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सिगरेट और पेट का कैंसर

सिगरेट और पेट का कैंसर
धूम्रपान करने वाली महिलाओं और कैंसर के मध्य संबंध अच्छी तरह से स्थापित हो चुके हैं। अब, शोधकर्ताओं ने कहा है कि सिगरेट, विशेष रूप से महिलाओं में, पेट के कैंसर होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
एक नए अध्ययन के अनुसार उन महिलाओं की तुलना में जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी सिगरेट पीने वाली महिलाओं को 20 प्रतिशत अधिक पेट का कैंसर होने की संभावना होती है। यह अध्ययन in Cancer Epidemiology, Biomarkers & Prevention में 30 अप्रैल को प्रकाशित हुआ है।


प्रमुख शोधकर्ता डॉ. इनगर ग्राम जो नॉर्वे में टॉम्सो विश्वविद्यालय में सामुदायिक चिकित्सा विभाग में एक प्रोफेसर हैं ने कहा है कि यहां तक कि एक दिन में 10 या कम सिगरेट पीने वाली महिलाओं को पेट का कैंसर होने के जोखिम में वृद्धि हुई है।


क्योंकि पेट का कैंसर एक आम बीमारी है, कई नए मामलों में ऐसी महिलाएं भी शामिल है जो यदा-कदा सिगरेट पीती हैं। बहुत कुछ पेट के कैंसर को रोका जा सकता है यदि लोग धूम्रपान न करें, विशेष रूप से महिलाएं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के नार्वे संस्थान द्वारा सर्वेक्षण में 67-19 आयु वर्ग के 600,000 से अधिक पुरुषों और महिलाओं पर डेटा शामिल किया गया। प्रतिभागियों को उनकी धूम्रपान की आदतों, शारीरिक गतिविधि और अन्य जीवन शैली के बारे में सवालों के जवाब दिए।
14 वर्षों में किए गए फालोअप में पाया गया कि लगभग 4,000 लोगों को पेट का कैंसर हुआ। और इमें महिलाओं की संख्या ज्यादा थी। ग्राम की टीम के अनुसार, धूम्रपान से पुरुषों में 8 प्रतिशत है और महिलाओं के बीच 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई।


शोधकर्ताओं के अनुसार एक महिला जो अधिक वर्षों से सिगरेट पी रही है और जिसने कम उम्र से ही सिगरेट पीना शुरू कर दिया होता है, उसमें कैंसर के विकसित होने का अधिक जोखिम होता है। 40 साल या उससे अधिक की उम्र की धूम्रपान करने वाली महिलाओं को पेट के कैंसर के लगभग 50 प्रतिशत अधिक होने की पुष्टि हुई है।


ग्राम ने कहा कि वह इस बात से चकित है कि धूम्रपान और पेट के कैंसर के बीच संबंध महिलाओं में इतना अधिक क्यों था।
यद्यपि इस अध्ययन से स्मोकिंग और पेट के कैंसर के मध्य के संबंध को बता चलता है. यह एक कारण और प्रभाव (cause-and-effect ) का संबंध स्थापित नहीं करता। हालांकि, धूम्रपान और पेट के कैंसर के बीच लिंक एक संयोग से भी अधिक है, ग्राम ने बताया।

उन्होंने ने कहा कि पेट का कैंसर स्मोकिंग रिलेटेड कैंसर है। यही कारण है कि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन को कैंसर पर अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसी द्वारा इसे मान्यता दी गयी है। पूर्व अनुसंधान की समीक्षा के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि लंबे समय तक धूम्रपान करने से पेट के कैंसर का खतरा दोगुना हो जाता है। एजेंसी के अनुसार, इससे मूत्राशय और अग्नाशय के कैंसर के लिए खतरा बढ़ जाता है।


न्यूयॉर्क शहर के Lenox हिल अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के प्रमुख डॉ. स्टीफनी Bernik, के अनुसार केवल महिलाओं के बीच बढ़ रहे पेट के कैंसर के लिए खतरा केवल धूम्रपान से संबंधित है इस पर वे विश्वास नहीं करते। शराब का उपयोग, आहार और व्यायाम की कमी भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं, Bernik ने कहा। आमतौर पर, धूम्रपान अन्य खराब स्वास्थ्य की आदतों की तरह ही एक खराब आदत है, Bernik ने कहा. हालांकि, जो डेटा कलेक्ट हुआ है उससे भी यही निष्कर्ष निकलता है कि सिगरेट पीना पेट के कैंसर के खतरे के लिए अपना योगदान दे रहा है।


