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दमा मरीजों के लिए डाइट प्लान, क्या खाएं और किसे कहें ना

दमा मरीजों के लिए डाइट प्लान, क्या खाएं और किसे कहें ना






अस्थमा में क्या खाना चाहिए : अस्थमा यानि दमा एक ऐसी बीमारी है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। इसके कारण श्वास नलियों में सिकुड़न और सूजन आ जाती है, जिससे सांस लेने में परेशानी, सांस लेते समय आवाज आना, सीने में जकड़न, खांसी आदि समस्‍याएं होने लगती हैं। अस्थमा रोगी को अपने खान-पान का ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि गलत खान-पान के कारण यह समस्या और भी बढ़ जाती है। आज विश्व अस्थमा दिवस हम आपको बताएंगे कि आपको क्या खाना चाहिए और किस चीज से परहेज करना चाहिए।






अस्थमा में करें इन चीजों का सेवन






1. अस्थमा में आप अपने दिन की शुरुआत ग्रीन या ब्लैक टी से कर सकते हैं। इसके अलावा मछली का तेल, अखरोट, कद्दू के बीज, सोया पनीर, सोयाबीन, दालचीनी, सरसों का तेल, नट्स और सूखे अंजीर का सेवन भी अस्थमा रोगी के लिए फायदेमंद होता है।


2. अस्थमा में आटे की रोटी, जई आटे की रोटी, दलिया और मूंग की दाल आदि का सेवन करें।

3. अपनी अस्थमा डाइट में हरी सब्जियां, शलगम, पुदीना, अदरक, लहसुन, आलू, ब्रोकोली और तुलसी आदि को शामिल करें।
4. अस्थमा रोगी को विटामिन सी का से भरपूर चीजों का ज्यादा सेवन करना चाहिए। इसके लिए आप ज्यादा से ज्यादा खरबूजा, तरबूज, पपीता, अंगूर, कीवी, आंवला, अनार, सेब, खजूर, अंजीर और शहतूत, संतरा, नींबू, अंगूर, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर, शिमला मिर्च और ब्रसेल्स स्प्राउट का ज्यादा सेवन करें।


5. अस्थमा रोगियों को बीटा कैरोटीन से भरपूर भोजन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। बीटा कैरोटीन का सबसे बढ़िया स्रोत गाजर है। इसलिए गाजर का खूब सेवन करें। गाजर के अलावा बीटा कैरोटीन खुबानी, चेरी, हरी मिर्च, शिमला मिर्च और शकरकंद में भी पाया जाता है।


6. अस्थमा रोगी अदरक, अनार के रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में 2-3 बार लेना चाहिए। इसके अलावा आप 1 चम्मच अदरक के रस को 1/2 कप पानी में मिलाकर रात को सोने से पहले लें। कच्ची अदरक का सेवन भी अस्थमा रोगी के लिए फायदेमंद होता है।


7. अस्थमा में कॉफी पीना फायदेमंद माना जाता है लेकिन दिन में 2 बार से ज्यादा कॉफी का सेवन न करें। इसके अलाव तुलसी की चाय या फिर 1 कप गर्म पानी में 2-3 पत्ते तुलसी के डालकर पीने से भी अस्थमा रोगी को फायदा मिलता है।

अस्थमा में इन चीजों से करें परहेज




1. अस्थमा रोगी जितना हो सके तले हुए भोजन से दूरी बना लें। इसके अलावा आपको अस्थमा में ज्यादा नमक से भी परहेज करना चाहिए।


2. वसा युक्त आहार जैसे- जंक फूड, डिब्बाबंद भोजन, मिर्च-मसालेदार या बासी भोजन और मक्खन आदि का सेवन भी अस्थमा रोगी के लिए हानिकारक होता है।


3. अस्थमा में चावल, दही, दूध, छाछ, अमचूर, इमली, शराब, मांस, चिकन, गुड़, चना और आइसक्रीम से भी परहेज करें।


4. अंडे और उससे बने उत्पादों का सेवन भी अस्थमा रोगी को नहीं करना चाहिए। इससे आपको स्किन एलर्जी की समस्या हो सकती है। इसलिए अस्थमा में अंडे या उससे बनी चीजों से परहेज रखें।
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अस्‍थमा की समस्या : अस्थमा सांस लेने से संबधित बीमारी है। यह बीमारी ज्यादातर प्रदूषण के कारण बढ़ती जा रही है। अस्थमा दो प्रकार का होता है बाहरी अस्थमा और आंतरिक अस्थमा। बाहरी अस्थमा पालतू जानवरों और धूल-मिट्टी से एलर्जी के कारण होता है और आंतरिक अस्थमा होने का कारण रसायनिक तत्वों जैसे सिगरेट का धुआं, पेंट वेपर्स आदि का सांस लेने द्वारा शरीर में चले जाना है। इसके अलावा कारखानों, वाहनों से निकलने वाले धूएं के कारण भी लोग अस्थमा के शिकार हो रहें हैं। आज हम आपको अस्थमा के लक्षण और इससे बचने के लिए घरेलू उपचार बताएंगे, जिसे इस्तेमाल करके आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।




