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वेजाइनल इचिंग के क्या कारण हो सकते हैं


वेजाइनल इचिंग के क्या कारण हो सकते हैं 

वेजाइनल इचिंग की समस्या आम होती है। बैक्टीरिया या यीस्ट के जमा हो जाने के कारण यह इंफेक्शन हो जाती है। यौन संचारित रोग या यीस्ट इंफेक्शन के कारण यह समस्या उत्पन्न हो जाती है जो कई बार परेशानी का सबब बन जाती है।



वेजाइनल इचिंग के कारण बहुत असहज महसूस होती है और साथ ही यह एक बहुत सामान्य समस्या भी है। वेजाइनल इचिंग के कारण सूजन और जलन की समस्या भी हो सकती है। इसके बहुत से ऐसे कारण होते हैं जिसे मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इसकी वजह से वेजाइनल इंफेक्शन भी हो सकती है। इस इंफेक्शन से बचने के लिए क्रीम, रेजर, टॉयपेपर के इस्तेमाल से परहेज करें। पैड्स, टैंपून्स, रेजर, पसीना या फेमिनीन डियोड्रेन्ट्स के कारण भी यह समस्या उत्पन्न होती है। इसके अलावा इसके और भी कई अन्य कारण होते हैं। [

यीस्ट इंफेक्शन: बहुत सी महिलाओं को वेजाइनल इंफेक्शन की समस्या होती है। वेजाइना में यीस्ट और बैक्टीरिया हो जाने के कारण वेजाइनल इंफेक्शन हो जाता है। इससे खुजली की समस्या होने लगती है। अगर वेजाइना के बैक्टीरिया को सही समय पर नियंत्रित नहीं किया जाएगा तो यीस्ट इंफेक्शन होने की संभावनाएं बढ़ जाएगी। यीस्ट इंफेक्शन को एंटीफंगल मेडिकेशन की मदद से ठीक किया जा सकता है।

बैक्टीरियल वेजीनोसिस: बैक्टीरियल वेजीनोसिस वेजाइनल इंफेक्शन होने का एक सबसे प्रमुख कारण होता है और यह स्वस्थ बैक्टीरिया में असंतुलन और योनि पीएच में परिवर्तन के कारण होता है। यह भी यीस्ट इंफेक्शन की तरह ही होता है, लेकिन इसमें जो डिस्चार्ज होता है वो उसका बहाव पानी की तरह होता है और उसमें दुर्गंध भी होती है।
यौन संचारित रोग: किसी यौग संचारित रोग से ग्रसित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से भी वेजाइनल इंफेक्शन होता है। यौन संबंध बनाते वक्त वेजाइना के पास क्रैब या प्यूबिक लाइस जमा हो जाता है जिसके कारण वेजाइनल इंफेक्शन हो जाता है। ये उस हिस्से में खुजली का भी कारण बनते हैं। एंटीबायोटिक और एंटीपैरासाइटिक मेडिकेशन से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

हार्मोन की वजह से: पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज या फिर बर्थ कंट्रोल पिल्स की वजह से हार्मोन में बदलाव आ सकता है जिसके कारण भी वेजाइनल इचिंग की समस्या उत्पन्न होती है। हार्मोन में बदलाव आने की वजह से वेजाइना में सूखापन आ जाता है, जिसके कारण कभी-कभी दर्द या सूजन भी महसूस होती है।

इन तरीकों से जानें कि आपका पीरियड क्रैम्प सामान्य है या नहीं

पीरियड के दौरान दर्द होने का मुख्य कारण गर्भाशय की मांसपेशियों में खिंचाव होना होता है। यह खिंचाव एक केमिकल के कारण होता है जिसे प्रोस्टाग्लैंडीन(prostaglandins) कहते हैं। यह केमिकल एंडोमेट्रियल टिशू को निकालने में मदद करता है।



