Header Ads

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय
महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय, महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या होने के कारण, महिलाओं में तिलिटी की समस्या को दूर करने के घरेलू नुस्खे
इनफर्टिलिटी की समस्या होने के कारण महिला गर्भधारण करने में असमर्थ रहती है, और महिलाओं में होने वाली इस समस्या के बहुत से कारण हो सकते हैं। जैसे की महिला का किसी शारीरिक समस्या, गर्भाशय से जुडी कोई परेशानी या फिर महिला की गलत आदतें भी हो सकती हैं। एनीमिया, फैलोपियन ट्यूब से जुडी कोई समस्या, गर्भाशय फाइब्रॉएड, थायरॉयड, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, यौन संचारित रोग, शराब व् धूम्रपान की लत, शरीर में पोषक तत्वों की कमी कुछ भी हो सकते हैं। लेकिन यह कोई ऐसी समस्या भी नहीं होती है की इसका इलाज न हो बल्कि समय पर यदि इसका इलाज किया जाए तो आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की कमी को दूर करने के उपाय

महिलाओं में होने वाली इनफर्टिलिटी की समस्या का इलाज किया जा सकता है, तो आज हम आपको महिलाओं से जुडी इस परेशानी का इलाज बताने जा रहें हैं। यदि आपको भी यह समस्या है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकती हैं।
दालचीनी

डिम्ब ग्रंथि में होने वाली समस्या को दूर करने के लिए दालचीनी का इस्तेमाल बहुत ही प्रभावी होता है, साथ ही पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की परेशानी को खत्म करने में भी यह आपकी मदद करता हैं जिससे आपकी फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके उपयोग के लिए आप नियमित एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर डालकर उसका सेवन करें, साथ ही सब्जियों, सलाद के ऊपर भी दालचीनी पाउडर का छिड़काव करके सेवन करें आपको फायदा मिलेगा।
अनार

पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर अनार का सेवन करने से आपको प्रजनन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है क्योंकि इसके से गर्भाशय में रक्त का प्रवाह बेहतर होने लगता है, जिसके कारण गर्भ की परत मोटी हो जाती है। और भ्रूण को गर्भ में भरपूर पोषण दे सकती है, इसके लिए आप ताजे अनार का नियमित सेवन करने के साथ अनार के जूस का सेवन नियमित रूप से कर सकते हैं।
तिल का तेल

शुक्राणुओं की गुणवत्ता को बढ़ाने को उन्हें गतिशील बनाने के लिए तिल के तेल का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। साथ ही नियमित तिल के तेल को गुनगुना करके पेट पर मालिश करने से गर्भाशय में ऑक्सीजन के प्रवाह में सुधार आता है, जिससे प्रजनन क्षमता बेहतर होती है, और मालिश करके आपको नहाना जरूर चाहिए।
शतावरी

शातावरी का सेवन भी महिला की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने, अंडाणु को पोषण देने के साथ महिला की यौन इच्छा को बढ़ाने में भी मदद करता है। साथ ही इसके कारण एस्ट्रोजन के उत्पादन में भी वृद्धि होती है। जिसके कारण मासिक धर्म को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। और महिला का गर्भ ठहरने के चांस बढ़ते हैं।
खजूर

खजूर भी महिलाओं में प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच हरे धनिये के साथ दस से बारह खजूर के बीज निकालकर अच्छे से पीस लें। उसके बाद एक कप गाय के दूध में इसे उबालें, और ठंडा करके नियमित इसका सेवन करें साथ ही आप वैसे भी खजूर का सेवन कर सकते हैं। इससे आपको बहुत फायदा मिलता है।
बरगद की छाल
बरगद की छाल को पीसकर उसका चूर्ण तैयार करें, और एक चम्मच चूर्ण का सेवन एक गिलास दूध में डालकर नियमित करें। आप चाहे तो इसमें थोड़ा चीनी भी मिला सकते हैं, लगभग छह महीने तक नियमित इसे करें और पीरियड्स के दौरान इसका सेवन न करें। ऐसा करने से आपको प्रजनन अंगो में होने वाले विकार को दूर करके उसे बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
अश्वगंधा चूर्ण

