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फल सब्जी खाओ, बीमारियों को भगाओ


फल सब्जी खाओ, बीमारियों को भगाओ
फल सब्जी खाओ, बीमारियों को भगाओफल सब्जी खाओ, बीमारियों को भगाओ
जब भी हम बीमार होते है तो सीधे अस्पताल का रास्ता नापते है. फिर वहां जाकर डॉक्टर्स की फीस, अस्पताल के बिल और महँगी दवाई पर पैसे खर्च करते है. लेकिन यदि आप यही पैसे कुछ दिनों पहले ताजे फलों और हरी भरी सब्जियों को खाने में खर्च करते तो बीमार होने की नौबत नहीं आती. 
पपीता, संतरा और विटामिन सी से भरपूर खट्टे फल, लीवर में पाए जाने वाले कार्सिनोजन को खत्म करने और कैंसर की कोशिकाओं को रोकने में मदद करते हैं. गाजर, आम, कद्दू, बीटा नामक कैरोटीन्स कैंसर को खत्म करने वाले कारक के रूप में जाने जाते हैं. यह मूत्राशय, पेट और स्तन कैंसर की रोकथाम में भी असरदार हैं.
टमाटर और तरबूज में लाइकोपीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है. यह एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट है. जो कैंसर की रोकथाम में मदद करता है. फलियों में स्टार्च पाया जाता है, जो बड़ी आंत की कोशिकाओं को स्वस्‍थ बनाता है और पेट के कैंसर को दूर करता है. ब्रोकली में सेलेनियम होता है. ये तत्व मेलेनोमा और प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए अच्छा माना जाता है.

स्नैक्स खा कर आप दे रहे है बीमारियों को न्यौतास्नैक्स खा कर आप दे रहे है बीमारियों को न्यौता
ऑफिस में या टाइम पास के तौर पर हम वो खाते हैं जो मिल जाता है या जो दोस्त खिला देते हैं. हमारी यही आदत दिल की दुश्मन तो है ही, कैंसर जैसे गंभीर रोग को भी न्यौता देती है. क्योंकि स्नैक्स में जो स्वाद आपको भाता है, वही तो बीमारियां लेकर आता है.
दिल संबंधी बीमारी, लिवर में गड़बड़ी, किडनी में परेशानी और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की मोटे तौर पर दो वजहें सामने आ रही हैं. नंबर एक हमारे काम करने के तौर तरीके और दूसरी बात हमारी खाने पीने की आदतें. ऑफिस मे बैठे-बैठे या सफर के दौरान या टीवी देखते हुए नमकीन, आलू चिप्स,चाय कॉफी, पकौड़े पैक्ड स्नैक्स खाना आम बात है. 
यह स्नैक्स हमारी भूख तो शांत करते हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं. ऐसे स्नैक्स टाइप-2 डायबीटीज, बेड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाना, बॉडी को सही मात्रा में इंसुलिन न मिलना, काम के समय नींद आना, आलस, हाई बीपी जैसी प्रॉब्लम को पैदा करते हैं.


गर्मी में इन चीजों को ना रखे फ्रिज में
गर्मी का मौसम है और इस मौसम में फ्रिज आमतौर पर पूरा भरा रहता है. हम खाने पीने की हर चीज फ्रेश रखने के लिए फ्रिज में डाल देते हैं, मगर हर चीज को फ्रिज में रखना जरूरी नहीं होता. कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्‍हें फ्रिज में रखने से वो अपना स्‍वाद बदलने लगती हैं. 
टमाटर – टमाटर को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. इससे टमाटर के पकने की प्रोसेस रुक जाती है और उसका स्‍वाद बदलने लगता है. 
आलू – आलू जल्‍दी खराब होने वाली सब्‍जियों में से नहीं है. आलू को फ्रिज में रखने से उसमें मौजूद स्‍टार्च शुगर में बदलना शुरू हो जाती है. 
लहसुन – लहसुन को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. इसकी तासीर वैसे भी गर्म है. लहसुन को फ्रिज में रखने से वह अपना स्‍वाद खोने लगता है. 
ब्रेड – ब्रेड तो पहले ही बासी चीज होती है उसे फ्रिज में रखने से आप उसे और बासी कर देते हैं. ब्रेड को फ्रिज में रखने से उसमें का पानी और कम हो जाता है और वह सूखने लगती है. 
अचार, जैम वगैरा – अचार, जैम, टोमेटो सॉस या सोया सॉस को फ्रिज में रखने की कोई जरूरत नहीं है. यह सब कमरे के तापमान पर लंबे समय तक चल सकते हैं. फ्रिज में रखने से इनकी उम्र पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा बल्‍कि इनके स्‍वाद में बदलाव आ जाएगा.


