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कैंसर ट्यूमर को खत्म करेगी ये छोटीसी चीज


कैंसर ट्यूमर को खत्म करेगी ये छोटीसी चीज , इस जगह शुरू हुआ इलाज
अक्सर लोग कैंसर का नाम सुनते ही पागल हो जाते है और घबराहट के कारण बेचैन हो जाते है। जिस तरह पेंसिल के जरिये जिस तरह कागज पर रेखाएं बनाई जाती हैं, ठीक उसी प्रकार अब नई तकनीक से हर आकार के जानलेवा कैंसर ट्यूमर को खत्म किया जा सकेगा। शरीर में मौजूद अति सूक्ष्म ट्यूमर को भी पेंसिल बीम थेरेपी (पीबीएस) से नष्ट किया जा सकता है। साथ ही मरीज को रेडिएशन के दुष्प्रभाव से भी बचाया जा सकता है। करीब 10 तरह के कैंसर को खत्म करने वाली इस रेडियोथेरेपी को भारत में पहली बार चेन्नई के अपोलो प्रोटोन सेंटर में शुरू किया गया है।

सेंटर के निदेशक डॉ. राकेश जलाली ने बताया कि प्रोटोन पद्धति के तहत पीबीएस कैंसर के लिए वरदान है। कई मरीजों में ट्यूमर के दुर्लभ आकार और हड्डियों के नजदीक होने के कारण रेडिएशन के दौरान शरीर के बाकी हिस्से को नुकसान होता है। पेंसिल बीम से इसे रोका जा सकता है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार, देश में इस समय पुरुषों में प्रोस्टेट और महिलाओं में स्तन व गर्भाशय कैंसर सबसे ज्यादा मिल रहे हैं। चूंकि इनमें ट्यूमर का आकार और फैलाव अत्यंत सूक्ष्म होता है। इसलिए पेंसिल बीम थेरेपी मरीजों के लिए बेहतर साबित हो रही है। 
क्या है पेंसिल बीम थेरेपी
डॉ. जलाली ने बताया कि यह एकदम चित्रकारी जैसा अनुभव है। जिस तरह किसी चित्र में पेंसिल के जरिये शेड दिया जाता है, उसी तरह ट्यूमर पर पेंसिल धीरे-धीरे रेडिएशन का शेड देती है। आमतौर पर कैंसर मरीज को कीमो में बाल झड़ने और तड़प वाली पीड़ा होती है। रेडियोथेरेपी में उसकी त्वचा जल जाती है और असहनीय पीड़ा होती है, जबकि प्रोटोन थेरेपी इन सभी दुष्प्रभावों से मुक्त है। 

इस तरह के कैंसर का होगा खात्मा 
एम्स के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने बताया कि स्तन, यूट्रस, नाक-गला-स्कल, लिवर, फेफड़ा, बाल, प्रोस्टेट, रीढ़ की हड्डी, पेट कैंसर और लिम्फोमा के इलाज में पेंसिल थेरेपी कारगर है। इसका रेडिएशन केवल ट्यूमर पर पड़कर उसके सेल्स खत्म करता है। 

तीन मिनट में ही असर 
डॉक्टरों के अनुसार शुरुआती तीन मिनट में ही इस थेरेपी का असर दिखने लगता है। इससे मरीज की गुणवत्तापूर्ण जीवन आयु बढ़ती है। ये थेरेपी मरीज के उपचार का लंबा समय, खर्चा, दुष्प्रभाव, रेडिएशन से बचाव करती है। प्रोटोन पद्धति में ये सबसे ज्यादा कारगर साबित हुई है। जल्द ही इसे राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (झज्जर) में भी उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है।


