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जानें प्रोटीन सप्लिमेंट्स से जुड़ी सारी बातें

जानें प्रोटीन सप्लिमेंट्स से जुड़ी सारी बातें


जिम जॉइन करते ही पर्सनल ट्रेनर व डायटीशियन सबसे पहले आपको अपनी डायट में प्रोटीन सप्लिमेंट्स शामिल करने का सुझाव देते हैं. आप इंटरनेट से प्रोटीन पाउडर्स ख़रीद सकती हैं. कुछ चुनिंदा स्टोर्स में आपको रेडि टू ड्रिंक प्रोटीन शेक्स भी मिल जाएंगे, लेकिन क्या ये सिर्फ़ बॉडीबिल्डर्स के लिए होते हैं या जिम जानेवाले सामान्य व्यक्तियों को भी इससे फ़ायदा मिल सकता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी कई सारी बातें. 

जानें प्रोटीन सप्लिमेंट्स से जुड़ी सारी बातें

क्या होते हैं प्रोटीन पाउडर्स?
प्रोटीन विभिन्न रूपों में उपलब्ध हैं. चेन्नई स्थित फ़िटनेस एक्सपर्ट व सेलेब्रिटी ट्रेनर सत्या शिवकुमार कहते हैं,‘‘वे प्रोटीन (दही का पानी) आसानी से उपलब्ध व लोकप्रिय विकल्प है, क्योंकि यह पानी में घुलनशील मिल्क प्रोटीन है. यह संपूर्ण प्रोटीन है. इसमें सबसे अधिक मात्रा में एसेंशियल अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं, जो हमारे विकास के लिए ज़रूरी हैं और जिन्हें हमारा शरीर ख़ुद पैदा नहीं कर सकता. इसमें ऐसे प्रोटीन्स भी पाए जाते हैं, जो कठिन व्यायाम के दौरान हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करतेहैं.’’ प्रोसेसिंग की प्रक्रिया के अनुसार वे प्रोटीन विभिन्न रूपों में उपलब्ध है. वे प्रोटीन आइसोलेट सबसे गाढ़ा रूप है. इसमें 90% या उससे ज़्यादा प्रोटीन पाया जाता है और बहुत कम या शून्य वसा व लैक्टोज़ होता है.’’ दूसरे लोकप्रिय विकल्प सोया और केज़ीन प्रोटीन पाउडर्स हैं. सोया प्रोटीन पाउडर शाकाहारियों के लिए एक अच्छा विकल्प है. केज़ीन, वे की तरह ही मिल्क प्रोटीन है और इसे पचाने में बहुत समय लगता है. 

क्या आपको प्रोटीन सप्लिमेंट्स की ज़रूरत है?
यह आपके भोजन और व्यायाम के स्तर पर निर्भर करता है. ऐथलीट्स को सामान्य लोगों की तुलना में ज़्यादा प्रोटीन की आवश्यकता होती है. इसका उद्देश्य व्यायाम के दौरान क्षतिग्रस्त हुई मांसपेशियों की मरम्मत करना होता है. फिर भी ज़्यादातर लोग, यहां तक कि ऐथलीट्स भी, रोज़ाना की प्रोटीन की ज़रूरत को गोश्त, मछली, चिकन और डेयरी प्रॉडक्ट्स जैसे प्राकृतिक स्रोतों के माध्यम से पूरा करते हैं. रोज़ाना के लिए ज़रूरी प्रोटीन से अधिक प्रोटीन ग्रहण करने से मांसपेशियों को कोई अतिरिक्त फ़ायदा नहीं मिलता, क्योंकि यह सीमित मात्रा तक ही मांसपेशियों में अवशोषित होता है. कुछ लोगों को शरीर की प्रतिदिन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रोटीन शेक्स की ज़रूरत पड़ सकती है. कम कैलोरी ग्रहण करनेवाले, शाकाहारी लोग एवं कठिन ट्रेनिंग लेनेवालों को प्रोटीन सप्लिमेंट्स से फ़ायदा मिल सकता है. सत्या कहते हैं,‘‘एक पाउंड मांसपेशी बनाने के लिए शरीर को प्रतिदिन 10 से 14 ग्राम अतिरिक्तप्रोटीन की आवश्यकता होती है. यह बहुत ज़्यादा नहीं है. कुछ पाउडर्स में प्रति सर्विंग 80 ग्राम प्रोटीन होता है. आपको उतने प्रोटीन की आवश्यकता नहीं है. वैसे भी आपका शरीर ऊर्जा पाने के लिए प्रोटीन को तोड़ देता है. ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन का सेवन आपके लिवर और किडनी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है.’’


क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 
डॉ देवेंद्र देसाई, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, मुंबई कहते हैं,‘‘यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक तत्व हैं तो आपको प्रोटीन सप्लिमेंट्स की ज़रूरत नहीं है. हां, ऐथलीट्स को अतिरिक्त प्रोटीन की ज़रूरत पड़ सकती है. सामान्यतौर पर प्रोटीन सप्लिमेंट्स हमारे पाचन तंत्र को नहीं प्रभावित करते हैं, लेकिन लंबे समय तक बहुत ज़्यादा प्रोटीन ग्रहण करने से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को नुक़सान हो सकता है. कुछ किडनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोटीन से किडनी संबंधी बीमारी बढ़ सकती है (इसमें मरीज़ के अंदर प्रोटीन जमा हो जाता है, जिससे बीमारी बढ़ने लगती है और इलाज से कोई फ़ायदा नहीं मिलता). पहले ऐसा माना जाता था कि हाई-प्रोटीन डायट उन लोगों के लिए ख़तरनाक हो सकती है, जो लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस मत को खारिज कर दिया है.’’


