Header Ads

योनि में खुजली और संक्रमण का घरेलु उपचार।


योनि में खुजली और संक्रमण का घरेलु उपचार।
योनि मार्ग में खुजली या संक्रमण होना स्त्रियों की एक आम समस्या है, इसके कई कारण हो सकते है, योनि मार्ग की अच्छे से सफाई करने से इस रोग से बचा जा सकता है, ऐसी परिस्थिति में आप कुछ घरेलु नुस्खे अपनाकर भी इस समस्या से आराम पा सकते हैं। आइये जाने इस के घरेलु नुस्खे।
योनि में खुजली का घरेलु उपचार।
योनि में खुजली का घरेलू उपचार। के लिए इमेज परिणाम
1. योनि में खुजली होने पर तुलसी के पत्तों का लेप लगाएं। खुजली ठीक हो जाएगी।
2. केले के गूदे में आंवले का रस और मिश्री मिलाकर खाने से खुजली ठीक हो जाती है।
3. नारियल के तेल में भीमसेनी कपूर मिलाकर यो‍निमार्ग में लगाने से भी खुजली ठीक हो जाती है।
4. नीम की पत्‍ती, गिलोय, मुलहठी, त्रिफला और शरपुंखा को एक समान मात्रा में लेकर कूट लें। फिर 10 ग्राम चूर्ण को पांच सौ ग्राम पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाए, तो उतार कर छान लें। इस पानी से 2-3 बार नियमित रूप से योनि को धोने से खुजली दूर हो जाएगी।
5. अच्छी Quality के Alcohol से योनिमार्ग को धोने से खुजली से आराम मिलता है।
6. 200 ग्राम गेहूं को रात में पानी में भिगो दें। सुबह इसे पीस कर शुद्ध घी में इसका हलवा बनाकर दिन में 2-3 बार खाएं। खुजली में आराम मिलेगा।
योनि में खुजली और संक्रमण का घरेलू उपचार। के लिए इमेज परिणाम
7. योनिमार्ग और उसके आस पास के अंग को हमेशा साफ रखें।
8. योनि की खुजली के कारण अगर योनि में दर्द हो और सूजन आ गई हो या घाव हो गया हो, तो अरंड के तेल को रूई के फाहे में भिगोकर योनि के अंदर रखें। एक सप्ताह में संतोष जनक आराम मिलेगा।
9. एक गिलास छाछ में एक नींबू निचोड़कर सुबह खाली पेट पीने से 4-5 दिन में योनि की खुजली दूर हो जाएगी।
योनि में खुजली और संक्रमण का घरेलू उपचार। के लिए इमेज परिणाम
10. अगर श्वेतप्रदर के कारण खुजली हो रही है, तो सुबह शाम पांच पांच ग्राम आंवले का चूर्ण चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।
11. गूलर की ताजी पत्तियां पचास ग्राम ले लेकर आधा लीटर पानी में उबालिए, जब पानी आधा रह जाए तो उतार कर छान लीजिए। फिर इसमें डेढ़ ग्राम सुहागा पीस कर मिला लें। इसके बाद गुनगुने पानी को किसी पिचकारी में भरकर योनि को अच्छी तरह साफ करें।
12. गूलर के सत्‍व को गर्म पानी में घोलकर डूश करने से गर्भाशय की खुजली में भी आराम मिलता है।
योनि में संक्रमण का घरेलु उपचार।
1. मुलैठी को पीसकर उसमें घी मिलाकर लेप बनाएं। इस लेप को योनि की दीवारों और उसके आसपास लगाएं। संक्रमण में आराम मिलेगा।
योनि में खुजली का घरेलू उपचार। के लिए इमेज परिणाम
2. ताजी निंबोली (नीम का फल) का रस निकालकर उसे योनि की दीवार पर उंगलियों से धीरे धीरे मलें। यदि ताजा निंबोली न मिलें तो सूखी निंबोली का चूर्ण पानी में भिगोकर पानी निचोड़ लें और उसको प्रयोग करें। नीम की पत्तियों का रस और नीम का तेल भी फायदेमंद है।
3. योनि संक्रमित होने पर दूध दही का सेवन भी फायदेमंद होता है। इस रोग में दही का सेवन करें। थोड़ा सा दही योनि के आसपास लगाने से भी लाभ होता है।
4. संक्रमण के कारण अगर योनि में शुष्कता (सूख) आ गई हो या जलन हो रही हो, तो नारियल का तेल योनि में लगाएं। जलन से बहुत राहत मिलेगी।

