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जानें मेंस्‍ट्रुअल साइकिल में क्‍यों बढ़ता है कोलेस्‍ट्रॉल



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माहवारी के समय महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल की समस्या बढ़ जाती है। कोलेस्ट्रॉल के अलावा अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। इस बारें में विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़े।


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माहवारी और कोलेस्ट्रॉल



मासिक धर्म शुरू होने से पहले महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम रहता है। मासिक धर्म के बाद पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का लेवल अधिक रहता है। महिलाओं में एस्‍ट्रोजन पाया जाता है, जो कोलेस्टेरोल के स्तर को सामान्य रखता है। हालांकि मासिक धर्म बंद होने के बाद यह स्थिति नहीं रहती है। मासिक धर्म बंद हो जाने के बाद एस्‍ट्रोजन का प्रमाण महिलाओ में कम हो जाता है। 
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जरनल ऑफ क्लीनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर खून में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करता है। अंडा बनने की प्रक्रिया के साथ ही एस्ट्रोजन का स्तर बढऩे में एचडीएल (गुड) कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है और एलडीएल (बेड) कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर गिर जाता है और जैसे ही मासिक धर्म शुरू होता है, यह न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाता है। 




कोलेस्ट्रॉल के नुकसान

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कनाडा जर्नल में प्रकाशित शोध की मानें तो जो जोड़े साल भर तक कोशिश के बाद भी प्रजनन में कामयाब नहीं होते हैं, उनके रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है।शोध में यह भी माना गया कि रक्त में अधिक कोलेस्ट्रॉल के होने से महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा अधिक प्रभावित होती हैं और उन्हें गर्भधारण में अधिक समय लगता है। जिन महिलाओं में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा ज्यादा होती है उनमें स्तन कैंसर होने का खतरा अधिक है।
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मसूढ़ों में दर्द
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मसूढ़ों के ऊतकों में ढेर सारे एस्ट्रोजन रेसेप्टर्स होते हैं, जो हार्मोन संबंधी उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया करते हैं। इसलिए मासिक धर्म के दौरान मुंह में मसूढ़ों संबंधी परेशानी हो जाती है। मासिक धर्म और उससे पहले शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल काफी ज्यादा होता है। आपको डेंटिस्ट के पास दांतों संबंधी किसी भी इलाज के लिए जाना हो, मासिक धर्म के बाद ही जाएं। तब एस्ट्रोजन का लेवल कम होता है, मसूढ़े कम संवेदनशील होते हैं।
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मसालेदार और गर्म खाद्य पदार्थ, फास्ट फूड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और ऐसे अन्य जंक फूड खाने से बचे क्‍योंकि इसमें पोषक तत्वों की कमी होती है। संतुलित और पौष्टिक आहार खाया जाना चाहिये। फल, अनाज, सब्‍जियां, मीट, दाल और डेयरी प्रोडक्‍ट जरुर खाएं।

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माहवारी और कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल के नुकसान
मसूढ़ों में दर्द

महिलाओं में एंग्‍जाइटी डिसऑर्डर की समस्‍या ज्‍यादा, ये हैं 5 कारण
एंग्जाइटी वैसे तो सुनने में सामान्य सी बेचैनी की समस्या लगती है। पर ये पल भर की बैचैनी के बारे में आप कितना जानते हैं। अगर नहीं जानते हैं तो इस स्‍लाइडशो में इससे जुड़ी सभी बातों के बारे में पढ़ें।

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महिलाओं में ज्‍यादा होता है

पुरूषों की तुलना में महिलाओं को एंग्जाइटी डिसऑर्डर की समस्या ज्यादा होती है। ये अंतर अलग अलग विकासशील और विकसित देशों और समय के हिसाब से बदल भी सकता है। आप भले ही किसी भी देश और सभ्यता से संबंध रखते हो पर शोध के मुताबिक बुजुर्गों की तुलना में 35 साल से कम वर्यु के लोगों मे एंग्जाइटी डिसऑर्डर ज्यादा देखा जाता है।
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किसी भी प्रकार की लत

ड्रग्स, शराब, तंबाकू, सिगरेट और निकोटिन आदि का ज्यादा सेवन करने से एंग्जाइटी डिसऑर्डर की समस्या बढ़ती है। ड्रग्स के अलावा किसी भी प्रकार की लत का शिकार होना (ऐसी कोई चीज़ जिसके बिना आप नहीं रह सकते), इसके कारण मानसिक व्यग्रता की आशंका बढ़ जाती है। इसमें ताश खेलने से लेकर इंटरनेट की लत भी शामिल है।

