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सेक्स का परिचय

सेक्स का परिचय 
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परिचय- 
सेक्स वैज्ञानिकों का कहना है कि सेक्स के बारे में स्त्री-पुरुष दोनों के विचार अलग-अलग होते हैं। लोग अक्सर अपनी शिक्षा और ज्ञान के आधार पर सेक्स की परिभाषा देते हैं। सेक्स विशेषज्ञों ने सेक्स के बारे में लोगों के विचारों का अध्ययन करके यह पता लगाया कि लोगों कि मानसिकता और सोच जिस प्रकार की होती है उसके मन में सेक्स के लिए उसी तरह के विचार उत्पन्न होते हैं।
सेक्स के प्रति व्यक्तियों के विचारः– 
1.जब विशेषज्ञों ने लोगों से पूछा कि सेक्स क्या है? तो उनका जवाब था कि सेक्स मन की भावना है जो संसार के सभी स्त्री-पुरुषों में मौजूद होती है। 
2. कुछ अन्य लोगों से सेक्स के बारे में पूछने पर पता चला कि उनके विचार दूसरों के विचारों से बिल्कुल अलग हैं। उन लोगों का कहना था कि सेक्स स्त्री-पुरुष को एक-दूसरे के प्रति आकर्षण पैदा करनी वाली मानसिक प्रतिक्रिया है।
3. कुछ लोगों के अनुसार सेक्स ही प्रकृति है। उनका कहना था कि स्त्री-पुरुष के मिलन से ही मावन जीवन का अस्तित्व मौजूद है। इनके मिलने से ही इस सुन्दर प्रकृति का निर्माण होता है। 
4. समाज में कुछ ऐसे भी लोग मौजूद हैं जिनका जबाव प्राकृतिक से बिल्कुल अलग था। ऐसे लोगों के अनुसार सेक्स एक प्रकार की मानसिक भूख है जो हर स्त्री-पुरुष को अवश्य लगती है।
5. जब सेक्स विशेषज्ञों ने कुछ युवक-युवतियों से सेक्स के बारे में अपने विचार प्रकट करने को कहा तो उनका कहना था कि सेक्स प्यार का एक स्रोत है जो स्त्री-पुरुष के बीच संपन्न होता है और इससे संसार में अमन और चैन कायम रहता है। 
6. सेक्स स्त्री-पुरुष दोनों के मन में उत्पन्न एक इच्छा होती है जो सेक्स करने के बाद भी खत्म नहीं होती।
7. शरीर विज्ञान के अनुसार सेक्स शारीरिक व मानसिक आवश्यकता है जो स्त्री-पुरुष के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में लाभकारी होती है।
8. कुछ विचारों का कहना है कि सेक्स एक कला है जो स्त्री-पुरुष को शारीरिक व मानसिक आनन्द देती है।
9. सेक्स सफल जीवन की एक सुखद यात्रा है। सेक्स के द्वारा स्त्री-पुरुष को शारीरिक, मानसिक और आंतरिक सुख और शांति मिलती है।
इस तरह अलग-अलग विचारकों के लिए सेक्स की परिभाषा भी अलग-अलग है। साधारण रूप में कहा जाए तो सेक्स स्त्री-पुरुष के शारीरिक व मानसिक सुख और आनन्द का मात्र एक साधन है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार मनुष्य के जीवन में सेक्स का काफी महत्व है। सेक्स के बिना मनुष्य जीवन का सही आनन्द नहीं प्राप्त कर सकता है। सेक्स संबंध सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि भावनात्मक भी होना चाहिए अर्थात सेक्स के लिए स्त्री-पुरुष दोनों के मन में इच्छा होनी चाहिए। सेक्स एक ऐसी क्रिया है जिसे यदि स्त्री-पुरुष अपनी इच्छा से करे तो शारीरिक व मानसिक आनन्द प्राप्त होता है लेकिन सेक्स के लिए यदि दोनों में से किसी एक की इच्छा न हो फिर भी सेक्स किया जाए तो उसे बलात्कार कहलाता है। 
विवाह के बाद स्त्री-पुरुष अपने नए जीवन अर्थात पारिवारिक जीवन की शुरुआत करते हैं। पारिवारिक जीवन सुखद बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि स्त्री-पुरुष दोनों के आपसी संबंध अच्छे हों और दोनों के बीच सेक्स संबंध भी अच्छे हों। पारिवारिक जीवन को सफल बनाने के क्रम में सेक्स संबंध काफी महत्वपूर्ण होता है। सेक्स संबंध में असफलता के कारण स्त्री-पुरुष दोनों में कई प्रकार की परेशानी उत्पन्न होने लगती है। सेक्स में असफलता से लोगों में निराशा, परेशानी तथा भय उत्पन्न होने लगते हैं। इस तरह की परेशानी के कारण पति-पत्नी का वैवाहिक जीवन कष्टमय हो जाता है। सेक्स एक व्यक्तिगत कार्य है जिसके बारे में व्यक्ति किसी दूसरे को बताना नहीं चाहता है। कुछ ऐसे भी लोग होते है जो सेक्स संबंधी किसी भी परेशानी को दूसरे को बताने से शर्माते हैं। सेक्स के बारे में सही ज्ञान न होने से भी व्यक्ति का वैवाहिक जीवन कष्टमय हो जाता है। सेक्स संबंधों में असफलता के कारण कभी-कभी वैवाहिक जीवन पूर्ण रूप से बिखर जाते हैं। कुछ लोग तो इसी समस्या से परेशान होकर हत्या, आत्महत्या, तलाक, मारपीट तथा अन्य हिंसक कार्य कर बैठते हैं।
सेक्स की कलाः
वैवाहिक जीवन में सेक्स संबंधों का महत्व होने के कारण ही सेक्स विशेषज्ञों व विचारकों ने इसे एक कला का नाम दिया है। इस कला की सही जानकारी सभी लोगों को होनी चाहिए ताकि व्यक्ति सेक्स का सही आनन्द प्राप्त कर सके और इससे जुड़े वैवाहिक जीवन सुखी हो सके। सेक्स की सही जानकारी होने से स्त्री-पुरुष दोनों ही सेक्स क्रिया द्वारा शारीरिक व मानसिक आनन्द प्राप्त कर सकते हैं। सेक्स की इन कलाओं को जानने के लिए सेक्स के प्रति रुचि व इच्छा होनी आवश्यक है। सेक्स की कला को जानने के लिए स्त्री के हर अंग, अदा. आदतें और हर बात को समझना आवश्यक है। सेक्स का सही ज्ञान होने से ही व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बना सकता है। सेक्स के ज्ञान के लिए व्यक्ति को स्त्री के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। इस तरह सेक्स और स्त्री के बारे में जानकारी होने से ही व्यक्ति अपनी पत्नी को सेक्स से संतुष्ट व खुश कर सकता है और अपने सेक्स संबंध को सफल बना सकता है। जिन्हें सेक्स के बारे में सही जानकारी नहीं होती वे सेक्स करते समय स्त्री को खुश नहीं कर पाते और न स्वयं ही सेक्स का आनन्द ले पाते हैं। सेक्स कला को जानने वाले व्यक्ति ही स्त्री को सही संतुष्ट कर पाते हैं और सेक्स का पूर्ण आनन्द प्राप्त कर पाते हैं। सेक्स कला को जानने के बाद समय के साथ उसमें और निखार आता जाता है। अतः सेक्स के बारे में सही ज्ञान होना आवश्यक है और वह वैवाहिक जीवन के लिए बेहद आवश्यक है।
सेक्स सुख क्या हैः
सेक्स क्रिया के दौरान जब स्त्री-पुरुष एक-दूसरे में लीन हो जाते हैं और वह शारीरिक व मानसिक रूप से जो महसूस करते उसे ही सेक्स सुख कहते हैं। सफल सेक्स संबंध बनाने के लिए स्त्री-पुरुष दोनों को ही एक-दूसरे को अच्छी तरह जानना और समझना चाहिए। सेक्स संबंध बनाने के लिए दोनों की सहमति होनी आवश्यक है जिससे दोनों को सेक्स का सही आनन्द प्राप्त हो सके। सेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्स जल्दबाजी में किया जाने वाला काम नहीं है बल्कि सूझ-बूझ और धैर्य से किये जाने वाला काम है। सेक्स संबंध का वास्तविक सुख वही है जिसमें स्त्री-पुरुष दोनों को ही शारीरिक व मानसिक सुख प्राप्त हो सके। अतः सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार अच्छे सेक्स संबंधों के लिए सेक्स का ज्ञान होने के साथ-साथ स्त्री-पुरुष दोनों को एक-दूसरे को जानना बेहद आवश्यक है।
शारीरिक क्रिया और सेक्सः
जब स्त्री-पुरुष के मन में एक-दूसरे के लिए आकर्षण उत्पन्न होता है तब उनके शरीर की गंध, स्पर्श और आवाज से मन में सेक्स की इच्छा उत्पन्न होती है जिससे मस्तिष्क में सेक्स हार्मोन का स्राव होने लगता है। इस तरह जब मन में सेक्स की इच्छा उत्पन्न होती है तब यह इच्छा सीधे मेरुदण्ड के उत्थान केंद्र पर पहुंचकर सेक्स तंत्रिकाओं को सेक्स इच्छा की सूचना देती है जिससे तुरंत लिंग में हार्मोन भर जाता है और वह उत्तेजित हो जाता है।
सेक्स संबंध बनाते समय जब लिंग योनि में प्रवेश करता है तब स्त्री-पुरुष दोनों के शरीर में तेजी से परिवर्तन होता है। इस क्रिया के दौरान नाड़ी की गति बढ़ जाती है, रक्तचाप (ब्डप्रेशर) तेज हो जाता है, पूरे शरीर में खून तेजी से प्रवाह होने लगता है और त्वचा पर लाली आ जाती है। सेक्स के दौरान स्त्री-पुरुष दोनों के शरीर रोमांच से भर जाते हैं और सांस की गति बढ़ जाती है। सेक्स क्रिया जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे शरीर की गति तेज होती जाती है और मुंह से सिसकारियों की आवाज होने लगती है। सेक्स संबंध के दौरान कुछ लोग इतने उत्तेजित हो जाते हैं कि सेक्स क्रिया में वे बड़बड़ाने भी लगते हैं।
सेक्स संबंधों के दौरान जैसे ही पुरुष स्त्री की योनि में लिंग प्रवेश करता है वैसे ही उसके कामोत्तेजक अंगों में तेजी से परिवर्तन होने लगते हैं। लिंग में तनाव आते ही प्रोस्टेट और शुक्राशय भी उत्तेजित हो जाते हैं और उसमें वीर्य के रूप में मौजूद दो करोड़ शुक्राणु सक्रिय हो जाते हैं। सेक्स क्रिया के दौरान पुरुष द्वारा अपने लिंग के योनि से घर्षण कराने की गति जैसे-जैसे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे मस्तिष्क तथा तंत्रिकाओं में उत्तेजना बढ़ती जाती है। जब सेक्स क्रिया अंतिम स्थिति में पहुंच जाती है तो शुक्राशय से शुक्राणु निकलने की स्थिति बन जाती है अर्थात वीर्यपात होने की स्थिति बन जाती है। सेक्स क्रिया के दौरान जब लिंग अधिक उत्तेजित हो जाता है और वीर्य वाली नली भर जाती है तो वीर्यपात हो जाता है जैसे ही वीर्यपात होता है वैसे ही मस्तिष्क और कामांगों का संपर्क टूट जाता है। इसके बाद प्रोस्टेट ग्रंथि, शुक्राशय तथा अन्य पेशियों और तंत्रिकाओं की उत्तेजना समाप्त हो जाती है और वे ढ़ीले पड़ने लगते हैं। वीर्यपात होने के बाद लिंग में खून का प्रवाह धीरे-धीरे कम हो जाता है और वह सिकुड़ने लगता है।
सेक्स ज्ञान की आवश्यकताः 
सेक्स का भरपूर आनन्द व सुख प्राप्त करने के लिए सेक्स के बारे में जानना आवश्यक है। जब तक सेक्स के बारे में सही जानकारी नहीं होती तब तक सेक्स का पूर्ण आनन्द प्राप्त नहीं किया जा सकता। सेक्स की जानकारी के अभाव में व्यक्ति न तो स्वयं सेक्स का आनन्द ले पाता है और न ही अपनी पत्नी को संतुष्ट कर पाता है। कुछ लोग सेक्स की जानकारी के अभाव में अधूरी सेक्स क्रिया करते हैं जो स्त्री-पुरुष दोनों के लिए शारीरिक व मानसिक रुप से हानिकारक होता है। सेक्स की सही जानकारी सेक्स को पॉवरफुल बनाए रखने में मदद करती है। सेक्स की सही जानकारी से ही सेक्स क्रिया को लम्बे समय तक बनाए रखा जा सकता है। सेक्स के मामले में वैज्ञानिकों का कहना है कि सेक्स क्रिया में पुरुष जल्दी उत्तेजना का अनुभव करने लगते हैं जबकि स्त्री में सेक्स की उत्तेजना देर से होती है। ऐसे में स्त्री को पूर्ण रुप से उत्तेजित किए बिना ही सेक्स संबंध बनाने से स्त्री को सेक्स का सही सुख नहीं मिल पाता है जिसका परिणाम होता है कि स्त्री अनेक प्रकार के रोगों से ग्रस्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में स्त्री को उत्तेजित करने के लिए फोर प्ले का प्रयोग किया जाता है जिसमें सेक्स संबंध बनाने से पहले स्त्री के कामुक अंगों को स्पर्श करके उत्तेजित किया जाता है और जब वह पूर्ण रुप से उत्तेजित हो जाती है तो फिर सेक्स किया जाता है। इसलिए अनेक प्रकार के रोग से बचने और सेक्स का सही आनन्द उठाने के लिए सेक्स क्रिया की सही जानकारी होनी आवश्यक है।
सेक्स करने के तरीकेः
सेक्स संबंध के लिए स्त्री में उत्तेजना पैदा करने के लिए पुरुष कई प्रकार की क्रियाएं करते हैं लेकिन स्त्री को उत्तेजित करने वाली इन क्रियाओं को पुरुष एक साथ न करके आगे-पीछे करते हैं। स्त्री के साथ की जाने वाली सेक्स क्रियाएं हैं- स्त्री को आलिंगन करना अर्थात बाहों में भरना, चुम्बन लेना और सहलाना।
जब पुरुष, स्त्री के साथ ये सभी क्रियाएं करते हैं तो उसमें उत्तेजना पैदा होती है जिसके बाद स्त्री-पुरुष दोनों सेक्स संबंध बनाते हैं जिससे सेक्स का सही आनन्द प्राप्त होता है। इस तरह सेक्स क्रिया का सही आनन्द प्राप्त करने के लिए पुरुष को चाहिए कि वह अपनी स्त्री या प्रेमिका को प्यार करें, उसके होंठ को चूमें, उसके स्तनों को सहलाएं, उसे बांहों में भरकर चुम्बन लें और उसकी जांघों पर हाथ फेरें। इस तरह की क्रिया करने से स्त्री की कामोत्तेजना तेज होती है और वह सेक्स करने के लिए तैयार हो जाती है। इस प्रकार सेक्स करने से स्त्री-पुरुष दोनों को ही अत्यंत आनन्द मिलता है।
वात्स्यायन ने अपने कामसूत्र में सेक्स करने के कई तरीके बताएं हैं। उनका कहना है कि सेक्स करने के कई तरीके हैं लेकिन सेक्स की क्रियाविधि एक ही होती है। इस क्रिया में पुरुष अपने उत्तेजित लिंग को स्त्री की योनि में प्रविष्ट कराकर घर्षण करता है और स्खलित हो जाता है। इस तरह किये जाने वाले कार्य को सेक्स क्रिया कहते हैं। इस क्रिया में पुरुष अपने लिंग को स्त्री की योनि में प्रवेश कराकर घर्षण करता है और स्खलित होने के बाद अपने लिंग को योनि से बाहर निकाल लेता है। इस प्रकार साधारण रुप से किये गए सेक्स क्रिया को सेक्स एक्ट कहा जाता है।
सेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यह बात बिल्कुल सही है कि लिंग को योनि में प्रवेश कराकर घर्षण करने के बाद स्खलित होने को ही सेक्स क्रिया कहते हैं लेकिन ऐसी सेक्स क्रिया पशु भी करते हैं। फिर मनुष्य और पशु की सेक्स क्रिया में क्या अंतर है। ऐसे सवालों का जवाब देते हुए सेक्स विशेषज्ञ कहते हैं कि पशु के सेक्स में मन की भूमिका नहीं होती जबकि मनुष्य के अंदर मन की भूमिका होती है और वे अपनी संवेदन और कल्पना शक्ति द्वारा अपार सेक्स आनन्द अनुभव कर सकते हैं। यही कारण है कि सेक्स क्रिया में अधिक आनन्द और सुख प्राप्त करने के लिए सेक्स के अलग-अलग तरीके बताए हैं।
सेक्स क्रिया को विभिन्न तरीकों से करके और भी अधिक आनंददायक बनाया जा सकता हैः-
1. सेक्स क्रिया में पूर्ण संतुष्टि पाने के लिए स्त्री-पुरुष को एक-दूसरे के अगल-बगल लेटकर सेक्स करना चाहिए। सेक्स के लिए पुरुष को बांईं करवट लेटना चाहिए ताकि वह अपने दाएं हाथ से स्त्री के संवेदनशील अंगों को सहला सके। यदि पुरुष का बांईं हाथ तेजी से चलता हो तो दाएं करवट लेटकर भी सेक्स क्रिया आसानी से की जा सकती है।
2. सेक्स का दूसरा तरीका यह है कि सेक्स के लिए पुरुष नीचे लेट जाए और स्त्री ऊपर लेटकर सेक्स क्रिया कर सकती हैं। इससे स्त्री-पुरुष दोनों को ही सेक्स का भरपूर आनंद मिलता है। इस तरह की पोजीशन में सेक्स करना उन लोगों के लिए अधिक लाभकारी है जो शीघ्रपतन के रोगी हैं। इससे विपरीत पोजीशन में लेटकर भी सेक्स क्रिया की जा सकती है।
3. पीठ के बाल लेटी हुई स्त्री के दोनों टांगों को पुरुष अपने कंधे पर रखकर लिंग को योनि में प्रवेश कराकर धीरे-धीरे सेक्स किया जा सकता है।
4. सेक्स करने के लिए स्त्री-पुरुष को आमने-सामने बैठकर लिंग को स्त्री की योनि में प्रवेश कराकर धीरे-धीरे सेक्स क्रिया करें। 5.
6. स्त्री-पुरुष को एक-दूसरे के पैरों के बीच में से पैर निकाल कर सेक्स क्रिया करनी चाहिए। 
7. सेक्स क्रिया दीवार के सहारे भी किया जा सकता है। इस क्रिया में स्त्री को दीवार के सहारे खड़ा करा दें और फिर अपने लिंग को योनि में प्रवेश कराकर धीरे-धीरे सेक्स करना चाहिए और अपनी दोनों हाथों से स्त्री के स्तनों को सहलाना चाहिए।
8. सेक्स करने के लिए पुरुष उकड़ूं की स्थिति में बैठ जाएं और अपनी गोद में स्त्री को बैठाकर सेक्स क्रिया करें। इस क्रिया को स्त्री नीचे बैठकर और पुरुष को गोद में रखकर भी कर सकती है।
9. सेक्स क्रिया में और आनंद प्राप्त करने के लिए स्त्री अपने दोनों घुटने को मोड़कर खड़े हो जाए और पुरुष भी घुटनों के बल खड़े हो जाएं। इसके बाद धीरे-धीरे सेक्स क्रिया करनी चाहिए।
10. इस तरह अन्य आसनों की तरह पशु आसन भी होता है जिसमें स्त्री अपने दोनों हाथ-पैरों के सहारे जानवर के समान खड़ी हो जाती हैं और पुरुष भी उसी पोजीशन में खड़े हो जाते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे सेक्स क्रिया करते हैं। इस तरह किये जाने वाले सेक्स क्रिया को एनीमल पोजीशन कहते हैं। 
इस तरह अलग-अलग पोजीशन में सेक्स करने से सेक्स का सही आनन्द और सुख प्राप्त किया जा सकता है। सेक्स क्रिया के लिए अपने अनुसार पोजीशन बनाया जा सकता है। हर बार एक ही पोजीशन में सेक्स करने से सेक्स क्रिया में पूर्ण आनन्द नहीं मिल पाता। सेक्स क्रिया चाहे किसी भी पोजीशन में करें लेकिन एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि सेक्स के दौरान पत्नी को किसी प्रकार का कोई कष्ट न हो। उसे किसी स्थिति में खड़े होने, बैठने और लेटने में किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। कठिन आसन में सेक्स कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से सेक्स क्रिया में नयापन तो होता है लेकिन कभी-कभी इसमें मजा नहीं आता। सेक्स क्रिया में आनंद प्राप्त करने के लिए अलग-अलग आसन अपनाना चाहिए। सेक्स संबंध बनाने के लिए अपने साथी से यह अवश्य पूछना चाहिए कि किस आसन में उसे सेक्स संबंध बनाना अधिक अच्छा लगता है और फिर उसी आसन में सेक्स करना चाहिए।
यदि स्त्री गर्भवती हो तो ऐसी अवस्था में साधारण आसन में ही सेक्स क्रिया करनी चाहिए। यदि स्त्री 6 महीने की गर्भवती हो तो उसके साथ सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इससे जन्म होने वाले बच्चे पर प्रभाव पड़ सकता है।
सेक्स से पहले फोर प्ले के द्वारा स्त्री को उत्तेजित करने की आवश्यकता होती है। फोर प्ले के द्वारा जब स्त्री में उत्तेजना उत्पन्न हो जाए है तब सेक्स संबंध बनाया जा सकता है।
फोर प्ले में होने वाले कार्यः
फोर प्ले में मुख्य तीन क्रिया होती है- स्पर्श, आलिंगन और चुंबन। इस तीनों क्रियाओं द्वारा स्त्री को उत्तेजित करके सेक्स किया जाता है जिससे स्त्री और पुरुष दोनों को ही सेक्स का भरपूर आनन्द और सुख प्राप्त होता है।
स्पर्शः
सेक्स की शुरुआत स्पर्श द्वारा होती है। स्पर्श मात्र से ही स्त्री-पुरुष दोनों उत्तेजना का अनुभव करने लगते हैं। सेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से किया गया स्पर्श स्त्री को अत्यंत सुख देता है। स्त्री को मैथुन के बजाए स्पर्श से अधिक सुख मिलता है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स क्रिया के पहले स्त्री को विशेष रुप से किया गया स्पर्श उसे सेक्स के चरम आनंद का अनुभव कराता है। 
सेक्स क्रिया से पहले स्त्री के पूरे शरीर पर हल्के हाथों द्वारा सहलाने से त्वचा के नीचे स्थित तंत्रिकाओं में तेजी से खून दौड़ने लगता है और मन में सेक्स की इच्छा उत्पन्न होने लगती है। इस तरह मन में कामेच्छा उत्पन्न होने से मस्तिष्क में हार्मोन्स का स्राव होने लगता है जो तंत्रिकाओं के द्वारा प्रवाहित होते हुए कामांगों तक पहुंच जाता है जिससे सेक्स क्षेत्र यानी यौनांग उत्तेजित हो जाता है। सेक्स क्रिया से पहले स्त्री के शरीर पर हल्के-हल्के सहलाने से शरीर के सेक्स हार्मोन क्रियाशील होकर अपना काम तेजी से करने लगते हैं। 
• सेक्स क्रिया करने से पहले स्त्री के कामुक अंगों के छूने से उनमें उत्तेजना पैदा होती है। 
• सेक्स क्रिया में स्त्री को उत्तेजित करने के लिए आप अपने हाथों, चेहरे और होंठों से भी उसके कामुक अंगों को स्पर्श कर सकते हैं। 
• सेक्स क्रिया को सफल और आनंदित बनाने के लिए अपने हाथों से स्त्री के यौन उत्तेजक अंगों को हल्के हाथों से स्पर्श करना चाहिए। 
• चेहरे से स्त्री के उत्तेजक अंगों को स्पर्श करते हुए लम्बी-लम्बी गर्म सांस छोड़नी चाहिए। अपने होठों से भी स्त्री के यौन उत्तेजक अंगों को स्पर्श करना चाहिए। 
आलिंगनः
आलिंगन का अर्थ होता है लिपटना। सेक्स क्रिया के दौरान जब स्त्री-पुरुष एक-दूसरे को आलिंगन करते हैं अर्थात लिपटते हैं तो दोनों के शरीर में तेजी से उत्तेजना का संचार होने लगता है। सेक्स क्रिया के दौरान पुरुष जितना कसकर स्त्री को अपनी बांहों में भरता है स्त्री में यौन उत्तेजना उतनी ही अधिक होती है और स्त्री जितना अधिक उत्तेजित होती है सेक्स क्रिया से उतना ही अधिक शारीरिक व मानसिक आनंद प्राप्त होता है। इस तरह स्त्री को उत्तेजित करने के लिए उसे भरपूर और कसकर अपनी बांहों में भरना चाहिए।
• सेक्स क्रिया से पहले काम इच्छा को तेज करने के लिए स्त्री को पहले हल्के से अपनी बांहों में भरना चाहिए। इसके बाद जैसे-जैसे स्त्री में उत्तेजना बढ़ती जाए, वैसे-वैसे अपनी बांहों को कसते जाए। इस तरह बांहों में भरने से जब उसमें भरपूर उत्तेजना आ जाए तो फिर सेक्स क्रिया करनी चाहिए। 
• स्त्री को अपनी छाती से लगाकर अपनी दोनों बांहों से आलिंगन में भरने से भी उसमें उत्तेजना तेज होती है। इस तरह स्त्री को बांहों में भरने से वह काफी रोमांचित और उत्तेजित हो जाती है। 
• सेक्स के प्रति उत्तेजना पैदा करने के लिए स्त्री को अपनी बांहों में भरते हुए उसके स्तनों को हल्के से दबाना व सहलाना भी स्त्री में सेक्स उत्तेजना बढ़ाने की अच्छी क्रिया है।
• स्त्री को उत्तेजित करने के लिए उसे दोनों पैरों से जकड़कर उसकी कमर को अच्छी तरह दबाना चाहिए। 
• सेक्स क्रिया का अधिक आनन्द पाने के लिए आप अपने एक हाथ से स्त्री के गर्दन को आलिंगन करें और दूसरे हाथ से यौनांग को हल्के-हल्के सहलाएं। इस तरह सेक्स से पहले स्त्री के अंगों को छूने एवं सहलाने से भी स्त्री को बेहद आनन्द का अनुभव होता है।
• इसके अतिरिक्त स्त्री के स्तनों पर चेहरा रखकर अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को जकड़ने से भी स्त्री की कामोत्तेजना तेज होती है और फिर सेक्स करने से शारीरिक व मानसिक आनन्द का अनुभव होता है। 
• स्त्री को बांहों में भरने और गोद में उठाने से भी कामोत्तेजना तेज होती है जिसके बाद सेक्स क्रिया में स्त्री-पुरुष दोनों को ही शारीरिक व मानसिक सुख प्राप्त होता है। 
• सेक्स क्रिया का सही सुख प्राप्त करने के लिए स्त्री को पूरी तरह से बांहों में भरकर दबाना भी सेक्स सुख के लिए अच्छी क्रिया है। ऐसा करने से स्त्री की उत्तेजना तेज हो जाएगी और उसे सेक्स से पूर्ण संतुष्टि मिलेगी। 
चुंबनः
सेक्स क्रिया के समय जिस तरह स्पर्श और आलिंगन से स्त्री में उत्तेजना पैदा होती है उसी तरह चुंबन के द्वारा भी स्त्री में उत्तेजना उत्पन्न होती है। सही तरीके से चुंबन करने से स्त्री-पुरुष दोनों में ही सेक्स की उत्तेजना बढ़ती है। प्यार और जोरदार चुंबन में सेक्स उत्तेजना को बढ़ाने और आनंदित करने की शक्ति होती है। यौन विशेषज्ञों के द्वारा शोध करने पर पता चला है कि होठों द्वारा स्त्री के कामुक अंगों पर चुंबन करने से शरीर में सेक्स हार्मोन का रिसाव तेजी से शुरू होता है जिसकी वजह से स्त्री में उत्तेजना बढ़ने लगती है। स्त्री में सेक्स के लिए उत्तेजना बढ़ जाने से स्त्री-पुरुष दोनों को ही शारीरिक व मानसिक रूप से आनन्द मिलता है। यौन विशेषज्ञों के अनुसार चुंबन से शरीर में एड्रिनोसर्टिट्रसीफिक नामक रसायन का स्राव तेजी से होने लगता है जिससे शरीर में उत्तेजना बढ़ती है।
सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार चुंबन से शरीर का रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में सफेद कणों की कमी होने लगती है। नाड़ी की गति बढ़ जाती है। हृदय तेजी से कार्य करने लगता है। त्वचा के छिद्र खुल जाते हैं। स्तन का जोरदार चुंबन लेने से योनि में संकुचन उत्पन्न होने लगता है जिससे स्त्री में सेक्स की इच्छा तेज होती है। यौन विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स के समय अलग-अलग तरीके से लिया गया चुंबन सेक्स की उत्तेजना को ही नहीं बल्कि सेक्स की अनुभूति और आनन्द को भी बढ़ा देता है।
• सेक्स संबंध बनाने से पहले स्त्री को चुंबन करना चाहिए। पुरुष को चाहिए कि स्त्री के होंठों को पहले हल्के से छूकर चुंबन करें। 
