Header Ads

जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग से बच सकती है नवजात की जान


जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग से बच सकती है नवजात की जान


जन्म के एक घंटे में नवजात शिशु को ब्रेस्टफीडिंग यानी स्तनपान करवाना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इससे शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। साथ ही इससे शिशु का मानसिक और शारीरिक विकास अच्छी तरह से होता है। जिन महिलाओं ने नवजात के जन्म के बाद 2 से 23 घंटों के बीच स्तनपान करवाया उनमें शिशु मृत्यु का खतरा 33 पर्सेंट अधिक पाया गया। वहीं जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान करवाए गए शिशुओं में यह खतरा नज़र नहीं आया।


यूनिसेफ और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि जिन नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) न करवाकर जन्म के 24 घंटों या उसके भी बाद स्तनपान करवाया गया, उनमें शिशु मृत्यु का खतरा दोगुना दिखा। यूनिसेफ के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर हेनरिटा एचट फोर (Henrietta H Fore) ने कहा, 'जब बात ब्रेस्टफीडिंग की आती है तो टाइमिंग काफी मायने रखती है। कई देशों में तो यही चीज शिशु की जाने के लिए खतरे की बात बन जाती है।'



हालांकि भारत ने पिछले एक दशक में इसमें काफी सुधार दिखाया है। 2005 में जहां ब्रेस्टफीडिंग दर 23.4 पर्सेंट थी, वहीं 2015 में यह 41.5 पर्सेंट हो गई, लेकिन अभी भी यह अन्य देशों से पीछे है। जब यूएन के दो देशों द्वारा ब्रेस्टफीडिंग ऐक्सेस के लिए 76 देशों को परीक्षण किया तो उसमें भारत 56वें स्थान पर था। रवांदा और मालावी जैसे अफ्रीकी देश भी नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग कराने के मामले में काफी आगे हैं, लेकिन सबसे अच्छा परफ़ॉर्मर श्री लंका रहा। नवजात के जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग कराने के मामले में श्री लंका का रेट 90.3 पर्सेंट था।


बता दें कि जन्म के एक घंटे में मां का गाढ़ा पीला दूध नवजात के लिए जीवनदायी होता है। मां का पहला दूध डायरिया, निमोनिया और कुपोषण से तो बचाता ही है, शारीरिक और मानसिक विकास में भी सहायक होता है। इसीलिए जन्म के एक घंटे के अंदर ब्रेस्टफीडिंग पर ज़ोर दिया जाता है।



पांच में से तीन बच्‍चों को नहीं मिल पाता है मां का पहला दूध, डब्‍लूएचओ की रिपोर्ट


बच्चे को दिया गया मां का पहला दूध किसी अमृत से कम नहीं है। मां का पहला गाढ़ा दूध पीले रंग का होता है, जिसे 'कोलोस्ट्रम' भी कहा जाता है। इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। यदि इसे शिशु को पिलाया जाता है तो इससे शिशु की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह बच्चे को रोगो से मुक्त रखने में भी मदद करता है।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनियाभर में हर साल लगभग 7.8 करोड़ शिशु यानी प्रत्येक 5 में से 3 शिशुओं को जन्म के बाद शुरुआती पहले घंटे में स्तनपान नहीं कराया जाता है।


इस बात का खुलासा बच्चों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की शाखा यूनिसेफ ने विश्व स्तनपान दिवस के मौके पर अपने एक रिपोर्ट में किया है। आइए जानते है इस रिपोर्ट में स्‍तनपान से लेकर क्‍या बातें सामने आई हैं।

क्‍या है रिपोर्ट में

यूनिसेफ और डब्‍लूएच की तरफ से जारी एक संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनियाभर में हर 5 में से 3 नवजात बच्चे ऐसे हैं जिन्हें जन्म के पहले 1 घंटे के भीतर मां का दूध नहीं मिल पाता है। ऐसे बच्चों की संख्या दुनियाभर में 7 करोड़ 80 लाख के करीब है। ऐसे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के साथ ही गंभीर बीमारी होने के साथ ही मौत का खतरा मंडराता रहता है। जन्म के 1 घंटे के अंदर मां का दूध न पीने वाले बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास पर काफी असर पड़ता है।

भारत में स्‍तनपान को लेकर अवेयरनेस

WHO की इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने ब्रेस्टफीडिंग के मामले में साल 2005 से 2015 के बीच काफी सुधार किया है। यहां 1 घंटे के अंदर नवजात को स्तनपान कराने के आंकड़े 10 सालों में दोगुने हो गए हैं। जहां 2005 में ये आंकड़ा 23.1 प्रतिशत था वहीं 2015 में यह आंकड़ा 41.5 प्रतिशत हो गया। भारत की नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 की रिपोर्ट के हिसाब से 55 प्रतिशत बच्चों को जन्म के 6 महीने तक पर्याप्त रूप से स्तनपान कराया जाता है।

फर्स्‍ट वैक्‍सीन होता है मां का प‍हला दूध

साइंस के अनुसार जन्म के तुरंत बाद या ज्यादा से ज्यादा घंटेभर के भीतर नवजात को स्तनपान कराने से शिशु मृत्युदर काफी कम हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का के स्तन का पहला दूध (कोलेस्ट्रम) संपूर्ण आहार होता है, ये शिशु में फर्स्‍ट वैक्‍सीन की तरह काम करता है, जो शिशुओं में रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसल‍िए जन्म के तुरंत 1 घंटे के भीतर ही शिुशु को स्‍तनपान करा देना चाहिए। जो महिलाएं प्रसव के बाद शिशु को स्तनपान नहीं करवा पाती है तो मां के स्‍तन से दूध न‍िकालकर चम्मच की मदद से बच्चे को पिलाना चाहिए, लेकिन मां का पहला गाढ़ा दूध शिशु के सम्‍पूर्ण विकास के ल‍िए बेहद जरुरी है।

स्तनपान में देरी से स्वास्थ्य पर बुरा असर

रिपोर्ट के अनुसार, स्तनपान में देरी बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। स्तनपान में जितनी देरी होती है शिशु के जीवन पर उतना ही खतरा बढ़ता जाता है। स्तनपान प्रैक्टिस में सुधार के बाद 1 साल के अंदर 5 वर्ष तक की आयु के लगभग 8 लाख बच्चों की जानें बचाई जा सकती हैं। वैसी माएं जो बच्चे के जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान कराती हैं उनकी तुलना में पहले 2 से 23 घंटों के भीतर स्तनपान कराने वाले बच्चों में 28 दिनों के भीतर मौत का खतरा 30 फीसदी तक बढ़ जाता है।

स्तनपान कराने के फायदे

बच्चे को डायरिया जैसे रोग की संभावना कम हो जाती है।
मां के दूध में मौजूद तत्व बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
स्तनपान कराने से मां व बच्चे के मध्य भावनात्मक लगाव बढ़ता है।
मां का दूध न मिलने पर बच्चे में कुपोषण व सूखा रोग की संभावना बढ़ जाती है।
स्तनपान करानो से मां को स्तन कैंसर की संभावना कम हो जाती है।
यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निभाता है।
स्‍तनपान से प्रसव पूर्व खून बहने और एनीमिया की संभावना को कम करता है।
स्‍तनपान कराने से महिलाओं का काफी हद तक वजन कम होता है, नियमित स्‍तनपान कराने वाली माएं मोटापे की समस्‍या से कम ग्रसित होती है।
बच्चे को मोटापे से बचाना है तो मां रहें हेल्दी



हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाली मांओं के बच्चों में मोटापा होने का खतरा कम होता है। द बीएमजे में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि जिन माताओं का वजन संतुलित होता है, जो नियमित रूप से कसरत करती हैं, धूम्रपान नहीं करतीं, पौष्टिक भोजन करती हैं और बहुत कम शराब पीती हैं, उनके बच्चों में मोटापा का खतरा काफी कम होता है।


हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना जरूरी
इस खास शोध में अमेरिका के हावर्ड टी एच चान पब्लिक हेल्थ स्कूल के शोधकर्ता शामिल थे। इसमें कहा गया है कि अगर माता और बच्चे दोनों हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाते हैं तो इससे बचपन में ही मोटापे का खतरा कम हो जाता है।


बड़े होने पर डायबीटीज-हृदय रोग का खतरा
बचपन में मोटापा होने से वयस्क होने पर कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जिसमें डायबीटीज और कार्डियोवस्क्युलर बीमारी के साथ ही असमय मौत का खतरा भी शामिल है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के दो शहरों में 9 से 14 वर्ष के 24 हजार 289 बच्चों के चिकित्सा इतिहास और जीवनशैली की विशिष्टताओं पर अध्ययन किया।



शिशु को दिलाना है डकार तो इन easy स्टेप्स को करें follow




माता पिता के लिए बच्चे ईश्वर का दिया हुआ सबसे अनमोल तोहफा होते हैं। उनके जन्म के बाद उनकी किलकारियों से घर का पूरा वातावरण खुशनुमा बन जाता है। उनकी छोटी छोटी हरकतें इतनी प्यारी होती हैं जिसे देख सभी का मन प्रफुल्लित हो उठता है। लेकिन केवल माँ बनना ही काफी नहीं होता अपने शिशु की सही देखभाल करना भी बेहद ज़रूरी होता है ताकि वह स्वस्थ रहें।

उनकी त्वचा इतनी नाज़ुक होती है कि अगर सही तरीके से ध्यान न दिया जाए तो कई बार उनके शरीर पर दाने निकल आते हैं या फिर उनकी त्वचा लाल होने लगती है जो कई बार उनके लिए परेशानी का कारण बन जाती है। ठीक इसी प्रकार बच्चों को गोद में लेने का भी सही तरीका मालूम होना चाहिए। गलत तरीके से बच्चों को गोद में उठाने से उनकी हड्डियों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जो किसी भी तरह से उनके लिए ठीक नहीं होता।

इतना ही नहीं बच्चे को स्तनपान कराना भी आसान काम नहीं होता। दूध पिलाने के बाद बच्चे को डकार दिलाना भी बहुत ज़रूरी होता है ताकि उसे अपच न हो। बच्चे के डकार लेने के बाद माँ भी राहत की सांस लेती है लेकिन बच्चे को डकार दिलाने के भी कुछ सही तरीके होते हैं।

इसके अलावा बच्चा जब डकार लेता है तो उसके पीछे एक उद्देश्य होता है जिसके बारे में कई माता पिता को जानकारी नहीं होती। छोटे छोटे डकार का मतलब होता है कि दूध पीते वक़्त बच्चे ने अतिरिक्त हवा निगल ली होती है वह डकार की मदद से बाहर निकल गयी है, इससे बच्चे को आराम भी मिलता है।

डकार लेने से बच्चे की पाचन शक्ति अच्छी होती है साथ ही उसके पेट में और भोजन के लिए जगह भी बनती है। बच्चे को दिन भर में हर छोटे छोटे आहार के बाद डकार ज़रूर दिलवाएं। यह बच्चे के लिए बेहद लाभदायक होता है। ख़ास तौर पर उन बच्चों के लिए जो दूध पीने के फौरन बाद उल्टी कर देते हैं और जिनमें एसिड संबंधित रोग के लक्षण होते हैं।


हालांकि यह ज़रूरी नहीं कि आपका बच्चा डकार लेगा ही। कई बच्चे बहुत डकार लेते हैं तो वहीं कुछ बच्चे बहुत मुश्किल से डकार ले पाते हैं तो कुछ बच्चे तो बिल्कुल ही नहीं लेते। इसके लिए आपको डकार दिलाने के सही तरीकों के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि आप अपने बच्चे को स्वस्थ रख सकें। तो आइए जानते हैं बच्चे को डकार दिलाने के सही तरीके के बारे में।

नरम मुलायम तौलिये का इस्तेमाल करें
सबसे पहले आप कोई नरम कपड़ा या तौलिये से अपना कन्धा या फिर अपनी गोद को ढ़क लें। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे डकार दिलाना चाहते हैं कंधे पर या फिर गोद में। कपड़े का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि अगर डकार लेते वक़्त बच्चे के मुँह से थोड़ी बहुत उल्टी निकल आए तो ऐसे में आपके कपड़े ख़राब न हो।

बच्चे को अपनी गोद में आराम महसूस कराएं
दूध पिलाने के तुरंत बाद बच्चे को ज़्यादा हिलाना डुलाना नहीं चाहिए क्योंकि कई बार ऐसी परिस्थिति में बच्चा उल्टी करने लगता है। इसलिए थोड़ी देर के लिए उसे अपनी गोद में आराम से लेटे रहने दें। फिर बड़े ही प्यार से उसे
अपने कंधे के बल लेटा दे।

