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अकेले सफ़र के लिए कुछ ख़ास टिप्स


अकेले सफ़र के लिए कुछ ख़ास टिप्स


हालिया सर्वे के अनुसार मिलेनियल्स को अकेले सफ़र करने के आइडिया ने ज़्यादा अपील किया है. 58 प्रतिशत मिलेनियल्स का कहना है कि वे अकेले ट्रैवल करने की इच्छा रखते हैं और 26 प्रतिशत ने कहा कि वे अकेले सफ़र कर चुके हैं. 


अकेले सफ़र करने के फ़ायदेः अकेले सफ़र करना ख़ुद ही अपने आप में एक एक्सपोज़र है. आप अकेले ही होते हो, ऐसे में आप सारे फ़ैसले ख़ुद ही लेते हैं. यदि आपका फ़ैसला सही निकलता है, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है. जब आप किसी के साथ सफ़र करते हैं तो अक्सर आप उससे ही बात करते रह जाते हैं और उसपर कुछ हद तक आश्रित भी रहते हैं. जब आप अकेले सफ़र करते हैं, तो आप ज़्यादा दोस्त भी बनाते हैं, क्योंकि आप ज़्यादा लोगों के साथ संवाद करते हैं. लोगों से घुलते-मिलते हैं. 
आंकड़ों की मानें तो अकेले सफ़र करने वालों की संख्या में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. अकेले सफ़र करने की इच्छा को व्यक्तिगत आज़ादी और स्वतंत्रता के संबंध में आ रहे व्यापक सामाजिक बदलाव से जोड़कर देखा जा सकता है. हमारे पास जीने के लिए सिर्फ़ एक ही जीवन है. वह भी जो हमें ख़ुश रखें, ऐसी गतिविधियां करने के लिए बहुत छोटा है. जब आप अकेले सफ़र करते हैं तो चुनौतियां भी आपकी होती हैं और जीत भी. 


अकेले सफ़र करने के लिए निकलने से पहले ध्यान में रखने योग्य बातें: 
1. रिसर्च- कहने की आवश्यकता नहीं है कि इंटरनेट पर करोड़ों ब्लॉग, ट्रैवल एजेंट्स, वेबसाइट्स, किताबें हैं, जो आपको सूचना देती हैं. 
2. प्राथमिकता तय करें- किसी भी जगह का निर्धारण करने से पहले कुछ तथ्य देखने चाहिएः सुरक्षा, लागत, खानपान, पसंद-नापसंद, आदि. अपनी प्राथमिकता के मुताबिक़ ही चीज़ें तय करें. 


3. पैकिंग- बैग हल्के होने चाहिए, ताकि आप ख़ुद ही उसे संभाल सकें. आपको अनजानी जगह पर किसी की मदद की ज़रूरत न पड़े, जिसकी वजह से परेशानी खड़ी हो. 
4. डील्स- अविश्वसनीय डील हासिल करने के लिए सभी तरह के ट्रैवल ऐप्स चेक करते रहें. 
5. सुरक्षा- अपने साथ हमेशा सुरक्षा और इमरजेंसी के कॉन्टेक्ट डीटेल्स साथ रखें. सभी जानकारी वाला एक आईडी भी साथ रखें. फ़ोन में सेफ़्टी ऐप्स डाउनलोड करके रखें.
6. ट्रैवल साथी- एक किताब या गैजेट अपने साथ रखें, जो आपको व्यस्त रखेगा. जब आप किसी का साथ तलाश रहे हों, तो यह आपको बिज़ी रखेगा और बोरियत से भी बचाएगा.
7. चालाकी- जेबकतरों से एक क़दम आगे रहने के लिए अपने साथ डमी वॉलेट ज़रूर रखें. 
और अंत में हम यही कहेंगे कि आप पूरी सकारात्मकता से ट्रिप पर जाएं. अच्छे विचारों के साथ ट्रिप की शुरुआत करें.


अकेले सफ़र के लिए कुछ ख़ास टिप्स


महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराधों के मद्देनज़र सरकारी, ग़ैर-सरकारी तौर पर कई ऐसे आसान ऐप डिज़ाइन करवाए गए हैं, जिन्हें स्मार्ट फ़ोन में डाउनलोड करने के बाद वे अपनी सुरक्षा के प्रति एक हद तक आश्वस्त हो सकती हैं. 
रक्षाः महिलाओं को स्टे सेफ़ ऑल्वेज़ का आश्वासन देते इस ऐप में एसओएस के साथ एक ख़ास बटन की सुविधा है, जो ख़तरा होने की स्थिति में चयनित नंबर्स पर लोकेशन समेत एलर्ट मैसेज भेज देता है. महिलाएं अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में से ऐसे नंबर्स भी चुन सकती हैं, जो उनकी लोकेशन देखते रह सकें. ख़ास बात यह है कि ऐप ऑफ़ होने, या काम न करने की स्थिति में भी वॉल्यूम को तीन सेकेंड तक दबाए रखने से एलर्ट मैसेज भेजा जा सकता है. 
विमेन सेफ़्टीः किसी भी ख़तरे की स्थिति में महिलाएं केवल एक बटन दबाकर इस ऐप के ज़रिए अपने चुने हुए नंबर्स को अपनी लोकेशन की पूरी डिटेल (गूगल मैप सहित) भेज सकती हैं. इसमें तीन रंग के बटन दिए गए हैं, ताकि महिलाएं चुने नंबर्स को ख़तरे की गंभीरता के आधार का संकेत दे सकें. इतना ही नहीं ऐप ऑटोमेटिकली फ़ोन के फ्रंट और रियर कैमरा से फ़ोटो लेकर सर्वर पर अपलोड कर देता है.


सेक2सेफ़्टीः बेहद आसान ऐप. ख़तरे में फंसी महिला को एसओएस मैसेज भेजने के लिए केवल फ़ोन हिलाना है या पावर बटन चार बार दबाना होता है. यह लॉक्ड स्क्रीन या नेट बंद होने की स्थिति में भी काम करता है. इसे सड़क दुर्घटना, अपमान या दुर्व्यवहार, लूट या किसी दूसरी प्राकृतिक संकट की स्थिति में भी प्रयोग किया जा सकता है.
आईवाच विमेनः एलर्ट मैसेज के साथ रियल टाइम ऑडियो-वीडियो बनाकर रजिस्टर्ड कॉन्टैक्ट नंबर्स के पास भेज देता है. ऐप के दावे के मुताबिक़ इसकी लोकेशन ऐक्यूरेसी हाई है, यह बिना जीपीएस के भी काम करता है और बेस्ट सेफ़्टी फ़ीचर्स होल्ड करता है. आई एम सेफ़ बटन दबाकर महिलाएं अपने परिवार को सुरक्षित होने की सूचना दे सकती हैं. 
आई एम शक्तिः यह भी एक आसान ऐप है, जो पांच बार पावर बटन को दबाने से दो सेकेंड के अंदर पहले से चुने लोगों को लोकेशन के साथ एलर्ट मैसेज भेज देता है. अगर लोकेशन ऑन न हो, तो ऐप के द्वारा ऑटोमेटिकली लोकेशन ऑन करके फिर एलर्ट मैसेज भेज दिया जाता है.


