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तेजी से मोटापा कम करने के लिए डाइट में क्या और कितना खाना चाहिए


तेजी से मोटापा कम करने के लिए डाइट में क्या और कितना खाना चाहिए


मोटापा कम करने के लिए डाइट - मोटापा आज हर किसी की समस्या बना हुआ है। जो लोग कम खाते हैं वे भी मोटापे के शिकार हैं ऐसा क्यों? क्योंकि वे सही डाइट फॉलो नहीं करते हैं।

मोटापा आज हर किसी की समस्या बना हुआ है। जो लोग कम खाते हैं वे भी मोटापे के शिकार हैं। बच्चे से लेकर बूढ़े तक मोटापे के शिकार हैं। सबसे हैरत की बात है कि कॉलेज जाने वाले यूथ भी माटोपे के शिकार हैं।

जबकि अक्सर माना जाता है कि कॉलेज जाने वाले यूथ पतले होते हैं क्योंकि उन्हें अपनी फिटनेस का काफी ख्याल रहता है औऱ वह अपने दोस्तों के सामने फिट भी दिखना चाहते हैं।
मोटापा कम करने के लिए डाइट -

कम खाते हैं लोग, फिर भी मोटे

लेकिन आज के जमाने में ऐसा नहीं है। ऐसा क्यों? क्योंकि अब लोग सही डाइट फॉलो नहीं करते हैं। आपने अक्सर नोटिस किया होगा कि लोग ज्यादा खाते भी नहीं है तो भी वे मोटे होते हैं। ऐसे में उन्हें तो यह भी नहीं बोल सकते कि खाना कम कर दें। इसका तो सीधा सा मतलब यही निकलता है कि वे अपनी डाइट में कुछ भी खा लेते हैं और हेल्दी डाइट नहीं ले रहे हैं।




ऐसे में क्या किया जाए?

ऐसे में इस लेख को पढ़ें और जाने कि तेजी से मोटापा कम करने के लिए डाइट में क्या और कितना खाना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले वजन कम करने के प्रोसेस को समझने की जरूरत है।

वजन कम होने का प्रोसेस



पेट में चर्बी की एक लेयर तीन दिन में बनती है और इसे खत्म करने में छह से सात दिन तक लगता है। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि जो चर्बी तीन दिन में बनती है उसे कम करने में दोगुना समय लगता है। हम जो कुछ भी खाते हैं उससे हमें calories मिलती है। कैलोरीज़ हमें carbohydrates, protein, fat तीनों से मिलती है जो आलू, मीठे और जंक फूड में अधिक होती है। इसलिए तो घर की दाल-रोटी खूब खाने के बावजूद भी लोग मोटे नहीं होते हैं जबकि बाहर का जंक फूड खाने से लोग एक बारे में मोटे हो जाते हैं।

700 कैलोरीज़ से ज्यादा ना लें

वजन बढ़ाने में सबसे बड़ा रोल कार्ब और फैट का होता है। भले ही आप कितनी भी तगड़ी डाइट फॉलो कर लें. लेकिन अगर आप अपने डाइट में 700 कैलोरीज़ रोज लेते हैं तो आपका मोटापा बढ़ना तय है।

होती है कई सारी बीमारियां



मोटापा बढ़ने की वजह से की सारी बीमारियां भी होती हैं। इसकी वजह से शरीर में कमजोर डाइजेशन, खाने के तुरंत बाद पानी पीना, कम नींद, किसी दवा का असर या हार्मोन के इंबैलेंस होने की समस्या होती है।

अपने शरीर के अनुसार लें कैलेरी

अगर आप कसरत नहीं करते हैं तो आपका काम पूरे दिन में 2000 से 2200 calories में चल जाएगा। अगर आप मेहनत का काम करते हैं या अच्छे से जिम जाते हैं तो आपको 2400 से 2800 कैलोरी की जरूरत पड़ेगी। इसी तरह से जो महिलाएं जिम वगैरा नहीं जातीं उनका काम 1800 कैलोरी में चल जाता है। जो महिलाएं भाग दौड़ वाला या मेहनत का काम करती हैं उन्हें 2200 कैलोरी की जरूरत पड़ती है। कॉलेज जाने वाली एक लड़की को हर दिन करीब 2000 कैलोरी की जरूरत होती है। यहां एक बात का और ध्यान रखें कि इस कैलकुलेशन में हमने 18 से 35 साल तक के ऐज ग्रुप को शामिल किया है।