रोजाना पांच ग्राम अश्वगंधा चूर्ण का सेवन गर्म दूध में डालकर करने से आपको प्रजनन क्षमता बढ़ाने के साथ हार्मोनल विकार सम्बन्धी समस्या से भी निजात मिलता है। और नियमित इसका सेवन करने से आपको गर्भधारण करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास उपाय जिनका इस्तेमाल करने से आप इनफर्टिलिटी से जुडी इस समस्या का समाधान कर सकते हैं, और यदि इसका कारण आपकी किसी शारीरिक समस्या से जुड़ा होता है तो इसके लिए आपको डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। ताकि इसका इलाज हो सकें और आप माँ बनने का खास अनुभव ले सकें। और साथ ही आपको योगासन करना चाहिए, भरपूर पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन

करना चाहिए ताकि आपको फिट रहने में मदद मिल सकें।

डिलीवरी के बाद कितने दिनों तक आराम करना चाहिए
डिलीवरी के बाद कितने दिनों तक आराम करना चाहिए, डिलीवरी के बाद फिट होने में कितना समय लगता है, डिलीवरी के बाद के लिए केयर टिप्स

प्रसव महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जिसमें महिला को बहुत ज्यादा थकावट होने के साथ बॉडी में बहुत से बदलाव आ जाते हैं। तभी कहा जाता है की डिलीवरी के बाद केवल एक शिशु ही जन्म नहीं लेता है बल्कि वह महिला के लिए भी नया जन्म होता है। नोर्मल डिलीवरी के दौरान जहां महिला को असहनीय दर्द सहन करना पड़ता है, वहीँ सिजेरियन डिलीवरी के समय महिला की बॉडी से रक्त बहुत ज्यादा मात्रा में निकलता है, और टाँके लगाए जाते हैं। ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है, और साथ ही महिला पर शिशु की बेहतर केयर की जिम्मेवारी भी आ जाती है, जिसके कारण महिला को डिलीवरी के बाद फिट होने में थोड़ा समय लग सकता है। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को कितने दिनों तक आराम करना चाहिए।

नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला कब तक करें आराम

नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को फिट होने में कम समय लगता है, लेकिन फिर भी महिला को चालीस से पैंतालीस दिन तक अच्छे से आराम करना चाहिए। और महिला को पूरी तरह से फिट होने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए अपने खान पान में भरपूर मात्रा में न्यूट्रिएंट्स युक्त पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला कब तक करें आराम
सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला के शरीर को फिट होने में नोर्मल डिलीवरी से ज्यादा समय लगता है, क्योंकि शुरुआत में न तो महिला घी आदि का सेवन नहीं कर सकती है। क्योंकि ऐसा करने से सिजेरियन डिलीवरी के दौरान लगने वाले टांको को ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में महिला का शरीर फिट होने में थोड़ा ज्यादा समय लेता है। इसीलिए सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को कम से कम दो महीने से ज्यादा का समय पूरी तरह से फिट होने के लिए लगता है, और शुरुआत में तो महिला को उठने बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
डिलीवरी के बाद केयर के लिए कुछ खास टिप्स
खान पान में शामिल करें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व।
पर्याप्त नींद लें, इससे आपको आराम मिलेगा और जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।
हमेशा अपने आस पास किसी को रखें ताकि यदि कोई चीज चाहिए हो तो उसके लिए आपको परेशान न होने पड़े।
सिजेरियन डिलीवरी के बाद टांको के कारण उठने बैठने में ज्यादा परेशानी होती है, ऐसे में आपको बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे आपको आराम मिलता है।
सारा दिन लेटे न रहें इसके कारण कमर दर्द बढ़ सकता है ऐसे में पांच से सात मिनट के लिए डिलीवरी के कम से कम दस दिन बाद थोड़ा वॉक करें।
उठने बैठने में तेजी से काम न लें, इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है, बल्कि आराम से करवट लेकर उठें।
ज्यादा बात न करें, और मिलने जुलने वालों के साथ ज्यादा देर न बैठें इसके कारण आपको परेशानी हो सकती है, साथ ही इससे इन्फेक्शन का खतरा भी रहता है।
इसके अलावा शिशु के लिए भरपूर दूध की मात्रा रखने के लिए महिला को अपने खान पान में थोड़ी सी भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
तो यह हैं कुछ टिप्स जिनसे आप जान सकते हैं की नार्मल डिलीवरी के बाद महिला को फिट होने में कितना समय लग सकता है।

