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कैसे तैयार करे अपना जिम बैग


कैसे तैयार करे अपना जिम बैग





सुबह को यदि आप जिम में एक्सरसाइज करके सीधे दफ्तर जाते हैं तो आपको जिम में व्यायाम करने के बाद तरोताजा दिखने के लिए कुछ ग्रूमिंग की वस्तुएं बैग में जरूर रखनी चाहिए. चलिये जानें कौन सी हैं जिम के बैग में रखी जाने वाली ये ग्रूमिंग की वस्तुएं.

1-ऑफिस के काम के बाद जब आप जिम जा रहे होते हैं या ज्यादा एक्सरसाइज करने के बाद आपको थकान महसूस होती है तो आपके बैग में रखी हुई न्यूट्रीशन बार खाने से आपको एनर्जी मिलती है. इसके अलावा यह आपकी मीठा खाने की इच्छा को भी दूर करेगी.


2-पेन किलर अर्थात दर्द निवारक क्रीम में मेंथाल होता है जो मांसपेशियों और जोड़ों के खिंचाव और दर्द को कम कर देता है. जीम या खेल-कूद के दौरान ये क्रीम या स्प्रे आपके आस होना ही चाहिए. यह मांसपेशियों की थकान दूर करने में भी मदद करती है. तो एक अच्छा सा पेन किलर क्रीम अपने जिम बैग में रखें. 


3-डियोड्रेन्ट एक सामान्य रूप से आवश्यक वस्तु है लेकिन कुछ लोग इसे नहीं रखते या फिर रखना भूल जाते हैं. एक्सरसाइज के बाद आपको नहाना चाहिए, स्टीम बाथ भी ले सकते हैं, लेकिन किसी कारण वश यदि न नहा पाएं तो ऐसी स्थिति में डियोड्रेन्ट काम आता है.


रोज नहाये ठन्डे ठन्डे पानी से

जाने जवान दिखने का राज





क्या आप त्वचा को निखारना चाहते हैं तो अपने घर में इन पौधों को लगायें ये पौधे बढ़ती उम्र के असर को रोकते है और आपको लंबे समय तक जवान बनाये रखते है.


1- कैमोमाइल एक प्राचीन पौधा है, जिसका कई औषधीय उपचारों में इस्तेमाल होता है. कैमोमाइल का सेवन हाइपरग्लिकेमिया, पेट की गड़बड़ी, मोटापे की समस्या और घबराहट की बीमारी के उपचार में मददगार है. कैमोमाइल पेट के साथ त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है. यह पेट की मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को सुचारु करता है, इससे खाना आसानी से पचता है. 


2-हल्दी अदरक की प्रजाति का पौधा है. कील मुंहासों पर लेप के रूप में इसे लगाने से या दूध में मिला कर त्वचा में लगाने से रंग निखरता है. गर्म दूध में लेने से कफ और खांसी ठीक होती है. दिल की बीमारियों में भी यह काफी लाभदायक मानी जाती है.


3-गुलमेहंदी के पौधे को ग्रीष्म ऋतु के शुरुआत में लगाया जा सकता है. मध्य गर्मियों में यह फूल खिलने लगते है. यह फूल गंद्धराज, गुलाब या केमिलिया की तरह के होते है और इन्हें सफेद, गुलाबी और लाल रंग जैसे कई रंगो में पाया जा सकता है. गुलमेंहदी के सुरक्षा के लिए आंशिक या पूर्ण सूरज की रोशनी पर्याप्त है.

चन्दन से पाए निखरी त्वचा
बच्चो को खिलाये पोष्टिक आहार





एक बढ़ते हुए बच्चे को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के साथ-साथ बीच में स्नैक्स की जरूरत होती है. आइये जानते है की क्या है बच्चो के लिए पोष्टिक आहार.. 


1-कार्बोहाइड्रेट और वसा- बच्चों में शारीरिक विकास के लिए जिस ऊर्जा और कैलोरी की जरुरत होती है उसकी पूर्ति कार्बोहाइड्रेट से होती है. स्कूल जाने की उम्र में बच्चे तेजी से विकास करते हैं, जिससे उनको भूख ज्यादा लगती है. 

