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श्वास क्रियाओं के सात सरल अभ्यास-


श्वास क्रियाओं के सात सरल अभ्यास-
Breathing exercise

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इसमें योगियों की सात छोटी श्वास क्रिया (Breathing exercise) दी गयी है । यह एक दूसरे से बिलकुल अलग है और प्रत्येक का उद्देश्य भिन्न है । यद्यपि ये क्रियाएं छोटी क्रियाएँ के नाम से कही गयी हैं फिर भी ये बहुत ही फायदे की है । वे श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है पर प्राणायाम का अभ्यास शुरू करने से पहले इनका अभ्यास उपयोगी सिद्ध हुआ है।

अभ्यास 1 –
सीधे खड़े हों। बाहें बगलों में नीचे लटकती रहें।
पूरी सांस भीतर खींचे।
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भुजाओं को कड़ा किये हुए ऊपर उठाएँ । जब तक हाथ सिर के ऊपर जाकर एक दूसरे को छू न लें।
हाथों को ऊपर ही रखे हुए सांस को भीतर कुछ सेकंड तक रोके रखें।
हाथों को धीरे धीरे फिर बगलों में ले आएँ। साथ ही साथ धीरे धीरे सांस भी छोड़ते जाएँ।
सफाई करने वाली क्रिया करें।

Note:
सफाई करने वाली क्रिया – सीधे खड़े होकर पूरी सांस भीतर भरें और रोकें। भुजाएं सामने सीधी फैला दें। धीरे धीरे हाथों को कन्धों के पीछे लाएँ। पुट्ठों को सिकोड़े । उन पर जोर डालें की मुट्ठी कांपने लगे। फिर मुट्ठियां आगे लाएं, पीछे लाएं कई बार। मुंह के द्वारा सांस जोर से बाहर निकाले।
फेफड़े साफ़ करने वाली क्रिया – पूरी सांस भर के क्षणिक रुकें। होठों को गोल बनाकर बिना गाल फुलाएं रुक रुक कर थोड़ी सांस जोर से फेंके। पूरी हवा जोर लगाकर निकलते जाएं।
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अभ्यास 2 –
सीधे खड़े हों और बाहों को सीधा अपने सामने लाये।
पूरा सांस भीतर खीचें और उसे रोके रखे।
झोंका देकर बाहों को पीछे फेंके, जहाँ तक वे जा सके। फिर पहली स्तिथि में लाये । ऐसा कई बार करें। तबतक साँस को भीतर ही रोके रखे।
मुहँ से सांस को छोड़ दे।
सफाई करने वाली क्रिया करें ( नोट संख्या एक के अनुसार)

अभ्यास 3 –
सीधे खड़े हों , बाहें सीधी और सामने हो।
पूरा सांस भीतर खींचे।
बाँहों को वृत्त में झोंका देकर पहले पीछे से आगे फिर आगे से पीछे कई बार घुमाएं , तब तक सांस को रोके रखें। बाहों को वायु चक्की की भांति बारी बारी से भी घुमा सकते है।
सफाई करने वाली क्रिया करें। ( नोट संख्या 1 के अनुसार)
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अभ्यास 4 –
नीचे मुँह कर के जमीन पर लेट जाएं, ताकि हथेलियां बगलों के पास जमीन पर रहे।
पूरा सांस भीतर खींचे और उसे रोके रहें।
शरीर को कड़ा करें और अपनी भुजाओं के बल से उसे ऊपर उठाएं , जब तक भार हाथों , पैरो और उँगलियों पर न आ जाये।
अपने को पहले स्थिति पर नीचे ले जाएं।
मुंह से सांस को छोड़ दें।
सफाई करने वाली क्रिया करे (नोट संख्या 1 के अनुसार)

अभ्यास 5–
सीधे खड़े हो , हथेलियां एक दीवार पर रख लें।
पूरा सांस भीतर खींचे और उसे रोके।
छाती को दिवार पर ले जाए जिससे शरीर का कुल भार हाथों पर रहे।
भुजा के ही पुट्ठो के बल से अपने शरीर को दीवार से अलग हटाएं। शरीर को कड़ा ही रखे।
मुँह से सांस को छोड़ दें।
सफाई करने वाली क्रिया करें (नोट संख्या 1 के अनुसार)

अभ्यास 6 –
सीधे खड़े हो, हाथ दोनों ओर कमर पर हो और कोहनियां बाहर निकली हों।
पूरी सांस भीतर खीचें और उसे रोके।
टांगो और नितंबो को कड़ा रखते हुए अच्छी तरह आगे की और झुकें , साथ ही साथ धीरे धीरे साँस को भी छोड़ते जाएँ।
पहली स्तिथि पर आये और पूरी सांस भीतर खीचें।
पीछे की और झुके और धीरे धीरे सांस भी छोड़ते जाएँ ।
पहली स्तिथि पर आएं और पूरी सांस भीतर खींचे।
अपने बगल की और झुकें और धीरे धीरे सांस को छोड़ते जाएँ। ( यह क्रिया एक बार दाहिनी और फिर वैसे ही दूसरी बाई और झुकें।

अभ्यास 7 –
पहला सीधे खड़े हों या बैठे , ताकि रीढ़ की हड्डी सीढ़ी रहे ।
पूरा सांस भीतर खींचे, परंतु लगातार एक धारा में खींचने के बजाय कई बार थोड़ा थोड़ा करके दूसरी सांस जल्दी जल्दी खींचे, एक सांस में मिलते जाएं , जब तक हवा से पूरे फेफड़े न भर जाएं।
चन्द सेकंड सांस को रोके रखें।
नाक से आराम के साथ लंबी सांस छोड़ें।
फेफड़े साफ़ करने वाली क्रिया कर डालें नोट संख्या 2 के अनुसार)

यह क्रिया आम जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होते है। अतः इसे अपनाये और रोजाना करें। आयुर्वेद के अनुसार आप अपने रोगों को स्वयं जानकर भी उसके मुताबिक अपना इलाज स्वयं कर सकते है । आयुर्वेद में अपने रोगों को पहचानने के लिए आठ सरल उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अष्टविध रोग परीक्षा भी कहा जाता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी के लिए दिखाये गये लिंक और जाएँ –

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