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खुशखबरी! दोपहर में सोने से नहीं होती है दिल की बीमारी, जानें इसके फायदे

खुशखबरी! दोपहर में सोने से नहीं होती है दिल की बीमारी, जानें इसके फायदे

अगर आप भी दिन में सोते हैं तो आपको दिल की बीमारी का खतरा कम रहेगा। अक्सर ऐसा होता है कि ज्यादातर लोग हफ्तेभर की थकान छुट्टी वाले दिन दोपहर में सोकर मिटाते हैं। अक्सर ऐसा पाया गया है कि जब लोगों को मौका मिलता है तो वह छुट्टियों में दिन में आराम करना या एक नैप लेना पसंद करते हैं।


दोपहर के समय सोने से दिल की बीमारी का खतरा कम हो जाता है। दोपहर में सोना जहां एक तरफ आपके शरीर को राहत देता है, वहीं दूसरी तरफ आपकी सेहत के लिए लाभदायक है।


एक्सपर्ट की राय

हाल ही में हुई एक रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि दोपहर में सोने से दिल की बीमारी होने के चांसेस कम हो जाते हैं। 


एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक पेनसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर फिलिप का कहना है दोपहर में एक नैप लेने से शरीर का आलस दूर होता है। साथ ही व्यक्ति की परफॉर्मेंस भी अच्छी हो जाती है।


दोपहर में सोने के फायदे
इम्यून सिस्टम अच्छा होता है।
शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है।
दिल संबंधी बीमारी होने का खतरा कम हो जाता है।
15-30 मिनट के नैप से आलस दूर होता है।

इस वजह से दिन में सोने से हो सकती है थकान

वैसे तो 15-30 मिनट की झपकी से आपका आलस दूर हो सकता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति मानसिक रूप से बहुत ज्यादा थका हुआ है तो उस व्यक्ति को कम से कम 90 मिनट की नींद लेनी चाहिए।


90 मिनट की नींद इसलिए लेनी चाहिए क्योंकि इतनी देर में व्यक्ति गहरी नींद में सोकर वापस जग सकता है। अगर व्यक्ति इतने मिनट से पहले उठ जाता है तो उसे ज्यादा थकान महसूस होती है।


मालूम होनी चाहिए ये बातें
शोधकर्ताओं की मानें तो वर्कआउट के तुरंत बाद नहीं सोना चाहिए।
वर्कआउट के बाद दिमाग ज्यादा तेज काम करता है, जिसकी वजह से नींद आने में दिक्कत होती है।
वर्कआउट करने और सोने के बीच 2 घंटे का अंतर होना चाहिए।
अगर आपको दोपहर में सोने की जरूरत महसूस नहीं होती है तो न सोएं।
साथ ही हर किसी को दोपहर में सोने का फायदा हो ये जरूरी नहीं है।
ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ लोगों की बॉडी सिर्फ दिन-रात के साइकल को ही फॉलो करता है।
यही वजह है कि उन्हें दोपहर में नींद कम आती है या फिर नहीं आती है।

त्वचा से लेकर मोटापे तक के लिए फायदेमंद है सुबह खाली पेट पानी पीना


सुबह खाली पेट पानी पीने के बुहत सारे फायदे होते हैं। सुबह खाली पेट पानी पीने से कोई बीमारियां पास नहीं भटकती हैं। साथ ही त्वचा में निखार भी बरकरार रहता है। सुबह खाली पेट सिर्फ पानी पीने से पेट की सारी गंदगियां दूर करने में मदद मिलती है। खासतौर पर गर्मी में सुबह खाली पेट पानी पीना चाहिए।


गर्मी के दिनों में पाचन-क्रिया ज्यादा अस्त-व्यस्त रहती है, जिसके कारण खाना ठीक ढंग से नहीं पच पाता है। ऐसे में पेट से जुड़ी कई समस्याएं होने लगती हैं। पेट की इन समस्याओं के लिए छुटकारा पाने के लिए सुबह खाली पेट पानी पीना फायदेमंद होता है।


