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दुल्हन के लिए डायट व योग


दुल्हन के लिए डायट व योग

हर युवती चाहती है कि शादी के दिन वह ख़ूबसूरत और आकर्षक फ़िगर में नज़र आए. हम बता रहे हैं कि कैसे इस सपने को सच बनाया जा सकता है. 


आपकी शादी है तो ज़ाहिर है, शादी के दिन आप बहुत ख़ूबसूरत नज़र आना चाहेंगी. यह सच है कि बढ़िया मेकअप और बालों की सज्जा आपके लुक को पूरी तरह निखार सकती है, लेकिन यदि आपका फ़िगर आकर्षक है तो आपके चेहरे का नूर और निखर आएगा. एक्सरसाइज़ और खान-पान की सही आदतें अपना कर आप भी शादी से पहले पा सकती हैं ख़ूबसूरत फ़िगर.

सही ढंग से करें एक्सरसाइज़
शादी की तैयारियों की भागदौड़ के बीच भी अपने लिए रोज़ कुछ समय ज़रूर निकालें. यदि आप चाहती हैं कि आपकी कमर सुडौल नज़र आए तो रोज़ाना एक घंटे की एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है. वज़न कितना कम होगा और शरीर कितना सुडौल बनेगा यह दो बातों पर निर्भर करता है, पहली ये कि आपके पास कितना समय बचा है और दूसरी ये कि आपके शरीर का आकार कैसा है? 
अच्छा फ़िगर पाने के लिए भरपूर इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत की ज़रूरत होती है. साथ ही, ज़रूरी है कि वज़न कम करने का आपका लक्ष्य व्यवहारिक हो, इससे खीझ पैदा नहीं होगी. एक्सरसाइज़ का लुत्फ़ उठाएं और यह बात याद रखें कि फ़िगर को एक ही दिन में नहीं तराशा जा सकता.
एक्स्पर्ट्स की राय: ‘‘जल्दबाज़ी न करें’’ 

* हर माह ढाई से तीन किलो वज़न कम करने का लक्ष्य रखें. यह वज़न कम करने का सबसे सही तरीक़ा है.
* सप्ताह में छह दिन कम से कम ४५ मिनट एक्सरसाइज़ ज़रूर करें. जिम नहीं जा सकती हैं तो टहलें, दौड़ें या स्विमिंग करें.
* यदि आप टहलने, जॉगिंग करने या दौड़ने का विकल्प चुन रही हैं तो सावधानी रखें, ताकि शादी से पहले आप चोटिल न 
हो जाएं.
* यदि दौड़ना पसंद न करती हों तो किक बॉक्सिंग या डांस थेरेपी अच्छा विकल्प है.
* वज़न घटाने के चक्कर में ऐसे गैजेट्स पर पैसे न बर्बाद करें, जो एक ही दिन में छरहरा बनाने के दावे करते हैं, क्योंकि इन दावों में कोई सच्चाई नहीं होती.

एक्स्पर्ट्स की राय: ‘‘पर्सनल ट्रेनर की सहायता लें’’
-लीना मोगरे, डायरेक्टर, लीना मोगरे फ़िटनेस
* पर्सनल ट्रेनर की मदद से आपको एक्सपर्ट सलाह मिलेगी और चोटिल होने की संभावनाएं कम हो जाएंगी. यही नहीं आपको एक ऐसा व्यक्ति मिलेगा, जो हमेशा आपका उत्साह बढ़ाता रहेगा, ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकें. हालांकि यह थोड़ा महंगा पड़ेगा, लेकिन इसके परिणाम बहुत अच्छे मिलेंगे.
* पावर योग या किसी भी तरह की एक्सरसाइज़ ख़ाली पेट करें. इससे सबसे ज़्यादा कैलोरीज़ बर्न होंगी.
* कंपाउंड मूवमेंट्स (जिनमें एक से अधिक मांसपेशियों का उपयोग होता है) वाली एक्सरसाइज़ से मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है अत: चर्बी घटती है. हां, लेकिन इन्हें सावधानी के साथ करना चाहिए नहीं तो आप चोट लगा बैठेंगी.
* अपनी डायट को भी संतुलित रखें, क्योंकि एक्सरसाइज़ का पूरा फ़ायदा तभी हो सकता है, जब उसके साथ खान-पान का भी पूरा ख़्याल रखा जाए.

