प्रभावित क्षेत्र में लगाएं। यह आपके चेहरे की झुर्रीयों को हटाने के साथ ही आपकी त्‍वचा को नरम बनाये रखने में स‍हायक होता है। आप भी आलू के रस का उपयोग कर अपनी त्‍वचा को युवा बना सकते हैं।

# चेहरे की सुंदरता को कम करने का एक प्रमुख कारण शुष्‍क त्‍वचा भी होती है। शुष्‍कता आपकी त्‍वचा टोन की चरम स्थितियों में से एक है जिसे तत्‍काल इलाज किया जाना चाहिए। अन्‍यथा यह परतदार त्‍वचा का कारण बन सकती है। शुष्‍क त्‍वाचा का इलाज करने के लिए आप आलू फैस पैक बना सकतीं है। इसके लिए आधा आलू लें और इसकी लुग्‍दी बनाये। अब इस लुग्‍दी में 1 बड़ा चम्‍मच दही डालें और मिश्रण को अच्‍छी तरह से मिलाएं। आप इसे अपने चेहरे की त्‍वचा में अच्‍छी तरह से लगायें। लगभग 20-25 मिनिट के बाद आप अपने चेहरे को साफ कर लें। यह आपकी शुष्‍क त्‍वचा का उपचार करने और बुढ़ापे के संकेतों से त्‍वचा की रक्षा करने में मदद करता है।

# काम की अधिकता और नींद की कमी बहुत से लोगों को प्रभावित कर सकती है। जिसके परिणामस्‍वरूप आंखों के नीचे काले सर्कल आ जाते हैं। बहुत से लोग इन डार्क सर्कल का उपचार ढूंढते हैं, लेकिन शायद ही कोई क्रीम या दवा इसका स्‍थाई इलाज कर सकती है। इसके बजाय उन लोगों को प्राकृतिक उपचार आजमाना चाहिए। डार्क सर्कल्‍स का प्राकृतिक इलाज आलू से किया जा सकता है। आप इसके लिए 1 बड़े आलू को छीलें और इसे पतले आकार में काट लें। अब इन चिप्‍स के आकार वाले आलूओं को अपनी आंखों में रखें और 20 मिनिट तक आराम करें। आप आलू की लुग्‍दी भी बना सकते हैं और इसे गीले कपड़े में ले कर उपयोग कर सकते हैं। यह आपके डार्क सर्कल्‍स को हटाने का प्रभवी इलाज हो सकता है।

# कभी-कभी चेहरे पर मौजूद मृत त्‍वचा की वजह से आपकी त्‍वचा रूखी और बदसूरत हो सकती है। लेकिन आप इस समस्‍या का समाधान आलू की सहायता से कर सकते हैं। आलू आपके चेहरे में मौजूद मृत त्‍वचा को प्रभावी ढंग से हटा सकता है साथ ही त्‍वचा के रंग को साफ भी कर सकता है। इसके लिए आप 1 आलू को पीस कर इसका रस निकाल लें और इसे अपने चेहरे पर लगाएं। लगभग 20 मिनिट के बाद आप अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। यह आपको त्‍वरित परिणाम दिला सकता है।



आर्युवेद में गुणों का भंडार है स्वर्ण भस्म, जानिए इससे होने वाले फायदों के बारे में
स्‍वर्ण भस्‍म का अगर सही तरिके से उपयोग किया जाये तो यह बहुत कारगर साबित होती है और आयुर्वेद के अनुसार स्‍वर्ण भस्‍म के फायदे कई प्रकार की जटिल स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने के लिए जाने जाते हैं। स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि भस्‍म आखिर होता क्‍या है। भस्‍म एक प्रकार का पाउडर होता है जो आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण के लिए तैयार किया जाता है। यह शुद्ध धातुओं या खनिजों से बनाए जाते हैं। इस लेख में हम स्‍वर्ण भस्‍म के फायदे

