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बच्चे से आए खुशियां डिप्रेशन नहीं


बच्चे से आए खुशियां डिप्रेशन नहीं

मां बनना किसी भी महिला के लिए बेहद खास होता है | पर गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद एक महिला के शरीर में तरह-तरह के हार्मोन का स्राव होता है | जो अधिकांश महिलाओं के लिए डिप्रेशन की वजह बनते हैं | मेडिकल की दुनिया में इस स्थिति को पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है |
हाल ही में मां बनी रुचि पिछले 2 महीने से जिंदगी में कोई भी खुशी महसूस ही नहीं कर रही है | हर चीज में कोई दिक्कत, कोई टेंशन लगी ही रहती है | न ही अपने बच्चे को देखते ही उसे वह प्यार और दुलार आता है, जो अमूमन हर मां को अपने नन्हे से बच्चे को देखकर आता है | पति के सुझाव पर कुछ दिन पहले उसने मनोचिकित्सक को दिखाया तो परेशानी पता चली | दरअसल वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन की शिकार है |
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लखनऊ साइकेट्री सेंटर की डॉ. स्मिता श्रीवास्तव कहती हैं कि बच्चे के जन्म के बाद पोस्ट सिर्फ पोस्टपार्टम डिप्रेशन ही नहीं होता है, इसके साथ पोस्टपार्टम फ्लू और साइकोसिस भी असर डालते हैं | पोस्टपार्टम फ्लू थोड़े समय ही रहता है, जबकि सबसे कम मामले साइकोसिस के होते हैं | ऐसी महिलाओं को पोस्टपार्टम डिप्रेशन का खतरा ज्यादा होता है, जिनके परिवार में अनुवांशिक रुप से यह समस्या होती है | यानि आपकी मां को यह परेशानी रही है, तो आपको भी हो सकती है | ऐसी महिलाएं न सिर्फ तनाव की शिकार आसानी से हो जाती हैं, बल्कि इससे उबरना भी उनके लिए ज्यादा मुश्किल भरा होता है | वह इस मानसिक स्थिति में बच्चे का पालन ठीक से नहीं कर पाती है | ऐसे वक्त में महिला को डॉक्टरी सलाह के साथ परिवार के सहयोग की जरूरत होती है |
पोस्टपार्टम का असर :


इस डिप्रेशन का असर यह होता है कि महिलाएं छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ी हो जाती हैं | बिना बात रोने लगती हैं, या फिर दुखी रहती हैं | इतना ही नहीं, वो अपना आत्मविश्वास खो देती हैं | उन्हें लगता है कि अब बच्चा पालना ही उनकी अकेली जिम्मेदारी है, और अब वो जिंदगी में और कुछ कर ही नहीं पाएंगी | कई बार महिलाओं को खाने में रुचि एकदम खत्म हो जाती है या फिर वह जरुरत से ज्यादा खाने लगती हैं |
प्राकृतिक है कारण :
डिलीवरी के बाद पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कई प्राकृतिक कारण हो सकते हैं, जैसे हार्मोनल बदलाव, हद से ज्यादा तनाव, बुरे दिखने वाले शारीरिक बदलाव जैसे स्ट्रेच मार्क्स और वजन का बढ़ना |
क्या है पोस्टपार्टम डिप्रेशन :


पोस्टपार्टम डिप्रेशन यानी डिलीवरी के कुछ हफ्ते बाद का वह समय जब महिलाएं अवसाद महसूस करती हैं | अक्सर इसी की वजह से वह बच्चे के साथ चिड़चिड़ा व्यवहार करती रहती हैं | या फिर बिना किसी कारण रोना या उदास रहना उनकी आदत बन जाती है |
कैसे उबरें पोस्टपार्टम डिप्रेशन से :
1. खुद का भी रखें ध्यान –

चिड़चिड़ाहट में बस बच्चे की देखभाल करते जाना समझदारी नहीं है, बल्कि इस दौरान खुद के बारे में भी सोचना भी जरूरी है | अगर आप खुश रहेंगी तभी बच्चे का भी ध्यान रख पाएंगी |
2. सेहतमंद खाना खाएं –

अपने खानपान को अनदेखा ना करें | हरी सब्जियां, अंडे, चिकन आदि खाएं और चीनी तेल और वसा से दूर रहें |
3. त्वचा का ध्यान रखें –

गर्भावस्था के समय आए स्ट्रेच मार्क्स अक्सर डिप्रेशन का कारण बनते हैं | स्ट्रेच मार्क्स को दूर भगाने के तरीकों पर काम करने की कोशिश करें | जरूरत महसूस हो तो त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह भी लें |
4. बच्चा सोए तो आप भी सोए –

एक साथ आए ढेर सारे तनाव से निपटने का एक तरीका भरपूर नींद लेना भी है | इसके लिए यह जरूरी है कि जब बच्चा सोए तो आप भी अपनी पूरी नींद लें, क्योंकि छोटे बच्चे अक्सर पूरी- पूरी रात सोते ही नहीं है | ऐसे में सोने का एक भी मौका न छोड़ें |
5. पति से हो कनेक्शन –