• स्त्री को बांहों में भरकर उसके होंठों पर लंबा चुंबन लें। इस तरह किये जाने वाले चुंबन से स्त्री में तेज उत्तेजना पैदा होती है। 
• सेक्स क्रिया करने से पहले स्त्री को बांहों में भरकर अंग-अंग चूमें और बीच-बीच में हाथों से यौनांग को सहलाएं। 
• स्त्री के बंद होंठों का भरपूर चुंबन लेने से सेक्स उत्तेजना बढ़ती है। 
• स्त्री के होंठों को अपने मुंह में लेकर चुंबन करने से सेक्स उत्तेजना होंठों की त्वचा और श्लैष्मिक झिल्ली द्वारा सीधे यौनांग तक पहुंच जाती है। 
• यदि स्त्री के किसी खास अंगों को छोड़कर उसके पूरे शरीर का बार-बार चुंबन लें तो वह भरपूर उत्तेजित हो जाएगी। उसे सेक्स का खूब आनन्द मिलेगा। 
• आंखों को बन्द करके चुंबन लेने से सेक्स का रोमांच बढ़ता है। इसलिए सेक्स क्रिया में अधिक रोमांच के लिए आंखों को बन्द करके चुंबन करना चाहिए। 
• स्त्री का भगांकुर सबसे संवेदनशील अंग होता है और इस अंगों में चुंबन लेने से भरपूर सेक्स आनन्द मिलता है। इसके अलावा स्त्री के पूरे शरीर में गुदगुदी करने से भी उत्तेजना बढ़ती है। 
वैवाहिक जीवन के लिए सेक्स शिक्षा की आवश्यकताः
भारत में विवाह के लिए लड़की की आयु 18 वर्ष निश्चित किया गया है। जब लड़की 18 वर्ष की हो जाती है तो उसे विवाह के योग्य समझकर उसकी शादी कर दी जाती है। लेकिन विवाह के बाद सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सेक्स के महत्व को बहुत ही कम लड़कियां जानती हैं। समाज में फैली अज्ञानता और अशिक्षा के कारण लड़कियों को सेक्स का सही ज्ञान नहीं मिल पाता और इस अज्ञानता के कारण कभी-कभी वह वैवाहिक जीवन नष्ट कर बैठता है।
लेकिन जैसे-जैसे लड़कियां शिक्षित होने लगी है वैसे-वैसे लड़कियों में सेक्स को लेकर फैली अज्ञानता दूर होने लगी है। आज 50-55 प्रतिशत लड़कियां यह मानने लगी हैं कि स्त्री के लिए विवाहित जीवन में सेक्स (काम) का ज्ञान होना बेहद आवश्यक है। आज स्त्री-पुरुष दोनों ही इस बात को मानने लगे हैं कि विवाहित जीवन को सफल और सुखमय बनाने के लिए सेक्स का ज्ञान कितना आवश्यक है। विवाहित जीवन में काम संतुष्टि का जितना अधिकार पुरुष का है, उतना ही अधिकार स्त्री का भी है।
सेक्स की अज्ञानता के कारण उत्पन्न समस्याः
सेक्स की अज्ञानता के कारण विवाह के बाद की पहली सुहागरात के समय पति-पत्नी को काफी परेशानियां का सामना करना पड़ता है। कुछ सेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि विवाह के बाद सुहागरात के पहली मिलने में पति-पत्नी जब सेक्स संबंध बनाते हैं उस समय स्त्री को सेक्स का सही आनन्द नहीं मिल पाता या उस ओर स्त्री का ध्यान ही नहीं जाता। सेक्स अज्ञानता के कारण स्त्री के मन में सेक्स के लिए किसी प्रकार की कोई भावना उत्पन्न नहीं होती जिसका परिणाम यह होता है कि सेक्स संबंध के दौरान स्त्री को वह आनन्द, सुख एवं संतुष्टि न मिलती जो उसे सेक्स संबंधों से मिलनी चाहिए। इस तरह सेक्स संबंधों से संतुष्टि न मिलने का एक ही कारण है सेक्स की सही जानकारी का अभाव। ऐसा नहीं है कि स्त्रियों में सेक्स की इच्छा नहीं होती, उनमें सेक्स की इच्छा होती है लेकिन अधिकतर युवतियां वैवाहिक जीवन में सेक्स के महत्व को नहीं समझती। युवतियों के मन में वैवाहिक जीवन में सेक्स के महत्वों को न समझने का मात्र एक ही कारण है, सेक्स की अज्ञानता। ऐसी लड़कियां जो विवाहित जीवन के बाद सेक्स संबंधों को अधिक महत्व नहीं देती हैं, उन्हें यह पता नहीं होता कि वैवाहिक जीवन को सुखी और आनन्दित बनाने के लिए सेक्स संबंधों का कितना महत्व है।
सेक्स की जानकारी के अभाव में जो स्त्रियां अपने नवविवाहित जीवन में अपने पति के साथ सेक्स संबंध बनाने में साथ नहीं देती वह न केवल अपने पति को बल्कि वह स्वयं भी सेक्स संबंधों के सुख और आनन्द से वंचित रह जाती है। सेक्स के बारे में मेरी यही राय है कि सेक्स का वैवाहिक जीवन में उतना ही महत्व है जितना कि चाय में चीनी। जिस प्रकार चाय में चीनी न हो तो उसका स्वाद अजीब सा हो जाता है और यदि चाय में चीनी की मात्रा अत्यधिक हो जाए तो वह पी नहीं जा सकती है। उसी प्रकार यदि सेक्स (काम) को वैवाहिक जीवन से अलग कर दिया जाए तो उस जीवन का कोई महत्व नहीं रह जाता है। पति-पत्नी के बीच सेक्स संबंधों का अच्छा तालमेल न होने से जीवन व्यर्थ और आनन्द रहित मालूम होने लगता है। कामशास्त्री वात्स्यायन का कहना है कि जीवन में यदि सेक्स (काम) आवश्यकता से कम हो तो असंतुष्टि मालूम होती है और अधिक हो तो अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं।
यदि विवाह के बाद स्त्रियों को सेक्स (काम) से संतुष्टि न मिलने पर वे अनेक प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं। सेक्स की जानकारी न होने का ही परिणाम है कि स्त्री कभी-कभी चाहकर भी सेक्स क्रिया को आनन्दित और रोमांचित नहीं बना पाती। सेक्स की इन समस्याओं के बारे में कुछ विचारकों का कहना है कि सेक्स क्रिया में संतुष्टि न मिलने का कारण केवल पुरुष ही नहीं है बल्कि स्त्री भी होती है। सेक्स वैज्ञानिकों के अनुसार स्त्रियों में सेक्स की इच्छा कम होना, सेक्स के लिए जल्दी तैयार न होना या सेक्स इच्छा का समाप्त होना आदि मनोवैज्ञानिक कारण हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार सेक्स क्रिया में स्त्री-पुरुष दोनों को शारीरिक और मानसिक संतुष्टि तब तक नहीं मिलती जब तक सेक्स संबंध बनाने के लिए स्त्री खुले मन से पुरुष का साथ नहीं देती है।
यह जान लेना बेहद आवश्यक है कि जब स्त्री कामोत्तेजित होती है तो उसके मन और शरीर में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं।
स्त्रियों में सेक्स के लिए उत्तेजिक करनाः 
स्त्रियों और पुरुषों की कामेच्छाओं में बहुत अंतर होता है। पुरुष की शारीरिक संरचना और तंत्रिका तंत्र इस प्रकार निर्मित होती है कि पुरुष केवल स्मरण, कल्पना, स्पर्श या स्त्री के शरीर या चित्र को देखने से ही उत्तेजित हो जाता है। लेकिन स्त्रियों की कामेच्छा गहरी तन्द्रा में रहती है जिन्हें उत्तेजित करने के लिए सेक्स ज्ञान का होना आवश्यक है। स्त्रियों में सेक्स के प्रति उत्तेजना वे ही पुरुष जगा सकते हैं जिन्हें सेक्स का ज्ञान होगा। स्त्रियों और पुरुषों की कामेच्छा की यह भिन्नता उनके लैंगिग कार्यो में भिन्नता के मूल में स्थित होती है। स्त्री के जननांग संतान के प्रजनन और पोषण की दृष्टि से निर्मित होते हैं। प्रकृति के इस महान उद्देश्य में पुरुष एक छोटी सी भूमिका अदा करते हैं। सेक्स क्रिया पुरुष के अन्य कार्यों की ही तरह एक कार्यमात्र होता है जबकि स्त्री की यौन क्रिया उसका सम्पूर्ण भविष्य है और यह उसकी सम्पूर्ण सत्ता से संबंधित होता है।
स्त्रियों में सेक्स के प्रति जो उत्तेजना होती है वह सुप्त अवस्था में होती है जो पुरुषों द्वारा चुंबन लेने, बांहों में भरने, शरीर को सहलाने तथा छूने से जाग उठती है। जिन पुरुषों को सेक्स क्रिया करने से पहले अपनी स्त्री को उत्तेजित करने की कला नहीं आती है वे अपनी स्त्रियों को सेक्स सुख नहीं दे पाते। सभी पुरुष यह जानते हैं कि स्त्री के शरीर में कुछ अंग ऐसे होते हैं जिनका स्पर्श करने, चुंबन करने और मर्दन करने से स्त्री कामुक हो जाती है और सेक्स संबंध के लिए उत्तेजित हो जाती है।
इस बात को सभी सेक्स विशेषज्ञ मानते हैं कि स्त्री अपना पहला सेक्स संबंध कभी नहीं भूलती है। स्त्री अक्सर अपने जीवन में पहली बार बनाए गए सेक्स संबंधों को याद करती रहती है और सोचती रहती है कि अब हम उससे अच्छे सेक्स संबंध कभी नहीं बना पाऊंगी। स्त्रियों को अपना पहला सेक्स संबंध इसलिए याद रहता है क्योंकि वह उससे पहले कभी किसी पुरुष के साथ सेक्स संबंध नहीं बनाया होता है जिसके कारण उसे यौन क्रिया से होने वाले आनन्द व रोमांच का पता ही नहीं था। यही कारण है कि स्त्री अपना पहला सेक्स संबंध कभी नहीं भूलती।
सेक्स और चिकित्सा विज्ञान के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कुछ स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में, कुछ के डिम्ब निष्क्रमण के आस-पास तथा कुछ के मासिक-धर्म आरंभ होने के कुछ दिनों पहले यौनेच्छा अर्थात सेक्स संबंध बनाने की इच्छा उत्पन्न होती है। इन दिनों में स्त्रियों के मन में यौनेच्छा उत्पन्न होने का कारण यह है कि उनके जनन अंगों में हार्मोन की ताजा आपूर्ति होती है। स्त्री में उत्पन्न कामेच्छा के बारे में केवल बाहरी हाव-भाव से ही पता नहीं चलता बल्कि उसके भगोष्ठ, योनिमार्ग की दीवारें, गर्भाशय मुख और योनि प्रदेश सभी कामोत्तेजित हो जाते हैं। 
सेक्स ज्ञान की आवश्यकताः
आज के समय में जहां लोग चांद तक पहुंच गए हैं और फैशन अपने चरम सीमा पर पहुंच चुका है वहीं लोगों में आज भी सेक्स के प्रति अज्ञानता और अशिक्षा फैली है। यह उन सभी देशों के लिए दुर्भाग्य ही है, जहां के लोगों में आज भी सेक्स (यौन) शब्द को ही सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता। सेक्स के प्रति अज्ञानता होने के कारण ही लोग सेक्स के बारे में बाते करना भी अश्लीलता और बेहयाई मानते हैं। भारत जैसे विशाल अर्थव्यवस्था वाले देश में जहां लोग टेक्नालॉजी और पैसे के मामले में सबसे आगे होना चाहते हैं वहीं वहां के लोग आज भी सेक्स के बारे में अज्ञान हैं। देश में सेक्स शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है जहां लोगों को इसके बारे में सही जानकारी मिल सके। सेक्स शिक्षा की सही जानकारी न मिलने से लोगों में इसके बारे में गलत धारणएं उत्पन्न होने लगती हैं। कुछ लोगों में सेक्स के बारे में गलत जानकारी होने के कारण उनमें भ्रम और गलतफमियां पैदा हो जाती हैं जो जीवन में आगे चलकर परेशानी का कारण बन जाता है। इतना ही नहीं बल्कि आधे-अधूरे ज्ञान के कारण आने वाले समय में मानसिक तथा शारीरिक बीमारियां भी पैदा हो जाती हैं।
विश्व के सभी सेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि लड़के-लड़कियों को युवावस्था से पहले ही सेक्स से संबंधित शिक्षा दी जानी चाहिए। युवावस्था के समय यदि लड़के-लड़कियों को सेक्स के बारे में सही जानकारी दी जाए तो उन्हें विवाहित जीवन में किसी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा और अपने अधूरे ज्ञान के कारण विवाहित जीवन को बर्बाद करने से भी बच जाएगा। यदि उन्हें सेक्स का सही ज्ञान हो तो इस बात में कोई संदेह नहीं कि वे अपने वैवाहिक जीवन को रंगीन तथा सुखमय बनाने में समर्थ होंगे बल्कि सेक्स ज्ञान के कारण जनसंख्या वृद्धि रोकने में भी सक्षम होंगे। स्त्रियों में सेक्स के बारे में सही जानकारी होने से उसके जन्म लेने वाले बच्चे हृष्ट-पुष्ट और सुन्दर होते हैं तथा उसका मानसिक विकास भी ठीक तरह से होता है। अतः सेक्स वैज्ञानिकों का कहना है कि लड़के-लड़कियों को वैवाहिक जीवन से पहले सेक्स संबंधी शिक्षा का ज्ञान होना चाहिए। सेक्स संबंधी शिक्षा का ज्ञान होने से युवक-युवतियां यौन रोग, दोष तथा मानसिक विकारों से बचे रहने के साथ-साथ जीवन को सुखी बनाए भी रखते हैं।
भारत के प्रख्यात कामशास्त्री आचार्य वात्स्यायन का कहना था कि उन सभी लड़के-लड़कियों को यौन (सेक्स) की शिक्षा दी जानी चाहिए जो युवावस्था के शुरुआती दौर से गुजर रहे हों। सभी लड़के-लड़कियों को कामशास्त्र के बारे में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। लड़की को श्रृंगार संबंधी सभी जानकारी उसे अपने मायके में ही मिल जानी चाहिए। विवाहित सहेली, भाभी तथा विवाहित बहन से इसके बारे में लड़की को सेक्स के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए। सेक्स संबंधी अज्ञानता को दूर करने के लिए लड़की को स्वयं ही इस ओर ध्यान देना चाहिए।
आज के समय में युवक-युवतियों का स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन खराब होता जा रहा है उसका मात्र एक ही कारण है सेक्स शिक्षा का अभाव। वर्तमान समय में स्वास्थ्य में गिरावट केवल विवाहित स्त्री-पुरुष में ही नहीं आ रहा है बल्कि अविवाहित युवक-युवतियां भी इसका शिकार हो रही हैं। इस तरह स्वास्थ्य की खराबी का मूल कारण युवक-युवतियों में सेक्स के प्रति अज्ञानता। सेक्स शिक्षा (यौन शिक्षा) का अभाव में है। सेक्स शिक्षा के अभाव में युवक-युवती जब सेक्स करते हैं तब उसकी स्थिति पशु के समान हो जाती है और वे उस आनन्द को प्राप्त नहीं कर पाते जो उन्हें सेक्स संबंध से मिलना चाहिए। विवाहित जीवन को सुखी और आनंदमय बनाने के लिए कामशास्त्र का ज्ञान होना आवश्यक है। सेक्स ज्ञान सुखी व निरोग जीवन का मूल आधार है जिस पर परिवार व समाज का भविष्य निर्भर करता है। जिन नवविवाहित युवक-युवतियों को कामशास्त्र का ज्ञान नहीं होता वे अक्सर इसके अभाव में सेक्स सुखों को प्राप्त नहीं कर पाते हैं तथा जीवन भर कुंठाग्रस्त होकर अपने परिवारजनों को कोसते रहते हैं।
सेक्स शिक्षा युवक-युवतियों को न देने का मुख्य कारण है सेक्स शिक्षा का अश्लील मानना। लाज, शर्म तथा मर्यादावश माता-पिता अपने लड़के-लड़कियों को सेक्स का ज्ञान नहीं देना चाहते। यदि कोई युवक-युवती सेक्स संबंधों के बारे में अपने माता-पिता या परिजनों से जानकारी पाना चाहता है तो उसे कुछ न कुछ बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। इस तरह सेक्स संबंधी बातों के बारे में सही जानकारी न मिलने से युवक-युवती अक्सर अधूरा ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं और उसी को सही मान लेते हैं जिसका परिणाम जीवन में कभी भी अच्छा नहीं होता। इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को सेक्स से संबंधित जानकारी देने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। माता-पिता के द्वारा अपने बच्चे को सेक्स का सही ज्ञान न दे पाने का कारण है हमारा पारिवारिक माहौल तथा हमारे संस्कार। अतः देश में सेक्स शिक्षा की व्यवस्था आवश्यक होनी चाहिए ताकि युवक-युवतियां गलत जानकारी प्राप्त कर अपनी वैवाहिक जीवन नष्ट करने से बच जाए।
सेक्स वैज्ञानिक डॉ. रिचार्ड के अनुसार यदि माता-पिता युवा वर्ग के बच्चे को सेक्स विज्ञान की जानकारी दे तो इस ज्ञान का उसके जीवन पर सही प्रभाव पड़ सकता है। सेक्स संबंधी यह ज्ञान ही उसके जीवन की सफलता की सबसे बड़ी उपलब्धि बन सकती है। ऐसी स्त्रियां जो कामशास्त्र संबंधी साहित्यों का अध्ययन किए हैं वे अपने बच्चों की सर्वाधिक कुशल शिक्षिका बन सकती हैं। काम तथा गर्भधारण एवं प्रसव तथा बच्चों के पालन-पोषन की जो जानकारी अपनी पुत्री को एक मां दे सकती है वह जानकारी उसे कोई अन्य नहीं दे सकता। 
सेक्स संबंधों के विषय में भारत की तुलना किसी दूसरे देश से करने पर पता चलता है कि दूसरे देशों के तुलना में भारत की स्थिति बिल्कुल अलग है। इस देश में आज भी लोग सेक्स संबंधों को न तो अच्छा मानते हैं और न ही बुरा मानते हैं। यहां के लोग न हीं सेक्स के बारे में जानकारी रखते हैं और न ही अपने बच्चे को इसकी जानकारी देना पसंद करते हैं। वे अक्सर अपने बच्चों को सेक्स का ज्ञान देने से डरते हैं और इसका कारण उनकी परम्परा और संस्कृति है। संसार में बहुत से ऐसे देश है जहां बच्चों को सेक्स के बारे में अन्य विषयों की तरह ही अध्ययन कराया जाता है। सेक्स संबंधों के मामले में जापान की स्थिति इन सभी देशों से विपरीत है। जापान में बचपन से ही सेक्स की जानकारी दी जाती है। सेक्स संबंधी जानकारी बच्चों को उनके माता-पिता तथा स्कूल के द्वारा दी जाती है। वहां कि सड़कों पर खुलेआम कामुक फोटो बेची जाती है जिनमें अधिकतक फोटो ऐसे होते हैं जिनमें सेक्स के विषय में जानकारी भी प्राप्त होती है। खुली सेक्स एजुकेशन का ही कारण है कि पश्चिमी देशों के लोग न्यूड फिल्म देखने की बजाए मैच देखने में ज्यादा दिलचस्पी लेते हैं। पश्चिमी देशों के लोग अपने बच्चों को सेक्स का ज्ञान देते हैं और उनके विवाह के अवसर पर उन्हें सेक्स एलबम देते हैं तथा उन्हें सेक्स का महत्व इन चित्रों के माध्यम से भी बताते हैं। इस तरह सेक्स के बारे में खुली जानकारी के कारण युवक-युवतियों के दिलों-दिमाग पर प्रभाव पड़ता है जिसका परिणाम यह होता है कि वे काम विकृति का शिकार नहीं होते और उनका जीवन सरल, सुखमय और आनन्दित बना रहता है। अतः बच्चों को सेक्स संबंधी आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। ऐसा करने से वे न केवल गुमराह होने से बच जाएंगे बल्कि उनका वैवाहिक जीवन भी आनन्द और सुखमय व्यतीत होगा।
सेक्स के बारे में अफवाहें
सेक्स के बारे में जो लोग यह सोचते हैं कि सेक्स केवल स्त्री-पुरुष का शारीरिक मिलन है तो यह बिल्कुल गलत है। इस तरह की सोच से ही पता चलता है कि उन लोगों में सेक्स ज्ञान का कितना अभाव है। सेक्स का अर्थ केवल लिंग और योनि का मिलन ही नहीं है बल्कि इसका संबंध शरीर के विभिन्न अंगों और मस्तिष्क से है। यदि कोई युवक या युवती सेक्स को केवल मैथुन की दृष्टि से देखते हैं तो उसे समझना चाहिए कि मैथुन सेक्स क्रिया का मात्र एक हिस्सा है। यदि स्त्री पुराने विचारों वाली या संकोची स्वभाव की है तो उससे सेक्स के बारे में खुलकर बातें करनी चाहिए और उसके अन्दर सेक्स की इच्छा को जागृत करनी चाहिए। यदि सेक्स केवल स्त्री-पुरुष की शारीरिक क्रिया होती तो सेक्स के समय मानसिक सुख प्राप्त करने के लिए स्त्री अपने स्तनों को सहलाने और चूमने के लिए पुरुष को नहीं कहती। सेक्स संबंधों के दौरान स्त्री के स्तनों और अन्य कामुक अंगों को सहलाने भर से ही उसे चरम आनन्द प्राप्त होने लगता है जो अक्सर सेक्स के बाद भी नहीं मिलता। 
विभिन्न आयु में सेक्स 
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13-14 साल की उम्र में सेक्स -
वैसे देखा जाए तो 13-14 वर्ष की आयु में पुरुष में सेक्स करने की इच्छा होने लगती है। सेक्स की इच्छा होना एक ऐसी प्रक्रिया है जो धीरे-धीरे होता है और जब इसकी जिज्ञासा तथा रुचि बढ़ने लगती है तो मन में विचार आने लगता है कि लड़कियों की शरीर की बनावट कैसी होती है, सेक्स कैसे किया जाता है, लड़कियों के मन में सेक्स करने की इच्छा होती है या नहीं आदि।
15-16 साल की उम्र में सेक्स -
जब पुरुष 15 से 16 वर्ष की उम्र में पहुंचता है तो उसको सेक्स करने की इच्छा और भी तेज होने लगती है और मन में सेक्स क्रिया की कल्पना होने लगती है। इस समय में पुरुष को लड़कियों के साथ सेक्स करने की इच्छा इतनी तेज होने लगती है कि उसके मन में हर वक्त सेक्स, सेक्स, सेक्स लगा रहता है और इसके सिवा उसे कुछ भी नहीं सूझता। जब उसकी यह इच्छा पूरी नहीं होती है तो उत्तेजना के कारण से उसे स्वप्नदोष होने लगता है। बहुत से लड़के तो ऐसे भी होते हैं जो अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए हस्तमैथुन करने लगते हैं।
18 साल से ऊपर की उम्र में सेक्स -
जब पुरुष 18 वर्ष की उम्र को पार करता है तो उसकी सेक्स उत्तेजना बहुत तेज हो जाती है। इस उम्र में अक्सर पुरुष को अपने जननांगों में भरपूर उत्तेजना तथा उत्थान महसूस होने लगता है। मन में सेक्स से संबंधित कई प्रकार के विचार आते रहते हैं और जब कामोत्तेजक बात सुनते या कामुक दृश्य देखते तो तुरंत ही कामुक हो उठते हैं।
20 साल से ऊपर की उम्र में सेक्स -
जब पुरुष 20 वर्ष की उम्र में होता है तो वह सेक्स की पूर्ति के लिए किसी भी स्त्री या लड़की से सेक्स संबंध बनाने के लिए दोस्ती कर लेता है। बहुत से पुरुष तो ऐसे होते हैं कि वे हस्तमैथुन करने लगते हैं और इस कारण से हीनभावना का शिकार हो जाते हैं। इस वजह से उनकी पर्सनैलिटी और कैरियर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। हम आपको यह बता देना चाहते हैं कि इस उम्र में अपनी सेहत के प्रति अधिक ध्यान देना चाहिए तभी तो आपकी बढ़ती उम्र के साथ सेक्स पॉवर बनी रह सकती है।
वैसे देखा जाए तो इस उम्र के पुरुषों को कोई सेक्स समस्या नहीं उत्पन्न होती है लेकिन उनके मन में उत्पन्न भ्रम तथा धारणाओं के कारण से उन्हें शीघ्रपतन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा भी उन्हें सेक्स से संबंधित चिंता तथा सेक्स रोग हो सकते हैं।
20 वर्ष की उम्र में होने वाले सेक्स से संबंधित रोग-
1. शीघ्रपतन- 20 साल की आयु में यह रोग अधिकतर पुरुषों को होते हुए देखा गया है। जब इस उम्र का पुरुष किसी से सेक्स संबंध बनाता है तो वह काफी घबराया हुआ रहता है। इस उम्र के बहुत से पुरुषों को तो सेक्स के बारे में ठीक से जानकारी भी नहीं रहती है और ऐसी स्थिति में जब उसमें काफी तेज कामोत्तेजना होती है तो वह अपने आप पर काबू नहीं रख पाता और शीघ्रपतन का रोगी हो जाता है।
इस रोग से पीड़ित पुरुष को यह चाहिए कि बहुत उतावले होकर सेक्स क्रिया न करें और मन से सभी प्रकार का भय निकाल दें, अपने आप पर भरोसा रखे, खुद पर काबू रखे। ऐसा करने से शीघ्रपतन की समस्या दूर होने लगेगी।
2. सेक्स क्रिया संबंधी चिंता होना – बहुत से पुरुषों को सेक्स क्रिया करते समय घबराहट होती है। ऐसा अधिकतर इसलिए होता है कि वह खुद तो इसके अनुभव से अंजान रहता है तथा वह दोस्तों द्वारा दी गई गलत जानकारी की वजह से और भी गलती कर बैठता है।
सेक्स क्रिया संबंधी चिंता को दूर करने के लिए उपाए- 
1. इस उम्र के पुरुषों को चाहिए कि वे सेक्स क्रिया संबंधी चिंता को अपने मन से निकाल दे और फिर सेक्स संबंध बनाए।
2. सेक्स क्रिया करते समय किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें।
3. सेक्स क्रिया करते समय जब आप स्त्री की योनि में लिंग को प्रवेश करके घर्षण करें तो स्ट्रोक जल्दी-जल्दी न लगाएं क्योंकि ऐसा करने से शीघ्रपतन हो सकता है।
4. अपने मन में यह भाव लाए कि मैं अपनी पत्नी को पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता हूं।
सेक्स रोग –
20 वर्ष की उम्र के युवक के शरीर में हार्मोनों के समुचित स्राव होता है जिस कारण से उनमें सेक्स के प्रति अधिक जोश तथा उत्तेजना होती है। ऐसे युवक अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए कहीं भी और किसी भी युवती से सेक्स संबंध बनाने की गलती कर बैठते हैं, जिस कारण से उन्हें कई प्रकार के सेक्स रोग हो जाते हैं। इसलिए कहीं भी और किसी भी या अंजान स्त्री से सेक्स संबंध न बनाए।
30 साल की उम्र में सेक्स –
इस आयु के पुरुषों को सेक्स से संबंधित कुछ शिकायतें होने लगती हैं। इन पुरुषों को यह रोग होने का अधिकतर कारण जिम्मेदारियां तथा तनाव होता है। वे यह सोचते हैं कि बच्चे बड़े होने लगे हैं, अब इनकी शादियां करनी चाहिए, उनके भविष्य की चिंता, रोजगार, पढ़ाई-लिखाई तथा काम का तनाव होने लगता है, इस प्रकार के कारणों से सेक्स करने की इच्छा में कमी आ जाती है तथा कमजोरी भी आ जाती है। इस अवस्था में ऐसी सोच को मन से निकाल देना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से वे अपनी पत्नी को तो नाराज करते ही हैं तथा अपनी वैवाहिक जीवन को भी बर्बादी की राह पर ला देते हैं। अतः अपनी इन सारी समस्याओं का ठीक प्रकार से हल करें।
30 साल की उम्र में सेक्स इच्छा का अभाव होना –
इस उम्र में बहुत से पुरुषों को सेक्स करने की इच्छा में कमी आ जाती है तथा तनाव आ जाता है। यदि किसी पुरुष को सेक्स करने की इच्छा कम हो तो उसे अपनी इस इच्छा को तेज करने का प्रयास करना चाहिए और सेक्स की ओर ध्यान देना चाहिए।