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए – मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रूप से स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग किया जाता है। स्‍वर्ण भस्‍म युक्‍त दवा स्‍मृति, एकाग्रता, समन्‍वय और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करती है। स्‍वर्ण भस्‍म को अवसाद, मस्तिष्‍क की सूजन और मधुमेह के कारण न्‍यूरोपैथी जैसी स्थितियों के विरुद्ध भी उपयोग किया जाता है। स्‍वर्ण भस्‍म प्रभावी रूप से आंशिक और पूर्ण इलाज करने में मदद करती है। यदि आप किसी मानसिक समस्‍या से परेशान हैं तो किसी स्‍वास्‍थ्‍य सलाहकार की सलाह के बाद स्‍वर्ण भस्‍म का सेवन कर सकते हैं।

हृदय रोग के लिए – दिल की समस्‍याओं को दूर करने वाली अधिकतर दवाओं में स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग किया जाता है। स्‍वर्ण भस्‍म में मौजूद कुछ ऐसे पोषक तत्‍व होते हैं जो हृदय स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। स्‍वर्ण भस्‍म दिल के लिए उचित रक्‍त प्रवाह को बनाए रखने में मदद करता है जो दिल को मायोकार्डियल आइस्‍क्रीमिया से रोकता है। यह दिल में रक्त परिसंचरण को भी बढ़ाता है। इस प्रकार से स्‍वर्ण भस्‍म दिल और हृदय की मांसपेशियों को भी शक्ति प्रदान करता है। इसके गुण रक्‍त को शुद्ध करने में भी मदद करते हैं और कोरोनरी धमनियों को साफ करते हैं। इन्‍ही वजहों से स्‍वर्ण भस्‍म हृदय को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में मदद करती है। आप भी अपने हृदय को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए स्‍वर्ण भस्‍म युक्‍त दवाओं का सेवन अपने चिकित्‍सक की सलाह पर कर सकते हैं।

तनाव को कम करे – आयुर्वेद में स्‍वर्ण भस्‍म का विशेष स्‍थान है, क्‍योंकि बहुत सी दवाओं में इसका उपयोग किया जाता है। स्‍वर्ण भस्‍म के फायदे में तनाव को कम करना भी शामिल है। मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के साथ ही यह मस्तिष्‍क की कार्य क्षमता को बढ़ा सकता है। मस्तिष्‍क की कार्य क्षमता को प्रभावित करने वाले कारको में ध्‍यान की कमी, चिंतन, अत्‍याधिक उदासी, चिड़चिड़ापनऔर अनिद्रा आदि शामिल होते हैं। स्‍वर्ण भस्‍म का सेवन कर इन सभी समस्‍याओं को दूर किया जा सकता है। इस प्रकार की स्थिति में स्‍वर्ण भस्‍म को अब्रक भस्‍म और मुक्‍ता पिस्ति के साथ लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन किसी भी समस्‍या का उपचार करने के लिए दवाओं का सेवन करने से पहले डॉक्‍टर से सलाह लेना आवश्‍यक है। बिना डॉक्‍टर की अनुमति के किसी भी प्रकार की दवाओं का सेवन करना हानिकारक हो सकता है।

आंखों के लिए – जिन लोगों को आंख से संबंधित समस्‍याएं होती हैं उनके लिए स्‍वर्ण भस्‍म बहुत ही फायदेमंद हो सकता है। स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग कर विभिन्‍न प्रकार की दवाएं बनाई जाती हैं जो कि आंखों की समस्‍याओं को प्रभावी रूप से दूर कर सकती हैं। इस प्रकार की दवाओं का उपयोग आंख आना, और इससे जुड़े अन्‍य लक्षणों के लिए किया जाता है। इन लक्षणों में शामिल हैं आंख का लाल होना, आंखों में खुजली और जलन होना आदि इस प्रकार की आंखों से संबंधित सभी समस्‍याओं के लिए स्‍वर्ण भस्‍म एक प्रभावी उपचार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