अस्थमा के लक्षण
1. बलगम वाली या सूखी खांसी रहना।
2. सांस लेने में मुश्किल होना। इसके अलावा सांस लेते हुए आवाज आना और घबराहट होना।
3. ठंडी हवा में सांस लेने पर हेल्थ प्रॉब्लम होना।
4. जरा-सा चलने पर सांस फूलना।

5. व्यायाम करने पर स्वस्थ ज्यादा खराब होना।

अस्थमा के घरेलू उपचार

1. अदरक में बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं जो अस्थमा की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। अदरक की चाय बना कर लहसुन की दो पीसी हुई कलियां मिलाएं। इस चाय सुबह और शाम रोजाना पीएं।

2. अस्थमा से राहत पाने के लिए लहसुन बहुत कारगार उपाय है। इसे इस्तेमाल करने के लिए 30 मि.ली. दूध में लहसुन की 5 कलियां डाल कर उबालें। हर रोज इसका सेवन करें।

3. सांस लेने में तकलीफ होने पर पानी में अजवाइन मिलाकर इसे उबालें और इसकी भाप लें। इससे सांस लेने में किसी भी तरह की तकलीफ नहीं होगी।
4. दमा होने पर लौंग का काढ़ा भी काफी फायदेमंद है। इसे बनाने के लिए 125 मि.ली. पानी में 4-5 लौंग डाल कर 5 मिनट तक उबालें। फिर इसे छान कर 1 चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर गर्म-गर्म पीएं। यह काढ़ा हर रोज 2-3 बार पीएं।

5. मुठ्ठीभर सहजन के पत्तियां 180 मि.मी. पानी में 5 मिनट उबालें और फिर इसे ठंडा करके इसमें 1 चुटकी नमक, काली मिर्च और नीबू का रस मिला कर रोगी को पिलाएं।

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सांस लेने की समस्या : आज दुनियाभर में विश्व अस्थमा दिवस मनाया जा रहा हैं। दरअसल, इस खास दिन को विश्व भर में अस्थमा यानी दमा पीड़ित मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए मनाया जाता है। अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जिससे लाखों लोग झूंझ रहे हैं। अस्थमा यानी दमा की शिकायत ज्यादातर बच्चों में होती हैं लेकिन इसका असर बड़ों में भी देखने को मिलता है। अस्थमा बीमारी में सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, खासी अन्य आदि कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं अस्थमा अटैक का मुख्य कारण शरीर में मौजूद बलगम और संकरी श्वासनली है लेकिन इसके अलावा अन्य कई कारण हैं, जिससे अस्थमा अटैक हो सकता है। आज हम आपको उन्हीं कारणों के बारे में बताएगे, जिनसे अचानक दमे का अटैक होता है। आप इन कारणों को पहचानकर कुछ सावधानियां बरत सकते है और अस्थमा अटैक से बच सकते है।

1. बदलता मौसम


बदलते मौसम और उमस का हमारी श्वास नली पर काफी गहरा असर पड़ता है। जो लोग घंटो तक उमस में संपर्क में रहते है उन्हें भी अस्थमा अटैक हो सकता है। 

2. धूल और मिट्टी 

कई बार हम धूल-मिट्टी वाले कमरे या जगह पर चले जाते हैं, जिससे धूल-मिट्टी हमारी श्वास नली द्वारा शरीर में जाती है और अस्थमा अटैक हो जाता है। 

3. गंदा बिस्तर

अधिकतर लोग इस कारण को नजरअंदाज कर देते है लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दे कि अगर लंबे समय तक बिस्तर यानी तकिया या चादर न बदली जाए तो भी इस बीमारी की खतरा बढ़ जाता है।

4. धुएं के संपर्क में रहना




लगातार बढ़ता प्रदूषण भी अस्थमा अटैक की वजह है। दरअसल, अक्सर हम जाने-अनजाने में प्रदूषित धुएं वाले एरिया में आते-जाते रहते हैं, जिससे धुआं हमारे शरीर में जाता है और अस्थमा अटैक आ जाता है। 