कच्चा केला खाने के लाभकच्चा केला खाने के लाभ
कच्चा केला पोटेशियम का खजाना होता है जिसकी मदद से आप प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बना सकते हैं. यही नहीं, इसको खाने से आपकी बॉडी में हमेशा उर्जा रहेगी और आप खुद को सक्रिय पाएंगे. इसमें मौजूद विटामिन B6, विटामिन C आपको उर्जा देती है. कच्चे केले में स्टार्च भी मौजूद होता है और साथ ही एंटीऑक्सीडेंट भी. आपको बता दें कच्चा केला खाना आपके सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. 
वजन घटाने में: जो लोग अपने मोटापे को लेकर परेशान हैं उन्हें कच्चा केला जरूर खाना चाहिए. इसमें मौजूद फाइबर आपके बॉडी के अनचाहे फैट को साथ ही जहरीली चीजों को साफ करने में मददगार होता है.
कब्ज का रामबाण इलाज: जैसे कि हमने ऊपर आपको बताया कि कच्चे केले में फाइबर और हेल्दी स्टार्च मौजूद होते हैं जो आपकी आंत को हमेशा साफ रखने में मदद करता है. यह आंत में किसी भी प्रकार की गंदगी को साफ करता है और हेल्दी बनाता है. अगर आपको कब्ज की शिकायत है तो कच्चा केला खाना शुरू कर दें. आपके लिए यह फायदेमंद रहेगा. 
भूख को शांत करने का उपाय: अक्सर लोगों को समय-समय पर भूख लगने की बीमारी होती है. ऐसे में कच्चा केला आपकी इस भूख को कम करने में मदद करता है. इससे फायदा यह होता है कि हम जंक फूड या कोई और बीमार पैदा करने वाले खाने से बच जाते हैं. 


रोज पांच बादाम खाओ, दवाइयों से निजात पाओरोज पांच बादाम खाओ, दवाइयों से निजात पाओ
आस्ट्रेलिया, कैलिफोर्निया, अफ्रीका और भारत में सबसे ज्यादा पाये जाने वाला बादाम प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनेरल का सबसे बड़ा स्रोत हैं. यह न केवल आपके व्यंजन के स्वाद को बढ़ाता है बल्कि इसके औषधीय फायदे भी हैं.
मस्तिष्क को सक्रिय और शारीरिक दुर्बलता को दूर करने के लिए बादाम का सेवन बहुत ही गुणकारी होता है. मिठाई और दूसरे व्यंजनों में इस्तेमाल किये जाने वाला बादाम उर्जा का सबसे अच्छा स्रोत है. लेकिन बहुत अधिक खाने पर मोटापा भी बढ़ सकता है. इसमें मौजूद वसा आपकी चर्बी को बढ़ा सकता है.
बादाम में सोडियम नहीं होने से हाई बल्डप्रेशर के रोगियों के लिये भी लाभदायक रहता है. इसके अलावा इसके सेवन से खांसी, डायबिटीज़, एनीमिया, पथरी जैसी समस्याओं से भी निजात मिलता है. रात को चार-पांच बादाम पानी में डालकर रख दें. सुबह उनके छिलके उतारकर पांच छोटी इलायची के साथ पीसकर उसमें थोडी-सी मिश्री मिला लें और पानी में मिलाकर पीने से पेशाब में जलन की समस्या दूर होती है.

बाजार से अखरोट खरीदने से पहले यह जरूर पढ़ेबाजार से अखरोट खरीदने से पहले यह जरूर पढ़े
अखरोट अधिक वर्षा वाले स्थानों पर पाया जाता है. यह सभी जगह उपलब्ध नहीं होता है. अखरोट सेहत के लिए अच्छा होता है इसमें कोई शक नहीं है. खास तौर पर दिल के मरीजों को इसे खाने की सलाह दी जाती है. इसका कारण यह है कि यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होता है. 
लेकिन बाजार में जिस तेजी से चीजों में मिलावट हो रही है. उसमे अखरोट भी शामिल है. अखरोट वैसे ही काफी महंगा आता है. ऐसे में कई लालची दूकानदार इसमें मिलावट कर इसे बेचने में परहेज नहीं करते है.

