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प्रेग्नेंसी के अलावा पीरियड्स लेट होने के और क्या कारण हो सकते हैं

प्रेग्नेंसी के अलावा पीरियड्स लेट होने के और क्या कारण हो सकते हैं

अनियमित पीरियड्स होने का कारण सिर्फ प्रेग्नेंसी नहीं होता है बल्कि तनाव, सिरदर्द या प्रीमेनोपौज के कारण भी पीरियड्स मिस होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। अत्यधिक वजन बढ़ना या कम होने से भी पीरियड्स मिस हो सकता है।


अक्सर पीरियड्स मिस होने पर महिलाओं को गर्भवती होने की आशंका हो जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रहे हैं, तो पीरियड्स का मिस होना आपको उत्साह और अविश्वास की भावना महसूस करा सकता है। यदि आप गर्भधारण नहीं करना चाहते हैं, तो पीरियड्स के मिस होने से आपको डर या निराशा महसूस हो सकती है। प्रेग्नेंसी के अलावा पीरियड्स मिस होने के अनेकों कारण हो सकते हैं जैसे तनाव या मेनोपौज। आइए इसके अन्य कारण के बारे में जानते हैं। 
तनाव:
तनाव के कारण सिरदर्द, पिंपल्स, वजन बढ़ना के अलावा पीरियड्स मिस होने की संभावना भी हो सकती है। जब आप शारीरिक या भावनात्मक रूप से तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर तनाव हार्मोन एड्रेनालिन और कोर्टिसोल का उत्पादन करता है, जिसके कारण पीरियड्स मिस होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
वजन: आपका वजन आपके हाइपोथैलेमस को प्रभावित कर सकता है। कम कैलोरी का सेवन करने या वजन कम होने या अंडरवेट होने की संभावनाएं होती हैं जिसके कारण पर्याप्त मात्रा में एस्ट्रोजन रिलीज नहीं होता है जो यूटेरस की लाइनिंग को बनाता है। यह भी एक वजह है जिसके कारण पीरियड्स मिस होने की संभावना बढ़ सकती है। अत्यधिक वजन बढ़ना या कम होने से भी पीरियड्स मिस हो सकता है। [

बहुत एक्सरसाइज करने से:
बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने से एस्ट्रोजेन रिलीज नहीं होता है जिसके कारण पीरियड्स मिस होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। जो महिलाएं बैलेट डांसर, जिमनास्ट और एथलिट्स होती हैं उन्हें अमेनोरहिया(कुछ दिनों या महिनों के लिए पीरियड्स मिस होना) होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।
प्रीमैच्योर मेनोपॉज: मेनोपॉज होने की सामान्य उम्र 51 वर्ष होती है। प्रीमेनोपॉज एस्ट्रोजेन के निर्माण को कम कर देता है जिसके कारण समय से पहले मेनोपॉज हो जाता है और पीरियड्स भी अनियमित हो जाती है। प्रीमेनोपॉज के दौरान हो रहे हॉर्मोनल बदलाव के कारण भी पीरियड्स मिस होते हैं।
थायरॉयड के कारण: जब थायरॉयड की समस्या होती है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म के लिए जिम्मेदार ग्रंथि ठीक से काम नहीं करता है जो असामान्य माहवारी के परिवर्तन के लिए जिम्मेदार होता है। इस वजह से भी पीरियड्स मिस हो सकता है।

भावनात्मक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है कैज्युअल सेक्स

जब दो सेक्सुअली एक्टिव व्यक्ति के एक-दूसरे के साथ केवल भौतिक आनंद के लिए यौन संबंध बनाते हैं तो इसे कैज्युअल सेक्स कहते हैं। हालांकि आज के समय में बढ़ते इस चलन के कई हानिकारक प्रभाव भी हैं।



