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फिटनेस

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बादाम खाएं रोगों को भगाएं
‘‘दिल के मरीजों के लिए दूध, जौ, बादाम, टमाटर, चैरी, मछली, वेटा ग्लूकोज ये सब बहुत जरूरी और फायदेमंद होता है। अगर आप दिल के रोगी हैं तो अपनी डाइट में इन्हें शामिल करिए और अपने शरीर व दिल को हेल्दी बनाएं।’’


ऐसी डाइट कोलेस्ट्रल को घटाने में मदद करती है। इस तरह का खानपान 40 से ज्यादा उम्र वाले दिल के रोगियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्दी डाइट ही 40 प्लस के दिल के मरीजों को खतरे से दूर रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना जौ खाने से 5 से 10 परसेंट कोलेस्ट्रॉल घट सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि 20 मिनट के व्यायाम के बाद 150 मिली टमाटर का जूस पीने से पेट का कैंसर दूर रहेगा। यह दिल की बीमारी को भी दूर रखता है। खाने या पीने में थोड़ी सी भी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए मंहगी पड़ सकती है। तो इसका खास ध्यान रखने की जरूरत है। पढ़ाई करने वाले युवा छात्रों के लिए बादाम जरूरी है, यह ब्लड शुगर से बचाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा चिकनाई वाला दूध पीने से आपकी मांशपेशियां बढ़ती हैं। विशेषज्ञों का विश्वास है कि चिकन प्रोटीन के लिए बहुत अच्छा जरिया है।


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जनाब! मोटापा नहीं वेट बढ़ाएं
‘‘वेट कम करने के अलावा वेट बढ़ाना भी अपने आप में एक चैलेंज है। अगर आप भी वेट बढ़ाने के चैलेंज से जूझ रहे हैं, तो आपको हमारे इन टिप्स पर गौर करना चाहिए, वरना कहीं आप वेट की बजाय मोटापा न बढ़ा लें। प्रस्तु है एक रिपोर्ट...’’

वेट कम करने की कोशिश में तो तमाम लोग जुटे हैं, लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो तमाम कोशिशों के बावजूद अंडरवेट हैं। जी हां, सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन वेट बढ़ाना भी वेट कम करने जितना ही मुश्किल माना जाता है। एक न्यूट्रीनिस्ट कहती हैं कि वेट गेन करने के लिए जाने वाले सभी फूड्स में बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। इसलिए वेट बढ़ाने की कोशिश में जुटे लोगों को छोटे-छोटे मील लेने चाहिए। वरना एक साथ ज्यादा कैलोरी लेने से उन्हें दूसरी बीमारियां होने का खतरा रहता है। दरअसल, इस तरह उनकी बॉडी में सिर्फ सैचुरेटिड फैट बढ़ता है, जोकि ठीक नहीं है। वेट गेन करने के लिए सबसे सही तरीका मसल गेन का माना जाता है। इसके लिए हाई प्रोटीन डाइट लेने के साथ एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है।

ऐसे बढ़ेगा वेट
-थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहें। इससे आपकी बॉडी उसे बर्न करती रहेगी और थोड़ी देर में आपको दोबारा भूख लग जाएगी।
- सॉलिड फूड के साथ लिक्विड ना लें (खाने के साथ पानी और दूसरे ड्रिंक)। दोनों के बीच कम से कम 45 से 60 मिनट का ब्रेक होना चाहिए।
-उठने के पहले घंटे में ही कुछ न कुछ जरूर खा लीजिए। इससे आपकी बॉडी का मेटाबॉलिज्म जल्द शुरू हो जाएगा और आपको जल्दी-जल्दी भूख लगेगी।
-हफ्ते में तीन से चार बार 20 से 30 मिनट के लिए कॉडिर्यो एक्टिविटी कीजिए।
-हेल्दी फूड मसलन गेहूं की रोटियां, दालें, पास्ता, फ्रूट, वेजिटेबल, प्रोटीन, नट्स और लो डेरी प्रोडक्ट लें। इनसे आपका वजन बढ़ेगा और आप हेल्दी भी रहेंगे।
- चीज वाली डिशेज, उबले हुए एग, केले और लो फैट मिल्क का मिल्क शेक आपको फायदा देगा। इसके अलावा आप मफिन, दही, लस्सी, योगर्ट और फ्रूट्स भी लें सकते हैं।

पेस्टी, केक से बचें
एक हेल्थ कंसलटेंट कहती हैं कि अगर आप अपना वेट बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको अपने खाने में हेल्दी हाई कैलोरी फूड जैसे नट्स, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन रिच फूड्स शामिल करने चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि साथ में एक्सरसाइज करना न भूलें, ताकि आपको बार-बार भूख लगती रहे। खासकर अगर आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करेंगे, तो आपकी मसल्स बेहतर होंगी। कोशिश करें कि वेट बढ़ाने की चाहत में आप ट्रांस फैट वाले आइटम मसलन पेस्ट्री, केक, कुकीज और पैक्ड स्नैक्स न खाएं।

बीमारी के बाद लें प्रो-बायोटिक
अगर बीमारी के दौरान आपका वेट कम हो गया है, तो उसे आप धीरे-धीरे फिर से बढ़ा सकते हैं। जाहिर है, बीमारी के दौरान कम खाने-पीने से आपका वेट कम हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे आप दोबारा खाने-पीने लगते हैं, तो आपका वेट दोबारा बढ़ जाता है। एक मशहूर चिकित्सक कहती हैं कि अगर आपने बीमारी के दौरान बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक लिए हैं, तो आपको कुछ प्रो-बायोटिक लेने की भी सलाह दी जाती है।

आप वेट बढ़ाना चाहते हैं?
एक ट्रेनिंग एंड न्यूट्रीनिस्ट का कहना है कि अगर आप वेट बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको वर्कआउट की बजाय स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर फोकस करना चाहिए। अगर आप इसके साथ सही डाइट भी लेंगे, तो आपको अपनी मसल्स बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। जाहिर है, अगर आपका वेट मसल्स का साइज बढ़ने से बढ़ता है, तो यह आपके लिए ज्यादा बेहतर आॅप्शन है। ध्यान रहे कि आपको कभी-कभी रनिंग, साइकिलिंग और स्विमिंग भी करनी चाहिए। इससे आपको अपने हार्ट को बेहतर रखने में मदद मिलेगी।

- वेट बढ़ाने के लिए अपनी डेली डाइट में कुछ फ्रूटस जरूर शामिल करें।
-अपने रोजाना चाय-कॉफी पीने के रुटीन को रोजाना दो गिलास दूध से रिप्लेस कर दें।
-केला खाइए या फिर बनाना शेक पीजिए। दोनों ही तरीकों से आपको वेट बढ़ाने में मदद मिलेगी।
-फ्रूट जूस पीने से बॉडी में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाएगा और आपकी कैलौरी इंटेक भी।
-वेट बढ़ाने के लिए आप आलू, कॉर्न, ड्राई फ्रूट, राइस और अंडे जैसे आइटम भी खा सकते हैं।


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जनाब! मोटापा नहीं वेट बढ़ाएं
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‘‘वेट कम करने के अलावा वेट बढ़ाना भी अपने आप में एक चैलेंज है। अगर आप भी वेट बढ़ाने के चैलेंज से जूझ रहे हैं, तो आपको हमारे इन टिप्स पर गौर करना चाहिए, वरना कहीं आप वेट की बजाय मोटापा न बढ़ा लें। प्रस्तु है एक रिपोर्ट...’’
-मुकेश चंद्रावेट कम करने की कोशिश में तो तमाम लोग जुटे हैं, लेकिन ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो तमाम कोशिशों के बावजूद अंडरवेट हैं। जी हां, सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन वेट बढ़ाना भी वेट कम करने जितना ही मुश्किल माना जाता है। एक न्यूट्रीनिस्ट कहती हैं कि वेट गेन करने के लिए जाने वाले सभी फूड्स में बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। इसलिए वेट बढ़ाने की कोशिश में जुटे लोगों को छोटे-छोटे मील लेने चाहिए। वरना एक साथ ज्यादा कैलोरी लेने से उन्हें दूसरी बीमारियां होने का खतरा रहता है। दरअसल, इस तरह उनकी बॉडी में सिर्फ सैचुरेटिड फैट बढ़ता है, जोकि ठीक नहीं है। वेट गेन करने के लिए सबसे सही तरीका मसल गेन का माना जाता है। इसके लिए हाई प्रोटीन डाइट लेने के साथ एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है।


ऐसे बढ़ेगा वेट
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-थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहें। इससे आपकी बॉडी उसे बर्न करती रहेगी और थोड़ी देर में आपको दोबारा भूख लग जाएगी।
- सॉलिड फूड के साथ लिक्विड ना लें (खाने के साथ पानी और दूसरे ड्रिंक)। दोनों के बीच कम से कम 45 से 60 मिनट का ब्रेक होना चाहिए।
-उठने के पहले घंटे में ही कुछ न कुछ जरूर खा लीजिए। इससे आपकी बॉडी का मेटाबॉलिज्म जल्द शुरू हो जाएगा और आपको जल्दी-जल्दी भूख लगेगी।
-हफ्ते में तीन से चार बार 20 से 30 मिनट के लिए कॉडिर्यो एक्टिविटी कीजिए।
-हेल्दी फूड मसलन गेहूं की रोटियां, दालें, पास्ता, फ्रूट, वेजिटेबल, प्रोटीन, नट्स और लो डेरी प्रोडक्ट लें। इनसे आपका वजन बढ़ेगा और आप हेल्दी भी रहेंगे।
- चीज वाली डिशेज, उबले हुए एग, केले और लो फैट मिल्क का मिल्क शेक आपको फायदा देगा। इसके अलावा आप मफिन, दही, लस्सी, योगर्ट और फ्रूट्स भी लें सकते हैं।


