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टॉप 10 योग विधियाँ और लाभ – बेहतरीन कलेक्शन


टॉप 10 योग विधियाँ और लाभ – बेहतरीन कलेक्शन
उत्तानपादासन
योग विधियाँ औषधि के समान हैं। जो शरीर के समस्त विकारों को दूर करती हैं। यह केवल शारीरक विकारों को दूर नहीं करती हैं बल्कि मानसिक विकारों को भी दूर करती हैं, क्योंकि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है इसलिए शरीर के साथ साथ मन का भी स्वस्थ रहना बेहद ज़रूरी होता है। अन्य चिकित्सा के द्वारा केवल रोगग्रस्त अंगो का ही निदान होता है, जबकि योग के द्वारा उसके सम्पूर्ण शरीर की चिकित्सा की जाती है।

योग चिकित्सा के मुख्य साधनों में व्यायाम, आसान, मुद्राएं, प्राणायाम और ध्यान आदि है इसके साथ ही सात्विक आहार का भी अपना एक अलग महत्व है। योग से शरीर का शोधन होता है शरीर पवित्र और मन शुद्ध होता है। पद्मासन तथा भद्रासन ये शरीर की सभी व्याधियों को दूर करने में सहायक है। पश्चिमोत्रानासन पेट का मोटापा कम करता है तथा जठराग्नि को प्रदीप्त करता है। मयूरासन वायु रोगों को संयमित करता है और हाथ पैर और गर्दन को निरोग व हष्ट पुष्ट करता है।
योग विधियाँ और लाभ

तो देर न लगाएं, योग को आज ही अपने जीवन में अपनाएं। तो आज हम लाइफ स्टाइल टिप्स के द्वारा पोस्ट की गई तथा आप सब के द्वारा विशेष रूप से पसंद की जाने वाली योग को करने के टॉप 10 योग विधियाँ और लाभ के कलेक्शन को आपसे साझा करने जा रहे हैं। इनमें से किसी भी पोस्ट को पढ़ने के लिए आप इस पोस्ट पर क्लिक करके योग करने की पूरी विधि और लाभ पढ़ सकते हैं…
1. योगासन के नियम और विधियाँ
2. सूर्यनमस्कार करने के 12 आसन व विधियाँ 

हम सभी यह जानते है की शरीर के सही तरह से काम करने के लिए हमारे शरीर को व्यायाम की जरुरत है| आपने अक्सर देखा होगा यदि आप बहुत समय तक किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं करते है, तो वो बंद पड़ जाती है, या फिर ठीक से काम नहीं करती| उसी प्रकार हमारे शरीर में भी एक जगह बैठे रहने की वजह से जंग लग जाती है|

ऐसे में हमारा शरीर पर मोटापा बिह बढ़ते जाता है, और छोटे मोटे काम करने में ही शरीर थक जाता है| इसके अतरिक्त आज की जीवन शैली में तो हमारा खान पान भी सही नहीं है| जिसके चलते हमारे शरीर को कई बीमारिया घेर लेती है|

इन् सब चीज़ो से निजाद पाने का कोई तरीका है तो वो है योग| योग के जरिये आप ना केवल अपने शरीर का स्वास्थ्य सुधार सकते है, बल्कि यह आपके शरीर को ऊर्जा से भर देता है, जिससे आप आलस्य छोड़ देते है| योगो में सबसे ऊपर किसी का नाम है तो वो है सूर्यनमस्कार का|

यह अपने आप में इतना शक्तिशाली है की केवल इसका अभ्यास इंसान को सम्पूर्ण योग व्यायाम के बराबर लाभ पहुँचाता है| इसके नियमित अभ्यास करने से मानव का शरीर निरोग और स्वस्थ होता है| इसे कोई भी कर सकता है| स्त्री, पुरुष, बाल, युवा, वृद्ध सबको इससे फायदा मिलता है| यहाँ जानिए Surya Namaskar Benefits in सूर्य नमस्कार के लाभ