क्या ध्यान रखना है ज़रूरी?
अगर आप अपने किसी मील (भोजन) की जगह वे प्रोटीन ग्रहण करना चाहती हैं या इसे रोज़ाना के खानपान में शामिल करना चाहती हैं तो आर्टिफ़िशियल फ़्लेवर्स व स्वीटनर्स युक्त वे से परहेज़ करें. ऐसे ब्रैंड्स न ख़रीदें जिनमें फ्रक्टोज़, डेक्स्ट्रोज़ व मैल्टोड्रेक्स्ट्रिन के रूप में अतिरिक्त शक्कर हो. ऐसे प्रॉडक्ट्स पर भी पैसे न बहाएं, जिनमें क्रियाटिन, ग्रोथ पेप्टाइड्स व ग्लूटामिन हों. वे का सेवन करने से कुछ लोगों को पेट फूलने व पेट ख़राब होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. 

क्या हो इसके इस्तेमाल का सही तरीक़ा?
आमतौर पर लोग कहते हैं कि व्यायाम करने के तुरंत बाद प्रोटीन पाउडर्स का सेवन करना चाहिए, लेकिन साठे इस मत को नकारते हुए कहते हैं,‘‘शरीर को व्यायाम से पहले और बाद में कार्बोहाइड्रेस की ज़रूरत होती है, क्योंकि ये शरीर के लिए ईंधन का काम करते है.’’ फिर प्रोटीन पाउडर्स का प्रयोग कब करना चाहिए? ‘‘दिन में कभी भी, ’’सत्या सलाह देते हुए कहते हैं. ‘‘इसे स्नैक के रूप में या भोजन के विकल्प के रूप में ग्रहण करें, लेकिन व्यायाम के तुरंत बाद नहीं.’’
 :ख़ूबियों का ख़ज़ाना खजूर

ख़ूबियों का ख़ज़ाना खजूर



आपके पेट में चूहे कूद रहे हैं व आप सुस्त व ऊर्जाहीन महसूस कर रही हैं और कुछ ऐसा खाना चाहती हैं, जो मीठा भी हो और सेहतमंद भी... तो खजूर का सेवन कीजिए. यह स्वादिष्ट फल आपकी कमर का साइज़ बढ़ाए बिना, आपकी मीठा खाने की इच्छा को पूरी कर देगा. 


खजूर का पेड़ दुनिया के सबसे पुराने पेड़ों में से एक है. इसकी खेती सबसे पहले तक़रीबन 10,000 वर्ष पहले सऊदी अरब में की गई थी. इस्लाम धर्म में खजूर को बहुत ज़्यादा महत्व दिया जाता है. इस्लाम धर्म के पैगम्बर मुहम्मद अपने अनुयाइयों को खजूर खाकर और पानी पीकर रमज़ान का उपवास तोड़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे. सऊदी अरब खजूर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. वहां 300 से अधिक प्रजातियों के खजूर उगाए जाते हैं. 
खजूर अनेक प्रकार के विटामिन्स व मिनरल्स का उत्तम स्रोत है. इसमें कैल्शियम, आयरन, फ़ास्फ़ोरस, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और ज़िंक जैसे आवश्यक मिनरल्स पाए जाते हैं. इसके अलावा इसमें थियामिन, रिवोफ़्लैविन, नियासिन, फ़ॉलेट, विटामिन ए और विटामिन के पाया जाता है. खजूर कोलेस्ट्रॉल मुक्त होता है और इसमें वसा की मात्रा भी बहुत कम होती है.


कब्ज़ में फ़ायदेमंद: खजूर को लैक्सटिव फ़ूड की श्रेणी में रखा जाता है. इसमें बहुत अधिक मात्रा में घुलनशील फ़ाइबर्स पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया को स्वस्थ रखते हैं. यही वजह है कि कब्ज़ की समस्या से पीड़ित लोगों को खजूर का सेवन करने की सलाह दी जाती है. खजूर का भरपूर फ़ायदा उठाने के लिए इसे रातभर पानी से भिगोकर रखें और सुबह पानी के साथ उसका सेवन करें. आपका पेट साफ़ रहेगा. 


ख़ून की कमी से निजात: खजूर में आयरन की अधिकता होती है यह रक्त में आयरन की मात्रा बढ़ाता है इसलिए एनीमिया यानी ख़ून की कमी से पीड़ित लोगों को इसका सेवन करने से बहुत फ़ायदा मिलता है.


एलर्जी से बचाव: इसमें ऑर्गैनिक सल्फ़र पाया जाता है, जो बहुत कम खाद्य पदार्थों में मौजूद है. सल्फ़र बहुत-से एलर्जिक रिऐक्शन्स और मौसमी एलर्जीज़ के ख़तरों को कम करता है.

