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ये बीमारी किसी को भी किसी भी समय हो सकती है, जानिए अभी


ये बीमारी किसी को भी किसी भी समय हो सकती है, जानिए अभी


बारिश के मौसम में बीमारियों का होना लाजमी है. जब भी बारिश आती है तो अपने साथ में कई बीमारी भी लेकर आती है, जिसमे एक खांसी भी है. खांसी होना आम बात है लेकिन एक हद तक हो तो ठीक है, लेकिन अगर दो महीने तक खांसी पीछा ना छोड़े या फिर हर साल बारिश या ठंड शुरू होते ही खांसी ज़ोर पकड़ ले तो सावधान हो जाइए.
क्योंकि अधिक समय तक खांसी होने से आपको सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) भी हो सकती है. सीओपीडी फेफड़ों की एक क्रॉनिक बीमारी है. इसमें सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और उनमें सूजन जाती है. यह सूजन लगातार बढ़ती रहती है, जिससे आगे चलकर फेफड़े छलनी हो जाते हैं. इसे एम्फायसेमा कहते हैं. यह बीमारी सांस में रुकावट से शुरू होती है और धीरे-धीरे सांस लेने में मुश्किल होने लगती है. इसे काला दमा भी कहा जाता है.

इस बीमारी के दौरान फेफड़े में एक काले तार का निर्माण हो जाता है. यह अस्थमा से अलग होता है. अधिकतर ऐसी महिलाएं जो गांव में लकड़ी पर खाना बनाती है, वो सीओपीडी की चपेट में जल्दी आ जाती हैं. घरों में खुली हवा का ना पहुंचना और गार्डन का ना होना सांस की बीमारियों का बड़ा कारण बन रहा है. ये एक ऐसी बीमारी है, जो हर उम्र के लोगों को किसी भी समय हो सकती है.
इस बीमारी के लक्षण
दो महीने तक अगर आपको निरन्तर बलगम वाली खांसी हो रही है तो जल्दी से डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता है. खांसी के सामान्य सिरप और दवाएं इसमें प्रभावी नहीं होंगी. सीओपीडी के लक्षण सामान्यत: 35 साल की उम्र के बाद ही नज़र आते हैं इसमें रोगी को इतनी खांसी आती है कि गले की नस फूल जाती है. साथ ही फेफड़े फैल जाते हैं. इससे सांस का आवागमन सामान्य के मुकाबले बाधित होता है.
बीमारी से बचने के उपचार
इस बीमारी से बचने के लिए सबसे पहले आपको चूल्हे के धुएं, धूल और प्रदूषण आदि से दूर रहना बहुत ही जरुरी है. इसके साथ ही ज्यादा प्रदूषण या कोहरा हो तो घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए. किचन में उठने वाले धुंए और मसालों की गंध से दूर रहिए. बत्ती वाले केरोसिन के स्टोव का उपयोग नहीं करना चाहिए. खाते समय सांस फूलने लगे तो जरा धीरे खाना खाइए. वजन ज्यादा है तो उसे नियंत्रित कीजिए. सीधे बैठकर नाक से सांस खींचकर मुंह से सीटी बजाते हुए धीरे-धीरे सांस छोड़ें. हल्का व्यायाम करना चाहिए एवं प्रतिदिन तीन किमी पैदल जरूर चलना चाहिए.
ये सावधानी जरुर रखनी चाहिए
इस बीमारी के दौरान आहार में फाइबर ज्यादा ले. अंकुरित अनाज खाना ज्यादा फायदेमंद है. दलिया, दूध के साथ ओट्स ले सकते हैं. डेयरी प्रोडक्ट में दूध तथा टोफू ले सकते हैं. कैफीनयुक्त पेय कॉफी-चाय, सोडा लेने से बचें. चावल की जगह ब्राउन राइस खाना चाहिए. फल में सेब, संतरा और स्ट्रॉबेरी खाना चाहिए, जबकि केले, पपीते, आलू बुखारे खाने से बचना चाहिए. सब्जियों में आप मटर, ब्रॉकली, पालक, चुकंदर खा सकते है ये फायदेमंद है. लेकिन हरी मटर, गाजर और टमाटर खाने से बचना चाहिए.

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