यह शरीर के सभी हिस्सों, मांसपेशिया और नसों को क्रियाशील करता है।
इसे करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, और कमर लचीली होती है|
सूर्य नमस्कार ह्रदय और फेफड़ो की कार्यक्षमता को बढ़ाने में भी लाभदायक होता है।
सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से बालो का सफ़ेद होना और झरना बंद होता है|
इसका अभ्यास त्वचा के लिए भी फायदेमंद है, इससे त्वचा के कई रोग दूर होते है|
सूर्य नमस्कार क्रोध को नियंत्रित करने में भी कारगर होता है, इससे शरीर का संतुलन बना रहता है, मन शांत रहता है, और आप पूरा दिन अच्छा महसूस करते है।
Benefits of Surya Namaskar कई है| सूर्य नमस्का‍र को हम खुले वातावरण में करते है, जिससे की शरीर को विटामिन-डी मिलता है और हड्डियां मजबूत होती हैं।
यह शरीर की सभी महत्वपूर्ण ग्रंथियों, जैसे की पैंक्रियाज, थायरॉइड, पिट्यूटरी ग्लैंड आदि को संतुलित करने में सहायक है|
इसको नियमित तौर पर करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है। मानसिक तनाव, अवसाद, क्रोध, चिड़चिड़ापन, भय आदि के निदान के लिए इसे जरूर करना चाहिए|
सूर्य नमस्कार से पेट में होने वाली सभी समस्या भी जल्दी ठीक होने लगती है, पाचनक्रिया बढ़ाने के लिए भी यह उत्तम आसान है|
इसे रोज करने से रक्त संचालन सुचारू होता है, ब्लड प्रेशर की आशंका घटती है। मेटाबोलिज्म सुधरता है तथा शरीर के सभी अंग सशक्त और क्रियाशील होते हैं।
सूर्य नमस्कार वजन घटाने के लिए बेहद लाभदायक माना गया है| इससे ना केवल आपका वजन कम होता है, बल्कि यह आपके शरीर को पूरी तरह से शेप में भी लाता है।

किस वक्त और कैसे कर सकते है सूर्य नमस्कार

Surya Namaskar Yoga करने के लिए प्रातः काल का समय सबसे बेहतर होता है| इसको पूरब दिशा के तरफ मुह करके करना चाहिए| इसमें तक़रीबन बारह स्तिथिया होती है| इस आसान को करने के लिए आपको किसी चीज़ की जरुरत नहीं होती है, ना ही किसी तरह का व्यय लगता है| बस एक दरी बिछाये और सूर्य नमस्कार करना शुरू कर दे|
इस आसान को करते वक्त एक बात का ख्याल रखे की इसे करते वक्त जब पीछे की और मुड़ते है तो अंदर की तरफ सांस ली जाती है, और जब आगे की और झुखा जाता है, तब सांस को छोड़ना होता है|

सूर्य नमस्‍कार को करते वक्त 12 सूर्य मंत्रो का उच्चारण किया जाता है| इन 12 उच्चारणों के विशेष लाभ है| आइये जाने उन सूर्य मंत्रो के बारे में|

1. ॐ मित्राय नमः 2. ॐ रवये नमः 3. ॐ सूर्याय नमः 4.ॐ भानवे नमः 5.ॐ खगाय नमः 6. ॐ पूष्णे नमः 7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः 8. ॐ मरीचये नमः 9. ॐ आदित्याय नमः 10.ॐ सवित्रे नमः 11. ॐ अर्काय नमः 12. ॐ भास्कराय नमः 13. ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः

ऊपर आपने जाना Surya Namaskar Benefits in Hindi. लेकिन यदि आपको इसका ज्ञान नहीं है तो खुद से इसे करना कभी भी शुरू ना करे क्युकी इस सही तरह से ना करने पर आपके शरीर पर गलत प्रभाव भी पड़ सकता है| इसे सिखने के लिए योग प्रशिक्षक का ही सहारा ले|
3. ताड़ासन करने की विधि और लाभ
4. धनुरासन करने की विधि और लाभ

5. वज्रासन करने की विधि और लाभ



योगासन मानसिक शांति का अपूर्व साधन है। योगासन से चित्त में एकाग्रता एवम् स्थिरता आती है, मन की एकाग्रता से विकसित होने वाली बुद्धि और स्मरण शक्ति का विकास होता है। वहीं योग के द्वारा अनेक मानसिक रोगों का शमन भी होता है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसलिए योग को अपने जीवन में एक मुख्य स्थान देकर एक ख़ुशहाल और स्वस्थ जीवन को प्राप्त करें। तो आइए आज हम लोग वज्रासन करने की विधि के बारे में जानें।
वज्रासन योग

वज्रासन का अर्थ है बलवान स्थिति। इस आसन को करने से शरीर वज्र के समान मज़बूत बनता है और पाचनशक्ति, वीर्यशक्ति तथा स्नायुशक्ति भी ठीक रहती है।