तीन बातें जो अकेले सफ़र को बनाएं सुरक्षित
मारे देश में आज भी हज़ारों बेटियों को यह सिखाते हुई बड़ा किया जाता है कि एक अकेली लड़की बना सकती है पूरे घर के लिए रोटियां, धो सकती है हफ़्ते भर के कपड़े, लगा सकती है महीने भर का हिसाब और छान-फटक सकती है साल भर का राशन... लेकिन एक अकेली लड़की नहीं लांघ सकती घर की दहलीज़, नहीं जा सकती शहर से बाहर, नहीं घूम सकती देश-विदेश अकेले. क्यों? क्योंकि घर के बाहर भटक जाने का ख़तरा है. ख़तरा है बहका दिए जाने का और ख़तरा है बेइज़्ज़त करके मार दिए जाने का. बेशक़ अपनी बुलबुलों की हिफ़ाज़त करना हमारी ज़िम्मेदारी है और अख़बार, टीवी और न्यूज़ चैनल्स के ज़रिए सुबह से शाम तक कानों में पड़ती दिल दहला देनी वाली ख़बरों के लिहाज़ से भी यह सोचना ग़लत नहीं कि घर के बाहर ख़तरा है, लेकिन ख़तरे के डर से अपनी बुलबुलों के पर बांध देना सही नहीं. क्योंकि भले ये दुनिया जितनी सफ़ेद होनी चाहिए थी, उतनी नहीं है लेकिन स्याहियां अभी इतनी भी गाढ़ी नहीं हुईं कि उजालों के सपने देखने छोड़ दिए जाएं. इसीलिए कोई स्याही हमेशा के लिए आपकी बेटी के मन पर लिख दे खाक हुए अरमानों की इबारत, क्यों न उसे पंख फड़फड़ा कर उड़ जाने दें सपनों के सफ़र पर. लेकिन हां, जब निकल रही हो आपकी बुलबुल अकेले सफ़र पर, तो उसके रुमाल में बांधना न भूलें ये तीन गांठें...


1. अपना सच घर पर छोड़कर, मन साथ ले जाना
हालांकि हमारे संस्कार हमें सच बोलना सिखाते हैं, लेकिन सफ़र में इस संस्कार को निभाना कई बार भारी पड़ सकता है. क्योंकि अकेले सफ़र करते हुए लड़कियां सबसे ज़्यादा जिस कारण से ग़लत लोगों का शिकार बनती हैं, वो सच है. शायद ये बात अजीब लग सकती है, लेकिन वाक़ई यह होता है. पहले ग़लत इरादेवाले व्यक्ति लड़कियों से नाम पूछते हैं और धीरे-धीरे उनके हाउस डिटेल्स, फ़ैमिली डिटेल्स, ऑफ़ि स डिटेल्स, गंतव्य, होटल का नाम, रूम नंबर आदि की जानकारी लेकर फिर उन्हें परेशान करते हैं. इसीलिए अगर कोई व्यक्तिगत जानकारी लेने की कोशिश करे भी, तो तोते की तरह सब कुछ सच-सच बताना बिल्कुल ज़रूरी नहीं है. बजाय इसके उसे यथासंभव टालने की कोशिश करें. या साफ़ कह दें कि मुझे पर्सनल डिटेल शेयर करने में दिलचस्पी नहीं, लेकिन घबराकर नहीं, पूरे आत्मविश्वास के साथ. क्योंकि घबराहटों भरा सफ़र कभी यादगार नहीं होता. यादगार सफ़र वो होता है जिसे पूरी आंख और मन की खिड़कियां खोलकर पूरी शिद्दत से किया और जिया जाता है. आख़िरकार हर सफ़र हमें ऐसे रास्तों से जोड़ता है, जहां जितना जोख़िूम है, उससे कहीं ज़्यादा सुंदरता और सुकून है.


2. अपना डर घर पर छोड़कर, विवेक साथ ले जाना
तुलसीदास ने कहा था,‘निज हित, अनहित पशु पहचाना...’ तो फिर ऐसा क्या है, जो विवेक पर भारी पड़ जाता है और चांद का पता पूछने वाली लड़कियां अगले शहर का बस स्टॉप भी अकेले नहीं देख पातीं. मशहूर पुस्तक द अल्केमिस्ट के लेखक पाओलो कोएलो के मुताबिक़ इसका कारण है डर... ‘हां ये डर ही है, जो सपनों को सच करने से रोकता है.’ लेकिन ऐसे देखें तो ये डर कहां नहीं है? क्या घर की चारदीवारों के भीतर डर नहीं? क्या पड़ोस में डर नहीं, बाज़ार में डर नहीं, स्कूल और दफ़्तरों में डर नहीं? लेकिन डर की वजह से हम जीना तो नहीं छोड़ सकते. अपनी पुस्तक प्रथम और अंतिम मुक्ति में जे कृष्णमूर्ति भी यही कहते हैं कि ‘जैसा कि डर के बारे में सोचा और समझा जाता है वास्तविकता वैसी नहीं है. यह हमें डराता है, क्योंकि हम विवेक का साथ छोड़ देते हैं. और विवेक का साथ छोड़ने का अर्थ है असावधान हो जाना. इसलिए अकेले सफ़र पर जाती अपनी बेटी को डर का नहीं विवेक का पाथेय दें.
3. अपने कयास घर पर छोड़कर, विश्वास साथ ले जाना
अंग्रेजी के एक प्रसिद्ध लेखक ने एक बार कहा था कि ‘अगर आपकी कल्पना का फ़ोकस सही नहीं है, तो आपकी आंखें कभी सच नहीं देख सकतीं.’ अकेले सफ़र करने वाली लड़कियों के लिए ये कथन किसी सूत्र से कम नहीं. क्योंकि सच में जब हमारे मन पर अनर्गल बोझ पड़ा होता है, तो हमारी कल्पनाएं भी अविश्वसनीय ढंग से भयाभय हो उठती हैं और फिर सच भी सच जैसा नज़र नहीं आता. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार दहशतभरी ख़बरें इन दिनों इस क़दर हमारे भीतर ठूस-ठूस कर भर गई हैं कि हमारे लिए सामने आनेवाला हर चेहरा दहशतगर्द हो उठा है, लेकिन ख़ुद पर और दूसरों पर विश्वास क़ायम रहे तो नज़ारे बदले भी जा सकते हैं. इसलिए बेहतर है कि जब भी अकेले सफ़र पर निकलें तो उससे कहें कि वो दहशत भरे कयास घर पर ही छोड़ जाए. बचपने की जगह विवेक को आगे रखे. पब्लिक ट्रांसपोर्ट ज़्यादा सुरक्षित ऑप्शन होता है, सो यथा संभव उसका उपयोग करे. घर के लोगों से संपर्क में रहें. अपनी लोकेशन शेयर करती रहें. पैसे बचाने के लिए सुरक्षा से समझौता न करें और ऐसे किसी व्यक्ति से नज़दीकी संवाद न क़ायम करें, जिस पर ज़रा-सा भी शक़ हो.






महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते अपराधों के मद्देनज़र सरकारी, ग़ैर-सरकारी तौर पर कई ऐसे आसान ऐप डिज़ाइन करवाए गए हैं, जिन्हें स्मार्ट फ़ोन में डाउनलोड करने के बाद वे अपनी सुरक्षा के प्रति एक हद तक आश्वस्त हो सकती हैं. 
रक्षाः महिलाओं को स्टे सेफ़ ऑल्वेज़ का आश्वासन देते इस ऐप में एसओएस के साथ एक ख़ास बटन की सुविधा है, जो ख़तरा होने की स्थिति में चयनित नंबर्स पर लोकेशन समेत एलर्ट मैसेज भेज देता है. महिलाएं अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में से ऐसे नंबर्स भी चुन सकती हैं, जो उनकी लोकेशन देखते रह सकें. ख़ास बात यह है कि ऐप ऑफ़ होने, या काम न करने की स्थिति में भी वॉल्यूम को तीन सेकेंड तक दबाए रखने से एलर्ट मैसेज भेजा जा सकता है. 
विमेन सेफ़्टीः किसी भी ख़तरे की स्थिति में महिलाएं केवल एक बटन दबाकर इस ऐप के ज़रिए अपने चुने हुए नंबर्स को अपनी लोकेशन की पूरी डिटेल (गूगल मैप सहित) भेज सकती हैं. इसमें तीन रंग के बटन दिए गए हैं, ताकि महिलाएं चुने नंबर्स को ख़तरे की गंभीरता के आधार का संकेत दे सकें. इतना ही नहीं ऐप ऑटोमेटिकली फ़ोन के फ्रंट और रियर कैमरा से फ़ोटो लेकर सर्वर पर अपलोड कर देता है.




सेक2सेफ़्टीः बेहद आसान ऐप. ख़तरे में फंसी महिला को एसओएस मैसेज भेजने के लिए केवल फ़ोन हिलाना है या पावर बटन चार बार दबाना होता है. यह लॉक्ड स्क्रीन या नेट बंद होने की स्थिति में भी काम करता है. इसे सड़क दुर्घटना, अपमान या दुर्व्यवहार, लूट या किसी दूसरी प्राकृतिक संकट की स्थिति में भी प्रयोग किया जा सकता है.
आईवाच विमेनः एलर्ट मैसेज के साथ रियल टाइम ऑडियो-वीडियो बनाकर रजिस्टर्ड कॉन्टैक्ट नंबर्स के पास भेज देता है. ऐप के दावे के मुताबिक़ इसकी लोकेशन ऐक्यूरेसी हाई है, यह बिना जीपीएस के भी काम करता है और बेस्ट सेफ़्टी फ़ीचर्स होल्ड करता है. आई एम सेफ़ बटन दबाकर महिलाएं अपने परिवार को सुरक्षित होने की सूचना दे सकती हैं. 
आई एम शक्तिः यह भी एक आसान ऐप है, जो पांच बार पावर बटन को दबाने से दो सेकेंड के अंदर पहले से चुने लोगों को लोकेशन के साथ एलर्ट मैसेज भेज देता है. अगर लोकेशन ऑन न हो, तो ऐप के द्वारा ऑटोमेटिकली लोकेशन ऑन करके फिर एलर्ट मैसेज भेज दिया जाता है.


तीन बातें जो अकेले सफ़र को बनाएं सुरक्षित


मारे देश में आज भी हज़ारों बेटियों को यह सिखाते हुई बड़ा किया जाता है कि एक अकेली लड़की बना सकती है पूरे घर के लिए रोटियां, धो सकती है हफ़्ते भर के कपड़े, लगा सकती है महीने भर का हिसाब और छान-फटक सकती है साल भर का राशन... लेकिन एक अकेली लड़की नहीं लांघ सकती घर की दहलीज़, नहीं जा सकती शहर से बाहर, नहीं घूम सकती देश-विदेश अकेले. क्यों? क्योंकि घर के बाहर भटक जाने का ख़तरा है. ख़तरा है बहका दिए जाने का और ख़तरा है बेइज़्ज़त करके मार दिए जाने का. बेशक़ अपनी बुलबुलों की हिफ़ाज़त करना हमारी ज़िम्मेदारी है और अख़बार, टीवी और न्यूज़ चैनल्स के ज़रिए सुबह से शाम तक कानों में पड़ती दिल दहला देनी वाली ख़बरों के लिहाज़ से भी यह सोचना ग़लत नहीं कि घर के बाहर ख़तरा है, लेकिन ख़तरे के डर से अपनी बुलबुलों के पर बांध देना सही नहीं. क्योंकि भले ये दुनिया जितनी सफ़ेद होनी चाहिए थी, उतनी नहीं है लेकिन स्याहियां अभी इतनी भी गाढ़ी नहीं हुईं कि उजालों के सपने देखने छोड़ दिए जाएं. इसीलिए कोई स्याही हमेशा के लिए आपकी बेटी के मन पर लिख दे खाक हुए अरमानों की इबारत, क्यों न उसे पंख फड़फड़ा कर उड़ जाने दें सपनों के सफ़र पर. लेकिन हां, जब निकल रही हो आपकी बुलबुल अकेले सफ़र पर, तो उसके रुमाल में बांधना न भूलें ये तीन गांठें...