बाजार में आरारोट के नाम पर बिकनेवाले पदार्थ बहुधा या तो कृत्रिम होते हैं या उनमें अनेक प्रकार की मिलावटें होती हैं. कभी-कभी आलू,चावल, साबूदाना को महीन पीसकर आरारोट के नाम पर बेंच दिया जाता है. इसलिए अखरोट लेते समय सावधान रहना चाहिए. अच्छे से देख परख कर ही इसे खरीदना चाहिए.


इसलिए रोज खान चाहिए अखरोटइसलिए रोज खान चाहिए अखरोट
अखरोट के पाउडर को त्वचा पर टेलकम पाउडर और मॉश्चराइज के तौर पर इस्तेमाल करने पर साफ और सुंदर त्वचा मिलती है. वहीं अखरोट के उपयोग से कोलेस्ट्राल की मात्रा नियंत्रित रहती है. आरारोट शरीर में होने वाले दर्द से राहत दिलाता है. अखरोट में अमिलोपेक्टिन और अमीलोसे नामक 2 स्टार्च पाये जाते हैं, जो कैलोरी में कम और प्रोटीन मे ज्यादा होते हैं.
यह उनके लिए बहुत लाभदायक है जो अपना वजन कम करना चाहते हैं. अखरोट में भूर्ण के विकास में मदद करने के साथ ही कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद करता है. इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को अखरोट खाने की सलाह दी जाती है.
अखरोट पाचन तंत्र को सुधारने में मदद करता है. घाव भरने में भी अखरोट एक बेहतरीन दवा की तरह उपयोग में लाया जाता हैं. मसूड़ों में खून आने पार भी उपयोग में लाने पर आरारोट काफी फायदेमंद होता है. 




क्या रोज चीकू खाने से होता है फायदा?क्या रोज चीकू खाने से होता है फायदा?
कब्ज और दस्त की बीमारी को ठीक करने में सहायक चीकू खाने से आंतों की शक्ति बढती है और आंतें अधिक मजबूत होती हैं. कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन जैसे तत्वों से भरपूर चीकू शरीर की हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. नित्य इसका सेवन शरीर की कमजोरियों को दूर करता है. साथ ही कार्बोंहाइड्रेड और न्यूट्रिएंट से भरपूर चीकू स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी लाभकारी है.
हृदय और गुर्दे के रोगों में एक अहम भूमिका निभाने वाला चीकू एनिमिया होने से भी रोकता है. चीकू शीतल और पित्तनाशक है. इसका नित्य सेवन से पेशाब में जलन की परेशानी दूर होती है. चीकू उर्जा का एक बहुत ही अच्छा स्रोत है. यह कसरत और मेहनत के करने वालों के लिए एक टॉनिक के रूप में काम करता है.
यह दिमाग की तंत्रिकाओं को शांत और तनाव को कम करने में मदद करता है. पोटेशियम और सोडियम से भरपूर चीकू के सेवन से पेशाब में जलन की समस्या दूर होती है. जिन्हें कब्ज और दस्त की बीमारी हो उन्हें नियमित रूप से चीकू का सेवन करना चाहिए. स्वाद में मीठे और विटामिन सी स्रोत चीकू शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए ठीक रहता है. इसके अलावा यह गुर्दे के रोगियों के लिए भी गुणकारी है.


इसलिए रोज खाना चाहिए टमाटरइसलिए रोज खाना चाहिए टमाटर
डॉक्टर्स अक्सर टमाटर खाने की सलाह देते है. इसके पीछे कारण यह है कि टमाटर खाने के कई फायदे होते है. बच्चों को सूखा रोग होने पर आधा गिलास टमाटर के रस का सेवन कराने से फायदा होता है. दो या तीन पके हुए टमाटरों का नियमित सेवन करने से बच्चों का विकास शीघ्र होता है. 
शरीर का भार घटाने के लिए सुबह-शाम एक गिलास टमाटर का रस पीना लाभप्रद है. यदि गठिया रोग में एक गिलास टमाटर के रस की सोंठ तैयार करके उसमें एक चम्मच अजवायन का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से लाभ होता है. गर्भवती महिलाओं के लिए सुबह एक गिलास टमाटर के रस का सेवन फायदेमंद है.
डाइबिटीज व दिल के रोगों में भी टमाटर बहुत उपयोगी होता है. इसमें कैलोरिज कम होती है इसलिए सलाद के रूप में खाया जाता है. ये शरीर से कई तरह बीमारियों से मुक्ति दिलवाते हैं. टमाटर खाने वालों को कैन्सर

