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कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) के कारण

कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) के कारण, लक्षण, उपचार, बचाव और घरेलू उपाय – 




मानव शरीर में विभिन्न प्रकार के फंगस (fungus) पाए जाते हैं, जिनमें से कैंडिडा (Candida) भी फंगस (fungus) का ही एक प्रकार है। यह एक प्रकार का यीस्ट (yeast) है जो सामान्यता पेट, मुंह और त्वचा पर बहुत कम मात्रा में पाया जाता है, यह शरीर पर किसी भी प्रकार की समस्या पैदा नहीं करता हैं। जब पर्यावरणीय परिस्थितियां इनके अनुकूल होती हैं, तो यीस्ट बहुत अधिक मात्रा में बढ़ जाता है, जिससे यह त्वचा, योनि और मुहँ को प्रभावित करता है। अतः इस तरह होने वाले संक्रमण को कैंडिडिआसिस (Candidiasis) कहा जाता है।

यह लगातार फैलने वाले फंगस होते है अतः इनका समय पर इलाज किया जाना आवश्यक है। आज इस लेख में आप जानेंगे कि कैंडिडिआसिस क्या है यह किन कारणों से होता है तथा इसके लक्षण, प्रकार, निदान, उपचार और रोकथाम के घरेलू उपाय क्या हैं।


कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) क्या है – What is Candidiasis in Hindi

Candidiasis कैंडिडिआसिस एक फंगल संक्रमण (fungal infection) है, जो कैंडिडा जाति से संबंधित यीस्ट के कारण होता है। कैंडिडा प्रकार के यीस्ट में 20 से अधिक प्रजातियों को शामिल किया गया है। ये प्रजातियां मनुष्यों में संक्रमण का कारण बन सकती हैं। इनमें से सबसे सामान्य प्रजाति कैंडिडा अल्बिकन्स (Candida albicans) है। कैंडिडा यीस्ट आमतौर श्लेष्मा झिल्ली (mucous membranes) और त्वचा पर बिना किसी संक्रमण के पाया जाता है। इन यीस्ट की शरीर में बढ़ने वाली मात्रा कैंडिडिआसिस संक्रमण का कारण बनती है। कैंडिडिआसिस के लक्षण संक्रमित शरीर के अंगों के आधार पर भिन्न-भिन्न होते हैं।

कैंडिडा अल्बिकन्स (Candida albicans) मुंह, आंतों में और योनि में होने वाले यीस्ट संक्रमण का सबसे सामान्य प्रकार है।

जब कैंडिडिआसिस (Candidiasis) संक्रमण योनि को प्रभावित करता है, तो इसे “यीस्ट इन्फेक्शन” के रूप में जाना जाता है। जब कैंडिडा प्रजातियां रक्त प्रवाह में प्रवेश करती हैं तब यह पूरे शरीर को संक्रमित करती हैं, जिससे गंभीर कैंडिडिआसिस जन्म लेता है। अगर प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो कैंडिडिआसिस संक्रमण शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है।

कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) के लक्षण – Candidiasis Symptoms in Hindi


प्रभावित शारीरिक अंगों के आधार पर कैंडिडिआसिस के लक्षण भिन्न-भिन्न होते हैं, कुछ सामान्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं-
त्वचा पर लाल चकते आना।
त्वचा के चकते (लाल निशान) में आमतौर पर दर्द और खुजली होना।
प्रभावित क्षेत्रों पर सफेद, परतदार पदार्थ का जमा हो जाना।
त्वचा में रूखापन आना या त्वचा में दरारें पड़ जाना।
प्रभावित जगह पर कष्ट या दर्द होना।
मक्खन जैसी मुलायम सफेद त्वचा दिखाई देना।
त्वचा का लाल या बैंगनी धब्बा वाली त्वचा में तबदील हो जाना।
एरीथेमा रोग होना, जिसके परिणामस्वरूप त्वचा पर लाली और सूजन आती है।
प्रभावित क्षेत्रों में मवाद से भरी फुंसी होना।
मुँह में छाले या आपके मुंह में लाल और सफेद घाव होना।


कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) के कारण – Candidiasis Causes in Hindi
कैंडिडिआसिस (Candidiasis) त्वचा संक्रमण, शरीर के लगभग किसी भी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह ज्यादातर उन क्षेत्रों में होता है, जहां दो त्वचा क्षेत्र एक दूसरे को छूते हैं या रगड़ते हैं। इस तरह के क्षेत्रों में कांख, ग्रोइन (पेट और जांघ के बीच का भाग) और त्वचा की परतें , साथ ही साथ आपकी उंगलियों और पैर की उंगलियों के बीच का क्षेत्र शामिल है। फंगस गर्म, नम और पसीने की स्थिति में तेजी से वृद्धि करती है।