पेस्टी, केक से बचेंएक हेल्थ कंसलटेंट कहती हैं कि अगर आप अपना वेट बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको अपने खाने में हेल्दी हाई कैलोरी फूड जैसे नट्स, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन रिच फूड्स शामिल करने चाहिए। लेकिन ध्यान रहे कि साथ में एक्सरसाइज करना न भूलें, ताकि आपको बार-बार भूख लगती रहे। खासकर अगर आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करेंगे, तो आपकी मसल्स बेहतर होंगी। कोशिश करें कि वेट बढ़ाने की चाहत में आप ट्रांस फैट वाले आइटम मसलन पेस्ट्री, केक, कुकीज और पैक्ड स्नैक्स न खाएं।


बीमारी के बाद लें प्रो-बायोटिकअगर बीमारी के दौरान आपका वेट कम हो गया है, तो उसे आप धीरे-धीरे फिर से बढ़ा सकते हैं। जाहिर है, बीमारी के दौरान कम खाने-पीने से आपका वेट कम हो जाता है। लेकिन जैसे-जैसे आप दोबारा खाने-पीने लगते हैं, तो आपका वेट दोबारा बढ़ जाता है। एक मशहूर चिकित्सक कहती हैं कि अगर आपने बीमारी के दौरान बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक लिए हैं, तो आपको कुछ प्रो-बायोटिक लेने की भी सलाह दी जाती है।


आप वेट बढ़ाना चाहते हैं?एक ट्रेनिंग एंड न्यूट्रीनिस्ट का कहना है कि अगर आप वेट बढ़ाना चाहते हैं, तो आपको वर्कआउट की बजाय स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर फोकस करना चाहिए। अगर आप इसके साथ सही डाइट भी लेंगे, तो आपको अपनी मसल्स बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। जाहिर है, अगर आपका वेट मसल्स का साइज बढ़ने से बढ़ता है, तो यह आपके लिए ज्यादा बेहतर आॅप्शन है। ध्यान रहे कि आपको कभी-कभी रनिंग, साइकिलिंग और स्विमिंग भी करनी चाहिए। इससे आपको अपने हार्ट को बेहतर रखने में मदद मिलेगी।



- वेट बढ़ाने के लिए अपनी डेली डाइट में कुछ फ्रूटस जरूर शामिल करें।
-अपने रोजाना चाय-कॉफी पीने के रुटीन को रोजाना दो गिलास दूध से रिप्लेस कर दें।
-केला खाइए या फिर बनाना शेक पीजिए। दोनों ही तरीकों से आपको वेट बढ़ाने में मदद मिलेगी।
-फ्रूट जूस पीने से बॉडी में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाएगा और आपकी कैलौरी इंटेक भी।
-वेट बढ़ाने के लिए आप आलू, कॉर्न, ड्राई फ्रूट, राइस और अंडे जैसे आइटम भी खा सकते हैं।
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बादाम खाएं रोगों को भगाएं
‘‘दिल के मरीजों के लिए दूध, जौ, बादाम, टमाटर, चैरी, मछली, वेटा ग्लूकोज ये सब बहुत जरूरी और फायदेमंद होता है। अगर आप दिल के रोगी हैं तो अपनी डाइट में इन्हें शामिल करिए और अपने शरीर व दिल को हेल्दी बनाएं।’’
ऐसी डाइट कोलेस्ट्रल को घटाने में मदद करती है। इस तरह का खानपान 40 से ज्यादा उम्र वाले दिल के रोगियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्दी डाइट ही 40 प्लस के दिल के मरीजों को खतरे से दूर रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना जौ खाने से 5 से 10 परसेंट कोलेस्ट्रॉल घट सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि 20 मिनट के व्यायाम के बाद 150 मिली टमाटर का जूस पीने से पेट का कैंसर दूर रहेगा। यह दिल की बीमारी को भी दूर रखता है। खाने या पीने में थोड़ी सी भी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए मंहगी पड़ सकती है। तो इसका खास ध्यान रखने की जरूरत है। पढ़ाई करने वाले युवा छात्रों के लिए बादाम जरूरी है, यह ब्लड शुगर से बचाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा चिकनाई वाला दूध पीने से आपकी मांशपेशियां बढ़ती हैं। विशेषज्ञों का विश्वास है कि चिकन प्रोटीन के लिए बहुत अच्छा जरिया है।
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थोड़ा ध्यान और हो जाएंगी फिट
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कामकाजी स्त्रियों में यह समस्या बहुत आम है। यदि कुछ बातों पर ध्यान दें तो आप उनसे बच सकती हैं....

जब भी चलें तेज कदमों से चलें। 
फुर्ती से काम करें। 
जल्दी-जल्दी उठें-बैठें। 
अपने घर व आॅफिस से एक स्टॉप पहले उतर जाएं और पैदल चल कर पहुंचे। 
एकसाथ भर पेट खाना न खाएं, थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ-कुछ खाते रहना अच्छा है। 
एक्सरसाइज के लिए वक्त जरूर निकालें। 

कंप्यूटर पर टिकी नजरें हटाएंकुछ लोग दिन भर बैठकर कंप्यूटर के सामने सारा समय बिताते हैं जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। अगर आपके साथ भी ऐसा है तो लगातार एक जगह चिपककर न बैठें, थोड़ी-थोड़ी देर में खड़ी होकर टहलें, हाथ-पैरों को हिलाएं व थोड़ा सा हलका-फुलका व्यायाम भी करें। हर बीस मिनट के बाद दूर जगह पर दृष्टि डालें, नजर टिका कर देखने की कोशिश करें। रोशनी बहुत ज्यादा न रहे, तेज रोशनी आंखों में तनाव पैदा करती है। यदि सीधे इससे बचत संभव न हो तो इसके लिए चमक रहित स्क्रीन अपने मॉनीटर पर लगाएं। बार-बार पलकें भी झपकाएं, यह आंखों की अच्छी एक्सरसाइज है।
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इम्यूनिटी के लिए इमेज परिणाम
बीमारियों से लड़ने की ढाल है इम्यूनिटी
‘‘किसी विषय को शुरू करने का यह तरीका खराब हो सकता है, फिर भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को समझने के लिए हम एक मरे हुए इंसान का उदाहरण लेंगे। जब कोई शख्स मरता है, तो कुछ ही समय में तमाम बैक्टीरिया, माइक्रोब्स, वायरस और पैरासाइट्स शरीर पर हमला कर देते हैं और उसे सड़ाना, गलाना शुरू कर देते हैं। अगर कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया जाए तो मृत शरीर में केवल कंकाल का ढांचा भर बचा रहेगा, लेकिन जिंदा आदमी के साथ कभी ऐसा नहीं होता। वजह यह है कि जिंदा लोगों में रोग प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) नाम का एक ऐसा मेकनिजम होता है, जो इन बैक्टीरिया, वायरस और माइक्रोब्स को शरीर से दूर रखता है। इंसान के मरते ही उसका इम्यून सिस्टम भी खत्म हो जाता है और शरीर पर हमला करने की ताक में बैठे माइक्रोब्स बॉडी को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। यानी हमारे शरीर के भीतर एक प्रोटेक्शन मेकनिजम है, जो शरीर की तमाम रोगों से सुरक्षा करता है। इसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं।’’