कच्ची प्याज खाने से होते है ये हैरान कर देने वाले फायदे

आजकल सर्दी का मौसम चल रहा है और दिनबर के मौसम में सर्द और गलन भरी हवाएं चलती रहती है ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम और नाक बहने की समस्या आम है। छोटे बच्चे इस मौसम में इन समस्याओं से ज्यादा परेशान होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर में मौजूद प्याज सर्दी के मौसम में होने वाली इन सभी समस्याओं का आसान घरेलू इलाज है। जी हां, अमेरिका और चीन में प्याज को सर्दी, जुकाम की आम समस्याओं में वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में प्रयोग किया जाता है। दरअसल प्याज में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सूजन को दूर करते हैं और छाती में जमा बलगम को साफ करते हैं। आइए आपको बताते हैं कि किस तरह आप इन समस्याओं में कर सकते हैं प्याज का प्रयोग।

नुस्खा बनाने के लिए सामग्री - लाल प्याज, शहद, एक कटोरी, रेफ्रिजरेटर

कैसे बनाएं ये प्राकृतिक औषधि - सबसे पहले गहरे लाल रंग की एक प्याज को छीलकर इसे टुकड़ों में काट लें।
अब प्याज के टुकड़ों पर हाथों से शहद लगाएं या शहद में डुबाकर इसमें अच्छी तरह शहद लगा लें। प्याज के शहद लगे इन टुकड़ों को फ्रिज में रात भर के लिए रख दें। सुबह इसे रेफ्रिजरेटर से निकालकर रख दें।

आधे घंटे बाद जब प्याज का तापमान सामान्य हो जाए, तो इसे खा लें और कटोरी की तली में बचे हुए शहद को भी खा लें।एक बार के प्रयोग में ही आपको सर्दी-जुकाम से राहत मिल जाएगी और नाक बहनी भी बंद हो जाएगी।इस नुस्खे में रखें सावधानीकटी हुई कच्ची प्याज को खुला छोड़ने पर इसपर तेजी से बैक्टीरिया का जमाव होने लगता है इसलिए कभी भी पहले से कटी हुई प्याज का प्रयोग न करें। इस घरेलू औषधि को बनाने के लिए प्याज को काटने के बाद तुरंत कटोरी को ढककर रेफ्रिजरेटर में रख दें।
क्यों फायदेमंद है प्याज
प्याज में एक खास तत्व होता है, जिसे 'क्वरसेटिन' कहते हैं। ये एक तरह का फ्लेवेनॉइड है, जो एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करता है। इसके साथ ही प्याज के सेवन से शरीर में हिस्टामाइन का उत्पादन अच्छी तरह होता है। हिस्टामाइन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक जरूरी तत्व है। वैसे तो सभी तरह की प्याज में औषधीय गुण होते हैं इसलिए ये सर्दी-जुकाम की समस्याओं को ठीक करती हैं। मगर लाल प्याज में 'क्वरसेटिन' की मात्रा ज्यादा होती है।





फेफड़ों की सफाई के लिए बहुत फायदेमंद है ये चीज, फेफड़ों में जमी गंदगी को करती है साफ़
आयुर्वेद में कहा जाता है कि सिर्फ शलजम मात्र को खाने से ही शरीर को वह सभी पोषक तत्व मिल जाते हैं जिसकी उसे जरूरत रहती है। शलजम तुरंत एनर्जी देने के साथ ही इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है। यदि आप रात में शलजम का सेवन करते हैं तो हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स से छुटकारा मिलता है। अगर फेफड़ों की बात करें तो शलजम खाने से फेफड़े दुरुस्त होते हैं और शरीर की सारी गंदगी भी साफ होती है। शलजम की सब्जी किसी भी बीमारी का रोगी बेझिझक खा सकता है। यकीन मानिए शलजम के सेवन से फेफड़ों की गंदगी के साथ ही फेफड़ों की सूजन और बलगम की समस्या भी दूर होती है।

फेफड़ों के लिए शलजम
फेफड़ों के लिए शलजम का सेवन बहुत फायदेमंद है। सिर्फ शलगम का फल ही नहीं बल्कि इसकी जड़े भी बहुत फायदेमंद होती हैं। शलजम की जड़ों में कई गुना मिनरल और विटामिन होते हैं। यह विटामिन ए, विटामिन सी, कैरोटीनॉयड और ल्‍यूटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट का समृद्ध स्रोत है। इसके अलावा, इसके पत्ते विटामिन 'के' के बहुत अच्छे स्रोत हैं। साथ ही यह कैल्शियम, कॉपर, आयरन और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण मिनरल के भी बेहतरीन स्रोत हैं।