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2-आयरन- आयरन खून बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है. आयरन खून बनाने के अलावा ध्यान और एकाग्रता को सुधारने में सहायता करता है. मांस, अंडा, मछली, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन के अच्छे स्रोत हैं. जब विटामिन सी से भरपूर भोजन हम करते हैं तो उस शाकाहारी खाने में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है.


3-विटामिन और खनिज- विटामिन और खनिज शरीर को स्वस्थ बनाता है, साथ ही शरीर के विकास में सहायता करता हैं. बच्चों के लिए आयरन और कैल्शियम बहुत आवश्यक हैं. बढ़ रहे बच्चे को अपनी हड्डियां और दांत मजबूत करने के लिए कैल्शियम की जरुरत होती है. दूध, दूध से बने पदार्थ और हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत है. किशोर अवस्था में बच्चों की कैल्शियम की आवश्यकता की पूर्ति केवल खाने से ही पूरी नहीं होती, बल्कि कुछ अतिरिक्त कैल्शियम सप्लिमेंट की जरुरत भी होती है.


कैंसर से बचना है तो पिए दूध में दालचीनी...
र्स्ट एड देने का सही तरीका


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कई बार फर्स्ट एड के दौरान हम ऐसी गलतियां कर देते है जो असल में हमारे लिए नुकसानदायक हो जाती है. जैसे कटने पर कई दिनों तक बैंडेज लगा कर रखना, मोच या फ्रैचर पर गर्म सिकाई करना, जले पर मक्खन लगाना. अगर आप भी इन आम फर्स्ट एड से जुड़ी गलतियों को कर रहे हैं तो इसे ज़रूर पढ़े 


1-धूल, कण या अन्य किसी वस्तु के आंख में जाने पर जलन पैदा होने लगती है. ऐसा में हम फर्स्ट एड के लिए अपनी आंखों को मलने लगते हैं. लेकिन आंखों को मलना इस समस्या से छुटकारा पाने में मदद नहीं करता बल्कि अपनी आंख को अधिक नुकसान हो सकता है. इस समस्या से बचने के लिए अपनी आंखों को पानी के साथ धोये, लेकिन अगर फिर भी आप असुविधा अनुभव करते हैं तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें.


2-दर्द पर गर्म सिकाई करना, दर्द को दूर करने में फायदेमंद होता है. लेकिन गर्म सिकाई मोच या फ्रैक्चर पर काम नहीं करती है. मोच पर गर्म सिकाई करने से सूजन और भी बढ़ सकती है. मोच पर आपको बर्फ, कम्प्रेशन, एलिवेशन और आराम करने जैसे उपचार करने की आवश्यकता होती है.


3-अक्सर हम जलने पर फर्स्ट एड के तौर पर मक्खन लगा लेते हैं. लेकिन जले पर मक्खन लगाना बहुत बड़ी भूल है. यह चिकना होता है और गर्मी को अंदर ही दबाकर हीलिंग को मुश्किल बना देता है. इसकी बजाय दर्द और जलन को कम करने के लिए जले पर ठंडा पानी डालें. साथ ही प्रभावित हिस्से को सूखने में मदद के लिए धीरे से कवर कर दें.


चेहरे को धोये नारियल के पानी से
पानी पीने के लिए ना करे प्यास लगने का इंतज़ार

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आप जितना पानी पियेंगे शरीर उतना ज्यादा ठंडा रहेगा. साथ ही चेहरे की नमी भी बनी रहेगी और बीमारियों से भी बचाव होगा. आइए हम आपको बताते हैं कि पानी पीने के लिए प्यास लगने का इंतजार क्यों न करें. 


1-एक्सरसाइज करने के दौरान पसीने में शरीर का पानी निकल जाता है जिसके बाद प्यास लगना लाजिमी है औऱ एक्सरसाइज के तुरंत बाद पानी पीना शरीर के लिए नुकसानदायक है. ऐसे में अगर एक्सरसाइज करने से पहले पानी नहीं पीते हैं तो एकसरसाइज के दौरान या बाद में पानी की कमी की वजह से बेहोशी भी आ सकती है. तो इन समस्याओं से बचने के लिए एक्सरसाइज से पहले पानी जरूर पीएं.