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वज्रासन करने की विधि
एक आसन बिछाएं और इस पर दोनों पैर सामने की तरफ़ फैलाकर बैठ जाएं।
इसके बाद बायें पैर के घुटने को मोड़कर इस प्रकार बैठे के पैरों के पंजे पीछे और ऊपर की और हो जाएं।
अब दाएं पैर का घुटना भी मोड़कर इस प्रकार बैठे की पैरों के पंजे पीछे और ऊपर की ओर हो जाएं और नितम्ब दोनों एड़ियों के बीच में आ जाएं।
दोनों पैर के अंगूठे एक दूसरे से मिलाकर इस प्रकार रखें कि दोनों एड़ियों के बीच अंतर बना रहे।
शरीर सीधा रखें। दोनों हाथों को घुटनों के ऊपर रखें।
शरीर को ढीला रखें। आँखें बंद करें और धीरे धीरे लम्बी गहरी साँसे लें और छोड़ें।
इस आसन में आप जितनी देर तक आराम से बैठ सकते हैं। इस आसन को आप तब तक कर सकते हैं।
इस आसन को 5 मिनट से 60 मिनट तक कर सकते हैं।
वज्रासन के लाभ
आँखों की रोशनी तेज़ होती है।
मन की चंचलता दूर होकर व्यक्ति बुद्धिवान बनता है।
भोजन के बाद इस आसन में बैठने से पाचन शक्ति तेज होती है। कब्ज़ में राहत प्राप्त होती है।
स्त्रियों के मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या दूर होती है।
नियमित करने से घुटनों का दर्द, गठिया रोग दूर हो जाता है।
सावधानियां

जिन लोगों को जोड़ो में दर्द हो वे लोग वज्रासन न करें।

अगर वज्रासन करते समय आपको कमर दर्द, कमज़ोरी या चक्कर आने लगे तो इस आसन को बंद कर अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।


6. उष्ट्रासन करने की विधि और लाभ

क्रोध मनुष्य का वह अवगुण है, जिस पर उसका कोई संयम नहीं रहता। परिणाम स्वरूप से आपसी सम्बंधों में अक्सर दरारें आ जाती हैं। क्रोध हमारी दिनचर्या और सफलता दोनों को बाधित करती है। अतः एक सफल जीवन जीने के लिए क्रोध पर नियंत्रण करना अति आवश्यक है। उष्ट्रासन योग आपको एक ऐसी जीवनशैली देता है, जिसके द्वारा आप न केवल अपने क्रोध पर संयम कर सकते हैं, बल्कि योग को अपनाकर तन और मन से स्वस्थ भी रह सकते हैं। आज क्रोध को कम करने के लिए उष्ट्रासन करने की विधि को सीखेंगे।

उष्ट्रासन के चरण । Ustrasana Steps
भूमि पर एक मोटी दरी बिछाकर अपने घुटनों के बल बैठ जाएँ।
घुटने को अपने कूल्हे की चौड़ाई के बराबर फैलाएं, इससे ज़्यादा नहीं।
अपने दोनों हाथ कमर पर इस प्रकार रखें, कि उंगलियां पेट की ओर हों और अंगूठा पीठ में गुर्दो पर, इस स्थिति में गर्दन को पीछे लटकाते हुए कमर को पीछे झुकाएं।
इस स्थिति में कुल्हे आपके घुटने के ठीक ऊपर होने चाहिए।
जब आप पूरी तरह झुक जाएं तो हाथों को कमर से हटाकर पैरों के तलवों पर ले जाएं, श्वास भरकर पेट को आगे की ओर खीचें और गर्दन को पीछे की ओर मोड़ते हुए शरीर को पूरी तरह खीचें।
अब गहरी साँस लीजिए, थोड़ी देर इस स्थिति मे रुके फिर धीरे धीरे पुन: प्रारम्भ की स्थिति में आ जाएं।
थोड़ी देर रुकें। धीरे धीरे पुनः अभ्यास करें।
उष्ट्रासन के लाभ
पीछे की तरफ मुड़ने वाले इस आसन से हमारे स्नायु तंत्र और मेरुदंड पर असर पड़ता है और आपको तनाव भरी परिस्थितियों में स्वयं पर नियंत्रण करने में आसानी होती है।
पीछे की ओर मुड़ते हुए अपनी श्वसन क्रिया पर ध्यान लगाने से मन शांत रहता है। जिससे अहम भाव को समाप्त करने में सफलता मिलती है।
यह आसन सर्वाइकल स्पांडलायटिस में बहुत लाभकारी है।
यह पाचन शक्ति को ठीक कर पेट के विकारों को दूर करता है।
यह कमर और उदर की स्थूलता को नष्ट करके उसे लचीला बनाता है।

