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सुखी वैवाहिक जीवन के लिए

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शादी के बाद
इन बातों को कभी भी भूलना नहीं चाहिए
Tips For #Happy_Married_Life : विवाह पति-पत्नी के बीच का एक ऐसा धर्म संबंध जो कर्तव्य और पवित्रता पर आधारित होता है। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तरों पर स्त्री और पुरुष दोनों ही अधूरे होते हैं। स्त्री और पुरुष के मिलन से ही ये अधूरापन दूर होता है। विवाह जिन बातों पर हमेशा टिका रहता है, उनमें से सात मुख्य बातें यहां जानिए…
पहली बात है संयम
संयम यानी समय-यमय पर उठने वाली मानसिक उत्तेजनाओं जैसे- कामवासना, गुस्सा, लालच, अहंकार तथा मोह आदि पर नियंत्रण रखना। श्रीराम और सीता ने अपना पूरा वैवाहिक जीवन बहुत ही संयम और प्रेम के साथ व्यतीत किया था। वे कभी भी मानसिक या शारीरिक रूप से अनियंत्रित नहीं हुए।

दूसरी बात है संतुष्टि
संतुष्टि यानी एक दूसरे के साथ रहते हुए समय और परिस्थिति के अनुसार जो भी सुख-सुविधा मिल जाए, उसी में संतोष करना। 

तीसरी बात है संतान
वैवाहिक जीवन में संतान का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। पति-पत्नी के बीच के संबंधों को मधुर और मजबूत बनाने में बच्चों की भी भूमिका रहती है। श्रीराम और सीता के बीच वनवास को खत्म करने और सीता को पवित्र साबित करने में उनके बच्चों लव और कुश ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

चौथी बात है संवेदनशीलता
पति-पत्नी के रूप में एक दूसरे की भावनाओं का समझना और उनकी कद्र करना चाहिए। श्रीराम और सीता के बीच संवेदनाओं का गहरा रिश्ता था। दोनों बिना कहे-सुने ही एक दूसरे के मन की बात समझ जाते थे।

पांचवीं बात है संकल्प
पति-पत्नी के रूप में अपने धर्म संबंध को अच्छी तरह निभाने के लिए कर्तव्य को संकल्प लेकर पूरा करना चाहिए।

छठी बात है शारीरिक, आर्थिक और मानसिक मजबूती
वैवाहिक जीवन को सफलता और खुशहाली से भरा-पूरा बनाने के लिए पति-पत्नी दोनों का शारीरिक, आर्थिक और मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत ही आवश्यक है।

सातवीं बात है समर्पण
वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी का एक दूसरे के प्रति पूरा समर्पण और त्याग होना भी आवश्यक है। एक-दूसरे की खातिर अपनी कुछ इच्छाओं और आवश्यकताओं को त्याग देना या समझौता कर लेना रिश्तों को मधुर बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।




यौन शक्ति बढ़ाने के लिए 
यौन शक्ति को बढ़ाने व खोई हुई ताकत वापस लाने के लिए असरोल की जड़ का पावडर लाभदायक सिद्ध होता हैं। इन औषधियों से किसी भी प्रकार के यौन संबंधी समस्याएँ होने पर इस्तेमाल करें लाभप्रद सिद्ध होगी। इस दवा को हिंदी में बबूल के रस के नाम से जाना जाता है।

अकाकिया : अकाकिया बबूल की फलियों तथा पत्तों का रस है जिसे सुखाकर टिकिया बनायी जाती है। यह दवा पेशाब में धातु तथा स्वप्न दोष के लिए अचूक औषधि है। जो व्यक्ति इस तरह के रोग से ग्रसित है उन्हें बबूल का रस 1 से 1 1/2 ग्रा. तक सेवन करना चाहिए। इसके अलावा अकाकिया अन्य बीमारियों में भी लाभकारी हैं जैसे- खूनी पेचिश, श्वेत प्रदर, आँख आना, मुँह में छाले होना आँतों में खराश गर्मी के

lady finger (भिंडी)

