Header Ads

मौत से कहना कि हमसे नाराजगी खत्म कर ले


मौत से कहना कि हमसे नाराजगी खत्म कर ले, वो लोग बदल गये जिनके लिये हम जिया करते थे।




पन्नों के परे भी है एक ज़िन्दगी,
सब किरदार, किताबों में नहीं होते।


काश की वो लौट आए मुझसे ये कहने,
कि तुम कौन होते हो मुझसे बात ना करने वाले।


ये तो परिन्दों की मासूमियत है साहेब,
वर्ना दूसरों के घरों में अब आता जाता कौन है।


चलता हूं यारो कुछ काम करता हु,
खुद को हँसा के अपने गम को गुमनाम करता हु।


अगर मालूम होता की इतना तडपता है..
इश्क.. तो दिल जोड़ने से पहले हाथ जोड़ लेते।


मुझको ढूंढ लेती है रोज़ एक नए बहाने से,
तेरी याद वाक़िफ़ हो गयी है मेरे हर ठिकाने से।


वो रोया तो ज़रूर होगा, खाली कागज़ देखकर,
ज़िन्दगी कैसी बीत रही है.. पूछा था सवाल उसने।


इस हकीकत से खूबसूरत कोई ख्वाब नही,
इश्क मर्जी है खुदा की कोई इत्तफाक नही।


इंतज़ार हमारा करे कोई मंजिल हमारी बने कोई,
दिल की यह आरजू है छोटी, दिल में आके रहे कोई।


आखिर किस कदर खत्म कर सकते है.. उनसे रिश्ता,
जिनको सिर्फ महसूस करने से.. हम दुनिया भूल जाते है।


फिर कोई ज़ख़्म मिलेगा, तैयार रह ऐ दिल,
कुछ लोग फिर पेश आ रहे हैं, बहुत प्यार से।


इतनी करुंगा मुहब्बत के तू खुद कहेगी,
देखो वो.. मेरा आशिक़ जा रहा है।

जिद, जुनून, जिंदगी, जिंदादिली तुम्हीं से है,
तुम नहीं तो शब्द शब्द मायने बदल गए।


कभी कभी पहली नजर कुछ ऐसे रिश्ते बना लेती है,
जो आखिरी सासँ तक छुड़ाने से नहीं छूटती।


मौत से कहना कि हमसे नाराजगी खत्म कर ले,
वो लोग बदल गये जिनके लिये हम जिया करते थे।

कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी,
कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।


किसी और तरीके से भी मिल जाती है क्या मोहब्बत,
मुझे तो.. दुआओं के आगे कुछ भो नही आता।


टूटे हुए सपनो और रूठे हुए अपनों ने उदास कर दिया,
वरना लोग.. हमसे मुस्कराने का राज पुछा करते थे।


दुआ कौनसी थी हमें याद नही, बस इतना याद है की,
दो हथेलिया जुडी थी एक तेरी थी एक मेरी थी।


छोड दी हमने हमेशा के लिए उसकी, आरजू करना,
जिसे मोहब्बत, की कद्र ना हो उसे दुआओ, मे क्या मांगना।


मंज़िले हमारे करीब से गुज़रती गयी जनाब,
और हम औरो को रास्ता दिखाने में ही रह गये।


सारे सितारे फ़लक से ज़मीं पर जब उतर कें आयेंगे,
फिर हम तेरी यादों के साथ रात भर दिवाली मनायेंगे।


रब्ब जाने क्या कशिश है इस मोहब्बत में..
इक अंजान, हमारा हकदार बन बैठा।


कैसी मुहब्बत हैं तेरी महफ़िल मे मिले तो,
अन्जान कह दिया, तनहा ज़ो मिले तो जान कह दिया।


लफ़्ज़ों में बातें बयां कर पाते तो कब का,
कर देते.. मगर बयां करना नही आता हमे।


दिल साफ़ करके मुलाक़ात की आदत डालो,
धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं।


मैने इक माला की तरह तुमको अपने आप मे पिरोया हैं,
याद रखना टूटे अगर हम तो बिखर तुम भी जाओगे।