मासिक धर्म(पीरियड) के दौरान दर्द होना महिलाओं के लिए आम समस्या है और आप इस अनुभव को एक निश्चित अवधि के बाद महसूस करती हैं, लेकिन मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को सहन किया ही जाए ऐसा कोई नियम नहीं है। अगर इस बार आपके पीरियड क्रैम्प पहले से अधिक हैं और आपके सहन करने की सीमा से बाहर है तो इसके पीछे कोई असामान्य वजह हो सकती है। यहां कुछ तरीके बताए गए हैं जिनसे आप पता कर सकती हैं कि आपके पीरियड क्रैम्प सामान्य हैं या नहीं। [

आप सामान्य रुप से काम नहीं कर पा रही हैं:
अगर मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द के कारण आपके हर रोज की गतिविधियां प्रभावित हो रही है और आप नियमित तरीके से अपना काम करने में खुद को असमर्थ महसूस कर रही हैं तो इसका अर्थ हो सकता है कि आपके पीरियड क्रैम्प सामान्य नहीं है और आपको केवल विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

दर्द निवारक दवाएं असर नहीं कर रही:
पीरियड के दौरान दर्द होने का मुख्य कारण गर्भाशय की मांसपेशियों में खिंचाव होना होता है। यह खिंचाव एक केमिकल के कारण होता है जिसे प्रोस्टाग्लैंडीन(prostaglandins) कहते हैं। यह केमिकल एंडोमेट्रियल टिशू को निकालने में मदद करता है। इस तरह का दर्द महिलाओं को थोड़ा असहज कर देता है लेकिन जब यह दर्द इतना ज्यादा हो जाए दर्द निवारक दवाएं भी काम ना करें तो इसका अर्थ है आपके पीरियड क्रैम्प सामान्य नहीं हैं। [

दर्द अगर तीन दिन से ज्यादा हो:
सामान्य तौर पर मासिक धर्म के दौरान होने वाला दर्द और खिंचाव आपके पीरियड आने से 24 घंटे पहले शरु हो जाता है और यह पीरियड के दौरान तीन दिन तक रह सकता है। अगर आप इस समय अवधि से ज्यादा वक्त के लिये दर्द और खिंचाव महसूस कर रही है और पीरियड खत्म होने के बाद भी आपका दर्द बन्द नहीं हो रहा तो आपका पीरियड क्रैम्प सामान्य नहीं है।
मतली, डायरिया और बुखार:
कई महिलाओं को पीरियड के दौरान मतली, दस्त और बुखार की समस्या हो सकती है। कुछ स्थितियों में ये सामान्य हो सकती है। हालांकि अगर यह समस्या अचानक होती है और आपके मासिक धर्म के लिए असामान्य है तो आपको गाइकोनोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए, खासतौर पर जब आपको बुखार और चक्कर आ रहे हो। पेल्विक में दर्द होने पर भी डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा


मेनोपौज़ की स्थिति में दिखाई देते हैं यह लक्षण

मेनोपौज़ में पसीने का आना बहुत आम बात है। इस दौरान हार्मोंस के स्तर में बदलाव के कारण सिरदर्द होता है।


मासिक धर्म के स्थायी रूप से बंद हो जाने को मेनोपौज़ कहा जाता है। मेनोपौज़ होने पर स्त्री के शरीर में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के पविर्तन होने लगते हैं। इसके बंद होने से महिलाओं को विशेष कष्ट होता है। इसका सबसे उल्लेखनीय लक्षण है, मासिक धर्म का धीरे-धीरे कम हो जाना। हालांकि इसके शुरू होने से पहले ही कुछ ऐसे लक्षण प्रकट होते हैं, जो यह सूचित करते हैं कि मेनोपौज़ बस अब पास ही है। अधिकतर औरतों में मेनोपौज़ 45 वर्ष से 55 वर्ष के बीच में होता है।

मेनोपौज़ में परिवर्तन के कुछ लक्षण:
1.पसीना आना:
मेनोपौज़ में पसीने का आना बहुत आम बात है। ऐसे में आपको अधिक तीखा, तला हुआ खाना, तनाव, शराब, कॉफी या गर्म जगह पर रहना आपकी परेशानी और बढ़ा सकता है। अगर आपका वजन ज़्यादा है तो आप उसे कम कर लें। सोयाबीन खाने से आपकी परेशानी कम हो सकती है। कोशिश करें कि ज़्यादा से ज़्यादा ठंडी जगह पर काम करें। व्यायाम करने से भी आप अपनी इस परेशानी को दूर कर सकते हैं। [

