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विटामीन बी12 की कमी: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज


विटामीन बी12 की कमी: घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज
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अपने बिस्तर पर बैठी थकी महिला. अंडे, दूध, और लाल मांस का पास से चित्र जिनमें विटामिन बी12 अधिक होता है.
परहेज और आहारलेने योग्य आहार

दूध और दूध उत्पाद विटामिन बी12 के अच्छे स्रोत हैं।
इनमें पोल्ट्री उत्पाद, मछली, फलियाँ, पनीर, अंडे और मेवे भी आते हैं।
मछली और रेड मीट विटामिन बी12 के उत्तम स्रोत हैं। पोल्ट्री और अण्डों में भी विटामिन बी12 होता है।
यदि आप पशु उत्पाद नहीं खाते तो बी12 युक्त मल्टीविटामिन और विटामिन बी12 की शक्ति से परिपूर्ण अनाज का दलिया नाश्ते में लेना लाभकारी होगा।
कुछ नाश्ते का कुछ प्रकार का दलिया, पोषक खमीर और इसके अन्य खाद्य उत्पाद जैसे कि ब्रेड में विटामिन बी12 की शक्ति होती है।
खमीरीकृत सोयाबीन और खमीरीकृत सब्जियाँ जिनमें चाय की पत्तियाँ भी हैं।
वनस्पति जगत में, समुद्री पौधे (जैसे केल्प), समुद्री काई (जैसे कि नीली-हरी काई), खमीर (जैसे कि ब्रेवर खमीर), और खमीरीकृत वनस्पति आहार (जैसे कि टेम्फ, मिसो, या टोफू) आदि सामान्य रूप से खाए जाने वाले विटामिन बी12 आहार हैं।


इनसे परहेज करे
तले हुए वसा युक्त आहार, नमक, शक्कर और अन्य शक्कर युक्त उत्पाद तथा संतृप्त वसा से समृद्ध आहारों का उपयोग कम करें।
घरेलू उपाय (उपचार)विटामिन बी12 से समृद्ध आहार खाएँ। विटामिन बी12 मिश्रित आहार शाकाहारियों के लिए कहे जा सकते हैं।


विटामीन बी12 की कमी: लक्षण और कारण


लक्षणलक्षणों में:

साँस लेने में कमी।
वजन में गिरावट।
हाथों, पैरों और पंजों में अनजाने प्रकार की अनुभूति, झुनझुनी या सनसनाहट।
चलने में कठिनाई (लड़खड़ाना, संतुलन में समस्या)।
सूजी हुई लाल जीभ और मसूढ़ों से ख़ून आना।
त्वचा का रंग पीला पड़ना (पीलिया)।
पेलपिटेशन (अनियमित ह्रदयगति)।
सोचने और तर्क में कठिनाई (संज्ञानात्मक) या स्मरण शक्ति की कमी।
असमंजस।
चिढ़चिढ़ापन।
अवसाद।
असामान्य व्यवहार अथवा संभ्रम।
दस्त या कब्जियत।
माँसपेशियों की कमजोरी।
थकावट।
रक्ताल्पता।
संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होना।शिशुओं में विटामिन बी12 की कमी यदि पता ना लगे अथवा उसकी चिकित्सा ना हो तो यह तंत्रिका तंत्र को गंभीर और स्थायी क्षति पहुँचा सकती है।


कारणविटामिन बी12 की कमी कई कारणों से हो सकती है, जिससे शरीर की उच्च कार्यक्षमता वाली लाल रक्त कणिकाओं के बनाने की क्षमता प्रभावित होती है। इनमें से कुछ स्थितियाँ हैं:

परनिसियस एनीमिया (स्व-प्रतिरक्षक विकार)।
पेट अथवा आँतों की समस्या जैसे कि क्रोन डिजीज, सेलियक डिजीज।
वे ड्रग जो विटामिन B12 के अवशोषण में अवरोध करते हैं जैसे कि मेटफोर्मिन।
वे शुद्ध शाकाहारी व्यक्ति जो पशु अथवा डेरी उत्पाद बिलकुल नहीं लेते।
अत्यधिक मदिरापान।
पेट अथवा छोटी आंत की शल्यक्रिया।शुद्ध शाकाहारी माताओं से उत्पन्न शिशुओं में भी 
विटामीन बी12 की कमी: रोकथाम और जटिलताएं
रोकथाम (बचाव)
अधिकतर लोग विटामिन बी12 की कमी से, विटामिन बी12 से भरेपूरे आहार जैसे माँस, पोल्ट्री उत्पाद, समुद्री भोजन, दूध, पनीर, और अंडे लेकर बच सकते हैं।
शाकाहारियों में और सीमित पोषण उपयोग की चिकित्सीय स्थिति से गुजर रहे लोगों के लिए बी12 युक्त मल्टीविटामिन और विटामिन बी12 की शक्ति से परिपूर्ण अनाज या दलिया नाश्ते में लेना लाभकारी होगा।
ध्यान देने की बातें
हाथों और पैरों की अँगुलियों में झुनझुनी और सनसनाहट।
असमंजस की स्थिति और मानसिक स्तर में परिवर्तन (डिमेंशिया)।
डॉक्टर को कब दिखाएँ
साँस लेने में कठिनाई।
सूजी हुई लाल जीभ और मसूढ़ों से ख़ून आना।
त्वचा का रंग पीला पड़ना।यदि आप इस तरह के लक्षण अनुभव कर रहे हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें

अत्यंत थकावट, ऊर्जा की कमी, और खड़े होते समय या मेहनती काम के बाद सिर भारी होना।
एकाग्रता की समस्या।
साँस की कमी।
सूजी हुई लाल जीभ और मसूढ़ों से ख़ून आना।
विटामिन बी12 की कमी हो सकती है।

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