आज के समय में कैज्युअल सेक्स यानि केवल भौतिक सुख के लिए यौन संबंध बनाना एक सामान्य बात है। दूसरे शब्दों में इसे वन नाइट स्टैंड भी कहा जाता है। इस तरह के संबंध बिना किसी भावनात्मक लगाव या जुड़ाव के बनाएं जाते हैं। आमतौर पर ये संबंध एक बार बनाएं जाते हैं। इसमें किसी के साथ किसी भी प्रकार का यौन व्यवहार, विषमलैंगिक या समलैंगिक संबंध शामिल हो सकते हैं। दो अजनबी लोग बिना एक दूसरे को जाने-पहचानें, बिना कोई कमिटमेंट किए इस तरह के संबंध बना सकते हैं जिससे उनका मकसद केवल आनंद को प्राप्त करना होता है। हालांकि फिलोसॉफर्स का मानना है कि कैज्युअल सेक्स बेहद खतरनाक और हानिकारक हो सकता है। इन संबंधों का सीधा असर मनुष्य के भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ता है। आइए जानते हैं कैसे। 
ब्रेन और सेक्स: न्यूरोसाइंस रिसर्च में पता लगाया गया है कि किस से सेक्स ह्यूमन ब्रेन को प्रभावित करता है। एमआरआई तकनीक के जरिए सेक्सुअल एक्टिविटी के दौरान ह्यूमन ब्रेन को रीड किया गया जिसमें पता चला कि यौन संबंधों के कारण या तो व्यक्ति पूर्णता को प्राप्त करता है या इससे व्यक्ति को जीवनभर के लिए नुकसान हो सकता है। विज्ञान के अनुसार, सेक्स शारीरिक संबंधो से कहीं ज्यादा है। यह हमारे दिमाग में कई तरह के परिवर्तनों के जन्म देता है जो कि जीवनभर के लिए हो सकते हैं। ये आश्चर्यजनक स्तर पर सीधे हमारे भविष्य को प्रभावित करते हैं।

भावनात्मक प्रभाव: न्यूरोसाइंस के अनुसार, सेक्स मनुष्य के दिमाग में कई तरह के बायोकेमिकल प्रोसेस को बढ़ावा देता है। यौन संबंध बनाते वक्त पुरुष और महिला के दिमाग में केमिकल्स का स्राव होता है। महिलाओं के दिमाग में डोपामाइन और ऑक्सीटॉसिन नाम के केमिकल जबकि पुरुषों में डोपामाइन और वेसोप्रेसिन नामक केमिकल्स का स्राव होता है। डोपामाइन केमिकल एक फील-गुड केमिकल है। इस केमिकल के कारण यौन संबंध बनाने के बाद व्यक्ति उसकी आवृत्ति चाहता है और ऐसा ना होने के कारण वो भावनात्मक रुप से दुखी और उदास हो सकते हैं।
लगाव की कमी: कैज्युअल सेक्स के दौरान दो लोगों के बीच लगाव की कमी के कारण भी उनकी सेहत पर असर होता है। कोई भी सेक्सुअली एक्टिव कपल एक-दूसरे से ब्रेक-अप के बाद यौन संबंधों के लिए किसी नए व्यक्ति के साथ जुड़ सकते हैं। इसेक कारण उनके आत्म-सम्मान को क्षति पहुंचती ही है साथ ही निश्चित रूप से यह एक बड़ी समस्या है जिसे दूर करना बेहद मुश्किल है। जो लोग एक से दूसरे पार्टनर को बदल लेते हैं, उन्हें भी अधिक नुकसान पहुंचता है।

क्या करें: अगर कैज्युअल सेक्स आपकी सेक्सुअल इंटेग्रिटी पर बुरा असर नहीं डालता है, आप ऐसे संबंध बनाना चाहते हैं और सुरक्षित तरीके से इसका आनंद लेना चाहते हैं तो कैज्युअल सेक्स आपके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभााव नहीं डालता है। यदि आप भावनात्मक तरीके से जुड़ने वाले व्यक्ति हैं और आप सेक्सुअली कंजरवेटिव है तो आपके लिए कैज्युअल सेक्स एक उचित विचार नहीं होगा। 



महिलाओं का शरीर में यौन स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे कई संकेत दिख सकते हैं जिनको अगर डॉक्टर को नहीं दिखाया गया तो आगे जाकर बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं।