सुबह खाली पेट पानी पीने के फायदे
खाली पेट पानी पीने से खून साफ होता है, जिसके कारण चेहरे पर निखार आता है और त्वचा चमकदार बनती है।
सुबह खाली पेट पानी का सेवन करने से शरीर में नई कोशिकाएं बनती हैं और मांसपेशियां भी मजबूत रहती हैं।
अगर आप अपना मोटापा कम करना चाहते हैं सुबह खाली पेट पानी पिएं।
सुबह खाली पेट पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म 24% तक और ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे वजन कम होता है।
खाली पेट पानी पीने से शरीर के विशैषे पदार्थ निकल जाते हैं और पेट साफ रहता है।
सुबह पानी पीने से कब्ज की समस्या नहीं होती है।
इसके अलावा सुबह खाली पेट पानी पीने से गले की बीमारी, अनियमित पीरियड्स, कैंसर, डायरिया जैसी समस्या नहीं होती है।
गठिया, सिर दर्द, पैर दर्द जैस दर्द से भी छुटकारा मिल सकता है।
गर्मी के दिनों में भी वैसे भी कुछ खाने का मन नहीं करता है, सुबह खाली पेट पानी पीने से व्यक्ति की भूख बढ़ सकती है।
गर्भावस्था में खाली पेट गुनगुना पानी पीने के फायदे


ये तो लगभग हर किसी को मालूम है कि खाली पेट पानी पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। ठीक उसी तरह गर्भावस्था में महिला का भी खाली पेट पानी पीना काफी लाभदायक होता है। गर्भवती महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है, जिससे उसे डिलीवरी के समय किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो।


गर्भावस्था में गर्भवती महिला को खाली पेट गुनगुना पानी पीना चाहिए। यह सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है।


इससे बॉडी में पानी की कमी नहीं होती साथ ही जल्दी थकान नहीं होती है। पानी पीते रहने से बॉडी का टॉक्सिन बाहर निकलता रहता है।



गर्भावस्था में खाली पेट गुनगुना पानी पीने के फायदे
प्रेग्नेंसी में खाली पेट गर्म पानी पीने से पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है।
पाचन तंत्र में जमा फैट और तेल, गर्म पानी पीने से बाहर निकल जाता है।
पाचन तंत्र सही रहने से पेट साफ रहता है।
सही तरह से पेट साफ होने से कब्ज, एसिडिटी आदि की समस्या नहीं होती है।
प्रेग्नेंसी में ब्लड सर्कुलेशन सही रहना चाहिए। गर्म पानी पीने से ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है।
ब्लड सर्कुलेशन सही होने से बॉडी के सभी पार्ट्स को सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलते हैं।
सही पोषक तत्व बच्चे के विकास के लिए कारगर होता है।
प्रेग्नेंसी में हार्मोनल चेंजेंस के कारण कमजोरी आ जाती है। गर्म पानी पीने से एनर्जी मिलती है।

एसिडिटी से तुरंत राहत दिलाएंगी किचन की ये छोटी-छोटी चीजें


बिगड़ती लाइफस्टाइल और सही खान-पान न होने के कारण ज्यादातर लोगों को एसिडिटी और पेट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं। पेट से जुड़ी किसी भी तरह की कोई दिक्कत होने पर व्यक्ति कोई भी काम ठीक तरह से नहीं कर पाता है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि पेट से जुड़ी समस्याओं के लिए घरेलू तरीके हर किसी को मालूम होने चाहिए।


रोज के काम में इस्तेमाल होने वाली ये छोटी-छोटी चीजें आपको तुरंत एसिडिटी की समस्या से निजात दिलाएंगे। इन चीजों का इस्तेमाल इस तरह से किया जाए तो एसिडिटी की समस्या को जल्द से जल्द ठीक किया जा सकता है। जानें क्या-