ध्यान रहे बच्चे की ठोड़ी आपके कंधे पर होनी चाहिए और उसका पेट नहीं दबना चाहिए। अब धीरे धीरे हल्के हाथों से उसकी पीठ को ऊपर से नीचे की ओर सहलाते जाइये। ऐसा आप एक जगह बैठकर या फिर चलते चलते भी कर सकते हैं।

बच्चे को गोद में लेटा कर
कंधे के अलावा आप बच्चे को अपनी गोद में उल्टा लेटाकर भी डकार दिलवा सकते हैं। इसके लिए आप उसे उल्टा लेटाकर हल्के हाथों से उसकी पीठ रगड़े या फिर थपथपाएं। डकार दिलाने का यह तरीका आपको सबसे कठिन लगेगा लेकिन आप परेशान न हों क्योंकि अभ्यास करते करते आप धीरे धीरे इसमें माहिर हो जाएंगे।
बच्चे को 2 बार डकार दिलवाएं
मां का दूध पीने वाले बच्चों के मुकाबले बोतल से दूध पीने वाले बच्चे अतिरिक्त हवा निगल लेते हैं। ऐसे में उनके पेट में गैस बनना आम बात है। इसके लिए ज़रूरी होता है कि ऐसे बच्चों को कम से कम दो बार डकार दिलाया जाए एक दूध पीने से पहले और दूध पीने के बाद क्योंकि अगर दूध पीते वक़्त बच्चा ज़्यादा हवा निगल लेगा तो वह पर्याप्त मात्रा में दूध का सेवन नहीं कर पाएगा। साथ ही वह उलझन भरा भी महसूस करेगा।

स्तनपान करते वक़्त यदि आपको लगे कि आपका बच्चा थोड़ी परेशानी में है तो फौरन उसे डकार दिलवाएं, हो सकता है वह गैस की वजह से दिक्कत महसूस कर रहा हो। बोतल से दूध पीने वाले बच्चों को दूध पीने के दौरान थोड़ी थोड़ी देर में डकार दिलाना ज़रूरी होता है। स्तनपान कराने वाली माताओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यदि उनका बच्चा दूध पीते हुए रोने लगे या फिर उलझन महसूस करे तो फ़ौरन अपने दूसरे स्तन से उसे दूध पिलाएं।

दूध पीते पीते यदि आपका बच्चा सोने लगे तो आप डकार को लेकर ज़्यादा चिंतित न हों। 4 से 6 महीने के बाद आपका बच्चा अतिरिक्त हवा निगलना कम कर देता है इसलिए हमेशा बच्चे के हावभाव और उसकी आवश्यकता अनुसार ही उसे डकार दिलवाएं।
सेक्‍स के वक्‍त महिलाओं की बॉडी में हो जाते हैं ये बदलाव



सेक्‍स के वक्‍त जब आप एक्‍साइट होती हैं तो आपकी बॉडी में कई प्रकार से बदलाव होते हैं। इनमें से कुछ के बारे में तो हर कोई जानता है। मगर कुछ बदलाव ऐसे भी होते हैं जो काफी विचित्र प्रकार के होते हैं। इनमें से कुछ को तो आप समझ भी नहं पाती हैं। हमने ऐसे ही 5 बदलावों को नोटिस किया। आप भी जानें इनके बारे में...

लगता है टॉइलट हो आएं

सेक्‍स के लिए एक्‍साइटेड होने पर पर आपको ऐसा लगता है कि एक बार टॉइलट होकर आ जाऊं तो अच्‍छा रहेगा। ऐसा इस वजह से होता है कि सेक्‍स के लिए उत्‍तेजित होने वाला हिस्‍सा टॉइलट वाले स्‍थान के आस-पास ही होता है। ऐसा तब और ज्‍यादा फील होता है जब आपका जी-स्‍पॉट स्टिम्युलेटेड हो जाता है।

आपकी आंखों की पुतलियां चढ़ जाती हैं...

महिलाएं जब उत्‍तेजित होती हैं तो उनकी आंखों में यह साफ देखा जा सकता है। उनकी आंखों में ए‍क अजीब सा नशीलापन आने लगता है। आंखें बंद होने के साथ ही पुतलियां ऊपर की ओर चढ़ने लगती हैं।

आपको हो सकता है सिरदर्द भी

कई महिलाओं के एक्‍साइट होने पर उन्‍हें सिरदर्द भी होने लगता है। यह दर्द गर्दन से शुरू होकर सिर के पिछले हिस्‍से तक जाता है। ऑर्गेज्‍म से पहले और बाद में सिरदर्द कई बार और तेज हो जाता है। माइग्रेन से परेशान रहने वाली महिलाओं के साथ ऐसा अक्‍सर हो सकता है।

पलकें झपकने लगती हैं जरूरत से ज्‍यादा

सेक्‍स उत्‍तेजना होने पर कई महिलाओं की पलकें जरूरत से ज्‍यादा झपकने लगती हैं। जो महिलाएं पहली बार सेक्‍स करती हैं उनके साथ ऐसा ज्‍यादा होता है।

हो सकता है वैसा फील न हो

सेक्‍स के वक्‍त लोगों को इस बात का इंतजार रहता है कि उनके साथ भी वैसा ही होगा जैसा वह सुनते आए हैं और देखते आए हैं। मगर जरूरी नहीं है कि हर बार वैसा हो ही। उल्‍टा इसके आप कई बार इरीटेट होने लगते हैं।

आपके जेनिटल्ज़ में होने लगता है बदलाव

भले ही इसे आप अपनी आंखों से न देख सकें लेकिन एक्‍साइटमेंट में आपके जेनिटल्ज़ बदलने लगते हैं। उनके अंदर ब्‍लड भर जाने से उनका आकार फूलने लगता है। उनका रंग बदलकर गुलाबी से लाल होने लगता है। कुछ मामलों में तो ये बैंगनी रंग के हो जाते हैं।



सेक्स से पहले बनाएं सेक्सी माहौल




जब बात लवमेकिंग की हो तो सहजता और स्वाभाविकता ही सबसे अच्छी क्वॉलिटी मानी जाती है। लेकिन कई बार अगर आप पहले से कुछ प्लानिंग कर लें तो दोनों पार्टनर की एक्साइटमेंट कई गुना बढ़ जाती है। दूसरे शब्दों में कहें तो सेक्स से पहले अगर आप पार्टनर के लिए सस्पेंस का माहौल बनाकर रखें तो अडवेंचर का मजा ही कुछ और होता है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं सेक्स से पहले की तैयारियों के बारे में जिससे पार्टनर के साथ-साथ आपका मूड भी सेट हो जाएगा...

सेक्स के बारे में सोचें
एक्सपर्ट्स की मानें तो सेक्स की शुरुआत आपके दिमाग से होती है। लिहाजा ऐक्चुअल ऐक्ट शुरू करने से पहले सेक्स के बारे में सोचें। इमैजिन करें, फैंटसाइज करें या फिर कुछ सेक्सी या किंकी सेक्स के बारे में पढ़ें। यह एक तरह से आपके ब्रेन के लिए उत्तेजना का काम करता है।

रहस्यमय बनी रहें
पार्टनर को चिढ़ाएं। कुछ ऐसी चीजें करें जिससे आपमें उनका इंट्रेस्ट बढ़े। पार्टनर को थोड़ा बहुत हिन्ट भी दें कि आज आपका मूड कैसा है। आप चाहें तो दिनभर टेक्स्ट मेसेज के जरिए भी पार्टनर का मूड सेट कर सकती हैं। पार्टनर को इस कदर डेस्पेरेट बना दें कि वह घर आने के बाद आपको अपने करीब लाने से खुद को रोक ही न पाएं।

सेक्सी दिखें
सेक्स हमेशा पेनिट्रेटिव ही हो, ऐसा जरूरी नहीं। कई बार आप मूड बनाकर पूरी तैयारी के साथ इसे और रोमांचक बना सकती हैं। इसके लिए आप चाहें तो सेक्सी आउटफिट या लॉन्जरी पहनकर पार्टनर को रिझा सकती हैं। या फिर हाई हील्स, स्टेलेटोज या शीयर ड्रेस का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके अलावा आप चाहें तो ऐसे गाने सुन सकती हैं जिससे आपके अंदर का पैशन और उत्तेजना जाग जाए।

बेडरूम का ऐंबियंस
ग्रेट सेक्स के लिए सही माहौल और बेहतरीन ऐंबियंस होना भी जरूरी है। आप चाहें तो बेडरूम में नॉर्मल कॉटन चादर की जगह सैटिन शीट्स बिछा सकती हैं। रूम में खुशबूदार कैंडल्स लगाएं, लाइट्स को मद्धम कर दें। इस तरह की तैयारियां देखकर पार्टनर का मूड तुरंत सेट हो जाएगा।

प्रोटेक्शन रेडी रखें
इसमें कोई शक नहीं कि सेक्स में इंजॉयमेंट और प्लेजर के साथ सेफ्टी का होना भी बेहद जरूरी है। लिहाजा इस बात का ध्यान रखें कि प्रोटेक्शन आपके आसपास ही हो इससे पहले कि आप ऐक्चुअल ऐक्ट में बिजी हो जाएं।

सेक्स और नींद के बीच है संबंध
/

अगर अगली बार सेक्स सेशन के बाद आपका पार्टनर आफ्टरप्ले सेशन में आपके साथ इंगेज होने की बजाए तुरंत सो जाए तो आपको अपमानित महसूस होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण है। पुरुषों के इस व्यवहार के पीछे कई वजहें हैं और इस बात का आपके रिश्ते से, पार्टनर आपको कितना प्यार करता है इस बात से या फिर बिस्तर में उनकी परफॉर्मेंस कैसी है इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है...

तो आखिर क्यों तुरंत सो जाते हैं पुरुष?
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जैसे ही कोई पुरुष ऑर्गैज्म हासिल करता है उसके शरीर की बॉडी केमिस्ट्री बदल जाती है। जब पुरुषों के शरीर से प्रोलैक्टिन नाम का बायोकेमिकल रिलीज होता है तो उनका शरीर थक जाता है और इसलिए इंटिमेट सेक्स सेशन के बाद तुरंत पुरुषों को नींद आ जाती है।

क्या महिलाएं भी सो जाती हैं?
सेक्स के बाद तुरंत नींद आने की घटना महिलाओं के साथ आमतौर पर नहीं होती, भले ही वे ऑर्गैज्म क्यों न हासिल कर लें। महिलाएं सेक्स के बाद भी उत्तेजना महसूस करती हैं और उन्हें अच्छा लगता है कि अगर उनका पार्टनर सेक्स के बाद उन्हें गले लगाए, प्यार करे, बात करें...
महिलाओं में मसल्स होते हैं कम
सेक्स के बाद पुरुषों को नींद आ जाती है लेकिन महिलाओं को नहीं आती इसका एक और कारण यह है कि सेक्स और क्लाइमैक्स के बाद मांसपेशियों में एनर्जी-प्रोड्यूसिंग ग्लाइकोजन निकलना कम हो जाता है। चूंकि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में मसल मास कम होता है इसलिए उन्हें सेक्स के बाद आलस्य और निष्क्रियता कम महसूस होती है।

फील-गुड हॉर्मोन
सेक्स के बाद शरीर से ऑक्सिटॉक्सिन नाम का हॉर्मोन रिलीज होने लगता है जिससे हमारा शरीर रिलैक्स्ड महसूस करने लगता है। इस हॉर्मोन की मदद से स्ट्रेस से भरे सारे विचार और चिंताएं समाप्त हो जाती हैं और नींद आसानी से आने लगती है। ऐसा पुरुषों और महिलाओं दोनों के साथ होता है लेकिन महिलाओं की सेक्स के बाद भी उत्तेजित रहने की प्रवृत्ति उन्हें काफी देर तक ऐक्टिव रखती है।

ट्राइफेक्टा इफेक्ट
इस बात की संभावना भी अधिक है कि लाइट्स बंद करके सेक्स करने की वजह से आप और ज्यादा रिलैक्स्ड और स्ट्रेस-फ्री फील करते हैं। अंधेरा आपके शरीर को सिग्नल देता है कि अब समय सोने का है और मेलाटॉनिन नाम का हॉर्मोन नींद की प्रक्रिया को शुरू कर देता है। शरीर में मौजूद प्रोलैक्टिन, ऑक्सिटॉक्सिन और मेलाटोनिन इन तीनों हॉर्मोन्स के ट्राइफेक्टा के असर की वजह से शरीर तुरंत नींद की गिरफ्त में चला जाता है।
इन तरीकों से और मजबूत होगी आपकी सेक्शुअल केमिस्ट्री