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2-खाने से पहले पानी पीना मतलब अमृत पीना. खाने के बीच में पानी पीना मतलब दवाई खाना. खाने के तुरंत बाद पानी पीना मतलब जहर लेने के सामान होता है क्योंकि खाना खाने के दौरान और खाना खाने के बाद लार ग्रंथि में से ज्वलनशील गैस निकलती है जो खाना पचाने में मदद करती है. लेकिन ये गैस शरीर को काफी गर्म कर देती है. ऐसे में ये ज्वलनशील गैस की वजह से कभी-कभी शरीर डीहाइड्रेट हो जाता है. अगर खाने के बाद ही पानी पी लेते हैं तो ये गैस ठंडी हो जाती है और पाचन क्रिया बाधित हो जाती है जिससे कब्ज की समस्या होती है.


तुलसी से पाए डेंड्रफ से छुटकारा
यमित रूप से करे खीरे का सेवन

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सलाद के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले खीरे में इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है. खीरा पानी का बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसमें 96% पानी होता है. खीरे में विटामिन ए, बी1, बी6 सी,डी पौटेशियम, फास्फोरस, आयरन आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं. नियमित रुप से खीरे के जूस शरीर को अंदर व बाहर से मजबूत बनाता है.


1-खीरा के नियमित सेवन से कैंसर का खतरा कम होता है. खीरे में साइकोइसोलएरीक्रिस्नोल, लैरीक्रिस्नोल और पाइनोरिस्नोल तत्व होते हैं. ये तत्व सभी तरह के कैंसर जिनमें स्तन कैंसर भी शामिल है के रोकथाम में कारगर हैं.


2-जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन लोगों के लिए खीरे का सेवन काफी फायदेमंद रहता है. खीरे में पानी अधिक और कैलोरी कम होती है, इसलिए वजन कम करने के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है. जब भी भूख लगे तो खीरे का सेवन अच्छा हो सकता है. सूप और सलाद में खीरा खाएं. खीरा में फाइबर होते हैं जो खाना पचाने में मददगार होते हैं.


3-खीरा खाने से मसूडों की बीमारी कम होती हैं. खीरे के एक टुकड़े को जीभ से मुंह के ऊपरी हिस्से पर आधा मिनट तक रोकें. ऐसे में खीरे से निकलने वाला फाइटोकैमिकल मुंह की दुर्गंध को खत्म करता है.


कोल्डड्रिंक को ना पिए चुस्कियो के साथ


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कोल्ड ड्रिंक सभी को अच्छा लगता है. लेकिन याद रखिए, ज्यादा ठंडा पेय पीना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है. गले, दाँत व पाचन क्रिया को ये अत्यधिक ठंडे पेय प्रभावित करते है. इनका प्रयोग अवश्य करे लेकिन कुछ सावधानियों के साथ -


1-शक्करयुक्त शीतल पेय को भोजन के दौरान पिएँ. भोजन की उपस्थिति से सोडा का कैविटी बनाने वाला असर मंद पड़ जाता है और दाँत स्वस्थ रहते हैं.


2- सोडा वाले पेय को चुस्की ले-लेकर धीरे-धीरे न पिएँ. चुस्कियाँ लेने से दाँत मीठे अम्लीय शर्बत में पूरी तरह नहा जाते हैं और यह अम्ल दाँतों के एनामेल को नुकसान पहुँचाता है, इसलिए शीतल पेय को जल्दी-जल्दी पिए .


3-सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम लेते हैं. शीतल पेय न सिर्फ आपके भोजन में मौजूद कैल्शियम को बर्बाद करते हैं, बल्कि आपके शरीर में पहले से मौजूद कैल्शियम को भी सोख लेते हैं. कैल्शियम के सप्लीमेंट्स लेने से ही इसके नुकसान भरपाई हो सकती है 