1. अपना सच घर पर छोड़कर, मन साथ ले जाना
हालांकि हमारे संस्कार हमें सच बोलना सिखाते हैं, लेकिन सफ़र में इस संस्कार को निभाना कई बार भारी पड़ सकता है. क्योंकि अकेले सफ़र करते हुए लड़कियां सबसे ज़्यादा जिस कारण से ग़लत लोगों का शिकार बनती हैं, वो सच है. शायद ये बात अजीब लग सकती है, लेकिन वाक़ई यह होता है. पहले ग़लत इरादेवाले व्यक्ति लड़कियों से नाम पूछते हैं और धीरे-धीरे उनके हाउस डिटेल्स, फ़ैमिली डिटेल्स, ऑफ़ि स डिटेल्स, गंतव्य, होटल का नाम, रूम नंबर आदि की जानकारी लेकर फिर उन्हें परेशान करते हैं. इसीलिए अगर कोई व्यक्तिगत जानकारी लेने की कोशिश करे भी, तो तोते की तरह सब कुछ सच-सच बताना बिल्कुल ज़रूरी नहीं है. बजाय इसके उसे यथासंभव टालने की कोशिश करें. या साफ़ कह दें कि मुझे पर्सनल डिटेल शेयर करने में दिलचस्पी नहीं, लेकिन घबराकर नहीं, पूरे आत्मविश्वास के साथ. क्योंकि घबराहटों भरा सफ़र कभी यादगार नहीं होता. यादगार सफ़र वो होता है जिसे पूरी आंख और मन की खिड़कियां खोलकर पूरी शिद्दत से किया और जिया जाता है. आख़िरकार हर सफ़र हमें ऐसे रास्तों से जोड़ता है, जहां जितना जोख़िूम है, उससे कहीं ज़्यादा सुंदरता और सुकून है.
2. अपना डर घर पर छोड़कर, विवेक साथ ले जाना
तुलसीदास ने कहा था,‘निज हित, अनहित पशु पहचाना...’ तो फिर ऐसा क्या है, जो विवेक पर भारी पड़ जाता है और चांद का पता पूछने वाली लड़कियां अगले शहर का बस स्टॉप भी अकेले नहीं देख पातीं. मशहूर पुस्तक द अल्केमिस्ट के लेखक पाओलो कोएलो के मुताबिक़ इसका कारण है डर... ‘हां ये डर ही है, जो सपनों को सच करने से रोकता है.’ लेकिन ऐसे देखें तो ये डर कहां नहीं है? क्या घर की चारदीवारों के भीतर डर नहीं? क्या पड़ोस में डर नहीं, बाज़ार में डर नहीं, स्कूल और दफ़्तरों में डर नहीं? लेकिन डर की वजह से हम जीना तो नहीं छोड़ सकते. अपनी पुस्तक प्रथम और अंतिम मुक्ति में जे कृष्णमूर्ति भी यही कहते हैं कि ‘जैसा कि डर के बारे में सोचा और समझा जाता है वास्तविकता वैसी नहीं है. यह हमें डराता है, क्योंकि हम विवेक का साथ छोड़ देते हैं. और विवेक का साथ छोड़ने का अर्थ है असावधान हो जाना. इसलिए अकेले सफ़र पर जाती अपनी बेटी को डर का नहीं विवेक का पाथेय दें.
3. अपने कयास घर पर छोड़कर, विश्वास साथ ले जाना
अंग्रेजी के एक प्रसिद्ध लेखक ने एक बार कहा था कि ‘अगर आपकी कल्पना का फ़ोकस सही नहीं है, तो आपकी आंखें कभी सच नहीं देख सकतीं.’ अकेले सफ़र करने वाली लड़कियों के लिए ये कथन किसी सूत्र से कम नहीं. क्योंकि सच में जब हमारे मन पर अनर्गल बोझ पड़ा होता है, तो हमारी कल्पनाएं भी अविश्वसनीय ढंग से भयाभय हो उठती हैं और फिर सच भी सच जैसा नज़र नहीं आता. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार दहशतभरी ख़बरें इन दिनों इस क़दर हमारे भीतर ठूस-ठूस कर भर गई हैं कि हमारे लिए सामने आनेवाला हर चेहरा दहशतगर्द हो उठा है, लेकिन ख़ुद पर और दूसरों पर विश्वास क़ायम रहे तो नज़ारे बदले भी जा सकते हैं. इसलिए बेहतर है कि जब भी अकेले सफ़र पर निकलें तो उससे कहें कि वो दहशत भरे कयास घर पर ही छोड़ जाए. बचपने की जगह विवेक को आगे रखे. पब्लिक ट्रांसपोर्ट ज़्यादा सुरक्षित ऑप्शन होता है, सो यथा संभव उसका उपयोग करे. घर के लोगों से संपर्क में रहें. अपनी लोकेशन शेयर करती रहें. पैसे बचाने के लिए सुरक्षा से समझौता न करें और ऐसे किसी व्यक्ति से नज़दीकी संवाद न क़ायम करें, जिस पर ज़रा-सा भी शक़ हो.




समर टूर पर जाते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान


यदि आप गर्मियों में घर बैठे-बैठे ऊब गए हैं और कहीं घूमने का प्लैन बना रहे हैं, तो इन ज़रूरी चीज़ों को अपने बैग में पहले से ही पैक कर लें. अक्सर, कई बार ट्रिप पर जाते समय हम कई छोटी-छोटी मगर ज़रूरी चीज़ों को रखना भूल जाते हैं और बाद में पछताते हैं. इस आलेख के माध्यम से हम आपको बताते हैं कि ट्रिप पर निकलते समय आपको कौन-सी चीज़ें सबसे पहले बैग में रखनी चाहिए.


ढीले-ढाले ड्रेसेस पैक करें
गर्मियों का लुत्फ़ उठाने के लिए आप चाहे जहां भी जाएं, लेकिन अपने साथ ज़्यादा भारी और भड़कीले कपड़े ना ले जाएं. उसके बदले सूती या कॉटन के ढीले-ढाले ड्रेसेस को अपने बैग में पैक करें. ये ड्रेसेस पहनकर आप सहज भी महसूस करेंगी और घूमने-फिरने में भी आसानी रहेगी. 




सनस्क्रीन, हैट और शेड्स के बिना ट्रिप है अधूरा
गर्मियों में ट्रिप पर जाते समय सबसे पहले अपने बैग में सनस्क्रीन, शेड्स और हैट रखें. इस मौसम में स्किन केयर की ज़रूरत ज़्यादा होती है. धूप में निकलने से आधे घंटे पहले सनस्क्रीन ज़रूर लगाएं. वहीं हैट और शेड्स आपको धूप से बचाने में अहम् भूमिका निभाने के साथ-साथ आपको स्टाइलिश लुक भी देते हैं.


पानी का बॉटल हो हरपल संग
गर्मी में घूमने के लिए जब भी निकलें, तो ध्यान रखें कि आपके शरीर में पानी की कमी ना हो. अपने साथ पानी की बॉटल, ग्लूकोज़ जैसी चीज़ें हमेशा साथ रखें. हर एक दो घंटे पर पानी पिएं और ख़ुद को फ़िट रखें.


बैग में एक कोना दवाइयों का भी हो
जब भी फ़ैमिली या दोस्तों के साथ आप इस मौसम में घूमने जाएं, तो अपने साथ बुखार, उल्टी और सिरदर्द जैसी कुछ दवाइयां ज़रूर रखें. कई बार ट्रैवलिंग के दौरान इन दवाइयों की ज़रूरत पड़ जाती है. इसलिए इसमें ज़रा भी लापरवाही ना बरतें.


कम सामान यादगार ट्रिप
यदि आप चाहते हैं कि आपका ट्रिप यादगार बन जाए, तो पैकिंग करते समय यह कोशिश करें की कम से कम सामान बैग में पैक करें. क्योंकि, आप ट्रिप पर घूमने-फिरने जा रहे हैं, सामान ढोने नहीं. इसलिए वे सामान ही बैग में रखें जिनकी ज़रूरत सबसे ज़्यादा हो. इन कुछ उपायों से आप अपनी ट्रिप को बेहतर बना सकते हैं.