कोई मरहम नहीं चाहिये, जख्म मिटाने के लिये,
तेरी एक झलक ही काफी है मेरे ठीक हो जाने के लिये।


अपने दिल से कह दो किसी और से मोहब्बत की ना सोचे,
एक मैं ही काफी हूँ सारी उम्र तुम्हे चाहने के लिए।


जलवे तो बेपनाह थे इस कायनात में,
ये बात और है कि नजर तुम पर ही ठहर गई।


हम अल्फाजो को ढूढते रह गए,
और वो आँखों से गज़ल कह गए।


हमें मोहब्बत है तुमसे खुशबू की तरह,
और खुशबू का कोई पैमाना नहीं होता।


तुम्हे हाथो से नहीं दिल से छुना चाहते हैं,
ताकि तुम ख्वाबों में नहीं मेरी रूह में आ सको।


रौशनी में कुछ कमी रह गई हो तो..
बता देना दिल आज भी हाजिर है जलने को।


ना दिल की चली ना आँखों की,
हम तो दीवाने बस तेरी मुस्कान के हो गए।


बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा लूँ तुम्हें,
आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और पा लूँ तुम्हें।


जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे
तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे।


ना चाहते हुए भी जब दिल मेरा छूते हो,
रूहानी मोहब्बत पर और यक़ीन आ जाता है।


किसी को प्यार करो तो इतना करो की..
बयां करने से पहले उसे भी तुमसे प्यार हो जाए।


मैं, मेरी तन्हाई, मेरा दर्द और तेरी यादें,
हर रात एक ही तकिये पर सोते हैं इकट्ठे होकर।


नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं,
जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं।


इत्तफ़ाक़ से नहीं मिले हम सब एक दूसरे से,
इस में थोड़ी बहुत साज़िश तो खुदा की भी रही होगी।


टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्र भर,
चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में।


अगर पता होता कि इतना तड़पाती है महोब्बत,



तो कसम से दिल लगाने से पहले हाथ जोड़ लेते।


किस्मत के तराज़ू में तोलो,तो फ़कीर हैं हम,
और दर्द-ए-दिल में, हम सा नवाब कोई नहीं।


दिल अधूरी सी कहानियों का अंत ढूंढता रहा,
और वो कोरा पन्ना मुझे देर तक घूरता रहा।


तुझे बर्बाद कर दूंगी, अभी भी लौट जा वापिस,
मोहब्बत नाम है मेरा, मुझे कातिल भी कहते हैं।


हाल मेरा भी दिन रात कुछ ऐसा है इन दिनों,
वो ज़िन्दगी में आते भी नहीं और ख्यालों से जाते भी नहीं।


काँच सा था तो हमेशा तोड़ देते थे मुझे,
अब तोड़ के दिखाओ कि अब पत्थर सा हूँ मैं।


नहीं जो दिल में जगह तो नजर में रहने दो,
मेरी हयात को तुम अपने असर में रहने दो।


इश्क था इश्क, भला कैसे गवारा करते,
ये कोई निकाह नही जो दोबारा करते।


लो इबादत रखा अपने रिश्ते का नाम,
यारा, मुहब्बत को तो लोगों ने बदनाम कर दिया है।


​अदब-ऐ-वफ़ा भी सीखो मोहबत की दरगाह में,
​फकत यूं ही दिल लगाने से, दिलो में घर नहीं बनते​।


तुझमें हमेशा खुदा का अक्स देखा है मैंने,
मेरा इश्क़ तो कब का मुकम्मल हो गया।


मेरी फितरत में नहीं है किसी से नाराज होना,
नाराज वो होते है जिसे खुद पर गुरुर होता है।


आँखों को इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया,
चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया।


सारी दुनिया के रूठ जाने की परवाह नहीं मुझे,
बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है।


तेरी मोहब्बत की बाजी को यारा हम मान गए,
खुद तो वादों से बंधे नही हमे ही यादों से बांध गए।