सेक्स क्रिया में अधिक आनन्द लेने के तरीके 
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परिचय- 
सेक्स क्रिया को लम्बे समय तक खींचने के लिए कुछ विशेष तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है जो सेक्स के आनन्द को कई गुना बढ़ा देती है। आज कई प्रकार के वैज्ञानिक शोधों से यह ज्ञात हो चुका है कि लगभग 85 प्रतिशत पुरुषों का वीर्यपात सेक्स क्रिया के दौरान दो मिनट में ही हो जाता है। कुछ तो ऐसे भी पुरुषों का पता चला है कि वे 10 से 20 सेकण्ड में ही और कुछ योनि में लिंग को प्रवेश करने के बाद ही स्खलित हो जाते हैं। कुछ तो ऐसे भी होते हैं जो योनि में लिंग को प्रवेश कराने से पहले ही आलिंगन चुम्बन के समय ही स्खलित हो जाते हैं। ऐसे पुरुष कभी भी अपने पत्नी को सेक्स क्रिया का भरपूर आनन्द नहीं दे पाते। इस स्थिति में ऐसे पुरुष वैद्य-हकीमों के चक्करों में पड़कर अपने धन तथा स्वास्थ्य को भी नष्ट कर देते हैं।
पुरुषों के शीघ्रपतन को दूर करने के लिए बहुत से चिकित्सकों ने कई तरीकों की खोज की है। इन तरीकों को सावधानी से अपनाने से शीघ्रपतन की समस्या से बचा जा सकता है और सेक्स क्रिया का भरपूर आनन्द भी लिया जा सकता है।
सेक्स क्रिया करने के कुछ तरीके निम्न हैं- 
1. सेक्स क्रिया करने से पहले स्त्री को पूरी तरह से उत्तेजित करना चाहिए। जब स्त्री पूरी तरह से उत्तेजित हो जाए तब उसके साथ संभोग करना चाहिए और कुछ देर तक अपने लिंग को स्त्री की योनि में डालकर झटके (स्ट्रोक) लगायें तथा इसके बाद कुछ देर के लिए हट जाएं। इसके बाद फिर से स्त्री की योनि के मुख (भगनासा) को खोले और दुबारा स्ट्रोक लगाकर-लगाकर घर्षण करें। इस प्रकार से दो से तीन बार सेक्स क्रिया करें। इससे स्त्री-पुरुष दोनों को भरपूर आनन्द मिलेगा। इस प्रकार पूर्ण रूप से आनन्द लेते-लेते एक समय ऐसा आयेगा जब आप स्खलित हो जायेंगे और आपको पूर्ण आनन्द मिलेगा। इस तरह से सेक्स क्रिया करने से स्त्री कई बार चरम सुख प्राप्त करती है और लम्बे समय तक सेक्स क्रिया भी चलती है। 
2. सेक्स क्रिया करते समय स्खलन होने से पहले ही लिंग को योनि से बाहर निकाल दें और शरीर को एकदम ढीला छोड़ दें। इसके कुछ देर बाद फिर से सेक्स क्रिया करने लगे। इस प्रकार से सेक्स क्रिया करते समय बीच में ही स्खलित होने की स्थिति बन जाए तो जबर्दस्ती अपने वीर्य को रोके नहीं क्योंकि इससे शारीरिक कमजोरी उत्पन्न होती है। इस स्थिति में संभोग करते समय स्खलित होने के कुछ देर बाद अपने को फिर से सेक्स क्रिया के लिए तैयार करें। 
3. सेक्स क्रिया करते समय पुरुष को चाहिए कि स्त्री की योनि में लिंग प्रवेश करके स्ट्रोक लगाने में जल्दबाजी न करें क्योंकि इससे जल्दी ही स्खलन हो जाता है। अतः स्ट्रोक धीरे-धीरे लगायें। ऐसा करने से सेक्स क्रिया लम्बे समय तक चलती है। स्ट्रोक लगा-लगाकर घर्षण करते समय अपने मन में स्ट्रोक की गिनती करते जाएं और जब स्खलन होने लगे तब स्ट्रोक लगाना बंद कर दें। फिर अपनी आंखों को बंद करके शरीर को ढीला छोड़ दें। इसके कुछ देर बाद स्ट्रोक लगा-लगाकर घर्षण करना शुरू कर दें और गिनती गिनते जाएं। 
4. यदि किसी व्यक्ति को शीघ्रपतन की शिकायत हो तो वह सेक्स क्रिया करने से एक दो घंटे पहले हस्तमैथुन करके वीर्य को निकाल दे। इसके बाद जब आप सेक्स क्रिया करेंगे तो उस समय शीघ्रपतन का भय नहीं रहेगा और लम्बे समय तक सेक्स क्रिया का आनन्द भी ले सकेंगे। 
5. सेक्स क्रिया करते समय लंबी-लंबी सांसे लेने की आदत डालें। इससे सेक्स क्रिया में पूर्ण रूप से आनन्द मिलता है। 
6. अगर सेक्स क्रिया करते वक्त स्खलन का एहसास हो तो किसी दूसरी चीज की ओर अपना ध्यान लगाएं, इससे स्खलन होने की संभावना रुक जाती है। इसके कुछ देर बाद फिर से सेक्स क्रिया करने लगे। इस तरह की क्रिया कई बार करें। इससे भरपूर आनन्द मिलेगा। 
7. सेक्स क्रिया के दौरान वीर्य स्खलन होने की स्थिति उत्पन्न हो जाए तो अपनी गुदा को संकुचित कर लें और कुछ समय तक इसी अवस्था में रुके रहे हैं। इससे स्खलन की स्थिति रुक जाती है। 
8. संभोग करते वक्त जब योनि को लिंग में प्रवेश करें तब उस समय अपनी गुदा को संकुचित कर लें और लिंग के स्नायुओं को भी सिकोड़ लें। इस स्थिति में रहने के साथ ही स्ट्रोक लगा-लगाकर घर्षण करें। इस तरीके से सेक्स क्रिया लम्बे समय तक बनी रह सकती है। 
9. यदि आपको शीघ्रपतन की शिकायत हो तो सेक्स क्रिया करने से लगभग 10-15 मिनट पहले लिंग के मुंड पर जायलोकेन मलहम लगा लें। ऐसा करने से लिंग मुंड की त्वचा में संवेदनशीलता खत्म हो जाती है और शीघ्रपतन नहीं होता है। 
10. यदि सेक्स क्रिया करने से पहले यह पता लग जाए कि लिंग मुंड संवेदनशील हो गया है तो उस पर टेल्कम पाउडर लगा दें। इससे संवेदनशीलता खत्म हो जाती है।
11. लिंग में अधिक उत्तेजना होने के कारण से वह अधिक टाइट हो गया हो तो इस पर रबड़ बैंड चढ़ा लें, ध्यान रहे कि रबड़ बैंड अधिक कसा न हो और न ही अधिक ढीला, क्योंकि ऐसा करने से लिंग में खून का बहाव लंबे समय तक रहेगा और सेक्स क्रिया देर तक चलेगी। 
12. सेक्स क्रिया करते समय जब वीर्य स्खलन होने की स्थिति उत्पन्न होने लगे तो स्ट्रोक लगाकर घर्षण करने का काम बंद कर दें और तुरंत अपनी जननन्द्रियों को पेट के अन्दर की तरफ खींचे। इस स्थिति में जननेन्द्रियों को तब तक खींचे रखें जब तक वीर्य स्खलन की स्थिति खत्म न हो जाए। इसके कुछ समय बाद स्ट्रोक लगाना शुरू कर दें। इस प्रकार से क्रिया करने से सेक्स क्रिया का समय देर तक बना रहता है। इस तरीके से संभोग करने की कला को योनिमुद्रा कहते हैं। 
13. सेक्स क्रिया करते समय यदि वीर्य स्खलन की स्थिति उत्पन्न हो जाए तो इसको रोकने के लिए अपने फेफड़े की भरी हुई वायु को जोर से बाहर की ओर फेंके। ऐसा करने से वीर्य स्खलन को रोकने में लाभदायक प्रभाव देखने को मिलता है। इससे स्खलन की अनुभूति भी गायब हो जाती है। इसके बाद दुबारा से सेक्स क्रिया करना शुरू करें। इस प्रकार से सेक्स क्रिया के दौरान कई बार दोहरा भी सकते हैं। इस तरीके से सेक्स क्रिया करने से संभोग कला का समय बढ़ जाता है। 
14. वीर्य स्खलन होते समय जितना अपने पेट को अन्दर खींच सकते हो खींचे और सांस को अन्दर की ओर न लें बल्कि अन्दर की सांस को बाहर की ओर फेंके। पेट को अन्दर की ओर खींचने से खाली जगह बन जाती है और काम केंद्र के आस-पास की शक्ति नाभि की ओर आ जाती है तथा वीर्य स्खलन होना रुक जाता है। 
15. सेक्स क्रिया करते समय नाक के दांये भाग से सांस लेते रहें, इससे सेक्स क्रिया लम्बे समय तक चलती है। नाक के बांये भाग से सांस न लें क्योंकि यह भाग ठंडा होता है और ऐसा करने से सेक्स शक्ति में कमी आती है। नाक के दांये भाग से सांस लेने के लिए अपने दाएं हाथ की मुट्ठी बायें बगल में रखकर बगल को जोर-जोर से दबाएं और करवट लेट जाए। इस प्रकार से क्रिया करने से दायां स्वर चालू हो जाएगा। 
सेक्स क्रिया के दौरान जल्दी वीर्यपात होने के कुछ कारणों की खोज-
भय-
सेक्स संबंधों के दौरान मन में भय होने से भी जल्दी वीर्यपात हो सकता है। अतः इसको दूर करने के लिए भय होने के मूल कारणों को जानना बहुत जरूरी है। यदि इसके होने के कारणों को पता लग जाए तो भय से मुक्ति पाना आसान हो जाता है। जीवन में भय अगर अधिक हो तो इसके घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं क्योंकि भय से अनेक गंभीर, घातक तथा असाध्य रोग उत्पन्न होते हैं। अधिकांश रोगों के होने के कारण तो मुख्य रूप से भय ही होता है। कुछ लोग तो ऐसे भी देखे गये हैं कि वे सांप के काटने के भय से ही मृत्यु के मुंह में चले जाते हैं।
भय एक ऐसी मानसिक बीमारी का रूप धारण कर लेती है जिसके कारण सेक्स क्रिया से संबंधित रोग होने के अलावा व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। उदाहरण के लिए- चार-पांच साल पहले एक किसान खेत में पानी दे रहा था तभी किसी कीड़े ने उसके पैर में काट लिया और कटे हुए स्थान से खून निकलने लगा। इसके बाद उसने खेत में इधर-उधर ध्यान से देखा लेकिन वहां पर कुछ भी दिखाई नहीं दिया। इसके बाद वह घर पर आया और कटे हुए स्थान पर पट्टी बांध ली। कुछ दिनों बाद जब वह दुबारा से खेत में पानी देने के लिये गया तो उसने वहां पर एक सांप देखा। सांप को देखकर उसके मन में विचार आया कि पिछली बार शायद पानी देने के दौरान इसी सांप ने काटा था और यही बात उसके मन में बैठ गयी। इसी भय के कारण किसान ने चारपाई पकड़ ली। कुछ समय बाद ही भय के कारण उसकी मृत्यु हो गई। इस कहानी से स्पष्ट होता है कि भय के कारण मृत्यु भी हो सकती है।
शीघ्रपतन से पीड़ित रोगी को कभी भी यह नहीं सोचना चाहिए कि मेरे सामने केवल दो विकल्प हैं। पहला यह कि मुझे कभी भी यह बीमारी ठीक नहीं हो सकती है तथा दूसरा यह की मेरे इस रोग को केवल वैद्य और हकीम ही ठीक कर सकते हैं। इस प्रकार सोचने के कारण से यह रोग बढ़ता ही जाता है तथा रोगी वैद्य और चिकित्सक के चक्कर में फंसकर अपने धन तथा स्वास्थ्य को बरबाद कर लेते हैं।
शीघ्रपतन को दूर करने के लिए इसके कारणों को जनना बहुत जरूरी हैं, शीघ्रपतन के निम्न कारण होते हैं-
1. हस्तमैथुन– कुछ लोगों में सेक्स क्रिया के प्रति इतनी तेज उत्तेजना होती है कि वे बचपन से ही हस्तमैथुन करके अपने वीर्य को नष्ट करते रहते हैं, जिसके कारण से वे शीघ्रपतन का शिकार हो जाते हैं। उन्हें यह भी भय हो जाता है कि वीर्य नष्ट होने का सबसे बड़ा कारण शीघ्रपतन है। जबकि इस भय को मन से निकाल देना चाहिए क्योंकि वीर्य न तो किसी थैली में जमा होता रहता है और न ही वह खून में मिलकर शरीर को बलवान बनाता है। किशोरावस्था में लोग कुछ समय तक हस्तमैथुन करके अपनी उत्तेजना को शांत कर लेते हैं, यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। वैसे देखा जाए तो यह एक अप्राकृतिक प्रक्रिया है जो नहीं करना चाहिए लेकिन फिर भी मानसिक तनाव तथा सेक्स क्रिया की उत्तेजना को शांत करने के लिए हस्तमैथुन कर लेना न तो कोई अनैतिक कार्य है और न ही इससे शरीर कमजोर होता है। अतः कहा जा सकता है कि हस्तमैथुन का भय पूर्ण रूप से काल्पनिक होता है। यदि इस भय से मुक्ति मिल जाए तो शीघ्रपतन से छुटकारा मिल सकता है। वैसे देखा जाए तो हस्तमैथुन सुनने और पढ़ने में कुछ अजीब सा लगता है कि हस्तमैथुन के द्वारा किस प्रकार से शीघ्रपतन को रोका जा सकता है? या हस्तमैथुन के द्वारा संभोग कला के समय को बढ़ाया सकता है? लेकिन शीघ्रपतन को दूर करने का वह तरीका है जिसको पति-पत्नी संभोग करते समय प्रयोग करें तो लाभ मिलेगा। इस क्रिया में पति चाहे तो हस्तमैथुन का प्रयोग करना आरम्भ कर दे लेकिन यह क्रिया स्खलन तक जारी न रखे। यदि पति स्वयं हस्तमैथुन कर रहा है तो उसे इस क्रिया को तब बंद कर देना चाहिए जब वह स्खलन बिंदु तक पहुंचने वाला हो, इस स्थिति में जब स्खलन की स्थिति टल जाए तो कुछ समय तक आराम करना चाहिए। फिर इसके बाद इस क्रिया को दुबारा से करें। ऐसा करने से शीघ्रपतन की समस्याएं दूर होने लगेंगी और संभोग क्रिया करने के प्रति आत्मविश्वास भी जागेगा। इस प्रकार से संभोग के समय को बढ़ाने से सेक्स क्रिया के समय में वृद्धि होती है। इस क्रिया को पति अपनी पत्नी से भी करा सकता है। लेकिन इस क्रिया को पत्नी से कराने पर सावधान रहना चाहिए। पत्नी से हस्तमैथुन कराते समय अपने स्खलन के समय पर ध्यान रखना चाहिए तथा जैसे ही स्खलन होने को हो वैसे ही अपनी पत्नी को कुछ भी हरकत करने से मना कर देना चाहिए। इसके बाद कुछ देर तक आराम करना चाहिए और फिर से पत्नी को यही क्रिया करने के लिए करना चाहिए। इस क्रिया को चार-पांच बार करना चाहिए। इस प्रकार से सेक्स क्रिया करने से संभोग का समय लम्बा जाता है। 
2. स्वप्नदोष- स्वप्नदोष का भय भी शीघ्रपतन होने का कारण हो सकता है। इससे 11 से 18 वर्ष के बालकों तथा युवकों को बहुत अधिक परेशानी होती है तथा उनमें हीन भावना भी पैदा कर देती है। स्वप्नदोष एक प्रकार की सेफ्टीवाल्व की प्रक्रिया है। प्रकृति ने मनुष्यों में वीर्य के उत्पादन तथा संचयन में तालमेल रखने के लिए स्वचालित तनाव मुक्ति (आटो टेंशन रिलीज) की शक्ति प्रदान की है। यदि ऐसा न होता तो युवक अनेक रोगों से ग्रस्त हो जाते। यहां यह जानना बहुत आवश्यक है कि बहुत से ऐसे भी व्यक्ति देखे गये हैं जो विवाहित हैं फिर भी अपनी पत्नी से बहुत दिनों तक संभोग न करने के कारण स्वप्नदोष से पीड़ित हो जाते हैं। कभी-कभी तो अधेड़ उम्र के लोगों को भी स्वप्नदोष हो जाता है क्योंकि नाती-पोते वाले हो जाने के कारण से वे अपनी पत्नी को संभोग क्रिया के लिए समय नहीं दे पाते जिसके कारण से कभी-कभी उन्हें स्वप्नदोष हो जाता है। सेक्स क्रिया की अधिक चिंता करने के कारण व्यक्ति बार-बार कामोत्तेजित हो जाते हैं जिसके कारण से वे हस्तमैथुन करने की कोशिश करते हैं और जब वे इससे भी अपनी उत्तेजना को शांत नहीं कर पाते हैं तो प्राकृतिक स्वप्नावस्था में उनको मानसिक तनाव एवं उत्तेजना होकर यह क्रिया हो जाती है। अतः कहा जा सकता है कि स्वप्नदोष से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। देखा जाए तो यह मानसिक संतुलन को बनाये रखने के लिए मात्र एक स्वचालित प्रक्रिया है। इसलिए सकारात्मक सोच से आत्मविश्वास में दृढ़ता आती है तथा भय अपने आप ही दूर हो जाता है। इस सोच को अपनाने से भय आत्मविश्वास के सामने टिक नहीं पाता है। इस प्रकार भय को खत्म करने के लिए मन में बार-बार सकारात्मक सोच अपनाना चाहिए और मन में हमेशा यह विचार बनाये रखना चाहिए कि स्वप्नदोष को मानसिक और शारीरिक कमजोरी नहीं है, मैंने कोई गलत काम नहीं किया है, मुझमें पौरुष शक्ति की कोई कमी नहीं है, सेक्स क्रिया करने की मुझमें पूरी शक्ति विद्यमान है। इस प्रकार की भावना जैसे-जैसे मन में आती जाएगी वैसे-वैसे स्खलन पर नियंत्रण भी होता जाएगा। 
3. लैंगिक उत्तेजना के समय पारदर्शी तरल पदार्थ आना- कई युवक तो ऐसे भी होते हैं जो लैंगिक उत्तेजना के समय में रंगहीन पारदर्शी तरल पदार्थ से भयभीत हो जाते हैं। इस प्रकार के पारदर्शी तरल पदार्थों को देखकर वे सोचने लगते हैं कि उनमें किसी प्रकार की कमजोरी तो नहीं है। वे यह भी सोचने लगते हैं कि इस कमजोरी के कारण ही वीर्य इतनी जल्दी-जल्दी बार-बार आ रहा है। लेकिन देखा जाए तो यह पारदर्शी तरल पदार्थ वीर्य नहीं होता है। यह तो केवल वह तरल पदार्थ है जो काउपर ग्रंथि से निकलने वाला मात्र एक तरल पदार्थ है जो लिंग के मूत्रमार्ग को चिकना करने की स्वचालित प्रक्रिया है। यह धीरे-धीरे रिसता हुआ निकलता रहता है। अगर प्रकृति ने यह क्रिया न दी होती तो वीर्य स्खलन के समय हमारा मूत्रमार्ग कई जगह से छिल जाता है और मूत्र त्याग करते समय दर्द तथा जलन होती है। वीर्य स्खलन के समय इसका वेग काफी तेज होता है, यह भी प्रकृति का ही वरदान है। वीर्य इतनी तेज गति से बाहर इसलिए निकलता है ताकि वह सीधे गर्भाशय के मुख से सम्पर्क करें और शुक्राणु सरलतापूर्वक गर्भाशय के अंदर पहुंचकर डिम्ब से सम्पर्क कर सकें। 