एक्स्पर्ट्स की राय: ‘‘सही ढंग से सांस लेना सीखें’’
-मिनी थापर शास्त्री, योग विशेषज्ञ
* यदि आपने इससे पहले योग नहीं किया है तो एक बार इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर के देखें. ये आपको ऊर्जावान भी बनाएगा और एक्सरसाइज़ के प्रति आपकी रुचि भी बढ़ाएगा.
* सांस लेने वाली एक्सरसाइज़ को सही ढंग से करें, क्योंकि ग़लत तरीके से करने पर फ़ायदे की जगह नुक़सान हो सकता है.
* योग नियम से किया जाए तो ही इसका फ़ायदा होता है. अत: ऐसी योग क्लास जॉइन करें, जहां महीने में कम से कम १० क्लासेस ज़रूर हों.
* स्ट्रेचिंग व बेंडिंग वाले योग करने पर दिनभर ऊर्जावान महसूस करती रहेंगी.

खान-पान की सही आदतें
यदि सही एक्सरसाइज़ के साथ-साथ आपके खान-पान की आदतें भी सही होंगी तो फ़र्क जल्दी महसूस होगा. सही खान-पान से आपके व्यक्तित्व में अलग ही निखार आएगा. स्वादिष्ट कचौरियों और समोसे जैसे तले-भुने व मिर्च मसाले वाले खाने से किनारा कर लें. हां, यदि फिर भी इन्हें खाने का मन करे तो थोड़ी मात्रा में ही खाएं. ऐसा खाना, जिसमें फ़ाइबर ज़्यादा हो और वसा कम, आपके लिए फ़ायदेमंद रहेगा.

एक्स्पर्ट्स की राय: ‘‘अंकुरित अनाज आपका काम आसान करेंगे’’
* चूंकि विवाह की तैयारियों के दौरान हम बहुत भावुक हो जाते हैं अत: शरीर में पानी का जमाव बढ़ जाता है, जिससे सूजन आ सकती है या शरीर फूला हुआ नज़र आता है. इससे बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि अपने खाने में ओट्स को शामिल करें. इनमें मौजूद फ़ाइबर शरीर को अतिरिक्त पानी से निजात दिलाते हैं.
* भोजन में अंकुरित अनाज की मात्रा बढ़ा दें. इनमें प्रोटीन और खनिजों की भरपूर मात्रा होती है इसलिए इन्हें खाने पर आप पूरे दिन ऊर्जावान बनी रहेंगी. आप इन्हें कच्चा, स्ट्यू कर के या फिर उबाल कर खा सकती हैं. इन्हें स्वादिष्ट बनाने के लिए इनमें दही, चाट मसाला या फिर सलाद मिलाएं, इससे ये ज़ायकेदार बन जाएंगे.
* उबले हुए काले चने अपने पास ही रखें. इनमें शक्कर की मात्रा कम होती है और इन्हें खाने पर पेट भी जल्दी भर जाता है.
* ढेर सारी सब्ज़ियां व सोयाबीन की वड़ियां डाल कर दलिया बनाएं. ये भी हेल्दी खाने का एक स्वादिष्ट विकल्प है.
* यदि इडली पसंद हैं तो इन्हें बिना पॉलिश किए हुए चावलों से बनाएं
* अपने रंग-रूप को निखारना चाहती हैं तो गाजर व टमाटर का रस पिएं. इसके अलावा सुबह ख़ाली पेट खीरा, लौकी और आमले का रस पीने से भी त्वचा में निखार आता है.
* यदि आप जल्द ही तनावग्रस्त होने वालों में से हैं तो बेल का शरबत पिएं, इससे तनाव की वजह से होने वाली एसिडिटी से निजात मिलेगी.