सौंफ

अधिकांश लोग सौंफ का प्रयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में करते हैं। सौंफ में ऐसे गुण होते हैं जो एसिडिटी दूर करने में कारगर होते हैं। एसिडिटी दूर करने के लिए रात में थोड़ी सी सौंफ में पानी में डालकर रखें और सुबह उसी पानी को पी लें, एसिडिटी से राहत मिल जाएगी। 


लौंग

कुछ लोग लौंग को माउथ फ्रेशनर की तरह इस्तेमाल करते हैं तो कभी इसका प्रयोग खांसी दूर करने के लिए किया जाता है। लौंग से एसिडिटी से भी छुटकारा पाया जा सकता है। लौंग से खाना पचाने में मदद मिलती है। एसिडिटी होने पर लौंग को हल्के-हल्के चबाने से आराम मिल जाता है।


इलायची

इलायची से भी एसिडिटी से राहत पाई जा सकती है। इसके लिए 2-3 इलायची को पीसकर पानी में उबाल लें और पानी ठंडा करके पीने से एसिडिटी ठीक हो जाएगी।


पुदीना

पुदीने के सेवन से पेट की सभी समस्या दूर हो जाती है और एसिडिटी की समस्या दूर हो जाती है।


तुलसी

तुलसी के पत्तों से एसिडिटी से राहत पाई जा सकती है। खाने खाने के बाद तुलसी खाने से एसिडिटी की समस्या नहीं होती है।

कमाल के हैं मानसून में तुलसी की चाय पीने के ये 10 फायदे


मानसून शुरू हो गया है और इस मौसम में बीमारियां होने के ज्यादा चांसेस रहते हैं। मानसून के मौसम में तुलसी की चाय पीने से बहुत सारे फायदे होते हैं। मानसून में हर किसी को मानसून में तुलसी की चाय पीनी चाहिए। तुलसी की चाय पीने से शरीर अंदर से स्ट्रॉन्ग बनता है और छोटी-छोटी बीमारियां नहीं होती है।


तुलसी का बहुत अधिक महत्व है। तुलसी के पौधे का हर रूप बहुत फायदेमंद होता है।


तुलसी की घरों में पूजा भी की जाती है और इसे बहुत पवित्र माना जाता है।




ऐसे में रोजाना बनने वाली चाय में तुलसी के कुछ पत्ते डालने मात्र से ही यह शरीर को काफी फायदा पहुंचाती है। 


जानें तुलसी वाली चाय पीने से क्या-क्या फायदे होते हैं-


तुलसी की चाय पीने के फायदे
तुलसी वाली चाय पीने से पाचन क्रिया सही रहती है।
इसके नियमित सेवन से तनाव दूर रहता है। किसी तरह की कोई टेंशन नहीं रहती।
सुबह-सुबह तुलसी की चाय पीने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है।
साथ ही पेट से जुड़ी किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होती।
तुलसी वाली चाय पीने से एसिडिटी की समस्या भी दूर हो जाती है।
अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो तुलसी की चाय कारगर साबित हो सकती है।
तुलसी की चाय कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करता है।
कोलेस्ट्रॉल लेवल बैलेंस रहने से दिल से जुड़ी कोई बीमारी नहीं होती है।
तुलसी की चाय से ब्रेस्ट कैंसर और प्रो स्टेट कैंसर से छुटकारा दिलाने के लिए कारगर होती है।
तुलसी की चाय पीने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।
साथ ही यह अस्थमा के मरीजों के लिए भी फायदेमंद होता है।

अच्छी नींद के लिए डाइट में शामिल करें ये चार चीजें


दिन भर की भागदौड़ और काम की चिंता के कारण व्यक्ति रात में ठीक तरह से अपनी नींद पूरी नहीं कर पाता है। इसके अलावा रात में देर से सोना सुबह जल्दी उठ जाने के कारण भी कुछ लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती है। वहीं ज्यादा तापमान होने की वजह से व्यक्ति को सुकून वाली नींद नहीं आती है।