गहरी तथा नियंत्रित सांस लेने की तकनीक-
सेक्स क्रिया के समय भरपूर आनन्द लेने के लिए उत्तेजना के समय गहरी एवं समुचित ढंग से सांस लेने का अभ्यास करना चाहिए। वैसे देखा जाए तो संभोग के समय सांस की गति बढ़ जाती है और उत्तेजना की तीव्रता के साथ सांस की रफ्तार भी तेज हो जाती है। सेक्स करते समय पति को चाहिए कि स्वाभाविक रूप से गहरी सांस ले और कुछ सेकण्ड तक सांस को भीतर ही रोके रखें तथा फिर धीरे-धीरे सांस को छोड़ें। इस क्रिया को चार से पांच बार दोहराने से पति को अहसास होने लगेगा कि उसके शरीर और मन से तनाव गायब हो चुका है। इसके बाद कुछ समय तक आराम करने के बाद फिर से इस क्रिया को दोहराना चाहिए। इस प्रकार से सेक्स क्रिया करने से पति को अहसास होगा कि सेक्स उत्तेजना पर नियंत्रण रखने में उसे पहली सफलता मिल गई है। इस क्रिया से सेक्स करने से वीर्य स्खलन केंद्र पर नियंत्रण हो जाएगा और मन का भय भी समाप्त हो जाता है। इसके साथ ही मानसिक तनाव दूर हो जाने पर कामांग भी स्वाभाविक रूप से कार्य करने लगेंगे। 
कभी-कभी बहुत से व्यक्तियों के मन में यह आशंका उठ सकती है कि जननेन्द्रियों पर नियंत्रण रखना आसान नहीं होता लेकिन हम सब जननेन्द्रियों पर नियंत्रण रखने में सफल हो सकते हैं, उसी तरह कामोत्तेजना पर नियंत्रण रखना भी संभव हो सकता है। जब संवेगों पर नियंत्रण हो जाता है तब शरीर एवं मन में एक रागात्मक तालमेल बैठ जाता है और दोनों ही पूर्ण संतुलन के साथ चरम बिंदु पर अग्रसर हो जाते हैं।
चिन्तन में अन्तर्विरोध-
चिन्तन में अन्तर्विरोध मनोवैज्ञानिक उपचार है जो सेक्स क्रिया के समय उत्तेजक बातें, दृश्य या सेक्स उत्तेजना को तेज करती हैं और शीघ्रपतन की अवस्था को पैदा करती हैं। इस स्थिति को रोकने के लिए संभोग के समय में लिंग को योनि में प्रवेश करते वक्त और घर्षण के समय जब काम-क्रीड़ा के खेल के विचारों को त्याग देते हैं तो उसे ही अपना ध्यान सेक्स से अन्य मन विचारों की ओर मोड़ देने की कला कहते हैं।
इस समय किसी यात्रा, पिकनिक, भाषण या मीटिंग पर ध्यान केंद्रित करने से कमोत्तेजना पर काबू पाया जा सकता है। संभोग से ध्यान हटा लेने से वीर्य स्खलन का समय बढ़ जाता है। शीघ्रपतन को दूर करने के लिए जो-जो क्रिया अपनाई जाती है, उनका बार-बार अभ्यास करने से शीघ्रपतन से छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन किसी भी अप्रिय या भय वाली घटना पर ध्यान केन्द्रित करने से कामोत्तेजना अचानक ही बैठ जाती है और लैंगिक उत्तेजना ठंडी पड़ जाती है। अतः ध्यान केन्द्रित करने में सावधानी बरतनी चाहिए और सेक्स क्रिया करते समय उन घटनाओं को कभी भी याद नहीं करना चाहिए जिनसे किसी प्रकार से हानि हों।
सेक्स क्रिया के समय घर्षण पर नियंत्रण-
बहुत से ऐसे पुरुष होते हैं जो सेक्स क्रिया के समय में स्ट्रोक लगाने के समय कामवासना के कारण जल्दी उत्तेजित हो जाते हैं तथा जननेन्द्रिय को नियंत्रण में न रखने के अभाव में योनि में लिंग को डालकर तुरंत ही घर्षण प्रारम्भ कर देते हैं और जल्दी-जल्दी स्ट्रोक लगाना शुरू कर देते हैं। इस स्थिति में वे उत्तेजना के कारण अपने आप पर काबू नहीं रख पाते और तीन-चार स्ट्रोक लगाने के बाद ही स्खलित हो जाते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि लिंग को योनि में प्रवेश करने के तुरंत बाद ही स्ट्रोक लगाना शुरू नहीं करना चाहिए। सेक्स क्रिया में जब लिंग को योनि में प्रवेश कराते हैं तो लगभग 10 से 15 सेकण्ड तक स्ट्रोक नहीं लगाना चाहिए बल्कि लिंग को योनि में चुपचाप पड़े रहने देना चाहिए और जब उत्तेजना का वेग कम पड़ जाए तब धीरे-धीरे घर्षण शुरू करना चाहिए। उत्तेजना यदि अधिक बढ़ने लगे तो स्ट्रोक लगाना बंद करके लिंग को योनि से बाहर निकाल लेना चाहिए। इसके बाद 5 से 10 सेकण्ड आराम करना चाहिए। आराम करने के बाद फिर से स्ट्रोक लगा-लगाकर धीरे-धीरे घर्षण शुरू कर देना चाहिए। इस प्रकार से सेक्स क्रिया करने से पुरुष को यह महसूस होगा कि इस बार उत्तेजना कुछ हद तक काबू में आ गई है। जैसे ही आपका स्खलन होने लगे वैसे ही लिंग को योनि से बाहर निकाल ले, इससे स्खलन रुक जाएगा। इस प्रकार से संभोग करते समय प्रत्येक बार आराम करने के बाद उत्तेजना पर नियंत्रण बढ़ता जाएगा और चार से पांच बार इस प्रकार से संभोग करने से स्खलन के समय पर पूरी तरह से नियंत्रण हो जाएगा। जब उत्तेजना पर नियंत्रण हो जाए तो फिर स्ट्रोक की गति को बढ़ाया जा सकता है और फिर एक स्थिति ऐसी भी आ सकती है जिसमें तेज धक्के लगाने पर भी स्खलन नहीं होगा। इस विधि से सेक्स क्रिया 15 मिनट से एक घण्टे तक की जा सकती है। घर्षण रोकने की क्रिया को अधिक से अधिक तीन से चार बार ही रोकना चाहिए, यदि इससे अधिक बार रोका गया तो स्खलन होने में बहुत अधिक रुकावट उत्पन्न हो सकती है और ऐसा भी हो सकता है कि स्खलन कैसे हो। वीर्य स्खलन बहुत देर तक रुक जाना भी कष्टदायक होता है क्योंकि बार-बार वीर्य स्खलन में रुकावट उत्पन्न होने से स्खलन केन्द्र पर नियंत्रण समाप्त हो जाता है और पुरुष स्खलन के अभाव में पसीने-पसीने से तर होकर बेचैन होने लगता है। ऐसा होने से पुरुष को वह सेक्स का सुख भी नहीं मिल पाता जोकि उसे मिलना चाहिए। इस स्थिति में ऐसा भी हो सकता है कि पत्नी पहले ही स्खलित (चरम बिंदु) हो जाए। घर्षण करने पर पत्नी को बहुत अधिक कष्ट होता है और खुद भी स्खलित न होने के कारण मानसिक तनाव तथा शारीरिक कष्ट होता है। इसलिए इस विधि का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए।
सेक्स क्रिया करते समय उत्तेजना पर नियंत्रण रखना-
संभोग क्रिया के समय को बढ़ाने के लिए सेक्स उत्तेजना पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी होता है क्योंकि शीघ्र स्खलित हो जाने के कारण से पति-पत्नी को सेक्स का भरपूर आनन्द नहीं मिल पाता है। इसलिए सेक्स क्रिया करते समय यदि आवश्यकता से अधिक उत्तेजित हो जाए तो कुछ समय के लिए लिंग से घर्षण करना बंद करके आराम करें, इससे कमोत्तेजना का वेग कुछ कम हो जाएगा। इस क्रिया को करते समय जब उत्तेजना का वेग कुछ कम हो जाए तब स्त्री को दुबारा से आलिंगन तथा चुम्बन करना शुरू कर दें, इससे स्त्री को आपसे बहुत अधिक सुख मिलेगा।
स्त्री के स्तनों के निप्पल को अधिक देर तक चूसना तथा स्तनों को दबाना कामोत्तेजना को भड़काने वाला होता है। अतः इस क्रिया को करते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। चुम्बन तथा चूसने की क्रिया ज्यादा करने से भी शीघ्र स्खलन होने का डर होता है। अतः सेक्स क्रिया का अधिक से अधिक आनन्द लेने के लिए इसका कम से कम ही प्रयोग करें।
संभोग क्रिया करते समय यदि पत्नी को यह पता चल जाए कि मेरा पति मुझसे अधिक कामोत्तेजक है तो ऐसी अवस्था में उसे अपनी पति से यह कहना चाहिए कि लिंग को तुरंत ही योनि में न डाले और न ही तेज स्ट्रोक लगाकर घर्षण करें। इस स्थिति में पत्नी को चाहिए कि वह अपने पति का पूरी तरह से साथ दे और पति को सेक्स क्रिया का भरपूर आनन्द दें तथा लें।
सेक्स क्रिया के समय पति को चाहिए कि अपनी पत्नी को सेक्स का भरपूर आनन्द दें और पत्नी को पूरी तरह से सेक्स के लिए उत्तेजित करें। यदि आपने ऐसा न किया तो हो सकता है कि तुम्हारी पत्नी सेक्स क्रिया के समय सेक्स के प्रति ठंडी पड़ी रहेगी और उसकी योनि मार्ग में तरलता उत्पन्न नहीं होगी। यदि पत्नी की योनि शुष्क हो जाए तो लिंग को योनि में प्रवेश करने में दिक्कत आती है और घर्षण करना भी मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में पत्नी को सेक्स क्रिया का खेल खेलने में कष्ट होगा तथा पति भी दो-चार घर्षण के बाद ही स्खलित हो जाएगा। अतः पति को चाहिए कि पत्नी को सेक्स क्रिया के दौरान उसे पहले उत्तेजित सीमा तक पहुंचाने का काम करें। लेकिन यह भी ध्यान रखे कि अपने को शीघ्र स्खलन की स्थिति तक न पहुंचे। धैर्य और संयम के मेल से अपनी पत्नी को सेक्स उत्तेजना की सीमा रेखा तक पहुंचाएं और फिर सेक्स क्रिया का पूरा आनन्द लें और पत्नी को भी भरपूर आनन्द दें।
शीघ्र स्खलन को रोकने के लिए कुछ तरीके-
ठीक प्रकार से सेक्स क्रिया करने से शीघ्र स्खलन होने की समस्या को रोका जा सकता है तथा सेक्स क्रिया को लम्बे समय तक आनन्द लिया जा सकता है। यदि सेक्स करने के दौरान कुछ भी असावधानी बरतेंगे तो इस प्रकार की समस्या उत्पन्न हो सकती है। अतः शीघ्र स्खलन की समस्या को रोकने के लिए कुछ तरीके दिये जो रहे हैं जो इस प्रकार हैं-
1. संभोग क्रिया करते समय पत्नी को चाहिए कि अपने पति के लिंग को पकड़कर सहलाए। इससे लिंग में कोमल स्पर्श पड़ने के कारण तनाव उत्पन्न होने लगता है। इस क्रिया में पत्नी को चाहिए कि लिंग को धीरे-धीरे पकड़ कर दबाती रहे और लिंग जब पूरी तरह हो उत्तेजित जाए या स्खलन की स्थिति उत्पन्न होने लगे तो पति को चाहिए कि पत्नी को कहे कि लिंग को थोड़ी देर के लिए दबाना छोड़ दें। इसके बाद कुछ देर तक अन्य चीज पर ध्यान केंद्रित कर लें ताकि स्खलन होने के संकट को टाला जा सकें। कुछ देर बाद जब स्खलन की स्थिति टल जाए तो फिर से वही क्रिया अपनाएं। इस सेक्स क्रिया के तरीके को अपनाने से शीघ्र स्खलन की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। 
2. पति के वीर्य स्खलन के समय को बढ़ाने के लिए पत्नी को चाहिए कि अपने पति के वीर्य स्खलन के समय में रुकावट पैदा करें। इसके लिए एक यह तरीका अपनाया जा सकता है जैसेकि पति-पत्नी को सेक्स क्रिया करने के लिए एक ही बिस्तर पर निर्वस्त्र अवस्था में लेट जाना चाहिए। इस अवस्था में पति को चाहिए कि अपनी तेज होती उत्तेजना के प्रति ध्यान रखें और स्खलन की स्थिति पर पहुंचने से पहले ही एक-दूसरे को उत्तेजित करने की प्रक्रिया को बंद करके एक-दूसरे को शरीर से थोड़ा हटकर दूसरी ओर ध्यान लगा लें। सेक्स क्रिया के समय में इस तरीके का प्रयोग कई बार दोहरा सकते हैं। इस तरह से संभोग करने से पति की चिंता और भय दूर होने लगता है और संभोग कला के समय में वृद्धि होने लगती है। इस क्रिया के प्रयोग से पति अपने कामोत्तेजना के समय में नियंत्रण पा लेता है। इस तरह से संभोग करने की क्रिया में सफलता धीरे-धीरे मिलती है। यदि इस क्रिया का प्रयोग करते समय एक-दो बार असफल भी हो जाए तो दुःखी न हो और न ही अपने प्रयास रोकें। पति-पत्नी को यह कभी भी नहीं भूलना चाहिए कि कोशिश करने से ही सफलता प्राप्त होती है। 
3. सेक्स क्रिया के दौरान पति के शीघ्र स्खलन को रोकने के लिए इस प्रकार का तरीका अधिक लाभकारी हो सकता है जैसेकि पत्नी को चाहिए कि वह पलंग पर बैठकर अपनी दोनों टागों को फैलाकर अपने पति के सामने की ओर खोल दे। इसके बाद पति को चाहिए कि अपनी टांगों को पत्नी की जांघों के ऊपर रखें। इसके बाद अपने घुटने को थोड़ा सा ऊपर उठाकर रखें ताकि अपनी टांगों का बोझ पत्नी के ऊपर न पड़ने दें। इसके बाद पत्नी को चाहिए कि लिंग को हाथ में पकड़कर धीरे-धीरे सहलाए। इससे लिंग उत्तेजित होकर तन जाता है। लिंग जब पूरी तरह से तन जाए तो पत्नी को चाहिए कि लिंगमुंड को अंगूठे तथा पहली दो अंगुलियों से पकड़कर दबाए। इस क्रिया में पत्नी को ध्यान रखना चाहिए कि अंगूठे को लिंगमुण्ड के उस भाग पर रखे, जहां पर फ्रीनम (Freenum) स्थित होता है तथा पहली अंगुली को लिंगमुण्ड पर और बीच की उंगली को लिंगमुण्ड के किरीट (Corona Glandis) के पीछे रखे। इस क्रिया को करते समय पत्नी को यह ध्यान रखना चाहिए कि अंगुलियों से लिंग पर दबाव उस प्रकार दें जिस प्रकार से नींबू को निचोड़ा जाता है। लेकिन इस क्रिया को तीन-चार बार से ज्यादा न करें। इस क्रिया में पत्नी के अंगूठे और अंगुलियों के दबाव की वजह से पति के स्खलन होने की क्रिया रुक जाती है। इससे लिंग की उत्तेजना की स्थिति कुछ कम हो जाती है। इसके 10 से 15 मिनट के बाद फिर से इसी प्रकार से क्रिया करनी चाहिए। ठीक इसी प्रकार से इस सेक्स क्रिया को कई बार दोहराना चाहिए। इस क्रिया से पति-पत्नी को सेक्स का भरपूर आनन्द मिलता है तथा उनका प्रेम संबंध भी गहरा होता चला जाता है। इससे पुरुष शीघ्र स्खलित नहीं होता है तथा इसके साथ ही सेक्स के प्रति आत्म-विश्वास भी जाग जाता है। इस तरीके से पत्नी पति के लिंगमुण्ड को 10 से 15 बार दबाती है तो पति शीघ्र स्खलन के भय से भी मुक्त हो जाता है। जब भय से मुक्त हो जाए तो उसे चाहिए कि अपने उत्तेजित लिंग को योनि में प्रविष्ट करें। लेकिन इस समय किसी प्रकार का घर्षण न करे और अपना ध्यान किसी खेल, कोई मनोरंजक तस्वीर या अन्य चीजों की ओर रखे। कहने का अर्थ यह है कि अपना ध्यान संभोग क्रिया की कला में बिल्कुल न हो। इस स्थिति में पत्नी का भी सहयोग आवश्यक होता है। पत्नी को चाहिए कि वह भी शांत पड़ी रहे। किसी भी प्रकार का शारीरिक छेड़-छाड़ न करें जिससे पति उत्तेजित होकर स्खलित हो जाए। इस स्थिति में पति चाहे तो ढीली अवस्था में लेटा रह सकता है और पत्नी विपरीत आसन का प्रयोग कर सकती है। पत्नी चाहे तो इस स्थिति में पति के ऊपर अपनी योनि के अन्दर लिंग को लेकर शांत बैठी रह सकती है। इस स्थिति में लिंग उसकी योनि में पूरी तरह से समाया रहेगा, लेकिन दोनों में से कोई भी घर्षण की क्रिया न करें। इस क्रिया को करते समय जैसे ही पति को महसूस हो कि मैं स्खलित होने वाला हूं, वैसे ही उसे सनसनी महसूस होने लगेगी। ऐसा होते ही उसे अपनी पत्नी को संकेत दे देना चाहिए कि मैं स्खलित होने वाला हूं। इसके बाद पत्नी को चाहिए कि पति का संकेत पाकर तुरंत ही लिंग को योनि से बाहर निकालकर लिंगमुंड को अंगूठे तथा पहली दो अंगुलियों से पकड़कर दबाए, इससे स्खलन होना तुरंत ही रुक जाएगा। इस तरीके से सेक्स क्रिया करने से पति-पत्नी दोनों को भरपूर सेक्स का आनन्द मिलता है। इस तरीके से सेक्स क्रिया सप्ताह में एक बार ही करना चाहिए तथा इसका उपयोग लगभग 8 से 12 महीने तक कर सकते हैं। इस क्रिया को करने के लिए धैर्य और संयम की आवश्यकता होती है। इस क्रिया से किसी प्रकार का जादूई परिणाम या सफलता पाने की आशा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह कोई मदारी का खेल नहीं कि पैसा फेकों और तमासा देखों। इस आसन को सामान्य भाषा में विपरीत आसन कहा जाता है। इस आसन में सबसे मुख्य जानने वाली बात यह है कि पति की उत्तेजना को भड़काने के लिए पत्नी उसके लिंग से छेड़छाड़ करती है। इस अवस्था में पत्नी बहुत अधिक कामोत्तेजित हो जाती है और पति के स्खलन होने के साथ ही स्खलित हो जाती है या फिर पति के स्खलन होने से पहले ही स्खलित होकर भरपूर आनन्द के केंद्र में डूब जाती है। इस क्रिया में पति-पत्नी दोनों को ही भरपूर आनन्द मिलता है तथा वे दोनों ही आलिंगन, चुम्बन और एक-दूसरे से छेड़-छाड़ का खेल खेलते रहते हैं। इस क्रिया में यदि पति का स्खलन समय तीन से चार बार टल जाए तो पत्नी स्वयं घर्षण के रफ्तार को बढ़ा सकती है और अन्तिम समय तक पूरे जोश तथा शक्ति के साथ घर्षण कर सकती है। इस प्रकार से स्खलित यदि पति-पत्नी एक साथ होते हैं तो उन्हें भरपूर चरम सुख मिलता है। 