कपल्स के बीच रोमांस के अलावा सेक्शुअल रिलेशनशिप काफी मायने रखता है, लेकिन उसमें अगर सेक्शुअल केमिस्ट्री न हो, तो सारा मज़ा किरकिरा हो सकता है। कुछ तरीके हैं, जिनसे आप अपनी सेक्शुअल केमिस्ट्री को सुधार सकते हैं:

प्यार भरा टच
एक प्यार भरा टच आपके पार्टनर को अच्छा महसूस करने में मदद करता है। साथ ही यह फीलिंग्स भी जगा देता है। दरअसल एक प्यार भरे टच से एंडोर्फिंस हॉर्मोन ऐक्टिवेट हो जाते हैं जो कपल्स को ऐक्टिव और कनेक्टिड रखते हैं।

सिड्यूस करें
प्यार और रोमांस में सिड्यूस करना अहम रोल प्ले करता है। सेक्स या फिर रोमांस से पहले अगर पार्टनर को सिड्यूस किया जाए तो यह जादू जैसा काम करता है, लेकिन इसके लिए ज़रूरी नहीं कि आप फिजकली ही पार्टनर को सिड्यूस करने की कोशिश करें। इसके लिए और भी तरीके अपनाएं जा सकते हैं, जैसे कि आप बेहद हॉट कपड़े पहनकर अपने पार्टनर को रिझा सकती हैं। चेहरे पर शरारत-भरी एक हल्की-सी मुस्कान भी कपल्स के बीच सेक्शुअल केमिस्ट्री पैदा कर सकती है।

दोनों के लिए बेहतर हो सेक्स
कई सेक्स पोज़िशन ऐसी होती हैं जिनमें मेल ऑर्गेज़म सही होता है, लेकिन उन्हीं पोज़िशंस में फीमेल पार्टनर को ऑर्गेज़म नहीं होता। इसलिए सेक्स के दौरान ऐसे तरीके या पोज़िशन अपनाएं जिससे दोनों पार्टनर्स को बराबर ऑर्गेज़म मिले।

अपनी सेक्स लाइफ को बनाएं रोमांचक
बेहतर सेक्शुअल केमिस्ट्री के लिए अपनी सेक्स लाइफ को रोमांचक बनाने की कोशिश करें। ज़रूरी नहीं कि फिर इसके लिए सिर्फ बेडरूम का ही सहारा लिया जाए, जो भी जगह आपको आरामदेह लगे, वहां आप ट्राइ कर सकते हैं। कपल्स के बीच झिझक न हो। अगर किसी बात को लेकर परेशानी है, तो तुरंत बातचीत कर उसे दूर करने की कोशिश करें।



पार्टनर को रिझाने के लिए इन तरीकों का करें इस्तेमाल, कभी नहीं होंगे फेल


रिश्तों की डोर बेहद नाज़ुक होती है..फिर चाहे वह पति-पत्नी का रिश्ता हो, गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड या फिर कोई और। रिश्तों के सहेजकर रखने की ज़रूरत होती है। आज हम बात करेंगे पति-पत्नी के रिश्ते की और कैसे उसके बीच प्यार बरकार रखा जाए। कुछ टिप्स हम आपको बताने जा रहे हैं, जिनके ज़रिए आपका प्यार और रिश्ता हमेशा बना रहेगा:
पार्टनर के लिए करें कुछ स्पेशल

रूटीन लाइफ को बदलें। कहने का मतलब है कि रोज़ाना कुछ ऐसा करें जिससे कि आपका पार्टनर स्पेशल फील करे। इसके लिए आप उसे रोज़ाना फोन करें, ढेर सारी बातें करें। उसे अहसास दिलाएं कि आप उससे कितना प्यार करते हैं।

पार्टनर की पसंद का ख्याल

अपने पार्टनर को स्पेशल फील कराने के लिए आप हफ्ते में एक दिन बाहर डिनर का प्लान कर सकते हैं। रोमांटिक गानों का डोज भी आपकी रिलेशनशिप को और खूबसूरत बना देगा, लेकिन कैसा रहेगा कि अगर ये रोमांटिक गाने आपके पार्टनर की पसंद के हों?

आंखों ही आंखो इशारे

आंखें बहुत कुछ कहती हैं। जो ज़ुबां नहीं कह पाती, वह सब आंखें बयां कर देती हैं। इसलिए पार्टनर के साथ खूब सारा आई कॉन्टैक्ट आपके रिलेशनशिप को और मज़बूत बनाने में काम आएगा।

पार्टनर की खोई दिलचस्पी लौटाएगा यह तरीका

अगर आप इस बात से परेशान हैं कि आपका पार्टनर आपमें दिलचस्पी खो रहा है, तो पहले तो इसका कारण जानने की कोशिश करें। नहीं तो आप उसे सेक्शुअली रिझाने की कोशिश करें। इसके लिए बेहतर है कि आप उसी अंदाज़ में अपने पार्टनर को रिझाएं, जो अंदाज़ उसे पसंद आता हो।

प्यार में करें एक्सपेरिमेंट

प्यार और रोमांस एक मज़बूत और प्यारे रिश्ते की नींव रखता है, लेकिन इसी प्यार और रोमांस को आप अपने पार्टनर के लिए एक्सपेरिमेंटल बना दें तो और भी अच्छा रहेगा। इससे आपके पार्टनर की एक्साइटमेंट भी बनी रहेगी और उसकी आपमें दिलचस्पी भी कम नहीं होगी।
सेक्‍सुअल लाइफ को बर्बाद कर सकती है ओसीडी, जानिए कैसे?


ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) ये एक प्रकार की मानसिक बीमारी है, ज‍िसमें मरीज को हर चीज साफ सुथरी और व्‍य‍वस्थित तरीकें से चाहिए होती है। ये एक तरह की सनक होती है जिसमें मरीज साफ सफाई को लेकर सनकी हो जाता है। इससे पीडि़त शख्स एक ही काम को बार-बार कर सकता है, जैसे बार बार हाथ धोना और हर चीज को व्‍यवस्थित रखना और साफ सफाई करते रहना।

इस वजह से इससे पीडि़त व्‍यक्ति हमेशा विचल‍ित रहता है और उसके दिमाग में कई तरह की शंकाएं घूमती रहती है। लेकिन आपको ये जानकर भी हैरानी होगी कि ओसीडी आपकी सेक्‍स लाइफ को भी तबाह कर सकती है, जी हां! ओसीडी की वजह से आपकी सेक्‍स लाइफ भी प्रभाव‍ित होती है।

घिरे रहते है सेक्‍स की शंकाओं से
ओसीडी एक मानसिक रोग है। इसमें पीडि़त के सोच में अचानक से असामान्य बदलाव आने लगते है। अनचाहे ख्यालों की वजह से पीडि़त विचलित से रहता है। इससे पीडि़त शख्स एक ही काम को दोहराने लगता है, जैसे चादर के कोनो को साफ करना, हाथ धोना, डस्टिंग करते रहना। पीडि़त के मन में किसी बात को लेकर डर, शक या असमंजस का भाव रहता है। बल्कि जो इस डिसआर्डर से गुजर रहे होते है उनके ल‍िए सेक्‍स किसी परेशानी से कम नहीं होता है क्‍योंकि वो सेक्‍स की वजह से जल्‍दी विचल‍ित हो जाते है। क्‍योंकि इस बीमारी से घिरे लोग या तो जर्म्‍स और बैक्‍टीरिया से डरकर सेक्‍स करने से कतराते है वरना कुछ लोग तो परफेक्‍ट सेक्‍स और संतुष्टि पाने के ल‍िए बार बार सेक्‍स करना पसंद करते है। ऐसे लोग सेक्‍स को लेकर कई तरह की शंकाओं से घिरे होते है। आइए जानते है कि ये शंकाएं किस किस तरह की होती है।

दूषित या संक्रमित होने का डर
अगर कोई व्‍यक्ति ओसीडी से पीडि़त है तो सेक्‍स से जुड़े अजीबो गरीब ख्‍याल उन्‍हें तंग करते है जैसे कि कहीं उन्‍हें संक्रमण तो नहीं हो जाएगां, कहीं वो सेक्‍स करने से किसी यौन रोग के सम्‍पर्क में तो नहीं आ जाएंगे। ज्यादातर मामलों में, उनको लगने लगता है कि वे एसटीडी (यौन संक्रमित बीमारी) जैसे हर्पीस, एचआईवी आदि के सम्‍पर्क में आ सकते है। सेक्‍स के बाद शरीर से निकलने वाला स्‍त्रावित द्रव्‍य उन्‍हें एसटीडी के लिए अतिसंवेदनशील बना देते है। इस शंका से बाहर निकलने के ल‍िए वे कई तरह टेस्‍ट के करवाने से भी पीछे नहीं हटते है।

बैक्‍टीरिया और कीटाणु का डर
जैसा कि ऊपर आपने पढ़ा ये लोग दूषित या संक्रमित होने के ख्‍याल से ही सेक्‍स को अवॉइड करते है। सेक्‍स तो छोडि़ए ये लोग किस करने से पहले भी 100 बार सोचते है कि किस करते वक्‍त पार्टनर के मुंह के सम्‍पर्क में आने से कहीं बैक्‍टीर‍िया और जर्म्‍स उनके शरीर में प्रवेश न कर लें। इस वजह से ऐसे लोग पार्टनर को छूने से भी बचते है।

घृणा की नजर से
जो लोग ओसीडी से पीडि़त होते हैं, जब वो लोग सेक्‍स एक्टिविटीज के बारे में सोचते है भी है तो उनके दिमाग में सेक्‍स को लेकर घृणा आ जाती है। क्‍योंकि संक्रमण के अलावा ये लोग शरीर से स्‍त्रावित होने वाले द्रव्‍य को अस्‍वच्‍छता से जोड़कर देखते है। सेक्‍स करने के बाद इन लोगों के ल‍िए सफाई बहुत अहमियत रखती है। सेक्‍स के दौरान और शरीर से स्‍त्रावित द्रव्‍य के सम्‍पर्क में जो भी कपड़े आने का इन्‍हें डर रहता है जैसे सारे कपड़े, बेडशीट और यूज में ल‍िया गया टॉवेल तक ये लोग धोने में डाल देते है।
सेक्‍सुअल ऑरिएंटेशन की चिंता
ओसीडी से पीडि़त ज्‍यादात्तर लोगों में जो सबसे बड़ा भय होता है वो ये होता कि उन्‍हें लगता है कि कहीं वो होमोसेक्‍सुअल या बायसेक्‍सुअल न बन जाएं। एक स्‍टडी के अनुसार 10 प्रतिशत ओसीडी के मरीज अपनी सेक्‍सुअल ऑरिएंटेशन के डर से गुजरते है।

यौन विचलन
ओसीडी से पीडि़त लोगों में ये बहुत ही सामान्‍य सी बात है कि उनमें बहुत जल्‍दी ही यौन विचलन होने लगता है, ऐसे लोग ज्‍यादात्तर मौके पर सेक्‍स को अवॉइड करते हैं क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि ज्‍यादा सेक्‍स में दिलचस्‍पी लेने से बलात्‍कार जैसे मामलों को बढ़ोत्तरी मिलती है। जैसे कि किसी महिला को लगता है कि अपने बेटे के साथ ज्‍यादा बेड शेयर करने की वजह से वो उसे व्‍याभिचारी बना सकती है। ऐसे डर की वजह से महिलाएं सेक्‍स के बारे में सोचने से करने से कतराती है।

ऐसे करें सहयोग
अगर आपको कोई चहेता इस बीमारी से पीडि़त है तो आप इस तरीके से उन्‍हें सहयोग कर सकते है।

उन्‍हें समझें
अगर कोई इस समस्‍या से गुजर रहा है तो आप पहले उनके लक्षणों को समझिएं, उनके डर को समझकर ही आप उनके रोग का न‍िदान कर सकते हैं।

डॉक्‍टर से लें परामर्श
अगर आपके पार्टनर को लम्‍बे समय से ये समस्‍या है तो डॉक्‍टर से मिलें और अपने पार्टनर को मिलवाएं।