डिलीवरी के बाद कितने दिनों तक आराम करना चाहिएडिलीवरी के बाद के लिए केयर टिप्सडिलीवरी के बाद फिट होने में कितना समय लगता है
क्या एक बार सम्बन्ध बनाने से लड़की प्रेग्नेंट हो जाती है


क्या एक बार सम्बन्ध बनाने से लड़की प्रेग्नेंट हो जाती है, कितनी बार सम्बन्ध बनाने से होते हैं प्रेग्नेंट, प्रेगनेंसी के लिए टिप्स, क्या एक बार सम्बन्ध बनाने से गर्भ ठहर जाता है

ज्यादातर लोग ऐसा ही मानते है की लड़का और लड़की ने यदि एक बार सम्बन्ध बना लिए तो इसके कारण लड़की प्रेग्नेंट हो जाएगी। जो की बिल्कुल गलत सोच है क्योंकि प्रेगनेंसी होने के लिए बहुत सी चीजों का होना जरुरी होता है, जैसे की यदि आपने सम्बन्ध बना लिए लेकिन उस दौरान आपके प्रजनन अंग उतने उत्तेजित नहीं थे, या पुरुष के शुक्राणु अच्छे से निर्मित नहीं हुए तो प्रेगनेंसी होने के चांस न के बराबर होते हैं। प्रेगनेंसी होने के लिए सबसे जरुरी होता है की दोनों बेहतर ओर्गास्म को प्राप्त करें। एक रिसर्च के अनुसार एक महीने में कम से कम तेरह बार बेहतर सम्बन्ध बनाने से महिला के प्रेगनेंसी के चांस बढाए जा सकते है।

एक बार सम्बन्ध बनाने से भी हो सकते हैं प्रेग्नेंट


यदि महिला का ओवुलेशन पीरियड चल रहा है, और लड़का और लड़की के बीच बेहतर सम्बन्ध बने हैं, और निषेचन की क्रिया भी सफल हो गई है, तो एक सर्वे के अनुसार केवल पांच प्रतिशत लडकियां ही ऐसी होती है जो की पहली बार सम्बन्ध बनाने से ही प्रेग्नेंट हो जाती है। इसके अलावा ज्यादातर महिलाएं एक से ज्यादा बहार सम्बन्ध बनाने के बाद ही प्रेग्नेंट होती है। क्योंकि फर्टिलिटी बेहतर होना आसान बात नहीं होती है क्योंकि यह पूरी तरह से आपकी जीवनशैली, आपके स्वास्थ्य, और आपकी आदतों पर निर्भर करती है बेहतर फर्टिलिटी के लिए इन तीनो का बेहतर होना जरुरी होता है।
प्रेग्नेंट होने के कुछ आसान टिप्स
ओवुलेशन के दौरान बनाएं बेहतर और मज़ेदार सम्बन्ध।
उत्तेजना भी है जरुरी।
स्वास्थ्य रूप से भी हो पूरी तरह फिट।
सम्बन्ध बनाने के बाद न करें यूरिन पास और एक दम से न उठें।
नशे धूम्रपान की आदतों का करें त्याग।
एक दूसरे को करें स्पोर्ट ताकि सम्बन्ध बनें बेहतर।
सम्बन्ध बनाने के बाद न करें प्राइवेट पार्ट साफ़।
तो यह है की ऐसा हो सकता है की लड़का और लड़की के एक बार सम्बन्ध बनाने के बाद लड़की प्रेग्नेंट हो जाएँ लेकिन ऐसा बहुत कम चांस होता है। इसके अलावा यदि आप प्रेग्नेंट होना चाहती है तो आपको ऊपर दिए गए टिप्स का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।
कितनी बार सम्बन्ध बनाने से होते हैं प्रेग्नेंटक्या एक बार सम्बन्ध बनाने से लड़की प्रेग्नेंट हो जाती हैप्रेगनेंसी के लिए टिप्स