हृदय को स्वस्थ रखता है: खजूर में भरपूर मात्रा में पोटैशियम और बेहद कम मात्रा में सोडियम पाया जाता है इसलिए यह हमारे नर्वस सिस्टम व हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक है.


ऊर्जा बढ़ाता है: खजूर में ग्लूकोज़, सूक्रोज़ व फ्रूक्टोज़ जैसी प्राकृतिक शर्करा पाई जाती हैं, जो ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं. इसमें कैलोरीज़ की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए यह सेहत के प्रति जागरूक लोगों के लिए बेहतरीन है.


हड्डियां मज़ूबत बनाता है: खजूर में मौजूद सेलेनियम, कॉपर व मैग्नीशियम हड्डियों को स्वस्थ व मज़बूत बनाते हैं.


गर्भवती महिलाओं के लिए लाभदायक: खजूर में आयरन होता है इसलिए इसका सेवन करनेवाली गर्भवती महिला व उसके बच्चे को एनीमिया होने का ख़तरा कम होता है. इतना ही नहीं, यह गर्भाशय की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है, जिससे गर्भवती महिला को डिलेवरी के दौरान कम तकलीफ़ होती है. इसमें मौजूद कैल्शियम व लिनोलिक एसिड डिलेवरी के बाद रक्तस्राव को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

क्या खाएं वर्कआउट से पहले और बाद?





आप पूरी ताक़त लगाकर इतना वर्कआउट करती हैं कि थककर चूर हो जाती हैं, बावजूद इसके आपका किलोभर वज़न भी नहीं घट पा रहा? संभवत: आप अपने नाश्ते में लापरवाही बरत रही हैं. वर्कआउट करने से पहले और बाद में उचित नाश्ता करें, इससे वर्कआउट के प्रभाव को लेकर आपको कभी निराशा नहीं होगी. आइए जानते हैं यह होगा कैसे?


भोजन ईंधन है-ये बड़ी ही सहज बात है. बग़ैर नियमित ईंधन के लंबी दूरी तय करना संभव नहीं है. चाहे आपने हाल ही में योगा क्लास जाना शुरू किया हो या फिर मैराथन के लिए ट्रेनिंग ले रही हों, सही परिणाम पाने के लिए उचित आहार सबसे ज़रूरी है. वर्कआउट पर जाने की जल्दबाज़ी में ऐसा स्नैक न खाएं, जो तुरंत उपलब्ध हो. बिस्किट्स सबसे आसानी से उपलब्ध होते हैं, लेकिन इसमें साधारण शक्कर होती है, जो जितनी जल्दी आपको ऊर्जा देती है, उतनी ही जल्दी ऊर्जा के स्तर को घटा भी देती है. ‘‘बिस्किट और दूसरे स्नैक्स, जिन्हें स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है, अक्सर उनका प्रभाव अनिश्चित होता है. शुरुआत में तो आप कुछ ऊर्जावान महसूस करते हैं, लेकिन जब इसका प्रभाव ख़त्म हो जाता है तो आपको फिर भूख लग जाती है. वर्कआउट के पहले और बाद में नाश्ते के तौर पर कॉम्प्लेक्स कार्ब्स का सेवन सबसे बेहतर होता है,’’ बताती हैं फ़िटनेस एक्सपर्ट लीना मोगरे. विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्नैक्स में तक़रीबन २०० कैलोरीज़ होनी चाहिए. जहां प्री-वर्कआउट स्नैक में कार्ब्स की अधिकता होनी चाहिए, वहीं पोस्ट-वर्कआउट स्नैक में प्रोटीन की मात्रा अधिक होनी चाहिए. वर्कआउट से अधिकतम लाभ पाने के लिए हम आपके लिए यहां एक गाइड और मेन्यू पेश कर रहे हैं. 


वर्कआउट से पहले क्या खाएं?

वर्कआउट से पहले का आहार सबसे ज़रूरी है-ख़ासतौर पर यदि आपने अभी-अभी अपनी फ़िटनेस दिनचर्या की शुरुआत की है. लीना के मुताबिक, इस आहार को वर्कआउट शुरू करने से 15 से 20 मिनट पहले खाना चाहिए. ‘‘ख़ाली पेट वर्कआउट की शुरुआत कभी न करें, क्योंकि इससे आपको ऊर्जा देने के लिए आपकी मांसपेशियां टूट जाएंगी. वर्कआउट से पहले के नाश्ते में केला और आलू जैसे कॉम्प्लेक्स कार्ब्स शामिल होने चाहिए. कॉम्प्लेक्स कार्ब्स धीरे-धीरे ऊर्जा उत्पन्न करते हैं.’’


अगर आप स्नैक्स के बजाय अपने नियमित तीन समय के भोजन पर आश्रित रहना चाहती हैं तो वर्कआउट से दो घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए, इससे पाचन के लिए समय मिलेगा. वर्कआउट से पहले के आहार से आपको ऊर्जा मिलनी चाहिए, जो कार्ब्स और प्रोटीन के मिश्रण से मिलती है. वर्कआउट से पहले नाश्ता करने से फ़ैट जल्दी नष्ट होता है और मांसपेशियों की रिकवरी तेज़ी से होती है.
1. आप करने जा रही हैं: कम तीव्रतावाला वर्कआउट

* अंडे और टोस्ट: एक या दो उबले हुए अंडे होल व्हीटब्रेड के एक स्लाइस (गेहूं से बनी) के साथ खाएं.