जैसे कि 25 साल के एक यूथ का वजन 70 किलो है और वह कसरत नहीं करता है तो उसे 440 कैलोरी प्रोटीन से, 330 कैलोरी कार्ब से और 330 कैलोरी फैट से हासिल करनी है।

एक ग्राम प्रोटीन में होती है चार कैलोरी तो 440 कैलोरी के लिए जरूरत होगी - 440/4 = 110
एक ग्राम कार्ब में होती है चार कैलोरी तो 330 कैलोरी के लिए जरूरत होगी 330/4 = 82 ग्राम लगभग
एक ग्राम फैट में होती है 9 कैलोरी तो 330 कैलोरी के लिए जरूरत होगी 330/4 = 82 ग्राम लगभग




जंक फूड कम खाएं

एक बार में जंक फूड खाना ना छोड़ें। क्योंकि जंक फूड की अगर आपको आदत है तो वह आपसे छूटेगी नहीं और आप और अधिक जंक फूड खाने लगेंगे। इसलिए जंक फूड महीने में दो बार खाएं और घर का खाना ही अधिक से अधिक खाने की कोशिश करें। फल अधिक खाएं। जूस पिएं।

ये है मोटापा कम करने के लिए डाइट - तो इसके कैल्कुलेशन के अनुसार डाइट फॉलो करें और खुद के वजन को कंट्रोल करें।

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किसी व्यक्ति का वजन उसकी ऊंचाई और वजन के अनुपात से ज्यादा हो जाता है तब उसे मोटापा कहा जाता है मोटापा शरीर के लिए एक अभिशाप है इससे मनुष्य की आकृति बेडौल हो जाती है तथा इसकी वजह से अनेक रोग हो जाते हैं और होने की संभावना रहती है जैसे हृदय रोग मधुमेह उच्च तथा निम्न रक्तचाप आदि पैदा हो सकते हैं खानपान योगासन व्यायाम तथा दैनिक भ्रमण से मोटापे पर काबू पाया जा सकता है|
कारण :- अत्यधिक तेल, घी, मांस-मदिरा धूम्रपान तथा अत्यधिक चर्बीयुक्त भोज्य पदार्थों का सेवन करने से, दवाइयों का अधिक प्रयोग करने से, बार-बार भोजन करने से, शारीरिक श्रम कम करने से तथा ज्यादा बैठे बैठे काम करने से शरीर में वसा जमा होने लगती है जो मोटापे का कारण बनती है इसके अलावा क्रोध को दबाने चिंता करने तथा तनावग्रस्त रहने से भी शरीर का वजन बढ़ता रहता है अत्यधिक वजन शरीर की आकृति बिगाड़ देता है

देसी और घरेलु नुस्खे :-


1. ताजी मूली के रस में एक नींबू का रस और नमक मिलाकर लेने से मोटापा कम होता है |

2. एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस तथा दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से मोटापा कम होता है |

3. लहसुन की 5 कलियां रात को पानी में भिगोकर रखें और सुबह खाएं मोटापा दूर करेगा |

4. शहद और अदरक को मिलाकर खाने से वजन तेजी से कम होता है। शहद में फ्रक्टोज की उच्च मात्रा होती है जहां अतिरिक्त वसा को जलाने का काम करती है वहीं अदरक भी शरीर की वसा को पिघलाने का काम करता है और प्राकृतिक भूख लगने की क्रिया को बनाए रखता है।



5. काला नमक, सौंफ, बायबिडंग और सूंठ का बराबर भाग लेकर चूर्ण बना लें रोज प्रातः काल 2 ग्राम चूर्ण गाय के मठे के साथ खाए मोटापा कम होगा |