कैंसर से बचाए – गोल्‍ड भस्‍म एक ऐसी औषधी है जो कि सामान्‍य रूप से सभी के हाथों में उपलब्‍ध नहीं हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि इससे बनी औषधीयां बहुत महंगी होती हैं। लेकिन इसका औषधीय रूप में उपयोग कर आप कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी का उपचार कर सकते हैं। स्‍वर्ण भस्‍म ट्यूमर और कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है। स्‍वर्ण भस्‍म में मौजूद घटक शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में मदद करते हैं और हानिकारक तत्‍वों और जीवाणुओं से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। आप भी स्‍वर्ण भस्‍म से बनी दवाओं और खाद्य पदार्थों का सेवन कर इस तरह की तमाम समस्याओं की संभावनाओं को कम कर सकते हैं।

स्किन – जो लोग अपनी त्‍वचा के रंग से संतुष्‍ट नहीं हैं उनके लिए स्‍वर्ण भस्‍म कायाकल्‍प करने वाली औषधी है। सोने जैसा दमकता रंग प्राप्‍त करने के लिए स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग किया जा सकता है। स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग कर एटोपिक डार्माटाइटिस और सोरायसिस जैसी समस्‍याओं का भी इलाज किया जा सकता है। त्‍वचा के साथ-साथ यह पूरे शरीर का कायाकल्‍प कर सकती है। इसके अलावा यह आपके बालों को समय से पहले भूरा होने से भी रोक सकती है। त्‍वचा स्‍वास्‍थ्‍य स्‍वर्ण भस्‍म युक्‍त औषधीयों का उपयोग करने पर यह त्‍वचा की झुर्रियों को कम करने में मदद कर सकता है। आप भी अपनी त्‍वचा के समग्र स्‍वास्‍थ्‍य के लिए स्‍वर्ण भस्‍म का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

यौन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए – पुरुषों की यौन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने के लिए स्‍वर्ण भस्‍म का व्‍यापक रूप से उपयोग किया जाता है। स्‍वर्ण भस्‍म पुरुषों में स्तंभन दोष और समय पूर्व स्‍खलन जैसी समस्‍याओं को दूर करता है। पुरुषों के लिए स्‍वर्ण भस्म एक कामोद्दीपक की तरह कार्य करता है। इसका उपभोग करने पर पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी को दूर किया जा सकता है। इसके साथ ही यह सहनशक्ति को बढ़ाने, वीर्य की गुणवत्‍ता को सुधारने और सेक्‍स टाईम में वृद्धि करने में सहायक होता है। स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग करने पर महिला और पुरुष दोनों में बांझपन और सिफलिस का इलाज करने में भी मदद मिलती है। इस तरह से स्‍वर्ण भस्‍म का इस्‍तेमाल कर यौन समस्‍याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

गर्भावस्‍था में – महिलाओं में गर्भावस्‍था के समय कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं जन्‍म लेती हैं। यह एक ऐसा समय होता है जिसमें महिलाओं को कई प्रकार के पौष्टिक और पोषक तत्‍वों से भरपूर खाद्य पदार्थों की आवश्‍यकता होती है। गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को उल्‍टी, मतली, संवेदना जैसी सामान्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं। लेकिन यदि समय पर इनका उपचार न किया जाए तो यह गंभीर हो सकती हैं। इस प्रकार की समस्‍याओं से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह पर स्‍वर्ण भस्‍म का उपयोग किया जा सकता है। यह मांसपेशीय प्रणाली में सुधार करती है और गर्भावस्‍था के साथ स्तनपान के लिए एक अच्‍छे टॉनिक के रूप में कार्य करती है।