* ओटमील उपमा: गाजर, प्याज़, फ्रेंच बींस और हरी मिर्च को काट लें. पैन में तेल गर्म करें और करी पत्ता, राई, उड़द दाल और चना दाल डाल दें और फिर प्याज़ डालकर भूनें. कटी हुई सब्ज़ियां, मटर और हरी मिर्च डाल दें. एक कप ओट्स और स्वादानुसार नमक डालकर मिला लें. आधा कप पानी डालकर दो मिनट तक ढंककर पकाएं. फिर पानी की कुछ बूंदें छिड़ककर पुन: ढंककर दो मिनट के लिए पकाएं.

2. आप करने जा रही हैं: मध्यम तीव्रतावाला वर्कआउट


* ताज़ा फलों के साथ ओट्स: पके हुए ओट्स में शहद और ताज़ा कटे हुए फलों को मिला लें.


* ऑमलेट: ऑमलेट को ताज़ी सब्ज़ियों के साथ मिलाएं. अंडे के सफ़ेद हिस्से का इस्तेमाल न करें; भरपूर पौष्टिकता के लिए कम-से-कम एक अंडे की ज़र्दी का प्रयोग करें.

3. आप करने जा रही हैं: उच्च तीव्रतावाला वर्कआउट


* पास्ता: चिकन सॉस या फिर सब्ज़ियों के साथ एक बाउल होल व्हीट पास्ता एक अच्छा विकल्प है. 


* फलों के साथ दही: ताज़ा कटे हुए फलों के एक बड़े बाउल में थोड़ा-सा शहद और दही मिलाएं. अधिक लाभ पाने के लिए प्रोटीन पाउडर का भी प्रयोग किया जा सकता है.


वर्कआउट के बाद क्या खाएं?

वर्कआउट के बाद आपकी मांसपेशियों को काफ़ी क्षति पहुंचती है. फ़िटनेस एक्सपर्ट डिएन पांडे कहती हैं, ‘‘आपको वर्कआउट करने के बाद एक घंटे के भीतर ही कुछ खा लेना चाहिए. अपनी ख़र्च की हुई ऊर्जा की भरपाई के लिए आपको अच्छे गुणोंवाले प्रोटीन की ज़रूरत होती है.’’ ग्लाइकोज़ेन मूल रूप से आपकी मांसपेशियों में इकट्ठा होता है और यही ऊर्जा का प्रमुख स्त्रोत भी है. शरीर के ग्लाइकोज़ेन स्तर को पुन: प्राप्त करने में पूरा एक दिन लग जाता है. यदि प्रोटीन, स्वास्थ्यवर्धक व नैसर्गिक फ़ैट्स और सब्ज़ियों व फलों जैसे अच्छे कार्बोहाइड्रेट्स आपकी रोज़मर्रा की डायट में शामिल हैं तो आपके शरीर में ईंधन के रूप में ग्लाइकोज़ेन काफ़ी मात्रा में संचयित होगा.


1. आपने किया: कम तीव्रतावाला वर्कआउट

* सलाद: सलाद को ताज़ा, मौसमी सब्ज़ियों और ऑलिव ऑयल या किसी भी अन्य कम वसावाले तेल के साथ हल्का भून लें. ओमेगा 3 फैटी एसिड के लिए सऩफ्लावर के बीज मिलाएं.


* पीनट बटर के साथ सेब: सेब को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और इन्हें ऑर्गैनिक पीनट बटर से कोट करें.
2. आपने किया: मध्यम तीव्रतावाला वर्कआउट


* टोफ़ू के साथ कीन्वा: पेट को संतुष्ट करने के लिए एक बाउल पकाए हुए कीन्वा में शिमला मिर्च, लहसुन, ककड़ी, टो़फू, टमाटर और पार्स्ले जैसी सब्ज़ियां मिलाएं.


* मसला हुआ शकरकंद: उबले हुए शकरकंद को ब्लेंडर में मसल लें; नमक और काली मिर्च मिलाएं.
3. आपने किया: उच्च तीव्रतावाला वर्कआउट

* चिकन: ग्रिल किए हुए चिकन के साथ ब्रोकलि, टमाटर और आलू जैसी सब्ज़ियां खाएं.


* मछली: ट्यूना या फिर कोई भी मौसमी मछली अच्छी होती है. उबालें या ग्रिल करके सलाद के साथ खाएं.


* छिलके समेत आलू: अवन को 220 डिग्री तक प्रीहीट करें. आलू पर हल्का तेल लगाकर अवन में रख दें. पहले 20 मिनट तक बेक करें, फिर 190 डिग्री तक तापमान घटाकर 45 मिनट के लिए बेक करें. कम वसावाली खट्टी क्रीम और स्प्रिंग अनियन से टॉप करें.