2. योनि(Vagina) का सूखापन:
प्राकृतिक लुब्रीकेशन जो योनि(Vagina) की परतों पर होता है और जो कामोत्तेजना के दौरान बढ़ जाता है, मेनोपौज़ के दौरान इसकी मात्रा कम हो जाती है। योनि(Vagina)में सूखापन आ जाता है और आपको परेशानी महसूस होने लगती है।

3.थकान:
हालांकि थकान कई अन्य परिस्थितियों का भी लक्षण है, परंतु दिए गए उपरोक्त लक्षणों के साथ यदि थकान होती है तो मेनोपौज़ की ओर इशारा करता है। नींद पूरी होने के बावजूद थकान महसूस करना या रोज़मर्रा के कामों को करने में भी थकान महसूस होना इसका लक्षण है।
4.चिंता:
मनोदशा परिवर्तन के साथ चिंता भी मेनोपौज़ का एक लक्षण है। जो चीज़ें आप पहले आसानी से करते थे, उन्हें करने में भी आपको चिंता हो सकती है, या आपकी पहली चिंताएं बढ़ सकती हैं। यदि आपकी चिंता बढ़ती जा रही है तो आपको जल्द-से-जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए, वरना आपकी परेशानी बहुत बढ़ सकती है।

5.सिरदर्द होना: 
हार्मोंस के स्तर में बदलाव के कारण सिरदर्द होता है। इसमें कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है कि मेनोपौज़ के दौरान भी आपको सिरदर्द हो सकता है। यदि आप अपने पूरे जीवन में सिरदर्द से परेशान रहे हैं तो मेनोपौज़ के दौरान यह परेशानी और बढ़ सकती है या बदल सकती है।

6.यूरिनेशन में परेशानी:
मेनोपौज़ में यूरिनेशन के दौरान बहुत परेशानी होती है साथ ही जलन होना भी आम बात होती है। मेनोपौज़ के समय यूरिन में इनफेक्शन होने की संभावना बढ़ सकती है।

मेनोपौज़ के कुछ और लक्षण:
*बालों का पतला होना या गिरना
*सेक्स के प्रति रुची कम होना
*घबराहट होना
*जोड़ों में दर्द रहना
*पाचनशक्ति कमजोर हो जाना
*समय से पहले झुर्रियां पड़ने लगना
मेनोपौज़ के लक्षणों से आराम पाने के उपाय :
ऐक्यूपंचर के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। जो महिलाएं मेनोपौज़ की शिकार होती हैं, उनके लिए ऐक्यूपंचर वरदान है। यह एक प्राकृतिक इलाज है जिसमें ट्रीटमेंट के दौरान शरीर के कई हिस्सो में सुई चुभोई जाती है|

1.डिप्रेशन कम करना: 
मेनोपौज़ में औरतों के मूड बदलते रहते है। कभी-कभी तो यह डिप्रेशन का रूप लेने लगता है। ऐक्यूपंचर करवाने से आपके शरीर के होर्मोन बैलेन्स होते हैं और मूड स्विंग्स से छुटकारा भी मिल जाएगा। [

2.शरीर का दर्द: 
ऐक्यूपंचर की सहायता से आपके शरीर में हो रहे खिंचाव और दर्द भी कम हो जाते हैं|

3.थकान से राहत: 
मेनोपौज़ के समय महिलाओं को थोड़ा सा ही काम कर लेने पर थकान लागने लगती है। इसके कारण शरीर के में होर्मोन बढ़ता घटता रहता है। ऐक्यूपंचर आपके शरीर की ऊर्जा को भी बढ़ाता है और थकान से भी राहत मिलती है।
4.हॉट फ्लैश का उपचार:
सर्वे के अनुसार ऐक्यूपंचर से एनडोरफिन नमक हार्मोन शरीर में रिलीज होता है। जो कि बहुत सी महिलाओं को हॉट फ्लैश से मुक्ति दिलवाने में मदद करता है।

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