एक अन्य विशेषज्ञ के अनुसार यदि आप सिगरेट पीते हैं तो आपको उसे छोड़ देना चाहिए। यदि आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं तो उसे बहुत सारे तरीके हैं। बस मन मेें दृढ़ संकल्प होना चाहिए।

सावधान! दर्द की गोली खतरनाक भी हो सकती है
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जिस दुनिया में हम और आप जी रहे हैं, वह दर्द से लबरेज है। यह दर्द मानसिक या शारीरिक कोई भी हो सकता है। इनसे भागने के लिए हम पेन किलर्स का सहारा लेते हैं, कभी डॉ. के हाथ से लिखे पर्चे के साथ तो कभी यूं ही लक्षण पता कर दवा की दुकान से दवा ले लेते हैं, दवा लेते समय पल भर के लिए नहीं सोचते कि यह आपके लिए खतरनाक भी हो सकती है। उसके साइड इफैक्ट्स हो सकते हैं जिनके बारें में आप अंजान हैं। इन खतरों में है पेट का खऱाब होना, चक्कर आना, दृष्टि का धुंधला पड़ जाना, जिगर की क्षति, यहां तक की मौत भी हो सकती है। इसके अलावा सबसे बड़ा खतरा जिस पर हम ज्यादातर ध्यान नहीं देते, वह है इन दवाओं पर निर्भरता या इनकी लत लग जाना।
इन दवाओं को लेते वक्त हमें पता होना चाहिए कि हमें इनके कारण किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, और इऩ समस्याओं से बचने के लिए, अपनी सुरक्षा के लिए हमारे लिए कौन से कदम उठाने आवश्यक हैं।क्योंकि ज्यादातर पेन किलर्स को हम खतरनाक दवाओं की श्रेणी में नहीं रखते।
हो सकता है कि आपको जो नई दर्द की गोली दी जा रही है, वह उस गोली से मेल न बिठा पाए जो आप पहले से ले रहे हैं। यह भी हो सकता है की प्रत्येक दवा या उसका पूरक डॉक्टर के रिकॉर्ड में दर्ज ही न किया गया हो,या दवा देते समय डॉक्टर द्वारा संभावित परस्पर विरोधी दवा की अनदेखी कर दी गई हो याआप स्वयं ही यह बताना भूल गए हो कि आप कोई पूरक दवा ले रहे हैं।
· संभव है आप जो दर्द की दवा ले रहे है उसके किसी एक घटक से आपको एलर्जी हो, जिसका आपको भी पहले से पता न हो।
ये भी हो सकता है कि आपने पहले कभी उस तरह की दवा ली ही न हो,जिसका मतलब है कि आपके शरीर में नशीले पदार्थों के अच्छी तरह से बर्दाश्त करने की क्षमता ही न हो। ऐसे में अंजाने में ही सही, मृत्यु भी हो सकती है।
जब आप अपने फार्मेसी में दवा खरीद रहे हों, वे गलती से गलत दवा या गलत खुराक दे सकते हैं।
कई दर्द निवारक दवाएं इतनी कॉमन होती हैं कि कई दवा निर्माता उनके नाम से नकली दवाएं बना कर दवा की दुकानों में सप्लाईकर देते हैं। और आपका दवा विक्रेता अंजाने में ही आपको नकली दवाएं बेच सकता है।
दवा लेते समय ध्यान देने योग्य बातें
सामान्य रूप में, दर्द निवारक दवाओं को लेते समय जो गलतियां हो जाती हैं उनगलतियों के कारण कुछ मुश्किल लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं, येअस्थायी या स्थायी रूप से आपके स्वास्थ्य को हानि पहुँचा सकते हैं, या आप इनकेलती हो सकते हैं, आपकी इन परनिर्भरता बढ़ सकती है, या मृत्यु तक हो सकती है।
उनमें से कुछ निम्न हैः
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· गलततरीकेसेदवालेनेकामतलबहैकियातोआपबहुतदवाअपनेसिस्टममेंडालरहेहैंयाबहुत कम।
· कई दवाएं एक साथ लेने से उनमें एक-दूसरे के प्रति अंतरविरोध हो सकता है।