6. नींबू, शहद और काली मिर्च का मिश्रण वजन घटाने के लिए अपनाए जाने वाले सबसे आसान तरीकों में से एक है। नींबू में पेक्टिन फाइबर होता है जो शरीर में वसा को जमा होने से रोकता है और शरीर की पीएच वेल्यू को बनाए रखता है। काली मिर्च में पिपराइन होता है जो कि नई वसा कोशिकाओं को जमने से रोकता है। उपचार के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक छोटी चम्मच शहद, एक छोटी चम्मच काली मिर्च और चार बड़ी चम्मच नींबू का रस मिलाएं। हर रोज सुबह-सुबह इस तरह के पानी को पीने से जल्द ही वजन कम होने लगेगा।

7. ढाक के फूल, अनार की कली, गिलोय, अरंड, बेर की पत्ती इन सबको एक-एक ग्राम लेकर 100 ग्राम गुनगुने पानी में पीस लें फिर उसमें मिश्री मिलाकर पिएं मोटापा दूर हो जाएगा |

8. वजन कम करने का एक और आसान तरीका है कि रात को खाना न खाएं, खासकर यदि आपको देर रात को खाना खाने की आदत है तो। कोशिश करें कि रात का खाना 8 बजे तक खा लें, यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो खाने की जगह सलाद और लिक्विड चीजें लें लेकिन ठोस आहार न लें। ऐसा करने से भी तेजी से वजन कम होता है।



क्या न करे :- अत्यधिक तेल की तली हुई वस्तुएं अंडा मांस मछली आदि का सेवन नहीं करना चाहिए भोजन में गेहूं की रोटी तथा चावल का प्रयोग कम कर दें जो और चने की रोटी खाएं रोज एक गिलास फलो का रस पिएं प्रातः कालीन हल्का व्यायाम योगासन तथा भ्रमण करें शराब सिगरेट चाय कॉफी का सेवन बंद कर दें सप्ताह में एक दिन उपवास रखें इन सभी उपायों को करने से मोटापा कम होने में सौ प्रतिशत लाभ मिलता है

