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शादी के पहले मेडिकल जांच- क्यों है जरूरी?

शादी के पहले मेडिकल जांच- क्यों है जरूरी?
    शादी के पहले मेडिकल जांच करवाना एक विघ्न लगता है. ऐसा लगता है जैसे किसी क़ानून के तहत जबरन हमारी इक्छा के विरुद्ध हमसे कुछ कहने को कहा जा रहा है. कई बार तो ये तर्कहीन या फिर अपमान की बात लगती है. बहुत लोग इसे हंसी या मज़ाक में ले लेते हैं. कईयों को ऐसा लगता है जैसे पेशी हो रही है. ऐसा लगना दरअसल सामाजिक स्थापना के तहत होता है. जब भी हम हम पहले से स्थापित मूल्यों को तोड़ते हैं तो तकलीफ सहज है. बात है इसके आगे जाकर सोचने की. जहां कहीं इसे मान्यता मिली तो लड़कियों के जांच के रूप में मिली. उसमें भी मुख्यतः इस बहाने उनके कौमार्य का पता लगाने जैसे मंशा होती है. लेकिन, जब हम इन सकीर्ण विचारों से निकलकर ताज़ी हवा का एक झोंका लेते हैं तो स्थिति साफ़ होने लगती है.
इसमें आपके सेक्सुअल स्थिति के अलावा, दोनों के जीन की जांच होती है जिससे ये साफ़ होता है की इनके मिलन से वैज्ञानिक रूप से कोई दुष्परिणाम तोह नहीं होगा. मेडिकल जांच का अर्थ केवल यौन रोगों का पता लगाना नहीं बल्कि आपके पूरे शारीरिक जांच के आधार पर आये परिणाम से आगे की स्थिति तय करना होता है. आइये देखते हैं कुछ ऐसे ही महत्वपूर्ण जांचों को तथा इनके कारणों को.
  1. यौन-संक्रमित बीमारियों की जांच- आये दिन नए-नए यौन रोग सामने आ रहें हैं. यौन रोगों की जांच से आपके यौन आदतों तथा आपके स्वास्थय के बारे में पता चलता है. इससे आप दोनों की सुरक्षा तय होती है तथा इस जानकारी के अभाव की वजह से भविष्य में शादी तथा आप दोनों के जीवन में किसी अनहोनी को दूर किया जा सकता है. अगर सही समय पर जानकारी हो जाए तो व्यक्ति उस हिसाब से सावधानी बारात सकता है. शादी में दोनों पक्षों से पूर्ण निष्ठा तथा इमानदारी की जायज़ अपेक्षा की जाती है.
  2. ब्लड ग्रुप की जांच- खून की जांच में ब्लड ग्रुप के अलावा हमें रीसस फैक्टर का भी पता चलता है. ये बड़ा ही सामान्य सा जांच है. अगर किसी स्त्री के ब्लड ग्रुप का रीसस फैक्टर नेगेटिव है तथा उसके साथी का पॉजिटिव है तो इससे ऐसे एंटीबाडीज का जन्म होता है जो भ्रूण के लिए नुकसानदायी हो सकते हैं साथ ही गर्भ धारण तक में परेशानी पैदा करते हैं. इसकी वजह से गर्भ-पात भी हो सकता है. और संतान गंभीर बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं. अगर इसकी जानकारी पहले ही हो जाए तो दोनों लोग उस हिसाब से ये निर्णय ले सकते हैं.
  3. फर्टिलिटी टेस्ट- ऐसे ना जाने कितने ही मामले हैं जहां स्त्रियों को संतान ना पैदा करने की वजह से कितनी ही जलालत झेलनी पड़ी है. फर्टिलिटी टेस्ट अगर दोनों साथियों का हो जाए तो उन्हें इस विषय में पूर्ण जानकारी मिल जायेगी, जिसके आधार पर वो अपना भविष्य तय कर सकते हैं. ऐसा होने से एक दुसरे पर आरोप लगाने या संशय की दृष्टि रखने की प्रवृत्ति में कमी आएगी और एक सुखद तथा खुशनुमा भविष्य का आधार रखा जा सकता है.
मेडिकल टेस्ट का मतलब किसी का अपमान कतई नहीं होना चाहिए ये आपके भविष्य की ख़ुशी को सुनिश्चित करने का पहला कदम होना चाहिए. कोई भी संदेह की स्थिति में अपने डॉक्टर से परामर्ष लेकर ही कुछ निर्णय लें.

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