मोटापे का काल है जीरा और निम्बू का ये प्रयोग।
मोटापे का काल है जीरा और निम्बू का ये प्रयोग। के लिए इमेज परिणाम
जो लोग मोटापे से परेशान हैं और मोटापे को दूर करने के लिए अनेक तरह के प्रयोग और पैसे बर्बाद कर के थक चुके हैं तो हम बता दें के ये प्रयोग मोटापे के लिए काल साबित होगा। आप अपने रिजल्ट लेखक के साथ ज़रूर शेयर करें।
बिलकुल साधारण सा दिखने वाला ये प्रयोग सिर्फ थोड़े से दिनों में अपना रिजल्ट आपको दिखा जायेगा। और बड़ी बात ये है के ये नुस्खा बिलकुल आसान है। आइये जाने।
हर शाम को एक चम्मच जीरा साफ़ पीने के पानी में भिगो कर रख दीजिये। सुबह खाली पेट ये जीरा चबा चबा कर खा लीजिये और इस बचे हुए पानी को चाय की तरह गर्म करें और इसमें आधा निम्बू निचोड़ कर इसमें एक चम्मच शहद मिला कर इस पेय के घूँट घूँट कर चाय की तरह पियें।
मोटापे का काल है जीरा और निम्बू का ये प्रयोग। के लिए इमेज परिणाम
जीरा शरीर में हमारे द्वारा ग्रहण की गयी वसा को शरीर में अवशोषित नहीं होने देता। और गर्म पानी में निम्बू शरीर में जमी हुयी चर्बी को काटता है। इस कारण से प्रयोग मोटापे के लिए चमत्कार है।
और ध्यान रखें, इस प्रयोग के करते समय आप नाश्ता ना करें। नहीं तो मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलेगा। सुबह ये पीने के बाद सीधे दोपहर का खाना खाएं। और खाने के पहले एक प्लेट सलाड खाएं। और भोजन में हरी सब्जियों
मोटापे का काल है जीरा और निम्बू का ये प्रयोग। के लिए इमेज परिणाम
का प्रयोग करें। और रात को भी सोने से 2-3 घंटे पहले भोजन कर लें।
दोपहर और रात के भोजन के तुरंत बाद एक गिलास गर्म पानी चाय की तरह आधा नीम्बू निचोड़ कर पीयें। भोजन के साथ ठंडा पानी बिलकुल नहीं पीना।
मैदे से बानी हुयी वस्तुओ से परहेज करें। मीठा और चीनी मोटापे में ज़हर के समान हैं। अनाज भी चोकर वाला (आटे को छानने से जो कचरा निकालते हैं वो चोकर होता है उसको मत निकाले) इस्तेमाल करें। फलों का जूस पीने की बजाय फल खाने चाहिए, इससे फाइबर भी मिल जाता है और जल्दी भूख नहीं लगती।
शीघ्र रिजल्ट पाने वाले व्यक्तियों को इसके साथ साथ में कुछ व्यायाम ज़रूर करना चाहिये। विशेषकर पश्चिमोत्तनासन, कपाल भाति और हो सके तो रनिंग या जॉगिंग ज़रूर करें।
आपको एक महीने में ही रिजल्ट मिल जायेगा।

उत्तेजना लाने और स्तम्भन शक्ति बढ़ाने के लिए।


आज कल की जीवन शैली, खान पान, अत्यधिक मैथुन और दवाओ के सेवन से कमज़ोर हो चुकी यौन शक्ति में उत्तेजना और स्तम्भन शक्ति बढ़ाने के लिए ये उपचार बहुत सहायक और आसान हैं। आइये जाने।
* एक लौंग को चबाकर उसकी लार को लिंग के पिछले भाग पर लगाने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।
* बकरी के घी को लिंग पर लगाने से लिंग मजबूत होता है और उसमें उत्तेजना आती है।
* धतूरा, कपूर, शहद और पारे को बराबर मात्रा में मिलाकर इसके लेप को लिंग के आगे के भाग (सुपारी) को छोड़कर बाकी भाग पर लेप करने से संभोग शक्ति तेज हो जाती है।
* हीरा हींग को शुद्ध शहद में मिलाकर लिंग पर लेप करने से शीघ्रपतन का रोग जल्दी दूर हो जाता है। लिंग पर इस मलहम अर्थात लेप को लगाने के बाद शीघ्रपतन से ग्रस्त रोगी अपनी मर्जी से स्त्री के साथ संभोग करने का समय बढ़ा सकता है।
* 10 ग्राम दालचीनी का तेल और 30 ग्राम जैतून के तेल को एक साथ मिलाकर लिंग पर लेप करते रहने से शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है, संभोग करने की शक्ति बढ़ती है। इस क्रिया के दौरान लिंग को ठंडे पानी से बचाना चाहिए।
* काले धतूरे की पत्तियों के रस को टखनों पर लगाकर सूखने के बाद संभोग करने से संभोग क्रिया पूरी तरह से और संतुष्टि के साथ संपन्न होती है।


