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ध्यान की चमत्कारी विधि विपश्यना को अपनाएं और स्वस्थ शरीर पाए

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ध्यान की चमत्कारी विधि विपश्यना को अपनाएं और स्वस्थ शरीर पाए


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आज के समय में लगभग हर व्यक्ति का जीवन किसी न किसी तरह के तनाव और संघर्ष के साथ आगे बड़ रहा है। इसका सीधा सा अर्थ है कि हम अपने बहुमूल्य जीवन को केवल काट रहे है। आज हमारे जीवन का उद्देश्य केवल पैसा कामना ही रह गया है। जिस कारण हम शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होते जा रहे है।

आगे बढ़ने की होड़ और उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखकर हम सभी दिन रात भागदौड़ कर रहे है। परंतु क्या आपने कभी सोचा है? भविष्य बनाने के चक्कर में आप अपने वर्तमान को भी खराब कर रहे है, क्योंकि सभी के दिमाग में एक ही बात चल रही होती है कि अगर हमारा भविष्य अच्छा होगा तो हमे कोई चिंता नहीं रहेगी।

बहुत अच्छी बात है कि हम अपने भविष्य के बारे में इतना सोच रहे है, लेकिन इसके लिए अपने वर्तमान को चिंता में डालना सही नहीं है। अगर आप भी इस तरह का जीवन जी रहे है तो उससे मुक्ति पाने का एक सबसे अच्छा और बेहतर तरीका है ध्यान। अपनी नियमित दिनचर्या में अन्य कार्यों की तरह ही आप मेडिटेशन को भी इसका हिस्सा बनाये। आइये हम जानते है Vipassana Meditation Technique in Hindi.

Vipassana Meditation Technique in Hindi: जाने विधि और लाभऐसा कहा जाता है कि भगवान् गौतम बुद्ध ने इस प्राचीन ध्यान विधि विपश्यना को पुनर्जीवित किया था। इसे आत्मनिरीक्षण की एक प्रभावशाली विधि कहा जाता है। यह प्राणायाम और साक्षीभाव का मिला जुला रूप है। हमारे ऋषि-मुनि इस विधि को चिरंतन काल से करते आ रहे है। भगवान् बुद्ध ने इसे सरल बनाया, इस विधि के अनुसार श्वास के प्रति सजग रहना, उसे देखना अर्थात उसे महसूस करना। विपश्यना धरण की क्रिया को आप कई तरीके से कर सकते है। आइये जानते है विधियां-
विधिविपश्यना की पहली और सबसे सरल विधि है श्वास के प्रति सजग रहना अर्थात उठते बैठते, सोते जागते, बोलते समय या मौन अवस्था में अपना पूरा ध्यान केवल अंदर आने वाली और बाहर जाने वाली श्वास पर रखें। सामान्यतः हम लोग अपनी सांस पर इतना ध्यान नहीं देते है। परंतु अब से आप श्वास के आवागमन को महसूस करना शुरू करें कि अब सांस ली अब छोड़ दी। साथ ही श्वास लेने और छोड़ने के बीच में आने वाले गैप को भी सहजता से लें। इस बात का ध्यान रखें है कि यह सब आपको जबरदस्ती नहीं करना है बल्कि जब भी आपका ध्यान इस ओर चले जाये, तब इसे करें।

श्वास पर ध्यान लगाने के अलावा दूसरी स्टेप में आप इस ओर भी ध्यान केंद्रित करें और देखें कि एक विचार आया और गया या क्रोध आया और गया। ये सभी तरीके आपको तब अपनाने है। जब आपका ध्यान इस तरफ अपने आप चला जाए। यहाँ आपको किसी भी तरह का दबाव नहीं डालना है।
विपश्यना क्यों करना चाहिए?दरअसल, शरीर और आत्मा के बीच श्वास एक पुलिया की तरह है जो केवल हमारे विचारों और भावों को ही संचालित नहीं करता है, बल्कि शरीर को भी जीवित बनाए रखता है। इसलिए श्वास ही जीवन है। ओशो के अनुसार, अगर तुम श्वास को ठीक से देखते रहो, तो अनिवार्य रूपेण, अपरिहार्य रूप से, शरीर से अलग तुम जागने लगोगे।

उन्होंने कहा, जो श्वास को देखेगा, वह श्वास से भिन्न हो गया और जो श्वास से भिन्न हो गया वो शरीर से तो भिन्न हो ही गया। शरीर से छूटो, श्वास से छूटो, तो शाश्वत का दर्शन होता है। उस दर्शन में ही उड़ान है, ऊंचाई है, उसकी ही गहराई है। बाकी न तो कोई ऊंचाइयां हैं जगत में, न कोई गहराइयां हैं जगत में। तो व्यर्थ की आपाधापी है।
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विपश्यना के लाभ
शारीरिक और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
नकारात्मकता दूर तथा व्यर्थ के विचार आना बंद हो जाते है।
मन में शांति का अनुभव होता है।
मन और मष्तिष्क के स्वस्थ रहने पर इसका सीधा असर आपके शरीर पर पड़ता है।
शरीर के सभी रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर निरोगी बनता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निरंतर ध्यान पूर्वक इसे करने से आत्म-साक्षात्कार होने लगता है तथा सिद्धियां अपने आप ही जाग्रत होने लगती है।

आज आपने जाना Vipassana Meditation Technique in Hindi. इसे करने के लिए आपको किसी अलग स्थान की जरूरत नहीं है। अपनी सुविधा के अनुसार आप इसे कही भी कर सकते है। अगर आप भी इस तनाव से भरी हुई जिंदगी से राहत पाना चाहते है तो ध्यान की इस विधि का अभ्यास जरूर करें तथा स्वस्थ शरीर और मन को प्राप्त करें।

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