पेट में लड़का कौन सी साइड होता है

पेट में लड़का कौन सी साइड होता है, गर्भ में लड़के का भार किस तरफ होता है, कैसे पता करें गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की
प्रेगनेंसी के कन्फर्म होने बाद महिला में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण हर कोई महिला के लक्षण को देखकर बताने लगता है की लड़का होगा या लड़की। हर कोई अपने तजुर्बे के हिसाब से बताता हैं लेकिन कई बार वो अंदाजा सही भी हो जाता है। गर्भ में लड़का हो या लड़की इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि हर कोई घर में आने वाले नन्हे मेहमान के लिए उत्साहित होता है।


लेकिन फिर भी कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हे लड़के की चाहत होती है या पहले लड़की होने के कारण अब वो अपने परिवार को पूरा करने के लिए लड़के को चाहते हैं। तो आइये आज हम आपको एक ऐसा खास टिप्स बताने जा रहे है जिससे आप शिशु के भार से बता सकते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या नहीं।

गर्भ में लड़के का भार कौन सी साइड होता है

प्रेगनेंसी में पांचवे महीने के बाद शिशु गर्भ में मूव करना शुरू कर देता है ऐसे में यदि आपको अपने सीधे पाँव, या सीधे हाथ की तरफ पेट में अधिक भार या खिंचाव महसूस होता है तो यह गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है इसका एक लक्षण होता है। और यदि आप अल्ट्रासॉउन्ड करवाते हैं और उसमे देखते हैं की शिशु का सिर सीधे हाथ की तरफ है तो यह भी गर्भ में पल रहे शिशु लड़का है इसी को बताता हैं।

तो यह हैं किस तरह आप शिशु के भार को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की, ज्यादातर लोग इस बात को मानते हैं और पुराने समय में औरतें इसी को देखकर बता देती थी की गर्भ में पल रहा शिशु कौन है।

कैसे पता करें गर्भ में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़कीगर्भ में लड़के का भार किस तरफ होता हैपेट में लड़का कौन सी साइड होता है

व्रत में पीरियड्स आ जाए तो क्या करें?
व्रत में पीरियड्स आ जाए तो क्या करें, फास्ट में पीरियड्स, व्रत में मासिक धर्म आए तो क्या करें, करवाचौथ व्रत में पीरियड्स, फास्टिंग में पीरियड्स, व्रत में पीरियड्स

हिन्दू धर्म और वैदिक रीती रिवाजों के अनुसार, मासिक धर्म के दिनों में हिन्दू महिलाओं को धार्मिक कार्य नहीं करने को कहा जाता है। इसीलिए इन दिनों में महिलाएं मंदिर नहीं जाती है और पूजा पाठ के सामान और मूर्ति को हाथ तक नहीं लगाती हैं।


प्राचीन काल में तो इन दिनों में महिलाएं नीचे चटाई पर सोती थी और इसको लेकर कई सारे नियम-धर्म थे। महाभारत काल में जब स्त्रियां माहवारी में होती थी, उनके रहने के लिए अलग से व्यवस्था होती थी, वो समाज से अलग दूसरी जगह रहती है, लोगों से मिलना जुलना नहीं होता है और वो किसी कार्य में भी भाग नहीं लेती थी, यहाँ तक की रसोईघर में भी नहीं जाती है।

इस्लाम में भी माहवारी के दौरान औरत को नापाक माना जाता है। उसे इबादत की अनुमति नहीं होती और वे क़ुरान भी नहीं छू सकती। औरत सातवें दिन स्नान के बाद ही पाक होती हैं।