ओसीडी से पीडि़त लोगों से मिलें
अगर आपका पार्टनर इस बीमारी से पीडि़त है तो आपको ऐसे अन्‍य लोगों से भी मिलना चाहिए जो इस बीमारी से घिरे हुए हैं। उनके अनुभव और स्थितियां आपको आपके पार्टनर को इस‍ स्थिति से बाहर न‍िकालने में मदद कर सकती है।
इन अलग अलग वजहों से महिलाओं और पुरुषों में होती है इनफर्टिलिटी




प्रजनन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें सभी जीवित प्राणी अपनी प्रजातियों के युवाओं को प्रजनन की एक या दूसरी विधि के माध्यम से उत्पन्न करते हैं। मानव में प्रजनन निषेचन के द्वारा होता है जोकि महिलाओं और पुरुषों के स्‍पर्म और अंडे की कोशिकाओं के मिलने पर होता है। ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

कुछ मामलों में दूसरों की तरह ये प्रक्रिया उतनी प्राकृतिक और आनंदमय नहीं रहती है। महिला या पुरुष अगर अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ाने में असक्षम हो तो इसे बांझपन कहते हैं। इसके कारण और इलाज महिला और पुरुष दोनों में अलग-अलग होते हैं क्‍योंकि इनकी प्रजनन प्रक्रिया भी अलग होती है।


पुरुषों में नपुंसकता

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि जब शुक्राणु अंडे की कोशिका को उर्वरक करने में असमर्थ होते हैं तो इसे नपुंसकता कहा जाता है। पुरुष प्रजनन स्खलन के बाद उत्पादित वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता पर निर्भर करता है। पुरुषों में नपुंसकता की दो स्थिति हो सकती है या तो उनके वीर्य में पर्याप्‍त शुक्राणु नहीं बन पाते हैं या फिर एक भी शुक्राणु अंडे तक पहुंच पाने में असमर्थ होता है। इन दोनों ही परिस्थितियों में प्रजनन नहीं हो पाता है।

इसके अलावा पुरुषों में नपुंसकता का कोई लक्षण नज़र नहीं आता है। अगर कोई पुरुष नपुंसक है तब भी वो सामान्‍य रूप से संभोग कर सकता है। इसमें बस पुरुषों के वीर्य के शुक्राणु महिलाओं के अंडे तक नहीं पहुंच पाते हैं और इसे ही पुरुषों में नपुंसकता का कारण माना जाता है।

पुरुषों में नपुंसकता के कारण

टेस्‍टोस्‍टेरॉन की कमी की वजह से स्‍पर्म की संख्‍या में कमी आने लगती है।

इसी तरह किसी सर्जरी, कैंसर या टेस्टिकुलर इंफेक्‍शन की वजह से भी पुरुषों में स्‍पर्म का उत्‍पादन कम होने लगता है।

कभी-कभी गर्म तापमान में एक्‍सरसाइज़ करने, टाइट कपड़े पहनने, सॉना का ज़्यादा इस्‍तेमाल करने से भी टेस्टिकल्‍स का विकास ज़्यादा हो जाता है।


कुछ मामलों में स्‍पर्म काउंट की कम संख्‍या होना एक आनुवांशिक बीमारी होती है।

शराब या ड्रग्‍स के सेवन से भी पुरुषों में नपुंसकता होती है।

हाल ही में एक स्‍टडी में इसके एक नए कारण के बारे में भी पता चला है। एक नया हिस्‍सा 'एटिपिकल सेंट्रिओल' पाया गया है। जाइगोट और गर्भपात का कारण इसे बताया जा रहा है।

महिलाओं में बांझपन

महिलाओं में बांझपन का प्राकृतिक कारण उनकी उम्र होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता कम होती जाती है। उम्र के अलावा अन्‍य कारण हैं फैलोपियन ट्यूब का डैमेज हो जाना, अंडाशय की समस्या या गर्भाशय को नुकसान। इन सभी कारणों की वजह से अंडे तक स्‍वस्‍थ शुक्राणु पहुंचने के बाद भी प्रजनन नहीं हो पाता है।

महिलाओं में बांझपन का कारण

थायराएड ग्रंथि के कारण हार्मोंस का असंतुलित होना और बहुत ज़्यादा तनाव की वजह से ऑव्‍यूलेशन में दिक्‍कत आना।

अनियमित माहवारी भी एक कारण है।

वज़न बहुत ज़्यादा या बहुत कम होना।

गर्भाश्‍य में किसी ट्यूमर या सिस्‍ट का बनना या ओवरी के डैमेज होने की वजह से भी प्रजनन नहीं हो पाता है।

गर्भावस्‍था के दौरान अगर किसी महिला के शिशु को डीईएस दवा दी जाती है तो इससे भी उसकी प्रजनन क्षमता कमज़ोर हो सकती है।

शराब, निकोटिन या अन्‍य किसी ड्रग की वजह से भी महिलाओं में बांझपन हो सकता है।

इलाज
पुरुषों और महिलाओं में इं‍फर्टिलिटी का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्‍ट किए जाते हैं। यूरिन और ब्‍लड टेस्‍ट इसमें सबसे ज़्यादा सामान्‍य है जिनसे पता चल जाता है कि किसकी प्रजनन क्षमता कमज़ोर है। कई मामलों में इंफर्टिलिटी का इलाज सफलतापूर्वक हो जाता है और कप्‍लस को माता-पिता बनने का सुख मिलता है।

पुरुषों में इलाज

जिन पुरुषों में स्‍पर्म काउंट कम होता है उनमें आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन द्वारा महिलाओं के गर्भाश्‍य में स्‍पर्म इंजेक्‍ट किए जाते हैं। इसके अलावा विट्रो फर्टिलाइजेशन भी एक तरीका है जिसमें लैबोरेट्री में आर्टिफिशियल तरीके से शुक्राणु और अंडाणु को निषेचित किया जाता है और फिर उसे महिला के गर्भाश्‍य में डाल दिया जाता है। दवाओं और हार्मोन इंजेक्‍शन से भी लो स्‍पर्म काउंट या किसी संक्रमण को ठीक किया जा सकता है।

महिलाओं में इलाज

किसी संक्रमण के कारण हुए बांझपन को दूर करने के लिए एंटीबायोटिक्‍स का इस्‍तेमाल किया जाता है। हार्मोनल असंतुलन की स्थिति में बाहर से हार्मोन शरीर में डाले जाते हैं। इसके अलावा ऐसे कई सप्‍लीमेंट्स भी मौजूद हैं जो प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं।

मानसून में सेक्‍स सेहत पर न पड़ जाएं भारी, लापरवाही से हो सकती है ये खतरनाक बीमारी




मानसून आते ही दो चीजें बहुत अच्‍छी लगने लगती है एक तो गरमगर्म चाय और पार्टनर के साथ रोमांस। ये सीजन इतना खुशनुमा होता है कि आप चाहकर भी अपने पार्टनर की बांहों में खुद को जाने से रोक नहीं सकती है। बरसात के इस रोमांटिक मौसम में हर कपल रोमांस के ल‍िए वक्‍त और समय निकाल ही लेता है। जैसे हर चीज के दो पहलू होते है वैसे ही यह मौसम कितना रोमांटिक क्‍यों न लगें लेकिन यह अपने साथ ढेरों संक्रामक बीमारियां भी लेकर आता है। इस मौसम में खान पान से लेकर पर्सनल हाईजीन की बहुत केयर करनी पड़ती है।

चाहे आप अपने पार्टनर के साथ इंटीमेट होने का भी सोच रहे हैं तो भी! जी हां अनसेफ सेक्‍स या साफ सफाई के अभाव में आप कई तरह के यौन संचारित रोग या STD's के चपेट में आने के साथ अपने पार्टनर को भी संक्रमित कर सकते हैं।


आइए जानते हैं कि बारिश के मौसम में सेक्‍स करने से आपको कौन-कौन सी बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

यूरिन इंफेक्‍शन

बारिश के मौसम में यौन सम्बन्ध के समय साफ सफाई का ध्यान नहीं रखना यूरिन इन्फेक्शन होने का एक बड़ा कारण है। यूरिन में इन्फेक्शन 16 से 35 वर्ष की महिलाओं को अधिक होता है।

बुखार या ठंड लगने पर

बारिश के मौसम में भीगे बदन सेक्‍स करने से आपको सर्दी, जुकाम और यहां तक कि बुखार भी हो सकता है। यही नहीं यदि इस मौसम में अगर आपके पार्टनर को पहले से ही सर्दी-जुकाम है तो वह सक्रंमण आप तक पहुंच सकता है। संक्रमण के प्रकोप से बचने के लिए सेक्‍स से दूर रहें।

जेनाईटल हर्पीस

हर्पीस एक यौन संचारित रोग है जो बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन की वजह से होता है। इस मौसम में यदि आप यौन संबन्‍ध बनाते हैं तो इस रोग की सम्‍भावना बढ़ जाती है। जब भी कोई संक्रमित व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ सम्बन्ध स्थापित करता है तो उस समय यह वायरस दूसरे व्यक्ति के जननांगों में प्रवेश कर जाता है और त्वचा की तंत्रिका तंत्रों के जरिए फैलने लगता है। इसमें जननांगों के आस पास छाले और फोड़े निकल आते हैं। इसके अलावा ये रोग योनि यीस्ट संक्रमण, बैक्टीरिया संक्रमण या मूत्राशय में संक्रमण के कारण भी यह रोग हो सकता है।

लुब्रिकेशन में कमी

बारिश में सेक्‍स करने पर नेचुरल लुब्रिकेशन काम नहीं करता। ऐसे में बाहर बारिश के पानी और अंदर नमी आपके प्राकृतिक लुब्रिकेंट्स को प्रभावित कर सकता है। तो अगर आप बारिश में यौन संबंध बना हैं, तो यह आपके और आपी पार्टनर के लिए दर्दनाक हो सकता है।

हो सकता है गोनेरिया

बारिश में ओरल सेक्‍स करने का आपके पार्टनर के ल‍िए खतरनाक साबित हो सकता है क्‍योंकि इस मौसम में बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन तेजी से फैलते हैं वहीं अगर ओरल सेक्‍स किया जाए तो gonorrhoea जो एक से तरह का यौन संचारित रोग है और महिलाएं इसकी ज्यादा शिकार होती हैं। ये रोग गले से होते हुए जननांगो तक फ़ैल सकता है। जिस वजह से पुरुषों के पेल्विक हिस्से में दर्द और महिलाओं को पेशाब करते समय जलन होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अनचाही प्रेगनेंसी का डर

मानसून में कम लुब्रिकेशन की वजह से अक्‍सर समस्‍याएं तो बढ़ती है ऐसे में अगर आप सेक्‍स का रोमांच बढ़ाने के ल‍िए बिना कंडोम के सेक्‍स करने की सोच रहे हैं तो इससे आपकी पार्टनर को प्रेगनेंसी का चांस तो रहेगा ही साथ में दोनों को एसटीडी रोग और स्‍किन इंफेक्‍शन भी फैल सकता है।

रिसर्च के मुताबिक शावर सेक्स देता है ज्यादा संतुष्टि



अगर रिसर्च की मानें तो सेक्स के लिए बाथरूम बहुत ही पसंद की जाने वाली जगह है। 2014 के सर्वे के मुताबिक 1000 लोगों पर किए गए सर्वे में 54 फीसदी लोगों ने कहा था कि शावर सेक्स उन्हें ज्यादा संतुष्टि देता है। अगर आप भी शावर सेक्स एंजॉय करना चाहते हैं तो यहां हैं कुछ टिप्स...

रहें फ्लैक्सिबल

शावर सेक्स की कई चीजें काफी पसंद की जाने वाली हैं लेकिन इसके लिए थोड़ी तैयारी की जरूरत है। शावर सेक्स ठीक से हो सके इसके लिए दोनों पार्टनर्स को योगा प्रैक्टिशनर की तरह फ्लैक्सिबल होना चाहिए। यह आपकी अपर बॉडी और लोअर बॉडी दोनों के लिए जरूरी है।

इस्तेमाल करें अक्सेसरीज

अब शावर सेक्स को और सुरक्षित बनाने के लिए मार्केट में कई तरह की अक्सेसरीज मौजूद हैं। फिसलने से बचाने वाली मैट्स, सिंगल लॉकिंग सक्शन फुटरेस्ट के अलावा ड्यूल लॉकिंग सक्शंन हैंडल्स भी आते हैं। यह फिसलने के खतरे से बचाते हैं।

चेक कर लें पानी

पानी का तापमान चेक करना बहुत सामान्य बात लगती है लेकिन कई लोगों के लिए यह बड़ी समस्या है। इरॉटिका की लेखक स्कार्लेट ग्रे बताती हैं, 'मेरे पति और मैं कभी-कभी कुछ डिफरेंट ट्राइ करते रहते है। एक दिन मेरे पति ने शावर सेक्स की तैयारी शुरू कर दी। मैं भी कपड़े उतारकर पहुंची तो मेरी चीख निकल गई। उस दिन मुझे पता चला कि मेरे पति एकदम गरम पानी से शावर लेना पसंद करते हैं।'

ये सावधानियां भी जरूरी

शावर सेक्स में मूड बनते देर नहीं लगती लेकिन यह ध्यान रखें कि कॉन्डम भी फिसल सकते हैं। साथ ही ध्यान रखें कि साबुन या शावर जेल को लूब्रिकेंट की तरह इस्तेमाल न करें क्योंकि इनसे जलन हो सकती है। इसके बजाय सिलिकॉन बेस्ड ल्यूब्स या वेजिटेबल ऑइल का इस्तेमाल करें।

अगर मन न भरे तो...