यूं दूर करें पेट का भारीपन





क्या आप उस शर्मिंदगी से भरी छोटी-सी समस्या से परेशान हैं, जो आपको हॉट-एयर बलून जैसा दिखाती है? तो आप अकेली नहीं हैं. न्यूट्रिशनिस्ट के पास लोगों की जो सबसे आम शिकायतें आती हैं, वो बदहज़मी, गैस की तकलीफ़, हार्ट बर्न, एसिडिटी और ब्लॉटिंग यानी पेट का भारीपन जैसे शब्दों के आस-पास ही मंडराती रहती हैं. हमने एक्सपर्ट्स से बात की और जाना कि क्या हमारी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव इस परेशानी को कम कर सकते हैं, मसलन शुगर-फ्री गम को बार-बार चबाने से बचना. इसलिए अगली बार जब आप अपनी न्यूट्रिशनिस्ट या डॉक्टर के पास जाएं तो इन छोटे-मोटे सुधारों के साथ पहुंचें. लेकिन इससे पहले हम जानते हैं कि हमें पेट का भारीपन क्यों महसूस होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

सही तरीक़े से चबाएं

पेट के भारीपन का सबसे आम कारण बदहज़मी है, एक ऐसी समस्या जिसकी शुरुआत में भोजन को निगलने से होती है. ‘‘बचपन में हमें कहा जाता था कि हम अपने भोजन को कम से कम 32 बार चबाएं. इसका मक़सद था कि हमारा भोजन उन रसों के साथ ठीक तरह से मिल जाए, जो हमारी पाचन क्रिया में सहायक हैं. लेकिन आजकल हम जल्दबाज़ी में भोजन को निगलते हैं,’’ बताती हैं निलांजना सिंह, न्यूट्रिशनिस्ट, पुष्पावती सिंघानिया रिसर्च इंस्टिट्यूट, दिल्ली. खाते समय बात करने या गम चबाने से हम हवा निगल जाते हैं, जिससे स्थिति और ख़राब हो सकती है. धीरे-धीरे खाएं और अपने दिमाग़ को कम से कम 20 मिनट का समय दें, यह महसूस करने के लिए कि आपने पर्याप्त भोजन कर लिया है और अब आपको ज़ाय़केदार मटन करी के तीसरे चम्मच की आवश्यकता नहीं है.






भूख से ज़्यादा न खाएं

यदि आप बार-बार खाते हैं तो एसिड रीफ़्लक्स (उतार-चढ़ाव) की संभावनाएं रहती हैं, यह वह स्थिति है जहां भोजन, पेट के एसिड्स और दूसरे पाचन संबंधी रस इसोफ़ैगस यानी भोजन नलिका में बहने लगते हैं. जब एसिड रीफ़्लक्स मांसपेशियां, जो भोजन के पेट में प्रवेश करते समय खुलती हैं और फिर एसिड को पीछे की तरफ़ आने से रोकने के लिए बंद होती हैं, ठीक तरह से काम नहीं करतीं. ‘‘अपनी ख़ुराक पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें और प्रति मील केवल एक प्रोटीन खाएं. आयुर्वेद के अनुसार दो भोजनों के बीच कम से कम पांच घंटे का अंतराल होना चाहिए, जिससे शरीर को पाचन के लिए पर्याप्त समय मिल सके,’’ बताती हैं तरनजीत कौर, सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट और मेटाबॉलिक कोच, ऐक्टिवऑर्थो, दिल्ली.

कृत्रिम मिठास से बचें

कृत्रिम मीठे में जो आम सामग्री होती है, वह है सॉर्बिटॉल, जो बेहद धीमी गति से मेटाबलाइज़ होता है. एक और सामग्री, फ्रक्टोज़ जो नैसर्गिक शक्कर है, को पचाना मुश्क़िल होता है. सख़्ती से इसे सीमित करें. डायट सोडा, कृत्रिम मिठास, एनर्जी बार्स और अन्य सामग्रियां जिनमें सॉर्बिटॉल शामिल हो, उन्हें छोड़ दें. शक्कर के बजाय चाय में एक चम्मच गुड़ मिलाएं.






पैकेट वाले भोजन को कहें ना


‘‘प्रोसेस्ड फ़ूड्स में जो प्रिज़र्वेटिव्स, रंग और जो ऐडिटिव्स शामिल होते हैं, वो पाचन में सहायक आंत के अच्छे बैक्टीरिया को ठीक तरह से काम नहीं करने देते. इससे पेट का भारीपन और बदहज़मी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है,’’ बताती हैं तरनजीत. भोजन में जो थोड़ा-बहुत पोषण होता है, उसे भी ऐडिटिव्स नष्ट कर देते हैं. भोजन को उसके नैसर्गिक रूप में ही खाएं और प्लास्टिक में लिपटे, ललचानेवाले भोजन से दूर ही रहें.
गैस को कम करें

कोला और अन्य कार्बनेटेड ड्रिंक्स शरीर में गैस भरते हैं. कार्बनेटेड ड्रिंक्स के बजाय ताज़ा निचोड़े गए फलों के रस, नारियल पानी, छाछ या जलजीरा का एक बड़ा ग्लास खाने के साथ पीएं.

धूम्रपान और शराब पर लगाम लगाएं

अध्ययन बताते हैं कि धूम्रपान करनेवाले लोग सांस में ज़्यादा हवा खींचते है, जो उनके शरीर में गैस इकट्ठा होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है. यदि आप अल्कोहल के कुछ घटकों के प्रति असहनशील हैं तो आपको बदहज़मी और गैस हो सकती है. यदि आप धूम्रपान और ड्रिकिंग पूरी तरह नहीं छोड़ सकते तो इनपर लगाम लगाएं.