अब बात आती है की व्रत के दौरान माहवारी आ जाए तो क्या करना चाहिए? इस पर लोगों का अलग-अलग मत है। मान लीजिये नवरात्रि में कुछ फ़ास्ट करने के बाद अगर आपका मासिक धर्म आ जाता है तो क्या आप बीच में ही व्रत करना छोड़ देंगे। या आपने करवाचौथ का व्रत रखा है और शाम को पीरियड्स आ जाए तो क्या करेंगी आप? ज़ाहिर है, व्रत को पूरा करेंगी।

क्योंकि जिसकी शुरुवात हो चुकी है उसको पूर्ण करना जरुरी होता है। बशर्ते की हम थोड़ा अलग रहें और नियमों का पालन करें। लेकिन व्रत को न तोड़े, उसे कंटिन्यू रखें। आप अपनी परंपरा की भी रिस्पेक्ट करें इसके लिए आप पूजा करने से दुरी बनाएं। और भगवान के पास नहीं जाएं।

व्रत के दौरान अगर पीरियड्स आ जाएं तो आप व्रत करते रहें, पूजा पाठ नहीं करें आपको उतना ही फल मिलेगा और भगवान प्रसन्न होंगे क्यों की इसमें आपकी गलती नहीं है ये प्रकृति का चक्र है, जो कभी भी किसी भी दिन हो सकता है, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। इसलिए चिंता नहीं करें।
करवा चौथ में अगर व्रत के दिन माहवारी आ जाए, तो शाम की पूजा को इग्नोर करें, पर चाँद को जरूर देखें और अपना व्रत पूरा करें। क्योंकि पूजा पाठ आपके मन और आपके विचार से होता है, शरीर तो केवल एक जरिया है उस पूजा को पूर्ण करने का।

हमारी संस्कृति में कई परम्पराएं बहुत पुरानी हैं जो उस समय के लिए सही थी, लेकिन आधुनिक युग में बहुत सारी चीजें बदल गयी हैं। इसलिए आपको थोड़ा चेंज लाना होगा। इसलिए अगर माहवारी आ जाए तो भी व्रत तोड़े नहीं और व्रत पूरा करें।

गर्भधारण कैसे करें?

माँ बनने के तरीके, गर्भधारण कैसे करें, प्रेग्नेंसी में प्रॉब्लम क्या करें, गर्भधारण करने के तरीके, बेबी कंसीव कैसे करें, गर्भधारण करने के मेडिकल तरीके, मेडिकल तरीके से प्रेग्नेंसी कैसे हो, डॉक्टरी इलाज से प्रेग्नेंसी, प्रेग्नेंसी होने के तरीके

माँ बनना हरेक महिला के लिए सबसे खूबसूरत पल होता है। इस पल को सभी महिलाएं अपनी जिंदगी में जरूर चाहती हैं। और वो चाहती हैं की उनका भी बच्चा हो, उनका शिशु भी उनकी गोद में खेले। लेकिन कई बार कुछ कारणों से देर होने लगती है, या डॉक्टर कॉम्प्लीकेशन्स कह देते हैं जिसकी वजह से महिलाएं उदास रहने लगती हैं। इसलिए आज हम आपको माँ बनने के कौन-कौन से तरीके होते हैं? उसके बारे में बता रहे हैं। ताकि हरेक महिला को संतान सुख मिल सके।

https://healthtoday7.blogspot.com
जब स्त्री पुरुष के संबंध बनाते हैं तो शुक्राणु महिला के अंडे के साथ मिलता है और निषेचन होता है। उसके बाद गर्भधारण होकर नौ महीने बाद महिला को संतान सुख मिलता है। ये नार्मल प्रोसेस है और प्रकृतिक तरिका है गर्भधाराण करने का। इसमें कई बार प्रेग्नेंसी जल्दी हो जाती है और कई बार प्रेग्नेंसी थोड़ी देर हो जाती है।