स्‍वर्ण भस्‍म खाने का तरीका –
इस औषधीय धातु का सेवन उम्र और समस्‍या के आधार पर किया जाता है। चूंकि यह औषधी होने के साथ ही एक धातु है जिसकी संतुलित मात्रा ही हमारे शरीर के लिए उपयुक्‍त होती है। इसलिए बिना डॉक्‍टर की सलाह के या उचित संयोजन के उपभोग करने पर स्‍वास्‍थ्‍य में इसका नकारात्‍मक प्रभाव पड़ सकता है।सामान्‍य रूप से प्रतिदिन 15 से 30 मिलीग्राम स्‍वर्ण भस्‍म का सेवन किया जा सकता है। इसकी अधिकतम अनुशंसित खुराक 62.5 मिली ग्राम है।

पांच वर्ष से कम उम्र वाले बच्‍चों को प्रतिदिन 5 मिलीग्राम स्‍वर्ण भस्‍म का सेवन कराया जा सकता है। इससे अधिक मात्रा उनके लिए उपयुक्‍त नहीं है। 5 से 10 वर्ष की आयु वाले बच्‍चों के लिए प्रतिदिन की खुराक 10 मिलीग्राम होती है।

10 वर्ष से 16 वर्ष की आयु वाले बच्‍चों के लिए 15 मिलीग्राम मात्रा प्रतिदिन निर्धारित की गई है।आमतौर पर मधुमेह के कारण होने वाली समस्‍याओं और यौन कमजोरी, शुक्राणुओं की संख्‍या बढ़ाने, बांझपन का उपचार करने आदि मामलों में स्‍वर्ण भस्‍म का नियमित रूप से दो माह तक सेवन किया जाना चाहिए।

गंभीर समस्‍याओं के निराकरण के लिए यह अवधी लंबी हो सकती है जो कि अधिकतम 9 माह तक हो सकती है। स्‍वर्ण भस्‍म को दिन में दो बार (सुबह और शाम के भोजन के बाद) सेवन किया जा सकता है।स्‍वर्ण भस्‍म का सेवन करने के लिए आप इससे निर्मित दवाओं के साथ ही स्‍वर्ण भस्‍म को दूध, घी या शहद के साथ सेवन कर सकते हैं। लेकिन स्‍वर्ण भस्‍म को बेल फल (Golden apple) के साथ सेवन करने से बचना चाहिए।


नाभि पर तेल लगाने से दूर रहती है ये खतरनाक बीमारिया, जानिए
आज हम आपको आर्युवेद का एक ऐसा नुस्खा बताने जा रहे है जिसे आजमाकर आप भी कई तरह की बीमारियों से बचे रह सकते है। तेल आयुर्वेद का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैं। नाभि पर तेल लगाने से अद्भुत लाभ होता हैं, नाभि में तेल लगाना एक बहुत ही पुरानी प्रक्रिया हैं। बहुत सारे तेलों में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, नाभि हमारे शरीर का मध्य बिंदु होता हैं, नाभि में तेल लगाने के फायदे सुन कर आप आश्चर्य में पड़ जायेंगे।

# हम अक्सर नाभि की सफाई पर ध्यान नहीं देते हैं और इसके बारे में भूल जाते हैं, परन्तु यह बहुत आवश्यक होता हैं अगर हम इसकी सफाई के तरफ ध्यान नहीं देगे तो यही बहुत बड़ी समस्या का करना बन जाता हैं। इसलिए हमें अपनी नाभि को नियमित रूप से साफ़ करनी चाहिए। नाभि कि सफाई के लिए तेल का प्रयोग करे। इसके लिए आप हल्के तेल जैसे कि सरसों का तेल, नारियल का तेल, जोजोबा का तेल, कस्तूरी का तेल, अंगूर के बीज का तेल को लेकर नाभि पर लगाये, ये तेल मृत त्वचा और गंदगी को ढीला कर देते हैं जिसके बाद आप आसानी से इसे साफ कर सकते हैं।