महाराष्ट्र में दो से चार दिन की छुट्टियां मनाने के लिए टॉप 8 ठिकाने


यदि आप महाराष्ट्र में हैं और दो से चार दिन के शॉर्ट ट्रिप पर जाना चाहते हैं तो हम यहां आपको ऐसी 8 जगहें बता रहे हैं, जहां हम अपने रोमांच को पंख लगाकर उड़ने का मौक़ा दे सकते हैं.


है न काम की ख़बर. चलिए शुक्रिया बाद में कह लीजिएगा पहले छुट्टी की तैयारी तो कर लीजिए.
महाराष्ट्र में 4 दिन के ट्रिप के लिए बेहतरीन हैं ये जगह -


तारकर्ली
तारकर्ली जाएं या पूरा का पूरा मालवण घूम आएं. नीले-नीले समंदर और दूर-दूर तक सफ़ेद रेत महीनों की आपकी थकान को छू-मंतर कर देगी. कुछ रोमांचक करना चाहते हैं तो यहां स्कूबा डाइविंग, पैरा सेलिंग का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं. खाने-पीने में मालवणी व्यंजनों का कोई जवाब नहीं.
किसके साथ जाएं: दोस्तों या पार्टनर के






भीमाशंकर
सह्याद्री की घाटियों में मौजूद भीमाशंकर का मंदिर 11 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. काफ़ी ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर पत्‍थरों से बना है और इसकी ख़ूबसूरती देखते ही बनती है. चारों ओर हरियाली और दूर-दूर तक केवल पहाड़ ही पहाड़ दिखाई देते हैं. इसके अलावा यहां बाक़ी मंदिरों की तुलना में भीड़ भी कम रहती है. यहां का माहौल मेडिटेशन के लिए बिल्कुल सही है. क़रीब ही सोलनपाड़ा डैम भी घूमने जा सकते हैं.
किसके साथ जाएं: परिवार के


लोणार झील
बुलढाना जिले में मौजूद लोणार झील प्रकृति का एक अद्भुत तोहफ़ा है. यह रहस्यमयी झील अल्कलाइन और सलाइन दोनों है. वैज्ञानिकों का मानना है कि हज़ारों साल पहले उल्कापात से यह झील निर्मित हुई थी. यदि पक्षीप्रेमी हैं तो यह डेस्टिनेशन आपकी ट्रैवल लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए. झील तक पहुंचने के लिए आपको दुर्गम रास्तों से गुज़रना होगा, जो आपके रोमांच के स्तर को बढ़ा सकता है. आसपास कई प्राचीन मंदिर भी हैं, जिनमें खजुराहो जैसी कलाकृतियां बनी हुई हैं.


किसके साथ जाएं: दोस्तों के


ताड़ोबा नैशनल पार्क
यदि वन्य जीवों से ख़ास लगाव रखते हैं तो चंद्रपुर के ताड़ोबा नैशनल पार्क की सैर कर आएं. बाघ देखने की इच्छा है तो यह पार्क आपको निराश नहीं करेगा. यहां टाइगर सफ़ारी की सुविधा है. पौधों और वन्य जीवों में रुचि हो तो यह जगह आपके लिए बिल्कुल उपयुक्त है. हिरण, जंगली कुत्ते, अलग-अलग क़िस्म के पंछी आपको यहां देखने को मिलेंगे.


किसके साथ जाएं: बच्चों के




महाबलेश्वर
पहाड़, ठंडी-ठंडी हवाएं आपको सुहाती हैं, तो महाबलेश्वर का रुख करें. यहां के रोमैंटिक मौसम में यदि आपका पार्टनर साथ हो तो बात ही क्या. उगते सूरज की पीली चमक को यादों में संजोने के लिए एक बार यहां ज़रूर जाएं. आप यहां बोटिंग और ट्रेकिंग भी सकते हैं. सुकून के चार दिनों के लिए यह जगह बेहतरीन विकल्प है.


किसके साथ जाएं: पार्टनर के




औरंगाबाद 
​यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित की गईं अजंता एलोरा की गुफाओं में आप अपनी कल्पना की दुनिया में गोते लगा सकते हैं. हरे-भरे गार्डन और झीलें आपको प्रकृति के क़रीब होने के एहसास से भर देंगी. ऐतिहासिक महत्व रखनेवाली इस जगह पर एक बार अपने बच्चों को ज़रूर ले जाएं. 


किसके साथ जाएं: परिवार के


नासिक
नासिक तीर्थ स्थल के अलावा घूमने के लिहाज़ से भी एक शानदार जगह है. अंजनेरी की पहाड़ियों पर आप ट्रेकिंग का मज़ा ले सकते हैं. सुकून की तलाश में हैं तो धम्मगिरी में दो दिन ज़रूर बिताएं. वाइन बनते देखना अपने आप में एक दिलचस्प अनुभव होगा. और पंचवटी आपकी आस्था को तृप्त करने के लिए बिल्कुल सही जगह है. एक शाम गोदावरी के किनारे ज़रूर बिताएं.


किसके साथ जाएं: अपने पैरेंट्स के




पंचगनी 
अपनी नैसर्गिक ख़ूबसूरती और मन को ख़ुश कर देने वाले दृश्यों से भरपूर यह जगह महाराष्ट्र का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है. सुबह जल्दी उठकर वादियों के बीच से सूरज को उगते देखना यक़ीनन आपकी ज़िंदगी का एक ख़ूबसूरत अनुभव होगा. यदि आप उनमें से हैं, जिनके लिए सुबह जल्दी उठना मुश्क़िल नहीं, बल्कि नामुमिक़न है तो आप यहां सूर्यास्त का भी आनंद उठा सकते हैं. 


किसके साथ जाएं: परिवार या पार्टनर के


रिलैक्स होने के लिए देश के इन कोनों को चुनें
सदियों से भारत की पहचान ऐसे देश की रही है, जहां लोग आध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को समझने के लिए आते रहे हैं. दुनियाभर के सैलानी शांति की तलाश में यहां आते हैं. इस क्रम में लोग उन आश्रमों और दूसरे वेलनेस सेंटर्स का रुख़ करते हैं, जो उपचार की प्राचीन परंपराओं, मसलन-योग, ध्यान और आयुर्वेद की मदद से लोगों को शारीरिक व मानसिक रूप से तरोताज़ा करने का दावा करते हैं. ‘वेलनेस हॉलिडेज़’ उन लोगों के बीच ख़ासा लोकप्रिय हो रहा है, जो शहर की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से कुछ समय के लिए ब्रेक लेना चाहते हैं और जीवनशैली में बदलाव व विभिन्न थेरैपीज़ की मदद से भावनात्मक तथा आध्यात्मिक अनुभव पाना चाहते हैं. यदि आप भी तरोताज़ा होने के लिए ऐसे ही कुछ विकल्प खोज रही हैं तो यहां बताई जगहों में से अपनी ज़रूरत के अनुसार कोई जगह चुन सकती हैं. 