अतः यह त्वचा संक्रमण निम्न कारणों से फैलता है –

त्वचा का वह क्षेत्र जो नम या पसीना से ग्रस्त हैं, कैंडिडा के बढ़ने के लिए सहायक हैं।
यदि आपको मधुमेह है, तो यह संक्रमण तेजी से फैलता है।
गर्म और आर्द्र मौसम, खराब स्वच्छता के कारण भी यह त्वचा संक्रमण बढ़ता है।
एंटीबायोटिक्स या स्टेरॉयड दवाओं का लम्बे समय तक सेवन इसका कारण बनता हैं।
यदि प्रतिरक्षा प्रणाली खराब है, तब भी इस रोग का संक्रमण हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि एड्स है या कुछ अन्य प्रकार की गंभीर रक्त विकार की बीमारी है।
अधिक वजन भी कैंडिडिआसिस का कारण बनता है।
लोगों हाइपोथायरायडिज्म भी इसके इन्फेक्शन का कारण है।
गीले परिस्थितियों में काम करने वाले लोग या गीले कपड़े का अधिक समय तक उपयोग भी इसके फैलने का कारण होता है।
गर्भावस्था भी इसका एक कारण होती है।

कैंडिडिआसिस के प्रकार – Candidiasis Types in Hindi

कैंडिडिआसिस संक्रमण के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं। इन सभी प्रकार में से ज्यादातर यीस्ट संक्रमण को आसानी से दवाओं द्वारा ठीक किया जा सकता है।
मुंह और गले में थ्रश (ऑरोफैरेनजीज कैंडिडिआसिस) – Thrush (Oropharyngeal Candidiasis) in hindi
कैंडिडा यीस्ट मुंह और गले में फैलकर थ्रश नामक संक्रमण का कारण बनता है। यह संक्रमण नवजात बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

जीभ, होंठ, मसूड़ों और भीतरी गाल पर सफेद या पीले रंग के धब्बे, मुंह और गले में लाली या दर्द, भोजन निगलने पर दर्द ये सभी इसके प्रमुख लक्षण हैं।

यौन अंगों में यीस्ट इन्फेक्शन – Genital Yeast Infection (Genital Candidiasis) in hindi


एक सर्वे के अनुसार चार वयस्क महिलाओं में से लगभग तीन को सम्पूर्ण जीवनकाल के दौरान कभी ना कभी यीस्ट संक्रमण (Yeast Infection) का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार का कैंडिडिआसिस संक्रमण योनि में बहुत अधिक यीस्ट बढ़ने के कारण होता है। पुरषों में बहुत कम यौन यीस्ट संक्रमण होता है।

एक यीस्ट (खमीर) संक्रमण सामान्यता तब होता है जब योनि में यीस्ट का संतुलन बदलता है। यह स्थिति गर्भावस्था, मधुमेह, कुछ दवाओं, शुक्राणुनाशकों या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण प्रगट होती है।

योनि में अधिक खुजली, योनि सूजन और लालिमा, सेक्स के दौरान असुविधा आदि इसके प्रमुख लक्षण है।


डायपर रश यीस्ट इन्फेक्शन – Diaper Rash from Yeast Infection in Hindi

यह संक्रमण ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करता है। डायपर चकते आमतौर पर गीले या गंदे डायपर को बहुत लंबे समय तक पहने रहने से होते है।

यदि बच्चे का डायपर रश दूर नहीं हो रहे हो, यदि उसका तल लाल और संवेदनशील है और यदि घावों के चारों ओर एक लाल सीमा है, तो कैंडिडिआसिस के इलाज के लिए एक एंटीफंगल क्रीम का उपयोग किया जा सकता है।

डायपर रश और कैंडिडिआसिस को रोकने के लिए अपने बच्चे के निचले हिस्से को साफ और सूखा रखें।


कैंडिडिआसिस की जटिलताएं – Candidiasis Complication and risk factor in Hindi


वयस्कों के स्वास्थ्य पर कैंडिडिआसिस का ज्यादा असर नहीं होता है तथा इसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। परन्तु यह संक्रमण अधिक उम्र के वयस्कों और छोटे बच्चों के साथ-साथ कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों में अधिक गंभीर हो सकता है। इससे शरीर के अन्य हिस्सों में भी संक्रमण फैल सकता है, खासतौर पर ओरल थ्रेश (oral thrush) में। अतः यह संक्रमण निम्न हिस्सों को प्रभावित कर सकता है:
ग्रासनली (esophagus)
हृदय के वाल्व (heart valves)
आंत (Intestine)
लीवर (liver)
फेफड़ों इत्यादि को।

कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) का निदान – Candidiasis Diagnosing in Hindi

कैंडिडा संक्रमण या कैंडिडिआसिस का निदान प्रमुख रूप से प्रारम्भिक अवस्था और प्रभावित त्वचा पर निर्भर करता है। कैंडिडिआसिस का निदान शारीरिक परीक्षण के आधार पर किया जा सकता है।