4. संभोग कला के समय को बढ़ाने के लिए गणना के तकनीक को अपनाने से शीघ्र स्खलन के समस्या से छुटकारा मिल सकता है। इस तरीके को करने के लिए पति को चाहिए कि पत्नी की योनि में लिंग को डालकर कुछ छणों तक किसी भी प्रकार की कोई हरकत और न घर्षण करें। इस स्थिति में जब भी पति को लगता है कि स्खलन की स्थिति टल चुकी हैं तब उसे धीरे-धीरे लिंग का घर्षण योनि में करना चाहिए। इस क्रिया में स्ट्रोक लगाकर घर्षण करने के क्रम को गिनते जाए, जैसेकि one...two...three...four....five.. आदि। गिनती का क्रम तब तक चलते रहने दे जब तक की स्खलन होने का महसूस न हो। जैसे ही स्खलन की आशंका होने लगे, वैसे ही स्ट्रोक लगाना बंद कर दें और स्खलन होने की आशंका टल जाए तो फिर से गिनती गिनते हुए स्ट्रोक लगा-लगाकर घर्षण करना शुरू कर दें। इस प्रकार से प्रतिदिन सेक्स क्रिया करने से सेक्स करने के समय को बढ़ाया जा सकता है। 
5. सेक्स क्रिया के समय को बढ़ने के लिए उल्टी गिनती गिनकर सेक्स करने के तरीके को अपनाने से लाभ मिलेगा। इस क्रिया के द्वारा सेक्स करने के लिए लिंग को योनि में प्रवेश कराके धीरे-धीरे घर्षण करें तथा घर्षण की गिनती 10 तक गिने और फिर उल्टी गिनती गिने। पहले गिनती इस प्रकार गिने-10, 9, 8, 7, 6, 5, 4, 3, 2, 1 तथा इसके बाद 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20 फिर इसके बाद 20, 19, 18, 17, 16, 15, 14, 13, 12, 11, 10, 9, 8, 7, 6, ,5 ,4 ,3 , 2, 1 तक। इस क्रिया में चाहे तो 20 से 1 तक उल्टी गिनती गिन सकते हैं। इस प्रकार की सेक्स क्रिया में प्रत्येक दस बार घर्षण करने के बाद कुछ देर तक आराम करना चाहिए। इस क्रिया को कई दिनों तक करने से संभोग कला के समय को बढ़ाने में लाभ मिलता है। इस क्रिया को करने में यदि पहले दिन 40 या 50 घर्षण हो तो दूसरे दिन 60 तक ले जाएं तथा इस प्रकार से तीसरे, चौथे, पांचवे और इससे आगे के दिन घर्षण करने की संख्या को बढ़ाते चले जाएं। इस प्रकार से सेक्स करने से मस्तिष्क पर पड़ने वाला जोर हट जाता है जिसके परिणामस्वरूप वीर्य स्खलन के समय में वृद्धि होती है। इस क्रिया में यदि तीन से चार बार स्खलन होने का समय टल जाए तो संभोग करने के समय में वृद्धि हो जाती है और सेक्स करने का आनन्द हजार गुना बढ़ जाता है। इस क्रिया के द्वारा सेक्स क्रिया करने से यह लाभ मिलता है कि पत्नी एक से अधिक बार स्खलित होकर भरपूर आनन्द को प्राप्त करती है और स्वयं को भी अधिक आनन्द मिलता है। 
6. वीर्य स्खलन होने के बाद दुबारा प्रयास- पति-पत्नी को सेक्स क्रिया करते समय यदि वीर्य स्खलन होने लगे तो बलपूर्वक वीर्य स्खलन रोकने का प्रयास नहीं करना चाहिए। संभोग के समय या योनि में लिंग प्रवेश करने के बाद तुरंत ही वीर्य स्खलन हो जाता है तो चिंता करने की कोई बात नहीं है और न ही घबराने की बात है। स्खलन हो जाए तो कुछ समय के लिए शरीर को ढीला छोड़ दें। लेकिन आराम पांच मिनट से अधिक न करें। इसके बाद दुबारा से पत्नी के जननेन्द्रिय अंगों से खेलते हुए मसलना, सहलाना, दबाना तथा चूमना चाहिए। इसके साथ ही पत्नी को कहे की लिंग को हाथ में लेकर दबाये, सहलाये तथा उछाले। ऐसा करने से दुबारा से लिंग उत्तेजना में आ जाता है और पुरुष सेक्स के लिए तैयार हो जाता है। लेकिन इस बार यह ध्यान रखना चाहिए कि जैसे ही वीर्य स्खलन होने लगे। वैसे ही अपने ध्यान से सेक्स को हटाकर किसी और चीज पर लगा लेना चाहिए। ऐसा करने से वीर्य स्खलन होना रुक जायेगा। इस क्रिया को दो से तीन बार अजमाने के बाद लिंग को उत्तेजना में लाकर उसे योनि में प्रवेश कराये और स्ट्रोक लगा-लगाकर घर्षण करना शुरू करें। इस प्रकार से सेक्स करने से संभोग का समय लम्बा हो जाता है और सेक्स का भरपूर आनन्द मिलता है तथा पत्नी को सम्पूर्ण आनन्द मिलता है। 
सेक्स क्रिया करने के दौरान कुछ आत्म-संकेत-
आत्म-संकेत एक ऐसा सूचना निर्देश है जो आज तक मनोवैज्ञानिक रहस्य बना हुआ है और इसे शिक्षित लोग भी ठीक प्रकार से समझ नहीं पाये हैं। मन के रहस्य को समझना बहुत अधिक कठिन होता है। मन की शक्ति सभी प्रकार की शक्तियों का भंडार होता है। वैसे देखा जाए तो मन के तीन स्तर होते हैं- मन, चेतन तथा उपचेतन।
चेतन मन- 
इसको मन का ऊपरी भाग कहते हैं। यदि मन को एक महासागर मान लिया जाए तो चेतन मन उसमें तैरते हुए बर्फ के पहाड़ के समान है और यदि बर्फ का पहाड़ मन है तो पानी के ऊपर दिखाई देने वाला भाग ही चेतन मन होगा तथा पहाड़ को जो भाग पानी के अन्दर डूबा हुआ है, वह अचेतन है। मनुष्य की जागी हुई अवस्था में उसका सभी कार्य, चिन्तन-मनन या क्रिया-कलाप चेतन मन द्वारा ही होता है। आज इस संसार में ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में जो उन्नति हुई है या जो आश्चर्यजनक सफलताएं प्राप्त हुई है, वह चेतन मन की ही देन हैं।
उपचेतन मन- 
यह चेतन और अचेतन के जड़ पर स्थित होता है और यह दोनों को जोड़ने वाली एक कड़ी होती है, जो स्मृतियों का भण्डार है। मनुष्य जो कुछ भी याद करता है वह इसी में संचित (जमा) होता है। यह स्वयंचालित होता है। बात-चीत करते समय या कुछ लिखते समय अचानक से कोई शब्द भूल जाते हैं लेकिन कुछ प्रयास करने के बाद वह शब्द याद आ जाता है। इस क्रिया में भूला हुआ शब्द तुरंत याद आ जाता है। कोई भी कार्य करते समय अचानक कोई चीज, घटना, पिक्चर या कोई व्यक्ति याद आ जाना ही उपचेतन का कार्य कहलाता है। बैठे-बैठे किसी की कल्पनाओं में खो जाना या किसी कार्य में खो जाना उपचेतन की एक लीला कहलाती है। वैसे देखा जाए तो यह पानी में डूबे उस पानी के समान होता है जो पानी की ऊपरी सतह को छूते (स्पर्श) रहते हैं।
अचेतन मन – 
यह मन का वह जादुई भाग होता है जो एक रहस्यमय है। यह अनंत शक्ति का भण्डार होता है लेकिन अचेतन मन की शक्ति निष्क्रिय पड़ी रहती है। इसके क्रियाशील या जाग्रति हो जाने पर मनुष्य में अदभुत शक्तियां उत्पन्न हो जाती हैं और वह बहुत से ऐसे अदभुत कार्य को करने में सक्षम हो जाता है जिन्हें चमत्कार कहा जाता है। इसी अचेतन मन को प्रभावित करने के कई तरीको में से एक तरीका वह है जो आत्म संकेत या स्वयं संकेत कहलाता है। जिस व्यक्ति में इस प्रकार की इच्छा शक्ति उत्पन्न हो जाती है, वह किसी भी कार्य को करने में हिम्मत नहीं हारता है। वह जिस किसी कार्य में अपने हाथ को अजमाता है उसमें ही सफलता प्राप्त करता है।
वैसे आत्म-संकेत प्राप्त करना कोई कठिन कार्य नहीं होता है। इसके प्रभाव से आत्म-विश्वास में मजबूती आती है। इसके प्रभाव से घनघोर अन्धकार में भी उजाला उत्पन्न हो जाता है अर्थात आत्मविश्वास के कारण साहस उत्पन्न होता है। यदि किसी व्यक्ति में आत्म-संकेत की प्राप्ति हो जाए तो वह अकेला ही कब्रिस्तान में सो सकता है। ठीक इसी प्रकार सेक्स क्रिया करते समय पुरुष को अपने मन में यह आत्म-विश्वास रखना चाहिए कि मेरा वीर्य शीघ्र स्खलित नहीं होगा और मैं अपनी पत्नी को पूरी तरह से संतुष्ट करने में सक्षम हूं, हम दोनों पति-पत्नी का संभोग करने का समय लम्बा होगा तथा स्खलन पर मेरा पूरी तरह से नियंत्रण रहेगा। इस प्रकार की भावना अपने मन में कई बार करते रहे, चाहे आप बैठे हो, चल रहे हो या सोने के लिए बिस्तर पर लेटे हो। इस भावना को दोहराते रहे लेकिन माला न जपें। सोते समय भी इस भावना को तब तक दोहराते रहें जब तक की नींद न आ जाये।
आत्म-संकेत के लिए बार-बार प्रयास करने से आपकी भावना अचेतन मन में प्रवेश कर जाएगी और आत्म-विश्वास भी उत्पन्न हो जाएगा। लेकिन यह कार्य दो-चार दिनों का नहीं करना चाहिए। यह भावना स्वयं अपने मन को ही देना चाहिए। ध्यान को केन्द्रित करके इस भावना को दोहराते रहिये, इसके फलस्वरूप तीन से छः महीने के अन्दर आपकी समस्या समाप्त हो जाएगी। इसके फलस्वरूप शीघ्रपतन भी दूर हो जाएगा। इसके प्रयोग से पति-पत्नी का सेक्स क्रिया लम्बे समय तक चलता है और पति-पत्नी को भरपूर सेक्स का आनन्द मिलता है।
पत्नी द्वारा सेक्स क्रिया में सकारात्मक संकेत-
इस प्रकार के संकेत को करने के लिए पत्नी को चाहिए कि जब पति गहरी नींद में सो रहा हो तब उसके कान में धीरे-धीरे फुस-फुसाते हुए कहें कि आप में पूर्ण पौरुष शक्ति विद्यमान है, आप देर तक संभोग क्रिया कर सकते हैं, आप जल्दी स्खलित नहीं होंगे, आप मुझे पूरी तरह से सेक्स का आनन्द दे सकते हैं। इस प्रकार की बातें पत्नी को प्रत्येक रात में कम से कम तीन-चार बार पति को अवश्य कहनी चाहिए।
इसके लिए मैं आपको एक बात यह भी बताना चाहूंगा कि जब भी पुरुष सो जाता है तब उसका चेतन मन तो निष्क्रिय हो जाता है, लेकिन अवचेतन मन पूर्ण रूप से क्रियाशील बना रहता है। अचेतन मन में दबी हुई इच्छाएं ही स्वप्न में बदलकर प्रकट होती हैं और दबी हुई इच्छाएं ही पूर्ण हो जाती हैं। इसलिए आपके द्वारा दी गई भावना ही पति के अचेतन मन में प्रवेश करेगी और बार-बार कई दिनों तथा कुछ महीनों तक यदि आप धैर्य तथा संयमपूर्वक भावना देती रहेंगी तो उनका अचेतन मन क्रियाशील हो जाएगा और आपके पति में सेक्स के प्रति आत्म-विश्वास जाग उठेगा। इससे पति को शीघ्रपतन से छुटकारा भी मिल जाएगा तथा उनमें सेक्स क्रिया करने की क्षमता में भी वृद्धि हो जाएगी। इसके प्रयोग से आपके दाम्पत्य जीवन में रंगीन उमंग, उल्लास तथा आनन्द का संचार होने लगेगा।
लिंग मुण्ड का संवेदनशील हो जाना-
बहुत से ऐसे पुरुष होते हैं जिनका लिंग बहुत अधिक संवेदनशील होता है और जब स्त्री की गर्म, गीली तथा उत्तेजित योनि से उसका सम्पर्क होता है तो वे बहुत अधिक कामोत्तेजक होकर स्खलित हो जाते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि आप अपने लिंगमुण्ड की त्वचा को नीचे की ओर खिसका करके खुला रखें। यदि लिंगमुण्ड अधिक ढीला हो और छल्ले से फिसलकर लिंगमुण्ड को बार-बार ढक लेता हो तो खतना कर लेना अच्छा होता है। खतना करा लेने से लिंगमुण्ड स्थायी रूप से खुला रहेगा और कपड़ों को लगातार घर्षण से उसकी अतिसंवेदनशीलता कुछ दिनों में खत्म हो जायेगी और संभोग भी अधिक समय तक चलेगा। खतना कर लेना लिंग की सफाई रखने की दृष्टि से भी आवश्यक है। लिंगमुण्ड को सभी समय ढके रहने से छल्ले के पीछे एक श्वेत रंग का मैल जमने लगता है जो बदबू उत्पन्न करने के अतिरिक्त कभी-कभी खुजली भी उत्पन्न कर देता है। इससे संक्रमण की भी आशंका बनी रहती है। इसलिए खतना करायें या न करायें लेकिन लिंग-मुण्ड को हमेशा खुला रखें।
लिंग की अतिसंवेदनशीलता को दूर करने के लिए एक यह तरीका है कि एक कटोरे में गर्म पानी लें और दूसरे कटोरे में ठंडा पानी लें। ध्यान रखे कि पानी इतना गर्म हो जितना लिंग की त्वचा सह सके, ज्यादा गर्म पानी से लिंग में जलन हो सकती है। दूसरे कटोरों में भी पानी ज्यादा ठंडा न लें। इस क्रिया को करने के लिए शुरू में पानी उतना ही गर्म तथा ठंडा रखें कि आसानी से सहन हो जाये। बाद में धीरे-धीरे पानी की उष्णता एवं शीतलता बढ़ाई जा सकती है। लेकिन हर स्थिति में सहनशीलता का ध्यान रखें अन्यथा लाभ के बजाय हानि हो सकती है। क्रिया को करने के लिए पहले अपने लिंग को गर्म पानी में डुबायें और लगभग 30 सेकण्ड तक डुबाकर रखें। इसके बाद लिंग को पानी से निकालकर ठंडे पानी के कटोरे में डुबा दें। इस बार भी लगभग 30 सेकण्ड तक लिंग को पानी में डुबाकर रखे। इस क्रिया को पहले दिन कम से कम पांच बार करें। इस क्रिया में यह ध्यान रखें कि अण्डकोष न तो पानी से स्पर्श करें और न ही कटोरी को। पानी में केवल लिंग को ही डुबायें और इस क्रिया को प्रतिदिन बढ़ाते जाए। धीरे-धीरे इस क्रिया का अभ्यास हो जाने तथा सहनशीलता बढ़ जाने पर लिंग को लगभग दो मिनट तक पानी में डुबाए रखें।
आप कभी भी इस बात से भयभीत न हो कि पानी में इस तरह से लिंग डुबाने से हानिकारक प्रभाव हो सकता है। यह क्रिया पूर्ण रूप से वैज्ञानिक है। क्योंकि ठंडे पानी से रक्त का प्रवाह त्वचा की ओर तेज गति से होता है और गर्म पानी से रक्त का प्रवाह पीछे की ओर हटता है। अतः कहा जा सकता है कि ठंडे पानी और गर्म पानी के प्रयोग से लिंग की रक्तवाहिनियों तथा शिराओं में रक्त संचार की गति तेज हो जायेगी और लिंग में एक प्रकार की नई शक्ति तथा चेतना का संचार होगा तथा इसके साथ ही लिंग-मुण्ड की संवेदनशीलता भी खत्म हो जाती है। इस क्रिया को करने के फलस्वरुप संभोग को देर तक बनाए रखना तथा योनि में लिंग से तेज गति से घर्षण करने की शक्ति में वृद्धि भी हो जाती है।
सूर्य स्नान क्रिया से सेक्स शक्ति को बढ़ाना-
सूर्य स्नान की क्रिया को अपनाने से यौन-शक्ति में वृद्धि होती है। इस क्रिया को करने के लिए सूर्य के किरणों को लिंग पर पड़ने देना चाहिए। सूर्य की किरणों में विटामिन डी होता है। जब सूर्य की किरणों को लिंग पर डाला जाता है तो इसके साथ ही मुक्त हवा का प्रभाव पड़ता है जिसमें उसमें रक्तंचार की क्रिया को तेज हो जाती है तथा इससे नई शक्ति भी जाग जाती है। यदि लिंग को नंगा रखना संभव न हो तो एक पतले कपड़े से ढ़ककर रखा जा सकता है। इस क्रिया को 5 मिनट से लेकर 30 मिनट तक कर सकते हैं।
सिट्ज बाथ द्वारा यौन-शक्ति में वृद्धि करना-
सिट्ज बाथ करने के लिए ठंडे तथा गर्म पानी का उपयोग किया जा सकता है। इस बाथ को करने से संभोग क्रिया के समय में वृद्धि होती है तथा पौरुष शक्ति का भी विकास होता है। यह क्रिया एक प्रकार की जल चिकित्सा की क्रिया है जो वीर्य तथा पौरुष शक्ति की वृद्धि के लिए उपयोग में ली जाती है। इस बाथ की क्रिया को कम से कम पांच मिनट तक पानी के तापमान के अनुसार करना चाहिए। यह एक प्रकार की स्नान करने की क्रिया होती है।
इस स्नान को करने के लिए सुबह का समय अच्छा होता है लेकिन इसे करने के लिए समय का कोई बंधन नहीं होता है। वैसे सुविधा के अनुसार इस क्रिया का प्रयोग किसी भी समय किया जा सकता है। इस स्नान की क्रिया में गर्म और ठंडे पानी का स्नान एक के बाद एक करते रहना चाहिए। गर्म पानी का तापमान 110 डिग्री से लेकर 115 डिग्री फारेनहाइट तक होना चाहिए।
सिट्ज बाथ को करने के लिए एक टब में पानी भर ले, ध्यान रहे कि टब का पानी इतना रहे कि पेट तक का भाग उसमें डूब जाये। सिट्ज बाथ करने के लिए उस तरीके का इस्तेमाल करें, जिसमें पेट तो पानी में रहे लेकिन टांगे टब के बाहर ही रखे। यह क्रिया 8 से 10 मिनट तक करते रहना चाहिए। ठंडे तथा गर्म पानी का टब एक-दूसरे के पास ही रखे ताकि एक से निकालकर दूसरे में आसानी से बैठना सम्भव हो। प्रत्येक टब में 8 से 10 मिनट तक सिट्ज बाथ करने से सेक्स क्रिया के समय तथा पौरुष शक्ति में वृद्धि हो होती है। इसके प्रयोग से अंडकोष, कब्ज, मूत्र से सम्बंधित रोग तथा अंडकोष की वृद्धि आदि रोग ठीक हो जाते हैं।