ये चीज़ें आपको बना सकती हैं इतना मोटा कि फिर वजन घटा पाना हो जाएगा मुश्किल
मोटापा घटाने के लिए अपनी कुछ आदतों पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी होता है और आज हम आपको उन पांच चीज़ों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको मोटा कर सकती हैं या मोटापा घटाने के आपके सपने को विफल कर सकती हैं। माइक्रोब्‍स हो सकते हैं कारण
आंतों में रहने वाले माइक्रोब्‍स भी मोटापे को प्रभावित करते हैं। जब भी आप कुछ खाते हैं तो 100 ट्रिलियन माइक्रोब्‍स को भी भोजन दे रहे होते हैं और ऐसे में आप कभी भी अकेले खाना नहीं खाते हैं। जिस इंसान में जितने ज्‍यादा टाइप के माइक्रोब्‍स होंगें वो उतना ही पतला होगा जबकि अगर आपका वजन ज्‍यादा है तो इसका मतलब है कि आपमें एक ही तरह के माइक्रोब्‍स ज्‍यादा हैं। हैल्‍दी डाइट से माइक्रोब्‍स की किस्‍मों को बढ़ाया जा सकता है। जीन भी है वजह
कई बार सही खाने के बाद भी मोटापा कम नहीं होता। इसका कारण आपके जीन हो सकते हैं। हमारे वजन के नियंत्रण में जींस की भूमिका भी होती है। अगर आपके जींस में कोई गड़बड़ी है तो ये मोटापा बढ़ाने के लिए काफी होता है। किस टाइम क्‍या खा रहे हैं
आप किस वक्‍त क्‍या और कैसा खाना खा रहे हैं, ये भी आपके वजन पर बहुत प्रभाव डालता है। हम जितना देर से खाना खाएंगें, हमारा वजन बढ़ने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाएगी। माना जाता है कि रात के समय हम कम सक्रिय रहते हैं और इस वजह से रात में खाना ठीक से पचता नहीं है लेकिन असल बात तो ये है कि इसका संबंध हमारे शरीर की आंतरिक बॉडी क्‍लॉक से होता है। हमारा शरीर रात की अपेक्षा दिन में कैलोरी पाचन बेहतर ढंग से करता है। दिमाग का चक्‍कर
आप कैलोरी को गिनने की जगह अपने खाने–पहने की आदतों को बदलेंगें तो आपको ज्‍यादा फायदा होगा। जैसे कि किसी फूड को ना देखना मानसिक शक्‍ति के बल पर उन्‍हें ना खाने की कोशिश से ज्‍यादा प्रभावी हो सकता है। हार्मोंस की भूमिका
आपने बैरियाट्रिक सर्जरी के बारे में तो सुना ही होगा। इस सर्जरी में उन हार्मोंस को बदला जाता है जो पेट में पैदा होते हैं। भूख हार्मोंस से प्रभावित होती है और ये खोज की गई है कि ओबेसिटी के ईलाज में सबसे प्रभावी उपचार बेरियाट्रिक सर्जरी है जो हार्मोंस बनाती है और हमें ये अहसास कराती है कि हमें भूख नहीं लगी है। ये एक बड़ा ऑप्रेशन होता है जिसमें पेट का साइज़़ 90 फीसदी कम हो जाता है और ये सिर्फ उन लोगों पर की जा सकती है जिनका बीएमआई 35 से ऊपर हो। अब वैज्ञानिकों ने उन हार्मोंस की रचना की है तो इस सर्जरी के बाद भूख में परिवर्तन करते हैं। इन वजहों से मोटापा घटाने में प्रॉब्लम हो सकती है – आपने खानपान पर नियंत्रण रख रहे हैं और रोज़ एक्‍सरसाइज़ भी कर रहे हैं लेकिन फिर भी आपका मोटापा नहीं घट पा रहा है तो इसका कारण ऊपर बताई गई वजहें हो सकती हैं। अगर बहुत कोशिशों के बाद भी आपका वजन नहीं घट पा रहा है तो आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। इसकी वजह कोई गंभीर रोग भी हो सकता है।



जानिए कसरत करने के बाद कहाँ जाता है शरीर का फैट !



आज दुनियाभर के लोग मोटापे से परेशान हैं और सभी जानते हैं कि ये कई बीमारियों की जड़ भी है।

मोटापे से छुटकारा पाने का सबसे आसान उपाय कसरत या व्‍यायाम करना है। आप भी कसरत करे ही होंगें लेकिन क्‍या आप ये जानते हैं कि कसरत करने के बाद शरीर का फैट कहां जाता है ?

लगभग 150 डॉक्‍टरों, आहार विशेषज्ञों और शारीरिक प्रशिक्षकों को इस सवाल का जवाब नहीं पता है लेकिन आज हम इस रहस्‍य से पर्दा उठाने वाले हैं कि जब हम कसरत करते हैं तो हमारे शरीर से फैट कहां जाता है।

कसरत से कहां जाती है चर्बी




अधिकतर लोगों को लगता है कि कसरत करने पर चर्बी ऊर्जा में बदल जाती है जोकि सबसे आम प्रतिक्रिया है। इसके अलावा कई लोग यह भी सोचते हैं कि फैट एनर्जी में तब्‍दील हो जाता है। आपको बता दें कि ये भौतिक द्रव्‍य संरक्षण के नियमों के खिलाफ है जिसमें सभी रसायनिक प्रतिक्रियाओं का पालन किया जाता है।

2014 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित मीरमैन के शोध के अनुसार कसरत करने पर फैट कार्बन डाइऑक्‍साइड और पानी में बदल जाता है। इसमें शरीर के मुख्‍य उत्‍सर्जन अंग फेफड़े का सबसे अहम काम होता है।

इस रिसर्च की मानें तो शरीर से पानी, पेशाब, पसीना, सांस और अन्‍य शारीरिक तरल पदार्थों के रूप में फैट बाहर निकल जाता है। अगर आप 10 किलो चर्बी कम करते हैं तो इसका 8.4 किलो कार्बन डाइऑक्‍साइड और बाकी 1.6 किलो पानी के रूप में बाहर निकल जाता है।