आपके साथ और सहयोग का सबसे बड़ा साधन आपके पति हैं | यह जरूरी है कि आप उनके साथ अपने विश्वास को बनाकर रखें | ताकि वो आपसे दोस्त की तरह ही व्यवहार करें | और बच्चे के जन्म के बाद आपकी जिंदगी में आए बदलावो को वो बेहतर तरीके से समझ सकें |
6. दिल की बात कह दीजिए –

मन में जो भी उधेड़बुन है, उसे किसी से जरूर कह दीजिए | सबसे अच्छा होगा कि आप अपने पति से सारी बातें शेयर कर लीजिए | उनको अपनी दिक्कतें बताइए और उनसे समस्या के समाधान पर बात कीजिए | अगर जरूरत महसूस हो तो शुरुआत के कुछ माह बच्चे के पालन- पोषण के लिए किसी से मदद लीजिए | नाते-रिश्तेदार के बढ़ते मदद के हाथ को थामने में कोई बुराई नहीं है |


सतर्क रहें और गर्भपात से बचें

जब किसी महिला को किसी पहली बार पता चलता है कि वह मां बनने वाली है तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहता | पर कई बार गर्भपात के कारण इन खुशियों पर ग्रहण लग जाता है | गर्भपात शारीरिक तौर पर ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़ देता है | वास्तव में भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर गर्भवती महिलाएं उन लक्षणों को अनदेखा कर देती हैं | जो गर्भपात की ओर इशारा कर रही होती हैं |
जानते हैं गर्भपात के 5 लक्षणों के बारे में :

मां बनना एक तकलीफदेह, लेकिन सुखद एहसास है | पर कई बार गर्भपात बच्चे के साथ सुखद भविष्य के पूरे सपने पर ग्रहण लगा देता है | पर अगर गर्भवती महिला सतर्क रहें, तो समय रहते इन लक्षणों को पहचान कर गर्भपात के खतरे से बचा जा सकता है | अधिकांश गर्भपात शुरुआती 16 सप्ताह में हो जाते हैं | कई बार ऐसा भी होता है कि गर्भपात अंदर ही हो जाता है | और मां को इसके बारे में पता भी नहीं चल पाता | ऐसे में महिलाओं के लिए उन संकेतों को पहचानना जरूरी है | जो मिसकैरिज के हो सकते हैं:-
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1. हैवी ब्लीडिंग :
कई बार महिलाओं को पूरी गर्भावस्था के दौरान ब्लड के हल्के- हल्के स्पॉट का अनुभव होता है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान जब महिला को हैवी ब्लीडिंग हो तो यह मिसकैरिज का संकेत होता है | कई बार गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में ही योनि से खून के थक्के से निकलने लगते हैं, यह भी मिसकैरिज का ही संकेत होता है | यह खून के थक्के हैवी ब्लीडिंग की कारण ही होते हैं |
2. दर्द :

गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में पेट के निचले हिस्से में दर्द होना भी गर्भपात का संकेत है | यह दर्द धीरे-धीरे फैलता है और पैल्विक हिस्से और कमर के निचले हिस्से तक फैल जाता है | यह दर्द लगातार और बहुत तेज होता है |
3. यूरीनरी समस्या :

बार-बार पेशाब के लिए जाना और पेशाब करते समय निचले हिस्से में दर्द होना, सफेद और गुलाबी रंग का बहुत ज्यादा डिस्चार्ज होना भी गर्भपात के संकेत होते हैं |
4. भ्रूण का मूवमेंट बंद होना :

महिलाओं को बच्चे की मूवमेंट के बारे में चौथे महीने से पता चलना शुरू हो जाता है | यह ऐसा समय होता है जब मां अपने बच्चे की हिलने-डुलने को महसूस करने लगती है | लेकिन यदि बच्चे का यह मूवमेंट रुक जाए | तो इसे खतरे की घंटी मानना चाहिए और तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए |
5. अन्य लक्षण :

इसके अलावा वजन में गिरावट आना, ब्रेस्ट का कड़ा होना, मितली आना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी की समस्या, यूट्रस में असामान्यता भी गर्भपात के लक्षण हैं |
क्यों होता है गर्भपात
1. गर्भपात के मुख्य कारण आनुवांशिक ही होते हैं | लेकिन ज्यादातर गर्भपात असामान्य क्रोमोजोम की वजह से होते हैं | इसके कुछ अन्य लक्षण इम्यूनोलॉजिकल डिसऑर्डर, एनाटॉमी कारण, बैक्टीरिया और वायरस के इंफेक्शन और एंडोक्राइन है |

2. गर्भावस्था के दौरान पहले 3 महीने महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं | इस दौरान उन्हें यह ध्यान रखना जरूरी हो जाता है | कि वे जो कुछ भी खाएंगी, वह उनके मुंह और फेफड़ों द्वारा गर्भ में पल रहे उनके बच्चों तक पहुंचेगा |


3. ऐसे में महिलाओं द्वारा सिगरेट, तंबाकू शराब और किसी भी नशीली चीज का सेवन बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकता है | क्योंकि बच्चा अभी अपने विकास के पहले चरण में ही होता है | अपने सुरक्षित गर्भ की दृष्टि से महिलाओं को इस दौरान तब तक एक्स-रे और सीटी स्कैन नहीं करना चाहिए, जबतक कि डॉक्टर न कहें | इस तरह से इन सब बातों का ध्यान रखकर महिलाएं काफी हद तक गर्भपात की आशंका कम कर सकती हैं |

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