7. सुखासन करने की विधि और लाभ
आज की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर कोई तनाव ग्रस्त है, जिस कारण से मनुष्य का स्वभाव काफ़ी चिड़चिड़ा हो गया है। जिस कारण से उसके आपसी रिश्तों मे भी दरारें पड़ जाती हैं। ऐसे मे ज़रूरी है कि मनुष्य अपनी ज़िंदगी मे योग को अपनाये। योग को नियमित रूप से करने से मानसिक शांति मिलती है और मन के साथ साथ तन भी स्वस्थ रहता है। आज ऐसे ही एक आसन सुखासन करने की विधि के बारे मे जानेंगे। जिसको नियमित रूप से करने से आपको कई लाभ प्राप्त होंगे। सुखासन का शाब्दिक अर्थ है सुख देने वाला आसन, यह आसन बहुत ही आसान है।

सुखासन करने की विधि । Sukhasan Steps
सुखासन करने के लिए भूमि पर दरी या मैट बिछाकर बैठ जाएँ।
अब दोनों पैर सामने और सीधे रखें।
फिर एक पैर की एड़ी अपने दूसरे पैर की जंघा के नीचे लें आयें और यही क्रम दूसरे पैर के साथ करें। (पालथी मोड़ कर बैठ जाएँ)
अब आप अपनी पीठ और मेरूदंड को सीधा करें। ध्यान रहे कि अधिक झुक कर न बैठें।
कंधों को थोड़ा ढ़ीला छोड़ें, अब गहरी सांस अन्दर की ओर ले फिर धीरे धीरे सांस को छोड़ें।
हथेलियों को एक के ऊपर एक अपनी पालथी पर रखें।
सिर को थोड़ा ऊपर उठायें और आखे बंद कर लें।
अपना ध्यान अपनी श्वसन क्रिया पर लगायें, लम्बी गहरी साँस लेते रहें।
अगर प्रारम्भ में कठिनाई आती है तो आप दीवार से टिक कर बैठ सकते हैं।

सही समय: कभी भी एकांत में
दिशा: अगर अध्यात्मिक दृष्टी से योग कर रहे हैं तो उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख रखें।
सुखासन के लाभ
इस आसन के नियमित अभ्यास से आपको मानसिक सुख और शांति की भी अनुभूति होगी।
अगर आप चिंता, अवसाद या अति क्रोध से ग्रस्त हैं, तो इस आसन को करने से बहुत लाभ प्राप्त होगा।
इस आसन को करने से चित्त शांत और मन एकाग्रचित्त होता है।
यह आसन बैठने की आदत को सुधारता है।
यह आसन मानसिक चंचलता को भी कम करता है।
यह आसन मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) की परेशानियों से भी मुक्ति दिलाता है।
सावधानियाँ
जिन लोगों को घुटनों के जोड़ों में परेशानी हो, वे लोग यह आसन न करें या किसी एक्स्पर्ट के निगरानी में योग करें।
रीढ़ की हड्डी में किसी तरह की चोट हो तो सावधानी पूर्वक करें कोशिश करें, अधिक लम्बे समय तक न बैठें।
अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझ कर उसके अनुरूप आसन करें।
8. सर्वांगसन करने की विधि और लाभ

सर्वांगासन योग की विधि और फायदे।

सर्वांगासन का नाम ही अपने आप में सारी कहानी बयान कर देता है, सर्वांगासन अर्थात सर्व अंग आसन, इस आसन को करने से शरीर के सभी अंगो में रक्त परिसंचरण (ब्लड सर्कुलेशन) हो जाता है, पांवों से ले कर सर तक खून गतिमान हो कर शरीर के हर अंग को नयी उर्जा प्रदान करता है, इसका नित्य अभ्यास शरीर को १०० वर्ष तक निरोगी बनाता है।

1. सबसे पहले किसी साफ जगह पर चटाई या दरी को बिछाएं।

2. पीठ के बल लेटें। और दोनों पैरों को एक साथ मिला लें।

3. दोनों हाथों को जमीन पर रखें। और शरीर को ढीला रखें।

4. सांस लेते हुए आराम-आराम से पैरों को बिना मोड़े उपर की तरफ उठाएं।

5. जैसे-जैसे पैर उपर की तरफ उठाएं वैसे-वैसे कमर को भी उपर की तरफ उठाएं।

6. पैरों और पीठ को 90 डिग्री तक उठाने का प्रयास करें।

7. हाथों के जरिए पीठ और कमर को उपर की तरफ उठाएं।

8. यह योग करते समय मुख उपर आकाश की तरफ होना चाहिए। और कुहनियां जमीन से टिकी हुई हों।