5. ब्रीथिंग एक्सरसाइज न करना

हमारा लाइफस्टाइल इतना बदल चुका है कि कोई न कोई बीमारी हमें आसानी से अपनी चपेट में ले लेती है, जिसमें अस्थमा अटैक भी आम है। ऐसे में अपने बिजी शेड्यूल से थोड़ा सा समय निकालकर ब्रींथिंग एक्सरसाइज जरूर करें। 


6. सफाई न रखना


अस्थमा पीडित मरीज के कमरे की नियमित सफाई न करने से भी अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बेहतर है कि अस्थमा पीड़ित के आसपास को पूरी तरह साफ रखे।

7. पालतू जानवर 

अस्थमा पीड़ित मरीज के आस-पास कोई जानवर या फिर घर में पालतू जानवर रखने से भी अस्थमा अटैक हो सकता हैं। 






8. ज्यादा नमक खाना






वैसे तो सभी तीखा खाना पंसद करते है। वहीं अगर अस्थमा पीड़ित का ज्यादा मात्रा में में नमक खाए तो अटैक हो सकता है इसलिए नमक से परहेज रखें। 






9. धूम्रपान और शराब 
अस्थमा पीड़िता का अधिक मात्रा में धूम्रपान करना और शराब पीने से भी अस्थमा अटैक आ सकता है। 


10. खांसी-जुकाम




कई बार सर्दियों में खांसी-जुकाम की प्रॉबल्म से गुजरना पड़ता है, वहीं अगर अस्थमा पीड़ित का ठीक से खांसी-जुकाम का इलाज न किया जाए तो उसे अस्थमा अटैक हो सकता है।




दमा (Asthma)
आज बहुत से लोग सांस की बीमारी से ग्रसित हैं और उनके पास कोई हल नहीं हैं, इसलिए ये पोस्ट उनके लिए रामबाण हैं, तो आप इसको ज़रूर शेयर कीजिये।

दमा (Asthma) आज के प्रदूषण भरे वातावरण की देन हैं।

दमा वस्तुतः एलर्जी के कारण होता है। जब श्वसनी (bronchus) में हवा भर जाता है तब फेफड़ों में सूजन होने लगता है जिसके फलस्वरूप साँस लेने में मुश्किल होने लगती हैं। फेंफड़ो के अंदर जाने वाला वायु मार्ग छोटा या संकीर्ण हो जाने के कारण दमा का एटैक होता है। तब लोग सामान्य साँस भी जोर-जोर से लेने लगते हैं और नाक से जब साँस लेना दूभर हो जाता है तब मुँह से साँस लेने लगते हैं। दमा के रोगी को साँस लेने से ज़्यादा साँस छोड़ने में मुश्किल होती है। एलर्जी के कारण श्वसनी में बलगम पैदा हो जाता है जो कष्ट को और भी बढ़ा देता है। एलर्जी के कारण दमा होने के बहुत से कारणों में से कुछ इस प्रकार है-

• घर के धूल भरे वातावरण के कारण
• घर के पालतू जानवरों के कारण
• रास्ते के धुँए और धूल के कारण

• सुगंधित सौन्दर्य (perfumed cosmetics) प्रसाधनों के कारण

• सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस (bronchitis) और साइनसाइटिस (sinusitis) के संक्रमण के कारण

• ध्रूमपान करने के कारण

• अधिक मात्रा में शराब पीने के कारण

• व्यक्ति विशेष के कुछ विशेष खाद्द-पदार्थों से एलर्जी के कारण

• महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण

• कुछ विशेष प्रकार के दवाओं के कारण

• सर्दी के मौसम में ज़्यादा ठंड पड़ जाने के कारण

एलर्जी के बिना भी दमा का रोग शुरू हो सकता हैं-

• तनाव या भय के कारण

• अतिरिक्त मात्रा में प्रोसेस्ड या जंक फूड खाने के कारण

• ज़्यादा नमक खाने के कारण

• आनुवांशिकता (heredity) के कारण आदि।

लक्षण-

दमा के लक्षण की बारे में बात करते ही पहली बात जो मन में आती है, वह है साँस लेने में कठिनाई। दमा का रोग या तो अचानक शुरू होता है या खाँसी, छींक या सर्दी जैसे एलर्जी वाले लक्षणों से शुरू होता है।

• साँस लेने में कठिनाई होती है

• सीने में जकड़न जैसा महसूस होता है
• दमा का रोगी जब साँस लेता है तब एक घरघराहट जैसा आवाज होती है