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एंग्जाइटी की समस्या ज्यादातर अन्य मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों को होती है। बाइपोलर डिसऑर्डर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और सीजोफ्रेनिया आदि के रोगियों को एंग्जाइटी डिसऑर्डर की समस्या ज्यादा होती है। यूरोप में 13 से 28% बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीजों को एंग्जाइटी की समस्या है वहीं विश्व के 12 फीसदी सीजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगो को ये दिक्कत है।

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अन्य बीमारियों से संबंध
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हृदय रोग, कैंसर, सांस की बीमारी, मधुमेह जैसी अन्य क्रोनिक स्थिति की वजह से भी लोगों में एंग्जाइटी डिसऑर्डर हो सकता है। दिल के रोगियों में 2 से 49% प्रतिशत तक एंग्जाइटी का लक्षण देखा जाता है। वहीं 10 से 50 फीसदी तक ये लक्षण कोरोनरी धमनी की बीमारी में दिखायी देता है।

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गर्भावस्था के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में एंग्जाइटी की समस्या हो जाती है। हालांकि इसका कारण मानसिक तनाव ब्लडप्रशर लो होना आदि होता है। कई महिलाओं को ये समस्या गर्भावस्था के बाद भी चलती है। सामान्यत: ये प्रसव के बाद ठीक हो जाती है।


हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं जिसे सिजेरियन के बाद नहीं करना चाहिए।


सिजेरियन
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हर महिला के लिए उसका मां बनना एक सुखद अनुभव होता है। लेकिन प्रेग्‍नेंसी के दौरान एक महिला के शरीर में कई तरह की परेशानियां होती है जिसका उन्हें काफी खास ध्यान रखना चाहिए। बच्चे पैदा करने के दो तरीके होते हैं, पहला नॉर्मल डिलीवरी और दूसरी सिजेरियन के द्वारा। कई वजहों से महिलाओं को अक्सर सिजेरियन द्वारा बच्चे को जन्म देना पड़ता है क्योंकि उनका शरीर नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार नहीं हो पाता। अगर सिजेरियन ऑपरेशन के बाद मां बनी महिला का खास ख्यास रखना पड़ता है। हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं जिसे सिजेरियन के बाद नहीं करना चाहिए।

पेट पर दबाव ना डालें
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जिन महिलाओं ने सिजेरियन के द्वारा बच्चे को जन्म दिया है, उन्हें यह सुझाव दिया जाता है कि वह अपने पेट पर दवाब बिल्कुल ना डाले। ऐसा करने से सुजन और धागे खुलने की नौबत आ जाती है। ऐसे में किसी भी काम को ना करें जो आपके पेट पर दवाब डाल रहा हो।

एक्‍सरसाइज करने से बचें
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अगर आपने भी सिजेरियन के द्वारा अपने बच्चे को जन्म दिया है तो आपको वर्कआउट से बचना चाहिए। इसके अलावा आपको अपने पेट पर ज्यादा भार नहीं डालना चाहिए। ऐसा करने से धागो पर खिंचवा हो सकता है। यहां तक की ब्लीडिंग की समस्या भी सामने आ सकती है। इसलिए इस दौरान वर्कआउट और भारी समान कम उठाएं।

सीढि़यां ना चढ़ें
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इस समय सीढि़यां चढ़ने से बचना चाहिए। सिजेरियन के तुरंत बाद सीढि़या चढ़ने से पेट पर जोर पड़ सकता है। जिससे धागे खुलने और खींचने का डर भी बना रहता है। इसलिए इन दिनों सीढि़या चढ़ना काफी कम कर दें।

कब्‍ज से बचें
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नई मां को पोषण और पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर में हुई डिहाईड्रेशन की मात्रा कम हो जाए। इस समय कब्ज की समस्या भी सामने आती है। इसका समाधान करने के लिए पानी को पर्याप्त मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसके अलावा फाइबर युक्त खाना खाने से भी डिहाईड्रेशन को खत्म किया जा सकता है।