# सुखी और परतदार त्वचा देखने में सुस्त और निर्जीव लगती हैं, रात में नाभि में तेल लगाने से आपकी त्वचा सुखी और परतदार नहीं रहती हैं। त्वचा को मॉइस्चराइजर करने के लिए अपनी नाभि पर तेल लगाये और इसे हल्के हाथों से मालिश करे, अपनी त्वचा को मॉइस्चराइजर करने का यह बहुत ही आसान तरीका हैं । इससे आपकी त्वचा नर्म हो जाती हैं और त्वचा का सूखापन भी खत्म हो जाता हैं। इसके लिए आप जैतून का तेल, या नारियल का तेल ले सकते हैं।

# त्वचा को मॉइस्चराइज करने और होंठ को नरम और सॉफ्ट रखने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है रात में नाभि पर तेल लगाना। त्वचा को जवान और मुलायम बनाने के लिए यह सबसे पुराना घरेलू नुस्खा है। यह उम्र बढ़ने (ageing) की प्रक्रिया में भी देरी करता है और त्वचा और होंठ को सुंदर बनाता है।

# थंड में स्वाभाविक रूप से मुलायम होंठ चाहते हैं? तो फिर सोने से पहले हर रात नाभि में सरसों तेल लगाना शुरू करें। सरसों का तेल सबसे अच्छा तेल है जो संक्रमण को ठीक कर सकता है।

# नाभि के लम्बे समय तक गंदे रहने और नमी रहने के कारण उसमे संक्रमण का होना संभव हो जाता हैं, नाभि की सफाई ना होने के कारण उसमे बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं इससे बचने के लिए आप नाभि कि सफाई करते रहे, नाभि को साफ रखने के लिए आप तेल का प्रयोग करे, इसके लिए आप टी ट्री ऑयल, सरसों का तेल और नारियल के तेल आदि का प्रयोग कर सकते हैं इन तेलों में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं जो कि नाभि में संक्रमण को होने से रोकते हैं।

# मासिक धर्म के समय का दर्द बहुत ही पीड़ादायक होता हैं, इसकी वजह से आपके दैनिक कार्य में असुविधा होने लगती हैं, नाभि में तेल लगाने से मासिक धर्म में होने वाले दर्द को भी कम किया जा सकता हैं। यह एक सामान्य समस्या हैं जिसको कम करने के लिए आप नाभि में तेल लगाये इससे आपका दर्द कम होगा। इसके लिए आप क्लरी ऋषि तेल, पुदीना, साइप्रस, और अदरक जैसे तेलों का प्रयोग करे और पेट के आस पास इन तेलों से मालिश करे।

# आयुर्वेद के अनुसार आपका नाभि चक्र आपकी ऊर्जा और कल्पना का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं, नाभि आपकी इक्छा सकती और लक्ष्यों का घर होता हैं। अपने नाभि चक्र को संतुलित करने के लिए उसमे तेल लगाये, इसके लिए आप कुछ तेल जैसे कि शीशम का तेल, चन्दन का तेल, लगाये। यह आपको सप्ताह में एक बार जरूर लगाना हैं।

# नाभि पेट के सबसे पास होती हैं इसलिए यह प्रजनन क्षमता से जुड़ी रहती हैं, नाभि में तेल लगाने से यह आपके प्रजनन क्षमता को बढ़ा देता हैं, गर्भवती होने के समय नाभि ही आपकी माँ से जुड़ी रहती है, नाभि पर तेल लगाने और सही जगह पर मालिश करने से यह प्रजनन क्षमता को बढ़ा देता हैं। नारियल के तेल (या यहां तक ​​कि जैतून का तेल) लगाने से आपके शरीर को अधिक फर्टाइल बनाने में मदद मिलेगी। ये तेल आपके शरीर को स्वस्थ रखने के साथ यह पुरुषो के शुक्राणु को भी स्वस्थ रखते हैं। महिलाओं के मासिक धर्म की समस्या को भी खत्म करते हैं जिसके कारण प्रजनन क्षमता बढ़ती हैं।

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