अगर आपको शावर सेक्स का आइडिया नहीं जंचता तो शावर के नीचे से शुरुआत करके बेडरूम तक जा सकते हैं फिर फाइनली शावर ले सकते हैं।
एज चार्ट से जानें कौन सी उम्र में मां बनना होता है सबसे ज़्यादा रिस्की






औरतों के बीच अकसर यह मुद्दा उठता है कि आखिर गर्भधारण करने के लिए सही उम्र कौन सी होती है। कई बार ऐसे जवाब सामने आते हैं जिसे सुनकर कोई भी आश्चर्यचकित रह जाए। 20 की उम्र के आस पास की महिलाओं में गजब की ऊर्जा होती है साथ ही उनका शरीर भी काफी मज़बूत होता है।

30 की उम्र महिलाओं का करियर सुरक्षित रहता है। वहीं 40 की उम्र के आस पास की महिलाएं आत्मविश्वास से भरी होती हैं लेकिन उनके मन में पहली बार माँ बनने को लेकर कई सारी शंकाएं रहती है। हालांकि इन सभी उम्र में कोई न कोई कमी रह जाती है। यदि आप 40 साल के आस पास की हैं तो निराश होने की ज़रुरत नहीं है क्योंकि शोधकर्ताओं के अनुसार कुछ समस्याओं के बावजूद आप इस उम्र में भी माँ बनने का सुख प्राप्त कर सकती हैं।


कई बार 40 की उम्र की महिला के ऊर्जा का स्तर 20 साल की महिला से भी अच्छा होता है। ये सब आपकी जीवनशैली पर निर्भर करता है कि किस तरह आप खुद को मेन्टेन रखती हैं। आपकी अच्छी सेहत, ऊर्जा, व्यक्तित्व सारी परेशानियों को दूर कर सकता है जिससे आप हेल्दी प्रेगनेंसी का आनंद ले सकती हैं चाहे आपकी उम्र कितनी भी हो।

बढ़ती उम्र में माँ बनने से प्रेगनेंसी से जुड़े कुछ रिस्क होते हैं साथ ही अन्य सेहत से जुड़ी परेशानियां भी होती हैं जिससे आपको और होने वाले बच्चे को निपटना पड़ता है। क्योंकि उम्र के बढ़ने के साथ साथ आपके रिप्रोडक्टिव सिस्टम में भी बदलाव आते हैं, साथ ही स्वास्थ से जुड़ी परेशानियां भी।

उक्त रक्तचाप, 35 के बाद गर्भधारण करने में समस्या, 35 के बाद गर्भपात की ज़्यादा संभावना, मानसिक और व्यक्तिगत परेशानियां जुड़वा बच्चों का रिस्क जो खतरे को और बढ़ाता है, बच्चे के जन्म के समय होने वाली कुछ अन्य बड़ी समस्याएं आदि जैसी सेहत से जुड़ी परेशानियां आम होती हैं।

इस लेख में हम अलग अलग उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं द्वारा गर्भावस्था में अनुभव किये जाने वाली कमियों और जोखिमों के बारे में बात करेंगे।

1. जब आप 20 से 25 के बीच की उम्र की हों
2. जब आप 26 से 34 की उम्र की हों
3. जब आप 35 से 40 की उम्र की हों
4. 40 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी

जब आप 20 से 25 के बीच की उम्र की हों
यही वह समय है जब आपकी प्रजनन क्षमता अधिकतम स्तर पर होती है। साथ ही इस उम्र में कुछ दिक्कतें भी आती है जैसे गर्भकालीन मधुमेह और हाइपरटेंशन। शोधकर्ताओं के अनुसार पहली प्रेगनेंसी में आपकी उम्र जितनी कम होगी आप में स्तन कैंसर होने का खतरा भी कम होगा।

ज़्यादा उम्र वाली महिला की तुलना में आपकी त्वचा भी ज़्यादा अच्छी होगी इसलिए आपको स्ट्रेच मार्क्स की समस्या भी ज़्यादा नहीं होगी। यदि थोड़े बहुत स्ट्रेच मार्क्स होंगे भी तो वह कुछ समय बाद अपने आप चले जाएंगे। अगर आप 20 की उम्र के आस पास माँ बनती हैं तो आपके शरीर की बनावट भी ख़राब नहीं होगी।

प्रेगनेंसी के बाद आप आसानी से अपने पुराने शेप में वापस आ सकती हैं। कम उम्र की महिलाओं में ऊर्जा का स्तर अधिक होता है। ऐसे में आप बड़े ही आराम से रात भर अपने बच्चे के लिए जाग सकती हैं इसलिए अगर आप पूरी तरह से अपने मातृत्व का आनंद उठाना चाहती हैं तो माँ बनने के लिए यह सबसे सही उम्र है।

आपका बच्चा: इस उम्र में माँ बनने से आपका बच्चा भी स्वस्थ रहेगा। ऐसे में इस बात का खतरा भी कम होता है कि आपका बच्चा किसी भी तरह के क्रोमोसोमल असामान्यताओं या डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हो।

इसके अलावा इस उम्र में गर्भपात की संभावना भी कम होती है जितनी कम आपकी उम्र होगी उतने ही ताज़े आपके अण्डाणु होंगे। यदि आप कम उम्र में माँ बनती हैं तो पहले तिमाही में गर्भपात की सम्भावना 12 प्रतिशत रहती है वहीं बढ़ती उम्र में यह 25 प्रतिशत हो जाती है।

जब आप 26 से 34 की उम्र की हों

जैसे ही आप 30 की उम्र के आस पास पहुंचती हैं आपकी प्रजनन शमता बिगड़ने लगती है। शोध के मुताबिक, 26 से 29 वर्ष की उम्र की महिलाओं में बांझपन दर 9% है जो 30-34 साल की आयु की महिलाओं के लिए 15% तक बढ़ जाती है।

हो सकता है माँ बनने में देर करने से आप अपने करियर में काफी आगे पहुंच जाएं लेकिन शायद आप अपनी सेहत का भरपूर ध्यान न रख पाएं। जैसे आपके खाने पीने की आदत में गड़बड़ी हो जाए जिसके कारण आप कई तरह के रोगों से ग्रसित हो सकती हैं।

आपके पास अभी भी बहुत ताकत हो सकती है, हालांकि, अध्ययनों के मुताबिक, सीज़ेरियन सेक्शन की दर 20 के आस पास की महिलाओं की तुलना में 30 से 34 साल की उम्र की महिलाओं में दोगुनी होती है।

आपका बच्चा: इस उम्र में माँ बनने से बच्चे को क्रोमोसोमल असामान्यताओं या डाउन सिंड्रोम होने खतरा बढ़ जाता है।

जब आप 35 से 40 की उम्र की हों

इस उम्र में आपको गर्भधारण करने में कई तरह की समस्याएं आती है। अचानक 38 की उम्र में आपकी प्रजनन क्षमता में गिरावट आने लगती है। हालांकि आज कल महिलाएं 35 की उम्र में बच्चे को जन्म दे रही हैं। इस उम्र में भी आपको गर्भकालीन मधुमेह और हाइपरटेंशन होने का खतरा होता है।

यदि आपका वज़न सामान्य से ज़्यादा है तो खतरा और भी बढ़ जाता है। अगर आप इस उम्र में माँ बनना चाहती हैं तो इसके लिए आपको अपने वज़न पर नियंत्रण रखना होगा। साथ ही बेहतर खान पान और व्यायाम भी ज़रूरी है।

आपका बच्चा: जितनी ज़्यादा आपकी उम्र होगी आपके बच्चे को क्रोमोसोमल असामान्यताओं या डाउन सिंड्रोम होने का खतरा भी उतना ही होगा। इसके अलावा गर्भपात की भी संभावना ज़्यादा होती है। 38 साल की उम्र में, हर 100 गर्भवती महिलाओं में से एक में क्रोमोसोमल असामान्यता देखी जा सकती है।

चाहे आप विभिन्न प्रकार के प्रजनन उपचार करें या नहीं, इस उम्र में आपके शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन के कारण ओवुलेशन के समय एक से अधिक अंडे की सम्भावना बढ़ जाती है।

40 की उम्र के बाद प्रेगनेंसी
शोधकर्ताओं का कहना है कि लगभग 1/3 महिलाएं जो 40 वर्ष से अधिक उम्र की हैं, बांझपन का शिकार होती हैं। इस उम्र की महिलाओं में गर्भकालीन मधुमेह का खतरा 3 से 6 गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा आपका बढ़ा हुआ वज़न मेटाबोलिज्म को कम करता है जिससे गर्भावस्था के बाद ठीक करना मुश्किल हो जाता है।

ध्यान रहे कि प्रेगनेंसी के बाद भी आप लगातार व्यायाम करती रहें ताकि सेहत से जुड़ी जो भी परेशानियां हो उससे छुटकारा पाया जा सके।
डिलीवरी के दो दिन बाद कॉपर टी लगाना सुरक्षित होता है?, किन बातों का रखना चाहिए ध्‍यान




गर्भनिरोधक के बारे में जब कभी बात होती है तो हम कंडोम, इमरजेंसी पिल्‍स, बर्थ कंट्रोल पिल्‍स के बारे में लोग जानते है। जबकि अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए कई तरह के अन्य सुरक्षित उपाय भी होते हैं उन्हीं में से एक है कॉपर टी। इंट्रायूटेरिन डिवाइस जिसे आईयूएसडी भी कहते हैं एक सुरक्षित गर्भनिरोधक उपाय माना जाता है। यह सबसे सुरक्षित, कारगर और लंबे समय तक टिकाऊ उपाय माना जाता है।

कॉपर टी एक कारगर गर्भ निरोधक है। यह यूटेरस में शुक्राणु और अंडाणु को मिलने नहीं देता और इस कारण गर्भ नहीं ठहरता।

यह बच्चों में सही अंतर रखने का सटीक उपाय है, जिसे सुविधानुसार हटाया भी जा सकता है।
3 से 5 साल के ल‍िए लगा सकते है

इसका इस्तेमाल लंबे समय तक प्रभावी रहता है 3 से 5 साल तक इसका उपयोग किया जा सकता है। साथ ही यह बहुत मंहगा भी नहीं होता है।

कॉपर टी लगाने का सही समय?

हालांकि कॉपर टी डिलीवरी के दो दिन बाद लगा सकते है। लेकिन अगर डिलीवरी में कोई जटिलता या इंफेक्‍शन की हो तो कम से कम 6 सप्‍ताह तक का इंतजार करना चाहिए। इसे पीरियड के बाद भी लगवा सकते है।

कॉपर टी लगाने से पहले सावधानियां

कॉपर टी किसी विशेषज्ञ की निगरानी में लगवाना जरुरी होता है। हालांकि कई मह‍िलाओं के दिमाग में ये सवाल होता है कि कॉपर टी कब लगानी चाहिए, हालांकि आप कॉपर टी कभी भी लगा सकती है। कॉपर टी लगवाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें जैसे डिलीवरी के दो दिन बाद से चार हफ्ते तक अगर डिलीवरी या अबॉर्शन के बाद इन्फेक्शन हो तो, पीरियड्स के अलावा भी ब्लीडिंग हो या महिला गर्भवती हो, या फिर यूटेरस या सर्विक्स कैंसर हो। इसके साथ-साथ अगर यौन संक्रमण का रिस्क हो तो भी कॉपर टी लगवाने से पहले इलाज जरूरी होता है।

सेक्‍स लाइफ को करता है प्रभावित?

