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क्या आप भी रोकते हैं अपनी छींक तो हो जाओ सावधान,


क्या आप भी रोकते हैं अपनी छींक तो हो जाओ सावधान, जा सकती है आपकी जान
160 किमी/घंटा की तीव्रता से निकलती है छींक। 





"आनछ्हूऊऊऊ...जैसे ही वो छींका, सारे लोग उसकी तरफ पलट के ऐसे देखने लगे जैसे उसने कुछ ऐसा काम कर दिया हो जो किसी ने आज तक कभी किया ही ना हो।" ऐसी ही सिचुएशन अक्सर हम सब के साथ भी होती है। जब हमें पब्लिकली कुछ ऐसा करना होता है जो अन्य लोगों के सामने हमें शर्मिंदा कर सकता है। इसी के चलते हम पब्लिकली ऐसा कुछ करने से बचते हैं। 

छींक आना ऐसा ही एक काम है। चूंकि ये एक नेचुरल प्रोसेस है लेकिन कई बार लोग अपनी छींक रोकने लगते हैं। इसके लिए कभी वो अपनी नाक और मुँह बंद करके तो कभी अपना ध्यान भटकाकर छींक रोकने का प्रयास करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि छींक रोकने से न केवल हमारी श्वास नली नहीं बल्कि हमारे शरीर के अन्य हिस्सों पर भी गहरा असर होता है। यहां तक कि इससे आपके दिमाग की नसें भी फट सकती हैं।

तो आइये आपको बताते हैं कि छींक रोकने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं? 
अच्छे स्वास्थ्य का कारक 


लोगों की एक बात आपने नोटिस की होगी कि छींक आने पर वो अपनी छींक दबा लेते हैं या पब्लिकली छींकने से कतराते हैं। लेकिन आपकी छींक आपके अच्छे स्वास्थ्य का सूचक होती है।


छींक आने की वजह 



दरअसल जब कोई बाहरी तत्व या संक्रमण श्वास के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा होता है तो हमें छींक आ जाती है। ऐसे में शरीर को नुकसान पहुंचाने वाला वो तत्व शरीर के बाहर ही रह जाता है। 


160किमी/घंटे की रफ्तार 


जब भी आप छींकते हैं तो आपके शरीर से 160किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवा निकलती है। ऐसे में अगर आप छींक रोकने की कोशिश करेंगे तो खुद ही सोच लीजिए इसका आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा? 




अन्य अंगों पर प्रभाव



जब आप अपनी छींक रोकते हैं तो हवा की गति का दबाव आपके शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है। खास तौर पर आपके कान पर तो इसका सबसे गहरा असर होता है। 

इयरडम फट सकता है 


अगर आप लगातार छींक रोक रहे हैं तो इससे आपका इयरडम फट सकता है, जिस वजह से आप हमेशा के लिए बहरे हो सकते हैं।

दिमाग की नसों पर प्रभाव 



छींक को रोकने से दिमाग की नसों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। यह मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर देते हैं। इस वजह से नसों के फटने की आशंका रहती है। 


आँखों पर असर 



कानों के अतिरिक्त छींक रोकने से आंखों की रक्त वाहिनियां प्रभावित हो जाती हैं। आंखों की पुतलियों के सफेद वाले भाग में रक्त वाहिनियों के टूटने की आशंका बनी रहती है।


बैक्टीरिया का निष्कासन 


इसके अलावा छींक रोकने से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया बाहर नहीं निकल पाते। इस वजह से बीमार होने की आशंका बनी रहती है। इससे हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। 


दिल का दौरा 


छींक रोकने से गर्दन में चोट या मोच तो आ ही जाती है। इसके अतिरिक्त दिल का दौरा पड़ने की आशंका भी रहती है क्योंकि इसका प्रभाव दिल और फेफड़ों पर भी पड़ता है।


तो फिर शरमाइए मत। 



तो फिर हिचकिचाइए मत। छींक आना एक नेचुरल प्रोसेस है। इसे रोकने का प्रयास करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। छींकिये और स्वस्थ रहिए।

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