• साँस तेज लेते हुए पसीना आने लगता है
• बेचैनी-जैसी महसूस होती है

• सिर भारी-भारी जैसा लगता है
• जोर-जोर से साँस लेने के कारण थकावट महसूस होती है

• स्थिति बिगड़ जाने पर उल्टी भी हो सकती है आदि।

1. एक लीटर पानी में दो बड़ा चम्मच मेथी के दाने डालकर आधा घंटे तक उबालें, उसके बाद इसको छान लें। दो बड़े चम्मच अदरक का पेस्ट एक छलनी में डालकर उस रस निकाल कर मेथी के पानी में डालें। उसके बाद एक चम्मच शुद्ध शहद इस मिश्रण में डालकर अच्छी तरह से मिला लें। दमा के रोगी को यह मिश्रण प्रतिदिन सुबह पीना चाहिए। पढ़े- वायरल फीवर से राहत पाने के छह घरेलु उपचार

2. दो छोटे चम्मच आंवला का पावडर एक कटोरी में ले और उसमें एक छोटा चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें। हर रोज सुबह इस मिश्रण का सेवन करें।

3. एक कटोरी में शहद लें और उसको सूंघने से दमा के रोगी को साँस लेने में आसानी होती है।

4. ज़रूरत के अनुसार सरसों के तेल में कपूर डालकर अच्छी तरह से गर्म करें। उसको एक कटोरी में डालें। फिर वह मिश्रण थोड़ा-सा ठंडा हो जाने के बाद सीने और पीठ में मालिश करें। दिन में कई बार से इस तेल से मालिश करने पर दमा के लक्षणों से कुछ हद तक आराम मिलता है।

5. लहसुन फेफड़ो के कंजेस्चन को कम करने में बहुत मदद करता है। दस-पंद्रह लहसुन का फाँक दूध में डालकर कुछ देर तक उबालें। उसके बाद एक गिलास में डालकर गुनगुना गर्म ही पीने की कोशिश करें। इस दूध का सेवन दिन में एक बार करना चाहिए।

6. गरमागरम कॉफी पीने से भी दमा के रोगी को आराम मिलता है। क्योंकि यह श्वसनी के मार्ग को साफ करके साँस लेने की प्रक्रिया को आसान करता है।

7. एक कटोरी में एक छोटा चम्मच अदरक का रस, अनार का रस और शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें। उसके बाद एक बड़ा चम्मच इस मिश्रण का सेवन दिन में चार से पाँच बार करने से दमा के लक्षणों से राहत मिलती है।

8. अर्जुन की छाल का चूर्ण एक छोटा चम्मच गाय के दूध में या पानी में इतना उबाले के पानी आधा रह जाए, और इस को हर रोज़ रात को सोते समय पिए। इसमें एक चुटकी भर दाल चीनी भी डाल दे।

9. जब भी दूध पिए देसी गाय का ही पिए और इसमें अम्बा हल्दी एक चुटकी डाल कर पिए।

10. इस के साथ में आज कल बाजार में कुछ आयुर्वेद कंपनिया कुछेक प्रोडक्ट ले कर आई हैं, जिन्हे मैंने खुद कई मरीजों पर इस्तेमाल किया हैं और उस के बहुत ही पॉजिटिव रिजल्ट मिले हैं, आप ये भी ज़रूर इस्तेमाल करे। ये हैं एलो वेरा, नोनी जूस, तुलसी, सी बकथॉर्न फ्रूट जूस, और स्पिरिलुना।

सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में ३० मिली एलो वेरा, ३० मिली नोनी जूस, १० मिली सी बकथॉर्न जूस डाल कर एक गोली स्पिरिलुना खाइये। ये ३ महीने तक करना हैं, और ये प्रयोग अनेक लोगो पर सफलता पूर्वक आज़माया हैं।

इनकी डिमांड हमारे पास बहुत आती हैं बहुत सी कंपनिया इनको बना रही हैं, और हम भी थोड़े दिनों में ये प्रोडक्ट आपको ऑनलाइन प्रोवाइड करवा देंगे। अगले महीने तक हम ऑनलाइन आयुर्वेद का स्टोर खोल रहे हैं जहा सभी भारतीय आयुर्वेद की कम्पनियो के सभी उत्पाद आपको मिल जाएंगे।


साधरणतः जाड़े के मौसम में ठंड के कारण दमा का रोग भयंकर रूप धारण करता है। इसलिए इस समय इन घरेलु उपचारों के सहायता से दमा रोग काबु में किया जा सकता है, साथ ही कुछ बातों पर ध्यान से दमा रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है-
• घर को हमेशा साफ रखें ताकि धूल से एलर्जी की संभावना न हो

 योग-व्यायाम और ध्यान (meditation) के द्वारा खुद को शांत रखें

• मुँह से साँस न लें क्योंकि मुँह से साँस लेने पर ठंड भीतर चला जाता है जो रोग को बढ़ाने में मदद करता है।

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