दूसरे शब्‍दों में कहें तो हम जो भी वजन कम करते हैं उसे हम सांस के रूप में छोड़ते हैं।

डॉक्‍टर थे गलत




इस शोध के निष्‍कर्ष तक पहुंचने के लिए इसमें 150 विशेषज्ञों को शामिल किया था और इनमें से सिर्फ 3 डॉक्‍टरों ने ही सही जवाद दिया। अमेरिका, ब्रिटेन के साथ-साथ कई यूरोपीय देशों में फैट बर्न को लेकर गलत धारण फैली हुई थी। इस रिसर्च के निष्‍कर्ष इस तथ्‍य पर आधारित हैं कि हम जो कुछ भी खाते हैं उसमें जितना भी ऑक्‍सीजन लेते हैं उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।

जैसे कि अगर आपके शरीर में 3.5 किलो पानी और खाना आता है तो आपने इस दौरान 500 ग्राम ऑक्‍सीजन भी लिया होगा। तो आपके शरीर से चार किलो जरूर बाहर आना चाहिए वरना आपका वजन बढ़ जाएगा।

मोटापा घटाने का सबसे असरदार तरीका




शोधकर्ताओं का कहना है कि कसरत के अलावा कई और तरीकों से भी हम कार्बन डाइऑक्‍साइड पैदा करते हैं। जैसे कि एक 75 किलो वजन का इंसान आराम करते वक्‍त 590 ग्राम कार्बन डाइऑक्‍साइड उत्‍पन्‍न करता है। उनका कहना है कि किसी भी दवा या पेय से इस नंबर को बढ़ाया नहीं जा सकता है।

जी नहीं, ऐसा कुछ नहीं हो सकता क्‍योंकि जरूरत से ज्‍यादा सांस लेने पर हाइपर्वेन्‍टलेशन हो जाता है और इसके लिए आपको अपनी मांसपेशियों की गतिविधयों को बढ़ाना होगा।

अब तो आप जान गए ना कि व्यायाम करने के बाद फैट कहां जाता है। हालांकि, इस पोस्‍ट में हमने आपको ये भी बताया कि मोटापा घटाने का सबसे असरदार तरीका कसरत करना ही है इसलिए अगर आप भी मोटापे से परेशान हैं तो आपको भी कसरत करनी चाहिए।



जाने नींद से जुड़े ये रोचक तथ्य


नींद इंसान के लिए सुकून व शांति देता है। इंसान को कम से कम 6 घंटे की निंदा लेना ही चाहिए।नींद आपके दिमाग को रिफ्रेश करती है व बॉडी की थकावट से मुक्ति दिलाती है। आज संसार भर के 15 करोड़ लोग नींद से जुड़ी बीमारियों के शिकार हैं, जबकि विकसित राष्ट्रों में 10 प्रतिशत लोग पूरी नींद नहीं ले पाते। वर्ष 2007 में 10,000 लोगों पर हुई रिसर्च बताती है कि जो लोग कम सोते हैं उनके अवसाद में जाने की आसार आम लोगों से पांच गुना ज्यादा है।

स्वीडन की उपसाला यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया है कि नींद से मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में बहुत ज्यादा मदद मिलती है। अगर ऐसा ना हो तो दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले अणु कार्य में लग जाते हैं । टेस्ट में इस्तेमाल में शामिल लोगों के खून में इन अणुओं की संख्या में सिर्फ एक रात ना सोने की वजह से ही करीब 20 फीसदी बढ़ी हुई पाई गई ।