वक़्त ने कहा, काश थोड़ा और सब्र होता,
सब्र ने कहा, काश थोड़ा और वक़्त होता।


जिस्म से रूह तक जाए तो हकीकत है इश्क,
और रूह से रूह तक जाए तो इबादत है इश्क़।


शौंक नहीं है मुझे अपने जज़्बातों को यूँ सरेआम लिखने का,
मगर क्या करूँ अब जरिया ही ये है तुझसे बात करने का।


वापस लौट आया है हवाओं का रुख मोड़ने वाला,
दिल में फिर उतर रहा है दिल तोड़ने वाला।


रहने लगा है ऐसा ही मेरा हाल अक्सर,
अब आँखों से बह जाते हैं ख्याल अक्सर।


तमन्ना मचल रही है थोड़ा सा साथ दे दो,
बदले में ले लो सांसे मुझे अपना हाथ दे दो।


मौहब्बत कोई तस्वीर नहीं जनाब जो देख लोगे,
एक एहसास है जो चुपके से दिल में दस्तक देता है।


शायरी नहीं, यह लफज़ो में लिपटे मखमली..
अहसास हैं हमारे सिर्फ उनके लिए जो बेहद खास हैं हमारे।


जिंदगी की रफ्तार बहुत तेज चलती है साहब,
एक दिन कुछ ना लिखो तो लोग भुलने लगते हैं।


मै तो फना हो गया उसकी एक झलक देखकर,
ना जाने हर रोज़ आईने पर क्या गुजरती होगी।


बदलते नहीं जज़्बात मेरे रोजाना तारीखों की तरह,
बेपनाह इश्क़ करने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।


एक तेरा ही नशा है जो शिकस्त दे गया मुझे,
वर्ना मयखाने भी तौबा करते थे मेरी मयकशी से।


नाराजगी चाहे कितनी भी क्यो न हो तुमसे,
तुम्हें छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नही रखते।


नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं,
जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं।


नब्ज टटोलते ही हकीमों ने कहा,
साहब इसने तो इश्क़ पी रखा हैं।


शायरी करने वाले बढ़ते जा रहे है,
ऐ-मोहब्बत लगता है तेरा धंधा जोरो पर है।


एहसास ए करबला तुझे भी हो जाएगा इक दिन,
ए-जान.. तनहा किसी अज़ीज़ की मय्यत उठा के तो देख।


हाल मेरा भी दिन रात कुछ ऐसा है इन दिनों,
वो ज़िन्दगी में आते भी नहीं और ख्यालों से जाते भी नहीं।


ये तेरी हल्की सी नफ़रत और थोड़ा सा इश्क़,
यह तो बता ये मज़ा-ए-इश्क़ है या सज़ा-ए-इश्क़।


सोचा था खुदा के सिवा मुझे कोई बर्बाद नहीं कर सकता,
फिर उनकी मोहब्बत ने मेरे सारे वहम तोड़ दिए।


मकड़ी जैसे मत उलझो तुम गम के ताने बाने में,
तितली जैसे रंग बिखेरो हँस कर इस ज़माने में।


यूँ ही रिहा नहीं हो सकेंगे जहन से तुम्हारे हम,
बड़ी सिद्दत से तुम्हारे दिल में घर बनाया है।


सम्भालती है सदा तेरी चाहतें मुझको,
मेरी दुआ है कि, तू मुझे भूल ना पाए कभी।


हमारी अफवाह के धुंए वहीं से उठते है,
जहाँ हमारे नाम से आग लग जाती है।


इतना भी गुमान न कर आपनी जीत पर ऐ बेखबर,
शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं।


लहरों का सुकून तो सभी को पसंद है, लेकिन..
तुफानो में कश्ती निकालने का मजा ही कुछ और है।


कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी,
हज़ारो लोग है मगर फिर भी कोई उस जैसा नहीं।


