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ये हैं वे 7 योग क्रियाएं, जिनके करने से देखते ही देखते ही गायब हो जाता है मोटापा

ये हैं वे 7 योग क्रियाएं, जिनके करने से देखते ही देखते ही गायब हो जाता है मोटापा


मोटापा जहां अपने आप में एक समस्या है वहीं यह अनेक रोगों को भी न्योता देता है। इससे व्यक्ति अपनी उम्र से कहीं बड़ा दिखाई देता है और हृदय संबंधी समस्याओं का भी यह प्रमुख कारण है। योग प्वाइंट टीम ने मोटापा दूर करने के लिए योग क्रियाओं का सेट तैयार किया है, जिसमें सूर्य नमस्कार, 4 आसन और 2 प्राणायाम है। इनका नियमित अभ्यास करने से जल्दी वजन कम होता है और शरीर की कार्य क्षमता भी बढ़ती है।

नौकासन :


आकाश की ओर मुंह कर के पीठ के बल सीधे लेट जाएं। हाथों को सीधा कमर से सटा कर रखें और अपनी हथेलियों को ज़मीन की ओर रखे। अब धीरे-धीरे अपनी गर्दन ऊपर की ओर ले जाएं और अपने हाथ सीधे रख कर ही गर्दन के समान ऊपर उठाएं और साथ-साथ उसी समान अपने पैर भी उठाएं और एक नौका का रूप लें। इसी मुद्रा में आप करीब 25 से 30 सेकंड बने रहें। फिर धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आये। प्रत्येक आसन 3 बार दोहराएं।
लाभ : पेट और नाभी के आसपास के भाग को सुडौल बनाने के लिए यह नौकासन गुणकारी है। इस आसन के प्रभाव से हमारी पाचन प्रणाली भी मज़बूत होती है। जब खाना ठीक से पाचन होता है तो शरीर में एक्सट्रा फैट जमा नहीं होता है और वज़न भी काबू में रहेता है। नौकाआसन करने से हमारी शरीर की छोटी आंत और बड़ी आंत को व्यायाम मिलता है। इसे नित्य करने से आंतों से जुड़ी बीमारियाँ होने का खतरा नहीं रहेता है।
विशेष : यह आसन गर्भवती महिलाओं के लिए बिलकुल वर्जित है। कमर से जुड़ी किसी भी प्रकार की तकलीफ से पीड़ित व्यक्ति इस आसन का प्रयोग डॉक्टर की सलाह से ही करें। शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द होने पर या सामान्य से अधिक खिंचाव महसूस होने पर तुरंत सामान्य अवस्था में लौट जाएं।

बालासन : 
आसन जमाने के बाद घुटनों के बल बैठ जाएं। ऐडियों पर शरीर का वज़न बनाते हुए और सांस अंदर लेते हुए आगे की ओर झुकें। अब आपके हाथ सीधे होने चाहिये और हथेलियां ज़मीन की ओर लगी होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करें की आप की छाती आपकी जांघों और घुटनों के अग्र भाग को छूनी चाहिये। साथ ही आप का मस्तक ज़मीन को छूना चाहिये। इस आसन को 3 से 5 मिनट करें।


लाभ : यह आसन तेज़ी से वज़न कम करता है। पेट, कमर और जांघों की चर्बी इस आसन से तुरंत कम होने लगती है। बालासन के नित्य प्रयोग से शरीर की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं। अगर पेट की तोंद बाहर निकली हुई है, और नाभी शर्ट के बटन से बाहर जांकने लगी है तो बालासन आप की यह समस्या कुछ ही दिनों में दूर कर देगा।

सेतुबंध आसन :
सेतुबंध आसन सर्वप्रथम आसन जमा कर पीठ के बल लेट जाएं। मुख को आकाश की ओर रखे। उसके बाद अपने दोनों घुटनों को एक साथ मोड़ कर दोनों पैरों के तलवों को ज़मीन पर अच्छे से जमा लें। अपने दोनों हाथ सीधे रख कर ज़मीन पर लगा लें। अब साँस बाहर निकालते हुए रीढ़ की हड्डी की ज़मीन की ओर धीरे से दबाएं। इसके बाद गहरी सांस अंदर हुए अपनें पैरों को ज़मीन पर दबाएं। अपने कमर के भाग को जितना हो सके उतना ऊपर की ओर उठाएं।


