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अशवगंधा पर मेरे अनुभव

अशवगंधा पर मेरे अनुभव 

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जो मनुष्य अशवगंधा को रोजाना एक ग्राम चूर्ण दूध के साथ लेता है , उसे कभी हड्डियों के रोग , जोड़ों का दर्द , कमर दर्द नही सताते, शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी पास नही फटकती , दिमागी काम करने वाले अगर रोजाना की खुराक में इसे शामिल कर लें , तो उन्हें दिमागी कमजोरी , पागलपन , डिप्रैशन आदि किसी भी प्रकार का दिमाग का रोग जीवन में पास नही फटकता. अब इस से सस्ती , आसान , सर्व सुलभ औषधि अपने चिकित्सा काल में मैंने कभी नही देखी. जिसका जीवन भर सेवन करने से कोई नुकसान नही. पंसारी से आसानी से मिलती है. असगंध नागौरी के नाम से लें . अपने स्वाद अनुसार इसमें मिश्री भी मिला सकते है. इतनी मात्रा आम इंसान के लिए बताई है. मौस्म अनुसार अनुपान बदल सकते है . कोई मौस्मी रोग सताएं उसके अनुसार सहायक औषधि ले सकते है. 
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इतनी कम मात्रा रसायन गुण लेने के लिए दी गई है. अगर किसी रोग में प्रयोग करना है तो ३-६ ग्राम तक सुबह -शाम ले सकते है. ४० दिन से ९० दिन तक. इस से आगे सस्ता दवा कोई नही है. यह एक आहार रूपी दवा है. अगर बच्चों को बचपन से शुरू करवा दिया जाए , उनकी हड्डियाँ फैलाद जैसी ताकतवर रहेगी , दिमाग कंप्यूटर जैसा , कद भी अच्छा निकलता है. बुजुर्ग लोगों को कभी बुढ़ापे के रोग नही सताते. जवान लोगों को ग्रहस्थ की परेशानिया जैसे कमजोरी , नामर्दी , शुक्राणु आदि कोई समस्या नही आएगी . न कोई थकावट.

इसकी तासीर गर्म है, गर्मी में और गर्मी वाले रोगियों को कई बार माफिक नही रहता . आपको इसका कंबीनेसन बता देता हुं जिसे आप बिना डर के ले सकते है. गर्मी में भी बिना डर ले सकते है. जिन्हे दूध माफक नही वह पानी से भी ले सकते है . वैसे तो अशवगंधा के अनेको प्रयोग है , उनमें से मेरे कुछ अनुभूत आपकी सेवा में हाजिर कर रहा हुँ . 
१. नुस्खा 
अशवगंधा 5 तोला यानि पचास ग्राम ,
मुलहठी पांच तोला ,
आँवला पांच तोला ,
गिलोय का चूर्ण 5 तोला 
सबको मिलाकर एक डिब्बे में संभाल लें . 
इसके बराबर वजन मिश्री भी मिला सकते है. 
अगर मिश्री मिलाना है तो 6 ग्राम पानी से जब दिल करें दिन में एक बार ले सकते है. अगर शूगर वाले मरीज है तो मिश्री के बिना बने मिश्रण को तीन ग्राम ले सकते है. 

२. नुस्खा
अशवगंधा - 100 ग्राम ,
मुलहठी - 100 ग्राम,
गिलोय - 100 ग्राम 
मिश्री - 300 ग्राम 
मिलाकर सबको एकजान कर लें . डिब्बे में संभालकर रख लें . 
एक चम्मच ताजे जल से लें . 

३. अशवगंधा चूर्ण - 60 ग्राम ,
गिलोय सत - 20 ग्राम ,
प्रवाल पिष्टी - 10 ग्राम 
सबको मिलाकर रख लें . 
3 ग्राम की मात्रा दूध या जल से लें . दिन में एक बार . 
४. दिमागी कमजोरी के लिए 
अशवगंधा , बच , ब्राह्मी , शंखपुष्पी 
20-20 ग्राम मिलाकर रख लें. 
2-2 ग्राम सुबह-शाम मलाई,मक्खन या शहद या दूध से ले सकते है. जल से भी लिया जा सकता है. 

५. दिमागी तेज करने के लिए
अशवगंधा 10 ग्राम,
बच-10 ग्राम,
मांलकंगणी-10 ग्राम,
ब्राह्मी -20 ग्राम,
रजत भस्म - 6 ग्राम ,
मोती पिष्टी नं १ - 3 ग्राम 
सबको मिलाकर रख लें . 80 पुड़िया बनाकर रख लें . 
सुबह-शाम एक-एक पुड़िया मलाई,मक्खन या दूध से लें. 
यह मेरा पसंदीदा नुस्खा है. इसके 40 दिन सेवन करने से दिमागी कमजोरी दूर होती है. हर ग्रंथ को याद करने की ताकत देता है. आपका बच्चा अगर बार-2 पढ़ने पर भी भूल जाता है तो इसके सेवन से आपका बच्चा एकबार पढ़ कर दुबारा नही भूलेगा, हमेशा याद रहेगा. बढ़िया नंबर लेकर पास होगा. दिमागी काम करने वाले लोगों को भी यह बहुत अच्छा लाभ देता है. 
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यह तीन नुस्खे मैंने यहां डाले है यह गर्मी में जल या दूध से लें . 
सर्दी में शहद , घी , दूध,मलाई , मक्खन से ले सकते है . 
बताई गई दवाई बढ़िया होनी चाहिए , ताजी ली गई हो, खुद तैयार करें तो बहुत अच्छा. 

कोई भी नुस्खा लेने से पहले एक बार चिकित्सक की सलाह जरूर लें . धन्यवाद.

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