सेहत का रखें ध्‍यान
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खासी और जुकाम से बचें। यह ना केवल नवजात शिशू के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाएगा बल्कि यह आपको काफी दर्द भी देता है क्योंकि जब आप इस दौरान खांसती हैं या फिर छिकती हैं तब तब आपके जख्मों पर काफी दर्द होने लग जाता है। ऐसे में जरूरी यही है कि आप इस बीमारी से बचें और अपनी सेहत का बेहतर ध्यान रखें।

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इन 5 ग्रुमिंग टिप्‍स से महिलाएं दिखेंगी बोल्‍ड और व्‍यूटीफुल
प्रोफेशनल दुनिया में पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी खुद की इमेज सुधारना उतना ही महत्वपूर्ण है। आप कैसे दिखती हैं, किस तरह से बात करती हैं, क्या बात करती हैं। ये सारी बातें प्रोफेशनल दुनिया में महत्व रखती हैं। हम आपको 5 ऐसे ग्रुमिंग टिप्‍स के बारे में बता रहे हैं, जिससे महिलाएं बोल्‍ड और व्‍यूटीफुल दिखेंगी।


पहनावा

आपके पोशाक का चुनाव भी व्यावसायिक होना चाहिए। सही पोशाक और कम से कम ज्वेलरी इस्तेमाल करें। आपकी घडी और पर्स भी ज्यादा बड़े और भड़कीले न हो। सादे दिखनेवाले ब्रेसलेट, अंगूठी और पर्स का इस्तेमाल करें। ऐसे ड्रेस का चुनाव करें जो आप पर जंचे।
स्किन केयर

स्किन केयर टिप्स, त्वचा की देखभाल भी जरुरी होती है। काफी महिलाओं को नरम और मुलायम त्वचा की चाहत होती है। बाहर जाते समय सनस्क्रीन का प्रयोग करें। सही मात्रा में पानी पियें जिससे आपके शरीर में नमी बनी रहे। सही समय तक सोना और व्यायाम करना आपकी त्वचा को स्वस्थ दिखने में मदद करता है।
मेकअप

औरतों के लिए ब्यूटी टिप्स, मेकअप भी हल्का रखें। बिना मेकअप के रहना अव्यावसायिक माना जाता है। ज्यादा भड़कीले लिपस्टिक न लगाएं और जो लगाएं उसे कम लगाएं जिससे होंठ साफ़ करने पर या पानी पिने पर लिपस्टिक के निशान गिलास पर न दिखें।

पर्सनल केयर

अनचाहे बालों को हटाना जरुरी होता है। हात, पैर और काँखों से बाल हटायें। होठों के ऊपर से बाल हटायें और आपकी भौहों के बालों को सही आकार में रखें।

रहें फिट

व्यायाम से आपको अच्छे दिखने में मदद होती है। आपके मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। व्यायाम करने से आपका शरीर का गठन मजबूत रहता है।





सावधान! पीसीओएस के खतरे को बढ़ाते हैं ये 5 फूड
क्‍या आप जानते हैं कि कुछ विशिष्‍ट फूड के सेवन से भी हार्मोन्स से संबंधित समस्या यानी पीसीओएस हो सकता है, अगर विश्‍वास नहीं हो रहा तो आइए जानें।

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पीसीओएस के खतरे को बढ़ाते हैं ये फूड

पीसीओएस (पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) हार्मोन्स से संबंधित समस्या है, जो आपके अंडाशयों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है। और आजकल की अधिकांश लड़कियों को उनकी प्रजनन उम्र के दौरान होता है। मोटापे को इस बीमारी की बहुत बड़ी वजह माना जाता है क्‍योंकि अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा का बढ़ना ओवरी में सिस्ट बनाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है और अत्‍यधिक वसायुक्त आहार, एक्‍सरसाइज की कमी और अनियमित जीवनशैली के कारण मोटापा बढ़ता है। इस स्‍लाइड शो में कुछ विशिष्ट फूड की सूची दी गयी है जिनके सेवन से पीसीओएस हो सकता है।


रेड मीट

रेट मीट यानी मटन में सैचुरेटेड फैट्स होते हैं जो एस्‍ट्रोजन के स्‍तर को बढ़ाते हैं जिससे वजन बढ़ने और पीसीओएस होने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रोसेस्ड फूड

शरीर में सूजन बढ़ना पीसीओएस होने का यह एक मुख्य कारण है। और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद केमिकल्स, प्रिजर्वेटिव और एडिटिव चीजों के कारण शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ता है, जिसके कारण शरीर में सूजन बढ़ती है।