क्या है मोटापे की सच्चाई?


एक अध्ययन से पता चलता है कि वर्ष 1950 से अब तक महिलाओं की कमर का नाप औसतन 6 इंच बढ़ गया है. जहां एक ओर लोग मोटापे से जंग लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर फ़ूड इंडस्ट्री ने हमें प्रॉसेस्ड लो-फ़ैट फ़ूड्स देकर अपना मुनाफ़ा कई गुना बढ़ा लिया है. लेकिन क्या वास्तव में ये फ़ूड असरकारी हैं? हमने इस सच्चाई की छानबीन की. 
एक ऐसे देश में जहां 48 प्रतिशत बच्चों को पौष्टिक भोजन भी नसीब नहीं होता, वहां की शहरी जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों से परेशान है. मोटापे की बढ़ोतरी का श्रेय न्यूट्रिशनल ट्रांज़िशन को जाता है-एक संकल्पना, जिसे बॉरी पोपकिन, जो अमेरिका में ओबिसिटी शोधकर्ता थे, ने वर्ष 1993 में सबसे पहले पेश किया था. ये संकल्पना मूलरूप से पश्चिमी देशों में खानपान में आए बदलाव के बारे में बताती है-जब हाई-फ़ायबर डायट की जगह उस प्रॉसेस्ड फ़ूड ने ली, जिसमें शक्कर और वसा की मात्रा ज़्यादा थी. पिछले दो दशकों में हमने ऐसा बदलाव भारत में भी देखा है. 

हमें मोटापा कैसे मिला
अनुवांशिक रूप से तो हम नहीं बदले, लेकिन हमारा वातावरण और भोजन प्राप्त करने के तरीक़े ज़रूर बदल गए हैं. हमें लगातार ऐसी चीज़ें देखने मिल रही हैं, जो ज़्यादा खाने को प्रेरित करती हैं. 
अमेरिका में 40 वर्ष पहले जो कुछ हुआ, उसका असर दुनियाभर के लोगों के खानपान पर आज साफ़ दिखाई दे रहा है. ’70 के दशक में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के प्रशासन के दौरान अमेरिका वियतनाम युद्ध की वजह से संकट का सामना कर रहा था. लेकिन निक्सन को देश के भीतर भी समस्या से जूझना पड़ रहा था-खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों का विरोध कर रही घरेलू महिलाओं से. सामने आ रहे चुनावों को देखते हुए इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने अर्ल बट्ज़ को कृषि सचिव नियुक्त किया. अर्ल ने न सिर्फ़ अमेरिका का हुलिया बदला, बल्कि खानपान के तरीक़े को ही बदल डाला. उनके छोटी पैदावार को बड़े प्रॉडक्शन में तब्दील करने के नज़रिए ने सस्ते खाद्य पदार्थों का निर्माण इतने बड़े स्तर पर कर दिया, कि लोग इसे खाकर मोटे होने लगे. उनका आइडिया था कि किसान मक्के का उत्पादन अधिक मात्रा में करें. इससे मक्के की पैदावार बहुत ज़्यादा बढ़ गई और इससे इंडस्ट्रियल स्वीटनर-हाई फ्रक्टोज़ कॉर्न सिरप (एचएफ़सीएस) बनाया गया. शक्कर से कहीं सस्ता एचएफ़सीएस लोकप्रिय एयरेटेड ड्रिंक्स में मिलाया जाने लगा, जिसने लोगों के शरीर में कैलोरी की अधिक मात्रा उड़ेलना शुरू कर दिया. 
दूसरी ओर वर्ष 1970 के आसपास जब अमेरिकी सीनेटर जॉर्ज मैक्गोवर्न ने डायट और बीमारियों के बीच संबंध की जांच शुरू की तो लोगों में वसा से बचने की धुन सवार हो गई. इस बात से चिंतित कि आठ तत्कालीन अमेरिकी सीनेटर्स को दिल की बीमारी हो गई-उन्होंने व उनके सहयोगियों ने न्यूट्रिशनिस्ट नाथन प्रिटिकिन की सलाह ली. नाथन अपनी इस राय के लिए मशहूर थे कि कम फ़ैट (वसा) और उच्च कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन खाकर दिल की बीमारी को ठीक किया जा सकता है. नतीजा: अमेरिका में फ़ैट्स के ख़तरों से आगाह कराती पहली भोजन-संबंधी मार्गदर्शिका जारी की गई. 