नियमित व्यायाम करें

जब आप कब्ज़ से पीड़ित होते हैं तो निचली आंत में अपशिष्ट इकट्ठा होने लगता है, जिससे आंत में ज़्यादा गैस रिलीज़ होती है. ‘‘एक्सरसाइज़ या किसी भी प्रकार की गतिविधि मांसपेशियों को शिथिल कर समस्या को कम करती है,’’ बताती है तरनजीत. पानी पीते रहें और अपने डॉक्टर की बात मानें, जब वे कहते हैं कि फ़ाइबर्स का सेवन करें.






ढेर सारा पानी पिएं


‘‘शरीर में पानी का जमाव भी ब्लॉटिंग से संबंधित हो सकता है. पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से यह समस्या हो सकती है. पानी की कमी महसूस कर शरीर पानी इकट्ठा करने लगता है. पानी के अणु सोडियम के साथ मिल जाते हैं और शरीर के अंदर रह जाते हैं,’’ बताती हैं तरनजीत. इसलिए नमक का सेवन कम करें और शरीर में नमी का स्तर बनाए रखें, ताकि आपका शरीर पानी के साथ टॉक्सिन्स को भी बाहर निकाल सके.


कैफ़ीन का सेवन कम करें

चाय, कॉफ़ी और कैफ़ीन वाले अन्य ड्रिंक्स मूत्रवर्धक होते हैं और आपके सिस्टम से पानी को निथार कर बहा देते हैं. ये संवेदनशील बाउल सिंड्रोम की समस्या पैदा कर सकते हैं, जो पेट में दर्द, मरोड़, अचानक व तुरंत पेशाब जाने की ज़रूरत से पहचाना जा सकता है. ये सभी पेट के भारीपन का कारण बन सकते हैं.




कोई अंदाज़ा नहीं क्यों?


यदि सभी प्रकार के प्रयासों के बावजूद आप पेट में भारीपन महसूस करती हैं तो इसके पीछे लैक्टोज़ के प्रति असहनशीलता, ग्लूटन के प्रति संवेदनशीलता या अन्य फ़ूड एलर्जी कारण हो सकते है. संक्रमण, आंत का अवरोध और हार्निया इसका कारण हो सकते हैं. ‘‘आपके शरीर ने साइट्रस फलों या हाइ-फ़ाइबर फ़ूड्स के प्रति असहनशीलता विकसित कर ली होगी,’’ बताती हैं नीलांजना. इसे नज़रअंदाज़ करना आंत को लंबे समय तक के लिए प्रभावित कर सकता है इसलिए इसे नज़रअंदाज़ न करें.

ये नहीं हैं आपके मित्र

* रिफ़ाइन्ड फ़्लोर्स: ये ब्लड शुगर, इन्सुलिन स्तर और फ़ैट स्टोरेज को बढ़ाते हैं.

* बीन्स: इसमें ऑलिगोसैकराइड्स नामक शुगर पाया जाता है, जिसे मानव शरीर आसानी से विघटित नहीं कर पाता. जब ये छोटी आंत में प्रवेश करता है तो बैक्टेरिया इन पर काम करना शुरू करता है और गैस बनने लगती है.


* फूलगोभी, ब्रोकलि, गोभी, शिमला मिर्च: ये सब्ज़ियां गैस बनानेवाली सब्ज़ियों की सूची में शीर्ष पर हैं.


* सेब: इनमें घुलनशील फ़ाइबर होता है, जो पानी को अवशोषित करता है. ये आंत में पाचन के दौरान टूट जाते हैं और इनकी वजह से गैस बनना शुरू हो जाता है.

वज़न घटानेवाले सुपरफ़ूड्स

वज़न घटाने की कवायद में इन दिनों सुपर फ़ूड्स का इस्तेमाल बढ़ा है. सुपर फ़ूड यानी वह फ़ूड, जिसे खाने से सेहत से जुड़े तमाम फ़ायदे मिलते हैं. आइए नज़र डालते हैं उन सुपर फ़ूड्स पर, जो वज़न घटाने में मदद करते हैं 




1. बादाम 
बादाम खाने से दिमाग़ तेज़ होता है, यह पुरानी और जांची-परखी कहावत है. इन दिनों बादाम के वेट लॉस गुणों की भी ख़ासी चर्चा है. दरअस्ल, बादाम में अमीनो एसिड एल-आर्जिनाइन की अधिकता होती है, जिससे वर्कआउट्स के दौरान फ़ैट तेज़ी से बर्न होता है. बादाम को नैचुरल वेट-लॉस पिल भी कहा जाता है. यदि आप भी पेट के आसपास की चर्बी घटाना चाहते हैं तो अपने रोज़ाना के खानपान में बादाम को ज़रूर शामिल करें. इस सूखे मेवे का अधिक से अधिक फ़ायदा लेने के लिए रातभर पानी में भिगोकर रखा बादाम खाएं. हालांकि कितने बादाम खाने चाहिए इसपर लोगों की राय अलग-अलग है. मसलन कोई रोज़ाना 5, कोई मुट्ठीलभर तो कोई 20 बादाम खाने की सलाह देता है. अत: वेट लॉस के लिए इसका सेवन शुरू करने से पहले अपने डायटीशियन से सलाह लेना न भूलें. 