कुछ महिलाएं जिन्हें हार्मोनल आईयूडी लगाया जाता है उन्हें सेक्स के दौरान ब्‍लीडिंग की समस्या हो सकती है। दरअसल हार्मोनल आईयूडी को पतला बना देते हैं। यह हर महीने पीरियड्स के साथ थोड़ा और खुल जाते हैं। कई बार सेक्स के दौरान भी यह खुल सकते हैं जिसके चलते आपको खून निकलता हुआ महसूस होगा। लेकिन, सेक्स के दौरान खून निकलने के सही कारण का पता लगाने के लिए आपको हमेशा अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

इन महिलाओं को नहीं लगाना चाहिए कॉपर टी

जो महिलाएं पहले से ही गर्भवती हो, जो किसी तरह के गर्भाशय के रोग से गुजर रही हो, जिनके पेल्विक में सूजन हो, जिन्‍हें पीरियड के दौरान बहुत दिक्‍कत होती हो, जो महिलाएं एनिमिक हो इसके अलावा एक्‍टोपिक प्रेगनेंसी में महिलाओं को कॉपर टी को अवॉइड ही करना चाहिए।
स्थाई रिलेशनशिप न होने से एग्स फ्रीज करा रहीं महिलाएं




एक स्टडी में सामने आया है कि किसी पार्टनर के साथ स्थाई रिलेशनशिप न होने की वजह से महिलाएं अपने एग्स फ्रीज करा रही हैं। यह इस सामान्य सोच के बिल्कुल विपरीत है कि महिलाएं अपने करियर या पढ़ाई को पहले तवज्जो देने के लिए ऐसा करती हैं।


ज्यादातर महिलाएं सिंगल

एक रिसर्च के रिजल्ट में पता चला कि एग्स फ्रीज कराने वाली महिलाओं में 85% सिंगल थीं। ये महिलाएं 6 अलग-अलग परिस्थितियों से ताल्लुक रखती हैं- सिंगल, तलाकशुदा, ब्रेकअप के बाद, देश के बाहर काम करने वालीं, सिंगल मां या फिर करियर प्लानिंग। इनमें से एग्स फ्रीज कराने की वजह करियर प्लानिंग कुछ ही महिलाओं की थी।


रिलेशनशिप में अनिश्चितता

रिसर्च में शामिल महिलाओं में जो सिंगल नहीं हैं, या तो उनके पार्टनर्स बच्चे नहीं चाहते हैं, या उनके रिलेशशिप में अनिश्चितता है।


नहीं है स्थाई शारीरिक संबंध

अमेरीका की येल यूनिवर्सिटी द्वारा की गई इस स्टडी में एग फ्रीज कराने वाली ज्यादातर महिलाएं अपनी पढ़ाई और करियर गोल्स पूरे कर चुकी हैं लेकिन किसी पार्टनर के साथ स्थाई शारीरिक संबंध न होने के कारण एग्स फ्रीज करा रही हैं।

यह थी धारणा

अब तक सामान्य धारणा यह थी कि महिलाएं अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देने के लिए एग्स फ्रीज कराती हैं
कैसे पुरुष देते हैं बेस्ट ऑर्गजम


क्या आप गेस कर सकते हैं कि कहीं 'कौन देगा बेस्ट ऑर्गजम' जैसा कोई कॉन्टेस्ट हो तो किस तरह के पुरुष जीतेंगे? जी हां सवाल अजीब है लेकिन एक स्टडी की मानें कि अमीर, गुडलुकिंग या इंटेलिजेंट नहीं बल्कि कुछ और खूबी वाले मेल बेहतर ऑर्गजम देते हैं।

और भी फैक्टर्स देखती हैं लड़कियां

सोशियोअफेक्टिव न्यूरोसाइंस ऐंड साइकॉलजी की एक स्टडी के मुताबिक अच्छे सेंस ऑफ ह्यूमर वाले और फनी लड़के बेहतरीन ऑर्गजम देते हैं। फनी लोग इसे पढ़कर खुश कर सकते हैं और इस बात का सपॉर्ट साइंस भी करती है। हालांकि आकर्षण की वजह कुछ और भी गुण हैं।

हॉट लुक्स को भी तवज्जो

अगर आप महिलाओं से भी पूछें तो उनकी टॉप लिस्ट में ऐसे लड़के ही होते हैं जिनका सेंस ऑफ ह्यूमर बढ़िया होता है। हां, मगर अच्छे लुक्स और हॉट बॉडी को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता। लेकिन बात अगर ऑर्गजम की करें तो मजाकिया लड़के ही यहां बाजी मारते हैं।

103 महिलाओं से पूछे गए सवाल

इस नतीजे पर पहुंचने के लिए जो स्टडी करवाई गई उसमें 103 सिंगल महिलाओं ने हिस्सा लिया। उनसे सेक्स लाइफ से जुड़े कई सवाल किए गए जैसे उन्हें कितने बार ऑर्गजम फील होता है या वह कैसे लड़के के साथ इंटिमेट होना पसंद करती हैं वगैरह।

यह आए नतीजे

शुरुआती तौर महिलाएं सेक्स के दौरान कितने बार ऑर्गजम फील करती हैं, यह उनके पार्टनर की इनकम, आत्मविश्वास और उनके आकर्षक होने से जुड़ा पाया गया। ऑर्गजम की इंटेसिटी इस बात पर भी निर्भर थी कि वे अपने पार्टनर की ओर किस हद तक आकर्षित हैं।

बैंक बैलेंस पर भी ध्यान

इसलिए दूसरे शब्दों में कहें तो जिन लड़कों के बैंक अकाउंट्स भरे थे, जो हॉट और आत्मविश्वासी थे, उनसे महिलाओं को बेस्ट ऑर्गजम मिल रहा था। महिलाओं ने ऑर्गजम की इंटेसिटी को सीधे पुरुषों के आकर्षक होने से जोड़कर बताया। हालांकि ये बातें सतही साबित हुईं।

सेंस ऑफ ह्यूमर ने बाजी मारी

फाइनली स्टडी के मुताबिक लुक्स और कॉन्फिडेंस जैसे फैक्टर्स को तो दिमाग में रखा ही जाता है लेकिन अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर होना पर्सनैलिटी के सबसे सेक्सी लक्षण के रूप में सामने आया। यहां तक कि सेंस ऑफ ह्यूमर की रेटिंग फिजिकल अपीयरेंस से भी ऊंची पाई गई।

ये गुण करते हैं महिलाओं को आकर्षित
ह्यूमर, आकर्षक पर्सनैलिटी, क्रिएटिविटी, भावनात्मक होना, भरोसेमंद होना और शरीर से आने वाली भीनी खुशबू, पुरुषों के ये गुण महिलाओं को आकर्षित करते हैं।
सर्वे में हुआ खुलासा महिलाओं को इस तरह का सेक्स है पसंद



इस बारे में बताना थोड़ा मुश्किल है कि सेक्स करने के लिए किन चीजों से किसी का मूड ऑन हो सकता है। अगर आपके को पार्टनर अडवेंचर पसंद है तो वह सिर्फ बेडरूम तक सीमित नहीं रहेंगे। हालांकि, इस बारे में एक ऑनलाइन डेटिंग वेबसाइट द्वारा हाल ही में पोल कराया गया। जिसके जरिए सेक्स के दौरान महिलाओं को क्या चीजें ऑन फील कराती हैं, इस पर सवाल पूछे गए तो देखिए किस तरह के दिलचस्प रिजल्ट सामने आए हैं...

ऐसे मिले आंकड़े

वेबसाइट पर लगभग चार लाख रजिस्टर लोगों ने इस पोल में भाग लिया। जिसमें 62 फीसदी महिलाओं ने माना कि उन्हें सेक्स के दौरान अपने पार्टनर का इरॉटिक और रफ अंदाज पसंद आता है!

ये है सबसे पॉप्युलर स्टाइल

मजे की बात है कि पोल में शामिल हुई लगभग 62 फीसदी महिलाओं ने माना कि सेक्स के दौरान उन्हें पार्टनर का हेयर के साथ फॉरप्ले पसंद आता है। जिसमें बालों को खींचना तक भी शामिल है, यह उनके लिए टर्न ऑन का काम करता है।

पार्टनर का पूरा कंट्रोल है पसंद

दिलचस्प बात है कि लगभग 60 फीसदी महिलाओं ने माना कि उन्हें सेक्स के दौरान पार्टनर का पूरी तरह से कंट्रोल करना काफी पसंद आता है। ऐसे उन्हें सेक्स इंजॉय करने में ज्यादा मजा आता है और यह शुरुआत से ही उनके लिए टर्न ऑन का काम करता है।

इससे भी होता रोमांच का एहसास

पार्टनर का कंट्रोल करना और बालों को खींचने का ऑप्शन जहां सूची में सबसे टॉप पर शुमार रहे, वहीं लव मेकिंग में महिलाओं को डर्टी टॉक, प्यार भरे तरीके से पार्टनर का काटना और सेक्स के पहले फॉरप्ले के दौरान बांधना भी काफी रोचक लगता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

एक्सपर्ट्स के अनुसार, सेक्स के दौरान पार्टनर के कांटने और प्यार से मारने से खून का बहाव और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। जो उनके लिए सेक्शुअल जोश और रोमांच के बढ़ाने का काम करती हैं।

सेफ्टी है सबसे अहम

हालांकि, सबसे अहम बात है कि बेड पर कुछ भी अडवेंचर करने से पहले आप अपने पार्टनर की रजामंदी जरूर जान लें। हमेशा याद रखें कि सेक्स के दौरान पार्टनर को सरप्राइज करना अच्छी ट्रिक है, मगर यह तभी सफल हो सकती है जब आप दोनों उसे लेकर कंफ़र्टेबल हों।
सेक्स लाइफ में टेंशन, पार्टनर नहीं दिखा रहा दिलचस्पी?


सेक्स लाइफ को लेकर आमतौर पर कपल खुलकर बात नहीं करते। जहां पुरुषों को अपनी सेक्शुअल प्रॉब्लम के बारे में बात करना काफी कठिन लगता है, वहीं महिलाएं इसे खुद के शारीरिक आकर्षण से जोड़कर देखती हैं। उन्हें लगता है कि अब उनका पार्टनर उन्हें अपीलिंग नहीं पाता, जिस वजह से वह उनके करीब नहीं आ रहा है। हालांकि, यह जानना बेहद जरूरी है कि आपके मेल पार्टनर की सेक्स लाइफ में दिलचस्पी कम हो जाने के पीछे कई बड़ी वजह हो सकती हैं, जिन पर ध्यान देना रिश्ते के लिए अहम है।

टेस्टोस्टेरोन में कमी
टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पुरुषों में सेक्स डिजायर के पीछे की एक बड़ी वजह होते हैं। इस हार्मोन के कम हो जाने से सेक्स ड्राइव में भी कमी आ जाती है। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में कमी की कई वजह हो सकती हैं। असल वजह जानने के लिए आप काउंसलर या डॉक्टर की भी मदद ले सकते हैं।

डिप्रेशन का शिकार
आपको शायद एहसास न हो लेकिन आपका मेल पार्टनर डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। इस वजह से उसकी संबंध बनाने की इच्छा में कमी आती है और अगर जोर डाला जाए तो वह चिड़चिड़े हो जाते हैं। यह आपके रिश्ते को और नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि ऐसा होने पर आपका पार्टनर आपसे दूरी बना सकता है।

शराब, सिगरेट की लत
शराब या सिगरेट की लत रिश्तों पर गहरा असर डालती है। यह लत लंबे समय में शरीर पर बुरा प्रभाव डालते हुए हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे सेक्स से जुड़ी रुचि में कमी आ जाती है।

परफॉर्मेंस एंग्जायटी
सेक्स के दौरान पुरुष अपनी महिला पार्टनर को सेटिस्फाई करने की कोशिश करते हैं। यदि उन्हें लगे की वह ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो सेक्स में उन्हें दिक्कत आने लगती है। वह इससे बचने लगते हैं। परफॉर्मेंस एंग्जायटी में अगर कमी न आए तो पुरुष पूरी तरह से पार्टनर के साथ सेक्स से दूरी बना लेते हैं।

इमोश्नल बॉन्डिंग में कमी
आपका पुरुष साथी अगर इमोशनल लेवल पर आपके साथ जुड़ाव महसूस नहीं कर रहा है तो वह आपके करीब नहीं आएगा। किसी भी रिश्ते के लिए इमोशनल बॉन्डिंग की जरूरत होती है और इसमें कमी आपके पार्टनर को दूर रहने पर मजबूर कर सकती है।