इम्यूनिटी बढ़ाने के तरीके 
1. खानपान 

- रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसका निर्माण शरीर खुद कर लेता है। ऐसा नहीं है कि आपने बाहर से कोई चीज खाया और उसने जाकर सीधे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा कर दिया। इसलिए ऐसी सभी चीजें जो सेहतमंद खाने में आती हैं, उन्हें लेना चाहिए। इनकी मदद से शरीर इस काबिल बन जाता है कि वह खुद अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके। 
- अगर खानपान सही है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किसी दवा या अतिरिक्त कोशिश करने की जरूरत नहीं है। आयुर्वेद के मुताबिक, कोई भी खाना जो आपके ओज में वृद्धि करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है। जो खाना अम बढ़ाता है, वह नुकसानदायक है। ओज खाने के पूरी तरह से पच जाने के बाद बनने वाली कोई चीज है और इसी से अच्छी सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। पचने में मुश्किल खाना खाने के बाद शरीर में अम का निर्माण होता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है। 
- खानपान में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात का रखें कि भूलकर भी वातावरण की प्रकृति के खिलाफ न जाएं। मसलन अभी सदिर्यां हैं, तो आइसक्रीम खाने से परहेज करना चाहिए। 
- बाजार में मिलने वाले फूड सप्लिमेंट्स का फायदा उन लोगों के लिए है, जिनकी खानपान की आदतें अजीब सी हैं। मसलन जो लोग खाने में सलाद नहीं लेते, वक्त पर खाना नहीं खाते, गरिष्ठ और जंक फूड ज्यादा खाते हैं, वे अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इन सप्लिमेंट्स की मदद ले सकते हैं। अगर कोई शख्स सलाद, दालें, हरी सब्जी आदि से भरपूर हेल्थी डाइट ले रहा है तो उसे इन सप्लिमेंट्स की कोई जरूरत नहीं है। बाजार में कोई भी सप्लिमेंट ऐसा नहीं है जिसके बारे में दावे से कहा जा सके कि उसमें वे सभी विटामिंस और तत्व हैं, जो हमारी बॉडी के लिए जरूरी हैं। मल्टीविटामिंस के नाम से बिकने वाले प्रॉडक्ट में भी सभी जरूरी चीजें नहीं होतीं। इसलिए नेचुरल खानपान ही सबसे बेहतर तरीका है। 
- प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से जितना हो सके बचना चाहिए। ऐसी चीजें जिनमें प्रिजरवेटिव्स मिले हों, उनसे भी बचना चाहिए। 
- विटामिन सी और बीटा कैरोटींस जहां भी है, वह इम्युनिटी बढ़ाता है। इसके लिए मौसमी, संतरा, नींबू लें। 
- जिंक का भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बड़ा हाथ है। जिंक का सबसे बड़ा स्त्रोत सीफूड है, लेकिन ड्राई फ्रूट्स में भी जिंक भरपूर मात्रा में पाया जाता है। 
- फल और हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में खाएं। 
- खानपान में गलत कॉम्बिनेशन न लें। मसलन दही खा रहे हैं तो हेवी नॉनवेज न लें। दही के साथ कोई खट्टी चीज न खाएं। 
- अचार का इस्तेमाल कम करें। जिन चीजों की तासीर खट्टी है, वे शरीर में पानी रोकती हैं, जिससे शरीर में असंतुलन पैदा होता है। सिरका से भी बचना चाहिए। 
- ठंड में शरीर को ज्यादा एक्सपोज न करें। ऐसा करने पर गर्म करने के लिए शरीर को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी, जिससे प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। 
- स्ट्रेस न लें। कुछ लोगों में अंदरूनी ताकत नहीं होती। ऐसे में अगर ऐसे लोग स्ट्रेस भी लेना शुरू कर देंगे तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता एकदम कम हो जाएगी। ऐसे लोगों को जल्दी-जल्दी वायरल इंफेक्शन होने लगेगा। 
- ज्यादा देर तक बंद कमरे और बंद जगहों पर न रहें। जहां इतने लोग सांसें ले रहे होंगे, वहां इंफेक्शन जल्दी ट्रांसफर होगा। खुली हवा में निकलें और लंबी गहरी सांसें लें। 

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प्राणों की रक्षा प्राणायाम से

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‘‘प्राण+आयाम अर्थात प्राणायाम। प्राण का अर्थ है शरीर के अंदर नाभि, हृदय और मस्तिष्क आदि में स्थित वायु जो सभी अंगों को चलायमान रखती है। आयाम के तीन अर्थ है प्रथम दिशा और द्वितीय योगानुसार नियंत्रण या रोकना, तृतीय- विस्तार या लम्बायमान होना। प्राणों को ठीक-ठीक गति और आयाम दें, यही प्राणायाम है।’’
शरीर में स्थित वायु प्राण है। प्राण एक शक्ति है, जो शरीर में चेतना का निर्माण करती है। हम एक दिन भोजन नहीं करेंगे तो चलेगा। पानी नहीं पीएंगे तो चलेगा, लेकिन सोचे क्या आप एक दिन सांस लेना छोड़ सकते हैं? सांस की तो हमें हर पल जरूरत होती है। हम जब सांस लेते हैं तो भीतर जा रही हवा या वायु पांच भागों में विभक्त हो जाती है या कहें कि वह शरीर के भीतर पांच जगह स्थिर हो जाता हैं। ये पंचक निम्न हैं- (1) व्यान, (2) समान, (3)अपान, (4)उदान और (5)प्राण।
उक्त सभी को मिलाकर ही चेतना में जागरण आता है, स्मृतियां सुरक्षित रहती है। मन संचालित होता रहता है तथा शरीर का रक्षण व क्षरण होता रहता है। इसी से हमारे प्राणों की रक्षा होती रहती है। उक्त में से एक भी जगह दिक्कत है तो सभी जगह उससे प्रभावित होती है और इसी से शरीर, मन तथा चेतना भी रोग और शोक से? घिर जाते हैं। चरबी-मांस, आंत, गुर्दे, मस्तिष्क, श्वास नलिका, स्नायुतंत्र और खून आदि सभी प्राणायाम से शुद्ध और पुष्ट रहते हैं।

(1)व्यान : जो हवा चरबी तथा मांस का कार्य करती तथा उसी में स्थित रहती है उसे व्यान कहते हैं।
(2)समान : समान नामक संतुलन बनाए रखने वाली वायु का कार्य हड्डी में होता है। हड्डियों से ही संतुलन बनता भी है।
(3)अपान : अपान का अर्थ नीचे जाने वाली वायु। यह शरीर के रस में होती है।
(4)उदान : उदान का अर्थ ऊपर ले जाने वाली वायु। यह हमारे स्नायुतंत्र में होती है।
(5)प्राण : प्राण हमारे शरीर का हालचाल बताती है। यह वायु मूलत: खून में होती है।


वायु की गति : जब हम सांस लेते हैं तो वायु प्रत्यक्ष रूप से हमें तीन-चार स्थानों पर महसूस होती है। कंठ, हृदय, फेंफड़े और पेट। मस्तिष्क में गई हुई वायु का हमें पता नहीं चलता। कान और आंख में गई वायु का भी कम ही पता चलता है। श्वसन तंत्र से भीतर गई वायु अनेकों प्रकार से विभाजित हो जाती है, जो अलग-अलग क्षेत्र में जाकर अपना-अपना कार्य करके पुन: भिन्न रूप में बाहर निकल आती है। यह सब इतनी जल्दी होता है कि हमें इसका पता ही नहीं चल पाता।
हम सिर्फ इनता ही जानते हैं कि आॅक्सिजन भीतर गई और कार्बनडॉय आॅक्सॉइड बाहर निकल आई, लेकिन भीतर वह क्या-क्या सही या गलत करके आ जाती है इसका कम ही ज्ञान हो पाता है। सोचे आॅक्सिजन कितनी शुद्ध थी। शुद्ध थी तो अच्छी बात है वह हमारे भीतरी अंगो को भी शुद्ध और पुष्ट करके सारे जहरीले पदार्थ को बारह निकालने की प्रक्रिया को सही करके आ जाएगी।


तेज प्रवाह से नष्ठ होते हैं बैक्टीरियायदि हम जोर से सांस लेते हैं तो तेज प्रवाह से बैक्टीरिया नष्ट होने लगते हैं। कोशिकाओं की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है ‘बोन मेरो’ में नए रक्त का निर्माण होने लगता है। आंतों में जमा मल विसर्जित होने लगता है। मस्तिष्क में जाग्रति लौट आती है जिससे स्मरण शक्ति दुरुस्त हो जाती है।
न्यूरॉन की सक्रियता से सोचने समझने की क्षमता पुन: जिंदा हो जाती है। फेंफड़ों में भरी-भरी हवा से आत्मविश्वास लौट आता है। सोचे जब जंगल में हवा का एक तेज झोंका आता है तो जंगल का रोम-रोम जाग्रत होकर सजग हो जाता है। सिर्फ एक झोंका। कपालभाती या भस्त्रिका प्राणायाम तेज हवा के अनेकों झोंके जैसा है। बहुत कम लोगों में क्षमता होती है आँधी लाने की। लगातार अभ्यास से ही आंधी का जन्म होता है। दस मिनट की आँधी आपके शरीर और मन के साथ आपके संपूर्ण जीवन को बदलकर रख देगी। हृदय रोग या फेंफड़ों का कोई रोग है तो यह कतई न करें।

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नियंत्रित करो सांसे: लोगों की सांसें उखड़ी-उखड़ी रहती है, अराजक रहती है या फिर तेजी से चलती रहती है। उन्हें पता ही नहीं चलता की कैसे चलती रहती है। क्रोध का भाव उठा तो सांसे बदल जाती है। काम वासना का भाव उठा तब सांसे बदल जाती है। प्रत्येक भाव और विचार से तो सांसे बदलती ही है, लेकिन हमारे खान-पान, रहन-सहन से भी यह बदलती रहती है। अभी तो सांसें निर्भर है उक्त सभी की गति पर, लेकिन प्रणायाम करने वालों की सांसे स्वतंत्र होती है। गहरी और आनंददायक होती है। प्राणायाम करते समय तीन क्रियाएं करते हैं- 1. पूरक 2. कुम्भक 3. रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं।

(1) पूरक:- अर्थात नियंत्रित गति से श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब भीतर खिंचते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।
(2) कुम्भक:- अंदर की हुई श्वास को क्षमतानुसार रोककर रखने की क्रिया को कुम्भक कहते हैं। श्वास को अंदर रोकने की क्रिया को आंतरिक कुंभक और श्वास को बाहर छोड़क पुन: नहीं लेकर कुछ देर रुकने की क्रिया को बाहरी कुंभक कहते हैं। इसमें भी लय और अनुपात का होना आवश्यक है।
(3) रेचक:- अंदर ली हुई श्वास को नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब छोड़ते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।
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गुणों से भरी गुड़ की भेली

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सर्दी के मौसम के खान-पान में गुड़ का अपना महत्व है। यह स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होने के साथ ही स्वादिष्ट भी होता है। सदिर्यों में गुड़ से बनाई गई खास सामग्री बच्चों और बुजुर्गों सबको अच्छी लगती है। इस मौसम में गुड़ का नियमित सेवन करने से सर्दी से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है। आयुर्वेद संहिता के अनुसार यह शीघ्र पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है। इसके अतिरिक्त गुड़ से बनी चीजों के खाने से इन बीमारियों में राहत मिलती है...