· यदि आपसे कहा गया है कि दवा कुछ खाने के बाद लेनी है और आप उसे खाली पेट लेते हैं या इसका विपरीत करते हैं, तो दवा आपको फायदे की जगह नुकसान कर सकती है।
· अगली खुराक बहुत जल्दी लेने का अर्थ है दवा का ओवरडोज होना। लगातार ऐसा किए जाने का मतलब है उसका लती होना/या उस पर निर्भरता।
· शराब के साथ मिला कर यदि आप दर्द की गोली ले रहे है तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है। यहां तक की कई बार ऐसा भी देखा गया है कि अंगूर का रस भी दर्द निवारक के प्रभाव को प्रभावित करता है।
· यदि आप अफीम से निर्मित कोई ड्रग ले रहे हैं और आपने उसे अचानक लेना बंद कर दिया तो विदड्रॉल सिमटम्स उभर आते हैं जैसेःदिल की धड़कन का तेज हो जाना, चिंता के लक्षण उभरना तथा बहुत पसीना आना।
दर्द की गोली को आप किस तरह लेते है जिससे वह आपके लिए सुरक्षित हो, यह पूरी तरह आप पर निर्भर है। डॉ.का काम सिर्फ दवा लिखना है और आपको निर्देश देने हैं कि इसे किस तरह लें। दवा खरीदना और उसका उपयोगकिस तरह करना जिससे आपका स्वास्थ्य पूरी तरह सुरक्षित रहे, यह आपके हाथ में है।
1. यदि आपका डॉक्टर कोई नयी दवा लिख रहा है तो उसे इस बात की सूचना अवश्य दे दें कि आप पहले से कौन सी दवा या उसका पूरक ले रहे हैं।
2. कोई भी दर्द की गोली शुरू करने से पहले उसके बारें सभी संभावित प्रश्न डॉक्टर से पूछ लें। साथ में जान लें कि वे कौन से तरीके हैं जिन्हें अपना कर आप दवा के प्रति निर्भरता और लत से बच सकते हैं।
3. कोई नई दवा शुरू करने के बाद आप कुछ नए लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। इन लक्षणों में मुँह का सूखना, नींद का आना (ड्राउजीनेस), जी मिचलाना आदि हो सकते हैं। इनके बारे नें डॉक्टर को अवश्य सूचित करें, ताकि आपको पता हो कि ऐसा क्यों हो रहा है।
4. दवा लेते समय उन सभी निर्देशों का पालन करें जो आपको बताएं गए हैं। अगर दर्द दवा खाने के थोड़े अंतराल बाद पुनः शुरू हो जाता है, तो दूसरी गोली मत लीजिए। बेहतर तो यह होगा कि आप अपने डॉक्टर से बताएं कि ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए। वे खुराक को उसी हिसाब से समायोजित कर सकते हैं।
5. अपने मन से दर्द निवारक दवा लेने कभी बंद न करें। withdrawalकी प्रक्रिया बहुत तकलीफदेह होती है। दवा के डोज धीरे—धीरे कम करते हुए बंद करना चाहिए। अगर आपको लगता है कि वह समय आ गया है जब आपको दर्द की गोली लेना बंद कर देना चाहिए, तो अपने डॉक्टर से बात करें कि दवा बंद करने का सबसे अच्छा तरीका क्या होगा।
6. किसी दुर्घटना का शिकार होने के कारण या किसी अन्य रोग के कारण आप लम्बे समय से दर्द निवारक दवाएं ले रहे हैं तो कहीं नोट करिए कि कब किस दवा के लेने से आपके शरीर पर उसका क्या प्रभाव पड़ा था, किस समय दर्द बढ़ा य़ा कम हुआ था। भोजन और दवा का कोई सह-संबंध तो नहीं है। यदि आपको ऐसा कुछ लगता है तो अपने डॉक्टर से अवश्य विचार-विमर्श करें।
7. कभी भी किसी और का दवाई का पर्चा अपने लिए इस्तेमाल न करें। क्योंकि वे दवाएं आपके लिए नहीं लिखी गईं हैं, और आपको नहीं पता कि आप जो अन्य दवाएं ले रहे हैं उनके साथ वह कैसे प्रतिक्रिया करेगी।

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