नींद का आनंद लेने वाले इसे जरूर पढ़ेनींद का आनंद लेने वाले इसे जरूर पढ़े
यह सोच पूरी तरह से गलत है कि हर इंसाान को एक बराबर सोना जरूरी है. अलग-अलग लोगों को अलग-अलग स्तर की नींद की जरूरत होती है. योग का एक आयाम या एक मकसद यह भी होता है कि नींद को कैसे घटाया जाए, क्योंकि नींद का मायने जिंदगी से पलायन भी है. कुछ लोग कहते हैं कि ‘मैं नींद का आनंद लेता हूं.’
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कोई भी व्यक्ति नींद का आनंद नहीं ले सकता. आप उस आराम का आनंद लेते हैं, जो नींद आपको देती है. नींद का आनंद लेने का कोई तरीका ही नहीं है, क्योंकि अगर आप वाकई सो रहे हैं तो नींद में आप और यह दुनिया दोनों ही गायब होते हैं. सुबह-सुबह पांच बजे जब आप उठना नहीं चाहते तो आप नींद का मजा लेने का बहाना कर रहे होते हैं. हो सकता है कि इससे आपको खुशी मिले, आराम मिले, मैं इसे समझ सकता हूँ. लेकिन आप जब वाकई सो रहे थे तो दरअसल आप वहां थे ही नहीं.
तो हम नींद का आनंद नहीं ले सकते, हम बस उस नींद से मिले नतीजों का आनंद ले सकते हैं. नींद हमें तनाव से जो मुक्ति देती है, हमें जो आराम देती है, हमारे शरीर को जो फिर से ऊर्जावान बनाती है, हम उसका आनंद लेते हैं. अगर नींद के बाद आपको भरपूर स्फूर्ति मिल जाती है तो संभव है कि नींद की अवधि अपने आप आश्चर्यजनक ढंग से कम हो जाए.
रोग नहीं होता. टमाटर के नियमित सेवन से पेट साफ रहता है.


सब्जियाँ खाओ, कैंसर भगाओ
हमें इन सब्जियों को एक-एक कर के रोज अपने भोजन में अवश्य इस्तेमाल करना चाहिए। जैसे- पालक, शिमला मिर्च, छोटी हरी मिर्च, पत्ता गोभी, हरी मटर, हरी मूँग, स्प्राउडड, मशरूम, ब्रोकली (हरी फूल गोभी)।

पत्ता गोभी- पत्ता गोभी जितनी ज्यादा हरी होती है, वह उतनी ही पोषक तत्वों से भरपूर होती है। सफेद पत्ता गोभी नहीं खायें। हरी पत्ता गोभी में विटामिन ई अधिक मात्रा में होता है। इसके अंदर का पीला हिस्सा विटामिन ए की पूर्ति करता है। छोटी पत्ता गोभी में बड़ी पत्ता गोभी से कहीं ज्यादा कैल्शियम होता है। इसमें पाये जाने वाला कोलोन कैंसर को रोकने में मदद करता है।

हरी मिर्च
– हरी मिर्च शिमला हो या पतली वाली, विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है। इसे सलाद, सब्जियों के तौर पर खायें। स्वाद एवं पौष्टिकता दोनों मिलेगी। ये कोशिकाओं की रक्षा करती हैं। हरी मिर्च के मुकाबले लाल मिर्च में विटामिन सी अधिक होता है। वायरल फीवर में अक्सर थ्रोट इन्फेक्शन हो जाता है। आप लाल मिर्च की चटनी खाते हैं, तो गले की खराश और गले का इन्फेक्शन ठीक हो जाता है।

मशरूम (जलकुंभी)- ये बेहद पौष्टिक सब्जी है। इसका इस्तेमाल सलाद सजाने के बहाने या सब्जी भी बना कर खा सकते हैं। इसका सूप पियें। कैल्शियम एवं आयरन भरपूर मात्रा में प्राप्त होता है।

ब्रोकली- ये हरी फूल गोभी कहलाती है। ये विदेशी सब्जी कहलाती है। यह गहरे हरे रंग की होती है। इसमें कैंसर विरोधी तत्व होते हैं। कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें हरे रंग के गुच्छे ज्यादा पौष्टिक होते हैं। विटामिन बी अधिक पाया जाता है, उबली ब्रोकली खायें, यानी सलाद, सूप के रूप में।