- गुड़ के साथ पकाए चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है। 
- गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा परेशान नहीं करता है। 
- जुकाम जम गया हो तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं। 
- गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
- भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं बनती है। 
- पांच ग्राम सौंठ, दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है। 
- गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। 
- पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास रोग से छुटकारा मिलता है। 
- बाजरे की खिचड़ी में गुड़ डालकर खाने से नेत्र-ज्योति बढ़ती है। 
- गुड़, सेंधा नमक, काला नमक मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
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हेल्थ टिप्स

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-शादी के पहले या बाद बहुत सी लड़कियां वजन बढ़ने के डर से परेशान रहती हैं। आप दिन की शुरुआत नींबू मिले गर्म पानी से करें। सूप या जूस लें। चीनी, आइसक्रीम, पेस्ट्री व जंकफूड आदि न लें। दिन की शुरुआत के लिए ब्रेकफास्ट जरूरी है। लो फैट मिल्क प्रोडक्ट्स लें। पानी की कमी न होने दें। खाने में सलाद बढ़ाएं। अल्कोहॉल व धूम्रपान से दूर रहें। खुद को फिजिकल ऐक्टिविटी बनाए रखें। 
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-स्मोकिंग करने से ही नहीं बल्कि स्मोकर्स के पास ज्यादा समय बिताने से भी वह सब नुकसान हो सकता है जो टोबैको से होता है। घर में स्मोकिंग करने वाला कोई मेबर हो तो या तो दरवाजे व खिड़कियां खोल दे या छत, बालकनी में जाकर ऐसा करे। कार में फैमिली या बच्चों के साथ हैं तो स्मोकिंग न करें। इससे निकला धुएं में 4000 से ज्यादा केमिकल होते हैं, जो कार के अंदर चिपक जाते हैं।


-महिलाओं को बार-बार झुककर काम नहीं करना चाहिए। खासकर मां बनने के बाद ज्यादा झुकने से कमर में प्रॉब्लम हो सकती है। कमर पर ज्यादा प्रेशर न डालें। कोई ऐसा एक्सर्साइज करें जों आपकी रीढ़ को ठीक रखे। भारी चीज उठाने के लिए तो ज्यादा झुकना हड्डी की बड़ी परेशान दे सकता है। शॉपिंग करते समय ट्रॉली का इस्तेमाल ठीक रहता है, न कि ज्यादा वजनी सामान लेकर घूमना।
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छोटी खबरें....

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दांतों का दुश्मन सोडा बचपन से सुनते आई होंगी कि सोडा दांत खराब कर देता है इसको ज्यादा मत पिया करो परंतु अब इस बात की पुष्टि डॉक्टरों ने भी कर दी है। नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रीशन एक्जामिनेशन सर्वे के अनुसार जो लोग दिन में तीन से चार बार सोडा पीते हैं उनके दांतों के खराब होने के चांसेज 62 प्रतिशत अधिक होते हैं। ऐसे व्यक्तियों में दांतों के टूटना, उनके पीलेपन व दांतों में गड्ढे पड़ने की संभावना अधिक हो जाती है।


तनाव से बचें आजकल तनाव या कुंठा होने का कोई सीधा कारण नहीं होता। घर से आॅफिस पहुंचने की चिंता, काम समय पर खत्म करने की चिंता, बस में भीड़-भाड़ की घबराहट या फोन कनेक्ट न हो पाने की चिड़चिड़ाहट बहुत सारी वजहें हैं जो व्यर्थ ही तनावग्रस्त कर देती हैं। इसका असर पूरी दिनचर्या पर पड़ता है। अब जानकारों ने इसका आसान हल बताया है कि अपने गुस्से व गुबार को अंदर दबा न रहने दें, बाहर निकालें। ऐसे काम करें जिससे आप तनाव वाली बातों को भुला सकें जैसे लंबी सैर पर जाएं, किसी मनोरंजक खेल को खेलें या फिर बागवानी में ध्यान लगाएं।


धीरे-धीर और चबाकर करें भोजनअगर आप मोटापे को लेकर परेशान हैं और अपना वजन कम करने के लिए जिम या हेल्थ सेंटर्स के चक्कर लगाने के अलावा डाइटिंग भी कर रही हैं तो अब आपके लिए एक खुशखबरी है। एक शोध से पता चला है कि घर बैठकर भोजन करते हुए भी आप अपने वजन पर काफी हद तक नियंत्रण रख सकती हैं। इसके लिए बस आपको पहले दस मिनट तक भोजन धीरे-धीरे और चबाकर खाना होगा। इसके तुरंत बाद आपका दिमाग वजन कम करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा और आप भूख से अधिक नहीं खाएंगी। इसका नतीजा कुछ ही दिनों में आपके सामने आ जाएगा।


दूर करें दुखद यादों कोअपनी अच्छी व मीठी यादों को याद कर आप अपने खुशगवार पलों को ताजा कर सकती हैं। इससे आपका खराब मूड तो सुधरेगा ही रक्तचाप भी नियंत्रित होगा, ऐसा शोधकर्ताओं का मानना है। जब भी कभी नेगेटिव थिकिंग हावी होने लगे तो प्लेजेंट मेमोरी की मदद लें। कैलिफोनिर्या में हुए अध्ययन के अनुसार ऐसी घटनाओं को सोच कर जिनसे आपका चेहरा तमतमा उठे या गुस्सा आने लगे, आपका ब्लड प्रेशर बढ़ाएगा, दिल का रोगी बनने में भी देर नहीं लगेगी। इसलिए दूर कीजिए उन दुखद यादों को और याद कीजिए खुशगवार पलों को
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फिटनेस -8 
पेट व कमर कैसे कम करें
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गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान, रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है, कमर मोटी हो जाती है और कूल्हे भारी हो जाते हैं। इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है। जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढ़ना मोटापे के मोटे लक्षण हैं।मोटापे से जहां शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है, वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ व्याधियां पैदा हो जाती हैं, लिहाजा मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता। बहुत कम स्त्रियां मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं। हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयां, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है। प्राय: प्रसूति के बाद की असावधानी और गलत आहार-विहार करने से स्त्रियों का पेट बढ़ जाया करता है। प्रसव के बाद 40 दिन तक पेट बांधकर रखने से पेट बड़ा नहीं हो पाता। पेट बांधने के बेल्ट बाजार में मिलते हैं। पहली कोशिश तो यही करना चाहिए कि पेट बढ़ने ही न पाए, क्योंकि एक बार पेट बढ़ जाने पर कम करना कठिन और समय साध्य कार्य हो जाता है। इसके लिए दो-तीन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

- प्राय: महिलाएं भोजन करके खूब पानी पिया करती हैं। भोजन के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता, बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है।
-आहार भूख से थोड़ा कम ही लेना चाहिए। इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता। पेट में गैस नहीं बने इसका खयाल रखना चाहिए। गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है। दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए।
-भोजन में शाक-सब्जी, कच्चा सलाद और कच्ची हरी शाक-सब्जी की मात्रा अधिक और चपाती, चावल व आलू की मात्रा कम रखना चाहिए।
-सप्ताह में एक दिन उपवास या एक बार भोजन करने के नियम का पालन करना चाहिए। उपवास के दिन सिर्फ फल और दूध का ही सेवन करना चाहिए।
- पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए। इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें। जब भाप उठने लगे, तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें। दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें। प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है। कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा।
-सुबह उठकर शौच से निवृत्त होने के बाद निम्नलिखित आसनों का अभ्यास करें या प्रात: 2-3 किलोमीटर तक घूमने के लिए जाया करें। दोनों में से जो उपाय करने की सुविधा हो सो करें।
-भुजंगासन, शलभासन, उत्तानपादासन, सर्वागास?, हलासन, सूर्य नमस्कार। इनमें शुरू के पांच आसनों में 2-2 मिनट और सूर्य नमस्कार पाँच बार करें तो पांच मिनट यानी कुल 15 मिनट लगेंगे। इन आसनों की विधि वेबदुनिया के योग चैनल से प्राप्त की जा सकती है।
-भोजन में गेहूँ के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें। इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ। इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएँ। इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा।
-प्रात: एक गिलास ठण्डे पानी में 2 चम्मच शहद घोलकर पीने से भी कुछ दिनों में मोटापा कम होने लगता है।
दुबले होने के लिए दूध और शुद्ध घी का सेवन करना बन्द न करें। वरना शरीर में कमजोरी, रूखापन, वातविकार, जोड़ों में दर्द, गैस ट्रबल आदि होने की शिकायतें पैदा होने लगेंगी।ऊपर बताए गए उपाय करते हुए घी-दूध खाते रहिए, मोटापा नहीं बढ़ेगा। इस प्रकार उपाय करके पेट और कमर का मोटापा निश्चित रूप से घटाया जा सकता है। ये सब उपाय सफल सिद्ध हुए हैं।
फिटनसे-8
एसिडिटी से करें बचाव
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लाएं खान-पान में सुधार
मुकेश चंद्रा एसिडिटी की समस्या आज एक आम बात हो गई है। इसका कारण गलत खान-पान, प्रदूषण, धूम्रपान, शराब का सेवन और चाय, कॉफी व कैफीनयुक्त पदार्थों का अधिक प्रयोग है। एसिडिटी होने पर पाचन विकार उत्पन्न हो जाते हैं, भोजन ठीक से नहीं पचता। इसके कारण घबराहट होती है, खट्टी डकारें आती हैं और गले में जलन-सी भी महसूस होती है।
एसिडिटी से बचाव के लिए सबसे जरूरी है खान-पान में सुधार। आजकल समयाभाव के चलते जल्दी में बिना चबाए भोजन निगल जाने के कारण पाचन क्रिया सही ढंग से नहीं हो पाती, इसलिए भोजन हमेशा चबा-चबाकर खाना चाहिए, ताकि वह अच्छी तरह से लार में मिल जाए। यही नहीं, भोजन भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए। आजकल अधिकांश लोगों को बाहर के खाने का शौक हो गया है और वे बाजार में मिर्च-मसाले व अधिक वसायुक्त भोजन करते हैं। ऐसा भोजन भी एसिडिटी पैदा करता है। खाना खाने के बाद अगर आप टहलें तो खाना पच जाता है। रोजाना 8-10 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए। समयानुसार भोजन करें। असमय किया गया भोजन भी एसिडिटी उत्पन्न करता है।