ब्रिटेन के एक न्‍यूट्रिशन विशेषज्ञ रिक हे के मुताबिक व्यक्ति तभी सुकून वाली नींद सो पाता है जब तापमान 16-18 डिग्री सेल्सियस हो। इस मानक से कम या ज्यादा टेम्परेचर होने पर नींद नहीं आती है।


इसके अलावा एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के एक-तिहाई लोग अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते हैं। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें खाकर आप अपनी नींद पूरी कर सकते हैं। जानें क्या- 




चाय

चाय को ज्यादातर लोग नींद दूर करने के लिए पीते हैं। लेकिन न्‍यूट्रिशन विशेषज्ञ का मानना है कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनमें अमीनो एसिड पाया जाता है, जो नर्वस सिस्टम को पोषण देता है। ग्रीन टी, ब्लैक टी, व्हाइट टी में रिलैक्स करने वाला एमीनो एसिड पाया जाता है। इसे पीने के बाद नींद अच्छी आती है।


दालचीनी

दालचीनी से भी अच्छी नींद पाई जाती है। ये ब्‍लड शुगर लेवल को कम करता है और नर्वस सिस्‍टम के लिए लाभदायक होता है। थोड़ी-थोड़ी देर में नींद खुल जाना ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के कारण होता है। दालचीनी से मदद मिलेगी।


अदरक

अदरक के सेवन से पेट में दर्द या ऐठन कम करता है। ये बॉडी के पूरे सिस्टम को शांत रखने में मददगार साबित होता है। कम नींद आना या नींद आना वाले लोग अदरक की सप्लीमेंट्स वाली चीजें ले सकते हैं।


नींबू

अच्छी नींद के लिए नींबू का सेवन फायदेमंद रहेगा। नींबू पानी भी ले सकते हैं। इसके अलावा विटामिन सी पाए जाने वाले अन्य फल जैसे- संतरा, आंवला आदि के सेवन से इम्युनिटी बढ़ती है। साथ ही नींद अच्छी आती है।

एक्सपर्ट व्यू: अगर आपको भी नहीं आती रातभर नींद तो करें ये काम



शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना रात में 6 से 8 घंटे सोना जरूरी है। अगर ऐसा अक्सर नहीं होता है तो आप अनिद्रा के रोगी हैं। ऐसे में नींद की गोलियां खाना आपको नुकसान ज्यादा पहुंचा सकती हैं। ऐसे में अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए योगाभ्यास एक अहम भूमिका निभाता है। जानिए, कौन से योगासन हैं जो आपको अनिद्रा की समस्या से निजात दिलाने में सहायक हो सकते हैं।


शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उसे विश्राम देना बेहद जरूरी है। शरीर को पूर्ण आराम तभी मिलता है, जब वह नींद की अवस्था में होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब हम नींद में होते हैं, तब हमारे शरीर के कोशिका स्तर में सुधार होता है, शरीर के सभी अंगों को आराम मिलता है और विषाक्त पदार्थों का निष्कासन होता है। 


लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपको रात में नींद नहीं आती और आप अपने को थका हुआ महसूस करते हैं। रात में नींद न आना अनिद्रा का लक्षण है। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति को रात में नींद नहीं आती, जिसके कारण वह दिन भर थकान और चिड़चिड़ापन महसूस करता है। अनिद्रा एक ऐसी स्थिति है, जो हर 20 भारतीयों में से एक को प्रभावित करती है। ज्यादा समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने से शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ता है और आप कई तरह की दूसरी खतरनाक बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।