योगासन का स्वास्थ्य से संबंध 
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परिचय-
शारीरिक स्वास्थ्य में योग का बहुत ही महत्व माना जाता है। योगासन करने से शरीर के साथ ही मन भी स्वस्थ रहता है। इसके अलावा योगासन करने से शरीर की सारी मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
योगासन को इस समय सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ही काफी महत्व दिया जा रहा है। बाहर के देशों से आकर बहुत से लोग भारत में योग की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अलावा बाहर के देशों से बहुत से लोग आकर डांस की प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। भारतीय डांस को योगासनों की ही तरह शरीर के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। डांस की अलग-अलग मुद्राऐं योगासनों के ही अलग-अलग रूप होते हैं।
शीर्षासन- 
शीर्षासन करने की विधि- 
शीर्षासन करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों हाथों के पंजों को आपस में गूंथकर अंजुलि सी बना लें। अंजुलि को जमीन पर बिछे आसन पर रखें और फिर उस पर अपने सिर को इस तरह रखें कि आपके सिर का बीच वाला भाग उस पर टिक जाए। इसके बाद धीरे-धीरे सिर के बल खड़े होने की कोशिश करें। अब कमर तक सीधे हो जाएं और फिर धीरे-धीरे घुटनों को सीधा करते हुए दोनों टांगों को सीधा कर लें।
शीर्षासन करने से लाभ- 
शीर्षासन करने से दिमाग तेज होता है और वीर्य पुष्ट होता है। जो पुरुष शीघ्रपतन और स्वप्नदोष रोग से ग्रस्त होते हैं उनके लिए शीर्षासन करना बहुत ही लाभदायक रहता है।
शीर्षासन करने में सावधानी-
• शीर्षासन को शुरूआत में सिर्फ आधे मिनट तक करना ही अच्छा रहता है। इसके बाद धीरे-धीरे इसको करने का समय बढ़ाते हुए संभोग क्रिया से 5 से 7 मिनट तक कर लेना चाहिए।
• अगर शीर्षासन करने वाले व्यक्ति की इस आसन को करते समय दिल की धड़कन तेज हो जाती हो, सिर में दर्द होने लगता हो, दिमाग तेज होने लगता है तो उसे इस आसन को नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पुराने जुकाम या कब्ज से ग्रस्त रोगियों को भी इस आसन को करने से परहेज करना चाहिए। 
भुजंगासन-
भुजंगासन करने की विधि-
भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद दोनों हाथों को शरीर के दाएं-बाएं कंधों के नीचे इस प्रकार रखें कि हाथ की उंगलियां और अंगूठे आपस में मिल जाएं। अब हाथ की हथेलियों की जमीन पर रखें और पैर के पंजों को पीछे की ओर तान दें। इसके बाद हाथ के तालु पर दबाव देकर सांस को अंदर भरकर छाती को ऊपर उठाते चले जाएं। इससे नाभि के ऊपर का भाग उठ जाएगा। फिर सांस को बाहर की ओर छोड़ते हुए वापिस पहले वाली स्थिति में आ जाएं।
भुजंगासन करने से लाभ-
भुजंगासन को करने से बाहें मजबूत होती हैं जिससे संभोग क्रिया के समय पुरुष को जल्दी थकान नहीं होती है। इस आसन को करने से बाहर निकला हुआ पेट कम हो जाता है।
यानासन-
यानासन करने की विधि-
यानासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर किसी दरी आदि को बिछा लें। इसके बाद इस पर पेट के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को मिलाकर रख लें। इसके बाद सांस को अंदर भरकर अपने सिर, छाती और टांगों को जमीन पर रखकर सांस को बाहर छोड़ दें और गर्दन को मोड़कर जमीन पर रखकर शरीर को ढीला छोड़ दें।
यानासन करने से लाभ-
पुरुषों के लिए यानासन को संभोग क्रिया के लिए बहुत ही अच्छा आसन माना जाता है। यह आसन पुरुषों में सेक्स के बहुत सारे गुण पैदा करता है जो स्त्री की संतुष्टि के लिए जरूरी होते हैं।
सुप्त वज्रासन-
सुप्त वज्रासन करने की विधि-
सुप्त वज्रासन को करने के लिए सबसे पहले अपनी टांगों को मोड़कर जमीन पर रख लें। लेकिन ध्यान रहें कि दोनों टांगों के बीच में एक फुट की दूरी रखनी चाहिए। इसके बाद पीछे की ओर झुककर कमर के बल लेट जाएं। अब अपनी कमर को जमीन से ऊपर उठाकर सिर को कमर की जितना मोड़ सकें उतना मोड़ लें। फिर अपने दोनों हाथों को दोनों टांगों पर रख लें। अब सांस लें तथा छोड़ दें। असली स्थिति में आने के लिए सबसे पहले गर्दन को धीरे-धीरे सीधी करके बैठें। इसके बाद टांगों को खोलकर शरीर को ढीला छोड़ दें और लेट जाएं।
सुप्त वज्रासन करने से लाभ-
सुप्त वज्रासन सेक्स करने वाले पुरुषों के लिए बहुत ही लाभकारी रहता है। इस आसन को करने से घुटने और टांगें ज्यादा मजबूत बनती हैं जिससे पुरुष संभोग क्रिया के समय अधिक समय तक बिना किसी परेशानी के इस क्रिया को कर सकता है। इसके अलावा इस आसन को करने वाले पुरुषों का लिंग भी मजबूत बनता है।
शुतुरमुर्गासन-
शुतुरमुर्गासन करने की विधि-
शुतुरमुर्गासन को करने के लिए सबसे पहले सीधे खडे़ हो जाएं। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों को जमीन पर टिका लें। इसके बाद पैरों की एड़ियों को उठाकर पैर के पंजों तथा हाथ की हथेलियों को जमीन से उठाकर सिर्फ उंगलियों को खोलकर जमीन से लगाकर रखें। अपने पूरे शरीर को पैर और हाथ की उंगलियों के आधार पर रखें। अंत में हाथों को जमीन पर रखकर धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठें।
शुतुरमुर्गासन करने से लाभ-
पुरुषों में शुतुरमुर्गासन को करने से हाथों के बल रहकर ज्यादा देर तक संभोग करने की शक्ति पैदा होती है और लिंग को स्त्री की योनि में प्रवेश कराने में भी आसानी होती है।
महावीरासन-
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं। फिर एक पैर को लगभग 3 फुट के करीब आगे की ओर ले जाएं। इसके बाद दोनों हाथों की मुट्ठियों को बंद करके ऊपर उठा लें और आगे-पीछे कूदते हुए पैरों को बदलते रहें। इस समय मुंह बंद होना चाहिए और सांस लेने की क्रिया नाक से करनी चाहिए। इस क्रिया को करते समय शरीर को तान लें और रुकने पर ढीला छोड़ दें।
लाभकारी-
महावीरासन को करने से पुरुषों के शरीर में ताकत पैदा होती है जिससे संभोग क्रिया के समय वह बिना थके संभोग कर सकता है।
पद्मासन-
पद्मासन करने की विधि-
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर आसन लगाकर बैठ जाएं। अपनी दाईं टांग को मोड़कर बाईं जांघ पर और बाएं पैर को दाईं जांघ पर इस प्रकार रख लें जिससे की दोनों पैरों की हड्डियां नाभि के दोनों ओर पेट से लगी हुई हो। इसके बाद दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। अपनी कमर, छाती और सिर समेत पूरे शरीर को सीधा रखें। आपके दोनों पैरों के घुटने जमीन पर लगे हुए होने चाहिए। इस समय अपनी आंखों को साधारण रूप से बंद रखना चाहिए।
पद्मासन को करने से लाभ-
इस आसन को करने से पुरुषों का शीघ्रपतन का रोग जल्दी दूर हो जाता है। इसके अलावा यह आसन स्वप्नदोष और प्रमेह आदि रोगों में भी अच्छा रहता है।
सिद्धासन-
सिद्धासन करने की विधि-
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बिल्कुल सीधा बैठ जाएं। इसके बाद अपने बाएं पैर की एड़ी को अंडकोष और गुदा के बीच में लगा लें और दाएं पैर की एड़ी को लिंग तथा नाभि के बीच में लगा लें। इस समय तक दोनों पैरों की एड़िया एक-दूसरे के ऊपर आ जानी चाहिए और घुटने जमीन पर लगे होने चाहिए। इस आसन को करते समय रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधी रखें और हाथों को घुटनों पर रखें।
सिद्धासन को करने से लाभ-
इस आसन को करने से पुरुषों के अंडकोष और लिंग मजबूत बनते हैं। इसके अलावा यह आसन स्वप्नदोष, प्रमेह और शीघ्रपतन जैसे रोगों को दूर करता है और वीर्य को मजबूत बनाता है।
स्त्रियों के लिए यौन योगासन-
एक स्वस्थ और सामान्य स्त्री संभोग को पसंद करने वाली होती है, वह संभोग में रुचि लेती है, संभोग की हर क्रिया में वह अपने पति को पूरा सहयोग देती है और संभोग के समय सब कुछ भूलकर आनंद के गहरे सागर में डूब जाती है। लेकिन इनके विपरीत कुछ स्त्रियां ऐसी भी होती है जो संभोग क्रिया में कोई खास रुचि नहीं लेती, संभोग के समय पति को किसी प्रकार का सहयोग प्रदान नहीं करती और संभोग के समय पति के सामने ऐसे पड़ी रहती है जैसेकि वह बेजान मूर्ति सी हो। ऐसी स्त्रियां खुद तो संभोग के समय मिलने वाले सुख से दूर रहती हैं बल्कि अपने पति को भी किसी प्रकार के आनंद से वंचित रहती है। पत्नी की इस आदत से पति शीघ्रपतन के रोग से ग्रस्त हो जाता है और कभी-कभी तो उनमें नपुंसकता के लक्षण भी पैदा हो जाते हैं। इसी प्रकार संभोग से अरुचि रखने वाली स्त्रियों के लिए एक बहुत ही मशहूर चिकित्सक ने विशेष किस्म के यौन व्यायाम बनाए हैं जिन्हें जादुई पेशियों का व्यायाम कहा जाता है।
जादुई पेशियां-
यह छल्ले के आकार की जादुई पेशियां योनि पथ के प्रवेश-द्वार के ऊपर होती है। संभोग क्रिया के समय जब स्त्री चरम सुख पर पंहुचने वाली होती है तो यह पेशी स्वयं ही सिकुड़कर लिंग को दबाती है। यह क्रिया लगभग 3-4 सेकेंड तक होती रहती है और स्त्री को चरम पर पंहुचाने पर समाप्त हो जाती है।
भारत के काम-शास्त्रियों ने इन पेशियों को बहुत सदियों पहले पहचान लिया था और इन्हें योनि-पेशी का नाम दिया था। इस जादुई पेशी को अंग्रेजी में प्यूबोकोकाई-जियस कहा जाता है। इसकी तंत्रिकाएं मूत्राशय के द्वार और गुदाद्वार से भी जुड़ी होती है। इसके सिकुड़ने से मूत्रद्वार तुरंत बंद हो जाता है और गुदा मार्ग कस जाता है। इसी कारण से पेशाब करते समय जैसे ही इस पेशी को सिकोड़ लिया जाता है तभी पेशाब करना रुक जाता है। इन पेशियों के मजबूत होने से स्त्री की योनि भी कसी हुई होती है जिससे संभोग के समय पुरुष को बहुत ज्यादा आनंद प्राप्त होता है। अगर यह पेशियां ढीली पड़ जाती हैं तो योनि की दीवारों का कसाव भी ढीला पड़ जाता है जिसके कारण पुरुष को संभोग का आनंद भी प्राप्त नहीं होता है। इसलिए संभोग के समय ज्यादा आनंद पाने के लिए इन पेशियों का व्यायाम करना जरूरी है।
पुरुषों के जैसे ही स्त्रियों के लिए भी इन जादुई पेशियों का व्यायाम जरूरी है। पेशाब करते समय पेशाब को रोक देने से ही इन पेशियों का सही व्यायाम नहीं होता है। इसके लिए सबसे पहले उकडू़ बैठकर अपने घुटनों को ज्यादा दूरी पर फैलाकर रखें और सही स्थिति में बैठने के बाद ही इन पेशियों का व्यायाम करना शुरू करें-
• जादुई पेशियों के व्यायाम की शुरूआत में इन पेशियों का संकोचन सिर्फ 3 सेकेंड तक ही करना चाहिए। हर बार संकोचन करके पेशियों को ढीला छोड़ देना चाहिए। हर बार पेशी को पहले की अपेक्षा ज्यादा सख्त करना चाहिए। इस क्रिया को कम से कम 5 बार दोहराना चाहिए और रोजाना 5 के हिसाब से बढ़ाते रहना चाहिए। इस तरह से दसवें दिन इस क्रिया को करने की संख्या 10 तक पहुंच जाएगी। शुरुआत में कुछ समय तक पेशाब करते समय भी इसका अभ्यास करते रहना चाहिए। 
• 3 सेकेंड तक पेशियों को संकोचन की स्थिति में रहने देना चाहिए और फिर ढीला छोड़ देना चाहिए। पेशी को सामने की ओर उभार लेना चाहिए। इस क्रिया को शुरुआत में 5 बार करना चाहिए और धीरे-धीरे 50 तक पंहुचा देना चाहिए। 
• इसका अभ्यास हो जाने के बाद पेशी संकोचन जितनी तेजी से किया जाए उतना ही अच्छा है। 1 सेकेंड में 2 बार संकोचन करना चाहिए। इस क्रिया को दिन में कई बार करना चाहिए। 1 बार के संकोचन के अभ्यास में संकोचन की संख्या 50 तक बढ़ाई जा सकती है। पूरे दिन में 300 बार संकोचन करना काफी है। 
• जादुई पेशी का संकोचन कभी भी और किसी भी समय बैठे हुए, खड़े हुए, यात्रा करते समय, आफिस में काम करते समय, रसोई घर में काम करते समय किया जा सकता है। 
जादुई पेशियों के संकोचन का अभ्यास हो जाने के बाद इन विशेष यौन-व्यायामों का अभ्यास किया जा सकता है-
• किसी दीवार के सहारे इस तरह से खड़ी हो जाएं कि आपका सिर, पीठ और नितंब दीवार से सट जाए या जमीन पर भी लेटा जा सकता है। 
• गहरी सांस लेते हुए सांस को धीरे-धीरे अंदर की ओर खींचिए और फिर धीरे-धीरे बाहर छोड़ दीजिए। 
• अपने पेट को ऊपर पसलियों की ओर खींचिए। इस क्रिया को करते समय पेड़ू ऊपर की ओर उठ जाता है। 
• इसके बाद अपने पेड़ू को बाहर की ओर उछालने की कोशिश कीजिए। इससे पेड़ू उभरकर सामने आ जाता है। इस क्रिया को करते समय आपकी पूरी पीठ दीवार से लग जाएगी। 
• अब अपनी जादुई पेशी को संकोचन कीजिए। पेशी के संकोचन के समय नितंब, पेड़ू और पेट को चक्रवत घुमाएं- पेट की पेशियों को ऊपर की ओर खींचे, पेड़ू को बाहर की ओर उभारें तथा नितंबों को नीचे की ओर सरकाएं- इन तीनों क्रियाओं को एक साथ चक्रीय गति से संपन्न करें। इस क्रिया के समय गहरी सांस लेते हुए जादुई पेशियों का व्यायाम करना भी शुरू रखें। 
• इसके बाद अपनी संबंधित पेशियों को ढीला छोड़ दें और पेट, पेडू़ और नितंबों को अपनी सामान्य स्थिति में आ जाने दें। लेकिन अब भी जादुई पेशियों का संकोचन करना जारी रखें। 
जादुई पेशियों के व्यायाम से लाभ-
जादुई पेशियों के इन व्यायामों से यौन उत्तेजना तेज होती है। योनि की पेशियों में लचीलापन पैदा होता है। इस व्यायाम को करने से योनि का दर्द दूर होता है और पति-पत्नी दोनों को ही संभोग के समय बहुत ज्यादा आनंद प्राप्त होता है।
काम उत्तेजना बढ़ाने के लिए कुछ अन्य व्यायाम-
धड़ संचालन-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों को फैलाकर खड़े हो जाएं। फिर अपने दोनों हाथों को कंधों के समांतर फैला दीजिए। इसके बाद अपने कमर को नीचे की ओर जितना झुक सके झुकाइए। इस स्थिति में 5 से 11 सेकंड तक रहने के बाद धीरे-धीरे से पीछे की ओर मुड़िए। इस तरह से करने से आपका धड़ ऊपर की ओर उठ जाता है। सीधे होने के बाद बिना रुके, धीरे-धीरे पीछे की ओर मुड़ते जाएं। इससे आपकी कमर पीछे की ओर झुकती चली जाएगी। जितना ज्यादा आप से झुका जाए आप झुक सकते हैं। इसके बाद 5 से 10 सेकेंड तक इसी स्थिति में रहे और फिर शरीर को धीरे-धीरे से सीधा करें। इस क्रिया को कम से कम 3 बार करें। जब तक आप यह व्यायाम करें तब तक आपके हाथ बरावर फैले रहने चाहिए जैसे व्यायाम की शुरुआत में थे। इस बीच सामान्य गति से सांस लेते रहना चाहिए। एक बार में लगातार 3 बार व्यायाम करने के बाद अपने हाथों को ढीले छोड़कर सामान्य स्थिति में आ जाएं।
पीछे की ओर झुकना-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों को फैलाकर खड़े हो जाएं। इसके बाद अपने बाएं हाथ को बाएं पैर के बाहरी भाग तक ले जाएं। आपके हाथों की उंगलियां जमीन को छूती हुई होनी चाहिए। इस बीच में अपने दाएं हाथ को अपने सिर के ऊपर से बाईं ओर झुका लें। इस स्थिति में 5 सेकेंड तक रहें और फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं। इसके बाद लगभग 5 सेकेंड तक सामान्य स्थिति में रहने के बाद दाईं ओर झुककर इसी क्रिया को दोहराएं। दाईं और बाईं ओर के व्यायाम का एक चरण बनता है। हर चरण के बाद लगभग 5 सेकेंड का आराम करें। इसी तरह से इस व्यायाम को 3 चरणों में पूरा करें। व्यायाम के समय सांस की गति सामान्य रहनी चाहिए।
बैठकर आगे की ओर झुकना-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठकर अपने पैरों को पूरी लंबाई तक फैला लें और एड़िय़ों को आपस में मिलाकर रखें। फिर अपने पैरों को हाथों से पकड़कर जितना ज्यादा हो सके धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। लगभग 30 सेकेंड तक इस स्थिति में रहें और फिर अपने धड़ को ऊपर उठाएं। इस क्रिया को 3 बार करें। नीचे की ओर झुकते समय अपनी सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते जाएं और धड़ को ऊपर उठाते समय धीरे-धीरे सांस को अंदर की ओर खींचें।
पृष्ठ मोड़-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। फिर अपने दोनों पैरों को सिर की ओर मोड़े और दोनों घुटनों को हाथों से पकड़ लें। अब अपने धड़ को धीरे-धीरे झुलाने की कोशिश करें। इस तरह से 3-4 बार झुलाना ही काफी रहता है।
पैरों से साइकिल चलाना-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं। फिर अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर ऊपर उठा लें। इसके बाद अपने हाथों को धड़ से लगाकर फैला लें। फिर हाथों को कोहनी से थोडा़ सा मोड़कर हथेलियों को अपने नितंबों पर रखें। अब अपनी ठोड़ी को अपनी गर्दन से पूरी तरह से सटा लें। इसके बाद अपने पैरों को उसी प्रकार चलाएं जैसेकि साइकिल चलाते हैं। आपकी सांस की गति स्वाभाविक बनी रहनी चाहिए। पैरों को 10 की गिनती गिनने तक चलाते रहें। हर बार इस क्रिया को करने के बाद लगभग 30 सेकेंड तक आराम करें तथा इस क्रिया को 3 बार दोहराएं।
उरूसंधि संचालन-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले अपनी एड़ी, नितंब और पीठ को दीवार से लगाकर खड़े हो जाएं। इसके बाद नितंबों की पेशियों को ढीला छोड़ दें और फिर कड़ा कर लें। अब अपने पेट को भीतर खींचिए जिससे कि आपका पेड़ू उभरकर सामने आ जाता है। इस क्रिया को 3 बार करें। इसमें हर क्रिया के बाद लगभग 10 से 20 सेकेंड का आराम करें।
दीवारोन्मुख स्थिति-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले दीवार से अपने सिर और छाती को लगाकर खड़े हो जाएं। अपने दोनों पैरों को थोडे़-थोडे़ फासलों पर रखें। पैरों के पंजों को दीवार से कुछ दूरी पर रखना चाहिए। अपने दोनों पैरों के घुटनों को धीरे-धीरे से मोड़ लें। इसके बाद अपने पेड़ू वाले भाग को जितना ऊपर उठा सकते हैं, उठाने की कोशिश करें और फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर झुका लें। पेड़ू वाले भाग को ऊपर और नीचे करने वाली स्थिति में लगभग 10 सेकेंड तक रहें तथा सांस लेने की गति को नियंत्रण में रखें। इस व्यायाम को करते समय सिर्फ अपने पेड़ू वाले भाग से ही काम लें तथा बाकी शरीर को सामान्य स्थिति में ही रहने दें।
हूल चक्र-
यह व्यायाम यौन पेशियों को मजबूत बनाने में बहुत ही कारगर साबित होता है। इसको करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों हाथों को सिर के पीछे ले जाएं तथा उंगलियों को आपस में मिला लें। दोनों पैरों को हल्का सा मोड़कर उनके बीच में थोड़ी दूरी बनाकर रख लें। इसके बाद अपने नितंबों को दाईं से बाईं ओर लगभग 10 सेकेंड तक गोल-गोल घुमाएं। फिर इसी क्रिया को बाईं से दाईं ओर लगभग 10 सेकेंड तक घुमाएं। इस तरह से 1 बार की क्रिया 20 सेकेंड की हो जाती है। इस क्रिया को 3 बार दोहराएं। हर बार 20 सेकेंड की क्रिया करने के बाद लगभग 10 सेकेंड का आराम जरूर करें।
चरणार्ग संचालन-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच लगभग 25 सेंटीमीटर का फासला बनाकर रखें। इसके बाद अपने पैरों के पंजों को ऊपर उठाकर शरीर का पूरा वजन अपनी एड़ियों पर डाल दें। इसके बाद अपने पैरों की सारी उंगलियों को तलुवों की ओर मोड़ लें। उंगलियों को मोड़ने की इस क्रिया को 5 बार दोहराएं। इस क्रिया को करते समय हर बार 15 सेकेंड का आराम जरूर करें।
नितंब संचालन-
इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठकर अपने पैरों को सीधे फैला दें। आपके दोनों हाथ घुटनों पर होने चाहिए। इसके बाद अपने नितंबों को थोडा़ सख्त कर लें जिससे कि फर्श पर सरकने में कोई परेशानी न हो। दोनों नितंबों को एक साथ सख्त न करके बारी-बारी से करें। अगर अपने घुटनों को हल्का सा मोड़ लिया जाता है तो इससे नितंब संचालन में ज्यादा आसानी होती है

