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सीने में है दर्द तो न करें नजरअंदाज,


सीने में है दर्द तो न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं इस जानलेवा बीमारी के शिकार



एनजाइना एक प्रकार का छाती का दर्द है। जोकि दिल में खून के प्रवाह की कमी के कारण होता हैं। बता दें एनजाइना कोरोनरी धमनी की बीमारी का एक लक्षण मात्र है। जिसे दूसरी भाषा में एनजाइना पेक्टोरिस भी कहा जा सकता हैं। इसको सीने में तेज दर्द, दबाव, भारीपन, जकड़न आदि के रूप में समझा जा सकता हैं। इस बीमारी का शिकार हुए लोग ही इसको अच्छे से बता सकते हैं।

इस बीमारी से पीड़ित लोग बताते हैं कि उन्हें ऐसा लगता हैं जैसे कि उनके सीने को निचोड़ा जा रहा हो। या फिर उन्हें ऐसा लगता हैं जैसे कि उनके सीने में किसी ने भरी वजन रख दिया हों। हालांकि इस बीमारी को कोई ज्यादा बड़ी बीमारी तो नहीं माना जाता हैं। लेकिन अगर आपके सीने में दर्द या अपोच के दर्द या परेशानी हो आप तुरंत डॉक्टर के पास जाकर सलाह लें।
एनजाइना बीमारी के लक्षणसीने में हमेशा दर्द या बेचैनी का रहना
सीने में हमेशा दर्द या भारीपन का होना
सीने के दर्द के साथ-साथ बाहों, गर्दन, जबड़े, कंधे या पीठ में दर्द का रहना
हमेशा जी का मिचलाना
शरीर में हमेशा थकान रहना
हमेशा साँसों की कमी का होना
लगातार पसीना आना
हमेशा सिर का चकराना
महिलाओं में नजर आते हैं अलग लक्षणबता दें महिलाओं के अंदर पुरषों की अपेक्षा इसके लक्षण थोड़े से अलग देखे जाते हैं। जैसे कि महिलाओं के सीने में दर्द का होना इनके लिए एक आम बात है, लेकिन पुरुषों की भांति इनके अंदर अलग लक्षण दिखाई देते हैं। जिसे ज्यादातर महिलाएं अपने अनुभव के अनुसार बताती हैं।
महिलाओं का जी मिचलाना
महिलाओं की साँसों में कमी आना
महिलाओं के पेट में दर्द
महिलाओं की गर्दन, जबड़े या पीठ में तकलीफ
महिलाओं के सीने में दर्द होना
ऐसे लोगों को होता है ज्यादातर एंजाइना का खतरा*बता दें ये बीमारी ज्यादतर पुरूषों में दिखाई देता है, खासकर उन लोगों में जोकि धूम्रपान करते हैं।
*शुगर के कारण भी इस बीमारी के होने का खतरा सबसे ज्यादा होता हैं।
*उच्‍च रक्‍तचाप और कोलेस्‍ट्रॉल के कारण भी यह बीमारी हो जाती हैं।
*नियमित रूप से एक्‍सरसाइज न करने वालों को भी एंजाइना हो जाती हैं।
*इसके अलावा ये बीमारी कभी -कभी आनुवंशिक कारणों से भी होती हैं।


महिलाये अपनी वैजाइना को टाइट करने के अपनाये ये घरेलू उपाय
हर लड़की अपने प्राइवेट पार्ट को लेकर बहुत ही सावधानिया बरतती है। और अक्सर प्राइवेट पार्ट को किसी कुंवारी लड़की की तरह टाइट करने के उपाय के बारे में हर महिला जानना चाहती है कुछ प्राक्रतिक तरीको की मदद से महिलाएं अपनी प्राइवेट पार्ट में फिर से पहले जैसी कसावट वापिस पा सकती हैं, योनि को टाइट करने के उपाय काफी आसान और सरल है। 

वैजाइना महिलाओं के शरीर का जननांग होता है जो कि शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। वैजाइना को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना हर महिला की प्राथमिकता होती है। योनि का ढ़ीला होना आजकल महिलाओं में आम समस्या बन चुकी है।इस आर्टिकल में हम विस्तार से आपको कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि वैजाइना को टाइट करने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं

एलोवेरा - एलोवेरा जेल काफी लाभकारी होता है। इस जेले में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण होने के साथ-साथ त्वचा में कसावट पैदा करने के गुण भी होते हैं इसलिए वैजाइना को टाइट करने के लिए यह काफी उपयोगी घरेलू उपाय होता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए एलोवेरा जेल में साफ उंगली डुबाकर वैजाइना के चारों ओर लगाएं। दिन में 5-6 बार ऐसा करने से वैजाइना टाइट होती है।
आंवला – गूसबेरी में विटामिन ए, विटामिन सी आदि पर्याप्त मात्रा में होते हैं। साथ ही बैक्टीरिया और कैंसर रोधी गुण भी होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से वैजाइना तो टाइट होती ही है साथ ही वैजाइना के रोगों से भी बचा जा सकता है। इसका उपयोग करने के लिए पानी में आंवला उबालें और उसको मैश करके जूस निकाल लें। इस जूस को वैजाइना के चारों ओर लगाएं दिन में 4-5 बार ऐसा करने से योनि तेजी से टाइट होती है।

योग करना - बहुत सारे योग भी ऐसे होते हैं जो कि पेल्विक मसल्स में कसावट लाते हैं। इसके लिए आपको पवन मुक्तासन और सेतुबंध आसन आदि योग करने से फायदा मिलता है। रोजाना ये योगासन करने से पेल्विक मसल्स मजबूत बनती है और वैजाइना टाइट होती है। इसके अलावा केगल एक्सरसाइज करने से वैजाइना का ढ़ीलापन दूर करने में मदद मिलती है।

मर्दो के लिए बहुत ही ख़ास है सफेद मूसली, मर्दानगी से लेकर इन बीमारियों में होती है फायदेमंद
HEALTH BENEFIT
आयुर्वेद के अनुसार मूसली सर्दियों के लिए काफी अच्‍छी औषधि है। यह कई रोगों के लिए लाभदायक है। सालों से विभिन्न दवाइयो के निर्माण में भी सफेद मूसली का उपयोग किया जाता है। मूलतः यह एक ऐसी जडी-बूटी है जिससे किसी भी प्रकार की शारीरिक शिथिलता को दूर करने की क्षमता होती है। यही कारण है की कोई भी आयुर्वेदिक सत्व जैसे च्यवनप्राश आदि इसके बिना संम्पूर्ण नहीं माने जाते हैं।

# सफेद मूसली शीघ्रपतन के देसी इलाज के काफी मशहूर है। कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

# सफेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी मदद करती है। यही नहीं, कई शोध अपने परिणाम बताते हैं कि डायबिटीस के बाद होने वाली नपुंसकता में भी सफेद मुसली सकारात्मक असर करती पाई गई है। 

# अगर आपको अक्सर बदन दर्द की शि‍कायत बनी रहती है, तो प्रतिदिन सफेद मूसली की जड़ का सेवन फायदेमंद होता है। उच्च रक्तचाप, गठिया रोग में भी यह लाभकारी है।

# पेशाब में जलन की शिकायत होने पर तो सफेद मूसली की जड़ को पीसकर इलायची के साथ दूध में उबालकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। दिन में दो बार इस दूध को पीना लाभदायक होगा।

# पथरी की समस्या में सफेद मूसली को इन्द्रायण की सूखी जड़ के साथ बराबर मात्रा (1-1 ग्राम) में पीसकर, इसे एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाएं और मरीज को प्रतिदिन सुबह पिलाएं। यह उपाय सात दिनों में ही अपना प्रभाव दिखाता है और पथरी गल जाती है।



30 की उम्र का आंकड़ा पार करने वालों को गलती से भी न दें ये 6 फूड्स



उम्र के बढ़ने के साथ -साथ ही हमारे शरीर की जरूरते भी बदल जाती हैं। बॉडी को सही ढंग से काम करने के लिए एक अच्छे खानपान की सख्त जरुरत होती है। जिसमें कि महिलाएं अपने खान-पान को लेकर बहुत ही लापरवाह होती हैं।