2. ओटमील 
यदि आप वज़न घटाने या उसे मेंटेन्ट करने के बारे में सोच रहे हैं तो सुबह के नाश्ते में ओटमील लेना फ़ायदेमंद होगा. इसमें बीटा ग्लूकन नामक एक तरह का सोल्यूबल फ़ाइबर होता है. यह आपके पेट को भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे भूख कम लगती है. वर्ष 2013 में जरनल ऑफ़ अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ न्यूट्रिशन में प्रकाशित एक शोध के अनुसार ओटमील्स में किसी अन्य रेडी-टू-ईट ब्रेकफ़ास्ट सिरेल्स की तुलना में फ़ाइबर की मात्रा काफ़ी अधिक होती है. ओटमील्स में कैलोरीज़ भी काफ़ी कम होती हैं. मसलन डेढ़ कप ओटमील्स में क़रीब १५० कैलोरीज़ होती हैं. 

3. संतरा 
वज़न घटाने वाला अगला सुपर फ़ूड है आसानी से उपलब्ध संतरा. ऐंटी ऑक्सिडेंट्स से भरपूर यह फल कोलेस्ट्रॉल कम करने, रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, त्वचा को दमकता हुआ रखने जैसे गुणों के लिए पहले से ही जाना जाता है. पर आप कल्पना कर सकते हैं एक पूरा संतरा खाकर आप केवल 59 कैलोरीज़ ले रहे होते हैं. इसमें फ़ाइबर की काफ़ी मात्रा होती है, जिससे आपको तृप्त होने का एहसास होता है. 


4. बीन्स और लेग्यूम्स 
कुछ बीन्स और लेग्यूम्स (फलियां), जैसे-मसूर, सेम, राजमा प्रोटीन और फ़ाइबर से भरे होते हैं. इनमें स्टार्च की भी अच्छी मात्रा होती है. यदि आप अपनी डायट में बीन्स और लेग्यूम्स शामिल करते हैं तो आपका वज़न तेज़ी से कम होगा. इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि वज़न कम होने पर आपको किसी तरह की कमज़ोरी का अनुभव नहीं होगा. 

5. अलसी 
वेट लॉस के इच्छुक लोगों के लिए अलसी वरदान की तरह है. यह न केवल तेज़ी से वज़न घटाने में मदद करती है, बल्कि इसके सेहतमंद फ़ैट और फ़ाइबर आपको स्वस्थ भी रखेंगे. अलसी के हाई फ़ाइबर्स के चलते आपको लगेगा कि पेट भरा है. फ़ाइबर्स के अलावा अलसी का जो घटक आपकी मदद करेगा, वो है ओमेगा-३ फ़ैटी एसिड. कई शोध यह प्रमाणित कर चुके हैं कि ओमेगा-3 की अधिकतावाली चीज़ें खाने से मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है. इतना ही नहीं नियमित रूप से अलसी का सेवन आपको हृदय रोगों से भी बचाता है. आप जूस, स्मूदीज़, दही, सलाद या सूप्स में 1 से 2 टीस्पून पिसी हुई अलसी डालकर इसे अपनी डायट में शामिल कर सकती हैं. हां, आपको यह बात याद रखनी चाहिए कि अलसी को डायट में शामिल करने के बाद आपको ख़ूब पानी पीना होगा.



जिम जॉइन करते ही पर्सनल ट्रेनर व डायटीशियन सबसे पहले आपको अपनी डायट में प्रोटीन सप्लिमेंट्स शामिल करने का सुझाव देते हैं. आप इंटरनेट से प्रोटीन पाउडर्स ख़रीद सकती हैं. कुछ चुनिंदा स्टोर्स में आपको रेडि टू ड्रिंक प्रोटीन शेक्स भी मिल जाएंगे, लेकिन क्या ये सिर्फ़ बॉडीबिल्डर्स के लिए होते हैं या जिम जानेवाले सामान्य व्यक्तियों को भी इससे फ़ायदा मिल सकता है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी कई सारी बातें. 
क्या होते हैं प्रोटीन पाउडर्स?
प्रोटीन विभिन्न रूपों में उपलब्ध हैं. चेन्नई स्थित फ़िटनेस एक्सपर्ट व सेलेब्रिटी ट्रेनर सत्या शिवकुमार कहते हैं,‘‘वे प्रोटीन (दही का पानी) आसानी से उपलब्ध व लोकप्रिय विकल्प है, क्योंकि यह पानी में घुलनशील मिल्क प्रोटीन है. यह संपूर्ण प्रोटीन है. इसमें सबसे अधिक मात्रा में एसेंशियल अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं, जो हमारे विकास के लिए ज़रूरी हैं और जिन्हें हमारा शरीर ख़ुद पैदा नहीं कर सकता. इसमें ऐसे प्रोटीन्स भी पाए जाते हैं, जो कठिन व्यायाम के दौरान हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करतेहैं.’’ प्रोसेसिंग की प्रक्रिया के अनुसार वे प्रोटीन विभिन्न रूपों में उपलब्ध है. वे प्रोटीन आइसोलेट सबसे गाढ़ा रूप है. इसमें 90% या उससे ज़्यादा प्रोटीन पाया जाता है और बहुत कम या शून्य वसा व लैक्टोज़ होता है.’’ दूसरे लोकप्रिय विकल्प सोया और केज़ीन प्रोटीन पाउडर्स हैं. सोया प्रोटीन पाउडर शाकाहारियों के लिए एक अच्छा विकल्प है. केज़ीन, वे की तरह ही मिल्क प्रोटीन है और इसे पचाने में बहुत समय लगता है. 