गर्भधारण में देर होने की वजह शारीरिक समस्या हो सकती है, शुक्राणु की समस्या हो सकती है, ऐज फैक्टर हो सकता है, महिला में कोई दिक्क्त हो सकती है या किसी कारणवश अंडा निषेचित नहीं हो पाता है। अगर शादी के दो साल तक कोई बेबी नहीं हुआ तो आप डॉक्टर से मिलिए और अपनी समस्या का समाधान करवाइये। नार्मल इलाज के बाद आप माँ बन सकेंगी।
माँ बनने के तरीकेप्रेग्नेंट होने के तरीके
लेकिन इसके बाद भी चार साल तक माँ नहीं बन पाई हैं तो दूसरा तरीका है



आई यू आई गर्भधारण करने का कृत्रिम तरीका है। ये तरीका तब अपनाया जाता है जब शुक्राणु प्राकृतिक रूप से अंडे को निषेचित नहीं कर पाता है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर पुरुष के शुक्राणु को बहुत छोटे से सर्जिकल प्रोसेस के माध्यम से महिला के अंडे में डाल देते है। ताकि शुक्राणु और अंडे का मिलन हो जाए और अंडा निषेचित हो जाए। IUI का खर्च दस हजार से लेकर पचास हजार रूपए तक हो सकता है।

अगर नार्मल तरीका अपनाने और IUI कराने के बाद भी गर्भ नहीं ठहर रहा है और गर्भधारण नहीं किये हुए 5 साल से ज्यादा हो गए हैं तो आपके पास दुसरा ऑप्शन है IVF का। इस तरीके के लिए आप किसी अच्छे डॉक्टर से मिलें, आप माँ बन सकेंगी।
IVF (In-Vitro-Fertilization)

IVF भी गर्भधारण करने का कृत्रिम तरीका है। इस प्रक्रिया में महिला के अंडाशय से अंडो को निकाला जाता है और पुरुष के शुक्राणुओं से लैब में निषेचित किया जाता है। निषेचन के बाद जब भ्रूण विकसित होने लगता है तब उसे महिला के गर्भ में डाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया में महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु का इस्तेमाल किया जाता है। अगर किसी महिला के अंडे या पुरुष के शुक्राणु में कोई समस्या हो तो डोनर के अंडे या शुक्राणु का प्रयोग IVF में किया जाता है। IVF प्रक्रिया किसी अच्छे डॉक्टर से ही करवाएं। क्योंकि ये प्रक्रिया बहुत कॉस्टली होती है, जिसका खर्च एक लाख से पांच लाख तक जा सकता है।
Surrogacy

निसंतान दंपत्ति के लिए सेरोगेसी भी अच्छा विकल्प हैं। सेरोगेसी की मदद से निसंतान दम्पत्ति भी संतान सुख भोग सकते हैं। सेरोगेसी उन परिस्थितियों में की जाती है जब महिला किसी कारणवश गर्भधारण करने में सक्ष्म ना हो। इसके लिए किसी दूसरी महिला के गर्भ में अंडा बाहर निषेचित करवाकर प्रत्यारोपित किया जाता है। या पुरुष के शुक्राणु IUI प्रोसेस के द्वारा दूसरी महिला के अंडे से निषेचित करवाया जाता है।

नौ महीने तक दूसरी महिला उस शिशु को गर्भ में पालती है और जन्म देने के बाद उसके असली माता-पिता को सौप दी जाती है। आप चाहें तो इसके लिए अपने किसी रिश्तेदार की मदद ले सकते हैं। या किसी महिला को किराए पर ले सकते हैं जिसको सेरोगेट मदर कहते हैं। सरोगेसी का खर्च करीब पांच लाख से लेकर पंद्रह लाख तक होता है।
तो दोस्तों, ये कुछ तरीके हैं जिनकी मदद से आप संतान सुख प्राप्त कर सकती हैं और माँ बन सकती है। इन सभी तरीकों के लिए आप किसी अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करें और प्रोसेस शुरू करें। आप जल्द ही माँ बनेंगी। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