सामान्य तौर पर देखा जाता है, कि महिलाओं को बढ़ती उम्र के साथ ही थकान कमजोरी हड्डियों में दिक्कत, जोड़ों में दर्द, जैसे समस्या होने लग जाती हैं। ऐसे में महिलाओं को उनकी डाइट में बदलाव की सख्त जरुरत होती है।

बता दें 30 की उम्र के बाद महिलाओं को कुछ चीजों से परहेज करना बेहद जरूरी होता है। ताकि आप एक अच्छी स्वस्थ लाइफ के साथ जी सकें। तो आइये जानते हैं आज कि महिलाओं को 30 उम्र का आकड़ां पार करने के बाद किन किन चीज़ों से परहेज करना चाहिए।

फ्लेवर्ड दही से करें परहेजवैसे तो इसका सेवन फायदेमंद माना जाता हैं। लेकिन क्या आप इस बात को जानती हैं कि 30 की उम्र का आकड़ां पार करने के बाद फलेवर दही खाना आपकी सेहत को नुकसान पंहुचा सकता हैं। बता दें इस दही के अंदर शुगर की मात्रा अधिक पायी जाती हैं। जोकि आपके लिए नुकसानदायक हैं।
सोया सॉस से करें परहेज
वर्तमान समय में ज्यादातर लोगों ने केचप और मेयोनेज को छोड़कर सोया सॉस का सेवन शुरू कर दिया हैं। इसके अंदर सोडियम नमक की मात्रा बहुत ज्यादा पायी जाती हैं। जोकि म्यूकस मेम्ब्रेन पर बुरा असर डालती हैं। इसका अधिक सेवन करने से पैरों में दर्द की समस्या भी शुरू हो जाती हैं।

पॉपकॉर्न से करें परहेजमहिलाएं मूवी का मजा दुगना करने के लिए पॉपकॉर्न जरूर खरीदती हैं। इसके अंदर बहुत अधिक मात्रा में नमक और बटर पाया जाता हैं। जोकि हमारे स्वास्थ के लिए बहुत ही हानिकारक हैं। इतना ही नहीं इसको बनाने के लिए पाम ऑयल और सिंथेटिक चीजों का इस्ते्माल किया जाता हैं। जोकि हमारे शरीर को बहुत नुक्सान पहुंचाता है।
डिब्बाबंद सब्जियों से करें परहेजइस तरह की सब्जियों में बहुत ज्यादा मात्रा में नमक मिला होता हैं। जिसके कारण हमारी स्किन पर समय से पहले झुर्रियां आने लगती है। इसके अलावा ये सब्जियां ब्लडप्रेशर पर भी बुरा असर डालती हैं। इससे कैंसर, इनफर्टिलिटी और मोटापे जैसी कई परेशानियां भी हो सकती हैं।
चिप्स से रहें दूरज्यादातर महिलाओं को चिप्स खाना बहुत पसंद होता हैं। लेकिन बता दें चिप्से बनाने के लिए नेचुरल आलू की जगह आलू के आटे या आलू के फेल्स्न को यूज किया जाता हैं। जोकि हमारी सेहत पर बुरा असर भी डालता है।
प्रेग्नेंसी टेस्ट करने का यह समय होता है सबसे अच्छा, जानिए

अगर आप भी शारारिक संबंध बनाने के बाद गर्भवती होने का प्रयास कर रही हैं या प्रेगनेंट होने से बचना चाहती हैं तो आपने प्रेगनेंसी टेस्ट के बारे में जरुर सोचा होगा। ख़ास तौर से जब आप गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों का अनुभव कर रही होती हैं जैसे कि मतली आना, सिरदर्द, और थकान होना। ऐसे में आपको प्रेगनेंसी टेस्ट जल्दी करने का भी मन करता होगा। प्रेगनेंसी टेस्ट कब करना चाहिए इस प्रश्न के वास्तव में दो जवाब हैं: टेस्ट तब करना चाहिए जब आपको प्रेगनेंसी का संदेह है, और तब तो खासतौर से करना चाहिए जब आपमें गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण दिखायी देने लगें हों।