वीर्य का पतलापन दूर करने वाली दवा भिंडी : भिंडी से सभी लोग परिचित हैं। भिंडी वीर्य को गाढ़ा करती है तथा संभोग की शक्ति को बढ़ाती है। जिन व्यक्तियों का वीर्य पतला हो उन्हें नर्म व मुलायम भिंडी जिसमें बीज न पड़े हों इसका पावडर पाँच से सात ग्रा. तक सेवन
करना चाहिए। भिंडी की सब्जी पाचन शक्ति के अनुसार खानी चाहिए। भिंडी के अन्य औषधीय गुण मूत्र द्वार में छीलन सूजन मूत्र त्यागते समय दर्द और सूजन में इसका काढ़ा लाभकारी है। शरीर में खून की कमी की शिकायत दूर करती है। खून को बढ़ाती है।

स्त्री-पुरुष के मैथुन के 64 अंग हैं। इसकी गणना 64 कलाओ में की गई है। संभोग काल की आठ श्रेणियां मानी गई हैं और इन सभी आठ श्रेणियों के आठ-आठ भेद हैं, जिस कारण मैथुन 64 कलाओं की क्रिया है।
संभोग काल की आठ श्रेणियां:
1. आलिंगन
2. चुंबन
3. नाखून से नोंचना
4. दांत से काटना
5. संभोग के समय पुरुष द्वारा लिंग का नारी की योनि में प्रवेश
6. संभोग के समय सी-सी की आवाज करना
7. स्त्री द्वारा विपरीत रति अर्थात संभोग के समय स्त्री का ऊपर होना
8. आप्राकृति जैसे मुख व गुदा मैथुन

आलिंगन:

परिचय बढ़ाने के लिए आलिंगन

* पुरुष किसी बहाने स्‍त्री के शरीर से अपना शरीर स्पर्श करा दे
* स्‍त्री एकान्त में हलके से अपना स्‍तन पुरुष के शरीर से सटा दे


परिचय बढ़ने पर आलिंगन

* अंधकार, भीड़ या एकान्त में मौका मिलते ही स्‍त्री-पुरुष का अधिक समय तक एक-दूसरे के सीने से चिपटना

* एकांत मिलते ही पुरुष स्‍त्री को दीवार या खंभे के सहारे टिकाकर गले लगा ले 

प्रेम हो जाने के बाद खड़े-खड़े आलिंगन
* पेड़ की लता के समान स्‍त्री पुरुष से लिपट कर चुंबन के लिए उसका चेहरा नीचे झुकाए। इसके बाद स्‍त्री पुरुष की बाहों में झूलते हुए उसे ऐसे देखे जैसे उसकी सुन्दरता निहार रही हो

* स्‍त्री एक पैर पुरुष के पैर पर रखे एवं दूसरे से उसकी जांघ को लपेट ले। उस दौरान उसका एक हाथ पुरुष की पीठ पर हो और दूसरे हाथ से कंधे को झुकाती हुई पुरुष को चूमने का प्रयास करे

लेटी व बैठी अवस्था में आलिंगन
* स्‍त्री-पुरुष एक दूसरे के विपरीत लेट कर हाथ-पैरों को सहलाते हुए आलिंगन करें

* स्‍त्री पुरुष की गोद में बैठ जाए या लेट जाए। उस समय सुध-बुध खोकर दोनों एक-दूसरे में इस तरह समा जाएं कि होश ही न रहे

इनके अलावा भी आलिंगन के चार भेद बताए गए हैं

* स्‍त्री पुरुष में से कोई एक या दोनों दूसरे की एक या दोनों जांघों को अपनी जांघ के बीच पूरी शक्ति से दबाए 
* स्‍त्री पुरुष के जांघ को अपनी जांघ से दबाती हुई, उसके शरीर में नाखून व दांत गड़ाए और उसे चूमते हुए उसके ऊपर चढ़ जाए
* स्‍त्री अपने स्तनों से पुरुष के सीने को मसल दे। ऐसा लगे जैसे वह पुरुष के सीने से एकाकार होना चाहती है। फिर धीरे-धीरे वह उसके ऊपर चढ़ जाए
* दोनों अपने होंठ व जीभ को एक-दूसरे के मुंह में डालकर सुध-बुध खो दे

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