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कामसूत्र खड़े होकर संभोग से मिलेगी नई अनुभूति



कामसूत्र खड़े होकर संभोग से मिलेगी नई अनुभूति

यह सेक्‍स का आनंददायक आसन है। इसमें कम जगह होने पर भी बेहतर सेक्‍स किया जा सकता है। सेक्‍स की तीव्र इच्‍छा मन में जग रही हो, बिस्‍तर उपलब्‍ध न हो और प्रतीक्षा करने का जरा भी मन नहीं कर रहा हो तो यह एक आनंद से भरा आसन है। इसमें कल्‍पना के स्‍तर तक आनंद की प्राप्ति होती है, क्‍योंकि पुरुष लिंग स्‍त्री योनि में प्रवेश कर ऊपर की ओर चला जाता है, जहां एक नए तरह के घर्षण का अहसास होता हैा धक्‍का लगाने के दौरान भग से भी लिंग का घर्षण होता रहता है जो मिश्रित अनुभव कराता रहता है। पति पत्‍नी को इस आसन को जरूर ट्राई करना चाहिए ताकि सेक्‍स जीवन में नीरसता या ऊब न आए।
अधिक आनंद के लिए करते रहें बदलाव
* इस आसन में थोड़ा बदलाव आते हुए पुरुष दीवार के सहारे खड़े हो जाए और अपनी महिला साथी को गोद में उठा ले। महिला अपने दोनों पैर से पुरुष के नितंब को कैंची की तरह जकड़ ले और धक्‍का लगाए। इसमें धक्‍का स्‍त्री को ही लगाना पड़ता है।

* थोड़ा रुक-रुक कर वह दीवार से पैर को सपोर्ट दे सकती है, जिससे धक्‍के लगाने में आसानी होगी। हालांकि इस आसन में पुरुष का बलिष्‍ट होना जरूरी है ताकि स्‍त्री के भार और उसके धक्‍के को एक साथ झेल सके। 

* वैसे पुरुष के ऊपर से भार कम करने के लिए पीछे टेबल लगाया जा सकता है, जिसपर अपना हाथ रखकर महिला अपने वजन को पुरुष के ऊपर से कम कर सकती है। 

* खड़े होकर सेक्‍स करने के दौरान अधिक आनंद के लिए थोड़ा और बदलाव कर सकते हैं। इस आसन में खड़ी स्‍त्री अपनी टांगे फैला देती है। इसके बाद पुरुष चाहे तो उसके सामने से या फिर उसके पीछे से अपने लिंग को उसकी योनि में प्रवेश करा सकता है। सामने से प्रवेश करने पर फैली हुई योनि में लिंग का प्रवेश आसानी से हो जाता है, हां पुरुष को थोड़ा झुकना पड़ सकता है।
* पीछे से प्रवेश के लिये महिला को अपना नितंब बाहर की ओर निकालना होगा ताकि पुरुष को भग प्रदेश न केवल दिखे, बल्कि फैल भी जाए। महिला अपने घुटनों को मोड़ते हुए थोड़ा नीचे झुकेगी तो नितंब भी बाहर आ जाएगा और भग प्रदेश भी खुल जाएगा। इसके बाद पुरुष लिंग को पीछे से प्रवेश कराए।

* इस आसन में रतिक्रीड़ा के दौरान पुरुष महिला का हाथ अपनी ओर करके पकड़ सकता है, जिससे धक्‍का लगाने के लिए उसे सपोर्ट मिलता है। वह चाहे तो केवल कमर पकड़ कर भी धक्‍के को तीव्र कर सकता है। धक्‍का लगने के पुरुष अपने हाथ से स्‍त्री का स्‍तन भी सहला सकता है।

* आसन में बदलाव कर स्‍त्री इस तरह उकड़ू बैठे जैसे मेंढ़क बैठता है। इसके उसकी योनि और अधिक खुल जाएगी। इसके बाद पुरुष उसके पीछे घुटनों के बल खड़ा होकर योनि में लिंग को प्रवेश कराए । इसमें लिंग का योनि में गहरा प्रवेश होता है

कामसूत्र यौन‍ क्रिया को तीव्र बनाता है ऊपरी होठों का चुंबन#कामसूत्र_प्राचीन_भारतीय_काम_कला 
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यौन क्रीड़ा में अधर (नीचे के होंठ) का चुंबन यौन उत्‍तेजना जगाने में सहायक है तो ऊपरी होठों का चुंबन उत्‍तेजना को बढ़ाने और यौन क्रिया को तीव्रता प्रदान करने में सहयोगी साबित होता है। वैसे जानकारी के अभाव में कम स्‍त्री पुरुष ही एक दूसरे के ऊपरी होठ का रसास्‍वादन कर पाते हैं। वास्‍तव में ऊपरी होठों का चुंबन स्‍त्री पुरुष को इस कदर उत्‍तेजित कर देता है कि आचार्य वात्‍स्‍यायन ने यौन क्रीड़ा में इसे मीठा युद्ध करार दिया है। संभोग काल में छेड़छाड़, प्‍यार और आनंद में डुबने उतरने का खेल है ऊपरी होठों का चुंबन।

आइए बताएं आचार्य ने ऊपरी होठों को चूमने का क्‍या-क्‍या तरीका बताया है- 
* स्‍त्री जब पुरुष के नीचे वाले होंठ को चूम रही हो तो पुरुष अपने दोनों होंठों से उसके ऊपर वाले होंठ को पकड़ कर चूसना शुरू कर दे। इसे उत्‍तर चुंबितक कहा जाता है।

* स्‍त्री पुरुष द्वारा एक दूसरे के दोनों होंठों को अपने दोनों होंठों से दबाकर हल्‍के-हल्‍के दांतों से प्रहार करना। इसे संपुटक चुंबन कहा गया है। यह चुंबन ज्‍यादातर पुरुष लेता है, लेकिन स्त्रियां भी बिना मूंछों वाले पुरुष का संपुटक चुंबन आसानी से ले सकती हैं। 

* संपुटक चुंबन के क्रम में वह साथी जिसे चूमा जा रहा है, वह अपनी जिह्वा से चूमने वाले के दांतों, तालु व जीभ के अगले भाग को रगड़े। इसे जिह्वा युद्ध कहा जाता है।

* जब कोई साथी हठपूर्वक अपना मुंह चूमने के लिए दूसरे साथी के मुख में डाल देता है तो इसे वदन युद्ध कहते हैं और जब अपनी दांत से दूसरे के दांत को रगड़ते हैं तो इसे रदन युद्ध कहा जाता है।
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