फिटनेस-7


गुर्दे को मजबूत बनाए रखने के लिए 
करें योगासन
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शरीर का महत्वपूर्ण अंग गुर्दा है, जिसे अंग्रेजी में किडनी कहा जाता है। 150 ग्राम वजनी गुर्दे का आकार किसी बीज की भांति होता है। गुर्दा रक्त में से जल और बेकार पदार्थों को अलग करता है। शरीर में रसायन पदार्थों का संतुलन, हॉर्मोन्स छोड़ऩा,रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है विटामिन-डी का निर्माण करना, जो मनुष्य की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है। लगातार दूषित पदार्थ खाने, दूषित जल पीने और नेफ्रॉन्स के टूटने से गुर्दे के रोग उत्पन्न होते हैं। इसके टूटने के कारण गुर्दे शरीर से व्यर्थ पदार्थों को निकालने में अक्षम हो जाते हैं। गुर्दे के रोग का बहुत समय तक पता नहीं चलता, लेकिन जब भी कमर के पीछे दर्द उत्पन्न हो तो इसकी जांच करा लेनी चाहिए। गुर्दे के गंभीर रोगों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। 
एक्यूट रीनल फेल्योर- इसमें गुर्दे आंशिक अथवा पूर्ण रूप से काम करना बंद कर देते हैं, परंतु लगातार उपचार द्वारा यह धीरे-धीरे पुन: कार्यशील हो जाते हैं।

क्रोनिक रीनल फेल्योर-- इसमें नेफ्रॉन्स की अत्यधिक मात्रा में क्षति हो जाती है जिसके कारण गुर्दों की कार्यक्षमता उत्तरोत्तर कम होती चली जाती है। उक्त दो तरह के रोगों के निदान के लिए सबसे पहले रक्त यूरिया नाइट्रोजन तथा किरेटिनाइन का रक्त परीक्षण करवाना चाहिए। मूत्र जांच भी करा लेनी चाहिए क्योंकि इससे यह पता चलता है कि गुर्दों की कार्यशीलता और कार्यक्षमता कैसी है। जब गुर्दा किसी रोग से रोगग्रस्त हो जाता है तो मूत्र संबंधी तकलीफ शुरू हो सकती है। आंखों के नीचे सूजन या पैरों के पंजों में सूजन हो सकती है। पाचन क्रिया भी कमजोर पड़ जाती है।


योग के फायदे 
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1.खड़े होकर किए जाने वाले आसन: अंर्धचंद्रासन, त्रिकोणासन और पश्चिमोत्तनासन।
2.बैठकर किए जाने वाले आसन: उष्टासन, योगमुद्रा और मार्जायासन।
3.लेटकर किए जाने वाले आसन : सर्पासन, धनुरासन और हलासन।

उपरोक्त आसन न भी कर सकते हैं तो सूर्यनमस्कार और खड़े रह कर किए जाने वाले अंग संचालन को नियमित करें। अंगसंचालन (सूक्ष्म व्यायाम) जिसमें कमर का अधिक व्यायाम होता हो, वह करें। बहुत तेजी से फायदे के लिए योग के सभी बंधों को सीख लें। बंधत्रय और अर्थमत्येंद्रासन का नियमित अभ्यास करें।
इसके अलावा नियंत्रित आहार से खराब किडनी को ठीक किया जा सकता है। आप नियमित नींबू, आलू का रस और हमेशा शुद्ध जल का अधिक से अधिक सेवन करें। भोजन में मसालेदार भोज्यपदार्थ का सदा के लिए त्याग कर दें। तनाव और प्रदूषण से दूर रहें। अंधर्चंद्रासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तनासन, उष्टासन, योगमुद्रा, मार्जायासन, सर्पासन, धनुरासन और हलासन के अलावा आप चाहें तो वृक्षासन, ताड़ासन, पादस्तासन, आंजनेय आसन और विरभद्रासन भी कर सकते हैं। यदि आप गुर्दे के रोग से ग्रस्त हैं तो उपरोक्त आसन किसी योगाचार्य से पूछ कर उसके सान्निध्य में ही करें। डॉक्टर की सलाह लें। 

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फिटनसे-6
पेनकिलर्स गोलियां घातक भी हैं 
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दर्द से राहत पाने के लिए अक्सर हम पेनकिलर्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन दर्द में तुरंत राहत देने वाली इन जादुई गोलियों की मार बड़ी भयानक होती है। आप पेन किलर का मनमाना प्रयोग कर रहे हैं तो मानकर चलिए आप एक बड़े दर्द को न्यौता दे रहे हैं। इसलिए आइंदा इन्हें लेने से पहले इसके फायदे-नुकसान पर भी गौर कर लें...
दर्द होने पर हम बिना सोचे-समझे तुरंत पेनकिलर ले लेते हैं लेकिन यह नहीं सोचते कि इसके दुष्प्रभाव खतरनाक हो सकते हैं। दर्दनिवारक दवा के इस्तेमाल से दर्द में तात्कालिक लाभ तो मिल जाता है लेकिन इसका शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और मूल कारण उसी तरह से बरकरार रहता है। रासायनिक बनावट के आधार पर कई तरह की पेनकिलर्स बाजार में उपलब्ध हैं। कुछ पेनकिलर्स नशीली नहीं होतीं, यानी उनको लेने से हम उनके आदी नहीं होते। लेकिन कुछ ऐसी पेनकिलर्स भी हैं, जिनका लगातार सेवन करने से दिमाग व शरीर इन पर निर्भर करने लगते हैं और हम उनके गुलाम बन जाते हैं। दोनों तरह की पेनकिलर्स खतरनाक हो सकती हैं, अगर इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बगैर किया जाए या डॉक्टरी सलाह से कहीं अधिक समय के लिए किया जाए। पेनकिलर्स के बार-बार सेवन करने से व्यक्ति इनका आदी हो जाता है। नतीजा यह होता है कि एक साधारण दर्द को ठीक करते-करते व्यक्ति इन गोलियों के एडिक्शन की खतरनाक बीमारी के चंगुल में फंस जाता है। कुछ समय तक लगातार पेनकिलर्स लेने के पश्चात अगर इन्हें एकदम बंद कर दिया जाए, तो भी सेहत संबंधी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, जैसे सारे शरीर में असहनीय दर्द, घबराहट, बेचैनी, गुस्सा, दस्त, लगातार छींकें आना, नींद न आना, आंखों और नाक से पानी निकलना इत्यादि।


ब्लड प्रेशर या हॉर्टअटैक का भी खतरालोग तुरंत राहत के लिए घर में रखी पेनकिलर का धड़ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन यह तुरंत राहत के साथ अन्य कई बीमारियों को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। पेनकिलर्स का ज्यादा इस्तेमाल दर्द की दवा बनने के बजाय किसी बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है। कुछ लोग जरूरत से अधिक मात्रा में दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करने लगते हैं। ऐसे में स्थिति सुधरने की जगह और खराब होती जाती है। इसके साइड इफेक्ट इतने ज्यादा हैं कि लगातार इसका इस्तेमाल घातक साबित हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर- ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है, जो हृदयाघात तथा अन्य समस्याओं का कारण बनता है।


पेट में सूजन - पेन किलर यानी दर्द निवारक दवा पेट के अल्सर की बड़ी वजह बन रही है। पेट के अंदर जख्म बनना (गैसट्राइटिस ), उनसे खून का रिसाव, कयादा एसिड बनना, छाती में जलन जैसी परेशानियां हो जाती हैं। इनके चलते पेट में दर्द, खट्टे डकार, उल्टियां जैसे लक्षण पैदा हो जाते हैं।

जिगर की सूजन- जिगर (लिवर) के सेल्स का खत्म होना, इसके चलते भूख का कम होना, खाना हकाम न कर पाना जैसी परेशानियां।

किडनी प्रॉब्लम्स- पेनकिलर्स किडनी को बहुत नुक्सान पहुंचाती हैं। जिंदगी में एक हजार से कयादा पेनकिलर्स खाने से किडनी खराब हो सकती है। किडनी के सैल्स को नुक्सान पहुंचता है, जिससे धीरे-धीरे किडनी का फंक्शन कमजोर होता जाता है। इसे एनलजैसिक नैफरोपैथी कहा जाता है।

ब्लड डिस्क्रेसिया- कुछ पेनकिलर्स से खून की रचना में बदलाव आने लगते हैं, जिसे ब्लड डिस्क्रेसिया कहा जाता है। यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

दमा पर असर- कुछ पेनकिलर्स दमा भी बढ़ा सकती हैं।

मानसिक रोग- मानसिक रोग हो जाते हैं, जैसे मन की उदासी, याददाशत कमजोर होना, वहम व शक की बीमारी। कई बार कन्फ्यूकान और भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

सिर दर्द और माइग्रेन- दर्दनिवारक गोलियां सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या से निजात दिलाने की जगह चीजों को और खराब कर देती हैं।