2013 में कोरियाई अनुसंधान टीम ने गर्भाधान के कृत्रिम तरीके आईवीएफ के दौर से गुजर रहे 650 से अधिक लोगों की सोने की आदतों का विश्लेषण किया । उन्होंने पाया कि जो महिलाएं 7-9 घंटे की नींद ले रही थीं, उनमें गर्भ ठहरने की दर सबसे ज्यादा थी । वहीं जो महिलाएं 9-11 घंटे सोती थीं उनमें सबसे कम ।
अमेरिका की एक स्वास्थ्य पत्रिका में तीन वर्ष पहले छपी रिपोर्ट के मुताबिक कम सोने से वजन बढ़ने का भी खतरा रहता है व पाचन तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित होता है । वजन बढ़ने से लोगों में ब्लड प्रेशर, हार्मोन व शुगर का स्तर भी बिगड़ता है, जिससे डायबिटीज का खतरा होता है ।

अमेरिका में 2012 में कार्डियोलोजी सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए शोध के नतीजों से पता चला कि दिल की समस्याओं का खतरा भी नींद से जुड़ा है । इसमें शोधकर्ताओं ने 3,000 से अधिक लोगों के डाटा का विश्लेषण किया । पाया गया कि पर्याप्त नींद ना लेने वालों में एनजाइना का खतरा दोगुना व कोरोनरी धमनी की बीमारी का जोखिम 1.1 गुना बढ़ जाता है .।

अमेरिका के नेशनल स्लीप फाउंडेशन की सलाह है कि वयस्क लोगों को हर रात सात से नौ घंटे तक सोना चाहिए । एक ताजा शोध के अनुसार हर रोज बीस मिनट तक एक्सरसाइज़ करने से असामयिक मौत का खतरा 16 से 30 फीसदी तक घट जाता है । इसलिए लंबा ज़िंदगी जीना है तो हर रात अच्छी नींद लेना भी उसी ओर एक कदम है ।


देर रात तक जागने से होसकती है ये दो बीमारिया


जल्दी व देर से सोने वाले लोगों की स्वास्थ्य पर एक नया अध्ययन हुआ है जिसके नतीजे 'निशाचरों' को परेशान कर सकते हैं. इस अध्ययन में सामने आया है कि देर रात तक जागने वालों को जल्दी मौत का खतरा होता है. इसके अतिरिक्त उन्हें मनोवैज्ञानिक रोग व सांस लेने संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं. लेकिन क्या देर रात तक जागना वाकई आपके लिए बुरा है? क्या इसका मतलब है कि 'रात के उल्लुओं' को अपनी आदत बदलकर प्रातः काल की गौरैया बन जाना चाहिए?

दफ़्तर के दिनों में कमबख़्त अलार्म की कर्कश ध्वनि आपको बिस्तर से उठाकर अलग कर देती है.शनिवार आते-आते आप नींद के मारे थक चुके होते हैं व फिर अपने रोज के समय से ज़्यादा सोते हैं . यह सुनने में सामान्य लगता है, लेकिन यह इस बात का इशारा है कि आपको पर्याप्त नींद नहीं मिल रही व आप 'सोशल जेट लैग' के शिकार हैं . 'सोशल जेट लैग' हफ़्ते के दिनों के मुकाबले छुट्टी के दिन में आपकी नींद का अंतर है, जब हमारे पास देर से सोने व देर से उठने की 'सहूलियत' होती है .

सोशल जेट लैग जितना ज़्यादा होगा, स्वास्थ्य की दिक्कतें उतनी ज़्यादा होंगी . इससे दिल की बीमारी व मेटाबॉलिक परेशानियां हो सकती हैं . म्यूनिख की लुडविग-मैक्समिलन यूनिवर्सिटी में क्रोनोबायोलॉजी के प्रोफेसर टिल रोएनबर्ग के मुताबिक, "यही वो चीज है जिसके आधार पर ऐसे अध्ययन प्रातः काल देर से उठने वालों के लिए स्वास्थ्य से जुड़े खतरे ज़्यादा बताते हैं . "
स्लीप एंड सर्कैडियन न्यूरोसाइंस इंस्टीट्यूट व नफील्ड लेबोरेट्री ऑफ आप्थलमोलॉजी के प्रमुख रसेल फोस्टर कहते हैं कि अगर आप प्रातः काल जल्दी उठने वालों से देर रात तक कार्य करवाएं तो उन्हें भी सेहत की दिक़्कतें होंगी .