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स्वस्थ रहना है तो करे दूध के साथ इन चीजो का सेवन
अजीब बीमारी है ईटिंग डिसऑर्डर
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आज लोग कई हालातों में इटिंग डिसॉर्डर से पीडित नज़र आते हैं। कुछ लोग दुख में अधिक खाते हैं तो कुछ कम, कुछ बेचैनी में खाते हैं तो कुछ गुस्से में। ये विकार कंप्लसीव इटिंग, इमोश्नल इटिंग, बिंग इटिंग व एनोरेक्सिया नर्वोसा जैसे नामों से जाने जाते हैं। इस तरह की बीमारियों का शिकार मर्द व औरत दोनों हो सकते हैं। आत्मविश्वास की कमी, तनाव, दुख या अकेले रहने की इच्छा के कारण मर्दों में इटिंग डिसॉर्डर नज़र आ सकते हैं।


इस बीमारी से पीडित व्यक्ति अक्सर अपने आसपास के लोगों व हालातों को अपने बस में करने की कोशिश करता है। परंतु जब वह ऐसा नहीं कर पाता तो यह रोग उसमें स्पष्ट नज़र आने लगता है। एनोरेक्सिया नर्वोसा, बुलिमिया नर्वोसा व बिग इटिंग डिसॉर्डर पुरुषों में नज़र आने वाले कुछ आम प्रकार के इटिंग डिसॉर्डर हैं। यदि आप इस बीमारी को बढने से रोकना चाहते हैं तो इसे शुरूआत में पहचानना होगा। यह बीमारी इतनी बडी नहीं है कि कोई व्यक्ति इससे बाहर नहीं आ सकता।


आपको बस केवल अपने डर या अपने अंदर छुपे दुख से लड़ना है. इस बीमारी से निपटने में व्यक्ति का परिवार, दोस्त व रिश्तेदार सहायक साबित हो सकते हैं। हालांकि कुछ लोग इस बीमारी को बताने में झिझक महसूस कर सकते हैं। लेकिन रोगी के परिवारजनों को समझना होगा कि रोगी को इस बीमारी से बाहर निकालना बहुत जरूरी है क्योंकि फिर ही वह अपनी ज़िंदगी को आम लोगों की तरह जी सकता है।

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नियमित रूप से करे खीरे का सेवन
घर पर ही बनाये शानदार ट्राइसेप्स



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पूरे आर्म में ट्राइसेप्स की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी होती है। अगर आप चाहते हैं कि आपके बाइसेप्स नजर आएं तो आपको ट्राइसेप्स पर बाइसेप्स से ज्यादा मेहनत करनी होगी क्योंकि बाइसेप्स हमारे बाजू का अगला हिस्सा है मगर यह पूरे बाजू का करीब 30 फीसदी ही है। इसलिए ट्राइसेप्स का भरा भरा होना जरूरी है। आज आपको कुछ ऐसी एक्सरसाइज के बारे में बताते हैं जिनसे बिना जिम जाये घर पर ही ट्राइसेप्स का साइज और शेप हासिल कर सकते हैं।


सिंगल हैंड पुश अप्स काफी टफ एक्सरसाइज है। इससे पूरे ट्राइसेप्स पर बहुत बढ़िया प्रेशर बनता है। इस कसरत को करते वक्त इतना जरूर याद रखें कि पैर खुले रहेंगे और इस बात की परवाह न करें कि आप टेढ़े जा रहे हैं। इसमें आपकी बॉडी तिरछी ही जाती है उसे जबरदस्ती सीधा रखने की कोशिश न करें, जिस नेचुरल मूवमेंट में बॉडी जा रही है उसे जाने दें। सिगल हैंड पुश अप्स को हमेशा तभी करें जब बॉडी गर्म हो चुकी हो। बड़े और भरे भरे ट्राइसेप्स बनाने हैं तो ट्राएंगल पुश अप्स सबसे बेस्ट एक्सरसाइज है। इसकी गिनती ट्राइसेप्स की टॉप 5 कसरतों में होती है। यह पूरे ट्राइसेप्स पर काम करती है। यह गेनिंग की एक्सरसाइज है।