कैंडिडा (Candida) अक्सर फैलने वाला संक्रमण है। हालांकि एक फार्मासिस्ट, प्रभावित अंग को देखकर और कुछ प्रश्न पूछकर इस समस्या का निदान कर लेता है।

यदि आपको इस प्रकार के संक्रमण का अनुभव होता हैं तो तत्काल ही डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। जिससे कि डॉक्टर को कैंडिडिआसिस के निदान में सुविधा हो सके, और इसका उपचार किया जा सके।


कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) का उपचार – Candidiasis Treatment in Hindi

कैंडिडा त्वचा संक्रमण का उपचार आमतौर पर आसन होता है। यदि प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक है और कैंडिडा फंगस रक्त में ना फैला हो, तो इसके इलाज के लिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है। अतः कैंडिडिआसिस के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीफंगल क्रीम, मलहम, या लोशन को संक्रमित त्वचा पर लागू करने की सलाह देता है। संक्रमण के उपचार में उपयोग की जाने वाली क्रीम में शामिल हैं:
क्लोत्रिमज़ोल (Clotrimazole)
इकोनाजोल (Econazole)
मिकोनाज़ोल (Miconazole)
कीटोकोनाजोल (Ketoconazole) (केवल वयस्कों के लिए )
टर्बिनाफिन (Terbinafine)

डॉक्टर संक्रमित त्वचा को मॉइस्चराइजिंग क्रीम या मलहम के साथ धोने की सलाह दे सकता है, यह क्रीम, साबुन उत्पादों की तुलना में अधिक लाभकारी होती हैं। इस स्थिति में कुछ एमोलिएंट (emollients) साबुन उपयोग में लाई जा सकती हैं।



संक्रमण के प्रकार और प्रभावित शरीर के हिस्से के आधार डॉक्टर विभिन्न प्रकार की दवाओं का उपयोग करने की सलाह दे सकते है। उदाहरण के लिए:
योनि यीस्ट संक्रमण (vaginal yeast infections) के लिए अक्सर योनि में लगाये जाने वाले जैल या क्रीम को प्रयोग करने की सलाह दी जा सकती है।
छाले (Thrush) का इलाज अक्सर एंटीफंगल के रूप में गोलियां या माउथवॉश का उपयोग करके किया जा सकता है।
एथलीट फुट (पैरों की दाद) का उपचार अक्सर स्प्रे, पाउडर और मरहम का उपयोग किया जा सकता है।

कैंडिडिआसिस (कैंडिडा) की रोकथाम – Candidiasis Prevention in Hindi
कैंडिडा संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए एवं उसकी रोकथाम के लिए कुछ आसान कदम उठाये जा सकते हैं, जो इस प्रकार हैं –
“सूखे-फिट” कपड़ों को पहनना चाहिए, जिससे कि त्वचा से नमी को दूर करने में मदद मिल सके।
अपनी कांख, ग्रोइन क्षेत्र (पेट और जांघ के बीच का भाग) और अन्य क्षेत्रों को जहाँ संक्रमण का खतरा अधिक रहता है उसे हमेशा साफ और सूखा रखें।
यदि आप अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो अपने पेट के आस पास की चर्बी को कम करने पर ध्यान दें।
गर्मी के समय सैंडल या अन्य खुले पैर की चप्पल पहनें।
नियमित रूप से अपने मोजे और अंडरवियर को बदलें और साफ, स्वच्छ रखें ।
किसी भी क्रियाकलाप या यौन संबंध बनाने के बाद पसीना आने पर हमेशा स्नान करें और शरीर को सूखा रखें।


कैंडिडा (कैंडिडिआसिस) के घरेलू उपचार – Candidiasis home remedies in Hindi
कैंडिडा के इलाज के लिए सबसे अच्छा और सबसे प्रभावी उपचार एक एंटीफंगल दवा का उपयोग है। संक्रमण के फैल जाने के बाद, फंगल संक्रमण को ठीक करने के लिए वास्तव में कोई घरेलू उपचार नहीं है। लेकिन कुछ हद तक दहीया टी ट्री आयल इसके उपचार में सहायक सिद्ध हो सकता है। परन्तु यह उपचार योनि यीस्ट संक्रमण के इलाज के लिए उपयोगी नहीं है, साथ ही साथ इसका उपयोग योनि के लिए खतरनाक हो सकता है। फंगल संक्रमण को रोकने के लिए सबसे अच्छा उपाय एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली निर्मित करना है। स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए आप निम्न तरीके अपना सकते हैं। जैसे-
सात से आठ घंटे की पूर्ण नींद लें।
नियमित रूप से व्यायाम करें।
स्वस्थ, संतुलित भोजन करें।

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