आनंदा इन द हिमालयाज़-उत्तराखंड 
यह ऋषिकेश में हिमालय की तलहटी में स्थित है. आनंदा में आध्यात्मिक थेरैपी और विश्वस्तरीय लग्ज़री का अनूठा मेल देखने मिलता है. यहां कई ऐसे कार्यक्रम हैं, जो योग, वेदांत और आयुर्वेद पर आधारित हैं. यहां आप इन-हाउस फ़िज़िशियन और थेरैपिस्ट की सेवा ले सकती हैं. यहां रिफ़्लेक्सोलॉजी, रेकी और क्रिस्टल हीलिंग जैसी कई थेरैपीज़ उपलब्ध हैं.

श्रेयस योगा रिट्रीट-बैंगलोर 
बगीचों के शहर बैंगलोर के बाहरी छोर पर स्थित श्रेयस योगा रिट्रीट, कई एकड़ तक फैली हरियाली के बीच बने कॉटेजेज़ और विलाज़ में संचालित किया जाता है. यहां हठ और अष्टांग योग की कक्षाओं के साथ-साथ प्राणायाम और योगनिद्रा भी सिखाया जाता है. इनका अभ्यास करने से आप स्वयं को खोजने की यात्रा में आगे बढ़ते हैं. देश के बेहतरीन वेलनेस सेंटर्स में शुमार श्रेयस योगा रिट्रीट में स्पा थेरैपीज़, जैसे-रिलैक्सिंग मसाज, ऑर्गैनिक स्क्रब्स और मास्क्स का भी आनंद लिया जा सकता है. 




कलारी कोविलाकोम-केरल 
कलारी कोविलाकोम एक आयुर्वेदिक स्पा और रिज़ॉर्ट है, जहां पारंपरिक और आधुनिक थेरैपीज़ का अद्भुत संयोजन देखने मिलता है. यह सेंटर आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट, डायट और मसाज के माध्यम से तरोताज़ा होने को प्रोत्साहित करता है. कलारी कोविलाकोम वैदिक ज्ञान को अहमियत देता है. यह सेंटर भारत में सैलानियों के बीच काफ़ी मशहूर केरल के पलाक्कड़ में है. यहां मांस और मदिरा के सेवन पर पूर्णत: पाबंदी है. इसका कारण यह बताया जाता है कि शुद्धता के माहौल में अलौकिक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है. यहां मेहमान नंगे पांव रहते हैं या मैट-सोलवाले स्लिपर्स में. हर दिन खाने के बाद जड़ी-बूटियों का ख़ास काढ़ा पीने के लिए दिया जाता है, ताकि आप आंतरिक रूप से भी मज़बूत बने रहें. शाम को आप यहां अदम्य शांति का अनुभव करते हैं, क्योंकि उस समय सेंटर का माहौल मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहता है. 
सौक्या हॉलिस्टिक सेंटर-बैंगलोर 
इस सेंटर का उद्देश्य है मन, मस्तिष्क और शरीर के बीच संतुलन को दोबारा स्थापित करना. इसके लिए वैकल्पिक थेरैपीज़ और प्राचीन चिकित्सा विज्ञान की मदद ली जाती है. बैंगलोर के एक उपनगर वाइटफ़ील्ड में स्थित इस वेलनेस सेंटर में ऐक्यूपंक्चर, हाइड्रोथेरैपी, ऐक्यूप्रेशर, काउंसलिंग, रिफ़्लेक्सोलॉजी, मड थेरैपी और मसाज थेरैपी जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं. 
द टेरेसेस, कनाताल-उत्तराखंड 
चीड़ और देवदार के जंगलों से घिरा द टेरेसेस यहां आनेवाले मेहमानों को दुनिया से पूरी तरह काट देता है. लोग यहां के ख़ूबसूरत प्राकृतिक माहौल में खो-से जाते हैं. चम्बा-मसूरी हाइवे पर बने इस स्पा की ख़ासियत हैं-हाइड्रोथेरैपी बाथ विद मिनरलाइज़िंग सॉल्ट और एवरग्रीन थाई मसाज. इस वेलनेस सेंटर में जकूज़ी, सौना और स्टीम बाथ आदि का आनंद लिया जा सकता है. 
देवाया, दि आयुर्वेदिक ऐंड नैचुरल क्योर सेंटर-गोवा 
गोवा को आमतौर पर पार्टी डेस्टिनेशन के रूप में पहचाना जाता है, पर धीरे-धीरे यह जगह शारीरिक और मानसिक रूप से रिफ्रेश करने के ठिकाने में बदलती जा रही है. पणजी से 13 किलोमीटर दूर दिवर द्वीप पर बना है देवाया. यहां पंचकर्म ट्रीटमेंट, योग, मेडिटेशन, म्यूज़िक थेरैपी और लाइफ़स्टाइल काउंसलिंग द्वारा लोगों को चिंतामुक्त बनाया जाता है. यह सेंटर मसाज, मड और हाइड्रोथेरैपीज़ भी उपलब्ध कराता है.