लो-फ़ैट का भुलावा
फ़ूड इंडस्ट्री ने तो कम वसा वाले फ़ूड प्रॉडक्ट्स बाज़ार में उतारकर भोजन को व्यापार में बदल दिया. लेकिन शोधकर्ताओं ने पाया कि बिना वसावाला भोजन स्वाद में ऐसा होता है, जैसे गत्ता (कार्डबोर्ड). चेन्नई की न्यूट्रिशनिस्ट कायलमोज़्हि मारन कहती हैं,‘‘भोजन वसा की मौजूदगी के कारण ही स्वादिष्ट लगता है. वसा मुंह के अंदर चिपक जाती है और पानी के साथ घुलती भी नहीं है, जिससे हर कौर स्वादिष्ट लगता है.’’ तो अब फ़ूड इंडस्ट्री ने खाने से वसा निकाल दी, लेकिन इसकी भरपाई शक्कर से की. कायलमोज़्हि कहती हैं,‘‘स्किम्ड मिल्क का स्वाद अपने आप में बहुत ख़राब होता है, लेकिन यदि आप इसमें चॉकलेट या वनीला आदि डाल दें तो मिनटों में ये स्वादिष्ट लगने लगता है.’’ तो भले ही आप ग्लूटन-फ्री और लो-फ़ैट फ़ूड्स वाली सामग्रियां ख़रीदती हों, लेकिन उनमें शक्कर तो मौजूद होती ही है.

वसा बाहर, शक्कर अंदर 
कैन्ड जूसेस, एनर्जी बार्स और एयरेटेड ड्रिंक्स को स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में देखा जाता है, जबकि उनमें शक्कर की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है. और अंतत: ये शक्कर वसा में ही तब्दील हो जाती है. ज़्यादा शक्कर खाने पर ये वसा लिवर और उसके आसपास जमा होने लगती है. इससे डायबिटीज़ और अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. 
जब हम कुछ खाते हैं तो हमारी वसा कोशिका से लेप्टिन (भूख से जुड़ा हार्मोन) निकलता है, जो मस्तिष्क को इस बात का संकेत देता है कि हमने पर्याप्त खाना खा लिया है. लेकिन शक्कर की अधिक मात्रा भ्रम पैदा कर देती है और इस संकेत को कमज़ोर बना देती है. वर्ष 2013 में लिखी अपनी किताब सॉल्ट शुगर फ़ैट: हाउ द फ़ूड जाइंट्स हूक्ड अस में न्यू यॉर्क टाइम्स के पत्रकार माइकल मॉस ने कहा है,‘शक्कर ‘हमारे मस्तिष्क पर तीव्र और तीखा हमला करती है’, ये ‘प्रॉसेस्ड फ़ूड की सामग्रियों में मौजूद मेथैम्फ़ेटामीन की तरह है’. 
ज़्यादा शक्करवाली डायट महिलाओं के लिए ख़ासतौर पर नुक़सानदेह हो सकती है. इससे उन्हें हार्ट डिज़ीज़, मेटाबॉलिक डिस्ऑर्डर, इन्सुलिन रेज़िस्टेन्स, वज़न बढ़ने और हार्मोनल डिस्ऑर्डर, जैसे-पीसीओडी की समस्या हो सकती है. मेडिकल शोधकर्ताओं के अनुसार भारत की 121 करोड़ जनता में से 7 करोड़ लोगों को डायबिटीज़ है, जिसमें से आधी संख्या महिलाओं की है. यदि सावधानियां नहीं बरती गईं तो वर्ष 2030 तक ये आंकड़ा 10.1 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.