मौन हो बस सुनें धड़कनों की ज़ुबाँ,
लुत्फ़ क्या है लबों से हुई बात में।


दस्तक और आवाज तो कानो के लिए है,
जिसे रूह जी जाए खामोशी उसे कहते हैं।


वक़्त की तरह तुम भी ना ठहरे मेरी ज़िन्दगी में,
तुम गुज़रते रहे और हम इंतज़ार करते रह गए।


लाकर तेरे करीब मुझे दूर कर दिया,
तकदीर भी मेरे साथ एक चाल चल गई।


कैसे कह दूँ कि बदले में कुछ नहीं मिला,
सबक भी कोई छोटी चीज तो नहीं है।


दिल की बात दिल में रह जाती है हर शाम,
रूठने और मनाने में वक़्त गुजर जाता है।


ऐब भी बहुत हैं मुझमें, और खूबियां भी,
ढूँढने वाले तूं सोच, तुझे चाहिए क्या मुझमें।


बिकने वाले और भी हैं जाओ जाकर खरीद लो,
हम कीमत से नहीं किस्मत से मिला करते हैं।


गर सच्ची हो मोहब्बत तो खत्म होना मुश्किल है,
नशा कितना भी करलो भूलना नामुकिन है।


उसकी रूह में सन्नाटा है और मेरी आवाज़ में चुप्पी
वो अपने अंदाज़ में चुप, मैं अपने अंदाज़ में चुप।


ये जो तुम मुझसे बात नहीं करते,
ये नफरत की निशानी है या प्यार हो जाने का डर।


अब मेरा हाल चाल नहीं पूछते हो तो क्या हुआ,
कल एक एक से पूछोगे की उसे हुआ क्या था।


हाथ थामे रखना, दुनियाँ में भीड़ भारी हैं,
खों ना जाऊ कही मैं, ये जिम्मेदारी तुम्हारी हैं।



अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है।

अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा
जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है।


बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में।


अरे कितना झुठ बोलते हो तुम,
खुश हो और कह रहे हो मोहब्बत भी की है।


सुनो.. तुम ही रख लो अपना बना कर,
औरों ने तो छोड़ दिया तुम्हारा समझकर।


किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम..
चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।


वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है,
जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना●
क्या बताऊँ इस दिल का आलम नसीब में लिखा है इंतज़ार करना।


अधूरी मोहब्बत मिली तो नींदें भी रूठ गयी,
गुमनाम ज़िन्दगी थी तो कितने सकून से सोया करते थे।


कागज़ों पे लिख कर ज़ाया कर दूं मै वो शख़्स नही,
वो शायर हुँ जिसे दिलों पे लिखने का हुनर आता है।


झूठ बोलने का रियाज़ करता हूँ सुबह और शाम मैं,
सच बोलने की अदा ने हमसे कई अजीज़ यार छीन लिये।


हम ना बदलेंगे वक्त की रफ़्तार के साथ, हम जब भी मिलेंगे अंदाज पुराना होगा,
नजर चाहती है दीदार करना दिल चाहता है प्यार करना।


निकली थी बिना नकाब आज वो घर से
मौसम का दिल मचला लोगोँ ने भूकम्प कह दिया


अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तहा
तो हम तुमसे नही तुम हमसे मोहब्बत करते


अमीरों के लिए बेशक तमाशा है ये जलजला,
गरीब के सर पे तो आसमान टुटा होगा.


नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . .
बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .


कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार देता हूँ
माँ कहती है घर की जिम्मेदारी है तुझ पर


नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . .
बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .


जो मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है
मे उन्हें वादा करती हूँ मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिए होगा


ये जो छोटे होते है ना दुकानों पर होटलों पर और वर्कशॉप पर
दरअसल ये बच्चे अपने घर के बड़े होते है


कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने
मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये


मोत से तो दुनिया मरती हैं
आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं


दिल टूटने पर भी जो शख्स आपसे शिकायत तक न कर सके…
उस शख्स से ज्यादा मोहब्बत आपको कोई और नही कर सकता


बिक रहे हैं ताज महल सड़क-चौराहों पर आज भी..
मोहब्बत साबित करने के लिए बादशाह होना जरुरी नहीं..!!


डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो,
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतारा गया।


Tere na hone se kuchh bhi nahi badla,.
Bus kal jaha Dil hota tha, Aaj waha dard hota hai..!!


Masla ye nahi k tera hu
Masla ye hai k sirf tera hu..!!


गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुजारें हैं कितने
भला कैसे कह दूं कि माँ अनपढ़ है मेरी..!!


धोखा देती है अक्सर मासूम चेहरे की चमक।।
क्योंकि हर पत्थर हीरा नहीं होता।।


लोग ढूँढेंगे हमें भी, हाँ मगर सदियों के बाद।


अजीब खेल है इस मोहब्बत का,
किसी को हम न मिले और न कोई हमे मिला।


वो अपनी मर्जी से बात करते हैँ और
हम कितने पागल हैँ जो उनकी मर्जी का इंतजार करते हैं..!!!


सुना है आज उनकी आँखों आँशु आ गए।
वो बच्चों को लिखना सिखा रही थी.. कि मोहब्बत ऐसे लिखते है।


अजीब रंगो में गुजरी है मेरी जिंदगी।
दिलों पर राज़ किया पर मोहब्बत को तरस गए।

ईश्क हम आज भी तुझे बेपनाह करते है ....



मोहब्बत छोड़ तो दी उसने मगर पहचान इतनी 
बाकी है… 
जब भी मिलता है निगाहें फेर लेता है... 




मैने कभी अपनी चाहत का वज़न नहीं देखा 
जब किसी ने पूछा दोनो हाथ फैला दिये इतना…




काश ज़िन्दगी ऐसा एक सवाल बन जाए 
जिसका कोई न कोई हल निकल आये… 




कह गयी मुझसे उनकी वो जुंबिशे नज़र 
ब़ाकी जो ईश्क था अब खत्म हो गया…




रिवाज़ न हो भले ही पढी किताबें पढने का 
जिंदगी के सीखे सबक रोज़ याद करने होते है 




देखना मैं एक दिन चली जाउंगी 
तुम्हारे लिए लफ्ज़ छोड़ जाउंगी 
जो गिले शिकवे है आज कर लो 
कल बहुत दूर निकल जाउंगी… 




मोहब्बत यूँ ही किसी से हुआ नहीं करती 
खुद को भूलना होता है किसी को अपना बनाने के लिए… 




मेरे दिल का वही कोना जागता रहता है 
जहां तेरी यादों का सफर साथ रहता है. 




यादों की कतरन जोड़ कर मैं आंचल बुन रही हूं 
वक्त का रेशम धागा लेकर इक इक लम्हा चुन रही हूं 




शहर है हादसों का, यहां सब सपनों में जिया करते हैं 
बस ख़ुद की खुशी की लिये सबको थोड़ा थोड़ा सा मार दिया करते हैं. 




तूने खतों में जो रोशनाई इस्तेमाल की 
वो आज तक मेरे दिल में चमकती है… 




मैने जब भी चाहा कि हाले दिल कहूं तुझसे 
तू किसी और की बातों में ही उलझा मिला.. 




दुनियादारी की रस्मों से कुछ यूं जकड़े बैठे हैं~ 
पकडाई थी उंगली जिनको वो पहुंचा पकड़े बैठे है~ 




इस क़दर अजनबीपन अपने ही घर में लगा 
जो भी अकेला मिला अपना सा लगने लगा.. 