सिगरेट के धुएं में पाया जाने वाला कार्सिनोजेन्‍स शरीर में विटामिन 'ए' की कमी के कारण नुकसान पहुंचाता है। जिसके परिणामस्‍वरूप फेफड़ों की सूजन, एम्फीसेमा (वातस्फीति) और अन्‍य फेफड़े की समस्याएं हो सकती है। शलजम में निहित विटामिन 'ए' इस कमी को दूर करके फेफड़ों को स्‍वस्‍थ बनाए रखने में मदद करता है। 



टीबी रोग बहुत ही फायदेमंद रहता है लौंग का सेवन करना, इन बीमारियों को भी करती है तुरंत ठीक
अच्छे लौंग की पहचान है उसकी खुशबू एवं तैलीयपन। लौंग ख़रीदते समय उसे दातों में दबाकर देखना चाहिए इससे इसकी गुणवत्ता पता चल जाती है। जो लौंग सुगंध में तेज, स्वाद में तीखी हो और दबाने में तेल का आभास हो, उसी को अच्छा मानना चाहिए। व्यापारी लौंग में तेल निकाला हुआ लौंग मिला देते है। अगर लौंग में झुर्रिया पड़ी हों तो समझे कि यह तेल निकाली हुई लौंग है।

लौंग के तत्व
लौंग में मौजूद तत्वों का विश्लेषण किया जाए तो इसमें कार्बोहाइड्रेट, नमी, प्रोटीन, वाष्पशील तेल, गैर-वाष्पशील ईथर निचोड़ (वसा) और रेशे होते हैं। इसके अलावा खनिज पदार्थ, हाइड्रोक्लोरिक एसिड में न घुलने वाली राख, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, सोडियम, पोटेशियम, थायामाइन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन सी और ए जैसे तत्व भी इसमें प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा कई तरह के औषधीय तत्व होते हैं। इसका ऊष्मीय मान 43 डिग्री है और इससे कई तरह के औषधीय व भौतिक तत्व लिए जा सकते हैं।

इन बीमारियों में रहती है फायदेमंद - आयुर्वेदिक मतानुसार लौंग तीखा, लघु, आंखों के लिए लाभकारी, शीतल, पाचनशक्तिवर्द्धक, पाचक और रुचिकारक होता है। यह प्यास, हिचकी, खांसी, रक्तविकार, टीबी आदि रोगों को दूर करती है। लौंग का उपयोग मुंह से लार का अधिक आना, दर्द और विभिन्न रोगों में किया जाता है। यह दांतों के दर्द में भी लाभकारी है। ये उत्तेजना देते हैं और ऐंठनयुक्त अव्यवस्थाओं, तथा पेट फूलने की स्थिति को कम करते हैं। धीमे परिसंचरण को तेज करती है और हाजमा को बढ़ावा देती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि भारतीय मसालों में लौंग सबसे अच्छा एंटी ऑक्सीडेंट का काम करता है। भोजन में प्राकृतिक एंटी ऑक्सीडेंट का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। यह कृत्रिम एंटी ऑक्सीडेंट से ज्यादा बेहतर है। एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह चोट, घाव, खुजली और संक्रमण में कीटों के काटने या डंक मारने पर भी किया जाता है।

जानें इसका प्रयोग कब करते हैं
एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह चोट, घाव, खुजली और संक्रमण में भी काफ़ी उपयोगी होता है। इसका उपयोग कीटों के काटने या डंक मारने पर भी किया जाता है। लेकिन संवेदनशील त्वचा पर इसे नहीं लगाना चाहिए।
लौंग और हल्दी पीस कर लगाने से नासूर मिटता है। लौंग के तेल को त्वचा पर लगाने से सर्दी, फ्लू और पैरों में होने वाल फंगल इन्फेक्शन और त्वचा के कीड़े भी नष्ट होते हैं।