'यह इंसान का जीव विज्ञान है'

तो देर रात जागने वाले क्या करें? क्या वीकएंड पर मिलने वाली अपनी बेशकीमती लंबी नींद का त्याग कर दें? प्रोफेसर रोएनबर्ग कहते हैं, "यह सबसे बेकार बात होगी." वह मानते हैं कि देर रात तक जागना अपने आप में बीमारियां पैदा नहीं करता. वह कहते हैं, "अगर आप पांच दिनों तक कम सोए हैं तो आप अपनी नींद की भरपाई करेंगे ही व ऐसा आप तभी कर पाएंगे जब आपके पास वक़्त होगा."

ऐसा इसलिए भी है कि हमारे सोने-जागने का समय सिर्फ़ आदत या अनुशासन का मसला नहीं है. यह हमारी बॉडी क्लॉक पर निर्भर करता है जिसका 50 प्रतिशत भाग हमारे जीन तय करते हैं. बाकी 50 प्रतिशत भाग हमारा पर्यावरण व आयु तय करती है। इंसान बीस की आयु में देर से सोने के चरम पर होता है व आयु बढ़ने के साथ हमारा बॉडी क्लॉक पहले की ओर खिसकता जाता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ सरे में क्रोनोबायोलॉजी के प्रोफेसर मैल्कम वॉन शांत्ज कहते हैं, "हमने ये मान लिया है कि देर तक जागने वाले लोग किसी कार्य के नहीं होते व आलसी होते हैं, लेकिन असल में यह इंसानी जीवविज्ञान है." यही विज्ञान है जो उल्लुओं व प्रातः काल चहचहाने वाले पक्षियों को भी प्रभावित करता है.

जानकार मानते हैं कि वीकएंड पर जल्दी उठ जाने से आप अपनी जेनेटिक प्रवृत्तियों से नहीं उबर पाएंगे बल्कि इससे आप अपनी नींद से व वंचित ही होते रहेंगे. इसके बजाय अपने बॉडी क्लॉक को गुमराह करने का बेहतर उपाय रोशनी से जुड़ा है. हमारा बॉडी क्लॉक सूरज के उगने व छिपने से प्रभावित होता है, लेकिन हम में से बहुतों को दिन में कम सूरज की रोशनी नसीब होती है व रात में कृत्रिम प्रकाश ज़्यादा मिलता है.

इससे हमें नींद जल्दी नहीं आती. यह देर रात तक जागने वालों की आम समस्या है, जो पहले से ही अपने जीव विज्ञान के चलते 'देरी' के शिकार होते हैं. प्रातः काल सूरज की रोशनी लेकर व रात में कृत्रिम रोशनी - खास तौर पर हमारे फोन व लैपटॉप से आने वाली नीली रौशनी- से खुद को बचाकर हम अपने बॉडी क्लॉक को जल्दी नींद बुलाने की ट्रेनिंग दे सकते हैं.

नींद पर वैज्ञानिक अध्ययन करने वाले कहते हैं कि इसमें दफ़्तरों, स्कूलों व समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे रात में जागने वालों को स्वीकार करें. इसकी आरंभ इस तरह हो सकती है कि ज़्यादा कर्मचारियों को शाम से देर रात तक कार्य करने की इजाजत दी जाए.

इसके अतिरिक्त प्रोफेसर फॉस्टर के मुताबिक, लोग अपने बॉडी क्लॉक के हिसाब से दफ़्तरों में कार्यकरेंगे तो यह ज़्यादा तर्कपूर्ण होगा. इससे कर्मचारियों का प्रदर्शन भी बेहतर होगा व चौबीस घंटे चलने वाले कारोबार को इससे लाभ ही होगा.

प्रोफेसर रोएनबर्ग एक कदम आगे बढ़कर कहते हैं, "यह समाज का कार्य है कि वह इसका ख़्याल रखे.यह समाज का कार्य है कि वह इमारतों में व रोशनी बढ़ाए, साथ ही नीली रोशनी को कम करे ताकि लोग अपने बॉडी क्लॉक को बदले बिना टीवी देख सकें."

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