गर्भधारण करने के तरीके
गर्भधारण करने के मेडिकल तरीके
गर्भधारण कैसे करेंडॉक्टरी इलाज से
 प्रेग्नेंसीप्रेग्नेंसी में प्रॉब्लमप्रेग्नेंसी होने के तरीकेबेबी कंसीव कैसे करेंमाँ बनने के तरीके

समबन्ध बनाने के बाद सूजन होने के कारण

सम्बन्ध बनाने के बाद सूजन होने के कारण, प्राइवेट पार्ट में सूजन के कारण, क्यों होती है सम्बन्ध बनाने के बाद वजाइना में सूजन, सम्बन्ध बनाने के बाद वजाइना में सूजन के कारण

सम्बन्ध बनाना भी वैवाहिक जीवन का एक अभिन्न अंग हैं क्योंकि जितने बेहतर आपके सम्बन्ध होते हैं उतना ही ज्यादा प्यार आपके बीच में बढ़ता है और उसे जवान रहने में मदद मिलती है। लेकिन कई बार शारीरिक सम्बन्ध का मज़ा आप उस तरह नहीं उठा पाते हैं जिस तरह आपको आना चाहिए इसका कारण महिलाओं के प्राइवेट पार्ट से जुडी समस्या हो सकती है। क्योंकि कई बार सम्बन्ध बनाने के बाद महिलाओं को प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या हो जाती है साथ ही दर्द भी महसूस होता है। जिसके कारण महिलाओं को सम्बन्ध बनाते समय हिचकीचाहट महसूस होती है। और यदि आप संबंध बनाते भी हैं तो वो उतना बेहतर नहीं बन पाते क्योंकि आपका पार्टनर उसमे पूरा सहयोग नहीं दे पाता है। लेकिन सम्बन्ध बनाने के बाद सूजन बनाने के क्या कारण हो सकते हैं आइये विस्तार से जानते हैं।

पहली बार सम्बन्ध बनाने के कारण

यदि आप पहली बार शारीरिक सम्बन्ध बनाते हैं तो इसके कारण आपको वजाइना में सूजन हो सकती है। क्योंकि इसके कारण वजाइना में संकुचन होता है और मांसपेशियों में खिंचाव होता है जिसके कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
प्राइवेट पार्ट में सूखापन

जिन महिलाओं को वजाइना में सूखेपन की समस्या रहती है, तो सम्बन्ध बनाते समय प्राइवेट पार्ट पर जोर पड़ता है और रगड़ लगती है। जिसके कारण महिलाओं को सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

मेनोपॉज़

यह महिलाओं में आने वाली एक ऐसी स्टेज होती हैं जिसमे बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव आते हैं। और इन बदलाव आने के कारण प्राइवेट पार्ट में सूखापन आ जाता है, और इस दौरान यदि आप सम्बन्ध बनाते हैं तो ऐसे में कई बार महिलाओं को वजाइना में होने वाली सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
वजाइना संकुचन

यह महिलाओं के लिए बहुत ही गंभीर स्थिति होती है, क्योंकि इस समय सम्बन्ध बनाते समय प्राइवेट पार्ट में टैम्पोन जैसी चीज़ों को इन्सर्ट करने, गाइनकोलॉजिकल टेस्ट, या फिर सम्बन्ध बनाने के दौरान मांसपेशियां टाइट हो जाती है, जिसके कारण महिला को दर्द की समस्या हो सकती है। और कुछ महिलाओं को दर्द के साथ सूजन भी हो सकती है।
इन्फेक्शन होने के कारण

यदि महिला को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने के बाद भी आप सम्बन्ध बनाते हैं, तो कई बार इसका दुष्परिणाम देखने को मिलता है जिसके कारण महिला को खुजली, जलन, व् सूजन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से सम्बन्ध बनाने के बाद प्राइवेट पार्ट में सूजन की समस्या हो सकती है। ऐसे में इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए और एक बार हो सके तो इसके लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ताकि प्राइवेट पार्ट से जुडी इस समस्या का कोई गंभीर कारण न हो।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.