पालक– पालक एक सर्वसुलभ हरी सब्जी है। जिसे आप चाहें, तो बाजार से खरीदें, चाहें तो घर पर उगा सकती हैं। ज्यादा झंझट की जरूरत नहीं है। गमले में भी उगा सकती हैं तथा हर रोज एक गमले का पालक काट कर दाल, सब्जी, स्प्राउड में डाल कर जूस निकाल कर पी सकते हैं।

पालक की महिमा- विटामिनों का भंडार। गुणों से भरपूर। बुजुर्गों की ढलती उम्र में आँख की बीमारी के लिए कारगर है। पालक रक्त को शुद्ध करता है। इसका मतलब आपके शरीर के भीतर की सर्विसिंग करता है। पालक खाने वाले को रोग ही नहीं होता। यदि होता भी है, तो उसे मार भगाता है। यह इंसान तो क्या जानवरों के लिए भी उपयोगी है। गाय, भैंस इन्हें खा कर अधिक व शुद्ध दूध देती हैं। अंदर की बीमारियों को दूर करता है। पालक का थोड़ा-थोड़ा जूस हर रोज पी सकते हैं। पालक पालन करता है। पालक में रोग निवारक, पोषण दायक गुण हैं।

पालक रक्तल्पता को दूर करता है। पायरिया को मिटाता है। इसमें क्लोरोफिल होता है, जो शरीर की हर असाध्य रोगों एवं समस्याओं को दूर रखने या करने की क्षमता रखता है।

हरी मटर- मटर ताजी हो या फ्रोजन, दोनों में विटामिन सी एवं विटामिन बी-1 काफी मात्रा में पाया जाता है। मटर दाल में आती है। इस कारण अधिक घुलनशील, फाइबर का बढ़िया स्रोत है। कोलेस्ट्रॉल को रेगुलेट करने में सहायक है। किसी भी महँगे फल या सब्जियों के पीछे न भागें



कारण सब्जियाँ खनिज तत्वों से भरपूर होती हैं और मौसम का हर तरह से सामना करने की क्षमता रखती है। कारण सब्जियाँ मौसम के मुताबिक शरीर में ठंडक व गरमाहट का असर बराबर बनाये रखती है। डाइटीशियनों के मुताबिक हमें रोजविटामिन व खनिज जैसे तत्वों की जरूरत होती है, जिसका सबसे आसान तरीका है सलाद तथा सब्जियाँ। जिसमें सलादकेपत्ते,मूली, खीरा, टमाटर, प्याज, बीन्स (सभी बीन्स)।


मूली– मूली पीलिया तथा कमजोर लीवर के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसमें विटामिन सी, सोडियम, कैल्शियम होता है।


खीरा– यह क्षारीय एवं खनिज तत्वों से भरपूर होता है, जो ब्लडप्रेशर से संबंधित लोगों के ब्लडप्रेशर कम करने में मदद करता है। पेशाब खूब आता है, जो अल्सर के इलाज में प्रभावी होता है।


सभी प्रकार के बीन्स– सभी प्रकार के हरे बीन्स में कॉपर, जिंक, सोडियम, मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो हमारे शरीर के लिए जरूरी होते हैं। सभी बीन्स फाइबर से भरपूर होते हैं। ये कोलेस्ट्राल को कम करती है।


प्याज– यह हमारे सब्जियों में से एक मुख्य सब्जी है। यह खून में से विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।


शिमला मिर्च– शिमला मिर्च लाल, हरी, पीली होती है, जो विटामिन सी से भरपूर होती है। इसे पकाने से ज्यादा कच्ची या हाफ ब्वायल्ड (भाप लगी) खायें। सलाद बेहतर तरीका है इसे लेने का।


करेला– करेले का जूस ब्लड शुगर सामान्य रखता है। शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालता है। करेले में कॉपर, आयरन और पोटैशियम होता है। इसे लेने का सबसे अच्छा तरीका करेले का जूस सुबह खाली पेट चाय का बड़ा चम्मच चाहें, तो थोड़े से पत्ती में डाल कर (मिला कर) लें।


मशरूम– मशरूम उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिनके लिपिड तथा कोलेस्ट्रॉल में असंतुलन होता है।