अनेक रोगों की दवा भी है सेक्स
आप शीर्षक पढ़कर चौंक गए होंगे कि भला सेक्स भी रोगों की दवा हो सकता है? तो इसमें चौंकने जैसी कोई बात नहीं है। डॉक्टरों व वैज्ञानियों ने शोध करके यह पता लगाया है कि सेक्स अनेक रोगों की दवा भी है। जहां विवाहित जीवन में सेक्स एक-दूजे के बीच सुख, आनन्द, अपनापन लाता है, वही एक-दूजे के स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को भी बनाए रखता है।


सेक्स से शरीर में अनेक प्रकार के हार्मोन उत्पन्न होते हैं, जो शरीर के स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं। सेक्स से शरीर में उत्पन्न एस्ट्रोजन हार्मोन ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी नहीं होने देता है। सेक्स करने से एब्*डराफिन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे त्वचा सुंदर, चिकनी व चमकदार बनी रहती है। 
एस्ट्रोजन हार्मोन शरीर के लिए एक चमत्कार है, जो एक अनोखे सुख की अनुभूति कराता है। सफल व नियमित सेक्स करने वाले दंपति अधिक स्वस्थ देखे गए हैं। उनका सौंदर्य भी लंबी उम्र तक बना रहता है। उनमें उत्*तेजना, उत्साह, उमंग और आत्मविश्*वास भी अधिक होता है। सेक्स से परहेज करने वाले शर्म, संकोच, अपराधबोध व तनाव से पीड़ित रहते हैं।