अगर आपको पर्याप्त नींद नहीं आती तो योगासन इसमें सहायक हो सकते हैं। निरंतर योग के अभ्यास से कई रोगों का निदान हो जाता है, जिसमें अनिद्रा और असामान्य नींद की आदतें भी शामिल हैं। दरअसल, योग तनाव से मुक्ति देता है, जिससे रात में अच्छी नींद आती है। अच्छी और गहरी नींद लाने में आपके सहायक हो सकते हैं यहां बताए जा रहे हैं कुछ योगासन।


पश्चिमोत्तासन

इस आसन को करने से दिमाग शांत होता है और आप आराम महसूस करते हैं। इस आसन को करने के लिए अपने पैरों को सीधा फैलाकर जमीन पर बैठें। अब अपने हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं तथा धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। अपने हाथों की अंगुलियों से अपने पैरों की अंगुलियों को छूने का प्रयास करें और अपने सिर को घुटनों से लगाने का प्रयास करें। इस आसन का उद्देश्य आपको आराम पहुंचाना है, आपको तनाव में लाना नहीं। अतः इसे आराम से करें। हो सकता है कि शुरुआत में आप अपने पैरों की अंगुलियों को ना छू पाएं लेकिन समय के साथ-साथ इसमें अभ्यस्त हो जाएंगे। जब आप आगे की ओर झुकें तो सांस छोड़ें और ऊपर उठते समय सांस लें।


उत्तानासना

इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े रहें। अपने हाथों को आगे की ओर से सिर के ऊपर ले जाएं तथा धीरे-धीरे सांस लें। फिर अपने कूल्हों को पीछे की ओर धकेलते हुए आगे की ओर झुकें, जब तक आपकी हथेलियां जमीन की ओर आपका माथा आपके घुटनों को न छूने लगे। अगर आप पूर्ण रूप से झुकने में असमर्थ हैं या आपके घुटने के पीछे की नस खिंच रही है, तो अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ लें।


इस स्थिति में तब तक रहें, जब तक कि आपको असुविधा न हो। ऐसा करने से रक्त आपके सिर में तेजी से पहुंचता है, जिससे आपके शरीर का तंत्रिका तंत्र अनुकंपी से सहानुकंपी प्रणाली की स्थिति में आ जाता है, जिससे आपको आराम मिलता है। फिर से खड़े होने के लिए सांस लेते हुए अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर ले जाएं और अपने शरीर के ऊपर के भाग को उठाएं। फिर जैसे ही आप सांस छोड़ें अपने हाथों को चेहरे के सामने से नीचे की ओर लाएं। झटका न दें। याद रखें कि मांसपेशियों को तनाव दिए बिना कूल्हों को ऊपर उठाएं। 


अपनासना

आपकी पीठ, गर्दन और जांघ की मांसपेशियों को आराम दिलाने के लिए यह उत्तम आसन है। इस आसन को करने के लिए आप पीठ के बल लेट जाएं और अपनी हथेलियों को अपने घुटनों पर रखें। जैसे ही आप सांस छोड़ें अपने पैरों को धीरे-धीरे छाती की ओर ले जाएं। अपनी जांघों पर जोर देकर पैरों को उठाएं न कि अपने हाथों पर जोर देकर। जब आप सांस लेते हैं तो अपनी पकड़ ढीली रखें, जिससे आपके पैर आसानी से आपके पेट से दूर हो सकें।


कुछ समय के लिए इसे अपनी गति से करें। अपनी सांसों के अनुसार ही बदलाव करें। कुछ समय के लिए इस स्थिति में रहें। अपनी आंखें बंद करें और यदि आपका दिमाग शांत नहीं है, तो अपनी सांसों को गिनना शुरू करें। इससे दिमाग पर जोर पड़ता है और दिमाग शांत भी होता है। जब आप शांत महसूस करें तब अपने पैरों को धीरे-धीरे जमीन पर रखें और आराम करें।