9. इस योग को करते वक्त हाथों से पीठ को सहारा देते समय हाथों की उंगलियां एक दूसरे के सामने हों। और अंगूठों की दिशा पेट की तरफ हों।

10. अब वापस पहले की अवस्था में आएं।

11. यह आसन शरीर की क्षमता के अुनसार ही करें।
सर्वांगासन करते वक्त की सावधानियां:

जिन लोगों को कमर का दर्द हो, गर्दन में दर्द हो, चक्कर आने की समस्या, घेंघा, गर्भावस्था में, दिल के मरीज हों वे इस आसन को न करें।
सर्वांगासन के लाभ :

1. आँखों कि रौशनी बढ़ाने के लिए ये बेहद कारगर है, मगर ध्यान रखे इस आसन को करते समय आँखे बंद होनी चाहिए।

2. सर्वांगासन वजन कम करने में सहायक है।

3. इस आसन को करने से दुर्बलता और थकान दूर होती है।

4. ये आसन थाइरोइड ग्रंथि को गतिशील बनाता है।

5. कंधे और पीठ दोनों मजबूत बनते हैं।

6. पाचन व कब्ज की दिक्कते दूर करने में सर्वांगासन फायदेमंद है।

7. वे लोग जो दमा से पीड़ित हैं उनके लिए यह आसन बेहद फायदेमंद है।

8. इस आसन को करने से मस्तिष्क में खून का संचार होता है और दिमाग भी तेज होता है।

9. यह आसन महिलाओं की मासिक धर्म और गर्भाशय से होने वाली समस्याओं को ठीक करता है।

10. चेहरे पर नयी ताजगी और गज़ब कि कान्ति बिखर जाती है इस आसन को नियमित करने से।

११. बालों के गिरने, झड़ने, पकने कि समस्या में बहुत कारगर है ये आसन।

सर्वांगासन आसन शरीर को कई रोगों से बचाता है इसलिए इसका नियमित अभ्यास करना चाहिए। शरीर की क्षमता के अनुसार ही इस आसन को करें और धीरे-धीरे इस आसन में टिके रहने का समय भी बढ़ाएं।




9. भरद्वाजासन करने की विधि और लाभ
भरद्वाजासन, भरद्वाज मुनि द्वारा बनाया गया यह आसान एक ऐसा आसन है, जिसे युवा से लेकर वृद्ध तक सभी लोग कर सकते हैं। इस आसन को करने से पाचन सम्बन्धी परेशानियों में लाभ मिलता है। यह आसन को करने से पीठ दर्द, नींद न आना, कमर दर्द में जैसी परेशानियों में राहत मिलती है। इस आसन को करने से न केवल तन स्वस्थ रहता है, बल्कि मन भी स्थिर और शांत रहता है। आज हम आपको भरद्वाज आसन करने की विधि को बतायेंगे।