दिमाग को तरोताजा रखने व तनाव को दूर करने के लिए नियमित सेक्स एक अच्छा उपाय है। सेक्स के समय फेरोमोंस नामक रसायन शरीर में एक प्रकार की गंध उत्पन्न करता है, जिसे आप सेक्स परफ्यूम भी कह सकते हैं। यह सेक्स परफ्यूम दिल व दिमाग को असाधारण सुख व शांति देता है। सेक्स हृदय रोग, मानसिक तनाव, रक्*तचाप और दिल के दौरे से दूर रखता है। सेक्स से दूर भागने वाले इन रोगों से अधिक पीड़ित रहते हैं।

सेक्स व्यायाम भी है:
सेक्स एक प्रकार का व्यायाम भी है। इसके लिए खास किस्म के सूट, शू या महंगी एक्सरसाइज सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है बस शयनकक्ष का दरवाजा बंद करने की। सेक्स व्यायाम शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को दूर करता है और शरीर को लचीला बनाता है। एक बार की संभोग क्रिया, किसी थका देने वाले व्यायाम या तैराकी के 10-20 चक्करों से अधिक असरदार होती है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा दूर करने में सेक्स काफी सहायक सिद्ध होता है। सेक्स करने से शारीरिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे कि चर्बी घटती है। एक बार की संभोग क्रिया में 500-1000 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। सेक्स के समय लिया गया चुंबंन भी मोटापा दूर करने में सहायक सिद्ध होता है। विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स के समय लिए गए एक चुंबन से लगभग 9 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। इस तरह 390 बार चुंबन लेने से आधा किलो वजन घट सकता है।
दर्दो की अचूक दवा:
आह, उह, आउच, कमर दर्द, पीठ दर्द से परेशान पत्*नी आज नहीं, अभी नहीं करती है, लेकिन यदि वह बिना किसी भय के पति के साथ संभोग क्रिया में शामिल हो जाए तो उसके दर्द को उड़न-छू होने में देर नहीं लगती। सिरदर्द, माइग्रेन, दिमाग की नसों में सिकुड़न, उन्माद, हिस्टीरिया आदि का सेक्स एक सफल इलाज है। अनिद्रा की बीमारी में बिस्तर पर करवट बदलने या बालकनी में रातभर टहलने के बजाय बेड पर बगल में लेटी या लेटे साथी से सेक्स की पहल करें, फिर देखें कि खर्राटे आने में ज्यादा देर नहीं लगती। नियमित रूप से संभोग क्रिया में पति को सहयोग देने वाली पत्*नी माहवारी के विकारों से दूर रहती है। रात्रि के अंतिम पहर में किया गया सेक्स दिनभर के लिए तरोताजा कर देता है।

सेक्स को सिर्फ यौन संबंध बनाने तक ही सीमित न रखें। इसमें अपनी दिनचर्या की छोटी-छोटी बातें, हंसी-मजाक, स्पर्श, आलिंगन, चुंबंन आदि को भी शामिल करें, संभोग क्रिया तभी पूर्ण मानी जाएगी। सेक्स के बारे में यह बात ध्यान रखें कि अपनी पत्*नी के साथ या पति के साथ किया गया सेक्स स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखता है। इस प्रसंग में यह बात विशेष ध्यान देने योग्य है कि जहां विवाहित जीवन में पत्*नी के साथ संभोग क्रिया अनेक तरह से लाभप्रद है, वहीं अवैध रूप से बनाए गए सेक्स संबंधों से अनिद्रा, हृदय रोग, मानसिक विकार, ठंडापन, सिफलिस, सूजाक, गनोरिया, एड्स जैसे अनेक प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो सकती है।



बड़े मम्मो के फायदे
स्तों ज्यादातर सभी लड़कों को बड़े मम्मे और मोटे मोटे चूतडो वाली लडकियां पसंद होती है. उनमे बात ही अलग होती है. वो बहुत कामुक भी होती है. और सेक्स में मजा भी बहुत देती है. लेकिन इन बड़े मम्मो और मोटे चूतडों के कुछ फायदे है तो कुछ नुकसान भी.

बड़े मम्मो के फायदे -
बड़े मम्मे एक लड़की की सुंदरता में चार चाँद लगा देते है.
वो भीड़ में सबसे अलग लगती है.
वो बहुत सेक्सी लगती है.
उसको कपड़े जैसे की टी-शर्ट,टॉप बहुत झचता है.
ब्रा में मम्मे बड़े मस्त लगते है.
उसका सेल्फ कांफिडेंस बहुत ऊपर होता है.
वो हीनभावना की शिकार नहीं होती.
वो सेक्स में बहुत मजा देती है.
उसके मम्मों में खूब दूध भरा होता है.
उसके मम्मों को चूसने और दबाने में बड़ा मजा आता है.
उसे मामो के बीच में लंड रख कर फक्क करने में खूब मजा आता है.
उसके निप्पल के ऊपर लंड दबाने और रगड़ने में बड़ा मजा आता है.
उसके मम्मों के क्लीवेज एरिया में मुंह रख कर प्यार करने में बड़ा आनंद आता है.

बड़े मम्मो के नुकसान -
बड़े मम्मों के कारन लड़की असहज महसूस कर सकती है.
उसके बड़े ममे लोगों के आकर्षण का कारण बनते है और सभी की निगाहें उसकी तरफ रह सकती है.
उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है.
उसे सलवार कमीज या टॉप में दुपट्टा या स्ट्राल आदि ओड़नी पडती है.
उसे ब्रा पहनना बहुत जरूरी है और वो भी सही माप की.
बिना ब्रा के उसके निप्पल कपड़े के बाहर झांक सकते है.
जरा सा दौड़ने या तेज चलने से उसके मम्मे बहुत उछलते है.
अगर जवानी में गौर ना की जाये तो ओल्ड एज में बड़े मम्मे निचे को लटक जाते है.

बड़े चूतडो के फायदे -
बड़े चूतड़ बहुत सेक्सी और सुन्दर लगते है.
बड़े चूतडो पे तंग जींस बहुत झचती है.
बड़े चूतड़ कच्छी में बहुत मजेदार लगते है.
बड़े चूतड़ पे थोंग बहुत अच्छी लगती है.
बड़े चूतड़ चलते वक्त बड़े कमाल के लगते है.
बड़े चूतड़ सेक्स में काफी मजा देते है.
बड़े चूतड़ को सहलाने, आयल मसाज करने, और दबाने में खूब मजा आता है.
बड़े चूतड़ की दरार में लंड रख कर पेलने में बड़ा मजा आता है.
बड़े चूतड़ हो तो एनल सेक्स की बात ही कुछ और है.
बड़े चूतडो में छुपी फुद्दी को पीछे से फाड़ने में खूब मजा आता है.
बड़े चूतड़ जब लड़की लडके के लंड पे रगडती है तो बहुत मजा आता है.

बड़े चूतडो के नुकसान -
बड़े चूतड़ के कारन लड़की असहज महसूस कर सकती है.
उसके बड़े चूतड़ लोगों के आकर्षण का कारण बनते है और सभी की निगाहें उसकी तरफ रह सकती है.
उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है.
उसे टॉप पहने में प्रॉब्लम हो सकती है और कुर्ती को अपनाना पड़ सकता है.
जरा सा दौड़ने या तेज चलने से उसके चूतड़ बहुत आगे पीछे होते है.
बड़े चूतडो के कारण कमर में दर्द रह सकता है.
बड़े चूतडो के कारन सेक्स में लडके की हालत खराब हो सकती है.
उसे बड़े चूतडो को सँभालने में काफी मुश्कत करनी पड़ती है.
बड़े चूतड़ लंड का कचूमर निकाल देते है.
जब लड़की लडके के ऊपर बैठ कर फुद्दी या गांड मरवाती है तो लड़कों को पता चलता है की निचे पिस कर क्या गुजरती है लड़की पे.
बड़े चूतड़ का अगर सही उपयोग करना है तो आप की बॉडी अच्छी होनी चाहिए, लंड मजबूत और देर तक टिके रहने वाला होना चाहिए. सही आसान भी बहुत काम आते है अगर बड़ी गांड न संभाली जाती हो.

ये मेरे अपने विचार थे. कुछ से आप सहमत होंगे तो कुछ से नही. अपने विचार भी दीजिए. मैंने ऊपर लिखी बाते अपने अनुभव से कही. क्यूंकि मेरी गर्लफ्रेंड के मम्मे और चूतड़ दोनों है बहुत मोटे मोटे और बड़े है. पर मैं तो उनसे खूब मजा लेता हू और खूब प्यार देता हूँ उसके सब अंगों को.

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