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विटामिन D की कमी: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज


विटामिन D की कमी: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज
परहेज और आहारलेने योग्य आहार
आहार से विटामिन D की पर्याप्त मात्रा ले पाना असंभव है। सूर्य के प्रकाश से सीधा सम्पर्क ही आपके शरीर में विटामिन D उत्पन्न करने का एकमात्र विश्वसनीय तरीका है।
कुछ आहारों में विटामिन D की थोड़ी मात्रा होती है, जिनमें:

वसायुक्त मछली
जिगर का माँस
अंडे की जर्दी
शक्ति मिश्रित दूध, डेरी उत्पाद और सन्तरे का रस।
शक्ति मिश्रित अनाज और मक्खन।
शक्ति मिश्रित सोया उत्पाद (टोफू और सोया दूध)
पनीर
मशरुम
इनसे परहेज करे

तले वसायुक्त आहार, नमक, शक्कर, और अन्य शक्कर युक्त उत्पादों तथा संतृप्त वसा से भरे आहारों के उपयोग को कम करें।
कैफीन का प्रयोग सीमित करें. कैफीन विटामिन D के अवशोषण में अवरोध उत्पन्न करता है।
योग और व्यायामबाहरी वातावरण में व्यायाम करने से ठन्डे महीनों में भी विटामिन D का स्तर पर्याप्त विकसित होता है। वजन सहने वाले (चलना, दौड़ना, नाचना, स्कीइंग करना आदि) और प्रतिरोधक व्यायाम (वजन उठाना, और पानी के तगड़े व्यायाम) व्यायाम के प्रभावी तरीके हैं।
घरेलू उपाय (उपचार)
शरीर में विटामिन D का स्तर बढ़ाने के लिए, गर्मी के मौसम में, एक दिन में 15 – 30 मिनट तक, सूर्य के सामने, बगैर सनस्क्रीन लगाये, खड़े रहें।
यदि आप कम सूर्य प्रकाश वाले क्षेत्र में रहते हैं तो विटामिन D3 का पूरक आहार लें।
40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएँ यदि विटामिन D की कमी से ग्रस्त हैं, तो उनमें ओस्टियोपोरोसिस होने की संभावना ज्यादा होती है। कमी की स्थिति में उन्हें विटामिन D के पूरक आहार लेने चाहिए।

विटामिन D की कमी: प्रमुख जानकारी और निदान



विटामिन D की कमी क्या है?विटामिन D, जिसे सनशाइन विटामिन भी कहा जाता है, क्योंकि यह सूर्य के प्रकाश की प्रतिक्रिया में शरीर द्वारा उत्पन्न किया जाता है। प्राकृतिक रूप से यह कुछ आहारों जिनमें कुछ मछलियाँ, मछलियों के लिवर का तेल और अंडे की जर्दी तथा बाह्य शक्ति मिश्रित डेरी उत्पादों और अनाज के उत्पादों में पाया जाता है।
विटामिन D के दो प्रकार होते हैं, जिन्हें D2 और D3 के नाम से जाना जाता है।

विटामिन D2, जिसे अर्गोकेल्सीफेरोल भी कहते हैं, शक्ति मिश्रित आहारों, वनस्पति आहारों, और पूरक आहारों से प्राप्त होता है।
विटामिन D3, जिसे कोलकेल्सीफेरोल भी कहते हैं, शक्ति मिश्रित आहारों, पशु आहारों (मछली, अंडे और जिगर), तथा शरीर के भीतर भी, जब त्वचा सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आती है तब, बनता है।विटामिन D वसा में घुलनशील विटामिन है. अर्थात यह हमारी वसा कोशिकाओं में संचित रहता है और लगातार कैल्शियम के चयापचय (मेटाबोलिज्म) और हड्डियों के निर्माण में उपयोग होता रहता है।

यदि आपका सूर्य के प्रकाश से कम संपर्क होता है, आपको दूध सम्बन्धी एलर्जी है, या आप शुद्ध शाकाहारी व्यक्ति हैं, तो आपको विटामिन D की कमी का खतरा हो सकता है। 

रोग अवधिइस कमी को ठीक होने में कुछ महीने लग सकते हैं। यह व्यक्ति की जीवन शैली और चिकित्सा के तरीके पर निर्भर करता है।

जाँच और परीक्षणरोग का निर्धारण मुख्यतः 25-हाइड्रोक्सी विटामिन D रक्त जाँच द्वारा होता है।


डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाबQ1.विटामिन D क्या है और यह शरीर के लिए आवश्यक क्यों है?
विटामिन D एक सूक्ष्म पोषक आहार है, जो जब त्वचा सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आती है तब शरीर द्वारा बनाया जाता है। यह कई आहारों में भी उपस्थित होता है। विटामिन D मुख्यतः हड्डियों में कैल्शियम और फॉस्फेट के अवशोषण और उनके वहाँ पर इकठ्ठा होने में उपयोगी होता है। शरीर में विटामिन D की पर्याप्त मात्रा मधुमेह, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, त्वचा रोग से बचाव करती है और प्रतिरक्षक शक्ति को बढ़ाती है।

Q2.मुझे विटामिन D की कमी कैसे हो सकती है?
आपको विटामिन D की कमी हो सकती है, यदि आप लम्बे समय तक सूर्य के प्रकाश में नहीं रहते हैं, और विटामिन D से समृद्ध आहार नहीं लेते हैं।

Q3.मुझे विटामिन D की कमी का पता कैसे चलेगा?
यदि आपको बार-बार संक्रमण हो रहे हैं, आलस का अनुभव होता है, हड्डियों और माँसपेशियों में दर्द है, तो आपको अपने विटामिन D के स्तर की जाँच करवानी चाहिए। रक्त परीक्षण से हमें शरीर में विटामिन D की मात्रा का विश्लेषण मिल जाता है।

Q4.विटामिन D की कमी के हानिकारक प्रभाव क्या हैं?
विटामिन D की लम्बे समय तक बनी रहने वाली कमी आँतों से कैल्शियम और फॉस्फेट के अवशोषण और उनके हड्डियों में जमा होने की प्रक्रिया को कम कर देती है। इससे हड्डियाँ कमजोर होती हैं और इस स्थिति को बच्चों में रिकेट्स तथा वयस्कों में ओस्टियोमलेसिया और ओस्टियोपोरोसिस कहा जाता है।

Q5.मैं विटामिन D की कमी को कैसे दूर कर सकता हूँ?
विटामिन D की कमी को विटामिन D इंजेक्शन की अधिक मात्रा और उसके बाद थोड़े समय के लिए खाने वाली गोलियाँ अधिक मात्रा में लेकर ठीक किया जा सकता है। बाद में आप प्रतिदिन आरडीए द्वारा निर्धारित मात्रा में पूरक ले सकते हैं या विटामिन D की शक्ति मिश्रित आहार ले सकते हैं और प्रतिदिन पर्याप्त समय के लिए सूर्य के प्रकाश में रह सकते हैं।

Q6.मैं विटामिन D की कमी से कैसे बच सकता हूँ?
आप विटामिन D से समृद्ध आहार लेकर और पर्याप्त मात्रा में सूर्य के प्रकाश के संपर्क में रहकर विटामिन D की कमी से बच सकते हैं।


लक्षणइसके लक्षणों का एक निश्चित और साफ रूप नहीं है। कई लोगों में कम स्तर के बावजूद कोई लक्षण नहीं होते। सामान्य लक्षणों में:

थकावट
लम्बे समय से बना हुआ दर्द
वजन का बढ़ना
माँसपेशियों में दर्द, कमजोरी और ऐंठन
जोड़ों का दर्द
नींद में व्यवधान
एकाग्रता की कमी
सिरदर्द
मूत्राशय की समस्याएँ
दस्त या कब्ज
उच्च रक्तचापविटामिन D की गंभीर कमी से बच्चों में रिकेट्स (हड्डियों का दोषयुक्त विकास) और वयस्कों में ओस्टियोमलेसिया (नर्म हड्डियाँ) तथा ओस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का भुरभुरा होना) हो सकते हैं।

कारण
निवास का स्थान, सांस्कृतिक पहनावे की आदतें, मौसम, सूर्य से बचना, और सनस्क्रीन द्वारा त्वचा का बचाव ये सभी विटामिन D के निर्माण को सीमित करते हैं।
विटामीन D के कम स्तर से पाचन तंत्र, लिवर सम्बन्धी, और गुर्दे की बीमारियाँ का सम्बन्ध हो सकता है।
यूवीबी संपर्क से कमी के कारण विटामिन D की कमी (हाइपोविटामिनोसिस) होती है।
गहरी त्वचा, क्योंकि त्वचा का गहरा रंग देने वाला मेलेनिन नामक तत्व सूर्य के प्रकाश में त्वचा की विटामिन डी बनाने की क्षमता को कम कर देता है।
कुछ चिकित्सीय समस्याएँ जैसे कि क्रोनस डिजीज, सिस्टिक फाइब्रोसिस, और सेलिअक डिजीज आँतों की भोजन से विटामिन D अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं।
मोटापा

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