क्या सावधानी बरतें?
जहां तक संभव हो, बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स न लें और न ही इनकी ओवरडोज ही लें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किसी दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। पेनकिलर्स तब ही लें, जब बेहद कारूरी हो। थोड़ा-सा दर्द होने पर मेडीसन लेने की आदत को छोड़ दें। पेनकिलर्स से बचने के लिए दर्द वाले हिस्से पर ठंडी या गर्म सिकाई की जा सकती है। पेनकिलर के स्प्रे या जैल से भी दर्द में राहत मिल जाती है। सिर दर्द में बाम लगाएं। दर्द अगर गैस की वजह से है, तो गैस का चूर्ण ले लें। 

- ब्लड प्रैशर, डायबिटीका, किडनी और दिल के मरीजो को डॉक्टर की सलाह के बगैर कभी कोई भी पेनकिलर अपनी मर्जी से नहीं लेनी चाहिए।
-पेनकिलर्स खाली पेट बिलकुल न लें। नॉन नारकोटिक्स पेनकिलर्स खाली पेट लेने से किडनी, लिवर और पेट को नुक्सान पहुंच सकती हैं।
- पेनकिलर लेने के कारण अगर पेट दर्द होता है, तो सबसे पहले उस पेनकिलर का इस्तेमाल बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें।
- पेनकिलर्स जब भी खानी हो, इसे हमेशा पानी से ही लें।


क्या है डॉक्टर की सलाह?

-अगर किसी व्यक्ति को पेनकिलर्स लेने की लत लग जाए, तो उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाएं।
- मरीका को दवाओं के कोर्स के कारिए नशामुक्त किया जाता है। इस कोर्स को बिना अस्पताल में दाखिल हुए भी लिया जा सकता है।
- मरीका को दोबारा नशे का सेवन करने से हटाने के लिए कुछ दवाएं देनी पड़ती हैं और साथ ही काऊंसलिंग के लिए भी जाना पड़ता है।
- नशे के सेवन से हुए नुक्सानों को ठीक करने के लिए 4-6 महीने तक दवा लेनी पड़ती है।
- इसलिए अगली बार पेनकिलर खाने से पहले सोचें। साथ ही डॉक्टरी सलाह के बगैर भी पेनकिलर न खाएं।

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फिटनसे-5

चर्बी घटानी है तो लीजिए भरपूर नींदयदि डायटिंग और जिम में पसीना बहाने के बावजूद वजन बताने वाली मशीन की सुई पीछे नहीं खिसक रही है तो रात को बढ़ियाा नींद लीजिए। एक अध्ययन में पाया गया है कि रातभर मीठी नींद सोने से भी मोटापा कम होता है। एक नए शोध के अनुसार, रात को अच्छी नींद नहीं आने पर वजन बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसके चलते नींद के मारे लोगों को मीठी और वसायुक्त चीजें खाने की ललक बढ़ती है। नींद के मारे लोगों को थकान और एकाग्रता की कमी से भी जूझना पड़ता है। इससे एक दुष्चक्र पैदा हो जाता है। डेली एक्सप्रेस में यह खबर प्रकाशित हुई है कि नींद की कमी से मीठी चीजों को मन ललचाता है और अपौष्टिक खाना खाने के बाद शरीर पर और चर्बी चढ़ती है।
अमेरिका के चिल्ड्रंस हास्पिटल आफ ईस्टर्न ओंतारियो रिसर्च इंस्टीच्यूट और लावाल यूनिवसिर्टी क्यूबेक के शोधकर्ताओं ने पाया कि साढ़े पांच घंटे से लेकर साढ़े आठ घंटे तक की बढिया नींद और पौष्टिक आहार लेने से वजन कम करने में सहायता मिलती है। शोधकर्ता डॉ. जीन फिलिप ने कहा कि वजन कम करने का साधारण फॉर्मूला यह नहीं है कि कम खाइए, अधिक चलिए और खूब सोइए। वजन कम करने के लिए खानपान के साथ ही नींद को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता इसलिए भरपूर नींद लें और वजन घटाए।



फिटनेस -4
पौष्टिक आहार लेने से निखरेगी त्वचा
मुकेश चंद्रा‘‘अगर आप लाख क्रीम और लोशन लगा कर थक चुकी हैं और फिर भी उसका रिजल्ट सामने नहीं आता तो अभी से ही पौष्टिक आहार लेना शुरू कर दें। यह तो हम सब जानते हैं कि अच्छा आहार खाने से न केवल हमारे स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है, बल्कि हमारी त्वचा पर भी उसका खास प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि कौन से हैं वे आहार-’’


खाइए ये आहार : पानी: आपको अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए, क्योंकि पानी ही स्किन के लिए एक सर्वश्रेष्ठ औषधि है। यह न केवल आपको रिफ्रैश करता है बल्कि आपकी त्वचा को एक अद्भुत चमक प्रदान करता है।
कोको : अगर आपकी स्किन धूप की वजह से जल गई हो तो उस डैमेज को ठीक करने के लिए सुबह-शाम केवल एक कप कॉफी पीजिए, लेकिन याद रहे कि ज्यादा कॉफी पीने से डीहाइड्रेशन का भी खतरा रहता है। कॉफी पीने के अलावा आप इसे अपने बाथ टब में भी डाल कर नहा सकती हैं। इसके लिए 1 कप कोको पाऊडर लेकर 1 कप फैट फ्री सूखा मिल्क लेकर बाथटब में मिला लें।
दही : इसमें बहुत प्रोटीन पाया जाता है जो कि आपकी स्किन को जवां बनाने में मदद करता है। इसको न केवल खाया ही जाता है, बल्कि इसको चेहरे पर लगाने से भी डैड स्किन साफ हो जाती है और चेहरे के पोर्स भी खुल जाते हैं।
बादाम : अगर आपको मेवा खाने का शौक है तो केवल बादाम ही खाएं, क्योंकि इसमें कैटालेज पाया जाता है जो कि एक प्रकार का एंजाइम होता है। यह ग्रेइंग प्रोसेस को रोकता है और त्वचा को जवान बनाए रखने में मदद करता है।


फिटनसे-3
सुंदरता से बढ़ेगा कांफिडेंस

‘‘आजकल फैशन का जमाना है। हर कोई स्मार्ट दिखने के लिए हमेशा चमकते और दमकते रहना चाहता हैं। बदलते दौर के साथ सुंदर दिखना हर किसी की चाहत है। इससे कांफिडेंस भी पैदा होता है। आप हंसते-हंसते कई कामों को आसानी से कर सकती हैं। आइए हम आपको बताते हैं। सुंदर रहने के टिप्स जिससे आपको मिल सकती है एक नई पहचान। इसके लिए आपको एक नियम बनाना पड़ेगा। रोज अगर नियमों के हिसाब से चलें आप काफी सुंदर दिखेंगे और आप में कांफिडेंस बढ़ेगा।’’ 

नियम नम्बर एक : हमेशा काजल और लिपलाइनर लगाएं। काजल भारतीय स्त्री की खूबसूरती में हमेशा ही चार चांद लगाता है। यह आंखों का आकर्षण बढ़ाने का आसान तरीका है। इसी तरह लिप लाइनर भी लगाना जरूरी होता है, क्योंकि यह लंबे समय तक टिकता है और फैलता भी नहीं है। अगर आप अपनी पसंदीदा लिपस्टिक लगा रही हैं तो साथ में लिपलाइनर लगाना न भूलें

नियम नम्बर 2 : सनस्क्रीन जरूर लगाएं। सनस्क्रीन सौंदर्य बढ़ाने में मदद तो नहीं करती बल्कि त्वचा को धूप की तेज अल्ट्रावॉयलेट किरणों से सुरक्षा जरूर प्रदान करती है। धूप से बचने के लिए हर 4 घंटे में सनस्क्रीन का प्रयोग करना जरूरी है। अगर आप इसका प्रयोग नहीं करेंगी तो संवाली होने का डर भी रहेगा। साथ ही ब्राऊन स्पॉट और झुरिर्यां भी इन्हीं के कारण होती हैं। इसलिए चाहे घर पर रहें या बाहर निकलें लेकिन सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

नियम नम्बर 3 : हर दूसरे दिन शैंपू करें। भारतीय युवतियों की सबसे आम समस्या है बालों का रूखापन, क्योंकि हर दूसरी स्त्री कामकाजी है और चारों तरफ प्रदूषण का सामना, धूप का प्रकोप, काम का बोझ और स्ट्रैस का सामना करती हैं। सबसे बड़ी बात यह कि स्त्री चाहे किसी भी उम्र की हो, मेकअप किया हो या नहीं लेकिन जिस दिन शैंपू करती है, उस दिन वह बेहद सुंदर दिखती है। इसलिए शैंपू करने में कोताही न बरतें।

नियम नम्बर 4 : रोजाना भरपूर नींद लें। रोजाना निश्चित समय पर ही सोएं। अगर आप रात में सोएंगी नहीं तो दिन-भर आप थकी-थकी सी रहेंगी। टिश्यू और सैल्स को रेजुवेनेट करने के लिए नींद बहुत जरूरी है। त्वचा को रेजुवेनेट करने के लिए रात में एक अच्छी नाइट क्रीम लगाएं। रेटिनॉल बेस्ड क्रीम चुनें जो पिग्मैंटेशन, पोर्स और बारीक लकीरों को कम करने में मदद करते हैं।