भिंडी– विश्व की पसंदीदा सब्जी है। इसमें जिलेटिन की वजह से एसिडिटी, अपच जैसी परेशानियों में लाभकारी सिद्ध होती है। यह पेशाब की हर तरह की परेशानी दूर करती है।

हरी मटर– मटर एक अच्छी सब्जी है। परंतु अधिक मात्रा में नहीं खानी चाहिए। कारण अपच हो सकता है। परंतु उचित मात्रा में खाने से महिलाओं के लिए फायदेमंद है, क्योंकि ओवरी के कैंसर से बचाता है। मटर को अनाज व दालों के साथ मिला कर खायें, तो ज्यादा फायदेमंद होगी।


फाइबर (यानी रेशेदार खान-पान), जो बचाये कैंसर से।

हमारे भोजन में सबसे अहम स्थान कार्बोहाइड्रेट्स का है, जो सेहत के लिए सबसे जरूरी है। इस कार्बोहाइड्रेट्स को और हेल्दी बनाने के लिए किस तत्व की अधिक जरूरत होती है, वह है रेशा यानी फाइबर। छिलका युक्त अनाज, फलियाँ, सब्जियाँ, फल आदि फाइबर से भरपूर होते हैं।

वनस्पति से प्राप्त खानपान की वस्तुओं में घुलनशील तथा अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर पाये जाते हैं।


घुलनशील फाइबर– जैसे ओट, जौ, बीन्स, मटर, मसूर, कुछ फल, सेब, जामुन, नींबू, सब्जियों में भिंडी।

अघुलनशील फाइबर- गेहूँ का चोकर, सूखे मेवे, गिरीदार फल

सब्जियाँ, गोभी, बीन्स

हमारी आँतों में मौजूद बैक्टीरिया, आँतों के भीतर के फाइबर का फर्मेंटेशन कर देते हैं, ताकि वह पचने योग्य बन जाये। जैसे मेथी के दानेइसमें अहम रोल निभाती है

कुल मिला कर फाइबर कैंसर रोकने में मदद करता है तथा साथ ही हृदय रोग, डायबिटीज से बचाता है। यह आपको एकदम फिट भी रखता है। आपका पेट साफ रखने में मदद करता है व वजन कंट्रोल रखता है।

फाइबर कहाँ से मिले

चोकर सहित आटा, अन्य अनाज का आटा, ब्रेड। अंकुरित अनाज, ओट, नट्स, कटी अलसी।

बिना नमक पॉपकॉर्न लें।

सब्जियों के जरिये बीन्स अधिक लें। सलाद, सब्जी, सूप, चावल, इन सबमें बीन्स डालें।

दही में फल मिला कर खायें।

फलों का रस न पी कर उन्हें छिलके सहित खायें।

नाश्ते में ड्राईफ्रूट लें। सूखा आलूबुखारा लें। कारण इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है।

रिफाइंड अनाज के बजाय साबुत अनाज अधिक लें।

फाइबर सप्लिमेंट लेने के बजाय खानपान के जरिये प्राप्त करें।

कुछ सप्लिमेंट बाजार में उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग डॉक्टर के नुस्खे में अधिक होता है। सो जब आप लें, तो डॉक्टर का परामर्श अवश्य लें।

फाइबर कई बीमारियों से दूर रखता है तथा कई रोगों में फायदेमंद है।


डायबिटीज- अध्ययनों से पता चलता है कि फाइबर युक्त भोजन डायबिटीज के खतरे को कम करता है। डायबिटीज से ग्रस्त व्यक्ति यदि रोज फाइबर युक्त आहार ले, तो उन्हें इंसुलिन या अन्य दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती।


वजन को कंट्रोल में रखे फाइबर – फाइबर वजन को घटाने में मदद करता है। फाइबर वाले खान-पान में कैलोरी कम होती है। साथ ही इसे खाने से पेट भी जल्दी भर जाता है। इसलिए आप कम खाते हैं। जिससे वजन कम बढ़ता है। फाइबर इंसुलिन के रिसाव में कमी ला सकता है। इसका असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है और इसका असर बॉडी वेट पर पड़ता है।


पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है – फाइबर मल की मात्रा को बढ़ाता है, कब्जियत से बचाता है, फाइबर लेने वालों को मल त्याग में जोर नहीं लगाना पड़ता। लिहाजा उन्हें कब्जियत का शिकार नहीं होना पड़ता

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