दूधिया कच्छ की सैर
कच्छ अद्भुत नज़ारों से भरपूर है. इस विस्तृत, दूधिया मरुस्थल में जहां एक ओर आप मांसाहारी गीदड़ों को गुड़-चावल खाते देखेंगे, वहीं आपको 200 वर्षों से मानवरहित एक डरावने और भूतहे गांव से भी रूबरू होने का मौक़ा मिलेगा. आप उस बंदरगाह को भी निहार सकेंगे, जहां सदियों से जहाज़ बनाने का काम किया जाता है. यहां हम आपको इस विस्तृत दूधिया मरुभूमि की कुछ अनूठी विशेषताएं बता रहे हैं. 
कई बार असाधारण, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर नयनाभिराम नज़ारे हमारे आसपास ही आबाद होते हैं, पर हमारा मन दूर-दराज़ के मोहक ठिकानों के सपने संजोते रहता है. मैं एक बात स्वीकारना चाहती हूं, गुजरात के कच्छ का रण के बारे में जानने से पहले मैंने दुनिया के सबसे बड़े नमक के मैदान के रूप में बोलिविया के अद्भुत सालार दे उयूनी के बारे में सुन रखा था. लेकिन जब मैंने रण के श्वेत विस्तार के चित्रों को देखा, तब मैं ख़ुद को वहां ले जाने से रोक नहीं पाई. मैंने अपना कैमरा लिया, बैग पैक किया और मानसून ख़त्म होते ही सीधे भुज के लिए निकल गई. भुज को कच्छ की राजधानी कहा जाता है. यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. पूरे क्षेत्र का भ्रमण करने के लिए आप इसे अपना बेस बना सकते हैं. 
अमिताभ बच्चन, जो पिछले पांच वर्षों से गुजरात पर्यटन विभाग के ब्रैंड ऐम्बैसेडर हैं, द्वारा अपने ख़ास लहज़े में कही जानेवाली टैगलाइन ‘कच्छ नहीं देखा, तो कुछ नहीं देखा’ सैलानियों को इस राज्य की ओर खींच लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. यदि आप कच्छ के रण में घूमने की योजना बना रहे हैं तो मैं आपको ठंडी के मौसम में वहां जाने की सलाह दूंगी. अक्टूबर तक कच्छ के रण सूख जाते हैं, वे धीरे-धीरे दलदली भूमि से रेगिस्तान में रूपांतरित हो जाते हैं. इसके साथ ही रणोत्सव यानी तीन महीने चलनेवाला महोत्सव, जिसे कच्छ फ़ेस्टिवल भी कहा जाता है, पर्यटकों को क्षेत्र की खांटी संस्कृति से परिचित कराने का काम बख़ूबी करता है. इस महोत्सव की सबसे ख़ास बात यह है कि आपको रण रिसॉर्ट के मुख्यद्वार के पास धोर्डो गांव में लग्ज़ीरियस तंबुओं में ठहरने का अवसर मिलता है. यहां अलग-अलग प्रकार की खानेपीने की चीज़ों और हस्तकला से संबंधित स्टॉल्स की कतार देखने मिलेगी. इस बार यह महोत्सव 9 नवंबर 2015 से मनाया जा रहा है, जो 23 फ़रवरी 2016 तक चलेगा. आप अपनी यात्रा की योजना कुछ इस तरह बनाएं कि आपको पूर्णिमा की रात यहां ठहरने का मौक़ा मिले. ठंडी के मौसम में, पूर्णिमा की रात में कच्छ के दूधिया विस्तार की झलक बेजोड़ होती है.



काली पहाड़ी की चढ़ाई 
कालो डूंगर यानी काली पहाड़ी भुज से 90 किमी की दूरी पर है. यह कच्छ की सबसे ऊंची पहाड़ी चोटी है. कालो डूंगर की यात्रा उतनी ही दिलचस्प है, जितना मज़ेदार इसकी चोटी पर पहुंचना. भुज से 20 किमी आगे बढ़ने पर आपको रास्ते में एक नीली तख्ती दिखेगी, जो आपको सूचित करेगी कि आप कर्क रेखा पर हैं. जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, भूदृश्यों को हरे रंग से भूरे और फिर काले रंग में परिवर्तित होता देखेंगे. इन्हीं काले पत्थरों के चलते इसका नाम कालो डूंगर रखा गया है. तैयार रहिए आगे एक और साइनबोर्ड मिलेगा, जिसपर लिखा होगा ‘मैग्नेटिक फ़ील्ड ज़ोन’. यहां इंजिन बंद होने के बावजूद वाहन बड़ी तेज़ी से नीचे आते हैं. यही कारण है कि भू-वैज्ञानिकों की इस इलाक़े में रुचि बढ़ गई है. वे अभी तक इसका परीक्षण कर रहे हैं-ऐसा हमारे ड्राइवर ने हमें किसी बड़े रहस्य का उद्घाटन करनेवाले स्वर में बताया.
कालो डूंगर की चोटी पर आसपास का नज़ारा देखने के लिए एक डेक बनाया गया है. इस डेक से आप इस श्वेत मरुस्थल का विहंगम दृश्य देख सकते हैं. रण का सफ़ेद विस्तार वहां से एक दूधिया नदी की तरह प्रतीत होता है. वहां से आपको एक ब्रिज भी दिखेगा, जो इंडिया ब्रिज के नाम से जाना जाता है. ब्रिज के उस पार पाकिस्तान है. हम आपको दोपहर के समय कालो डूंगर के दत्तात्रेय मंदिर में जाने की सलाह देंगे. यदि आपकी क़िस्मत अच्छी हुई तो आपको यहां एक अत्यंत असाधारण नज़ारा देखने मिल सकता है. भूखे गीदड़ों का समूह मंदिर के पास बने एक ऊंचे चबूतरे पर इकट्ठा होता है. मंदिर के पुजारी उन गीदड़ों को चावल, दाल और गुड़ से बना हुआ प्रसाद खिलाते हैं. हमें बताया गया कि भूखे गीदड़ों को भोजन कराने की यह प्रथा पिछले 400 वर्षों से चली आ रही है.



भूतिया शहर आगे है!
भुज से लगभग 170 किमी दूर है लखपत नगर, जहां केवल सड़क मार्ग द्वारा ही पहुंचा जा सकता है. यह भारत-पाक सीमा से लगा भारत के पश्चिमी छोर पर सबसे आख़िरी शहर है. यह कोरी खाड़ी और कच्छ के रण को जोड़ता है. इसका नाम लखपत यहां की समृद्घि के चलते पड़ा था. दरअस्ल यहां रोज़ाना एक लाख कौड़ी (प्राचीन कच्छ की मुद्रा) का कारोबार होता था. व्यस्ततम बंदरगाह होने के अपने रुतबे को लखपत ने वर्ष 1819 में तब खो दिया, जब एक भूकंप के चलते सिंधु नदी ने अपना मार्ग बदल लिया. नदी शहर से दूर बहने लगी. फ़िलहाल यह एक डरावना और इंसानी आबादी विहीन शहर है. जहां की सड़कें सूनी हैं और घर टूटे-फूटे. सबकुछ 7 किमी लंबी क़िलेबंदी से घिरा हुआ है. क़िले की दीवारें 18वीं शताब्दी में बनाई गई थीं. 
यहां आप लखपत गुरुद्वारा में ठहर सकते हैं, जो एक धनी व्यापारी के घर में बना हुआ है. सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 16वीं सदी में मक्का जाते समय इसी जगह ठहरे थे. यह एक सादगी से भरी और सफ़ेद रंग की संरचना है. इसके कमरों की अच्छे से देखभाल की गई है. बेहतर संरक्षण के लिए इस गुरुद्वारे को यूनेस्को द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है. यहां के कर्मचारी आपको लंगर का सादा और स्वादिष्ट भोजन खाने का आग्रह करेंगे. गुरुद्वारे में रहना-खाना मुफ़्त है. यदि आप अपनी इच्छा से कुछ दान करना चाहें तो सहर्ष स्वीकारा जाता है. 