लिंग के छोटा होने पर कीजिये ये आयुर्वेदिक उपचार।




युवा काल में लिंग के आकार के प्रति चिंता एवं उत्सुकता लगभग हरेक पुरुष मे होती है. परन्तु यह ध्यान देने वाली बात है कि हर पुरुष के लिंग मे लंबाई, मुटाई तथा स्थिरता में भिन्नता तो अवश्य होती है पर इस भिन्नता का यौन संतुष्टी, गर्भाधारण तथा यौन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पडता. वास्तव में स्त्री के योनि का उपरी एक तिहाई भाग ही यौन स्पर्श के प्रति संवेदनशील होता है. अत; उत्तेजित अवस्था मे यदि शिश्न की लंबाई केवल 2 से.मे. भी हो तो वह अपने यौन साथी को प्रयाप्त यौन आनंद प्रदान करा पाने मे सक्ष्म होता है. अतः आप चिंता ना करें और बहलाने वाले विज्ञापनों के चक्कर में पडकर अपने शिश्न की लंबाई, मोटाई एवं उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन कदापि ना करें . इससे फायदा तो दुर नुकसान अवश्य हो सकता है।
इसके साइज बढ़ने की आयुर्वेदिक दवाये।
* शतावर, असगंधा, कूठ, जटामांसी और कटेहली के फल को 4 गुने दूध में मिलाकर या तेल में पकाकर लेप करने से लिंग मोटा होता है और लिंग की लम्बाई भी बढ़ जाती है।
* कूटकटेरी, असगंध, वच और शतावरी को तिल के तेल में जला कर लिंग पर लेप करने से लिंग में वृद्धि होती है
* असगंध चूर्ण को चमेली के तेल के साथ खूब मिलाकर लिंग पर लगाने से लिंग मज़बूत हो जाता है
* सूखा जौ पीस कर तिल के तेल में मिला कर लिंग पर लगाने से सारे दोष दूर हो जाते हैं
* 20 ग्राम लोंग को 50 ग्राम तिल के तेल में जला कर मालिश करने से लिंग में मजबूती आती है
* हींग को देशी घी में मिलाकर लिंग पर लगा लें और ऊपर से सूती कपड़ा बांध दें। इससे कुछ ही दिनों में लिंग मजबूत हो जाता है।
* भुने हुए सुहागे को शहद के साथ पीसकर लिंग पर लेप करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है।
* जायफल को भैंस के दूध में पीसकर लिंग पर लेप करने के बाद ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। सुबह इस पत्ते को खोलकर लिंग को गर्म पानी से धो लें। इस क्रिया को लगभग 3 सप्ताह करने से लिंग पुष्ट हो जाता है।
* शहद को बेलपत्र के रस में मिलाकर लेप करने से हस्तमैथुन के कारण होने वाले विकार दूर हो जाते हैं और लिंग मजबूत हो जाता है।
* रीठे की छाल और अकरकरा को बराबर मात्रा में लेकर शराब में मिलाकर खरल कर लें। इसके बाद लिंग के आगे के भाग को छोड़कर लेप करके ऊपर से ताजा साबुत पान का पत्ता बांधकर कच्चे धागे से बांध दें। इस क्रिया को नियमित रूप से करने से लिंग मजबूत हो जाता है।
* बेल के ताजे पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से लिंग में ताकत पैदा हो जाती है।
* असगंध, मक्खन और बड़ी भटकटैया के पके हुए फल और ढाक के पत्ते का रस, इनमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग लिंग पर करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली बनता है।
लिंग की विकृति में तिला का प्रयोग –
दालचीनी का तेल, बादाम का तेल, जमालगोटा का तेल और पिस्ता का तेल – सभी तेल समान मात्रा में लेकर एक साथ मिलाकर रख लें। इसे एक बूद की मात्रा में रात को सोेते समय इंद्रिय पर लगाये और ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। इस तिला का प्रयोग एक महिने तक करने से लिंग का टेढापन, पतलापन एंव असमानता दूर हो जाती है और वो शक्तिशाली हो जाता है