थकन जिंदगी की और गहरी लग रही है 
जाने क्यूं सांस कुछ ठहरी लग रही है 
पिया तो है ज़हर मैने अमृत समझ कर 
तासीर भी उसकी अब उल्टी लग रही है 
बनाये थे दोस्त राह आसान करने को 
ख़फा हुये वो किस्मत असर कर रही है… 






कह गयी मुझसे उनकी वो जुंबिशे नज़र 
ब़ाकी जो ईश्क था अब खत्म हो गया… 




मेरी तन्हाइयो से न डर ए दोस्त 
हम जहाँ जाते है तुम्हें दिल में ले जाते है… 




मिलूंगी एक रोज़ ज़िन्दगी तुझसे वादा है मेरा, 
पहले ये रोज़ रोज़ की उलझने सुलझा तो दूँ… 




मुझसे जां बचाने के बहाने न तलाश कर… 
कोई और न मिलेगा हम सा… हमें छोड़ कर… 



शाम होते ही तुम अपना गम भूलने की कोशिश करोगे, 
और हम शाम के बाद तेरी यादों के जश्न से घिर जायेंगे… 




वो हंसी शाम जो उधार है तुम्हारी मुझ पर 
फक़त उसके सहारे सदियां गुज़ार आये.. 




जब भी किसी ने बारहा ज़िक्र तेरा किया 
खो गयी आंखे दिखायी दूर तक न दिया…




वो जो मिल गया था अचानक किस्मत से 
बिना मिले ही बिछड़ गया मुझसे… 




ईश्क हम आज भी तुझे बेपनाह करते है 
तेरा इंतजार बस अब नहीं करते है… 


प्यार कर के कोई जताए ये ज़रूरी तो नहीं, याद कर के कोई बताये ये ज़रूरी तो नहीं, रोने वाले तो...

प्यार कर के कोई जताए ये ज़रूरी तो नहीं, याद कर के कोई बताये ये ज़रूरी तो नहीं, रोने वाले तो...


अपनी आखों के समुंदर मैं उतार जाने दे,
तेरा मुजरिम हूँ, मुझे डूब के मार जाने दे,
ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको,
सोचता हूँ कहूँ तुझसे..मगर जाने दे.


निकला करो इधर से भी होकर कभी कभी;
आया करो हमारे भी घर पर कभी कभी;
माना कि रूठ जाना यूँ आदत है आप की;
लगते मगर हैं अच्छे आपके ये तेवर कभी कभी।

हर मुलाकात पर वक्त का तकाज़ा हुआ..
हर याद पे दिल का दर्द ताजा हुआ..
सुनी थी सिर्फ हमने गज़लों मे जुदाई की बातें..
अब खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ..!!


काश कोई हम पर भी इतना प्यार जताती,
पीछे से आकर वो हमारी आँखो को छुपाती,
हम पुछ्ते की कौन हो तुम..??
और वो हस कर खुदको हमारी जान बताती.


अंदाज-ऐ-प्यार तुम्हारी एक अदा है..
दूर हो हमसे तुम्हारी खता है..
दिल में बसी है एक प्यारी सी तस्वीर तुम्हारी..
जिस के नीचे ‘आई मिस यू’ लिखा है..


प्यार कर के कोई जताए ये ज़रूरी तो नहीं,
याद कर के कोई बताये ये ज़रूरी तो नहीं,
रोने वाले तो दिल में ही रो लेते हैं,

किसी की आँख में आसूं आये ये ज़रूरी तो नहीं..


मुझे तेरा साथ जिंदगीभर नहीं चाहिये...



ज़र्रा ज़र्रा बिखर गया तेरी याद में,
कतरा कतरा ही सही दर्द में मोहलत दे दे।


किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल,
कोई रहता भी नहीं और कमबख्त बिकता भी नहीं।


तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलकों पर,
जब भीग कर कहती है की अब रोया नहीं जाता।

उठा लो दुपट्टे को ज़मीन से कहीं दाग़ न लग जाए,
पर्दे में रखो चेहरे को कहीं आग न लग जाए।


तारे और इंसान में कोई फर्क नहीं होता,
दोनो ही किसी की ख़ुशी के लिऐ खुद को तोड़ लेते हैं।


कुछ यूँ उतर गए हो मेरी रग-रग में तुम,
कि खुद से पहले एहसास तुम्हारा होता है।


प्यार आज भी तुझ से उतना ही है बस,
तुझे एहसास नही और हमने जताना भी छोड़ दिया।


इतना दिल से ना लगाया करो मेरी बातो को,
कोई बात दिल में रह गई तो हमे भुला नहीं पाओगे।