भरद्वाज आसन विधि । Bharadvaja’s Asana
एक दरी या आसन बिछाकर भूमि पर बैठ जाएँ और अपने पैर सामने सीधे रखें, हाथों को सामान्य मुद्रा में रखें।
अब घुटनों को कुछ इस तरह मोड़ें कि आपका पूरा भार दायें कूल्हों पर हो।
अब आप अपनी दायें पैर की एड़ी को बाएँ पैर की जंघा पर रखें।
गहरी लंबी सांस लें और रीढ़ की हड्डी को सीधा करें, फिर धीरे धीरे साँस छोड़ें और शरीर के ऊपरी भाग को घुटने के विपरीत दिशा में दायीं ओर मोड़ते जाएँ।
आप अपना सीधा हाथ सहारे के लिए दायीं ओर और उल्टा हाथ बाएँ घुटने पर रख सकते हैं।
हर सांस के साथ रीढ़ की हड्डी को सीधा करते जाएँ।
अपना सिर बायीं ओर मोड़कर अपने बाएँ कंधे के ऊपर से देखें और थोड़ी देर तक इसी अवस्था में रहें।
अब धीरे धीरे सांस छोड़े और सामान्य अवस्था में आ जाएँ।
अब यही प्रक्रिया विपरीत दिशा में करें (अर्थात्‌ अभी जिस दिशा में किया है उसकी विपरीत दिशा में)।
सावधानियाँ
जिन लोगों को रीढ़ की हड्डी या कमर से सम्बंधित गंभीर समस्या है, वे भरद्वाजासन को न करें। यदि करें तो किसी एक्सपर्ट कि निगरानी में करें।
रक्तचाप की परेशानी, दस्त, नींद न आना, सर दर्द इन सब परेशानी से ग्रसित लोग यह आसन न करें।
भरद्वाजासन के लाभ
भरद्वाजासन से शरीर के ऊपरी भाग की मांसपेशियों में खिंचाव होता है, जिससे वर्षों की अकड़ी हुई मांसपेशियाँ खुल जाती हैं और पीठ दर्द की शिक़ायत भी दूर हो जाती है।
इस आसन को करने से आपके पेट पर खिंचाव आता है, जिस कारण कम पर जमी हुई वसा कम हो जाती है।
यह आसन आपके उदर में मौजूद अंगों पर सकारात्मक असर करता है, जिससे कब्ज़ और पाचन सम्बन्धित बीमारियाँ दूर होती हैं।
इस आसन से आपके मस्तिष्क पर अच्छा असर पड़ता है, इससे आप रिलैक्स फ़ील करते हैं तथा शरीर और मन का संतुलन भी बना रहता है। जिससे आप तनाव मुक्त रहते हैं।
यह आपके शरीर में रक्त संचार को सुचारू बनाये रखता है।
यह निचले पीठ दर्द, सायऐटिका दर्द (Sciatica Pain) और गर्दन के पीछे का दर्द कम करता है।



10. उत्तानपादासन और उसको करने के लाभ


मानव शरीर के लिए योग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका सम्बंध शरीर के अंगों, अन्तःकरण और आत्मा से है। योग के द्वारा हम शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्त हो जाते हैं और हम शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। हमारी बौद्धिक शक्ति भी तीव्र होती है। योग के कारण कई लोगों का जीवन तनाव मुक्त हो गया है। योग के कारण कई लोग आज ख़ुशहाल और समृद्ध जीवन जी रहे हैं। आप भी योग को अपने जीवन में अपनाएं। तो आइए ऐसे ही एक आसान उत्तानपादासन के करने की विधि को सीखते हैं –
उत्तानपादानसन के चरण


उत्तानपादासन करने की विधि भूमि पर लेटकर और पैरों को ऊपर उठाकर जो मुद्राएं बनाई जाती हैं, उसे उत्तानपादासन कहते हैं।
सबसे पहले भूमि पर एक सपाट आसन बिछा लें। अब इस आसन पर पीठ के बल लेट जायें और दोनों पैरों को आपस में सटा कर रखें।
सारे शरीर को ढीला रखें। दोनों हथेलियां भूमि पर स्थिर रहें।
अब दोनों पैरों को धीरे धीरे ऊपर की ओर सीधा उठायें। पैरों को 30 डिग्री ऊपर लें जाकर सांस रोकें, जितने समय तक आप सरलता से रोक सकें।
फिर आप सांस को छोड़ते हुए पैरों को धीरे धीरे भूमि पर लाएं।
पुनः सांस को भरते हुए पैरों को ऊपर की ओर उठायें। अब 60 डिग्री का कोण बनायें। सांस रोककर, जितनी देर आप रोक सकें, रुकें।
फिर सांस छोड़ते हुए पैरों को भूमि पर ले आयें।
प्रारम्भ में इस क्रिया को तीन बार और तीन मिनट तक करना चाहिए। जिनके पास समय का आभाव न हो वे इस क्रिया को अधिक बार और अधिक समय तक भी कर सकते हैं।
इस आसन से पेट और पैरों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है अतः झटके के साथ पैरों को भूमि पर न लायें। ऊपर ले जाते समय भी धीरे धीरे ले जायें। वापस आते समय भी पैरों को धीरे धीरे भूमि पर रखना चाहिए।
उत्तानपादासन के लाभ
उत्तानपादासन करते समय मुख्य रूप से पैर उठाते समय मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। जिससे पैर में होने वाली सनसनाहट एवं दर्द की शिक़ायत दूर हो जाती है। महिलाओं के लिए यह आसन सर्वोत्तम हैं।
इस आसन को करने से पैरों में सूजन व दर्द इत्यादि की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।
इस आसन को करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है और यकृत अपना कार्य सुचारू रूप से करता है।

आशा है इस योगासन से आपको लाभ अवश्य प्राप्त होगा।




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