समंदर के पास
भुज से केवल एक घंटे की दूरी पर है मांडवी. यह बंदरगाह शहर अपने काशीविश्वनाथ बीच और विजय विलास महल के लिए जाना जाता है. विजय विलास महल में फ़िल्म लगान और हम दिल दे चुके सनम की शूटिंग हुई थी, ऐसा आपको वहां के स्थानीय निवासी गर्व से बताएंगे. यह महल आपको किसी पुरानी अंग्रेज़ी कोठी की याद दिलाएगा. महल की मुख्य शोभा बढ़ाने में यहां के फव्वारे, अच्छी तरह से रखरखाव किए गए बगीचे और पैदल चलने के लिए विशेष रूप से बनाई गई पगडंडियों का बड़ा योगदान है. मांडवी सदियों से जहाज़ बनाने के लिए मशहूर है. यहां आकर आप देख सकते हैं कि लकड़ी के विशालकाय जहाज़ कैसे बनाए जाते हैं, वो भी हाथों से. यहां का समंदर किनारा सीगल्स को आकर्षित करता है. ये सीगल्स इंसानों को देखने के इतने आदी हो चुके हैं कि वे आपके साथ चहलक़दमी करने में बिल्कुल भी हिचक महसूस नहीं करते.



भुज का बुलावा 
भुज में आप बस यूं ही चहलक़दमी करते हुए निकल जाइए. आईना महल, प्राग महल का बेल टॉवर, कच्छ म्यूज़ियम वो जगहें हैं, जहां आप समय बिता सकते हैं. या फिर आप सबकुछ भूलकर हमीरसर झील के किनारे बैठ चिडि़यों को देखते रहने का आनंद लें. बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि वर्ष 2001 के गुजरात भूकंप ने शहर के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया था. उसके डेढ़ दशक बाद भी ऐसा लग रहा है, मानो भुज अभी तक अपने बिखरे टुकड़ों को समेटने की कोशिश कर रहा है. यहां के लोगों की कमाई का सबसे बड़ा ज़रिया पर्यटन से होनेवाली कमाई है. यह भी इस इलाक़े के भ्रमण पर आने का एक बड़ा कारण है. 



सलाह
* यदि आप किसी ट्रैवेल पैकेज के तहत नहीं जा रहे हैं तो आपको विशेष प्रवेशपत्र का इंतज़ाम ख़ुद ही करना होगा. इसमें पूरा दिन लग जाता है. अपनी यात्रा योजना बनाते समय इस बात का ध्यान रखें. 
* अपनी यात्रा की योजना रणोत्सव के शुरुआती दिनों के अनुसार बनाएं. ऐसा करके आप इस महोत्सव का पूरी तरह लुत्फ़ उठा सकेंगे. 
* मरुभूमि के सैर-सपाटे के लिए अल-सुबह निकलें या फिर शाम को. दिन में धूप की वजह से आंखों में नमक की चुभन महसूस होती है. 
* रण के सैर के दौरान किसी सुविधा (भोजन, पानी और शौचालय) की उम्मीद न ही करें तो बेहतर. 
* इतिहास में रुचि रखनेवालों के लिए धोलावीरा एक पुरातात्विक महत्व की जगह है. यहां आप प्राचीन सिंधु घाटी की सभ्यता (हड़प्पा संस्कृति) के खंडहरों को देख सकते हैं. भुज से यहां छह घंटे में पहुंचा जा सकता है.

यात्रा के दौरान यूं रखें अपनी फ़िटनेस का ख़्याल
अब छुट्टियां मनाते हुए भी आप अपनी फ़िटनेस का ख़्याल रख सकती हैं. हम आपको यात्रा के दौरान फ़िट रहने के कुछ प्रैक्टिकल तरीक़े सुझा रहे हैं, तो हमारे सुझावों को फ़ॉलों करें और नतीजे आपके सामने होंगे.


अपने शेड्यूल से समझौता न करें 
अक्सर लोग यात्रा के दौरान अपने शेड्यूल से पूरी तरह भटक जाते हैं. सबसे बुरी बात, ज़्यादातर को इसका ज़रा भी मलाल नहीं होता. अमूमन लोग यात्रा के दौरान सुबह ब्रेकफ़ास्ट समय पर नहीं करते. इसका सबसे बड़ा साइडइफ़ेक्ट यह होता है कि सुबह भूखा रहने के चलते वे बाद में ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं. 


पहले से योजना बनाएं 
आप जहां जा रही हों, वहां के स्थानीय खानपान के बारे में पहले से ही रिसर्च करके जाएं. अल्कोहल का सेवन नियंत्रित मात्रा में करें, क्योंकि अल्कोहल से भूख बढ़ जाती है. हां, यदि आपको हवाई यात्रा करनी हो तो शराब न पीना ही बेहतर होता है, क्योंकि अल्कोहल के चलते आपको डीहाइड्रेशन हो सकता है. 
दिन में केवल एक बार बाहर खाएं
चूंकि आप छुट्टियां मनाने गई हैं इसलिए डायट के साथ थोड़ी चीटिंग जायज़ है. आप दिन में एक बार स्थानीय ज़ायके का भरपूर आनंद ले सकती हैं. यदि आप सेहत को लेकर फ़िक्रमंद रहनेवालों में से हैं तो बेहतर होगा कि ठहरने के लिए ऐसे विकल्पों की तलाश करें, जहां आपको किचन की सुविधा भी मिले.


हेल्दी स्नैक्स साथ रखें
झटपट बन जानेवाले ओटमील, सीरियल्स, फल जैसे सेहतमंद स्नैक्स के विकल्प अपने साथ रखें. इस तरह कभी अचानक भूख लगने पर आप सेहतमंद चीज़ें ही खाएंगी. 


होटल के जिम का फ़ायदा उठाएं
यदि आपके पास होटल में ठहरने के अलावा दूसरा कोई विकल्प न हो तो होटल के फ़िटनेस सेंटर का भरपूर लाभ उठाएं. यदि वहां स्विमिंग पूल हो तो आप एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न करने के लिए स्विमिंग भी कर सकती हैं. 

इस तरह वर्कआउट भी संभव है
छुट्टी पर जाते समय अपने वर्कआउट टूल्स को भी साथ रखें, जैसे-जम्प रोप, हल्के स्नीकर्स, योगा मैट इत्यादि. ऐसा करने से आप छुट्टियों के दौरान फ़िटनेस से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने के लिए तैयार रहेंगी. 


ऐक्टिव रहें 
हो सकता है कि जल्दबाज़ीे में आप एक्सरसाइज़ का सामान ले जाना भूल गई हों या जिस होटल में ठहरी हों वहां जिम न हो... तो भी परेशान न हों. आप बस ऐक्टिव बनी रहें. जैसे, यदि आपकी फ़्लाइट डिले हो गई हो तो एयरपोर्ट के आसपास ब्रिस्क वॉक पर निकल जाएं. रात को सोने से पहले कुछ देर टहल कर आ जाएं. सुबह आधा घंटा जल्दी उठकर योग कर लें.

टिपः यदि आपकी फ़्लाइट डिले हो गई हो तो एयरपोर्ट के आसपास ब्रिस्क वॉक पर निकल जाएं. 

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