लीवर की परेशानी है तो जरुर पढ़े व् शेयर भी करे




आज कल चंहु और लीवर के मरीज हैं, किसी को पीलिया हैं, किसी का लीवर सूजा हुआ हैं, किसी का फैटी हैं, और डॉक्टर बस नियमित दवाओ पर चला देते हैं मरीज को, मगर आराम किसी को मुश्किल से ही आते देखा हैं।
लीवर हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है, यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है। लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्‍किल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं।

* लीवर की खराबी होने का कारण ज्‍यादा तेल खाना, ज्‍यादा शराब पीना और कई अन्‍य कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं। हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है तब हमारे शरीर में क्‍या क्‍या बदलाव पैदा होते हैं यानी की लक्षण क्‍या हैं, इसके बारे में कोई नहीं जानता।
वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो वे बिल्‍कुल गलत हैं।
* क्‍या आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर की खराबी हो सकती है। क्‍यों चौंक गए ना?

* हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्‍या आपका लीवर वाकई में खराब है। कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती, इसलिये आप सावधान रहें।

* मुंह से बदबू -यदि लीवर सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी। ऐसा इसलिये होता है क्‍योकि मुंह में अमोनिया ज्‍याद रिसता है।

* लीवर खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी। आंखों के नीचे की स्‍किन बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्‍थ का असर साफ दिखाई पड़ता है।

* पाचन तंत्र में खराबी यदि आपके लीवर पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है, तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा।

* त्‍वचा पर सफेद धब्‍बे यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्‍पॉट के नाम से बुलाएंगे।

* यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर गड़बड़ है। यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है।

* यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है। इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर संक्रमित है।

* लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है। यदि आपके मुंह में कडुआहर लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है।

* जब लीवर बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है, जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं।

* मानव पाचन तंत्र में लीवर एक म‍हत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। विभिन्‍न अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन शामिल हैं। लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है। लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं।

करे ये घरेलू कुछ उपाय :-
* हल्‍दी लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के लिए अत्‍यंत उपयोगी होती है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है। इसलिए हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं
* सेब का सिरका, लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है। सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं- एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं। इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें।

* आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है। अध्ययनों ने साबित किया है कि आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं। लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए.

* पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है, विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए। हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें.

* सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है। अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं। आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर, पानी को छान कर पी सकते हैं। सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा।

* लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। फिर ठंड़ा होने पर छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं।

* फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है। टोस्‍ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है

* एवोकैडो और अखरोट को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं। एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है।

* पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं। लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं

* सेब और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है। इसके अलावा, हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

* एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है , जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है. इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है . इसे भुई आंवला कहते है. इस पौधे को भूमि आंवला या भू- धात्री भी कहा जाता है .यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है.इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है.तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं . ये यकृत ( लीवर ) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है . लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा . बिलीरुबिन बढ़ गया है , पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पढ़े को जड़ों समेत उखाडकर , उसका काढ़ा सुबह शाम लें . सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ बाईलीरुबिन ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी


क्रेटेनाईन डायलसिस या किडनी ट्रांसप्लांट का रामबाण इलाज।



अगर आपका क्रेटेनाईन बढ़ा हुआ हैं, या डायलसिस चल रहा हैं, या किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत आ चुकी हैं तो इसको ज़रूर आज़माये।
मैंने पहले भी अपना अनुभव hbnteam.com के माध्यम से आप लोगो को पहुंचाया। मगर आप लोगो के बहुत सारे सवाल थे जिनको आज क्लियर कर के ये नया मैसेज भेज रहे हैं। आप सब लोगो के सवालो के जवाब, उपयोग की विधि और अपनायी जाने वाली सावधानिया इस में डिटेल से हैं। आशा हैं के आप पूरा फायदा उठाएंगे।
विधि।
250 ग्राम गोखरू कांटा (ये आपको पंसारी से मिल जायेगा) लेकर 4 लीटर पानी मे उबालिए जब पानी एक लीटर रह जाए तो पानी छानकर एक बोतल मे रख लीजिए और गोखरू कांटा फेंक दीजिए। इस काढे को सुबह शाम खाली पेट हल्का सा गुनगुना करके 100 ग्राम के करीब पीजिए। शाम को खाली पेट का मतलब है दोपहर के भोजन के 5, 6 घंटे के बाद। काढ़ा पीने के एक घंटे के बाद ही कुछ खाइए और अपनी पहले की दवाई ख़ान पान का रोटिन पूर्ववत ही रखिए।
15 दिन के अंदर यदि आपके अंदर अभूतपूर्व परिवर्तन हो जाए तो डॉक्टर की सलाह लेकर दवा बंद कर दीजिए। जैसे जैसे आपके अंदर सुधार होगा काढे की मात्रा कम कर सकते है या दो बार की बजाए एक बार भी कर सकते है।
सावधानिया और परहेज।
और ये काढ़ा सुबह शौच जाने के बाद पीना हैं। और काढ़े और नाश्ते के बीच में 1 से डेढ़ घंटे का अंतर रखना हैं। और नाश्ते में मैदे से बानी हुयी कोई भी वास्तु नहीं खानी जैसे बिस्कुट, नान खटाई, पाव, ब्रेड इत्यादि। और लंच में दाल करेला भिन्डी बैंगन टमाटर शिमला मिर्च पालक नहीं खाना। फ़ास्ट फ़ूड जंक फ़ूड कोल्ड ड्रिंक तली हुयी चीजे तो ज़हर के समान हैं। नमकीन चटपटी चाट वगैरह कुछ भी नहीं खाना। ठंडा पानी भी नहीं पीना।
कब तक आएगा आराम।
अगर इन सब बातो का ध्यान रखेंगे तो दो दिन के बाद आपका पेट साफ़ होगा और चार दिन बाद के बाद आपकी यूरिन की समस्या हल होनी शुरू हो जाएगी और 10 दिन बाद शरीर में नयी ऊर्जा का संचार होगा और 15 दिन में 30 से 50 % यूरिया क्रेटेनाईन कम होगा। और 3 से 4 महीने में नार्मल होंगे। इसलिए धैर्य बहुत ज़रूरी हैं। और अगर अभी भी आपको कुछ समझ नहीं आये तो आप ओम प्रकाश जी से उनकी फेसबुक की आई डी से संपर्क कर सकते हो या चेतन शेखावत जी से सम्पर्क कर सकते हो। दोनों की आई डी आपको नीचे दी जा रही हैं।
ये प्रयोग मैंने हज़ारो लोगो को बताया हैं और उनमे 90 % से ज़्यादा को आराम हुआ हैं। अगर आप भी ऊपर बताई गयी सावधानिया बरतेंगे तो आपको ज़रूर आराम आएगा।
मुझे उम्मीद हैं के आपका बढ़ा हुआ क्रेटेनाईन या डायलसिस जो चल रहा हैं, या किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत तक इस से छूट सकती हैं।


बाहर निकला हुआ पेट अंदर करने के कुछ आसान घरेलू तरीके

भारत में मोटे लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। आज करीब 4 करोड़ 10 लाख ऐसे लोग भारत में मौजूद हैं, जिनका वजन सामान्य से कहीं ज्यादा है। अधिकांश लोग शुरुआत में मोटापा बढ़ने पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन जब मोटापा बहुत अधिक बढ़ जाता है तो उसे घटाने के लिए घंटों पसीना बहाते रहते हैं।
मोटापा घटाने के लिए खान-पान में सुधार जरूरी है। कुछ प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं, जिनके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। इसलिए यदि आप वजन कम करने के लिए बहुत मेहनत नहीं कर पाते हैं तो अपनाएं यहां बताए गए छोटे-छोटे उपाय। ये आपके बढ़ते वजन को कम कर देंगे।
1. ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें। शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।
2. केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाए गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
3. रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।
4. पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है। लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम हो जाती है।
5. दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
6. छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।
7. आंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं। कमर एकदम पतली हो जाएगी।
8. मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।
9. एक चम्मच पुदीना रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।
10. सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है। पुदीने की चाय बनाकर पीने से मोटापा कम होता है।
11. खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के बाद खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।
12. सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से पेट अंंदर हो जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं

Healths Is Wealth. Blogger द्वारा संचालित.