मुझे तेरा साथ जिंदगीभर नहीं चाहिये,
बल्कि जब तक तु साथ है तब तक जिंदगी चाहिये।


आइना और दिल वैसे तो दोनो ही बडे नाज़ुक होते है लेकिन,
आइने मे तो सभी दिखते है और दिल मे सिर्फ अपने दिखते है।



हलकी फुलकी सी होती है जिन्दगी, बोझ तो ख्वाहिशों का होता है।


कौन कहता है कि हम झूठ नही बोलते,
एक बार खैरियत तो पूछ के देखिये।


महफील भले ही प्यार करने वालो की हो,
उसमे रौनक तो दिल टुटा हुआ शायर ही लाता है।


सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें,
आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत।

कहो तो फ़लक़ से तुम्हारे लिए चाँद तारे तोड़ लाऊँ,
इतना काफी हैं, यारा कि कुछ और झुठ बोल जाऊँ।


यारो कुछ तो जिक्र करो, उनकी क़यामत बाहो का,
वो जो सिमटते होंगे उनमे, वो तो मर जाते होंगे।


मेरी ज़िन्दगी में तुम्हारी दखलंदाजी की आदत गई नहीं,
साँसों में भी रुकावट डालते हो हिचकियाँ बनकर।


खुदा ही जाने क्यूँ हाथो पे तुम मेहँदी लगाती हो,
बड़ी ही नासमझ हो, फूलों पर पत्तों के रंग चढ़ाती हो।


एहसान किसी का वो रखते नहीं मेरा भी चुका दिया,
जितना खाया था नमक मेरा, मेरे जख्मों पर लगा दिया।


फासला रख के क्या हासिल कर लिया तुमने,
रहते तो आज भी हो तुम मेरे दिल में ही।


मुझे लिख कर कही महफूज़ कर लो दोस्तो,
आपकी यादाश्त से निकलता जा रहा हूँ में।


तेरे हुस्न पर तारीफों भरी किताब लिख देता,
काश तेरी वफा तेरे हुस्न के बराबर होती।


कमी तो होनी ही है पानी की, शहर में,
न किसी की आँख में बचा है, न किसी के जज़्बात में।


सरक गया जब उसके रुख़ से पर्दा अचानक,
फ़रिश्ते भी कहने लगे काश हम भी इंसा होते।


इस उम्मीद पे रोज़ चिराग़ जलाते हैं,
आने वाले बरसों बाद भी आते हैं..!!


ये तो अच्छा हुआ कुदरत ने रंगीन नहीं रखे आँसूं,
वरना जिसके दामन में गिरते वो भी बदनाम हो जाता।


इतना आसान नही जीवन का किरदार निभा पाना,
इंसान को बिखरना पड़ता है रिश्तो को समेटने के लिए।


तुम्हारे वजूद से बना हूँ मैं..
पहले जिन्दा था अब जी रहा हूँ मैं।


तलब ये है कि मैं सर रखूँ तेरे सीने पे,
और तमन्ना ये कि मेरा नाम पुकारती हों धड़कनें तेरी।


तुझे महसूस करने का हर अहसास अजीब है,
तू पास है तो पास है, जब दूर है तो भी पास है।


लो खुद ही सुन लो.. तुम मेरी धड़कनो की आवाज़,
मै कहूंगा कि ये दिल इस कदर धड़कता है तो तुम झूठ मानोगी।


बहुत सा पानी छुपाया है मैंने अपनी पलकों में​,
​जिंदगी लम्बी बहुत है,क्या पता कब प्यास लग जाए​।


जो तार से निकली है वो धुन सबने सुनी है,
जो साज़ पर बीती है वो दर्द किस दिल को पता है।


कौन तोलेगा हीरों में अब तुम्हारे आंसू फ़राज़,
वो जो एक दर्द का ताजिर था दुकां छोड़ गया।