नियम नम्बर 5 : त्वचा को दमकने दें। त्वचा का एक्सफोलिएशन सबसे जरूरी है। प्रदूषण भरे वातावरण में डैड सैल्स की समस्या आम होती है। एक्सफोलिएट इस्तेमाल करने से त्वचा के मृत कोश भी निकल जाते हैं और त्वचा रेशम सी कोमल और चमकदार हो जाती है।

नियम नम्बर 6 : मेहंदी और आॅयल ट्रीटमैंट। रेशमी बाल और चमकदार त्वचा हर स्त्री का गहना होते हैं। इसलिए हफ्ते में एक बार हॉट आॅयल मसाज बेहद जरूरी है। स्कैल्प में तेल जज्ब हो जाए इसलिए मसाज के बाद बालों में गर्म तौलिया लपेटें। मसाज के लिए कोकोनट आॅयल का ही इस्तेमाल करें। आॅलिव आॅयल बालों के लिए हैवी हो सकता है। इसके अलावा महीने में एक बार मेहंदी ट्रीटमैंट भी लें।

नियम नम्बर 7 : एक अच्छा हेयर कट बनाएं। जब कुछ समझ न आए तो एक अच्छा हेयर कट लें लेकिन अपनी पसर्नैल्टी और चेहरे पर सूट करने वाला। प्रत्येक दो-चार माह में हेयर कट जरूरी है। बिखरे, उलझे, दोमुंहे, बेजान बाल आपके व्यक्तित्व के आकर्षण को खत्म कर देते हैं। एक अच्छा हेयर कट आपकी पर्सनालिटी में वॉल्यूम भर देता है।

नियम नम्बर 8 : सेहत का हमेशा रखें ख्याल। स्वास्थ्य सही हो तो सौंदर्य दोगुना हो जाता है। स्वास्थ्य तभी सही रह सकता है जब आप अपना ख्याल रखें। सही वक्त पर सही, संतुलित एवं पौष्टिक आहार लें। हफ्ते में कम से कम 5 बार 30 से 40 मिनट तक एक्सरसाइज करें। वजन पर नियंत्रण रखने के लिए जंक फूड, आॅयली चीजें और मिर्च-मसालों से दूर रहें। एक्सरसाइज से रक्त संचार बढ़ता है और चेहरे पर ग्लो आता है।


फिटनेस-2 
प्रेग्नेंसी में भी खूबसूरती
एक महिला के जीवन में प्रेग्नेंसी से खूबसूरत अहसास और कोई नहीं होता। यह उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर होता है। इसलिए उनको सलाह है कि इसे इंजॉय जरूर करें और इसलिए हमेशा खुश रहने की कोशिश भी करें और साथ ही अपनी खूबसूरती की भी हिफाजत करें। प्रेग्नेंसी के नौ महीने एक ऐसा मुश्किल दौर होता है जब हर महिला के मन में यह दुविधा बनी रहती है कि वह इस दौरान ब्यूटी ट्रीटमैंट लें या नहीं। उन्हें हरदम यही डर सताता रहता है कि कहीं अपनी खूबसूरती बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधनों से उनके होने वाले शिशु को कोई नुक्सान तो नहीं पहुंचेगा। प्रेग्नेंसी और ब्यूटी से जुड़े कई मिथक हैं, जिन्हें दूर करना बहुत जरूरी है।

फेशियलकुछ महिलाओं का मानना है कि प्रेग्नेंसी में स्किन बेहद सेंसिटिव हो जाती है, इसलिए इस दौरान फेशियल नहीं करवाना चाहिए लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान भी चेहरे के रंग-रूप को निखारने के लिए फेशियल कराने में कोई नुक्सान नहीं है। महीने में एक बार फेशियल करवाएं। इससे स्किन क्लीन दिखेगी और ग्लो करेगी लेकिन अगर आप चाहती हैं कि आपकी स्किन को सभी न्यूट्रिशंस मिलें, तो बेहतर होगा कि फेशियल में इस्तेमाल होने वाली क्रीम अच्छी कंपनी की होनी चाहिए। आपके नॉर्मल प्रोडक्ट्स जरूरी नहीं कि प्रेग्नेंसी के दौरान भी आपको सूट करें। इसलिए प्रेग्नेंसी में अपनी स्किन को सूट करने वाले प्रोडक्ट्स फाइंड करें।


हेयर कलरआपने कई बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि अगर प्रेग्नेंट हैं, तो हेयर कलर इस्तेमाल न करें। अगर आप बालों को कलर करवाती हैं, तो प्रेग्नेंसी में भी आप हेयर कलर इस्तेमाल कर सकती हैं और इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर नहीं पड़ता लेकिन प्रेग्नेंसी में हेयर कलर कराने में विशेष सावधानी बरतें। यदि आपको इससे एलर्जी की शिकायत हो तो इस दौरान हेयर कलर न कराएं। वैसे बेहतर तो यही रहेगा यदि आप इस दौरान केमिकल रहित हेयर कलर का इस्तेमाल करें। हेयर कलर इस्तेमाल करने से पहले अपने फिजिशियन की राय जरूर ले लें। दरअसल, वह आपको सही हेयर कलर के बारे में गाइड कर देंगी।


अरोमा थेरेपीमिथक है कि प्रेग्नेंसी में मसाज करवाने से दर्द बढ़ सकता है लेकिन यह सही नहीं है। मसाज से थकान और बॉडी पेन दोनों से राहत मिलती है। प्रेग्नेंसी के दौरान स्किन पर काफी प्रेशर होता है खासकर पेट और उसके आसपास का हिस्सा। किसी जैल या सॉफ्ट क्रीम से नाभि के आसपास मसाज करें। इससे स्किन से प्रैशर रिलीज होगा और स्ट्रैच मार्क्स से भी बचाव होगा। प्रेग्नेंसी के दौरान अरोमा थैरेपी लेने से कोई नुक्सान नहीं है। प्रेग्नेंसी के दौरान भी मसाज करवाई जा सकती है। आप केरला आयुर्वेदिक मसाज भी करवा सकती हैं, लेकिन मसाज करवाते समय इस बात का विशेष ख्याल रखें कि मसाज हेतु ताकत व दबाव का बहुत कम इस्तेमाल किया जाए अर्थात हल्के हाथों से मसाज की जाए। आप स्पा में जाकर अपनी पसंद का बॉडी रैप भी ले सकती हैं। इससे आप रिलैक्स हो जाएंगी। गमिर्यों के लिए चॉकलेट या जिंजर रैप अच्छे माने जाते हैं।


मैनीक्योर-पैडीक्योरप्रेग्नेंसी में अमूमन पैरों में दर्द और सूजन हो जाती है। इसलिए जब भी ज्यादा थकान महसूस करें तब आप मैनीक्योर और पैडीक्योर करवा सकती हैं। इससे थकान और दर्द से राहत मिलेगी। आप चाहें तो स्पा मैनीक्योर-पैडीक्योर भी करवा सकती हैं। इसमें आम मैनीक्योर-पैडीक्योर की तरह फाइलिंग, स्क्रबिंग और डैड क्यूटिकल्स को हटाने के अलावा पैरों और हाथों के लिए मास्क स्क्रब और स्प्रे भी दिया जाता है।


स्ट्रैच मार्क्स से बचावप्रेग्नेंसी के बाद कमर और पेट पर स्ट्रैच मार्क्स पड़ जाते हैं। स्ट्रैच मार्क्स का कारण है उन टिश्यू का फट जाना जो त्वचा को खिंचने में मदद करते हैं। कई बार हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से भी स्ट्रैच मार्क्स होने लगते हैं। कई महिलाओं को वातावरण में आए बदलावों के चलते रिएक्शन के रूप में स्ट्रैच मार्क्स होते हैं। जिन महिलाओं की त्वचा रूखी व बेजान होती है, उन्हें स्ट्रैच मार्क्स होने के चांसेज ज्यादा होते हैं। इसलिए ऐसी डाइट का सेवन करें जिसमें विटामिन ई और विटामिन सी भरपूर मात्रा में हों क्योंकि ये कोशिका निर्माण की प्रक्रिया को तेज करते हैं। स्ट्रैच मार्क्स वाले हिस्से में हर रोज विटामिन ई युक्त तेल से अच्छी तरह मसाज करें। अगर इन सब उपायों और इलाज के बावजूद भी आपके स्ट्रैच मार्क्स ठीक नहीं हो रहे हों तो आप लेजर ट्रीटमैंट करवा सकती हैं, मगर इससे पहले डॉक्टर्र से कंसल्ट जरूर करें।


अपनाएं ये टिप्स-प्रेग्नेंसी में स्किन सेल्स में बदलाव की वजह से जरूरी है कि स्किन को नॉर्मल से ज्यादा नरिश और मॉइश्चराइज करें। इससे स्किन को हैल्दी रखा जा सकता है। रेगुलर स्किन केयर रूटीन को फॉलो करें। रोजाना सुबह चेहरा धोने के बाद हल्का-सा मॉइश्चराजर लगाएं, फिर मेकअप करें। रात को सोने से पहले मेकअप साफ करना कभी न भूलें। जब भी चेहरा धोएं तो अच्छे मॉइश्चराइजिंग बॉडी लोशन का इस्तेमाल करें। इससे ड्राई इफैक्ट से बचाव होगा।