सुप्त बड्डकोनासना

इस आसन से आपके दिमाग और शरीर को आराम मिलता है। इससे पीठ और पैर की मांसपेशियों में खिंचाव भी होता है। इस आसन को करने के लिए जमीन पर सीधे लेट जाएं। फिर धीरे-धीरे अपने घुटनों को मोड़ें तथा अपनी एड़ियों को अपने कूल्हों के पास लाएं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए अपने घुटनों को खोलें और उन्हें जमीन की ओर ले जाएं।


अपने हाथों को ऊपर उठाते हुए उन्हें जमीन पर टिका दें। इस स्थिति में आप कुछ लंबी सांसें ले सकते हैं। पुनः प्रारंभिक स्थिति में आने के लिए अपने हाथों को सामान्य अवस्था में लाएं, साथ में घुटनों को भी खींचें और पैरों को फैलाकर लेटी हुई स्थिति में आ जाएं। खड़े होने के लिए अपनी बाईं करवट पर जाएं और अपने हाथों का उपयोग करते हुए उठें।


शवासन

मन को तनावमुक्त और शांत करने के लिए यह सबसे बेहतरीन आसन है। इस आसन को करना सबसे आसान है क्योंकि इस आसन में केवल आपको लेटना होता है। इसे करने के लिए सबसे पहले तो चटाई बिछा कर उसके ऊपर पीठ के बल लेट जाएं और हाथ-पांव को थोड़ा बाहर की तरफ सीधा रखें। आपको अपने शरीर को पूरी तरह स्थिर रखना है। शवासन में आपको शरीर के हर अंग को रिलैक्स करना है। इस आसन को आप दिन में कभी भी 5 से 10 मिनट के लिए कर सकते हैं।


इनके अलावा आप अपनी दिनचर्या में मार्चरी आसन और नाड़ी शोधन प्राणायाम भी शामिल कर सकते हैं, जिससे आप तनाव मुक्त होकर शांति से रात में सो सकेंगे। मार्चरी आसन रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है। यह पाचन अंगों की मालिश करने में सहायक है। इस आसन को करने से पाचन में सुधार होता है, जिससे अच्छी नींद आती है। इससे रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और मन को विश्राम मिलता है। सभी आसनों को किसी योग्य योगाचार्य के निर्देशन में अच्छी तरह सीखकर ही करना चाहिए।


उपयोगी सुझाव
भस्त्रिका प्राणायाम को देर रात करने से बचें। उससे आप में बहुत ऊर्जा आएगी और आप को नींद आने में बाधा उत्पन्न करेगी।
देर रात डरावनी फिल्म देखने से बचें क्योंकि उसका विचार आपके मन में पूरी रात आता रहेगा। सोने से पहले कोमल वाद्य संगीत जैसे वीणा वादन, मंत्रोचारण या ज्ञान की बातें सुनना अच्छा होता है।
अपने खुद के नींद का एक आदर्श तरीका बनाएं। दिन के समय सोने का सुझाव नहीं दिया जाता। इससे जैविक घड़ी बाधित होती है। आदर्श रूप में दोपहर में आधे घंटे सोना और रात में 6-8 घंटे सोना उचित माना जाता है।
आपने दिन भर क्या किया इसका आत्मचिंतन करें। शांत भाव से प्रार्थना करके आनंदमय और आरामदायक मन के साथ सोने जाएं।
अपने बिस्तर को सोने से पहले साफ जरूर कर लें। बिस्तर आराम दायक भी होना चाहिए।
अपने रात्रि का भोजन 8:30 तक कर लें। अपने अंतिम भोजन और सोने के समय के मध्य में करीब 2 घंटे का अंतराल रखें।
अगर आपका दिन में किसी के साथ विवाद हुआ है तो यह सुनिश्चित कर लें कि वह सुलझ जाए। उसे मन में रखने से आपकी नींद खराब तो होगी ही बल्कि अगला दिन भी खराब हो जाएगा।
रात्रि में उत्तेजक और नशीली चीजों का सेवन करने से बचें।


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