सेक्स लाइफ में बोरियत
सेक्स लाइफ को लेकर आपके पुरुष पार्टनर और आपकी जरूरत अलग-अलग हो सकती है। ज्यादातर मामलों में सेक्शुअल रिलेशनशिप में पुरुष पार्टनर नई चीजें ट्राइ करना चाहते हैं लेकिन महिलाएं इसके लिए राजी नहीं होतीं। रिश्ते में भी समय-समय पर कुछ नया न हो तो पुरुष साथी का पार्टनर के लिए आकर्षण कम होने लगता है और वह सेक्स में रुचि खोने लगते हैं।



अगर आपकी गर्लफ्रेंड है सेंसेटिव तो भूल से भी ना कहें ये 5 बातें



ऐसी कई बातें हैं जिन्‍हें बिना किसी झिझक के आपको अपने पार्टनर को कह देनी चाहिए लेकिन साथ ही कुछ ऐसी भी बातें हैं जिन्‍हें उनसे छिपाना ही बेहतर रहता है। अगर आपकी गर्लफ्रेंड बहुत सेंसेटिव यानि संवेदनशील है तो आप बहुत लकी हैं। ये दिल की बहुत अच्‍छी होती हैं। जो लड़कियां स्‍वभाव से सेंसेटिव होती हैं वो बहुत ज़्यादा केयरिंग, ईमानदार और भरोसेमंद होती हैं।

अपनी ज़िंदगी में कभी ना कभी तो आपको ऐसी किसी लड़की से प्‍यार हुआ ही होगा। ऐसी लड़कियां अपनी आंतरिक सुंदरता को बड़े ध्‍यान और सावधानी से दिखाती हैं।

ऐसी लड़कियां हमेशा अपने पार्टनर और रिलेशनशिप का ध्‍यान रखती हैं। ये मुश्किल परिस्थितियों को समझती हैं, अपनी सलाह देती हैं और अपने आसपास के लोगों को प्रोत्‍साहित करती हैं।

सेंसेटिव गर्लफ्रेंड होने के कई फायदे हैं लेकिन इसके साथ ही इनके साथ रहने के कुछ नुकसान भी हैं। ये आपकी भावनाओं को अच्‍छी तरह से समझती हैं और पूरी गहराई से आपको प्‍यार करती हैं। अगर आपकी गर्लफ्रेंड का स्‍वभाव सेंसेटिव है तो आपको कुछ बातों का ध्‍यान रखना चाहिए और अगर आप उनसे ये सब बातें ना कहें तो ही बेहतर होगा।

इमोशनल मत बनो, रियल लाइफ में जियो
आपका बस इतना कहना आपकी सेंसेटिव गर्लफ्रेंड का दिल तोड़ सकता है। इससे ना केवल वो रिलेशनशिप में खटास महसूस करती हैं बल्कि प्‍यार को लेकर भी उनकी सोच बदलने लगती है। जब आप उनसे कुछ ऐसा कहते हैं तो उन्‍हें लगता है कि वो कुछ गलत कर रही हैं और इतना ज़्यादा इमोशनल होना उनके लिए सही नहीं है। सेंसेटिव स्‍वभाव वाली लड़कियां बड़ी आसानी से किसी के भी साथ घुलमिल जाती हैं। इनसे ऐसा कहना इनका अपमान हो सकता है।

थोड़ा फास्‍ट फॉरवर्ड बनो

सेंसेटिव लड़कियां किसी भी चीज़ को लेकर जल्‍दबाज़ी नहीं करती हैं। ये हर काम के लिए पर्याप्त वक़्त लेती हैं। दूसरों के मुकाबले ये हर काम में समय लेती हैं और इस वजह से इनका काम थोड़ी धीमी गति से होता है। जितना हो सकता है ये हर तरीके से सोचने की कोशिश करती हैं। हर बात को ये गहराई से सोचती हैं इसलिए आप इनसे ये कभी ना कहें कि इन्‍हें थोड़ा फास्‍ट होना चाहिए। इन्‍हें वैसे ही स्‍वीकार करें जैसे की ये हैं, तभी ये आपको और खुद को खुश रख सकती हैं।

ज़्यादा सोचने की जरूरत नहीं है

ऐसा नहीं है कि सेंसेटिव लड़कियां बहुत ज़्यादा सोचती हैं बल्कि आप ये भी कह सकते हैं कि वो हर संभावित चीज़ को मापती हैं। ऐसी लड़कियां गहन विचार वाली होती हैं। इन्‍हें परिस्थिति के हर पहलू के बारे में सोचना अच्‍छा लगता है। आपको इनकी इस आदत को समझना चाहिए और सहयोग करना चाहिए।

तुम्‍हारे साथ रहना मुश्किल है

अपनी सेंसेटिव गर्लफ्रेंड से कभी ये बात ना कहें। इससे उनका दिल टूट सकता है। उन्‍हें ये एहसास ना करवाएं कि वो आपके ऊपर बोझ की तरह हैं। जब आप उनसे ऐसा कुछ कहते हैं तो आप उनके अस्‍तित्‍व पर सवाल उठा रहे हैं। आप उन्‍हें ये एहसास करवा रहे हैं कि वो किसी के साथ रहने के लायक नहीं हैं।

आकर्षण का केंद्र बनना पसंद है

सेंसेटिव गर्लफ्रेंड को आकर्षण का केंद्र बनना पसंद नहीं होता है। ये हर तरह से हर बात को तवज्‍जो देने की कोशिश करती हैं। ऐसा लगता है कि इन्‍हें अटेंशन पसंद है क्‍योंकि इन्‍हें लगता है कि उन्हें अपने करीबी और प्रियजनों की मदद की ज़रूरत है। सेंसेटिव लड़कियों को अटेंशन नहीं बल्कि मदद की ज़रूरत होती है।

सेंसेटिव लड़कियां अपने रिलेशनशिप को बहुत अच्‍छे से निभाती हैं। इसके लिए आपको बस ये जानना होगा कि आपको उनका दिल दुखाए बिना कैसे बात करनी है। एक बार आपने ये गुर सीख लिया तो फिर आप बड़ी आसानी से उन्‍हें हैंडल कर पाएंगे।
वर्जिनिटी खोने के बाद लड़की की बॉडी में होते हैं ये बदलाव



किसी लड़की का वर्जिनिटी खो देना एक बड़ा मुद्दा है। खासतौर पर भारत जैसे देश में। लड़कियों के लिए पहले इंटरकोर्स के बाद बॉडी में क्‍या बदलाव होते हैं, यह उत्‍सुकता का विषय होता है। आइए दूर करते हैं आपकी उत्‍सुकता और बताते हैं आपको इस बारे में विस्‍तार से...


प्राइवेट पार्ट में बदलाव

जब आप एक बार सेक्‍स करना शुरू कर देती हैं तो वजाइना के लचीलेपन में भी बदलाव शुरू हो जाता है। वजाइना को पेनिट्रेशन का आदी होने में थोड़ा वक्‍त लगता है। हालांकि जैसे आपकी सेक्‍स लाइफ मैच्‍योर होने लगती है वैसे-वैसे आपकी वजाइना के लिए भी ये सब सामान्‍य हो जाता है। कुछ समय के बाद तो आपकी वजाइना अपने आप ही लूब्रिकेट होने लगती है।


क्लिटरिस और यूट्रस भी हो जाता है नॉर्मल

जब आप उत्‍तेजना की स्थिति में होती हैं तो आपकी क्लिटरिस भी बड़ी हो जाती है और यूट्रस का आकार भी बढ़ जाता है। कुछ दिनों के बाद आपकी बॉडी सेक्‍स को लेकर सामान्‍य हो जाती है। फिर हर बार जब भी आप उत्‍तेजित होती हैं तो आपकी क्लिटरिस और यूट्रस बड़े होते हैं और ऐक्‍ट पूरा होने के बाद सामान्‍य स्थिति में लौट आते हैं।


ब्रेस्‍ट भी हो जाते हैं टाइट

सेक्‍स के दौरान और सेक्‍स के बाद आपके ब्रेस्‍ट के टिशू फूल जाते हैं और इस वजह से आपके ब्रेस्‍ट काफी टाइट हो जाते हैं। उत्‍तेजना के वक्‍त ब्रेस्‍ट में ब्‍लड सर्कुलेशन भी बढ़ जाता है। मगर सेक्‍स के बाद ये सामान्‍य स्थिति में लौट आते हैं।


निपल्‍स भी हो जाते हैं सेंसिटिव

जैसे-जैसे सेक्‍स आपकी सामान्‍य दिनचर्या का हिस्‍सा बन जाता है वैसे-वैसे आपकी बॉडी रोजाना नए अनुभव से गुजरती है। सेक्‍स उत्‍तेजना के वक्‍त आपके निपल्‍स के चारों ओर ब्‍लड सर्क्युलेशन बढ़ जाता है और उसकी मसल्‍स भी सख्‍त हो जाती हैं।


हैपी हॉर्मोन्स

एक बात जो आपने गौर की होगी कि सेक्‍स के बाद आपकी त्‍वचा में चमक दिखने लगती है और आप पहले से अधिक रिलैक्‍स्‍ड महसूस करती हैं। ऐसा दरअसल हैपी हॉर्मोंस की वजह से होता है। सेरोटोनिन हॉर्मोंस सिक्रीट होने के कारण आपकी स्किन ग्‍लो करने लगती है और जब ऑगैज्‍म फील करती हैं तो ऑक्‍सिटॉक्सिन नाम का एक दूसरा हॉर्मोन रिलीज होने लगता है। ये हॉर्मोंस ही आपको हैपी और रिलैक्‍स्‍ड फील कराते हैं।


पीरियड्स डिले

आपके हैपी हॉर्मोंस जैसे ही ऐक्टिव होते हैं वैसे ही आपके पीरियड्स भी कुछ दिन के लिए डिले होना शुरू हो सकते हैं। लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप प्रेग्‍नेंट हैं बल्कि यह बताता है कि आपकी बॉडी बदलाव के दौर से गुजर रही है।


इमोशनल इशू

वर्जिनिटी खो देने के बाद लड़कियां एक ऐसे भावनात्‍मक दौर से गुजरती हैं, जहां वह खुश भी हो सकती हैं और दुखी भी। ऐसा हॉर्मोंस में आए बदलाव के कारण होता है। इस वजह से आप अच्‍छा भी फील कर सकती हैं और बुरा भी।
शादीशुदा जिंदगी को बनाएं हैपी


शादी के बाद लड़का और लड़की दोनों की ही जिंदगी में बड़ा बदलाव आता है। दोनों ही अपनी तरफ से बेस्ट करने की कोशिश करते हैं ताकि उनके नए जीवन की शुरुआत अच्छी हो। अक्सर देखा जाता है कि शादी के कुछ समय तक तो सब ठीक रहता है लेकिन बाद में तकरार होने लगती है। कई बार यह झगड़े इतने बढ़ जाते हैं कि रिश्ता टूटने की नौबत आ जाती है। शादीशुदा जिंदगी को हमेशा हैपी बनाए रखने के लिए यह पांच टिप्स आपके काम आ सकते हैं।

रिश्ते में दिखावा करने से बचें
शादी के बाद लड़का लड़की शुरुआती दौर में कई चीजें ऐसी कर देते हैं जिन्हें बाद तक निभा पाना मुश्किल है। दिखावे की जगह रिश्ते की गहराई को समझने की कोशिश करें। आपको यह बात ध्यान रखना चाहिए कि आपके पार्टनर का नेचर आपके जैसा नहीं है और वह पर्फेक्ट नहीं है। कपल एक-दूसरे को ज्यादा टाइम नहीं भी दे पाएं तो ऐसी स्थिति में इस बात का ध्यान रखें कि जो भी समय आप साथ बिताएं उसमें खुलकर अपने विचार शेयर करें।

झगड़े के बाद सीधे सोने न जाएं
झगड़े के बाद अक्सर यह होता है कि कपल एक-दूसरे से बात करना बंद कर देते हैं। कई बार गुस्से में ही दोनों सोने भी चले जाते हैं, जिससे झगड़ा अगले दिन के लिए टल जाता है और बढ़ता ही जाता है। यह नियम बना लें कि सोने से पहले आप आपस में हुई किसी भी बहस या इशू को सुलझा कर ही सोएं, ताकि वह मुद्दा उसी दिन खत्म हो जाए और आप नए दिन की नई शुरुआत कर सकें।