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कोशिश करें कि आपकी हथेलियों से परफेक्ट ट्राएंगल बने। यानी आपके अंगूठे और अंगूठे के साथ वाली उंगली एक दूसरे को टच करते हुए त्रिकोण बनाये। बेंच डिप की खासियत ये है कि यह ट्राइसेप्स के तीनों हिस्सों पर काम करती है। यह साइज भी बढ़ाती है और शेप भी देती है। इसे टफ बनाने के तीन तरीके हैं। पैरों को ऊंचाई पर रखें, पैरों पर वेट रखें और हाथों की ग्रिप को बदलने का। अगर आपकी डाइट अच्छी नहीं होगी तो कोई कसरत काम नहीं करेगी। अगर आप बॉडी बिल्डिंग कर रहे हैं तो आपको अपने बॉडी वेट के प्रतिकिलो पर दो से तीन ग्राम प्रोटीन लेना होगा। कार्ब और फैट का भी ध्यान रखना होगा। तभी आप कम वक्त में अच्छा शरीर हासिल कर पायेंगे।

फर्स्ट एड देने का सही तरीका
डाइबिटीज से भी बचाता है पनीर


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दूध और उससे बने अन्य डेरी प्रोडक्ट्स हमारे सेहत के लिए हमेशा फायदेमंद होते हैं। दूध से होने वाले फायदों के बारे में तो हम सब जानते ही है। इस से बने छाछ, दही, घी भी किसी न किसी तरह हमारी सेहत को फायदा पहुँचाते है। पनीर का सेवन हम सब करते है. कभी सब्जी के रूप में तो कभी ऐसे ही खाते हैं। पनीर भी हमारी बॉडी के लिए बहुत फायदेमंद है। आइये देखते हैं की पनीर खाने से क्या क्या लाभ होते हैं।


पनीर का सबसे बेहतरीन लाभ है कि यह आपकी हड्डिेयों और दांतों को मजबूत बनाता है साथ ही कैल्शिइयम और फास्फोरस का एक बढ़िया स्त्रोत भी है। रोजाना पनीर का सेवन हड्डयिों की समस्या, जोड़ों में दर्द और दांत के रोगों से बचाए रखने में बेहद मददगार है। पाचन और पाचन तंत्र के लिए मेटाबॉलिज्म का रोल बहुत महत्वपूर्ण है। पनीर में अत्यधिक मात्रा में डायट्री फाइबर होते हैं जो भोजन के पाचन में बेहद मददगार साबित होता है। यह पाचन तंत्र के सुचारू रूप से चलने के लिए बेहद फायदेमंद और महत्वपूर्ण है। ओमेगा 3 से भरपूर पनीर डाइबिटीज से भी बेहद प्रभावी तरीके से लड़ता है।


विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि वे भी अपने डाइबिटीज रोगियों को रोजाना पनीर को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि पनीर दोनों टाइप के डाइबिटीज के लिए प्रभावी साबित होता है। दूध से बनने के कारण पनीर में भी दूध के गुणों का भंडार है, जिनमें ऊर्जा का स्त्रोत भी शामिल है। शरीर में तुरंत ऊर्जा के लिए पनीर का सेवन फायदेमंद है। बॉडी ट्रेनिंग करने वालों के लिए यह और भी फायदेमंद है।


बच्चो को भी हो सकती है टाइप 2 डाइबिटीज़
अस्थमा रोगी अपनाएं ये घरेलु नुस्खें
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लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।


अदरक का एक चम्मच ताजा रस, एक कप मैथी के काढ़े और स्वादानुसार शहद इस मिश्रण में मिलाएं। दमे के मरीजों के लिए यह मिश्रण लाजवाब साबित होता है। दमा रोगी पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और पानी से उठती भाप लें, यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद होता है। 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।


180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।


मैथी का काढ़ा तैयार करने के लिए एक चम्मच मैथीदाना और एक कप पानी उबालें। हर रोज सबेरे-शाम इस मिश्रण का सेवन करने से निश्चित लाभ मिलता है।

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एक पका केला छिलका लेकर चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक छोटा चम्मच दो ग्राम कपड़ा छान की हुई काली मिर्च भर दें। फिर उसे बगैर छीले ही, केले के वृक्ष के पत्ते में अच्छी तरह लपेट कर डोरे से बांध कर 2-3 घंटे रख दें। बाद में केले के पत्ते सहित उसे आग में इस प्रकार भूने की उपर का पत्ता जले। ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें।


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अस्थमा अटैक में पिए कॉफ़ी

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