आंखों के पास या चेहरे पर निकली छोटी-छोटी फुंसियों पर लौंग घिस कर लगाने से फुंसियां और सूजन भी ठीक हो जाती हैं।आंत्र ज्वर में दो किलो पानी में पाँच लौंग आधा रहने तक उबालकर छानकर इस पानी को दिन में कई बार पिलाएं।एक लौंग पीस कर गर्म पानी से फंकी लें। दो तीन बार लेने से ही सामान्य बुखार उतर जाएगा। चार लौंग पाउडर पानी में घोल कर पिलाने में तेज बुखार भी कम हो जाता है।चार लौंग पीस कर पानी में घोल कर पिलाने में तेज ज्वर कम हो जाता है।

लौंग के तेल को तिल के तेल (सेसमी आयल) के साथ मिलाकर डालने से कान के दर्द में राहत मिलती है।लौंग मानसिक दबाव और थकान को कम करने का काम करता है। यह अनिद्रा के मरीजों और मानसिक बीमारियों जैसे कम होती याददाश्त, अवसाद और तनाव में उपयोगी होता है।लौंग का तेल ख़ून को साफ़ करके ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। चार लौंग कूट कर एक कप पानी में डाल कर उबालें। आधा पानी रहने पर छान कर स्वाद के अनुसार मीठा मिला कर पी कर करवट लेकर सो जाएं। दिन भर में ऐसी चार मात्रा लें। उल्टियां बंद हो जाएंगी। खसरा में दो लौंग को घिसकर शहद के साथ लेने से खसरा ठीक हो जाता है।

खाना खाने के बाद एक-एक लौंग सुबह, शाम खाने से या शर्बत में लेने से अम्ल-पित्त से होने वाले सभी रोगों में लाभ होता है। 15 ग्राम हरे आंवलों का रस, पांच पिसी हुई लौंग, एक चम्मच शहद और एक चम्मच चीनी मिलाकर रोगी को पिलाएं। ऐसी तीन मात्रा सुबह, दोपहर, रात को सोते समय पिलाएं। कुछ ही दिनों में आशातीत लाभ होगा। त्वचा के किसी भी प्रकार के रोग में इसे चंदन बूरादा के साथ मिलाकर लेप लगाने से फ़ायदा मिलता है। लौंग के तेल का इस्तेमाल मुंहासे के उपचार में भी किया जाता है।

मुंह और गले की बीमारी
गले में दर्द हो तो कुछ लौंग की कलियों को पानी में उबालकर गरारा करने से गले की खराबी और पायरिया में लाभ मिलता है। गले की खराश में लौंग चबाना असरकारक होता है। दांत दर्द होने पर लौंग की एक कली दांत के नीचे रखने से दर्द से तुरंत आराम मिलता है। इसके एंटीसेप्टिक गुण दांतों के संक्रमण को कम करता है। लौंग एक ऐसा मसाला है जो दंत क्षय को रोकता है और मुंह की दुर्गंध को दूर भगाता है। दांत में कीड़ा है तो लौंग को कीड़े लगे दांतों पर रखना चाहिए या इसके तेल की फुरेरी लगानी चाहिए, इससे दांत दर्द भी मिट जाता है। कटी जीभ पर लौंग को पीसकर रखने से ठीक हो जाती है।

दमा में भी है कारगर
लौंग से दमे का बहुत प्रभावी इलाज होता है। दमा के रोगी 4-6 लौंग की कलियों को पीसकर 30 मिली / एक कप पानी में उबाल कर इसका काढ़ा बना ले और शहद के साथ दिन में तीन बार पीएं। इससे जमी हुई कफ निकल जाएगी और दमा से राहत मिलेगी। लहसुन की एक कली को पीस शहद के साथ मिलाएं और 4-5 लौंग के तेल की बूंदें डालें, सोने से पहले इसे एक बार लें। आराम मिलेगा।



नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए अपनाये ये घरेलू नुस्खे
अगर आप भी नेत्र ज्योति बढ़ाना चाहते है तो आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताने जा रहे जिनकी मदद से आपकी नेत्र ज्योति भी शीग्र बढ़ जाएगी। दुनिया की सुंदरता को हम केवल आंखों से ही जान सकते हैं। इसलिए आंखें हमारे लिए बहुत ही अनमोल होती हैं। लेकिन कुछ लोगों में आंखों की कम रोशनी होने की समस्या होती है। जिससे उन्‍हें स्‍पष्‍ट या दूर की चीजों को देखने में दिक्‍कत हो सकती है। लेकिन आंखों की रोशनी बढ़ाने के कुछ प्रभावी घरेलू उपाय भी मौजूद हैं।

शकरकंद - मीठे आलूओं का नियमित सेवन आपकी आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद कर सकता है। शकरकंद में दो एंटीऑक्सीडेंट्स ल्यूटेन और जीजेनथिन मौजूद होते हैं। इसलिए शकरकंद में पर्याप्‍त मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं जो आंखों की सूजन और विषाक्‍त पदार्थों को दूर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी प्रभावी योगदान देते हैं। इसके लाभ प्राप्त करने के लिए आप शकरकंद को उबाल कर सेवन कर सकते हैं।


पालक का सेवन – आप अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने और आंखों की द्रष्टि को बढ़ाने के लिए पालक का सेवन कर सकते हैं। पालक में विटामिन E, A, B, और C की अच्‍छी मात्रा होती है। इसके अलावा पालक में आयरन और जस्‍ता जैसे खनिज पदार्थ के अलावा ल्यूटेन और जीजेनथिन जैसे फाइटोन्‍यूट्रिएंट्स की अच्‍छी मात्रा होती है। अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण पालक हमारी आंखों के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में मदद करती है। नियमित रूप से दैनिक आहार में पालक को शामिल कर मैकुलर अपघटन और मोतियाबिंद आदि समस्‍याओं को रोका जा सकता है।आप अपनी आंखों के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने के लिए पालक को अपने भोजन में शामिल करने के साथ ही सलाद के रूप में भी इसका सेवन कर सकते हैं। पालक आंखों की रोशनी बढ़ाने के सबसे अच्‍छे घरेलू उपायो में से एक है।

बीन्‍स और फलियां –बीन्‍स और फलियों में जस्‍ता की उच्‍च मात्रा होती है। इसके अलावा इनमें बायोफ्लावोनॉयड्स की भी अच्‍छी मात्रा मौजूद होती है जो आंखों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करती हैं। इन खाद्य पदार्थो का नियमित सेवन करने से यह हमारी आंखों में रेटिना की रक्षा होती है और मोतियाबिंद की संभावना कम होती हैं। आप भी अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में दाल, राजमा, चने, हरी मटर और अंकुरित अनाजों का सेवन कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।

अंडा - आपकी आंखों की रोशनी बढ़ाने का सबसे अच्‍छा तरीका अंडों का सेवन हो सकता है। इसके अलावा अंडे आपके स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने और ऊर्जा बढ़ाने में भी मदद कर सकते हैं। अंडे में आवश्‍यक अमीनो एसिड और पानी में घुलनशील और अघुलनशील विटामिनों की अच्‍छी मात्रा होती है। इसके अलावा अंडे की जर्दी में ल्यूटेन और जीजेनथिन की भी अच्‍छी मात्रा होती है। ये अंडे की जर्दी को पीला रंग प्रदान करते हैं।

आप अपनी आंखों को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए प्रतिदिन 1 से 2 अंडों का नियमित उपयोग कर सकते हैं। उबला हुआ अंड़ा आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। आप अपने स्वाद और रूचि के अनुसार इसे अन्‍य उत्‍पादों के साथ मिलाकर उपयोग कर सकते हैं।

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