मिलकर काम करना
अक्सर यह होता है कि पत्नी किचन में काम करती है और पति दूसरे कमरे में रहता है। इसी तरह बाहर के काम ज्यादातर पति के जिम्मे होते हैं। बेहतर होगा कि सभी कामों को आप मिलकर करें। इससे आपको साथ में समय बिताने का मौका तो मिलेगा ही साथ ही आप एक-दूसरे की जिम्मेदारी को भी बखूबी समझेंगे। एक टीम की तरह काम करने से आप आगे के जीवन में आने वाली जिम्मेदारियों को भी अच्छे से हैंडल कर सकेंगे।

एक-दूसरे पर ध्यान दें
रिश्ता पुराना होने पर हम पार्टनर पर ध्यान देना कम कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं है। ध्यान नहीं देने पर आपका पार्टनर बुरा मान सकता है और उसके मन में यह भाव आ सकता है कि आपका प्यार कम हो गया है। इससे बचने के लिए एक-दूसरे पर ध्यान दें। छोटे-छोटे कॉम्पलिमेंट भी रिश्ते को बड़ी मजबूती देते हैं।

बिजी शेड्यूल में रोमांस न खो जाए
रोमांस और प्यार पति-पत्नी के रिश्ते के लिए अहम हैं। रोमांटिक डिनर डेट, छोटे-छोटे गिफ्ट, सरप्राइज मेसेज और प्यार जताना आपके रिश्ते के बंधन को प्यार से भरने और उसे हैपी बनाए रखने के लिए काफी है।
प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ाने के बारे में ये बातें आपको मालूम होनी चाहिए





गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना सामान्य है क्योंकि आपके बच्चे का विकास हो रहा होता है। हालांकि, यह केवल आपके बच्चे के विकास का कारण नहीं है बल्कि आपका शरीर एक अतिरिक्त ऊतक विकसित कर रहा होता है, जिसमें बड़े स्तन और गर्भाशय शामिल हैं, जिसमें प्लेसेंटा, अतिरिक्त तरल पदार्थ और रक्त भी शामिल है।

हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि आप गर्भावस्था के दौरान अच्छी तरह से खाएं, ताकि आपके बच्चे को स्वस्थ शुरुआत मिल सके। अक्सर लोगों की अवधारणा होती है कि 'दो के लिये खाना'। इस तरह के माइंड-सेट से आपको केवल गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त वजन प्राप्त करने का मौका मिलेगा, जिसे बाद में कम करना मुश्किल हो सकता है।

यहां हम आपको प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बढ़ने के लाभ और उसे मैनेज करने के बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ाने वाले कारक:

जबकि गर्भावस्था के दौरान अधिकांश महिलाओं का वजन 12 किलोग्राम से 16 किग्रा बढ़ता है, गर्भावस्था के दौरान आपका वजन बढ़ना निम्नलिखित कारकों से प्रभावित हो सकता है:

गर्भावस्था के दौरान आपका वजन बढ़ना आपके पूर्व-गर्भावस्था के वजन पर भी निर्भर हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आप प्रेग्नेंसी से पहले कम वजन वाले थे, तो आपको थोड़ा और वजन बढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है। दूसरी तरफ, यदि आप अधिक वजन रखते हैं, तो आपको सावधानीपूर्वक अपना वज़न बढ़ाना चाहिए।

यदि आपके जुड़वा हैं तो प्रेग्नेंसी के दौरान आदर्श वजन बढ़ाना आपके लिए मुश्किलभरा काम होगा।

गर्भावस्था के दौरान जब आप सुबह मितली और बीमारी से जूझ रहे हो तो आप शुरूआत में वजन कम कर सकते हैं, और एक बार जब आप चार महीने बाद इस बीमारी से उबर आएं तो अपना वजन बढ़ाने की शुरूआत कर सकते हैं।

यह प्री-प्रेग्नेंसी बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) और आपके दैनिक ऊर्जा सेवन पर भी निर्भर करता है।
गर्भावस्था के दौरान आदर्श वजन क्या होना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान, आप तिमाही में वजन बढ़ा सकती हैं। लेकिन आपको प्रत्येक तिमाही के दौरान आदर्श वजन बढ़ाने के बारे में अवगत होना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि, गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ने से, मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है।

गर्भावस्था की शुरुआत में, अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करना आवश्यक है, और इसके आधार पर, आप स्वस्थ वजन बढ़ाने के कार्यक्रम की योजना बना सकते हैं। बीएमआई आपकी ऊंचाई और वजन के आधार पर शरीर की वसा जांचने का एक तरीका है, और यह निर्धारित करने में मदद करता है कि आप कम वजन वाले, सामान्य या अधिक वजन वाले हैं या नहीं।

अपने बीएमआई को खोजने के लिेए, अपने वजन को किलोग्राम में, ऊचांई को मीटर में बांट लें, और आपको अपना BMI मिल जाएगा।अन्यथा, वैल्यू जानने के लिए ऑनलाइन बीएमआई कैलक्यूलेटर का उपयोग करें।

यदि आपका प्रेग्नेंसी से पहले सामान्य वजन है तो आपका वजन बढ़ाना आदर्श रूप से 11.5 किलोग्राम और 16 किलोग्राम के बीच होना चाहिए। इसे डिलीवरी तक हर महीने 1.5 किलोग्राम से 2 किलो वजन में विभाजित किया जा सकता है। यदि प्रेग्नेंसी से पहले आपका वजन अधिक है तो आपको कम वजन बढ़ाना होगा। अन्यथा, यदि आप कम वजन रखते हैं, तो आप और अधिक प्राप्त कर सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान अपना वजन कैसे बढ़ाएं?

आपके वजन के बावजूद, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप एक स्वस्थ, पौष्टिक आहार खाते हैं जिसमें फलियां, अनाज, मछली, मांस और कम वसा वाले डेयरी उत्पादों के अलावा ताजा सब्जियां, साबुत अनाज और ताजे फल सम्मिलित होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये खाद्य पदार्थों प्रेग्नेंसी के दौरान आपका वजन बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे। स्वस्थ पोषक तत्वों के लिए हमेशा अपना आहार जांचें, क्योंकि आपके और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक है। इससे आपके बच्चे को पर्याप्त आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम, आयोडीन और प्रोटीन के साथ स्वस्थ शुरुआत करने में भी मदद मिलेगी।

इस बीच आपको नियमित रूप से कुछ प्रेग्नेंसी एक्सरसाइज भी शामिल करनी चाहिए। जैसे- चलना। यदि आप योग-उत्साही हैं, तो अपने डॉक्टर और अपने योग प्रशिक्षक से उचित अभ्यास के बारे में बात करें जो अतिरिक्त वजन बढ़ने के बिना आपके शरीर को लचीला रखने में आपकी मदद कर सकती है। सख्ती से तले हुए भोजन, फ्रोजन फूड्स, फैटी और पेय पदार्थों से बचें। गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में आपको डिहाइड्रेशन हो सकता है क्योंकि आप मितली करते हैं इसलिये जरूरी है कि आप दिन में लगभग दो लीटर पानी पीएं। यदि आप पर्याप्त तरल पदार्थ बनाए रखने में असमर्थ हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें।

गर्भावस्था के दौरान आदर्श वजन प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण पहलू है। सामान्य से अधिक वजन प्राप्त करने से मां और बच्चे के लिए कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे गर्भावस्था के दौरान मधुमेह, उच्च रक्तचाप संबंधी विकार और प्री-टर्म डिलीवरी का जोखिम, और यदि आप वजन कम बढ़ाते हैं तो आपक बच्चा अंडरवेट पैदा हो सकता है।
जिम से पहले सेक्‍स करना कैसा? जानिए इस बारे में खास बातें






अगर फिटनेस को लेकर आप भी कॉन्शस हैं और सोचते हैं कि जिम जाने से पहले सेक्‍स करना सही नहीं है तो हम आपको बता दें कि अब यह धारणा बीते दिनों की बात हो चुकी है। हाल ही में आई एक स्‍टडी में बताया गया जिम जाने से पहले सेक्‍स करने से आपकी मसल्‍स पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। आइए जानते हैं इस बारे में और खास बातें...

क्‍या कहती है ये स्‍टडी

एक हेल्‍थ वेबसाइट में प्रकाशित की गई इस स्‍टडी ने पुरानी सभी धारणाओं को उलट के रख दिया है। कैलिफॉर्निया स्‍टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस बारे में एक अध्‍ययन किया। उन्‍होंने 12 लोगों को लेकर अपना अध्‍ययन किया। इन लोगों ने रात में सेक्‍स किया और सुबह उठकर जिम में वर्कआउट किया।

सेक्‍स का प्रभाव

वैज्ञानिकों ने पाया कि उन 12 लोगों की क्षमता पर सेक्‍स का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यहां तक कि जिम में वजन उठाने से लेकर सभी प्रकार की एक्‍सर्साइज में उन्‍हें किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं हुई।

यह भी देखा गया

अध्‍ययन में यह भी बताया गया है कि यदि आप सेक्‍स करने के बाद 12 घंटे के अंदर भी जिम जाते हैं तो आपकी बॉडी पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

क्‍या हर शख्‍स पर फिट बैठती है यह बात?

यह जरूरी नहीं है कि अध्‍ययन में बताई गई सारी बातें हर शख्‍स के ऊपर सही साबित हो। कई बार यह हर व्‍यक्ति की शारीरिक क्षमता पर भी निर्भर करता है।

हॉर्मोन से होता है असर

व्‍यक्ति की सेक्‍स क्षमता उसके टेस्‍टोस्‍टेरॉन हॉर्मोन पर निर्भर करती है। जो कि अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकती है।

तो अब से दें ये जवाब

तो अब से आपको कोई अगर इस बारे में ज्ञान दे कि जिम जाने से पहले सेक्‍स नहीं करना चाहिए, तो उन्‍हें इस स्‍टडी के बारे में बता दें।
सेक्स से परहेज करने पर होंगे ये बदलाव




सेक्स के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं जैसे- हॉर्मोनल चेंज, ऐटिट्यूड में चेंज, वेस्टलाइन यानी कमर की नाप में बदलाव... इतना ही नहीं कहते हैं सेक्स के जरिए लंबा जीवन भी हासिल कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह सेक्स करने से शारीरिक बदलाव आते हैं उसी तरह अगर आप सेक्स करना बंद कर दें तब भी आपको कुछ समय तक अपने आप में कई तरह के शारीरिक बदलाव नजर आएंगे। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें कि सेक्स से परहेज करने पर आपको कौन-कौन से बदलाव महसूस होंगे...

यौन इच्छा होती है प्रभावित
सेक्स न करना या सेक्स से परहेज करने पर सबसे पहले आपकी यौनइच्छा या कामेच्छा पर असर पड़ता है। हालांकि आप चाहें तो सेक्स की जगह मास्टरबेशन कर अपनी कामेच्छा को जिंदा रख सकते हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि सेक्स से दूरी बनाने पर महिलाओं पर उतना ज्यादा असर नहीं पड़ता जितना पुरुषों पर पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि शरीर के बाकी हिस्सों की तरह अगर पुरुष अपने प्राइवेट को लंबे वक्त तक इस्तेमाल न करें तो इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

कमजोर वजाइनल वॉल्स
ऐसा खासतौर पर बड़ी उम्र की महिलाओं के साथ होता है जिनकी उम्र 50 साल के ऊपर है। खून के बहाव में कमी की वजह से वजाइना की दीवारें पतली और कमजोर हो जाती हैं। बड़ी उम्र में अगर लंबे वक्त तक सेक्स से दूरी बना ली जाए तो इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि इंटरकोर्स होने पर भी महिला को सेक्शुअल प्लेजर न महसूस हो।

इम्यून सिस्टम पर असर
आपने सुना होगा कि सेक्शुअल ऐक्टिविटी शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करती है, खासतौर पर महिलाओं में। लिहाजा अगर आप लंबे वक्त तक सेक्स न करें तो हो सकता है आप इंफेक्शन और दूसरी बीमारियों का शिकार हो जाएं।

स्ट्रेस लेवल में बढ़ोतरी
सेक्स को सबसे अच्छे स्ट्रेस बस्टर के रूप में जाना जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो नियमित रूप से सेक्स करने से अगर आप किसी तरह के स्ट्रेस या तनाव में हैं तो वह दूर हो जाएगा और अगर नहीं हैं तो तनाव हमेशा आप से दूर रहेगा। लेकिन अगर आप सेक्स से दूरी बना लेते हैं तो हो सकता है आपके स्ट्रेस लेवल में बढ़ोतरी होने लगे।


कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.