लाभ :
इस आसन से शरीर की रीढ़ की हड्डी मज़बूत और सीधी होती है। कमर के भाग के लिए यह एक उत्तम कसरत है। सेतुबंध आसन मेरुदंड को लचीला बनाता है। इस आसन से गर्दन तनाव मुक्त हो जाती है।

योगा साइकलिंग : 
आसन बिछा कर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। आप का मुख आकाश की ओर होना चाहिये। अब अपने दोनों पैर ज़मीन से ऊपर उठा लें। जैसे आप असली में साइकिल चलाते हैं ठीक वैसे ही गोल गोल पैडल हवा में चलाने लगें। याद रहे की यह आसन करते समय आप के दोनों हाथ सीधे ज़मीन से लगे होने चाहिये और हथेलियां ज़मीन की ओर होनी चाहिये। थोड़ी देर सीधी साइकलिंग करें, फिर उतनी ही देर तक उल्टी पेडलिंग करते हुए साइकलिंग करें। लाभ : यह कसरत पैरों की चरबी दूर करती है। योगा साइकलिंग करने से घुटने और पेट के मसल्स मज़बूत होते हैं। योगा साइकलिंग से गेस की तकलीफ भी दूर होती है।

कपालभाती प्राणायाम : 
योग मैट पर बैठकर अपने बायें पैर को दायीं जंघा के ऊपर और दाये पैर को बायीं जंघा के ऊपर लगा लें। यह आसन जमाने के बाद, सांसों को बाहर छोड़ना होता है और पेट को अंदर की ओर धकेलना होता है। इस क्रिया को 5 मिनट तक करना चाहिए। पेट की चर्बी घटाने के लिए यह एक रामबाण उपाय है। साथ ही चहेरे की सुंदरता में भी निखार आता है। अगर किसी को आंखों के नीचे काले घेरे हो जाने की शिकायत रहती हो तो उन्हें कपालभाती आसन रोज करना चाहिए। पेट की तकलीफ़ों से पीड़ित व्यक्ति भी कपालभाती से पेट के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। कब्ज़, पेट दर्द, खट्टी डकार, एसिडिटी और अन्य प्रकार की पेट की बीमारियां कपालभाती करने से खत्म हो जाती हैं। कपालभाती करने से शरीर में पॉजीटिव ऊर्जा का संचार होता है और यादाश्त भी बढ़ती है। यह प्राणायाम गले से जुड़े हर रोग को खत्म कर देता है।


विशेष : सारण गाठ के रोगी, प्रेग्नेंट महिलाएं और गैस्टिक अल्सर के पीड़ित भी इस आसन को ना करें।

अनुलोम विलोम प्राणायाम :

किसी अच्छी जगह का चुनाव कर के आसन जमा लें। सामान्य मुद्रा में बैठ कर अपने पैर क्रॉस कर के मौड़ लें (पालथी लगा लें / जैसे खाना खाने ज़मीन पर बैठते हैं वैसे)। अब अपने दाए हाथ को दाए घुटने पर आराम से टीका दें, और बाए हाथ के अंगूठे से नाक का बाया छिद्र बाधित करें और दाए छिद्र से गहरी साँस अंदर लें। फिर बाया छिद्र मुक्त करें और दाया छिद्र बाधित करें और अंदर ली हुई सांस बाए छिद्र से बाहर निकालें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 से 15 बार दोहराएं।


अनुलोम विलोम प्राणायाम को नाड़ी शोधन भी कहा जाता है। यह शरीर में रक्त प्रवाह दुरुस्त रखने में मददगार होता है। मानव शरीर में सब से ज़्यादा चरबी, पेट, कमर और जाँघों के आसपास जमा होती है। इस आसन के प्रभाव से पेट अंदर हो जाता है। शरीर में फुर्ती महसूस होती है, साथ ही शरीर का अतिरिक्त वज़न भी काबू में आ जाता है।

सूर्य नमस्कार :
यह कहा जाता है कि सूर्य नमस्कार सूर्य करने वाले व्यक्ति को और कोई आसन करने की आवश्यकता नहीं रहती है। यह एक सम्पूर्ण व्यायाम है। इसीलिए इसे सभी व्यायामों का आधार बताया गया है।

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