छोटे लक्षण भी कभी-कभी बड़ी समस्या का इशारा कर देते हैं। अगर आप किसी छोटे लक्षण के जरिए किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या का उपचार समय से कर पाए तो यह बेहतर होगा कि किसी भी छोटे लक्षणों को अनदेखा ना किया जाए। किसी भी समस्या की गंभीरता का पता लगाने के लिये हमें उसके विशेषज्ञ से मिलना जरुरी होता है। महिलाओं में ऐसे कई संकेत हो सकते हैं जो उनके लिये बड़ी समस्या का कारण बन सकते हैं। इन संकेतो को दिखने पर आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। [
मासिक धर्म में बहुत अधिक खून आना: पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग बहुत सी महिलाओं के लिए सामान्य बात होती है। यह गर्भनिरोधक गोलियों के कारण हो सकता है। इससे अलग अगर खून का स्राव अधिक है और कुछ दिनों तक लगातार हो रहा है तो बेहतर होगा कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। ये स्पॉटिंग पेल्विक इंफेक्शन, अल्सर, फाइब्रॉएड या पॉलीप्स का संकेत हो सकते है।
पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द होना:
सभी महिलाओं में दर्द की समस्या अलग हो सकती है और बहुत सी महिलाओं के लिये पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द सहन करना आम बात होती है। अगर आप इस तरह की ऐंठन और दर्द को सहन करने में समर्थ नहीं है तो यह एक बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। अगर आपको लंबे समय से इस तरह का दर्द हो रहा है तो इसमें चिंता की बात नहीं है। यह सामान्य हो सकता है। अगर ये दर्द अचानक होने लगा है और आपको ये बदलाव हाल ही में या कुछ समय से ही दिख रहे हैं तो इस पर ध्यान देने की जरुरत है। इसका पता लगाने के लिये आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। [
यौन संबंध बनाते वक्त दर्द अधिक होना: इंटरकोर्स के दौरान दर्द होना काफी आम है और इसे पॉजिशन बदल कर कम किया जा सकता है। अगर ऐसा करने से दर्द कम नहीं होता है तो इसका मतलब हो सकता है कि आंतरिक स्तर पर कोई समस्या हो। गहरे दर्द का अर्थ एंडोमेट्रियोसिस हो सकता है और अचानक तेज दर्द होने के पीछे का कारण ओवेरियन सिस्ट हो सकता है। फाइब्रॉएड या सर्विसाइटिस, एसटीआई या अन्य संक्रमण के कारण सर्विक्स में सूजन भी यौन सम्बंध बनाने के दौरान होने वाले दर्द का कारण हो सकते हैं। पेल्विक इंफ्लेमेंट्री डिजीज भी सेक्स के दौरान दर्द का कारण हो सकती हैं। हालांकि इन डिजीज में अधिकतर बार लक्षण नहीं दिखते हैं। इन सभी समस्याओं से बचने के लिये आपको समय पर विशेषज्ञ से संपर्क कर लेना चाहिए।
वजाइना में सूखापन: यौन सम्बंध के दौरान वजाइना में सूखापन होना फोरप्ले में कमी होने के कारण हो सकता है लेकिन अगर ये समस्या आपको हर रोज हो रही है तो आपका डॉक्टर आपको बता सकता हैं कि इसके पीछे क्या कारण हो सकता है। कुछ हार्मोनल बदलाव भी वजाइना में सूखापन होने का कारण हो सकते हैं जैसे मैनोपोज के समय होने वाले बदलाव। इसके लिये बेहतर है कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

वजाइना में सूजन, खुजली और दर्द होना: यौन सम्बंध को दौरान और बाद में वजाइना में खुजली, सूजन और दर्द की समस्या इंटरकोर्स के 36 घंटे बाद तक रहती है तो इसका कारण लेटेक्स एलर्जी हो सकता है। अधिकतर कंडोम लेटेक्स के बने होते हैं जिसके कारण महिला को इंटरकोर्स के दौरान संक्रमण हो सकता है और उसके कारण सूजन और खुजली हो सकती है। अगर ये लक्षण एक दिन या दो दिन से ज्यादा समय के लिये दिख रहे हैं तो कंडोम बदलने के बजाय गाइकनोलॉजिस्ट से बात करना उचित होगा। हो सकता है ये लक्षण वजाइनल इंफेक्शन के हो।

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