रूबरू आपसे मिलने का मौका रोज नहीं मिलता,
इसलिए शब्दों से आप सब को छू लेता हूँ।


जिनकी संगत मैं ख़ामोश संवाद होते है,
अक्सर वो रिश्ते बहुत ही ख़ास होते हैं।


तासीर किसी भी दर्द की मीठी नहीं होती ग़ालिब,
वजह यही है की आँसू भी नमकीन होते है।


मेरे टूटने का ज़िम्मेदार मेरा जौहरी ही है,
उसी की ये ज़िद थी की अभी और तराशा जाए।


रात के कितने पहर हैं.. क्या जाने,
तेरे इंतज़ार में मैने तारे हज़ार बार गिने।


ये सुर्ख लब, ये रुखसार, और ये मदहोश नज़रें..
इतने कम फासलों पर तो मयखाने भी नहीं होते।

अपने रब के फैसले पर,भला शक केसे करूँ,
सजा दे रहा है गर वो, कुछ तो गुनाह रहा होगा मेरा।


में तो आशिक़ हु सिर्फ एक बार मरूँगा,
लेकिन मेरे ‎प्यार‬ की सच्चाई जानकर वो बार बार मरेंगी।


इंतेजार भी कितनी अजीब चीज हे ना खुद करे तो,
गुस्सा आता है, और.. दूसरा कोई करे तो अच्छा लगता है।


सुनो! या तो मिल जाओ, या बिछड जाओ,
यू साँसो मे रह कर बेबस ना करो।


कुछ रिश्ते दरवाज़े खोल जाते है,
या तो दिल के, या तो आँखों के।


उनसे कह दो कोई जाकर के की हमारी सजा कुछ कम कर दे,
हम पेशे से मुजरिम नही है बस गलती से इश्क हुआ था।


मसला तो सिर्फ एहसासों का है, जनाब,
रिश्ते तो बिना मिले भी सदियां गुजार देते हैं।


आदत नहीं है मुझे सब पे फ़िदा होने की पर तुझ में,
कुछ बात ही ऐसी है की दिल को समझने का मौका ही नहीं मिला।


हलकी फुलकी सी होती है जिन्दगी,
बोझ तो ख्वाहिशों का होता है।


हमारे महफिल में, लोग बिन बुलाये आते है,
क्यूकी यहाँ स्वागत में, फूल नहीं, दिल बिछाये जाते है।


तेरा अहसास.. साथ साथ बहुत नज़ाकत से मेरे साथ रहती है,
ख़्वाबों में भी.. साथ साये की तरह ही साथ साथ चलती है।


ठीक लिखा था मेरे हाथों की लकीरों में,
तू अगर प्यार करेगा तो बिखर जायेगा।


सुना है उन्होंने इरादा किया है खामोश रहने का,
हम भी देखें हमारी मोहब्बत में असर कितना है।


जिस दिन बंद होठों से मोहब्बत पढोगे,
मुझसे शिकायत करना बंद कर दोगे।


बात मोहब्बत की थी, तभी तो लूटा दी जिंदगी तुझ पे,
जिस्म से प्यार होता तो, तुझ से भी हसीन चेहरे बिकते है, बाजार में।


तुम्हारी प्यार भरी निगाहों को हमें कुछ ऐसा गुमान होता है,
देखो ना मुझे इस कदर मदहोश नज़रों से कि दिल बेईमान होता है।


मेरी मोहब्बत का अंदाजा मत लगाना मेरी जान,
हिसाब मैं लूंगा नहीं, और चुकता तुम कर नहीं पाओगी।


जैसे जैसे तू हसीन दिखने लगी है,
मेरी कलम और भी अच्छी शायरी लिखने लगी है।


तुम कभी गलतफहमी में रहते हो.. कभी उलझन में रहते हो,
इतनी जगह दी है तुमको दिल में.. तुम वहाँ क्यों नहीं रहते हो।


यूँ तो एक आवाज़ दूँ.. और बुला लूँ तुम्हें,
मगर कोशिश ये है कि.. खामोशी को भी आज़मा लूँ ज़रा।


खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है,
तेरे ग़म को ज़माने से मैं छुपाऊं कैसे।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.