क्या आपको प्रोटीन सप्लिमेंट्स की ज़रूरत है?
यह आपके भोजन और व्यायाम के स्तर पर निर्भर करता है. ऐथलीट्स को सामान्य लोगों की तुलना में ज़्यादा प्रोटीन की आवश्यकता होती है. इसका उद्देश्य व्यायाम के दौरान क्षतिग्रस्त हुई मांसपेशियों की मरम्मत करना होता है. फिर भी ज़्यादातर लोग, यहां तक कि ऐथलीट्स भी, रोज़ाना की प्रोटीन की ज़रूरत को गोश्त, मछली, चिकन और डेयरी प्रॉडक्ट्स जैसे प्राकृतिक स्रोतों के माध्यम से पूरा करते हैं. रोज़ाना के लिए ज़रूरी प्रोटीन से अधिक प्रोटीन ग्रहण करने से मांसपेशियों को कोई अतिरिक्त फ़ायदा नहीं मिलता, क्योंकि यह सीमित मात्रा तक ही मांसपेशियों में अवशोषित होता है. कुछ लोगों को शरीर की प्रतिदिन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए प्रोटीन शेक्स की ज़रूरत पड़ सकती है. कम कैलोरी ग्रहण करनेवाले, शाकाहारी लोग एवं कठिन ट्रेनिंग लेनेवालों को प्रोटीन सप्लिमेंट्स से फ़ायदा मिल सकता है. सत्या कहते हैं,‘‘एक पाउंड मांसपेशी बनाने के लिए शरीर को प्रतिदिन 10 से 14 ग्राम अतिरिक्तप्रोटीन की आवश्यकता होती है. यह बहुत ज़्यादा नहीं है. कुछ पाउडर्स में प्रति सर्विंग 80 ग्राम प्रोटीन होता है. आपको उतने प्रोटीन की आवश्यकता नहीं है. वैसे भी आपका शरीर ऊर्जा पाने के लिए प्रोटीन को तोड़ देता है. ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन का सेवन आपके लिवर और किडनी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है.’’

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 
डॉ देवेंद्र देसाई, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, मुंबई कहते हैं,‘‘यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक तत्व हैं तो आपको प्रोटीन सप्लिमेंट्स की ज़रूरत नहीं है. हां, ऐथलीट्स को अतिरिक्त प्रोटीन की ज़रूरत पड़ सकती है. सामान्यतौर पर प्रोटीन सप्लिमेंट्स हमारे पाचन तंत्र को नहीं प्रभावित करते हैं, लेकिन लंबे समय तक बहुत ज़्यादा प्रोटीन ग्रहण करने से किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को नुक़सान हो सकता है. कुछ किडनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोटीन से किडनी संबंधी बीमारी बढ़ सकती है (इसमें मरीज़ के अंदर प्रोटीन जमा हो जाता है, जिससे बीमारी बढ़ने लगती है और इलाज से कोई फ़ायदा नहीं मिलता). पहले ऐसा माना जाता था कि हाई-प्रोटीन डायट उन लोगों के लिए ख़तरनाक हो सकती है, जो लिवर की बीमारी से पीड़ित हैं, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस मत को खारिज कर दिया है.’’




क्या ध्यान रखना है ज़रूरी?
अगर आप अपने किसी मील (भोजन) की जगह वे प्रोटीन ग्रहण करना चाहती हैं या इसे रोज़ाना के खानपान में शामिल करना चाहती हैं तो आर्टिफ़िशियल फ़्लेवर्स व स्वीटनर्स युक्त वे से परहेज़ करें. ऐसे ब्रैंड्स न ख़रीदें जिनमें फ्रक्टोज़, डेक्स्ट्रोज़ व मैल्टोड्रेक्स्ट्रिन के रूप में अतिरिक्त शक्कर हो. ऐसे प्रॉडक्ट्स पर भी पैसे न बहाएं, जिनमें क्रियाटिन, ग्रोथ पेप्टाइड्स व ग्लूटामिन हों. वे का सेवन करने से कुछ लोगों को पेट फूलने व पेट ख़राब होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. 
क्या हो इसके इस्तेमाल का सही तरीक़ा?
आमतौर पर लोग कहते हैं कि व्यायाम करने के तुरंत बाद प्रोटीन पाउडर्स का सेवन करना चाहिए, लेकिन साठे इस मत को नकारते हुए कहते हैं,‘‘शरीर को व्यायाम से पहले और बाद में कार्बोहाइड्रेस की ज़रूरत होती है, क्योंकि ये शरीर के लिए ईंधन का काम करते है.’’ फिर प्रोटीन पाउडर्स का प्रयोग कब करना चाहिए? ‘‘दिन में कभी भी, ’’सत्या सलाह देते हुए कहते हैं. ‘‘इसे स्नैक के रूप में या भोजन के विकल्प के रूप में ग्रहण करें, लेकिन व्यायाम के तुरंत बाद नहीं.’’

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