सफेद चीनी

सफेद चीनी की अधिक मात्रा का सेवन करने से शरीर में इन्सुलिन का स्तर बढ़ जाता है और इससे पीसीओएस होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अपने आहार में सफेद चीनी का इस्‍तेमाल कम से कम करने की कोशिश करें।


कैफीन

अति किसी भी चीज की बुरी होती है यहीं बात अल्‍कोहल पर भी लागू होती है। अधिक मात्रा में कॉफी के सेवन से पीसीओएस की संभावना बढ़ जाती है। कॉफी में मौजूद कैफीन एस्‍ट्रोजन के स्‍तर को बढ़ाता है जो पीरियड्स के साथ-साथ महिलाओं की प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करता है।

अल्कोहल

अल्कोहल का अधिक मात्रा में सेवन करने से हार्मोन्स में असंतुलन आने लगता है और इससे शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। इससे महिलाओं में पीसीओएस की संभावना बढ़ जाती है।


रोजाना करें इन 5 फूड्स का सेवन, पीरियड्स होंगे नॉर्मल
आज हम आपको ऐसे कुछ फूड्स के बारे में बताएंगे, जिनको खाने से पीरियड्स से जुड़ी हर तरह की परेशानी दूर होगी और आपके पीरियड्स नॉर्मल होंगे।

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पीरियड्स नॉर्मल करने वाले फूड्स

बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान के कारण अक्‍सर महिलाओं को पीरियड्स से जुड़ी समस्‍याएं होने लगती है। अनियमित पीरियड्स में महिला के पीरियड्स एक या दो महीने में केवल एक बार या एक महीने में दो-तीन बार होने लगते हैं। इस समस्‍या से भविष्‍य में कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍या हो सकती है। लेकिन महिलाएं अक्‍सर अनियमित पीरियड्स को अनदेखा कर देती है। लेकिन इस समस्‍या से बचने के उपाय करने चाहिए। और हो सके तो प्राकृतिक इलाज ही करवाना चाहिये। आज हम आपको ऐसे कुछ फूड्स के बारे में बताएंगे, जिनको खाने से पीरियड्स से जुड़ी हर तरह की परेशानी दूर होगी और आपके पीरियड्स नॉर्मल होंगे। 
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अजवाइन

अजवाइन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स पेल्विक एरिया के ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ाते है। पीरियड्स नॉर्मल करने के लिए थोड़ी सी अजवाइन को कुछ समय के लिए पानी में भिगोकर रख दें। अब इसके पानी को पी लें।

पपीता

पपीते में मौजूद पेपन नामक तत्‍व एस्ट्रोजन हॉर्मोन लेवल को बढ़ाते है, जिससे पीरियड्स नॉर्मल हो जाते है। इसलिए रोजाना पपीता खाएं या फिर इसके शेक बना कर पीएं। या कुछ महीनों के लिए नियमित रूप से कच्‍चे पपीते के रस का सेवन करें। लेकिन इस उपाय को पीरियड्स के दौरान न करें।





अदरक

अदरक की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है साथ ही पीरियड्स नॉर्मल हो जाते है। यह पीरियड्स को बढ़ावा देने वाले वाला और पीरियड्स में देरी या अल्‍प समय की समस्‍या को दूर करने के लिए बहुत अच्‍छा होता है। इसलिए अदरक को शहद के साथ खाएं। या 
आधा कप में थोड़ी सी अदरक मिलाकर 5-7 मिनट के लिए उबाल लें। फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाये। भोजन के बाद इसका मिश्रण का दिन में तीन बार सेवन करें।

कद्दू के बीज

कद्दू के बीज में मौजूद जिंक टेस्टेस्टेरॉन हॉर्मोन लेवल को बढ़ाते है, जिससे पीरियड्स नियमित हो जाते है। इसलिए रोजाना दिन में 3 बार कद्दू के बीज का आधा चम्मच खाएं।

काले तिल

काले तिल तासीर काफी गर्म होती है, जो पोल्विक एरिया में ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाने का काम करती है। रोजाना सुबह 1 चम्मच काले तिल खाएं। 
हार्मोंन संतुलन में मदद करके तिल के बीज पीरियड्स को विनियमित करने में बहुत उपयोगी होते हैं। लिगनेन से भरपूर होने के कारण यह अधिक हार्मोंन को बांधने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें आवश्‍यक फैटी भी होते हैं जो हार्मोन के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। 
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