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स्तन दर्द मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता



स्तन में होने वाले विभिन्न प्रकार के दर्द और उनके उपचार

स्तन दर्द मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता
स्तनों में दर्द
आमतौर पर लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को स्तनों में दर्द की समस्या होती है। महिलाओं के स्तन में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं। महिलाओं के स्तन में दर्द होने का मतलब स्तन कैंसर नहीं है।

स्तनों में होने वाले दर्द के प्रकार:

1. चक्रीय दर्द
कई बार महावारी के समय हार्मोन्स में असंतुलन के कारण स्तन में दर्द की शिकायत रहती है, इस दर्द को चक्रीय दर्द कहा जाता है। चक्रीय दर्द सामान्यतः महिलाओं में मासिक धर्म की शुरुआत होने के एक या दो हफ्ते पहले शुरू होता है और माहवारी के बाद यह दर्द बंद हो जाता है।

इसे चक्रीय मसतालगिया कहा जाता है। अधिकतर चक्रीय दर्द के समय स्तनों के बाहरी और ऊपरी क्षेत्र में दर्द होता है। यह एक सामान्य दर्द है जो महावारी समाप्त होते ही बंद हो जाता है। अतः इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
2. गैर-चक्रीय दर्द

ऐसा दर्द अक्सर 30 से 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में देखा जाता है। इसमें स्तनों में बहुत तीव्र दर्द होता है। हार्मोनल परिवर्तन और महिला के खराब स्वास्थ्य के कारण भी स्तन में दर्द हो सकता है। यदि स्तन में किसी कारण से चोट लग गई हो, तो भी स्तनों में दर्द होने लगता है।

कभी-कभी स्तनों में दर्द, भारीपन, कोमलता, जकड़न और स्तनों के उत्तकों में जलन का अनुभव होने लगता है, जिनके कई कारण हो सकते हैं। इस दर्द का कोई निर्धारित कारण नहीं होता। इसीलिए इस प्रकार के दर्द का लगभग 20 प्रतिशत इलाज ही संभव हो पाता है।

स्तनों में दर्द के क्या-क्या कारण हो सकते हैं, आइए जानें:
• तनाव की वजह से स्तन में दर्द
• कैफिन के अधिक सेवन से स्तन में दर्द
• स्तनों के बाहरी हिस्सों में दर्द की वजह से
• पसली में फ्रैक्चर होने से स्तन में दर्द
इस तरह के दर्द को कैसे दूर करें?


• उचित फिटिंग वाली ब्रा पहनें
• ब्रा को रोजाना धोएं जिससे संक्रमण से बचा जा सके
• रात को सोते समय ब्रा नहीं पहनें या आरामदायक ब्रा पहनें
• व्यायाम के दौरान स्पोर्ट्स ब्रा पहनें



• आहार में स्वास्थ्यवर्द्धक फलों और सब्जियों का सेवन करें।
पेट में गेस क्यों बन जाती है? जानिए गेस्ट्रिक के मुख्य कारण

बदले खान पान की आदत
ताकि गैस की समस्या
न बन जाए आफत

पेट में गड़बड़ी होने या पाचन शक्ति खराब होने के कारण खाना ठीक से नहीं पच पाता, जिससे हमारे पेट में गैस बनने लगती है। कभी- कभी यह एक जटिल समस्या बन जाती है जो कई पेट संबंधी बिमारियों को जन्म देने लगती है। आइए जानें कि पेट में गैस बनने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं।

पेट में गैस बनने के मुख्य कारण

1. देर रात तक जागना

देर रात तक जागने से हमारे पेट में इनडाइजेशन या अपच की समस्या होने लगती है जिससे पेट में गैस बनने लगती है।
2. खाने में जल्दबाजी करना
कई बार हम जल्दबाजी के कारण सही ढंग से चबाकर खाना नहीं खाते। ऐसा करने से खाने को पचने में समय लगता है और हमारे पेट में धीरे-धीरे गैस बनने लगती है।
3. लगातार बैठे रहना

कई घंटो तक लगातार बैठकर काम करने या एक स्थान पर अधिक समय तक बैठे रहने से खाना सही तरीके से डाइजेस्ट नहीं हो पाता। इससे पेट में आवश्यकता से अधिक एसिड बनने लगता है और गैस की समस्या उत्पन्न होने लगती है।
4. ज्यादा मीठा खाना

मीठे खाद्य व्यंजनों जैसे कि कुकीज, ब्राउनीज और मिठाई आदि में शक्कर की मात्रा काफी अधिक होती है। इन्हें ज्यादा मात्रा में खाने से गैस की समस्या पैदा होने का खतरा रहता है।
5. कोल्ड ड्रिंक का सेवन

सोडा एवं कोल्ड ड्रिंक में कार्बन डाई ऑक्साइड बबल्स अत्यधिक मात्रा में पाए जाते हैं जो हमारे पेट में जाकर एसिड पैदा करते हैं। इनके अत्यधिक सेवन से पेट में गैस की समस्या उत्पन्न होने लगती है।

6. डेयरी उत्पादों का सेवन

डेयरी उत्पादों जैसे मक्खन वाला दूध, चीज़, बटर आदि का उचित एवं पर्याप्त मात्रा में ही सेवन करें। डेयरी उत्पादों के अधिक सेवन से इनमें मौजूद फैट (वसा) डाइजेस्ट नहीं हो पाता है जिससे हमारे पेट में गैस की प्रॉब्लम होने लगती है।
7. तला हुआ खाना
तला हुआ खाना या तैलीय भोजन जैसे- भजिए, समोसा, कचौड़ी, पकोड़ी आदि में वसा अत्यधिक मात्रा में पाई जाती है। इस प्रकार के तैलीय भोजन को पचाना बहुत कठिन होता है जो गैस का कारण बनता है।
8. मादक पदार्थों का सेवन

मादक पदार्थ जैसे- बियर और वाइन हमारे शरीर में अधिक मात्रा में एसिड पैदा करते हैं। इनके अधिक सेवन से बचना चाहिए नहीं तो ये पेट में गैस की समस्या पैदा करते हैं।

अतः अपने खान- पान की तरफ ध्यान दें और सयंमित जीवन व्यतीत करें। यह आपके पाचन तंत्र को मज़बूत बनाए रखने और गैस की समस्या से निजात दिलाने में सहायक होगा।

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