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नकारात्‍मक विचारों से मुक्ति पाने के उपाय

नकारात्‍मक विचारों से मुक्ति पाने के उपाय 



हमारे जीवन में सोच का बहुत महत्व होता है. जब हमारी सोच सही होती है या जब हम सकारात्मक सोचते है तब हमारे सारे काम भी सही तरीके से पूरे हो जाते है. जिस व्यक्ति की सोच नकारात्मक होती है वह हर चीज में नकारात्मक चीजे ढूंढने लगता है जिससे उस व्यक्ति के हर काम सही नहीं हो पाते.

वही सकारात्मक सोच रखने से हम सिर्फ अच्छाई खोजते है और जब हमारी सोच सकारात्मक बन जाती है तो उसके परिणाम भी सकारात्मक आने लगते है.

अगर आपको अपने जीवन में कुछ भी कामयाबी पानि है तो आपको आज से ही अपनी सोच सकारात्मक बनानी होगी.

हमारी समस्या यह नहीं है कि मौलिक और अभिनव विचार कैसे आयें बल्कि यह है कि लम्बे समय से भीतर जड़ जमा चुके नकारात्मक विचार कैसे निकलें. हमारा मष्तिष्क ऐसा भवन है जिसमें पुराना फर्नीचर भरा हुआ है. इसके कुछ कोनों को साफ़-सुथरा कर दीजिये और रचनात्मकता इसमें तुरत अपना स्थान ढूंढ लेगी.

हम जानते हैं कि सकारात्‍मक विचार जीवन में आगे बढ़ने के लिए जरूरी हैं। फिर भी गाहे बगाहे हम नकारात्‍मक हो ही जाते हैं। जानते हैं कुछ ऐसे ही नकारात्‍मक विचार और उनसे पार पाने के उपाय।

सोचिये नहीं, फोकस कीजिये 

अपने उद्देश्यों, सपनों, और इच्छाओं पर फोकस कीजिये. आपके चाहने और होने के बीच हमेशा कुछ फासला रहेगा ही पर इससे अपने हौसले को पस्त नहीं करें. अपना ध्यान बीच की रुकावटों पर नहीं वरन मंजिल पर केन्द्रित करें और आप पायेंगे कि पॉज़िटिव रवैया रखने से सोचने और होने के बीच की दूरियां बड़ी नहीं लगतीं.
हम सबको खुशी की तलाश

हम सबको खुशी की तलाश होती है। हम सब तनाव और चिंता से दूर रहकर खुशहाल जिंदगी जीना चाहते हैं। लेकिन, बावजूद इसके कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो हमें नकारात्‍मक विचारों की ओर धकेल देती हैं। हम सब इन बातों के बारे में विचार करते हैं, लेकिन इनसे पार पाने का तरीका आप अकसर अनदेखा कर देते हैं।
नाकाबिल समझना

मैं इतना तेज नहीं, मैं इतना हुनरमंद नहीं या मैं इस काम में पिछड़ा हआ हूं। हम हर काम में खुद को नाकाबिल समझते रहते हैं। हम सब यह सोचते हैं कि हम किसी काम को लेकर कमतर हैं। हमारे भीतर कुछ कमी है। यह विचार हमें आगे नहीं बढ़ने देते। हम वहीं अटक कर रह जाते हैं। हम अपनी क्षमताओं का पूरा आकलन नहीं कर पाते।
कैसे करें सामना

अगर आप लगातार अपनी कमियों की ओर ध्‍यान लगाये बैठे रहते हैं, तो आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते। आप इनसान हैं और कोई भी इनसान सम्‍पूर्ण नहीं है। तो, आपकी कोशिश अपना सर्वश्रेष्‍ठ देने की होनी चाहिये। यही आपकी कोशिश और लक्ष्‍य होना चाहिये।
जो कुछ हमारे वश में न हो उसके लिए व्यथित न हों

इसे साध पाना सरल नहीं है. यहाँ कही गयी सारी बातों में यह सबसे कठिन है लेकिन शांतिपूर्ण जीवन के लिए इस नीति का पालन करना बहुत ज़रूरी है. यदि आप ऐसी चीज़ों से घिरें हो जो आपके वश में नहीं हैं तो उनके बारे में सोचविचार करके चिंतित होने में कोई सार नहीं है. उस समय तक प्रतीक्षा करें जब तक चीज़ें बदल नहीं जातीं. ध्यान दें कि सब कुछ लुट जाने के बाद भी भविष्य बचा रहता है.

वो मुझसे बेहतर है
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उसका स्‍टाइल देखो। उसका अंदाज देखो। वह कितनी जल्‍दी काम निपटा लेता है। यार वो बॉस को कैसे पटाकर रखता है। कुल मिलाकर हम अपनी पूरी ऊर्जा तुलना में लगा देते हैं। हम हमेशा अपनी तुलना दूसरों से करते रहते हैं। इससे कोई फायदा तो होता नहीं, बल्कि उल्‍टा हम नकारात्‍मकता में घिर जाते हैं। क्‍या इसका कोई फायदा होता है। नहीं ना, तो अपना काम करें और बेकार में दूसरों से तुलना न करें।
तुलना करने से बचें

जब आप दूसरों से अपनी तुलना करते हैं, तो आप दूसरे की खूबियों और अपनी खामियों को मिलाते हैं, जो बिलकुल सही नहीं है। इससे आपको नुकसान ही होगा। शोध बताते हैं कि जब आप दूसरों से अपनी तुलना करने बैठ जाते हैं, तब वास्‍तव में अपने लक्ष्‍य से भटक जाते हैं। दुनिया की आबादी सात अरब है और यह सच है कि यहां हर किसी से बेहतर इनसान मौजूद हैं। और आप भी कइयों से बेहतर हैं। तो अपनी खूबियों को पहचानें और उन्‍हें निखारें। अपनी खामियों को दूर करने का प्रयास करें, लेकिन उन्‍हें अपनी सोच पर हावी न होने दें।
कुछ भी तो सही नहीं होता

हम सबके जीवन में ऐसे दिन आते हैं, जब कुछ भी सही नहीं होता। कॉफी का कप हाथ से छूट जाता है, हमें ठोकर लग जाती है और कई बार हम बेकार के झगड़ों में उलझ जाते हैं। कभी हम सब ऐसे दौर से गुजरते हैं जब चीजें हमारी सोच के अनुसार नहीं होतीं। सब पासे उलटे पड़ते नजर आते हैं।
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अगर आप आपदाओ के बारे में सोचोगे तो वह आ जाएँगी. अगर आप मृत्यु के बारे में गंभीरता से सोचते हो तो आप अपने मौत की ओर बढ़ने लगते हो. जब आप सकारात्मक और स्वेच्छा से सोचोगे, तब विश्वास और निष्ठा के साथ आपका जीवन सुरक्षित हो जायेगा.
अकेलेपन से घबराइये नहीं
एकांत के भी अनेक फायदे हैं. क्या आप कभी अकेले ही फिल्म देखने गए हैं? रेस्तरां में अकेले खाना खाया है? अकेले ही लम्बी चहलकदमी की है? कभी करके देखिये. जब आप निपट अकेले होते हैं तो आपकी विचार प्रक्रिया बदल जाती है. आप अधिक गहराई से सोचने लगते हैं क्योंकि आपके चारों ओर अक्सर ही मौजूद रहनेवाला कोलाहल कम हो जाता है और शांति से कुछ भी करने के लिए समय मिल जाता है. जब आप चीजों को देखने का सकारात्‍मक रवैया अपनाते हैं, जो मुश्किलें अपने आप हल होती जाती हैं।

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