-स्किन के नैचुरल आॅयल को प्रोटैक्ट करने के लिए परफ्यूम्ड सोप का इस्तेमाल अवॉइड करें। साबुन स्किन से नैचुरल आॅयल चुरा लेता है। इसकी बजाय क्लींजर यूज करें, जो डीप क्लीजिंग करें। यह जरूरी आॅयल्स को मेंटेन रखता है, जिससे आपकी स्किन ग्लोइंग बनी रहती है।
-प्रेग्नेंसी के वक्त कई महिलाओं की स्किन काफी आॅयली हो जाती है। इसके लिए हाई क्वालिटी का फेशियल क्लींजर का इस्तेमाल करें।
-फेस की स्किन बहुत डैलीकेट होती है इसलिए इसे रगड़ कर कभी साफ न करें। रब करने से हाइपर-पिग्मेंटेशन हो सकता है। पोंछते समय भी हल्के हाथ से पोंछें।
-प्रेग्नेंसी के दौरान स्किन पिग्मैंटेशन में बदलाव हो जाता है जिसकी वजह से सनबर्न और टैनिंग आसानी से हो जाता है। यूवी (अल्ट्रा वॉयलैट) फिल्टर वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। अपने चेहरे, बांहों, हाथों और पैरों का खास ख्याल रखें।
-पानी के कॉन्टैक्ट में ज्यादा समय तक न रहें। पानी स्किन को डिहाइड्रेट कर देता है, जिससे स्किन डल लगने लगती है। इसलिए नहाने में ज्यादा वक्त न लगाएं।
- प्रेग्नेंसी के दौरान कई बार ज्यादा लंबे बालों की केयर करनी मुश्किल हो जाती है। लंबे बालों के खराब होने का चांस ज्यादा होता है, जैसे बालों का सफेद होना, झडऩा या फिर उनका दोमुंहा होना। इसलिए बालों की सही ग्रोथ के लिए इनकी ट्रिमिंग कराती रहें।
-अच्छा खान-पान भी आपकी लुक्स को प्रभावित करता है। चूंकि प्रेग्नेंसी के शुरूआती दौर में नॉजिया की समस्या ज्यादा होती है। इसलिए जो पसंद हो वही खाएं। हर दो घंटे के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाएं। बाहर की चीजें खाने से बचें। प्रेग्नेंसी के दूसरे चरण में अपने खान-पान में प्रोटीन युक्त चीजों जैसे दाल, पनीर, अंडा और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें।
- डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी दवाएं एक निश्चित स्थान पर रखें। सिर दर्द और जुकाम जैसी समस्याओं के लिए खुद ही कोई दवा न लें। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें।
- अगर आप जॉब करती हैं तो लगातार एक ही मुद्रा में न बैठें। दो-तीन घंटे के अंतराल पर अपनी सीट से उठ कर थोड़ी देर के लिए टहलें।
- हेल्थ और चाइल्ड केयर से जुड़ी अच्छी किताबें पढ़ें। मनपसंद म्यूजिक सुनें। इससे मन प्रसन्न रहता है और यही खुशी के भाव चेहरे पर झलकते हैं।

ये हैं फायदे

- प्रेग्नेंसी के दौरान स्त्री का एक्टिव रहना न केवल मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए अच्छा होता है, बल्कि इससे डिलीवरी में भी आसानी होती है। 
-प्रेग्नेंसी के दौरान अगर आप खुश और एक्टिव रहेंगी तो नॉजिया, थकान और पैरों के दर्द जैसी समस्याओं की ओर आपका ध्यान नहीं जाएगा। इससे आपको तनावमुक्त रहने में मदद मिलेगी।
मुकेश चंद्रा


फिटनेस-1
अपने लाडलों का रखें ख्याल

‘मई, जून यानी स्कूलों में गमिर्यों की छुट्टियां। इन महीनों में पड़ने वाली गर्मी वैसे भी सबसे खतरनाक मानी जाती है। खासकर बच्चों के लिए तो गमिर्यों की तेज धूप और गर्म लू काफी तकलीफदेह होती है।’
गर्मी अपने पूरे शबाब पर आ चुकी हैं और गर्मी की छुट्टियों के ये दो महीने बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए काफी कठिन होते हैं। ये महीने अपने साथ बहुत सी परेशानियां और बीमारियां लेकर आते हैं। बच्चे हैं तो छुट्टियों में खेलेंगे भी और घूमें-फिरेंगे भी। ऐसे में उन्हें कई दिक्कतें आ सकती हैं। लेकिन आपकी जरा सी सावधानी और देखभाल आपके बच्चे की गमिर्यों को भी मजेदार बना सकती है।
एक हॉस्पीटल की सीनियर कंसल्टेंट कहती हैं कि तापमान के बढ़ने से बैक्टीरिया और फंगस अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिस कारण कई संक्रमण हो सकते हैं। बच्चों में चेस्ट एलर्जी, नेजल एलर्जी, स्किन एलर्जी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, डायरिया और चिकन पॉक्स जैसी बीमारियां बहुत तेजी से सामने आ रही हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में वातावरण इतना अधिक प्रदूषित हो चुका है कि एलर्जी से बच पाना नामुमकिन-सा है। ऐसे में बच्चे के खान-पान का खास ख्याल रखें ताकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेज हो। लेकिन आपकी सावधानी और समझदारी से आपका बच्चा इन गमिर्यों में भी खुश और तंदुरुस्त रह सकता है। बस जरूरत है इन कुछ सावधानियों का ख्याल रखने की...

हल्का भोजन दें बच्चे को गर्मी के मौसम में बच्चों की पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है, इसलिए बच्चों के शरीर में पानी की कमी होना, शरीर पीला पड़ना, डायरिया, लू लगना, पेट का चलना, पेट में जलन, उल्टी, पीलिया, टाइफाइड, कोलेरा आदि इस मौसम की आम शिकायतें हैं। इसलिए बच्चे को हल्का और पौष्टिक आहार दें। बच्चे को बाहर का, तेलीय, मिर्च-मसाले वाला या भारी भोजन न दें। उसे घर का बना हल्का खाना ही खिलायें।

बच्चों को बचाएं तेज धूप सेमौसम कोई भी हो, पर बच्चों के खेल पर कोई असर नहीं पड़ता और ये तो उनकी गमिर्यों की छुट्टियां हैं। लेकिन ध्यान रखें कि आपका बच्चा तेज धूप या लू के समय न खेले। ठंडक या हल्की धूप में ही बच्चे को बाहर जाने दें। बच्चों की त्वचा को धूप के प्रकोप से बचाने के लिए अच्छे सन्स्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें।

शाम के वक्त भी रखें ख्यालगमिर्यों में शाम के वक्त मच्छर और कीड़े काफी सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए शाम के वक्त बच्चे को बाहर खेलने जाते समय मच्छरों से बचाने वाली क्रीम जरूर लगाएं। उसे पूरी बाजू के, लूज व हल्के रंग के सूती कपड़े भी पहनाएं। इनसे न तो किसी तरह का त्वचा संक्रमण होगा और न ही मच्छर और कीड़े उनके करीब आएंगे।

न होने पाए पानी की कमीगमिर्यों में आमतौर पर बच्चे बाहर का जूस, नींबू पानी आदि पी लेते हैं। बच्चों को बाहर की इन चीजों का सेवन करने से रोकें। बच्चा घर से बाहर जाए तो उसे उबला और फिल्टर का पानी पीने के लिए दें। गमिर्यों में आमतौर पर बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे वह डायरिया, डीहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं। बच्चों को ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए भरपूर मात्रा में घर में निकाला जूस, नीबू पानी, नारियल पानी जैसे तरल पेय दें। बच्चे को छाछ, ताजे फलों का रस, मिल्क शेक, सलाद जैसे खीरा, ककड़ी आदि दें। नाश्ते में बच्चे को हेल्थ ड्रिंक्स अवश्य दें, इससे आपका बच्चा तरोताजा रहेगा और उसमें ऊर्जा का स्तर भी बना रहेगा।

हाइजीन का रखें ख्यालत्वचा संक्रमण से बचाने के लिए बच्चे की साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। गमिर्यों के दिनों में बच्चों को भी दिन में दो बार नहाने की आदत डलवाएं। बच्चे को सूती कपड़े ही पहनाएं और कपड़ों को रोजाना बदलें। बच्चे को मेडिकेटिड साबुन से ही नहलाएं। कुछ भी खाने से पहले और बाद में तथा कहीं भी बाहर से आने पर उसके हाथ पैर अच्छी तरह से साबुन से साफ करवाएं।

गर्म-सर्द से बचाएंअक्सर देखने में आता है कि बच्चा तेज धूप और गर्मी में से पसीने में लथपथ होकर आता है और आते ही एसी, कूलर या पंखे के सामने बैठ जाता है। इससे बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे ही बच्चे बाहर गर्मी से आकर फ्रिज का ठंडा पानी पी लेते हैं। इससे सर्द-गर्म होने का खतरा बढ़ जाता है।

आंखों की भी करें देखभालगर्मी के मौसम में कंजक्टिवाइटिस होने का खतरा भी बच्चों में बढ़ जाता है। तेज धूप, धूल, प्रदूषण, गंदगी की वजह से बच्चे इस नेत्र रोग का शिकार हो सकते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद बच्चों की आंखें ठंडे पानी से धुलवाते रहें, इससे बच्चों की आंखों में ड्राइनेस भी नहीं होती।

बचाएं स्किन प्रॉब्लम सेबच्चों को गमिर्यों में अक्सर घमौरियों और सनबर्न की समस्या हो जाती है। तेज धूप के संपर्क में आने से त्वचा पर लालिमा सूजन, दाने खुजली व कभी-कभी फफोले भी हो जाते हैं। इनसे बचाने के लिए बच्चों को ग्लिसरीन युक्त साबुन से दिन में दो बार ठंडे पानी से नहलाएं और तेज धूप में उन्हें जाने से रोकें।



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