किसी भी समय गर्भावस्था परीक्षण करने से आपको कोई भी नहीं रोक रहा है। लेकिन अगर आप ओव्यूलेशन (डीपीओ) के 8 दिन पहले प्रेगनेंसी टेस्ट करतीं हैं, तो आप शायद अपना पैसा ही बर्बाद कर रहीं हैं और अनावश्यक रूप से निराश होने के लिए तैयारी कर रहीं हैं।

सर्वोत्तम परिणामों के लिए, अगर आपको लगता है की आपने अपने पीरियड्स को मिस किया है तो आपको टेस्ट कर लेना चाहिए। सुबह उठने के बाद पहली बार बाथरूम जाने पर ही परीक्षण करें या फिर कुछ घंटो के लिए पेशाब रोक कर रखें ताकि एचसीजी हार्मोन जो की टेस्ट से मापा जायेगा उसकी मात्रा यूरीन में बढ़ जाये। पहले से बहुत अधिक तरल पदार्थ पीने से बचें, क्योंकि यह आपके मूत्र में एचसीजी के स्तर को पतला कर सकता है।
प्रेगनेंसी टेस्ट जल्दी करने से यह सुनिश्चित होता है कि आप अपनी उचित देखभाल कर पायेगी और अपने बच्चे के लिए प्रसवपूर्व देखभाल करेंगी। टेस्ट पॉजिटिव आने पर, अपने विकल्पों और संभावित अगले चरणों पर बात करने के लिए जितनी जल्दी हो सके अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

मधुमेह से हैं परेशान तो अपनाएं ये रामबाण इलाज, मात्र 20 मिनट में कण्ट्रोल हो जायेगा शुगर




वर्तमान समय में ख़राब खान पान के कारण हर दूसरा व्यक्ति डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी का शिकार हैं। वर्तमान समय में ये बीमारी बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। हालांकि इस बीमारी के होने के बाद कई सारी बीमारियों के होने की आशंका थोड़ी बढ़ जाती है।

जिसके लिए हमें इन सब बिमारियों से निजात पाने के लिए दवाइयों के साथ साथ एक अच्छा खासा परहेज भी करना पड़ जाता है। लेकिन हम बिना डॉक्टर के चक्कर लगाए हुए भी इन बीमारी से जीत सकते हैं।

तो चलिए आज हम इसी कड़ी में बात करते हुए आपको बताएंगे ऐसे चमत्कारी नुख्से के बारें में जिसका किसी भी प्रकार से कोई नुक्सान नहीं है। इसका प्रयोग करने के बाद से ही ये पूरा कंट्रोल में आ जाएगा। चलिए जानते हैं।
करेले का सेवन दिलाएगा शुगर की बीमारी से निजातसबसे पहले इसके लिए आपको एक किलो करेला लेना हैं। इसके बाद आप इसके टुकड़े को मोटा दरदरा पीस लें। इसके बाद सभी करेलों को एक छोटे टब में डाल लें। इसके बाद अपने पैरों को उस टब में डुबोएं। कुछ समय तक के लिए पैरों को हिलाते रहे। जैसे ही 10 से 15 मिनट बाद आपको आपकी जीभ में कड़वा स्वाद आने लग जाए।

तो तुरंत अपने पैरों को निकल लें। इस प्रक्रिया को आप नियनित तौर पर अपनाये और देखें कि कैसे ये आपकी शुगर को कंट्रोल करता हैं। वैसे हमें तो इस बात का पूरा यकीं हैं कि ऐसा करने से आपका बिगड़ा हुआ शुगर जरूर कंट्रोल में आ जायेगा। यह 100 काम में आने वाला नुस्खा है।
जानिए डायबिटीज के लक्षणपेशाब का बार -बार आना
आंखों की रोशनी का धीरे -धीरे कम होना
बार -बार प्यास लगना
हमेशा कमजोरी लगना
किसी चोट का देर में भरना
हाथ पैरों में खुजली वाले जख्म होना
स्कि‍न पर बार बार इन्फेक्शन होना
ज्यादा -ज्यादा भूख लगना
ज्यादा खाना खाने के बाद भी वजन का कम होना।
किडनी खराब होना


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