ट्रांस-फ़ैट्स का अभिशाप 
हालांकि दुनियाभर में ’80 के दशक में लो-फ़ैट प्रॉडक्ट्स के उपयोग में अचानक बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन भारत में इस प्रचलन की लहर अभी कुछ सालों पहले ही आई है. सैचुरेटेड फ़ैट्स की मात्रा को कम करने के प्रयास में लोगों ने फ़ुल फ़ैट डेयरी प्रॉडक्ट्स और रेड मीट खाने में बहुत कटौती कर दी है. ‘‘तब फ़ूड इंडस्ट्री ने एनिमल फ़ैट्स को अनसैचुरेटेड वेजेटेबल ऑयल्स से बदल दिया,’’ बताती हैं बैंगलोर की न्यूट्रिशनिस्ट व फ़ूड गुरु सुजाता रामचंद्रन. ‘‘इसके लिए उन्हें वेजेटेबल ऑयल के स्ट्रक्चर को बदलना पड़ा, ताकि सॉलिड फ़ैट्स की जगह इसका इस्तेमाल किया जा सके-ऐसा हाइड्रोजनेशन के ज़रिए किया जाता है.’’ यह एक बुरी ख़बर थी, क्योंकि हाइड्रोजनेटेड वेजेटेबल ऑयल ख़तरनाक ट्रांस-फ़ैट्स के स्तर को बढ़ा देता है. 

अच्छी वसा
वसा कैलोरीज़ देने के अलावा भी बहुत कुछ करती है. कुछ फ़ैट्स, जो सूखे मेवों और कॉड लिवर ऑयल में पाए जाते हैं, शरीर को आवश्यक फ़ैटी एसिड्स (ओमेगा ३ सहित) उपलब्ध कराते हैं. ये अच्छी वसा रक्त-शिराओं को मज़बूत बनाने, हार्मोनल संतुलन साधने, त्वचा व बालों को स्वस्थ बनाने और नर्वस सिस्टम की कार्यप्रणाली सही रखने में मदद करती है. हमारी डायट में मौजूद वसा कई विटामिन्स को अवशोषित करने में मदद करती है, जो वसा में ही घुलते हैं, जैसे-विटामिन ए, बी, डी और के. ‘‘यदि आप बहुत लो फ़ैट डायट ले रहे हैं तो इन विटामिन्स की कमी हो सकती है, जिसकी वजह से प्रतिरोधक क्षमता में कमी या फिर हड्डियों को नुक़सान पहुंच सकता है,’’ सुजाता चेताती हैं. 
क्या आप जानते हैं?
* यदि आप किसी मल्टीप्लैक्स में जाएं, तो पॉपकार्न का छोटा पैक नहीं मिलेगा, लेकिन आप केवल कुछ और रुपए देकर उसकी जगह फ़ैमिली टब ख़रीद सकते हैं. ये संकल्पना वर्ष 1967 में पहली बार अमेरिका के शिकागो के एक सिनेमा में लागू की गई थी, जब डेविड वॉलेर्स्टीन को पॉपकॉर्न और सोडा की बिक्री बढ़ाने का काम दिया गया. उसके बाद उन्हें मैक्डोनाल्ड्स के बोर्ड में लिया गया, जिसने वर्ष १९७२ में पहली बार बड़े फ्रायज़ लॉन्च किए. 
* डेनमार्क पहला देश है, जिसने ट्रांस-फ़ैट्स पर प्रतिबंध लगाया. इसके ठीक बाद न्यू यॉर्क ने वर्ष 2006 में सभी रेस्तरां में इसके प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया. भारत में ट्रांस-फ़ैट्स के प्रयोग को प्रतिबंधित करने के लिए कोई नियम नहीं है. अपर्याप्त नियमों की वजह से बढ़ते रेडी टू ईट सेग्मेंट के प्रॉडक्ट्स के पैकेट्स पर सामग्रियों का विवरण भी सही तरीक़े से नहीं दिया जाता है.

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